manu@84

कर्ज और फर्ज | एक कश्मकश – Update 91

" आखिर क्यों  "शायद कुसुम को मेरा अपनी खुद की औलाद के लिए तड़पना सुकून सा दे रहा था. मैने जो उस के साथ विश्वासघात किया था, बिना उस की किसी गलती के उस को जो वेदना दी थी, उस की यह सजा तो मुझ को मिलनी ही चाहिए थी.कुसुम से तलाकनामा मिलने के कुछ दिनों बाद मैने और रिंकी ने शादी कर ली....

POPULAR

spot_img

कर्ज और फर्ज | एक कश्मकश – Update 89

क्या मेरी पसन्द अपने विचारों के अनुकूल स्त्री की नहीं है? क्या अपनी पसन्द की चीज को ढूंढना या पाना गलत है? नहीं, हम...

कर्ज और फर्ज | एक कश्मकश – Update 88

" पाप का अंत  "मेरी सास ने अबकी बार फिर से अपनी बेटी कुसुम को कुछ नहीं बताया कि उसका पति और बेटी क्या...

कर्ज और फर्ज | एक कश्मकश – Update 87

"विनाश काले विपरीत बुद्धि  ""वो मुझसे लिपट गई और मैं उससे,जिस्म में कोई आग तो नही थी बस अहसास था एक दूसरे के...

कर्ज और फर्ज | एक कश्मकश – Update 86

मैं अपने और रिंकी के कमरे से होकर मम्मी के कमरे में गया, पर वो वहाँ नही थी. शायद वो रसोई में थी. मैं...

कर्ज और फर्ज | एक कश्मकश – Update 85

यह हो ही नहीं सकता कि कोई बच्चा अपनी मां को धोखा दे । पर कुसुम गलत थी उसे पता ही नहीं था कि...

कर्ज और फर्ज | एक कश्मकश – Update 84

कहने का मतलब जल्द ही मेरा और रिंकी का अब कभी कभार होने वाला मिलन भी पूरी तेरह बंद हो गया था. मैं जैसे...

कर्ज और फर्ज | एक कश्मकश – Update 83

" कलेश का गृह प्रवेश  ""अब हम बाप बेटी का प्यारा सा नाजायज रिश्ता बुरी तरह प्रभावित होकर अपनी आखिरी साँसे भर रहा था।एक...

कर्ज और फर्ज | एक कश्मकश – Update 82

खुले ख्यालात वाली शादी शुदा औरत और वैश्या में फर्क करना सीखो..... आज सच में मुझे बहुत बुरा लगा क्योकि आपने जबरदस्ती की ,...

कर्ज और फर्ज | एक कश्मकश – Update 81

अचानक मुझे याद आये वो शब्द जो कुसुम ने मेरे बाहों के आगोश में कहे थे "उफ्फ्फ जल्दी से मेरा प्रमोशन के साथ वापस...

कर्ज और फर्ज | एक कश्मकश – Update 80

’’ ‘‘प्लीज कुसुम , समझा करो.उधर से फोन कट चुका था. मैं सिर पकड़ कर बैठ गया.मैने मेरे साथ लेटी हुई अपनी बेटी पर...

कर्ज और फर्ज | एक कश्मकश – Update 79

उसने अपने बदन को पानी की फुंहारो से पोंछा, और अपनी चुत को भी रगड़ रगड़ कर साफ किया, अब उसकी चुत के अंदर...

कर्ज और फर्ज | एक कश्मकश – Update 78

जैसे उसने 'कुसुम' के संदर्भ में मेरे मन की बात पढ़ ली हो,मैं अपना सर ऊँचा किये उसे देखा वो बस मुस्कुरा रही थी…......