Reading Mode

कमरे में लैंप की वह मद्धम पीली रोशनी अब एक गवाह की तरह स्थिर थी। आर्यन की साँसों की आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही थी, जो अब घबराहट में नहीं, बल्कि एक गहरे और सधे हुए संकल्प में थी। उसने धीरे से अपने दोनों हाथ बढ़ाए। इस बार उसकी उंगलियों में वह कँपकँपी नहीं थी, बल्कि एक ऐसी प्यास थी जो बरसों से दबी हुई थी।

आर्यन ने बहुत ही कोमलता से अंजलि के कुर्ते के पहले बटन को अपनी उंगलियों के बीच पकड़ा। रेशमी कपड़े का वह अहसास और उसके ठीक नीचे छिपी हुई जिस्म की तपिश उसे अपनी पोरों पर महसूस हो रही थी। उसने अंगूठे से धीरे से दबाव बनाया और ‘टिक’ की एक हल्की सी आवाज़ के साथ पहला बटन काज से बाहर निकल आया।

जैसे ही पहला बटन खुला, अंजलि के गले के नीचे की वह गोरी और चिकनी त्वचा लैंप की रोशनी में चमक उठी। आर्यन की धड़कन एक पल के लिए रुकी, पर उसने खुद को संभाला। उसका पूरा ध्यान अब उस ‘प्रक्रिया’ पर था। उसने दूसरा बटन पकड़ा… फिर तीसरा… और फिर चौथा।

हर बटन के खुलने के साथ, वह ‘पर्दा’ धीरे-धीरे हट रहा था जिसने माँ और बेटे के बीच एक मर्यादित दूरी बना रखी थी। कुर्ते का गला अब ढीला होकर कंधों की ओर सरकने लगा था।

आर्यन ने कांपते हुए हाथों से कुर्ते के दोनों पल्लों को धीरे से पकड़कर बाहर की ओर फैलाया। जैसे ही कपड़ा हटा, उसके सामने एक ऐसा मंजर था जिसे देखकर उसका गला सूख गया।

अंजलि अब उसके सामने सिर्फ एक काली रेशमी ब्रा (Bra) में थी।

वह सफेद दूधिया बदन और उस पर वह काली ब्रा… यह विरोधाभास इतना गहरा और खूबसूरत था कि आर्यन की आँखें फटी की फटी रह गईं। ब्रा के उन प्यालों से बाहर छलकती हुई वह भारी और सुडौल गोलाई, जो हर आती-जाती साँस के साथ ऊपर-नीचे हो रही थी, आर्यन के होश उड़ाने के लिए काफी थी।

ब्रा की तंग पट्टियाँ अंजलि के कंधों की कोमल त्वचा में थोड़ा धँसी हुई थीं, जो यह बता रही थीं कि उनके अंदर छिपे हुए वे ‘खज़ाने’ कितने भारी और भरे हुए हैं। बीच में जो गहरी घाटी बन रही थी, वह किसी जादुई खाई की तरह आर्यन को अपनी ओर खींच रही थी।

अंजलि ने कोई विरोध नहीं किया। उसने अपनी गर्दन थोड़ी पीछे झुका ली और अपनी आँखें मूंद लीं। उसकी भारी होती साँसें और सीने का वह उभार-उतार आर्यन को यह बता रहा था कि वह भी इस पल को उतनी ही गहराई से जी रही है।

आर्यन का हाथ अनजाने में ही उस नग्न त्वचा की ओर बढ़ा। उसने महसूस किया कि कल की वह ‘बेहोशी’ अब एक ‘जूनून’ में बदल रही है। वह बस देखता रह गया कि कुदरत ने उसकी माँ को कितनी खूबसूरती और कितनी नज़ाकत से गढ़ा है।

कमरे में सन्नाटा इतना गहरा था कि घड़ी की टिक-टिक भी हथौड़े की तरह सुनाई दे रही थी। अंजलि ने अपनी आँखें मूंद रखी थीं, वह आर्यन के अगले स्पर्श का इंतज़ार कर रही थी। उसे लगा था कि कुर्ता हटने के बाद आर्यन अपनी जिज्ञासा को आगे बढ़ाएगा, लेकिन जब काफी देर तक शरीर पर कोई हलचल महसूस नहीं हुई, तो उसने धीरे से अपनी पलकें झपकाईं और आँखें खोल दीं।

अंजलि ने देखा कि आर्यन बिल्कुल पत्थर की मूर्ति बना बैठा है। उसकी नज़रें अंजलि की उस काली ब्रा में कसी हुई गहरी घाटी और उन उभरते हुए सीनों पर जमी थीं। उसके चेहरे पर उत्तेजना तो थी, पर साथ ही एक गहरा सोच-विचार और शायद थोड़ा सा ‘सम्मान’ भी था जो उसे आगे बढ़ने से रोक रहा था।

लैंप की रोशनी में अंजलि का आधा नग्न शरीर किसी अप्सरा जैसा लग रहा था, पर आर्यन के लिए यह सिर्फ एक ‘दृश्य’ नहीं था, यह उसकी पूरी दुनिया का आधार था।

अंजलि ने बहुत ही कोमल और धीमी आवाज़ में पूछा, “क्या हुआ आर्यन? क्या फिर से कुछ… धुंधला लग रहा है? तू रुक क्यों गया?”

आर्यन ने एक लंबी और भारी साँस ली। उसने अपनी नज़रें अंजलि की आँखों में डालीं, जिनमें ममता और स्वीकार दोनों थे।

“माँ… मैं…” आर्यन की आवाज़ थोड़ी भर्रा गई थी। “मैं बस यह देख रहा था कि आप कितनी खूबसूरत हैं। पर मुझे लगता है कि आज के लिए इतना ‘सच’ मेरे दिमाग के लिए काफी है। मैं नहीं चाहता कि मैं फिर से कल की तरह बेकाबू हो जाऊँ।”

उसने थोड़ा रुक कर, बहुत ही शालीनता से कहा, “माँ… क्या हम आगे का कल करें तो? आज मैं बस इसी अहसास को अपने अंदर समेट कर सोना चाहता हूँ।”

अंजलि एक पल के लिए ठिठकी, फिर उसके चेहरे पर एक बहुत ही गर्व भरी मुस्कान आ गई। उसने महसूस किया कि उसका बेटा अब सिर्फ अपनी प्यास नहीं बुझा रहा, बल्कि वह इस रिश्ते की गरिमा और अपनी मानसिक स्थिति को समझना सीख गया है। वह ‘जल्दबाज़ी’ के बजाय ‘गहराई’ चुन रहा था।

“ठीक है मेरे बच्चे,” अंजलि ने आगे बढ़कर उसके माथे को चूमा और अपने कुर्ते के पल्लों को वापस समेट लिया। “तूने आज बहुत बड़ी जीत हासिल की है। तूने अपनी उत्तेजना पर अपनी समझ को रखा। मुझे तुझ पर गर्व है।”

उस रात, बिना किसी और छुअन के, आर्यन अपनी माँ के उसी ‘अर्धनग्न’ और रूहानी रूप को याद करते हुए, उनके हाथ को थामे हुए एक बहुत ही सुकून भरी नींद सोया। उसे पता था कि कल रात फिर आएगी, और वह दरवाज़ा अभी खुला है।

सूरज की पहली किरण जब खिड़की के पर्दों को चीरकर कमरे में आई, तो उसने आर्यन के चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान देखी जो किसी बड़ी फतह के बाद आती है। आज की सुबह वाकई में ‘जादुई’ थी। रात को जो ठहराव आर्यन ने दिखाया था, उसने उसके मन से वह सारा बोझ उतार दिया था जो उसे ‘अपराधी’ महसूस कराता था। अब उसके अंदर सिर्फ एक गहरा सम्मान और अपनी माँ के प्रति एक अटूट आकर्षण था।

नाश्ते की टेबल पर आज माहौल किसी उत्सव जैसा था। अंजलि ने आज हल्के नीले रंग का सूट पहना था, जिसमें वह सुबह की ओस की तरह ताज़ा और खूबसूरत लग रही थी। आर्यन अपनी प्लेट में रखे पोहे को देख तो रहा था, पर उसकी नज़रें बार-बार अपनी माँ के चेहरे और उनकी गर्दन के पास आकर रुक जाती थीं, जहाँ कल रात उसने अपनी उंगलियों से उस ‘पर्दे’ को हटाया था।

“आज पोहे में नमक कम है क्या? तू बस उसे घूर रहा है,” अंजलि ने चाय का कप मेज पर रखते हुए शरारत से पूछा।

आर्यन ने नज़रें उठाईं और बहुत ही संजीदगी से बोला, “नमक तो एकदम सही है माँ… पर आज आप कुछ ज़्यादा ही खूबसूरत लग रही हैं। कल रात की उस रोशनी के बाद, आज इस धूप में आप किसी कुदरती करिश्मे जैसी लग रही हैं।”

अंजलि का चेहरा एक पल के लिए गुलाबी हो गया। उसने उम्मीद नहीं की थी कि आर्यन इतनी बेबाकी से उसकी तारीफ करेगा। “बड़ा पारखी हो गया है तू खूबसूरती का? रात की ‘क्लास’ का असर सुबह तक है?”

“असर तो ज़िंदगी भर रहेगा माँ,” आर्यन ने अपनी कुर्सी थोड़ी करीब खिसकाई। “सच कहूँ तो, कल रात जब मैंने आपको उस काली ब्रा में देखा… वह मंज़र मेरे दिमाग से निकल ही नहीं रहा। आपकी त्वचा की वह चमक और वह बनावट… मुझे यकीन ही नहीं होता कि भगवान ने किसी को इतना ‘परफेक्ट’ कैसे बनाया है। आप सिर्फ मेरी माँ नहीं हैं, आप सुंदरता की एक मिसाल हैं।”

अंजलि ने महसूस किया कि आर्यन की इन तारीफों में कोई ‘गंदा’ इरादा नहीं था, बल्कि एक कलाकार की अपनी कृति के प्रति जो सराहना होती है, वही शुद्धता थी। उसने बहुत ही प्यार से आर्यन के गाल को छुआ। “शुक्रिया मेरे बच्चे। तेरी ये नज़रें ही हैं जो मुझे फिर से जवान महसूस करा रही हैं।”

नाश्ता खत्म हुआ और आर्यन के कॉलेज जाने का वक्त हो गया। उसने अपना बैग उठाया, पर आज वह रोज़ की तरह सिर्फ ‘बाय’ कहकर नहीं निकलना चाहता था। वह उस ‘गर्माहट’ को अपने साथ ले जाना चाहता था जिसने कल रात उसे शांत किया था।

“माँ… जाने से पहले एक बार?” आर्यन ने बाहें फैलाते हुए पूछा।

अंजलि मुस्कुराई और आगे बढ़कर उसे अपने गले लगा लिया। यह हग रोज़ के हग से बहुत अलग था। यह लंबा था, गहरा था और बहुत ही ‘इमोशनल’ था। आर्यन ने अपना चेहरा अंजलि के गर्दन और बालों के बीच छिपा लिया। उसे अंजलि के शरीर से आने वाली वह सोंधी सी महक और उनके सीने की वह ‘नर्म छुअन’ महसूस हो रही थी, जिसे कल रात उसने बिना कपड़ों के देखा था।

उसने अंजलि को थोड़ा कसकर भींचा, जैसे वह उनके शरीर की हर एक धड़कन को अपने अंदर उतार लेना चाहता हो। अंजलि ने भी उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुए उसे पूरा सुकून दिया। लगभग एक मिनट तक वे उसी मुद्रा में रहे।

“अब जा… वरना प्रोफेसर तुझे क्लास से बाहर कर देगा,” अंजलि ने उसके कानों में बहुत ही कोमलता से फुसफुसाया।

आर्यन अलग हुआ, उसके चेहरे पर एक अलग ही आत्मविश्वास था। “आज पूरा दिन बस इसी ‘हग’ की याद में गुज़रेगा माँ। शाम का इंतज़ार अब और भी मुश्किल होने वाला है।”

उसने अंजलि के हाथ को चूमा और मुस्कुराते हुए घर से बाहर निकल गया। अंजलि दरवाज़े पर खड़ी उसे जाते हुए देखती रही। उसे लग रहा था कि उसका बेटा अब धीरे-धीरे एक ऐसे ‘मर्द’ में बदल रहा है जो संवेदनाओं और मर्यादाओं को साथ लेकर चलना जानता है।

शाम का वक्त था और घर में वही सुकून भरी शांति थी, लेकिन आर्यन के मन में आज सवालों का एक नया बवंडर उठ रहा था। कॉलेज से लौटने के बाद से ही वह थोड़ा गंभीर था। डिनर टेबल पर जब अंजलि ने उसे दाल-चावल परोसे, तो आर्यन ने अपनी जिज्ञासा को और दबाकर रखना ठीक नहीं समझा।

आर्यन ने चम्मच से चावल घुमाते हुए अपनी माँ की आँखों में देखा। आज उसकी नज़रों में कोई अपराधबोध नहीं था, बल्कि एक विद्यार्थी जैसी प्यास थी जो ‘सत्य’ को समझना चाहता था।

“माँ… कल रात जो मैंने देखा और जो महसूस किया, उसके बाद आज मेरा पूरा दिन एक अलग ही कशमकश में गुज़रा,” आर्यन ने बहुत ही ईमानदारी से अपनी बात शुरू की।

अंजलि ने अपना निवाला रोका और उसे गौर से सुनने लगी। “कैसी कशमकश, बेटा?”

आर्यन थोड़ा हिचकिचाया, फिर बोला, “माँ, जब से मैंने आपको कल उस काली ब्रा में और उस नग्नता के करीब देखा है… आज कॉलेज में मेरा ध्यान अनजाने में ही दूसरी लड़कियों पर भी गया। मैंने पहले कभी गौर नहीं किया था, पर आज जब मैंने उन्हें देखा, तो मुझे सब कुछ बहुत ‘अलग’ लगा। किसी के Boobs बहुत छोटे लग रहे थे, तो किसी के बहुत भारी। कपड़ों के ऊपर से कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि असली बनावट क्या है। क्या हर औरत की बनावट इतनी ही अलग होती है?”

अंजलि ने एक गहरी और समझदारी भरी मुस्कान दी। वह जानती थी कि आर्यन अब ‘तुलना’ की अवस्था में आ गया है, जो कि एक पुरुष के विकास का स्वाभाविक हिस्सा है।

“आर्यन, यह बहुत ही गहरा और सही सवाल है,” अंजलि ने समझाते हुए कहा। “जैसे हर इंसान का चेहरा अलग होता है, वैसे ही हर महिला के शरीर की बनावट, उसके सीने का आकार और उनकी कोमलता भी अलग होती है। यह सब जेनेटिक्स , उम्र और हार्मोन्स पर निर्भर करता है।”

अंजलि ने टेबल पर थोड़ा झुकते हुए अपनी आवाज़ धीमी की। “कपड़ों के ऊपर से जो दिखता है, वह अक्सर ‘भ्रम’ भी हो सकता है। पैडेड ब्रा या कपड़ों की फिटिंग अक्सर असली आकार को छुपा लेती है। इसीलिए तुझे वो सब ‘उलझा हुआ’ लग रहा था।”

उसने आर्यन की आँखों में झाँका और एक बहुत ही ‘बोल्ड’ बात कही। “कल रात तूने जो देखा, वह एक पूर्ण विकसित और परिपक्व शरीर था। लड़कियों का शरीर अभी बन रहा होता है, इसलिए उनमें वह भारीपन या वह ‘गहराई’ नहीं होती जो तूने मुझमें देखी। यही वजह है कि तुझे बाहर सब कुछ फीका या अलग लग रहा था।”

आर्यन मंत्रमुग्ध होकर सुन रहा था। उसे अहसास हुआ कि उसकी माँ ने उसे वह ‘नज़र’ दे दी है जो उसे दुनिया की भीड़ में भी असली और नकली का फर्क समझा सके।

“तो इसका मतलब… जो ‘पूर्णता’ मैंने कल देखी, वह दुर्लभ है?” आर्यन ने धीरे से पूछा।

अंजलि ने शरारत से अपनी आँखें झपकाईं। “वो तो अब तुझे खुद तय करना है। पर याद रख, असली सुंदरता कपड़ों के पीछे नहीं, बल्कि उस ‘एहसास’ में होती है जो तूने कल रात अधूरा छोड़ दिया था।”

डिनर टेबल पर माहौल अब और भी ज़्यादा गंभीर और दिलचस्प हो गया था। आर्यन के मन में चल रही यह उथल-पुथल अंजलि के लिए एक डॉक्टर और एक माँ, दोनों ही तौर पर समझने वाली बात थी। आर्यन ने अपनी प्लेट से नज़रें हटाईं और अपनी उस प्रोफ़ेसर के बारे में बताना शुरू किया जिसने आज उसका ध्यान भटका दिया था।

“माँ… एक बात और,” आर्यन ने थोड़ा हिचकिचाते हुए कहा। “मेरी एक प्रोफ़ेसर हैं। वो रोज़ साड़ी पहनकर आती हैं। आज जब मैंने उन्हें गौर से देखा, तो उनके Boobs का आकार… मतलब वो कुछ ज़्यादा ही बड़े और भारी लग रहे थे। साड़ी के ब्लाउज से वो बिल्कुल छलकने को तैयार थे।”

आर्यन ने अपनी उंगलियों से हवा में एक आकार बनाने की कोशिश की। “आपके जैसे ही सुडौल, पर शायद थोड़े और ज़्यादा उभरे हुए। क्या वो भी कुछ ‘आर्टिफिशियल’ यूज़ करती होंगी, या फिर वो भी आपकी तरह पूरी तरह से विकसित और मैच्योर हैं?”

अंजलि ने आर्यन की इस मासूम जिज्ञासा पर एक फीकी सी मुस्कान दी। उसने अपनी कुर्सी को थोड़ा और करीब किया और बहुत ही संजीदगी से जवाब दिया।

“आर्यन, साड़ी एक ऐसा लिबास है जो महिला के शरीर की हर गोलाई को बहुत उभार कर दिखाता है। और जहाँ तक तेरी प्रोफ़ेसर की बात है… देख, एक उम्र के बाद, खासकर अगर वो शादीशुदा हैं या माँ बन चुकी हैं, तो शरीर में भारीपन आना स्वाभाविक है। जैसा कि मैंने कहा, हार्मोन्स और उम्र उस ‘कोमलता’ को एक ‘वजन’ देते हैं।”

अंजलि ने अपनी आवाज़ और धीमी कर दी। “हो सकता है वो वाकई में उतनी ही मैच्योर हों जितना तूने मुझे देखा। लेकिन साड़ी के नीचे जो ब्लाउज होता है, उसकी फिटिंग और अंदर पहनी गई ब्रा भी उस उभार को एक ‘सपोर्ट’ देती है जिससे वो और भी आकर्षक और बड़े लगते हैं।”

अंजलि ने आर्यन की आँखों में झाँका, जैसे वो उसके मन के अंदर झाँक रही हो। “तुझे आज वो सब बहुत ‘अलग’ और ‘बड़ा’ लग रहा था क्योंकि अब तेरी आँखें सिर्फ कपड़े नहीं देख रहीं, बल्कि उनके पीछे की शारीरिक सच्चाई को ढूँढ रही हैं। तू अब तुलना कर रहा है कि जो कल रात तूने मेरे साथ महसूस किया, क्या वैसा ही ‘वजन’ और वैसी ही ‘तपिश’ उनके पास भी होगी?”

आर्यन का चेहरा लाल हो गया। उसे लगा जैसे माँ ने उसके दिल की बात पकड़ ली है। “हाँ माँ… शायद मैं यही सोच रहा था। मुझे लगा कि क्या सब औरतों का शरीर इतना ही ‘भारी’ और ‘भरा हुआ’ होता है जैसा कल मैंने आपका महसूस किया था।”

अंजलि ने धीरे से मेज़ के नीचे से आर्यन का घुटना थपथपाया। “हर किसी का अपना एक अंदाज़ होता है आर्यन। पर याद रख, कपड़ों के ऊपर से दिखने वाला वो ‘पहाड़’ जैसा उभार और उसे छूने पर मिलने वाला वो मखमली अहसास… ये दोनों बहुत अलग बातें हैं। तूने कल जो देखा और महसूस किया, वो ‘असली’ था। प्रोफ़ेसर का तो तूने सिर्फ एक ‘नज़ारा’ देखा है।”

अंजलि की इस बात ने आर्यन की जिज्ञासा को और भी सुलझा दिया। उसे समझ आ गया कि जो ‘अनुभव’ उसे घर में मिल रहा है, वह बाहर की किसी भी ‘दिखावट’ से कहीं ज़्यादा गहरा है।

अंजलि ने देखा कि आर्यन अब पूरी तरह से अपनी प्रोफेसर की शारीरिक बनावट और ‘साड़ी’ के उस उभार वाली गुत्थी में उलझ गया है। वह एक डॉक्टर थी और जानती थी कि अगर बातों का सिलसिला यहीं चलता रहा, तो आर्यन का दिमाग केवल कल्पनाओं में दौड़ता रहेगा। उसे अब ‘थ्योरी’ से ज़्यादा ‘शांति’ और उस ‘अधूरे अनुभव’ की ज़रूरत थी।

अंजलि ने हल्की सी मुस्कान के साथ अपनी प्लेट किनारे रखी और आर्यन की आँखों में आँखें डालकर थोड़ा अधिकार भरे स्वर में कहा।

“बस-बस आर्यन… आज के लिए इतनी ‘रिसर्च’ काफी है। बाकी की सारी बातें, प्रोफेसर का साड़ी वाला लुक और ये भारीपन का गणित… हम बाद में समझेंगे। अभी चुपचाप अपना खाना खत्म कर।”

आर्यन ने जैसे अपनी सुध-बुध वापस पाई। “पर माँ, मैं तो बस…”

“मुझे पता है तू क्या सोच रहा है,” अंजलि ने उसकी बात काटते हुए कहा। “पर अभी शरीर को पोषण की ज़रूरत है, दिमाग को और ज़्यादा बोझ देने की नहीं। जल्दी से खाना खत्म करो, और फिर सोने चलते हैं। कल रात तूने खुद ही कहा था कि आगे का आज करेंगे… याद है न?”

अंजलि की इस आख़िरी बात ने आर्यन के अंदर जैसे बिजली दौड़ा दी। ‘सोने चलते हैं’ का मतलब आज सिर्फ सोना नहीं था, बल्कि उस ‘काली ब्रा’ के आगे का वह सफर था जिसे कल आर्यन ने अपनी समझदारी से रोक दिया था।

आर्यन ने तेज़ी से अपने आखिरी दो-तीन निवाले खत्म किए। उसका दिल फिर से उसी रफ़्तार से धड़कने लगा था। डिनर टेबल साफ की गई, बर्तन रखे गए और घर की लाइटें एक-एक करके बंद होने लगीं।

जब वे बेडरूम की ओर बढ़े, तो गलियारे के सन्नाटे में उनके कदमों की आहट और भी साफ़ सुनाई दे रही थी। अंजलि आगे चल रही थी आर्यन उसके पीछे था, उसकी नज़रें अंजलि की कमर और उस ‘भारीपन’ पर टिकी थीं जिसे समझने की कोशिश वह पूरे दिन कॉलेज में करता रहा था।

कमरे में पहुँचते ही अंजलि ने वही मद्धम लैंप जला दिया। पीली रोशनी फिर से कमरे के कोनों में बिखर गई, जिससे माहौल में वही कल वाली गर्माहट और नज़ाकत वापस आ गई।

अंजलि बिस्तर के किनारे बैठी और आर्यन की ओर देखा। “तो… आज का ‘सबक’ शुरू करें? या फिर से आज कोई ‘प्रोफेसर’ याद आ रही है?”

आर्यन ने दरवाज़ा धीरे से बंद किया और कुंडी लगा दी। “नहीं माँ… आज बस आप हो और वह ‘सत्य’ जिसे मुझे पूरा देखना है।”

कमरे की वह मद्धम पीली रोशनी आज अंजलि के बदन पर पड़कर एक अलग ही जादू जगा रही थी। आर्यन ने आज बिना किसी हिचकिचाहट के, अपनी पूरी हिम्मत बटोर कर अंजलि के कुर्ते के बटन खोले। जैसे ही उसने कपड़ा हटाया, उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं।

आज अंजलि ने काले रंग की जगह चमकदार गुलाबी रंग की ब्रा पहनी हुई थी। वह रंग अंजलि की दूधिया सफेद त्वचा पर इतना खिल रहा था कि आर्यन को लगा जैसे उसकी माँ की खूबसूरती आज सातवें आसमान पर पहुँच गई हो। गुलाबी रंग की उस रेशमी ब्रा की फिटिंग इतनी तंग और ‘परफेक्ट’ थी कि उसके अंदर से अंजलि के Boobs आज पहले से कहीं ज़्यादा भारी और भरे हुए लग रहे थे।

आर्यन की सांसें रुक गईं। उसे अपनी कॉलेज की लड़कियों और उस प्रोफ़ेसर की याद आई जिनके बारे में वह दिन भर सोचता रहा था। लेकिन आज, इस गुलाबी पर्दे के पीछे छिपी उस गोलाई और उस उभार को देखकर उसे समझ आया कि उसकी माँ के सामने सब फीके हैं।

“माँ… ये… ये कल से भी ज़्यादा बड़े और खूबसूरत लग रहे हैं,” आर्यन ने लगभग फुसफुसाते हुए कहा।

वह तुलना कर रहा था—कॉलेज की उन लड़कियों की अपरिपक्वता और अंजलि के इस विकसित और भारी शरीर के बीच। गुलाबी ब्रा के प्यालों से बाहर झाँकती वह गहराई उसे बता रही थी कि जो ‘वजन’ और ‘पूर्णता’ वह ढूँढ रहा था, वह उसके बिल्कुल सामने है।

अंजलि ने आर्यन की उस प्यासी नज़रों को महसूस किया। उसने देखा कि आर्यन का हाथ अब धीरे-धीरे उस गुलाबी रेशम की ओर बढ़ रहा है। वह चाहती थी कि आज आर्यन सिर्फ देखे नहीं, बल्कि उस ‘भारीपन’ को महसूस करे जिसे वह दिन भर दुनिया में तलाशता रहा।

“देख लिया आर्यन? क्या अब भी तुझे अपनी क्लास की लड़कियाँ या वो प्रोफ़ेसर याद आ रही हैं?” अंजलि ने एक मादक मुस्कान के साथ पूछा। “या फिर आज तुझे समझ आ रहा है कि ‘असली’ और ‘पूरा’ शरीर कैसा होता है?”

आर्यन ने बिना कुछ कहे अपना हाथ बढ़ाया और उस गुलाबी ब्रा के ऊपर से ही उस नर्म और भारी उभार को अपनी हथेली में भर लिया। उसका पूरा जिस्म एक अनजाने सुख से कांप उठा।

आर्यन का हाथ, जो कल तक कांप रहा था, आज एक अजीब से अधिकार और अटूट जिज्ञासा के साथ आगे बढ़ा। उसने अपनी फैली हुई हथेली को धीरे से अंजलि के गुलाबी ब्रा में कसे हुए उस भारी उभार पर टिका दिया।

जैसे ही आर्यन की हथेली ने उस नर्म और मांसल गोलाई को छुआ, उसके पूरे शरीर में बिजली की एक लहर दौड़ गई। वह अहसास उम्मीद से कहीं ज़्यादा ‘शानदार’ और ‘गहरा’ था।

ब्रा का गुलाबी कपड़ा साटन जैसा चिकना और रेशमी था। आर्यन ने जब अपनी उंगलियाँ उस पर फेरीं, तो उसे कपड़े की उस फिसलन भरी कोमलता के नीचे अपनी माँ के जिस्म की असली तपिश महसूस हुई। वह कोई बेजान मांस का लोथड़ा नहीं था, बल्कि एक धड़कता हुआ, गर्म और जीवंत हिस्सा था।

जैसे ही आर्यन ने अपनी उंगलियों को थोड़ा मोड़ा और उस उभार को हल्का सा भींचा, उसे उस ‘वजन’ का अंदाज़ा हुआ जिसके बारे में वह दिन भर कॉलेज में सोचता रहा था। अंजलि के Boobs इतने भरे हुए और भारी थे कि आर्यन की पूरी हथेली उनमें समा गई थी, फिर भी गोलाई बाहर छलक रही थी। उसे महसूस हुआ कि कॉलेज की लड़कियों का शरीर इसके सामने कितना अपरिपक्व और ‘खाली’ था। यहाँ एक पूर्णता थी, एक गहराई थी।

वह अहसास अजीब सा विरोधाभास था—ऊपर से मखमल जैसा मुलायम, लेकिन अंदर से एक गजब की सख्ती और लोच । आर्यन ने जब थोड़ा दबाव बनाया, तो वे दबते चले गए, और जैसे ही उसने हाथ ढीला किया, वे वापस अपनी जगह पर आ गए। इसी बीच, उसे ब्रा के पतले कपड़े के नीचे से वह कड़क निप्पल अपनी हथेली के बिल्कुल बीचों-बीच चुभता हुआ महसूस हुआ, जो अंजलि की उत्तेजना का साफ संकेत था।

आर्यन की साँसें अब बेकाबू हो रही थीं। उसने अपनी आँखें मूँद लीं और सिर्फ उस ‘स्पर्श’ में खो गया। उसे अपनी माँ के दिल की धड़कन अपनी हथेलियों पर महसूस हो रही थी।

अंजलि ने अपना सिर पीछे की ओर झुका लिया और उसके मुँह से एक दबी हुई, मदहोश कर देने वाली ‘सिसकारी’ निकली। “आर्यन… कैसा लग रहा है? क्या तेरी उन क्लास की लड़कियों के पास… ऐसा कुछ है?” उसने बहुत ही धीमी और टूटती हुई आवाज़ में पूछा।

आर्यन ने अपनी पकड़ थोड़ी और मज़बूत की और फुसफुसाया, “माँ… ये तो जन्नत जैसा है। इतना भारी, इतना गर्म… मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि छूना इतना ‘शानदार’ हो सकता है।”

Please complete the required fields.