बाथरूम की उस भाप भरी गर्मी और शावर के गिरते पानी ने अंजलि के भीतर बरसों से दबी उस ज्वाला को भड़का दिया था जिसे अब बुझाना उसके बस में नहीं था। वह आर्यन की गोदी में बैठी, उसकी जीभ का रस पी रही थी, लेकिन उसके शरीर का निचला हिस्सा एक ऐसी तड़प से गुज़र रहा था जो किसी भी तर्क या रिश्ते की सीमा को लांघने के लिए तैयार था।
अंजलि उस वक्त होश और हवास के उस पार थी जहाँ सिर्फ ‘जुनून’ का राज होता है। किस की उस गहराई में डूबे हुए ही उसने अपना एक हाथ नीचे अपनी जाँघों के बीच सरकाया। उसने अपनी भीगी हुई काली पैंटी के किनारे को पकड़ा और उसे एक तरफ सरका दिया।
आर्यन का वह 7 इंच लंबा और कलाई जैसा मोटा अंग पहले से ही अंजलि की गर्मी महसूस कर रहा था। अंजलि ने अपनी कमर थोड़ी ऊपर उठाई और फिर एक झटके में उस ‘प्यास’ को बुझाने के लिए नीचे बैठ गई।
अंजलि उस जुनून में यह पूरी तरह भूल गई थी कि उसके बेटे का अंग कितना विशाल और शक्तिशाली है। जैसे ही वह ७ इंची अंग अंजलि के उस कोमल और तंग रास्ते के अंदर धँसा, अंजलि का पूरा शरीर कमान की तरह तन गया।
वह अहसास इतना तीव्र, इतना गहरा और इतना ‘भर देने वाला’ था कि अंजलि की बर्दाश्त जवाब दे गई। उसके हलक से एक तेज़ और तीखी चीख निकली, जिसने उस गहरे किस को बीच में ही तोड़ दिया। वह चीख बाथरूम की टाइल्स से टकराकर गूँज उठी।
अंजलि का मुँह खुला का खुला रह गया और उसकी आँखें फटी रह गईं। वह भारी अंग उसकी गहराई के आखिरी सिरे तक पहुँच चुका था। उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे उसके भीतर बिजली का कोई तार टूट गया हो।
आर्यन भी सन्न रह गया। उसे अपनी माँ के भीतर से आती हुई वह अद्भुत गर्माहट और वह ‘तंग’ पकड़ महसूस हो रही थी जिसने उसके अंग को चारों तरफ से जकड़ लिया था। दोनों के बीच अब कोई कपड़ा, कोई पर्दा और कोई मर्यादा बाकी नहीं थी।
शावर का पानी उन दोनों के जुड़े हुए शरीरों पर गिर रहा था। अंजलि के हाथ आर्यन के कंधों पर जम गए थे और उसके नाखून आर्यन की खाल में धँस रहे थे। वह दर्द में नहीं, बल्कि उस ‘अकल्पनीय भराव’ के सुख में कांप रही थी।
“आह… आर्यन… उफ्फ… यह… यह तो… बहुत गहरा है…” अंजलि ने हाँफते हुए कहा, उसकी आवाज़ में तृप्ति और अचरज का मिश्रण था।
आर्यन ने अपनी माँ की कमर को मजबूती से थाम लिया। उसे अहसास हुआ कि आज उसने न केवल अपनी माँ को आज़ाद किया है, बल्कि उसे वह ‘पूर्णता’ दी है जिसकी वह हकदार थी।
शावर से गिरते पानी की रिमझिम और बाथरूम में फैली भाप के बीच समय जैसे ठहर गया था। अंजलि के उस ७ इंची अंग पर बैठने के बाद जो चीख निकली थी, उसने माहौल में एक अजीब सी खामोशी भर दी थी—ऐसी खामोशी जिसमें सिर्फ उन दोनों की धड़कनें सुनाई दे रही थीं।
आर्यन पूरी तरह सुन्न था। वह इस अहसास के लिए नया था; उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसे अपनी कमर हिलानी चाहिए या बस अंजलि को थामे रखना चाहिए। उसे अपनी माँ की आँखों में आंसू और चेहरे पर दर्द की लकीरें दिख रही थीं, लेकिन उन लकीरों के पीछे एक छिपी हुई ‘तड़प’ भी थी।
अंजलि ने देखा कि आर्यन हिचकिचा रहा है, तो उसने कांपते हाथों से फिर से आर्यन का चेहरा पकड़ा और उसके होंठों को चूमते हुए फुसफुसाया, “रुकना मत आर्यन… चाहे कितना भी दर्द हो, आज रुकना मत। मुझे इस पूर्णता की ज़रूरत है… मुझे इस ‘भारीपन’ को अपने अंदर महसूस करने दे।”
अंजलि ने अपनी कमर को धीरे से ऊपर उठाया और फिर उस ७ इंची विशालता पर नीचे की ओर दबाव दिया। जैसे-जैसे वह ऊपर-नीचे हो रही थी, उसे महसूस हो रहा था कि आर्यन का वह ‘कलाई जैसा मोटा’ अंग उसके शरीर के एक-एक रेशे को फैला रहा है।
उस तीव्र उत्तेजना और भराव के कारण अंजलि का अपने शरीर पर काबू नहीं रहा। उसने अपनी उंगलियों को आर्यन की मज़बूत पीठ पर टिकाया और उसके नाखून आर्यन की त्वचा में गहरे धँसते चले गए। आर्यन को अपनी पीठ पर उन नाखूनों की चुभन महसूस हो रही थी, लेकिन वह दर्द उसे एक अजीब सा पुरुषोचित गर्व और नशा दे रहा था।
शावर का पानी अंजलि के भारी और भीगे स्तनों के बीच से होता हुआ उनके जुड़ाव के बिंदु पर गिर रहा था। हर बार जब अंजलि नीचे बैठती, आर्यन का अंग उसकी गहराई की उस दीवार से टकराता जिसे आज तक किसी ने नहीं छुआ था। आर्यन के लिए भी यह ‘प्रवेश’ का अहसास किसी दिव्य सुख जैसा था; उसे अपनी माँ के भीतर की वह तंग और रेशमी गर्मी पागल कर रही थी।
बाथरूम की दीवारें उनकी भारी सांसों और अंजलि की सिसकारियों से गूँज रही थीं।
“आह… आर्यन… तू… तू कितना विशाल है… उफ्फ… मुझे लग रहा है जैसे मैं फट जाऊंगी… पर इसे बाहर मत निकालना…” अंजलि की आवाज़ अब पूरी तरह भर्रा गई थी। वह मदहोशी में अपना सिर पीछे की ओर झुका लेती, जिससे उसके काले और भीगे बाल आर्यन के घुटनों पर बिखर जाते।
आर्यन ने अब अपनी माँ की पतली कमर को अपने दोनों हाथों से मज़बूती से पकड़ लिया था और अंजलि की ऊपर-नीचे होने वाली लय में अपना साथ देना शुरू किया। हर धचके के साथ अंजलि के भारी उभार हवा में लहराते और फिर आर्यन के सीने से टकराते।
शावर से गिरते पानी की आवाज़ और अंजलि की सिसकारियां अब एक लय में मिल चुकी थीं। आर्यन, जो अब तक केवल एक दर्शक की तरह इस सुख को महसूस कर रहा था, उसके भीतर का सोया हुआ ‘मर्द’ अब पूरी तरह जाग चुका था। उसने महसूस किया कि अंजलि की कमर उसके हाथों में कितनी नाजुक और मखमली है, और कैसे उसकी माँ का पूरा वजूद उसके 7 इंची अंग के इर्द-गिर्द सिमट गया है।
आर्यन ने अब नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया। उसने अंजलि के होंठों से अपना चुंबन तोड़ा और उसकी आँखों में झाँका, जो नशे और तृप्ति से पूरी तरह धुंधली हो चुकी थीं। उसने बहुत ही कोमलता लेकिन मज़बूती से अंजलि को अपनी गोदी से उठाया और बाथरूम के उस भीगे हुए फर्श पर धीरे से लिटा दिया।
अंजलि फर्श पर लेटी थी, उसके भीगे हुए काले बाल पानी में तैर रहे थे और उसकी सिर्फ काली पैंटी (जो अब एक तरफ थी) उसके गोरे बदन पर बिजली की तरह चमक रही थी। आर्यन उसके ऊपर आया और अपने घुटनों के बल बैठकर वापस उसी ‘स्वर्ग’ के द्वार पर पहुँचा। जैसे ही उसने धीरे से फिर से प्रवेश किया, अंजलि ने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं और एक लंबी ‘आह’ भरी।
आर्यन अब कोई जल्दबाज़ी नहीं कर रहा था। वह बहुत ही धीरे-धीरे अपनी कमर चला रहा था। हर बार जब उसका अंग पूरा अंदर जाता, अंजलि का पूरा शरीर फर्श से थोड़ा ऊपर उठ जाता। वह अहसास इतना गहरा था कि अंजलि को अपनी कोख तक उस भारीपन की गूँज सुनाई दे रही थी।
इस मिलन के दौरान आर्यन फिर से नीचे झुका और अंजलि के होंठों को अपने कब्ज़े में ले लिया। यह किस अब पहले से कहीं ज़्यादा भावुक थी। अंजलि ने अपनी टाँगें आर्यन की कमर के चारों ओर कस लीं, ताकि वह उसे और भी गहराई तक खींच सके।
बाथरूम का शावर अब उन दोनों के ऊपर एक चादर की तरह गिर रहा था। फर्श पर पानी की एक पतली परत जम गई थी, जिस पर अंजलि का बदन हर धचके के साथ हल्का सा फिसल रहा था।
“आर्यन… तू… तू मुझे मार डालेगा… उफ़… इतना सुकून… इतना दर्द… सब एक साथ…” अंजलि ने किस के बीच ही फुसफुसाया। उसके नाखून अब भी आर्यन की पीठ को सहला रहे थे, पर अब उनमें वो तड़प नहीं, बल्कि एक अजीब सा सुकून था।
आर्यन को महसूस हो रहा था कि अंजलि का शरीर अंदर से कितना गर्म और मखमली है। वह अपनी माँ की हर सिसकारी पर अपनी रफ़्तार को थोड़ा और सलीके से नियंत्रित कर रहा था, जैसे वह इस पल को सदियों तक खींच लेना चाहता हो। इतवार की वह सुबह अब उन दोनों के लिए पवित्र हो चुकी थी।
बाथरूम की दीवारों पर पानी की बूंदें तेज़ी से टकरा रही थीं, लेकिन उससे भी तेज़ आवाज़ अब अंजलि के शरीर और आर्यन के जिस्म के मिलन की आ रही थी। आर्यन, जो अब तक धीमे और गहरे प्रहार कर रहा था, उसने अब अपनी लय बदल दी थी। उसके भीतर का जवान खून और पहली मर्दानगी का जोश अब पूरी तरह उफान पर था।
आर्यन ने अब अपनी कमर की रफ्तार को तेज़ी से बढ़ाना शुरू किया। तेज… और तेज़… और भी तेज़! फर्श पर पानी की छप-छप और अंजलि की सिसकारियां अब एक शोर में बदल चुकी थीं।
अंजलि के लिए यह रफ्तार अब असहनीय होती जा रही थी। आर्यन का वह ७ इंच का अंग अब एक गर्म रॉड की तरह उसके भीतर बार-बार टकरा रहा था। उसे लग रहा था जैसे उसका पूरा वजूद इस झंझावात में बिखर जाएगा। वह अपना सिर दाएं-बाएं पटक रही थी, उसकी आँखें उलट गई थीं और मुँह से बेतहाशा ‘आह-आह’ की आवाज़ें निकल रही थीं।
इस तूफानी मिलन के बीच, अंजलि ने अपने हाथ नीचे ले जाकर आर्यन के मज़बूत और कड़क कूल्हों को अपने हाथों में भर लिया। वह उन मांसल हिस्सों को महसूस कर रही थी जो हर प्रहार के साथ पत्थर की तरह सख्त हो रहे थे। उसने अपनी उंगलियां उनमें धँसा दीं, जैसे वह आर्यन को और भी गहराई तक अपने अंदर खींच लेना चाहती हो।
अंजलि का शरीर अब कांपने लगा था। उसके अंदर की दीवारें आर्यन के अंग को बुरी तरह जकड़ रही थीं। अचानक, उसका शरीर कमान की तरह तन गया, उसकी उंगलियां आर्यन के कूल्हों पर कस गईं और एक लंबी, रूहानी चीख के साथ अंजलि चरम पर पहुँच गई। उसके शरीर का एक-एक रेशा थरथरा उठा और वह पूरी तरह से ‘झड़’ गई।
आर्यन भी अब उस मुकाम पर था जहाँ से लौटना मुमकिन नहीं था। अंजलि के भीतर होने वाली उस थरथराहट ने उसके 7 इंची अंग को जैसे निचोड़ना शुरू कर दिया था।
शावर की गिरती धार के नीचे, अंजलि निढाल होकर फर्श पर फैल गई, लेकिन आर्यन के प्रहार अभी भी थमे नहीं थे। वह अपनी माँ को उस सुख के आखिरी सिरे तक ले जाना चाहता था।
शावर के नीचे बाथरूम का वह कोना अब एक ऐसी दुनिया बन चुका था जहाँ समय, समाज और मर्यादा के सारे बंधन पानी के साथ बहकर नाली में जा चुके थे। फर्श पर पानी की एक पतली चादर बिछी थी, जिस पर अंजलि का गोरा और सुडौल बदन आर्यन के हर धक्के के साथ हल्का सा फिसल रहा था।
अंजलि एक बार पूरी तरह से तृप्त होकर ‘झड़’ चुकी थी। उसका शरीर पसीने और शावर के पानी से लथपथ होकर ढीला पड़ गया था, लेकिन आर्यन का जोश अभी थमा नहीं था। उसके लिए यह नशा बिल्कुल नया और अनछुआ था। उसके भीतर की मर्दानगी जैसे सदियों की प्यास बुझा रही थी। वह बिना रुके, बिना थके, एक मशीन की तरह अपनी कमर चला रहा था।
आर्यन के धक्के अब पहले से कहीं ज़्यादा गहरे और मज़बूत थे। उसका ७ इंच का अंग हर बार अंजलि की गहराई के उस आखिरी छोर को छू रहा था जहाँ तक आज तक कोई एहसास नहीं पहुँचा था। अंजलि जो पहले निढाल हो चुकी थी, अब आर्यन की इस अथक ऊर्जा को देखकर फिर से उत्तेजना के समंदर में डूबने लगी। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसका बेटा इतना सामर्थ्यवान और शक्तिशाली है।
अंजलि की आँखें फिर से बंद होने लगीं। उसे लग रहा था जैसे वह किसी ऊँचे पहाड़ से बार-बार नीचे गिर रही है और हर गिरवाट उसे एक नए सुख से भर रही है। फर्श की ठंडक और आर्यन के जिस्म की तपिश ने एक ऐसा विरोधाभास पैदा किया था जो अंजलि के दिमाग को सुन्न कर रहा था। वह आर्यन के चौड़े कंधों पर अपने पैर टिका चुकी थी ताकि वह उन धक्कों की गहराई को और ज़्यादा महसूस कर सके।
शावर का गुनगुना पानी जब उनके जुड़े हुए अंगों पर गिर रहा था, तो एक अजीब सी मादक आवाज़ पूरे बाथरूम में गूँज रही थी। अंजलि को महसूस हुआ कि उसका शरीर एक बार फिर से उसी कगार पर पहुँच रहा है। उसके भीतर की मांसपेशियां आर्यन के अंग को फिर से जकड़ने लगी थीं। “आह… आर्यन… तू… तू क्या कर रहा है… रुकना मत… उफ़्फ़… मैं… मैं फिर से… आह!”
आर्यन के प्रहारों में अब एक अजीब सी सादगी और क्रूरता का मेल था। वह अपनी माँ के उन भारी उभारों को अपने हाथों से भींच रहा था, जिससे अंजलि के मुँह से सिसकारियों की जगह अब मधुर चीखें निकलने लगी थीं।
अंजलि की सांसें उखड़ने लगी थीं। उसे अपनी रीढ़ की हड्डी में एक ज़ोरदार कंपन महसूस होने लगा। पहली बार झड़ने के बाद जो संवेदनशीलता बढ़ गई थी, उसने इस दूसरी बार के आनंद को दस गुना ज़्यादा बढ़ा दिया था। वह आर्यन के कूल्हों को अपने हाथों से थामे हुए खुद को उन धक्कों के हवाले कर चुकी थी। अंजलि का पूरा बदन पसीने और पानी की बूंदों से चमक रहा था, और उसकी आँखें नशे में पूरी तरह पलट गई थीं।
वह दूसरी बार उस स्वर्ग के दरवाज़े पर थी। आर्यन की रफ़्तार अब अपनी चरम सीमा पर पहुँच गई थी। हर धक्के के साथ अंजलि का शरीर फर्श से उछल रहा था। “आर्यन… हाँ… वही… उफ़्फ़… मेरा बच्चा… तू… तू मुझे पागल कर देगा!”
बाथरूम की दीवारों पर गिरते शावर का शोर अब उन दोनों की गहरी और उखड़ी हुई सांसों में मिल चुका था। आर्यन के प्रहार अब अपनी चरम सीमा पर थे और अंजलि का शरीर दूसरी बार उस सुख के सैलाब में बहने के लिए पूरी तरह तैयार था।
आर्यन ने अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए आखिरी के कुछ तेज़ और गहरे धक्के मारे। अंजलि का शरीर एक बार फिर कमान की तरह तन गया, उसने अपनी टाँगों से आर्यन की कमर को बुरी तरह जकड़ लिया। एक लंबी और रूहानी चीख अंजलि के गले से निकली और ठीक उसी पल, आर्यन के भीतर का बाँध भी टूट गया।
दोनों एक साथ चरम पर पहुँचे। अंजलि दूसरी बार उस मीठे दर्द और सुख के समंदर में डूब गई, और आर्यन ने अपनी पहली असली मर्दानगी का सारा गर्म सैलाब अपनी माँ की गहराइयों में उतार दिया। वह सुख इतना तीव्र था कि दोनों के शरीर कुछ पलों के लिए पूरी तरह सुन्न पड़ गए।
शावर चलता रहा, पर वे दोनों करीब 10 मिनट तक उसी भीगे हुए फर्श पर एक-दूसरे में सिमटे हुए पड़े रहे। न कोई शब्द था, न कोई हलचल; बस एक-दूसरे की धड़कनों का शोर था। वह 7 इंची अंग अब शांत होकर अपनी जगह पर स्थिर था, जैसे उसने अपना युद्ध जीत लिया हो।
अंजलि धीरे से उठी, उसकी आँखों में तृप्ति की एक ऐसी चमक थी जो उसने पहले कभी महसूस नहीं की थी। उसने आर्यन को खींचकर एक बार फिर अपने भीगे और गर्म सीने से लगा लिया।
“मुझे तुझ पर गर्व है आर्यन… तूने आज मुझे एक स्त्री होने का असली मतलब समझा दिया,” अंजलि ने उसके माथे को चूमते हुए गर्व से कहा। दोनों के चेहरों पर एक अटूट मुस्कान थी।
समय का पता ही नहीं चला; बाथरूम की उस मस्ती और मिलन में रात के 2 बज चुके थे। शावर बंद हुआ और दोनों ने तौलिए से एक-दूसरे के जिस्म को बहुत ही प्यार से पोंछा। जब वे वापस बेडरूम में आए, तो हवा में अभी भी वही मादकता घुली हुई थी।
अंजलि ने अपनी अलमारी से एक ताज़ा काली लेस वाली पैंटी निकाली और उसे पहन लिया, ऊपर से उसने कुछ नहीं पहना—उसके भारी और गर्व से भरे उभार अब भी खुले थे। वहीं आर्यन ने भी सिर्फ एक सफेद अंडरवियर पहनी।
दोनों बिस्तर पर लेटे। आर्यन ने अपनी माँ के कंधे पर अपना सिर रखा और अंजलि ने अपना हाथ उसके बालों में फेरना शुरू किया। आज की यह रात उनके जीवन की सबसे यादगार और सुकून भरी रात थी। अब कोई झिझक नहीं थी, कोई पर्दा नहीं था; बस दो रूहें थीं जो एक-दूसरे को पा चुकी थीं।
बाहर सन्नाटा था, पर कमरे के भीतर उस ‘संडे’ की शुरुआत एक ऐसे अहसास के साथ हुई थी जिसने मां-बेटे के रिश्ते को एक नए और ऊँचे धरातल पर पहुँचा दिया था।
बेडरूम के उस शांत सन्नाटे में, जहाँ केवल घड़ी की टिक-टिक और उन दोनों की मिली-जुली सांसें सुनाई दे रही थीं, आर्यन और अंजलि एक-दूसरे की बाहों में लिपटे हुए थे। आर्यन का सिर अंजलि के मुलायम और भारी कंधे पर टिका था, और अंजलि की उंगलियां आर्यन के गीले बालों में बहुत ही ममता और अधिकार के साथ घूम रही थीं।
शावर के उस तूफानी मिलन के बाद अब वक्त था उन भावनाओं को शब्दों में पिरोने का।
आर्यन ने धीरे से अपना सिर उठाया और अपनी माँ की उन मदहोश आँखों में झाँका, जिनमें अभी भी उस चरम सुख की लाली बाकी थी। उसने बहुत ही मासूमियत और थोड़ी सी हिचकिचाहट के साथ पूछा:
“माँ… सच बताना, आपको कैसा लगा? क्या… क्या मैंने सही किया? कहीं मैंने आपको तकलीफ तो नहीं दी?”
अंजलि के चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान खिंच गई जो किसी विजेता के चेहरे पर होती है। उसने आर्यन के गाल को अपनी हथेलियों में भरा और उसकी आँखों में बड़े ही नाज़ के साथ देखते हुए कहा:
“आर्यन… तूने आज जो किया, उसे ‘सही’ कहना बहुत छोटा शब्द होगा। तूने आज मुझे वो अहसास कराया है जिसके लिए एक औरत का शरीर और उसकी रूह ताउम्र तरसती है। तेरे उस ७ इंच के ‘प्रहार’ ने मेरे भीतर के उस सन्नाटे को भर दिया है जो बरसों से खाली था।”
अंजलि ने अपनी आवाज़ में एक नशा भरते हुए आगे कहा, “मुझे आज खुद पर और अपनी परवरिश पर नाज़ हो रहा है। मैंने एक ऐसे शेर को जन्म दिया है, जिसकी मर्दानगी के सामने आज मैं एक मोम की तरह पिघल गई। तूने मुझे कोई तकलीफ नहीं दी मेरे बच्चे… तूने तो मुझे आज ‘मुक्त’ कर दिया। तेरे उन धक्कों में जो ताकत थी, वो ये बता रही थी कि तू अब पूरी तरह से एक सामर्थ्यवान मर्द बन चुका है।”
उसने आर्यन को और करीब खींचते हुए उसके माथे को चूमा। “इतने सालों में पहली बार मुझे महसूस हुआ कि ‘पूर्णता’ क्या होती है। तेरा वो कड़कपन, तेरी वो कलाई जैसी मोटाई… उफ़! जब तू मेरे अंदर था, तो मुझे लगा जैसे मैं किसी दूसरी ही दुनिया में हूँ। आज के बाद तू सिर्फ मेरा बेटा नहीं है… तू मेरा रक्षक, मेरा हमसफर और मेरी हर दबी हुई इच्छा का मालिक है।”
आर्यन ने जब अपनी माँ के मुँह से अपनी मर्दानगी की इतनी बड़ी तारीफ सुनी, तो उसका सीना गर्व से चौड़ा हो गया। उसे अहसास हुआ कि उसने अपनी माँ को वो सुख दिया है जो दुनिया की कोई भी दौलत नहीं दे सकती थी।
रात के २:३० बज रहे थे, और अंजलि का हाथ अब धीरे-धीरे आर्यन की अंडरवियर के ऊपर से उसकी जाँघों को सहला रहा था। वह नज़ारा बड़ा ही अद्भुत था—एक माँ अपने बेटे की मर्दानगी पर गौरव कर रही थी और एक बेटा अपनी माँ के समर्पण पर निहाल था।
अंजलि की रेशमी उंगलियां जब आर्यन की अंडरवियर के ऊपर से उसकी जाँघों के पास रेंग रही थीं, तो आर्यन के पूरे शरीर में एक सुखद सिहरन दौड़ रही थी। अपनी माँ की प्रशंसा सुनकर उसका आत्मविश्वास अब सातवें आसमान पर था। वह अब उस संकोची बालक से ऊपर उठकर एक जिज्ञासु पुरुष की तरह महसूस कर रहा था।
आर्यन ने करवट ली और अपना हाथ अंजलि की पतली कमर पर रखते हुए उसे और भी करीब खींच लिया। अंजलि के भारी और नग्न स्तन अब आर्यन के सीने से फिर से चिपक गए थे। आर्यन ने बहुत ही गंभीरता और चाहत के साथ अंजलि की आँखों में देखकर कहा:
“माँ… अगर मेरी इस ताकत ने आपको इतना सुकून दिया है, तो मैं इसे और बेहतर बनाना चाहता हूँ। मुझे इसके बारे में और भी सीखना है… हर वो बात जो आपको और ज़्यादा सुख दे सके। मुझे नहीं पता था कि एक स्पर्श या एक अहसास इतना गहरा हो सकता है। क्या आप मुझे सिखाएंगी कि एक असली मर्द अपनी औरत को पूरी तरह संतुष्ट कैसे करता है?”
अंजलि यह सुनकर थोड़ी हैरान हुई, लेकिन फिर उसकी आँखों में एक शरारती और गहरी चमक आ गई। उसने आर्यन के निचले होंठ को अपनी उंगली से हल्का सा दबाया और मुस्कुराते हुए बोली:
“मेरे भोले आर्यन… तूने आज जो किया वो कुदरती था, लेकिन ‘प्यार की कला’ (Art of Love) बहुत गहरी होती है। एक औरत के शरीर में हज़ारों ऐसी जगहें होती हैं जहाँ सिर्फ छूने भर से वो पिघल सकती है। और तेरा यह 7 इंच का हथियार… इसे चलाने के कई तरीके हैं जो तुझे अभी सीखने बाकी हैं।”
उसने धीरे से अपना हाथ आर्यन की अंडरवियर के अंदर डाल दिया और उस अभी-अभी शांत हुए अंग को फिर से सहलाने लगी। “मैं तुझे सब सिखाऊंगी। मैं तुझे बताऊंगी कि कब धीमा होना है, कब तूफ़ान लाना है, और कैसे अपनी ज़ुबान और हाथों का जादू चलाना है। तू मेरा इकलौता ‘शिष्य’ होगा और मैं तेरी इकलौती ‘गुरु’।”
अंजलि ने अपना पैर आर्यन की जाँघों के बीच फँसा लिया। “अभी तो हमने सिर्फ शुरुआत की है। ये रविवार की रात बहुत लंबी है। क्या तू तैयार है अपनी माँ से वो सब सीखने के लिए जो दुनिया की किसी किताब में नहीं लिखा?”
आर्यन ने बिना कुछ कहे अंजलि के गले में अपनी बाहें डाल दीं। उसकी जिज्ञासा अब एक नई प्यास बन चुकी थी। वह अपनी माँ के शरीर के एक-एक हिस्से को समझना चाहता था, उसे पूजना चाहता था।
बिस्तर की चादरें उनकी हलचल से फिर से सुकड़ने लगी थीं। रात के 3 बजने को थे, लेकिन उन दोनों के लिए जैसे अभी शाम ही हुई थी।