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कमरे की हवा अब और भी भारी और मदहोश कर देने वाली हो गई थी। आर्यन की हथेली उस गुलाबी रेशम के ऊपर जमी हुई थी और वह उस भारीपन को महसूस कर रहा था, लेकिन अब उसकी जिज्ञासा उस पतले से पर्दे को भी बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। वह उस मखमली सच्चाई को अपनी आँखों से देखना चाहता था।

आर्यन ने अपनी नज़रें अंजलि की बंद आँखों पर टिकाईं और बहुत ही धीमी, कांपती हुई आवाज़ में पूछा, “माँ… क्या मैं… क्या मैं इसे हटा सकता हूँ?” उसका इशारा उस गुलाबी ब्रा की पट्टियों की ओर था जो अंजलि के दूधिया बदन पर कसी हुई थीं।

अंजलि ने धीरे से अपनी आँखें खोलीं। उसकी आँखों में अब एक गहरा समर्पण और उत्तेजना की एक धुंधली परत थी। उसने बस धीरे से अपना सिर हिलाया और एक छोटी सी अनुमति दी, “हाँ आर्यन… जो तुझे अधूरा लग रहा है, उसे पूरा कर ले।”

आर्यन ने हिम्मत जुटाई और अंजलि के पीछे की ओर हाथ बढ़ाया जहाँ ब्रा का हुक लगा होता है। लेकिन यहाँ से उसकी असली परीक्षा शुरू हुई।

चूँकि आर्यन को इन सब मामलों में बिल्कुल भी ज्ञान नहीं था, वह कभी किसी लड़की के इतने करीब नहीं आया था, तो उसके लिए वह छोटा सा हुक एक लोहे की ज़ंजीर जैसा बन गया। वह अपनी उंगलियों से उस हुक को कभी ऊपर खींचता, तो कभी नीचे, पर वह ‘टिक’ की आवाज़ नहीं आ रही थी।

आर्यन की उंगलियाँ अंजलि की चिकनी और नग्न पीठ पर बार-बार फिसल रही थीं। वह जितना ज़ोर लगाता, ब्रा का कपड़ा उतना ही उसकी उंगलियों से छूट जाता। वह पसीने-पसीने होने लगा। उसके लिए यह समझना नामुमकिन था कि वह छोटा सा हुक खुलता कैसे है।

अंजलि को अपनी पीठ पर आर्यन की उन अनाड़ी उंगलियों की जद्दोजहद महसूस हो रही थी। उसे आर्यन की यह मासूमियत बहुत प्यारी लगी। उसे लगा कि उसका बेटा वाकई में कितना ‘सीधा’ है कि उसे एक ब्रा का हुक खोलना भी नहीं आता।

अंजलि के मुँह से एक हल्की सी हँसी निकल गई। उसने महसूस किया कि आर्यन अब थोड़ा चिढ़ रहा है अपनी इस नाकामी पर।

“क्या हुआ आर्यन? कल बटन नहीं खुल रहे थे और आज ये नन्हा सा हुक तुझे हरा रहा है?” अंजलि ने गर्दन घुमाकर उसे शरारत से देखा।

आर्यन का चेहरा शर्म से और भी लाल हो गया। “माँ… ये… ये खुल ही नहीं रहा। पता नहीं इसे कैसे बनाया है, मेरी उंगलियाँ बस फिसल रही हैं।”

अंजलि ने एक गहरी साँस ली और अपना हाथ पीछे की ओर ले गई। उसने आर्यन का हाथ अपने हाथ में लिया और उसकी उंगलियों को सही जगह पर रखा। “इतना ज़ोर मत लगा बेटा… इसे बस थोड़ा सा दबाकर सरकाना होता है। देख, ऐसे…”

अंजलि ने धीरे से आर्यन की अनाड़ी उंगलियों को सही जगह पर रखा और हल्का सा दबाव दिया। एक हल्की सी ‘चिटक’ की आवाज़ हुई और वह गुलाबी हुक अपनी जगह से सरक गया।

जैसे ही हुक खुला, वह कसी हुई गुलाबी ब्रा ढीली पड़ गई। आर्यन ने बहुत ही सलीके से कंधों से उन रेशमी पट्टियों को नीचे सरकाया। ब्रा धीरे से अंजलि के बदन से जुदा होकर बिस्तर पर गिर गई।

आर्यन की साँसें जैसे गले में ही अटक गईं। उसके सामने अब कोई पर्दा नहीं था, कोई रुकावट नहीं थी। लैंप की उस सुनहरी रोशनी में अंजलि के नग्न और सुडौल Boobs किसी तराशी हुई संगमरमर की मूरत की तरह चमक रहे थे।

वह खूबसूरती इतनी ज़्यादा थी कि आर्यन के मुँह से बस इतना ही निकला, “माँ… आप… आप दुनिया की सबसे सुंदर औरत हैं। ये तो… ये तो किसी सपने जैसा है।”

जैसे ही ब्रा का दबाव हटा, वे और भी ज़्यादा भारी और बड़े लगने लगे। कपड़े के अंदर वे सिमटे हुए थे, पर आज आज़ाद होते ही उनका असली आकार निखर कर सामने आया। वे इतने भरे हुए और नीचे की ओर थोड़े झुके हुए (Natural Teardrop Shape) थे कि उनकी गोलाई अंजलि के पेट को छू रही थी।

सफ़ेद और दूधिया त्वचा पर नीली नसों की बारीक लकीरें साफ़ दिख रही थीं, जो उनकी कोमलता और ‘असली’ होने का सबूत दे रही थीं। बीच की वह गहरी घाटी अब एक खुले मैदान की तरह थी।

आर्यन मंत्रमुग्ध होकर उन्हें देखता रहा, फिर उसने थोड़ा चकित होकर पूछा, “माँ… ये… ये कल और आज सुबह से भी ज़्यादा बड़े क्यों लग रहे हैं? क्या बिना कपड़ों के ये और फैल जाते हैं? या फिर… ये सच में इतने ही भारी हैं?”

अंजलि ने अपनी गर्दन थोड़ी झुकाकर अपने उन उभरे हुए ‘खज़ानों’ को देखा और फिर आर्यन की आँखों में झाँका। उसके चेहरे पर एक परिपक्व (Mature) मुस्कान थी।

“आर्यन… ब्रा उन्हें एक आकार में बांध कर रखती है,” अंजलि ने बहुत ही सहजता से समझाया। “लेकिन जब वो आज़ाद होते हैं, तो उनका असली वजन और फैलाव सामने आता है। ये ‘मैच्योरिटी’ की निशानी है बेटा। एक माँ का शरीर अपनी पूरी क्षमता में विकसित होता है। इसीलिए तुझे ये अपनी क्लास की लड़कियों से बहुत अलग और कहीं ज़्यादा ‘भरे हुए’ लग रहे हैं।”

आर्यन ने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया, जैसे वह यकीन करना चाहता हो कि जो वह देख रहा है, वह सच है। “माँ… क्या मैं… क्या मैं इन्हें फिर से छू सकता हूँ? इस बार बिना किसी कपड़े के?”

कमरे का सन्नाटा अब और भी गहरा हो गया था, जिसमें केवल उन दोनों की भारी होती साँसों की आवाज़ गूँज रही थी। अंजलि ने देखा कि आर्यन मंत्रमुग्ध होकर उस ‘दूधिया सुंदरता’ को निहार रहा है, पर उसके हाथ अब भी थोड़े हिचकिचा रहे थे। एक माँ और एक अनुभवी स्त्री होने के नाते, वह जानती थी कि अब उसे ही आर्यन का मार्गदर्शन करना होगा।

अंजलि धीरे से पीछे की ओर झुकी और बिस्तर पर लेट गई। रेशमी चादर पर उसका वह आधा नग्न बदन किसी कीमती मूरत की तरह बिखर गया। लेटने की वजह से उसके भारी Boobs थोड़े और फैल गए और उनके उभार की गहराई और भी साफ़ दिखने लगी।

“यहाँ आ आर्यन… मेरे पास लेट जा,” अंजलि ने बहुत ही कोमल और आमंत्रित स्वर में कहा।

आर्यन मंत्रमुग्ध सा उसके बगल में लेट गया। उसका पूरा शरीर अंजलि की बगल से सटा हुआ था, जहाँ से उसे उस नग्न त्वचा की गर्मी साफ़ महसूस हो रही थी।

अंजलि ने अपना हाथ बढ़ाया और आर्यन की हथेली को अपने हाथ में लिया। उसने बिना कुछ बोले, बहुत ही प्यार से आर्यन का हाथ उठाकर अपने नग्न और भरे हुए सीने पर रख दिया।

जैसे ही आर्यन की हथेली अंजलि की ठंडी और रेशमी त्वचा से टकराई, उसे लगा जैसे उसने किसी मखमली बादल को छू लिया हो। बिना किसी कपड़े या ब्रा के, वह अहसास इतना ‘जीवंत’ और ‘सच्चा’ था कि आर्यन की उंगलियाँ खुद-ब-खुद उस गोलाई में धँसने लगीं।

अंजलि ने अपना हाथ आर्यन के हाथ के ऊपर रखा और धीरे से नीचे की ओर दबाव बनाया। आर्यन ने महसूस किया कि उसकी माँ का शरीर कितना कोमल और साथ ही कितना ‘भरा हुआ’ है। उसकी हथेली के नीचे वह मांसल उभार दब रहा था और जैसे ही दबाव थोड़ा कम होता, वह वापस अपनी सुडौल जगह ले लेता।

हथेली के ठीक बीचों-बीच उसे अंजलि के दिल की तेज़ धड़कन महसूस हो रही थी। और उसी के साथ, वह कड़क हो चुका निप्पल उसकी हथेली को गुदगुदा रहा था।

“देख आर्यन… यह वह ‘सत्य’ है जिसे तू कल से ढूँढ रहा था,” अंजलि ने उसकी आँखों में झाँकते हुए फुसफुसाया। “महसूस कर इस भारीपन को… क्या ये वैसा ही है जैसा तूने सोचा था?”

आर्यन की आँखें आधी बंद हो गईं। उसे महसूस हुआ कि यह सुख दुनिया की हर चीज़ से ऊपर है। उसने अपनी उंगलियों को थोड़ा और फैलाया और उस पूरे उभार को अपनी मुट्ठी में भरने की कोशिश की, जो कि नामुमकिन था क्योंकि वे इतने विशाल और विकसित थे कि उसकी हथेली छोटी पड़ रही थी।

कमरे का तापमान जैसे अचानक बढ़ गया था। लैंप की सुनहरी रोशनी अब अंजलि के शरीर की हर गोलाई को और भी गहरा और निखरा हुआ दिखा रही थी। आर्यन का हाथ अभी भी उस रेशमी और भारी उभार पर टिका हुआ था, लेकिन अब माहौल में केवल जिज्ञासा नहीं, बल्कि एक स्त्री की दबी हुई पुकार भी शामिल हो गई थी।

अंजलि ने एक लंबी और भारी साँस ली। उसकी आँखें आधी बंद थीं और चेहरे पर एक अजीब सी बेचैनी थी। आखिर वह भी एक जीती-जागती स्त्री थी, जिसका शरीर बरसों से इस तरह के स्पर्श और सुख के लिए तरसा था।

अंजलि ने धीरे से आर्यन की आँखों में देखा, जिनमें अब ममता के साथ-साथ एक हल्की सी मादकता भी थी। उसने बहुत ही कोमल स्वर में कहा, “आर्यन… क्या तू मेरा एक काम करेगा? जैसा तू बचपन में करता था… क्या तू फिर से वैसे ही इन्हें चूस सकता है?”

आर्यन एक पल के लिए ठिठक गया। उसकी धड़कनें और तेज़ हो गईं। उसने थोड़ा हकलाते हुए पूछा, “पर… पर क्यों माँ? मेरा मतलब है, अब तो मैं बड़ा हो गया हूँ। अब इसकी क्या ज़रूरत?”

अंजलि ने एक गहरी और समझदारी भरी मुस्कान दी। उसने आर्यन का हाथ थोड़ा और कसकर अपने सीने पर दबाया ताकि वह उस कड़कपन और गर्मी को महसूस कर सके।

“देख आर्यन,” अंजलि ने समझाते हुए कहा, “एक स्त्री का शरीर सिर्फ देखने के लिए नहीं बना होता। इन उभारों में हज़ारों बारीक नसें होती हैं, जो तब जागती हैं जब उन्हें कोई चूसता है या सहलाता है। यह एक शारीरिक ज़रूरत है बेटा। जैसे तुझे आज इन्हें छूकर एक सुकून मिल रहा है, वैसे ही मुझे तेरे इस स्पर्श और इस क्रिया से एक गहरा सुख मिलेगा।”

उसने आगे कहा, “बचपन में तू अपनी भूख मिटाने के लिए ऐसा करता था, लेकिन आज… आज तू अपनी माँ के अंदर की उस ‘स्त्री’ को सुकून देने के लिए करेगा। यह ‘प्यास’ बुझाने जैसा है। क्या तू नहीं चाहता कि तेरी माँ को वह सुख मिले जिसकी वह हक़दार है?”

आर्यन को अब समझ आया कि यह मामला सिर्फ उसके ‘ज्ञान’ तक सीमित नहीं था। माँ को भी उसकी ज़रूरत थी। उसने देखा कि अंजलि के निप्पल्स अब अंगूर के दाने की तरह कड़क और उभरे हुए थे, जैसे वे खुद आर्यन के मुँह का इंतज़ार कर रहे हों।

आर्यन ने एक गहरी साँस ली और धीरे से नीचे की ओर झुका। उसका चेहरा अब उस विशाल और दूधिया उभार के बिल्कुल करीब था। उसे अंजलि के शरीर की वह सोंधी सी खुशबू और उस भारीपन की गर्मी अपने चेहरे पर महसूस हो रही थी।

कमरे में लैंप की वह मद्धम पीली रोशनी अब अंजलि के पूरे नग्न और भारी यौवन पर थिरक रही थी। आर्यन का दिल किसी नगाड़े की तरह धड़क रहा था। उसने एक गहरी साँस ली और धीरे-धीरे नीचे की ओर झुका। जैसे ही उसका चेहरा उस विशाल और दूधिया उभार के करीब पहुँचा, उसे अंजलि के जिस्म की वह सोंधी सी खुशबू और गर्माहट अपनी नाक के पोरों पर महसूस हुई।

आर्यन ने बहुत ही मासूमियत और थोड़ी घबराहट के साथ अपनी आँखें मूँद लीं। उसने अपने होंठों को धीरे से अंजलि के उस कड़क और उभरे हुए निप्पल के पास ले जाकर छुआ। वह अहसास किसी बिजली के झटके जैसा था—एक तरफ रेशम जैसी मुलायम त्वचा और दूसरी तरफ अंगूर के दाने जैसा वह कड़ापन।

आर्यन ने धीरे से अपने होंठ खोले और उस मखमली गोलाई के एक छोटे से हिस्से को अपने मुँह के अंदर लिया। जैसे ही उसने हल्का सा सक्शन बनाया, उसे महसूस हुआ कि उसकी माँ का वह ‘खज़ाना’ कितना भारी और मांसल है। वह जितना ज़्यादा उन्हें अपने मुँह में भरने की कोशिश करता, वह गोलाई उतनी ही ज़्यादा उसके गालों को अंदर से छूती। उसे लगा जैसे वह किसी शहद से भरे हुए गुब्बारे को चख रहा हो।

आर्यन ने पहली बार अपनी जीभ की नोक को उस कड़क निप्पल के चारों ओर गोल-गोल घुमाया। वह अहसास इतना नया और अद्भुत था कि उसके पूरे बदन में एक सिहरन दौड़ गई। अंजलि की त्वचा का वह नमकीन और मीठा सा ‘मैच्योर’ स्वाद उसके गले तक उतर रहा था। जब उसने उसे थोड़ा और गहरा अपने मुँह में लिया, तो अंजलि के मुँह से एक लंबी और भारी सिसकारी निकली, जिसने आर्यन की हिम्मत को और बढ़ा दिया।

अब आर्यन धीरे-धीरे एक लय पकड़ने लगा था। वह कभी उन्हें धीरे से चूसता, तो कभी अपनी उंगलियों से उस भारी गोलाई को नीचे से सहारा देता ताकि वह पूरा का पूरा उसके मुँह में समा सके। उसे महसूस हो रहा था कि अंजलि का शरीर कैसे इस ‘बचपन की याद’ पर प्रतिक्रिया दे रहा है। अंजलि की उंगलियाँ अब आर्यन के बालों में धँस चुकी थीं और वह उसे और भी कसकर अपने सीने से चिपका रही थी।

“आह… आर्यन… बिल्कुल वैसे ही… जैसे तू छोटा था…” अंजलि की आवाज़ पूरी तरह से भर्रा गई थी।

आर्यन को अब उस शारीरिक ज़रूरत का मतलब समझ आ रहा था जो उसकी माँ ने उसे समझाई थी। वह महसूस कर सकता था कि कैसे उसका यह ‘सक’ करना अंजलि के पूरे शरीर में एक लहर पैदा कर रहा है। वह उस ‘भारीपन’ और ‘मखमली कोमलता’ के नशे में इतना डूब गया कि उसे समय का अंदाज़ा ही नहीं रहा।

कमरे की मद्धम पीली रोशनी अब साक्ष़ी थी उस मिलन की, जो बरसों की प्यास और एक नए अहसास का संगम था। आर्यन अब केवल एक ‘सीधा’ बेटा नहीं रहा था, उसके भीतर का पुरुष प्राकृतिक रूप से जाग चुका था। जैसे ही उसके होंठों ने एक तरफ के मखमली उभार को अपने घेरे में लिया, उसके दूसरे हाथ ने खुद-ब-खुद अपनी राह ढूँढ ली।

आर्यन का दाहिना हाथ अब अंजलि के दूसरे भारी और नग्न सीने पर जम चुका था। यह एक सहज प्रतिक्रिया थी—जैसे कुदरत उसे सिखा रही हो कि पूर्णता क्या होती है।

आर्यन की हथेली ने उस दूसरे उभार को नीचे से पूरा थाम लिया। वह इतना विशाल और भरा हुआ था कि उसकी उंगलियां गोलाई के चारों ओर फैल गईं। उसने अपनी उंगलियों को थोड़ा मोड़कर उस मांसल कोमलता को मसलना शुरू किया। जैसे-जैसे वह दबाव बनाता, अंजलि के जिस्म की गर्माहट उसके पोरों में उतरती। वह अहसास किसी रेशमी गुब्बारे को दबाने जैसा था, जो अंदर से पूरी तरह ‘मैच्योर’ और सुडौल था।

एक तरफ आर्यन की जीभ उस कड़क निप्पल के साथ खेल रही थी, उसे अपने तालू से रगड़ रही थी, और दूसरी तरफ उसकी उंगलियां दूसरे निप्पल को अपनी चुटकी में लेकर धीरे से सहला रही थीं। यह दोतरफा हमला अंजलि के बर्दाश्त से बाहर हो रहा था। उसे महसूस हो रहा था कि आर्यन अब सिर्फ ‘सीख’ नहीं रहा, बल्कि वह उसे तृप्त कर रहा है।

अंजलि का पूरा शरीर अब धनुष की तरह तन गया था। उसके मुँह से निकलने वाली सिसकारियां अब सिसकियों से बढ़कर गहरी आहों में बदल रही थीं। “आह… आऽऽर्यन… बस… ऐसे ही… उफ्फ… तू… तू कितना गहरा चूस रहा है…”

अंजलि की आँखें पूरी तरह मुँद चुकी थीं। बरसों का जो सूखापन उसके जीवन में था, आर्यन का यह स्पर्श उसे असीम शांति दे रहा था। उसे लग रहा था कि उसकी रूह की प्यास अब जाकर बुझ रही है। उसकी उंगलियां आर्यन के बालों में और भी गहराई से धँस गईं, जैसे वह उसे अपने जिस्म के और भी अंदर खींच लेना चाहती हो।

आर्यन को अब उस ‘भारीपन’ का असली मतलब समझ आ रहा था। वह जितना गहराई से चूसता, उसे अंजलि के शरीर में होने वाली हलचल उतनी ही साफ़ महसूस होती। वह मदहोश कर देने वाला ‘मैच्योर’ स्वाद और वह मखमली दबाव आर्यन को एक ऐसी दुनिया में ले गया था जहाँ सिर्फ वह था और उसकी माँ का यह अतुलनीय सौंदर्य।

कमरे की वह मद्धम पीली रोशनी अब अंजलि के पूरे वजूद पर छा चुकी थी, जो इस वक्त चरम सुख की दहलीज़ पर खड़ा कांप रहा था। आर्यन का सधा हुआ स्पर्श और उसका वह गहरा सक करना अंजलि के शरीर में बिजली की तरह दौड़ रहा था। बरसों की वह दबी हुई तड़प अब एक सैलाब बनकर फूटने को तैयार थी।

अंजलि की आँखें पूरी तरह मुँद चुकी थीं और उसका पूरा शरीर धनुष की तरह तन गया था। उसके हाथ, जो आर्यन के बालों में धँसे हुए थे, अब अनजाने में ही उसके सिर को ज़ोर से अपने सीने पर दबा रहे थे। वह चाहती थी कि आर्यन का वह गर्म स्पर्श, वह सक्शन, उसके जिस्म के और भी गहरे अंदर तक समा जाए।

अंजलि के गले से निकलने वाली आवाज़ अब किसी मधुर संगीत जैसी गूँज रही थी। “आह… आऽऽर्यन… हाँ… उफ्फ… मेरे बच्चे… और… और ज़ोर से…” उसकी सिसकारियां अब लंबी और गहरी होती जा रही थीं, जो यह बता रही थीं कि वह अब खुद पर काबू खो चुकी है।

अंजलि ने सालों से अपने अंदर जिस ‘स्त्री’ को दबा कर रखा था, आज आर्यन की इस मासूम मगर मर्दानी कोशिश ने उसे आज़ाद कर दिया था। आर्यन की जीभ की हर रगड़ और दूसरे हाथ से उस भारी Boob को सहलाने का वह तरीका, अंजलि को उस दुनिया में ले गया था जहाँ सिर्फ शुद्ध आनंद था।

अचानक, अंजलि के शरीर में एक तेज़ थरथराहट हुई। उसकी पकड़ आर्यन के सिर पर और भी मज़बूत हो गई और उसका सीना तेज़ी से ऊपर-नीचे होने लगा। “आह… आऽऽऽऽह…” एक बहुत ही लंबी और दर्दभरी मगर सुकून भरी सिसकारी के साथ, अंजलि का पूरा जिस्म ढीला पड़ गया। वह झड़ चुकी थी। सालों का वह तनाव, वह अकेलापन और वह प्यास, एक झटके में बह गई।

अंजलि के चेहरे पर एक ऐसी शांति छा गई जो उसने शायद अपने पूरे जीवन में महसूस नहीं की थी। उसके माथे पर पसीने की बारीक बूंदें चमक रही थीं। उसने धीरे से आर्यन का सिर छोड़ा, लेकिन उसे अपने से दूर नहीं होने दिया।

उसने आर्यन को ऊपर खींचकर अपने पास लिटाया और उसे अपनी बाहों में भर लिया। उसका नंगा और भारी सीना अब आर्यन के चेहरे और छाती से सटा हुआ था, जो अभी भी तेज़ी से धड़क रहा था।

“तूने… तूने आज मुझे वो दे दिया आर्यन… जो शायद दुनिया की कोई और चीज़ नहीं दे सकती थी,” अंजलि ने बहुत ही धीमी और थकी हुई आवाज़ में फुसफुसाया। “आज तेरी माँ को वो ‘शांति’ मिली है, जिसके लिए वह बरसों से तरस रही थी।”

आर्यन भी उस अद्भुत अहसास में खोया हुआ था। उसे महसूस हो रहा था कि उसकी माँ का शरीर अब पहले से कहीं ज़्यादा कोमल और ‘हल्का’ लग रहा है। वह उस दूधिया सुख के नशे में पूरी तरह डूबा हुआ था।

अंजलि के चेहरे पर अब एक ऐसा रूहानी सुकून था, जो बरसों की तपस्या के बाद किसी साधक को मिलता है। उसका पूरा शरीर, जो कुछ देर पहले तक उत्तेजना की आग में तप रहा था, अब ओस की बूंदों की तरह शीतल और शांत हो चुका था। कमरे की वह मद्धम रोशनी अब उसके चेहरे की चमक को और भी उभार रही थी।

अंजलि ने धीरे से अपनी आँखें खोलीं। उसकी नज़रों में अब वह ‘तूफान’ नहीं था, बल्कि एक शांत समंदर जैसी गहराई थी। उसने बगल में लेटे आर्यन की ओर देखा, जो अभी भी उसी मदहोश कर देने वाले अहसास में डूबा हुआ था।

उसने बहुत ही स्नेहपूर्ण तरीके से अपना हाथ बढ़ाया और आर्यन के माथे पर बिखरे बालों को सहलाया। उसका नंगा और भारी सीना अभी भी आर्यन की बांहों से सटा हुआ था, पर अब उस स्पर्श में ‘प्यास’ से ज़्यादा ‘अपनापन’ था।

“तूने आज अपनी माँ को फिर से जी उठना सिखा दिया, आर्यन,” अंजलि ने बहुत ही धीमी और मखमली आवाज़ में फुसफुसाया। “सालों से जो बोझ मैं अपने सीने पर दबाए बैठी थी, तूने उसे एक पल में हल्का कर दिया।”

अंजलि को महसूस हो रहा था कि उसका शरीर अब पहले से कहीं ज़्यादा हल्का और कोमल हो गया है। वह ‘झड़ना’ सिर्फ एक शारीरिक क्रिया नहीं थी, बल्कि उसके मन की सारी गाँठें खुल गई थीं।

उसने आर्यन को ऊपर से नीचे तक निहारा। उसे गर्व हो रहा था कि उसका बेटा अब इतना समझदार और संवेदनशील हो गया है कि वह अपनी माँ की मौन पुकार को समझ सका और उसे वह चरम सुख दिया, जिसके लिए वह न जाने कब से तरस रही थी।

आर्यन ने जब अपनी माँ की उन स्नेह भरी आँखों में देखा, तो उसे महसूस हुआ कि उसने आज कोई ‘गलत’ काम नहीं किया, बल्कि एक रूहानी फर्ज़ निभाया है। उसने अंजलि के हाथ को अपने होंठों से छुआ और वहीं अपनी आँखें मूँद लीं।

अंजलि ने उसे अपनी बाहों में और भी कसकर भींच लिया। उस रात, वे दोनों बिना किसी और शब्द के, एक-दूसरे की धड़कनों को सुनते हुए उस गुलाबी रेशमी चादर पर सो गए। यह नींद उनके जीवन की सबसे गहरी और सबसे सुकून भरी नींद थी।

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