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बाथरूम की उस थका देने वाली लेकिन यादगार मस्ती के बाद, दोनों के शरीरों में अब और ऊर्जा नहीं बची थी। शावर की फुहारों ने उनकी बाहरी थकान तो मिटा दी थी, लेकिन भीतर से वे दोनों पूरी तरह निढाल हो चुके थे।

जैसे ही वे बाथरूम से बाहर निकले, भूख का अहसास तेज़ हो गया। अंजलि ने जल्दी से किचन में जाकर हल्का-फुल्का लंच तैयार किया।

डाइनिंग टेबल पर दोनों ने ज़्यादा बातें नहीं कीं। बस एक-दूसरे को देख-देखकर मुस्कुराते रहे। अंजलि के चेहरे पर अब भी वह ‘नूर’ था जो बाथरूम के उस ‘ओरल’ सेशन के बाद आया था। आर्यन बस अपनी माँ के हाथों के खाने का स्वाद ले रहा था, मानो वह उस तृप्ति को और गहरा कर रहा हो।

खाना खत्म होते ही दोनों बेडरूम की ओर बढ़े। AC की ठंडी हवा और कमरे के अंधेरे ने उन्हें अपनी बाहों में खींच लिया। आर्यन ने अंजलि को अपनी बाहों में भरा, और अंजलि ने अपना सिर उसकी चौड़ी छाती पर टिका दिया। कल रात का रतजगा और आज सुबह का शावर राउंड—दोनों के जिस्मों ने हार मान ली थी। कुछ ही मिनटों में वे गहरी और सुकून भरी नींद में सो गए।

सीधे शाम के 6:30 बज चुके थे। खिड़की के परदों से छनकर आती डूबते सूरज की नारंगी रोशनी अंजलि के चेहरे पर पड़ रही थी।

अंजलि ने पहले आँखें खोलीं। उसने देखा कि आर्यन अब भी उसे कसकर पकड़े हुए सोया है। उसके चेहरे पर एक मासूमियत थी जो केवल सोने के दौरान ही दिखती थी। अंजलि ने धीरे से उसके माथे को चूमा, जिससे आर्यन की नींद टूट गई।

आर्यन ने अंगड़ाई ली और अपनी माँ को अपने करीब पाकर मुस्कुरा उठा। “शाम हो गई?” उसने भारी आवाज़ में पूछा। अंजलि ने हंसते हुए कहा, “हाँ, और देख तेरा चेहरा कितना चमक रहा है। इतनी गहरी नींद तो शायद ही कभी आई हो।”

कमरे में अब एक अलग ही शांति और अपनापन था। बाथरूम की उत्तेजना अब एक गहरे और परिपक्व प्रेम में बदल चुकी थी। दोनों फ्रेश हुए और चाय का मन बनाया। बालकनी में बैठते ही अंजलि ने आर्यन के कंधे पर सिर रखा।

“आर्यन… आज की ये शाम बहुत अलग है न?” अंजलि ने दूर क्षितिज को देखते हुए कहा। “कल तक हम सिर्फ माँ-बेटा थे, लेकिन आज हम एक-दूसरे के सबसे गहरे राज़दार बन चुके हैं।”

बालकनी में चाय की चुस्कियां और सुकून के वो पल अचानक टूट गए जब अंजलि का फोन मेज पर थरथराने लगा। स्क्रीन पर ‘Husband’ नाम चमक रहा था। अंजलि और आर्यन की निगाहें एक साथ फोन पर गईं। एक पल के लिए कमरे में सन्नाटा छा गया।

अंजलि ने आर्यन की ओर देखा, उसकी आँखों में थोड़ी झिझक थी। उसने फोन उठाया और लाउडस्पीकर ऑन कर दिया ताकि आर्यन भी सुन सके।

फोन के दूसरी तरफ से आर्यन के पापा की आवाज़ आई, जो काफी रोमांटिक मूड में लग रहे थे। “अंजलि, आज यहाँ मौसम बहुत सुहाना है और मुझे तुम्हारी बहुत याद आ रही है। आज रात मैं तुम्हें ‘प्राइवेट’ कॉल करना चाहता हूँ… हम फोन पर कुछ वैसी बातें करेंगे जैसी पहले कभी नहीं कीं। मैं तुम्हें महसूस करना चाहता हूँ।”

अंजलि ने एक नज़र आर्यन पर डाली, जो अब शांत होकर अपनी माँ के चेहरे के भाव पढ़ रहा था। अंजलि ने गला साफ़ करते हुए कहा, “जी… आज रात? पर आप तो थक गए होंगे न काम से?”

“नहीं अंजलि, आज कोई बहाना नहीं। आज रात मैं तुम्हें फोन पर ‘मजे’ दिलाना चाहता हूँ और खुद भी लेना चाहता हूँ। तुम तैयार रहना, मैं रात को वीडियो कॉल भी कर सकता हूँ। मैं देखना चाहता हूँ कि तुम क्या पहनकर सोती हो।”

फोन कट गया। अंजलि ने फोन मेज पर रखा और एक लंबी सांस ली। अब माहौल पूरी तरह बदल चुका था। आर्यन, जो अभी-अभी अपनी माँ के साथ शारीरिक और मानसिक मिलन के चरम सुख से होकर आया था, उसके मन में एक अजीब सी ईर्ष्या और बेचैनी होने लगी।

“तो… पापा आज रात ‘फोन सेक्स’ करना चाहते हैं?” आर्यन ने कड़वाहट और जलन के मिले-जुले स्वर में पूछा। उसे यह बर्दाश्त नहीं हो रहा था कि उसकी माँ, जो अभी-अभी उसकी बाहों में थी, अब फोन पर किसी और (भले ही वो उसके पिता हों) के साथ वैसी बातें करेगी।

अंजलि ने आर्यन की जलन को भांप लिया। वह उठी और आर्यन के पीछे जाकर उसके कंधों को सहलाते हुए उसके कान में फुसफुसायी, “डर मत मेरे शेर। तू तो सामने है, वो तो मीलों दूर हैं। वैसे… क्या तू चाहता है कि मैं उन्हें मना कर दूँ? या फिर तू इस ‘प्राइवेट कॉल’ का हिस्सा बनना चाहेगा… एक दर्शक की तरह?”

आर्यन ने चाय का कप मेज पर पटकते हुए थोड़ा रूखे स्वर में कहा, “ठीक है माँ, आप बात कर लेना। लेकिन… मैं भी पास ही रहूँगा। मुझे भी सुनना है कि पापा आपसे क्या और कैसे बातें करते हैं… आखिर मुझे भी तो कुछ सीखना चाहिए न?”

अंजलि ने अपनी पलकें झुकाईं और फिर एक शरारती नज़र आर्यन पर डाली। वह उसके करीब आई और उसकी शर्ट का कॉलर ठीक करते हुए बोली, “सीखना चाहता है या फिर ये देखना चाहता है कि तेरी ये ‘खूबसूरत प्रोफेसर’ किसी और के काबू में कैसे आती है?”

आर्यन की सांसें थोड़ी भारी हो गईं। “जो भी समझो माँ, पर मैं रहूँगा यहीं। मैं देखना चाहता हूँ कि वो आपसे क्या करवाते हैं।”

अंजलि ने आर्यन की ठुड्डी को ऊपर उठाया। “ठीक है मेरे गुस्सैल बेटे। अगर तुझे सुनना है, तो सुन लेना। लेकिन एक शर्त है… जब वो फोन पर मुझे अपनी बातों से गरम करने की कोशिश करेंगे, तब तू बस चुपचाप देखेगा नहीं। तू मुझे वो ‘अहसास’ कराएगा जिसकी वो सिर्फ बातें करेंगे। सोच, वो फोन पर कहेंगे और तू उसे सच में अंजाम देगा… कितना मज़ा आएगा न?”

आर्यन की आँखों में एक चमक आ गई। ईर्ष्या अब एक खतरनाक रोमांच में बदल रही थी। अंजलि ने उसे रात के लिए तैयार होने को कहा।

रात के 10 बज रहे थे। अंजलि ने पापा की पसंद की एक पारदर्शी काली नाइटी निकाली। उसने आर्यन से कहा कि वह बेड के ठीक नीचे या चादर के अंदर इस तरह छिप जाए कि वीडियो कॉल में नज़र न आए, लेकिन उसका हाथ अंजलि के जिस्म तक पहुँच सके।

तभी, मेज पर रखे फोन की स्क्रीन रोशन हुई। ‘Video Call’ आ रहा था। अंजलि ने बेड पर टेक लगाई और अपनी नाइटी के ऊपर के बटन खोल दिए ताकि उसकी गहरी दरार साफ़ दिखे। उसने आर्यन को इशारा किया कि वह बेड की दूसरी तरफ नीचे दुबक जाए जहाँ से वह सब सुन सके।

फोन की स्क्रीन पर आर्यन के पापा का चेहरा था। उनके पीछे किसी होटल के कमरे की मध्यम रोशनी दिख रही थी। अंजलि बेड पर तकिए के सहारे इस तरह लेटी थी कि उसकी काली पारदर्शी नाइटी के भीतर से उसके बदन की चमक और गहरी दरार साफ़ झलक रही थी। आर्यन बेड के ठीक नीचे, अँधेरे में दुबका हुआ था, जहाँ से वह अपने पापा की आवाज़ साफ सुन सकता था।

शुरुआत में बातें एकदम सामान्य थीं, लेकिन उनमें एक ऐसी गर्माहट थी जो धीरे-धीरे बढ़ रही थी।

“और बताओ अंजलि, आज का दिन कैसा रहा? आर्यन क्या कर रहा है?” पापा ने मुस्कुराते हुए पूछा।

अंजलि ने अपनी आवाज़ को थोड़ा भारी और नशीला बनाते हुए कहा, “दिन तो बस… ठीक ही था। आर्यन तो अपने कमरे में है, शायद सो गया होगा या पढ़ रहा होगा। वह बहुत थक गया था आज।” यह कहते हुए अंजलि ने बेड से अपना एक हाथ नीचे लटकाया, जिसे आर्यन ने अँधेरे में ही थाम लिया।

पापा ने एक ठंडी सांस भरी। “यार, सच बताऊं तो यहाँ मन नहीं लग रहा। दिन भर मीटिंग्स में रहता हूँ, पर दिमाग में तुम्हारा वही चेहरा घूमता रहता है। आज सुबह से बस यही सोच रहा था कि कब रात हो और कब मैं तुम्हें इस हाल में देखूँ।”

बेड के नीचे बैठा आर्यन अपने पापा की बातें सुनकर अंदर ही अंदर सुलग रहा था। उसे जलन हो रही थी कि उसके पापा उसकी माँ को अपनी ‘जागीर’ समझकर ऐसी बातें कर रहे हैं। उसने अंजलि की हथेली को ज़ोर से दबाया, मानो अपना अधिकार जता रहा हो।

पापा की नज़रें अब अंजलि के चेहरे से फिसलकर उसकी नाइटी के खुले हुए बटनों की ओर जाने लगीं। “अंजलि, आज तुम कुछ अलग लग रही हो। आँखों में एक अजीब सी चमक है… जैसे कोई राज़ छुपा रखा हो। क्या बात है? आज पार्लर गई थी क्या?”

अंजलि ने हल्की सी शरारत भरी हंसी हंसी और तिरछी नज़रों से नीचे अँधेरे की ओर देखा जहाँ आर्यन छिपा था। “नहीं जी, पार्लर तो नहीं गई… बस आज कुछ ‘खास’ महसूस कर रही हूँ। आपकी बहुत याद आ रही है न, शायद इसलिए।”

आर्यन ने जब सुना कि उसकी माँ उसे ‘खास’ कह रही है (भले ही पापा को लग रहा था कि बात उनकी हो रही है), तो उसका गुस्सा धीरे-धीरे रोमांच में बदलने लगा।

वीडियो कॉल की स्क्रीन पर आर्यन के पापा के चेहरे के भाव अब बदलने लगे थे। उनकी आवाज़ में वह अधिकार और भारीपन आने लगा था जो एक मर्द में अपनी पत्नी को रिझाने के दौरान आता है। बेड के नीचे बैठा आर्यन एक-एक शब्द को महसूस कर रहा था, और उसका हाथ अब भी अंजलि की लटकती हुई उंगलियों को कसकर थामे हुए था।

पापा ने अपने चश्मे को मेज पर रखा और मोबाइल को थोड़ा और करीब ले आए ताकि अंजलि के बदन का एक-एक हिस्सा साफ़ देख सकें।

“अंजलि… तुम्हें पता है, आज रात मैंने खास तौर पर अपना सारा काम जल्दी खत्म कर लिया,” पापा ने धीमी और गहरी आवाज़ में कहना शुरू किया। “यहाँ खिड़की के बाहर चाँद दिख रहा है, और मुझे याद आ रहा है कि पिछली बार जब हम साथ थे, तो तुमने वह नीली साड़ी पहनी थी। पर आज… आज इस काली नाइटी में तुम उस चाँद से भी ज़्यादा हसीन लग रही हो।”

अंजलि ने तकिए पर अपना सिर थोड़ा और पीछे झुकाया, जिससे उसकी गर्दन की सुराहीदार सुडौलता और नाइटी के भीतर दबे उसके भारी स्तनों का उभार और भी साफ़ दिखने लगा। “अच्छा जी? बस हसीन? और कुछ नहीं?” उसने अपनी आवाज़ को जानबूझकर थोड़ा कांपता हुआ बनाया।

पापा ने एक लंबी सांस ली। “नहीं, हसीन तो बहुत छोटा लफ्ज़ है। मेरा मन कर रहा है कि मैं अभी उड़कर वहाँ आ जाऊं और तुम्हारे उन बिखरे हुए बालों को अपने हाथों से समेटूँ। अंजलि, क्या तुम भी वही महसूस कर रही हो जो मैं कर रहा हूँ? मेरा हाथ अभी कहाँ होना चाहिए, तुम्हें अंदाज़ा है न?”

बेड के नीचे आर्यन के दांत भिंच गए। पापा की बातें उसके कानों में पिघले हुए सीसे की तरह गिर रही थीं। उसे जलन हो रही थी कि पापा दूर बैठकर उसकी माँ को अपनी बातों से ‘गीला’ करने की कोशिश कर रहे थे।

आर्यन ने अंजलि का हाथ छोड़ दिया और धीरे से अपना हाथ ऊपर बढ़ाकर अंजलि के घुटने को छुआ। अंजलि का पूरा बदन बिजली के झटके की तरह सिहर उठा। पापा को लगा कि उनकी बातों का असर हो रहा है, जबकि असलियत में वह स्पर्श आर्यन का था।

“जी… मैं… मैं महसूस कर पा रही हूँ,” अंजलि ने हकलाते हुए कहा, जबकि उसकी आँखें नीचे अँधेरे की ओर थीं जहाँ आर्यन का हाथ धीरे-धीरे उसकी नाइटी के किनारे को ऊपर सरका रहा था।

रात का सन्नाटा अब आर्यन की भारी होती सांसों और पापा की मदहोश बातों से भारी होने लगा था। अंजलि के बदन पर चढ़ी वह काली पारदर्शी नाइटी शावर के बाद की नमी और अब बढ़ती उत्तेजना की गर्मी से उसके जिस्म पर चिपकने लगी थी।

पापा ने अब अपनी बातों की धार तेज़ कर दी थी। वह फोन की स्क्रीन के इतने करीब आ गए थे कि अंजलि को उनकी आँखों में अपनी भूख साफ़ नज़र आ रही थी।

“अंजलि… अपनी नाइटी के उन ऊपर के बटनों को देखो,” पापा ने भारी आवाज़ में कहा। “वो अब भी बंद क्यों हैं? मैं चाहता हूँ कि तुम उन्हें एक-एक करके खोलो… मैं देखना चाहता हूँ कि मेरी अमानत आज कितनी बेताब है।”

बेड के नीचे अंधेरे में दुबके आर्यन से अब और रहा नहीं गया। उसने पापा की आवाज़ सुनी और उसे अपनी हार जैसा महसूस हुआ। उसने धीरे से अपना हाथ ऊपर बढ़ाया और अंजलि की नाइटी के घेरे के अंदर हाथ डाल दिया। उसकी उंगलियां अंजलि की रेशमी और गर्म जांघों पर रेंगने लगीं।

अंजलि का शरीर कांप उठा। एक तरफ पापा का डिजिटल आदेश था और दूसरी तरफ आर्यन का वह असली, गर्म स्पर्श। उसने कांपते हाथों से अपनी नाइटी का एक बटन खोला। “जी… देखिये… मैंने… मैंने खोल दिया,” अंजलि ने हकलाते हुए कहा। उसकी आवाज़ में जो थरथराहट थी, पापा को लगा वह उनके शब्दों का जादू है, लेकिन वह तो आर्यन की उंगलियों का कमाल था जो अब अंजलि की पैंटी के इलास्टिक तक पहुँच चुकी थीं।

पापा ने स्क्रीन पर देखा और मदहोश हो गए। “वाह अंजलि! तुम्हारे वो उभरते हुए कंधे और वो चमक… अब अपना हाथ नीचे ले जाओ… वहीं जहाँ तुम्हें सबसे ज्यादा ज़रूरत महसूस हो रही है।”

अंजलि ने एक गहरी सांस ली। उसने अपना हाथ नीचे ले जाने का नाटक किया, लेकिन असल में उसने आर्यन का हाथ अपनी पैंटी के ऊपर रख दिया। आर्यन ने अपनी हथेली से अंजलि के उस सबसे नाज़ुक हिस्से को जोर से भींच लिया। अंजलि के मुँह से एक लंबी सिसकारी निकली, “आह्ह्ह… जी… मैं… मैं खुद को रोक नहीं पा रही…”

पापा स्क्रीन पर अपनी पत्नी को इस कदर उत्तेजित होते देख पागल हो रहे थे। उन्हें लग रहा था कि अंजलि खुद को सहला रही है, जबकि हकीकत में उनका बेटा, उनकी नज़रों के ठीक सामने (लेकिन कैमरे से ओझल), अपनी माँ के शरीर के साथ होली खेल रहा था।

रात की खामोशी में पापा की आवाज़ अब किसी सम्मोहन की तरह गूँज रही थी, और बेड के नीचे आर्यन का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका था। कमरे में सिर्फ फोन से आती पापा की उत्तेजित आवाज़ और अंजलि की भारी सांसें थीं।

पापा की आवाज़ अब और भी ज्यादा गहरी और अधिकारपूर्ण हो गई थी। “अंजलि, बहुत हो गई बातें… अब मुझे वो दिखाओ जिसके लिए मैं कल से तड़प रहा हूँ। अपनी नाइटी को अपनी कमर तक उठाओ… मुझे देखना है कि तुमने आज अंदर क्या पहना है।”

जैसे ही पापा ने यह कहा, आर्यन ने अँधेरे का फायदा उठाया। वह धीरे से रेंगकर बेड के किनारे पर आया, जहाँ अंजलि की टांगें लटक रही थीं। कैमरे का एंगल ऐसा था कि केवल अंजलि का ऊपर का बदन और उसकी कमर तक का हिस्सा दिख रहा था। आर्यन ने अपना चेहरा अंजलि की नग्न जांघों के पास सटा दिया।

अंजलि ने कांपते हाथों से अपनी नाइटी के घेरे को पकड़ा और उसे धीरे-धीरे ऊपर उठाना शुरू किया। “जी… देखिये… आपकी पसंद की ही पहनी है,” उसने कैमरे की ओर देखते हुए कहा। जैसे ही नाइटी ऊपर उठी, पापा को स्क्रीन पर अंजलि की काली लेस वाली पैंटी और उसकी मखमली त्वचा दिखी। लेकिन उन्हें यह नहीं दिख रहा था कि ठीक उसी वक्त आर्यन ने अपनी जीभ अंजलि की जांघ के अंदरूनी हिस्से पर फिरा दी थी।

आर्यन के गीले और गर्म स्पर्श ने अंजलि के भीतर बिजली दौड़ा दी। उसके हाथ कांपने लगे और मोबाइल उसके हाथ से छूटते-छूटते बचा। “आह्ह… जी… बहुत… बहुत गर्मी लग रही है आज,” अंजलि ने अपनी आँखें मूंदते हुए कहा। उसकी आवाज़ में जो असली ‘तड़प’ थी, पापा उसे अपनी बातों का असर समझकर और भी ज्यादा जोश में आ गए।

पापा ने स्क्रीन पर अपनी पत्नी को इस तरह मचलते देखा तो बोले, “अंजलि, अपना हाथ उस पैंटी के अंदर डालो… मैं देखना चाहता हूँ कि तुम मेरे लिए कितनी गीली हो चुकी हो।”

अंजलि ने नीचे की ओर देखा, जहाँ आर्यन अब अपनी उंगलियों से उसकी पैंटी के किनारे को हटाकर उसके ‘मर्म’ तक पहुँचने की कोशिश कर रहा था। अंजलि ने अपनी एक उंगली अपने होंठों पर रखी और फिर उसे नीचे ले जाने का नाटक किया, जबकि हकीकत में वह आर्यन की उंगलियों को रास्ता दे रही थी।

रात की उस रहस्यमयी खामोशी में अब उत्तेजना अपने चरम पर पहुँच रही थी। पापा की आवाज़ में अब वह बेताबी थी जो हज़ारों मील की दूरी को मिटा देना चाहती थी, जबकि बेड के किनारे पर आर्यन का वजूद अंजलि के लिए उस दूरी को हकीकत के सुख में बदल रहा था।

पापा ने अब अपना अंतिम दांव खेला। “अंजलि, अब बहुत हुआ… अपनी पैंटी को एक तरफ सरकाओ और अपनी उंगलियों से वो जादू करो जो तुम हमेशा मेरे सामने करती हो। मुझे वो आवाज़ सुननी है जो तुम चरम पर पहुँचते वक्त निकालती हो।”

जैसे ही पापा ने ‘पैंटी सरकाने’ की बात की, आर्यन ने बिना देर किए अंजलि की काली लेस वाली पैंटी के एक किनारे को अपनी उंगलियों से फँसाया और उसे धीरे से एक तरफ खींच दिया। अंजलि का वह सबसे निजी हिस्सा अब पूरी तरह से नग्न और आर्यन के मुँह के ठीक सामने था। कैमरे का एंगल अभी भी केवल अंजलि के चेहरे और उसके उठते-गिरते भारी स्तनों पर था।

अंजलि ने अपना हाथ नीचे ले जाने का नाटक किया जैसा पापा ने कहा था, लेकिन असल में उसने अपना हाथ आर्यन के बालों में फँसा दिया। आर्यन ने अपनी गर्म और गीली ज़ुबान को सीधे अंजलि के उस रसीले केंद्र पर टिका दिया। जैसे ही वह पहली छुअन हुई, अंजलि की रीढ़ की हड्डी में बिजली का करंट दौड़ गया। “ओह्ह… जी… आह! मैं… मैं कर रही हूँ… देखिए,” उसने कैमरे की ओर देखते हुए अपनी आँखें पूरी तरह मूँद लीं।

पापा स्क्रीन पर देख रहे थे कि अंजलि का चेहरा सुख से विकृत हो रहा है, उसकी सांसें उखड़ रही हैं और वह बेड की चादर को अपने दूसरे हाथ से मरोड़ रही है। उन्हें लग रहा था कि अंजलि की अपनी उंगलियां यह कमाल कर रही हैं, जबकि हकीकत में उनका बेटा वहाँ अपना मुँह और ज़ुबान चला रहा था।

“हाँ अंजलि! ऐसे ही… तेज़… और तेज़! बताओ मुझे, कैसा महसूस हो रहा है?” पापा की आवाज़ अब हाँफने लगी थी।

अंजलि अब दोहरी दुनिया में थी। उसके कान पापा की ‘गंदी बातों’ को सुन रहे थे, लेकिन उसका पूरा शरीर आर्यन के उस जादुई और मखमली स्पर्श का गुलाम हो चुका था। उसने अपनी कमर को थोड़ा और ऊपर उठाया ताकि आर्यन और गहराई से अपना काम कर सके। “जी… बहुत… बहुत ज्यादा… आह! ऐसा लग रहा है जैसे… जैसे सब कुछ… उफ़्फ़!” अंजलि के मुँह से निकलने वाली सिसकारियां अब किसी संगीत की तरह पापा के फोन में गूँज रही थीं।

रात की उस खामोशी में अब लोक-लाज और शर्म की सारी दीवारें ढह चुकी थीं। पापा की आवाज़ अब किसी प्यासे भेड़िये की तरह लग रही थी, और अंजलि ने भी अब अपनी ज़ुबान की लगाम ढीली छोड़ दी थी।

पापा ने अपनी पैंट की जिप खोलने की आवाज़ सुनाई और हाँफते हुए बोले, “अंजलि, अपनी चूत को इतना मसल कि उसका पानी तेरी उंगलियों से बहने लगे। मुझे बता, क्या तू इस वक्त मेरी मोटी लाठी के लिए तड़प रही है? क्या तेरा मन कर रहा है कि मैं उसे तेरी गहराई में उतार दूँ?”

अंजलि ने अपनी आँखें नशीली कीं और आर्यन के बालों को ज़ोर से खींचते हुए फोन में फुसफुसायी, “हाँ जी… मेरी चूत बहुत बुरी तरह गीली हो गई है। ऐसा लग रहा है जैसे कोई गर्म सलाख इसके अंदर घुसने के लिए बेताब है। मैं अपनी उंगलियां डाल रही हूँ पर मुझे तो आपका वो मोटा मुसल चाहिए जो मुझे फाड़ कर रख दे।”

जब आर्यन ने अपनी माँ के मुँह से ऐसे गंदे शब्द सुने, तो उसका जोश सातवें आसमान पर पहुँच गया। उसने अपनी ज़ुबान को अंजलि के दाने पर और भी ज़ोर से रगड़ना शुरू किया।

“अंजलि, ज़ोर से बोल… बोल कि तू एक रंडी की तरह मेरी गर्मी चाहती है। बोल कि तुझे आज रात कोई भी मर्द मिले, तू उससे अपनी प्यास बुझा लेगी।”

अंजलि अब पूरी तरह बेकाबू थी। आर्यन के मुँह का सुख और पापा की गंदी बातें—दोनों ने उसे पागल कर दिया था। उसने चीखते हुए कहा, “हाँ… मैं इस वक्त आपकी रंडी बनी हुई हूँ! मेरी चूत पानी छोड़ रही है… आह! कोई मुझे ज़ोर से चोदे… मुझे रगड़ दो! जी, मैं बहुत गंदी हो गई हूँ… मुझे और गंदी बातें सुनाओ!”

पापा स्क्रीन पर अपनी पत्नी का यह रूप देखकर पागलों की तरह खुद को सहला रहे थे। उन्हें लग रहा था कि वे अंजलि को रिमोट कंट्रोल से चला रहे हैं, जबकि आर्यन नीचे से अंजलि की नाइटी के अंदर अपना पूरा चेहरा घुसाए हुए उसके रस का आनंद ले रहा था।

अंजलि का शरीर अब झटके लेने लगा था। उसने फोन को तकिए पर पटक दिया ताकि उसका चेहरा न दिखे, सिर्फ उसकी सिसकारियां सुनाई दें। “जी… मैं… मैं बस झड़ने वाली हूँ… आह! आपकी ये रंडी अब और बर्दाश्त नहीं कर सकती!”

अंजलि के शरीर में अब करंट जैसा दौड़ने लगा था। आर्यन की जीभ की रफ़्तार और उसके पापा के गंदे शब्दों ने उसे उस मोड़ पर ला दिया था जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं थी।

अंजलि ने अपने दोनों हाथों से चादर को मुट्ठियों में भींच लिया। उसका शरीर धनुष की तरह ऊपर को उठा और एक लंबी, मदहोश कर देने वाली चीख उसके गले से निकली।

“आह्ह्ह्ह… जी… मैं गई… उफ़्फ़… मैं… मैं झड़ रही हूँ!” अंजलि का पूरा जिस्म झटके लेने लगा। उसकी योनि से रस का जो सैलाब निकला, उसने आर्यन के पूरे चेहरे को भिगो दिया। वह अगले कुछ सेकंड तक बस थरथराती रही, उसकी आँखें ऊपर की ओर चढ़ गई थीं।

अंजलि तो होश खो बैठी थी, लेकिन आर्यन इस खेल को खत्म नहीं करना चाहता था। उसने चालाकी से फोन को तकिए के पास इस तरह टिकाया कि पापा को सिर्फ अंजलि का चेहरा और उसके भारी स्तनों का ऊपरी हिस्सा दिखता रहे, लेकिन कॉल कट न हो। वह चाहता था कि पापा अपनी पत्नी की उस ‘हार’ को अपनी आँखों से देखें, जिसका असली विजेता कोई और था।

स्क्रीन पर पापा अंजलि को इस तरह निढाल और हांफते हुए देख पागल हो रहे थे। “वाह अंजलि! क्या बात है… तू तो सच में मेरी रंडी निकली। देख कैसे बेसुध पड़ी है।” पापा अभी भी फोन के दूसरी तरफ खुद को सहला रहे थे। उन्हें लग रहा था कि अंजलि की ये हालत उनकी बातों की वजह से हुई है।

आर्यन अभी भी अंजलि की जांघों के बीच था। उसने अपनी जीभ से अपनी माँ के उस बहते हुए ‘अमृत’ को साफ़ करना शुरू किया। वह एक हाथ से अंजलि के पेट को सहला रहा था, और उसका दूसरा हाथ अंजलि के हाथ के पास था। पापा को कैमरे में सिर्फ अंजलि की कांपती हुई उंगलियां दिख रही थीं, जिन्हें आर्यन धीरे-धीरे सहला रहा था।

“जी… मैं… मैं बिल्कुल खाली हो गई हूँ,” अंजलि ने बेहद कमजोर और नशीली आवाज़ में कहा। उसकी आँखों में अब भी वही चमक थी जो सिर्फ आर्यन देख सकता था।

आर्यन ने अँधेरे में ही मुस्कुराते हुए अंजलि की ओर देखा, मानो कह रहा हो—”पापा को जो सुख बातों से मिला, वो मुझे हकीकत में मिला है।”

रात के सन्नाटे में पापा की आवाज़ अब और भी ज़्यादा गहरी हो गई थी। अंजलि अभी अपनी चरम सीमा से गुज़रकर संभल ही रही थी कि पापा ने एक ऐसी फरमाइश कर दी जिसने कमरे के तापमान को एक बार फिर बढ़ा दिया।

पापा ने फोन की स्क्रीन पर मुस्कुराते हुए कहा, “अंजलि, वो सब तो ठीक है… लेकिन मुझे याद आ रहा है कि पिछली एनिवर्सरी पर मैंने तुम्हें एक ‘खास’ तोहफ़ा दिया था। याद है? जरा उसे निकाल कर लाओ, मैं तुम्हें उसका इस्तेमाल करते हुए देखना चाहता हूँ।”

अंजलि का चेहरा एकदम से लाल हो गया। उसने नीचे अंधेरे में आर्यन की ओर देखा, जो पापा की बात सुनकर चौंक गया था। “जी… वो… वो अभी? पर मैं तो बहुत थक गई हूँ, और उसकी क्या ज़रूरत है…” अंजलि ने टालने की कोशिश की।

“नहीं अंजलि, मुझे कोई बहाना नहीं चाहिए। मैंने वो इसीलिए दिया था ताकि जब मैं पास न रहूँ, तो तुम मेरी कमी महसूस न करो। जाओ, उसे लेकर आओ वरना मैं नाराज़ हो जाऊँगा।”

आर्यन बेड के नीचे से सब सुन रहा था। उसके दिमाग में हलचल मच गई—आखिर ऐसा क्या गिफ्ट है? अंजलि को मजबूरन उठना पड़ा। वह उठी, अलमारी के पास गई और एक दराज के पीछे से एक छोटा सा मखमली बैग निकाला।

जब अंजलि वापस बेड पर आई और उसने उस बैग से वो चीज़ निकाली, तो आर्यन की आँखें फटी की फटी रह गईं। वह ५ इंच का एक गुलाबी रंग का ‘डिल्डो’ था, जो बिल्कुल असली जैसा दिख रहा था।

अंजलि ने उसे हाथ में पकड़ा और कैमरे के सामने दिखाया। “जी… ले आई। खुश?” अंजलि की आवाज़ में शर्म थी, क्योंकि उसे पता था कि उसका जवान बेटा पास ही मौजूद है और यह सब देख-सुन रहा है।

“हाँ! अब इसके साथ वही करो जो मैं अपनी आँखों से देखना चाहता हूँ। इसे अपनी चूत के मुहाने पर रखो और धीरे-धीरे अंदर उतारो।”

आर्यन के लिए यह एक अजीब स्थिति थी। एक तरफ उसके पिता फोन पर उसकी माँ को एक नकली औज़ार के साथ मज़े करते देखना चाहते थे, जबकि दूसरी तरफ आर्यन का अपना ७ इंची असली अंग पूरी तरह से तैयार खड़ा था। आर्यन को उस ५ इंच के खिलौने को देखकर एक अजीब सी प्रतिस्पर्धा महसूस होने लगी।

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