मैंने सोचा की यही सही समय है, और मैंने उसके कुल्हे पकडे और एक दो तेज धक्के मारे और अपना लंड आधे से ज्यादा उसकी गांड में उतार दिया…वो चिल्ला पड़ी. “आआआअह्ह्ह ऊऊओ साब्ब्ब्ब ……क्या कर दिया……अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह …..बड़ा दर्द हो रहा है…साब्ब्ब…..अह्ह्हह्ह ….ओफ्फ्फ्फ़ मर गयी रे…..अह्ह्ह्ह…”
मैंने उसकी चीखों की परवाह नहीं की और अपने काम में लगा रहा, नीचे से विशाल भी उसकी चूत में लंड पेल रहा था, जिससे उसे मजा आ रहा था, पर मेरे द्वारा पेले जा रहे लंड से उसे दर्द भी उतना तेज हो रहा था, जिसकी वजह से वो चूत के खेल को एन्जॉय नहीं कर पा रही थी… अब मेरा लंड पूरा उसकी गांड में जा कर धंस चूका था, वो मेरे और विशाल के बीचे सेंडविच बनी हुई चुद रही थी, साली को बड़ा शौक था न चुदने का, ले चूस अब, और कहाँ गयी इसकी शेरो शायरी…पिछली बार जब मैंने उसे चोदा था तो बड़ी शायरी निकल रही थी, आज कहाँ घुस गयी वो..
शायद उसकी गांड में ही घुस गयी होगी…जहाँ मेरा लंड है..हा हा..
मैंने हँसते हुए उसकी गांड के छेद को खोलना शुरू कर दिया, अब उसका दर्द भी कम होने लगा था,
पीछे और आगे, दोनों तरफ से उसके अन्दर मजे की तरंगे उठने लगी थी, और वो उन्हें महसूस करके मजे से आँखें बंद करवा के , रंडियों की तरह, चुदाई करवा रही थी…अब उसके मुंह से कुछ कुछ निकलने भी लगा था…
“अह्ह्ह ओफ्फ्फ अह्ह्ह्ह साब ….क्या मजा….अह्ह्ह्ह आया ……अह्ह्हह्ह ओफ्फ्फ ….पीछे से भी….उतना ही मजा….अ आऽऽ रहा है….जितना आगे से….पहले क्यों नहीं फाड़ी मेरी गांड आपने….अह्ह्ह्ह ओफ्फफ्फ्फ़…..मांन्न…….अह्ह्हह्ह…..आयी……अयीई…..ई…….अह्ह्ह्ह……मर गयी रे……इतना मजा तो आजतक नहीं आया….अह्ह्ह्ह…….”
और आखिर वो अपनी शायरी के कीड़े से बाज नहीं आई और बोली
“चोदो मुझे चूत में, चोदो मुझे गांड में..
डालो अपना लंड दिन रात मेरे हर छेद में
आप मालिक हो मेरे, मैं हूँ आपकी दासी
जब कहोगे , मैं चुदुंगी आपसे,
मैं तो बन गयी हूँ, आपके लंड की बांदी.”
अचानक विशाल ने उसके दोनों मुम्मे पकडे और उसकी चूत में अन्दर झड़ना शुरू कर दिया…और जोरों से हाँफते हुए उसकी छाती से लिपट गया.
मेरे लंड पर, अन्दर की दीवार के दूसरी तरफ से निकलता, विशाल के लंड का रस, साफ़ महसूस हो रहा था, मैंने भी अपनी सारी शक्ति इकठ्ठा की और तेजी से उसकी गांड के अन्दर के धक्को की स्पीड बड़ा दी और जल्दी ही मैंने भी उसकी कुंवारी गांड को अपने रस के स्वाद से अवगत करवाया और झड़ने के बाद अपना लंड उसकी गांड सेs निकाला और लेट गया..
सभी थोड़ी देर तक लेटे रहे और फिर एक एक करके बाथरूम गए और साफ़ होकर वापिस आये और फिर वो दोनों अगले दिन फिर आने का वादा करके वापिस चले गए,
मैंने वहीँ लेटा रहा , नंगा, और वो सोनी भी वहीँ लेटी रही मेरे पास, नंगी.
मैं लेटा हुआ सोनी के नंगे बदन को सहला रहा था, की तभी उसकी छोटी बहन अन्नू ऊपर आई और हमें नंगे एक दुसरे की बाँहों में लेटे हुए देखा, हमने अपने नंगे शरीर को छिपाने की कोई चेष्ठा नहीं की.
अन्नू : वाह साब…आप तो मेरी बहन के पीछे ही पड़ गए, और आपने तो अब अपने दोस्तों से भी चुदवाना शुरू करवा दिया है मेरी बहन को..
उसकी बात सुनकर सोनी बीच में ही बोल पड़ी : तुझे क्या लेना…ये मेरी मर्जी है, मैं किसी से भी चुदवाऊ तुझे क्या, तू भी ना जाने कहाँ कहाँ मुंह मारती है, मैंने तुझे कभी रोका है क्या, और आज तो मैंने अपनी गांड भी मरवा ली साब से..ये देख..” और उसने अपनी फेली हुई गांड के लाल छेद को अपनी बहन को दिखाया..
अन्नू (हेरानी से) : “दीदी..आपने अपनी चूत की सील अभी दो दिन पहले ही तुडवाई है और आज गांड भी मरवा ली…चूत से गांड तक का सफ़र बड़ी जल्दी पूरा कर लिया..”
सोनी :”मैं तो हर तरह की चुदाई करवाना चाहती हूँ… मैंने अपने जितने भी साल बिना चुदे गुजरे हैं, मैं नहीं चाहती की ऐसे मजे मैं अब बिना लिए कोई भी दिन निकालू..मुझे तो बस अब रोज लंड चाहिए, चूत में और गांड में, मुंह में और हाथ में, हर जगह, हर रोज…”
अन्नू समझ गयी की उसकी बहन अब पूरी तरह से चुद्दकड़ बन चुकी है, उसे समझाना बेकार है, वैसे भी वो सिर्फ शिकायत इसलिए कर रही थी की उसे चुदाई से दूर क्यों रखा जा रहा है,
मैं उसकी बात को समझ चुका था, उसे इसलिए परेशानी नहीं थी की उसकी बहन की इतनी चुदाई क्यों हो रही है, उसे परेशानी थी की उसकी क्यों नहीं हो रही …
मैं : “तुम्हारा इशारा मैं समझ गया हूँ अन्नू…तुम चिंता मत करो, कल जब मेरे दोस्त आयेंगे तो उनसे तुम्हारी चुदाई भी करवाऊंगा..ठीक है..”
और वो मुस्कुराने लगी , मैंने इशारे से उसे अपने पास आने को कहा. वो किसी दासी की तरह मेरे लंड के पास आकर बैठ गयी और उसे सहलाने लगी, उसकी बहन का हाथ पहले से ही मेरे लंड पर था, और उसने भी वहीँ हाथ लगा कर उसे मसलना शुरू कर दिया..
जल्दी ही मेरे लंड का साइज़ बढ़ने लगा और मैंने अन्नू को कपडे उतरने को कहा, वो तो जैसे इसी इन्तजार में बैठी थी, उसने झट से अपने कपडे उतारे और मेरे खड़े हुए लंड के ऊपर आ बैठी..
“अह्ह्ह्हह्ह साब…..जब से आपके घर आई हूँ, मेरी चूत हमेशा गीली रहती है, इतने बड़े-२ लंड लिए हैं यहाँ आकर की अपनी गली के लोंडो के लंड अब नुन्नी लगते हैं…. अह्ह्हह्ह्ह्ह बड़ा मजा आता है….आपके मोटे और लम्बे लंड को लेने में….चोदो न…जोर से …अपनी अन्नू को…अह्ह्ह्हह्ह sssssssssssssss….
मैंने उसके दोनों तरबूजों को पकड़कर दबाना और नीचे से उसकी चूत में धक्के लगाना शुरू कर दिया, साथ में लेटी हुई सोनी भी उठी और मेरे मुंह के ऊपर अपनी रसीली चूत को लेकर बैठ गयी, अपनी बहन की तरफ मुंह करके…
मैंने उसकी गीली चूत को सुखाना शुरू किया और उन दोनों बहनों ने एक दुसरे के गिले मुंह को..उनकी लार निकल कर मेरी छाती पर गिर रही थी, मैंने अपने शरीर के इस तरह से झटके दे रहा था की अन्नू और सोनी की चूत में एक साथ मेरा लंड और जीभ अन्दर जा रहे थे..और फिर जब तीनो ने झड़ना शुरू किया तो कमरे में जैसे बारिश आ गयी,
सब चीजे भीगने लगी, मेरा मुंह सोनी के रस से , अन्नू की चूत मेरे गाड़े वीर्य से, मेरा लंड उसके ठन्डे रसीले शहद से और सोनी की चूत मेरी थूक और उसके रस के मिले जुले मिश्रण से..
हम सभी नीचे उतरे और नहाने के लिए बाथरूम में गए , उन दोनों नौकरानियो ने मुझे राजा की तरह ट्रीट करते हुए मुझे नहलाया, मेरे हर अंग पर अपने शरीर से रगड़-२ कर साबुन लगाया ..फिर हम तैयार होकर नीचे वापिस आ गए.
शाम को जब ऋतू आई तो मैंने उसे आज के बारे में बताया की सन्नी और विशाल तो आज सोनी की चूत मारकर ही काम चला गए,
जिसे सुनकर ऋतू को बड़ा गुस्सा आया, वो बोली जब से ये दोनों चुडेले आई हैं उसके हिस्से की चुदाई भी वो लेजा रही हैं.. मैंने ये सुनकर उसके गुस्से को शांत किया और उसे उसी वक़्त उसके कमरे में लेजाकर खूब चोदा..रात को भी वो मेरे पास ही सोयी..कहना जरुरी तो नहीं है, पर हमने उस रात भी लगभग २ बार और चुदाई की.
अगले दिन मैंने कॉलेज में सन्नी और विशाल से घर पर जल्दी आने को कहा, क्योंकि मैं आज उन्हें सिर्फ ऋतू के मजे दिलाना चाहता था..और ऋतू भी दो दिनों से तड़प रही थी नए लंडो को लेने के लिए.
मैं दो बजे घर पहुंचा, ३ बजे के आसपास वो दोनों भी आ गए,आते ही उन्होंने मुझे दस हजार रूपए दे दिए,
ऋतू चार बजे के आस पास आती थी, इसी बीच उन दोनों ने सोनी को अपने पास बुलाया और उन दोनों ने उसे ब्रा और पेंटी के नए सेट दिए, जिसे पाकर वो बड़ी खुश हुई.. मैंने उसे पहले ही बता दिया था की आज उसकी चुदाई नहीं हो पाएगी, आज हमारा कुछ और प्रोग्राम है, वो समझ तो गयी थी पर उसने कुछ कहा नहीं.वो ख़ुशी-२ अपनी पेंटी-ब्रा लेकर नीचे चली गयी.
थोड़ी देर में ही ऋतू भी आ गयी, मैंने और वो दोनों उसके कमरे में गए, हम सभी वहीँ बैठ गए,
ऋतू : “आप सब बैठो, मैं बाथरूम में चेंज करके आती हूँ”
सन्नी :”अरे ऋतू, अब हमसे कैसा शर्माना, हमने तो तुम्हारे हर अंग को देखा है”
ऋतू उसकी बात सुनकर मुस्कुरा दी, उसने वहीँ खड़े होकर अपने कपडे उतारने शुरू कर दिए. उसने शर्ट और फिर स्कर्ट भी उतार कर सन्नी और विशाल की तरफ फेंकी , और फिर उसने हाथ पीछे करके अपनी ब्रा भी उतारी और उसे मेरी और फेंका, बड़ी गरम थी वो ..
मैंने उसे सुँघा, उसमे से वही भीनी-२ खुशबू आ रही थी जो मुझे अक्सर उसकी चूत को चाटने में आती थी..
सन्नी और विशाल भी आँखे फाड़े ऋतू और उसके मोटे-२ लटकते हुए मुम्मो को देख रहे थे.. और अंत में उसने अपनी पेंटी को नीचे खिसकाना शुरू किया, और उसे ऊपर उछाल दिया, जिसे सन्नी ने लपक लिया और उसके गिले वाले हिस्से को अपने मुंह और होंठो पर मलने लगा.
और फिर अचानक ऋतू ने अपनी चूत में ऊँगली डालकर उसमे से वही डिल्डो निकला,…… साली कुतिया..अपनी चूत में डिल्डो लेकर वो आज स्कूल गयी थी… उसकी चूत से जैसे ही डिल्डो बाहर आया, उसकी चूत में जमा हुआ सुबह से उसके रस का बाँध जैसे टूट गया , वो भी उसकी चूत से बहकर नीचे गिरने लगा और उसकी गोरी -२ टांगो से होता हुआ नीचे की और आने लगा..
ये देखकर सन्नी और विशाल के सबर का बाँध टूट गया, उन्होंने आनन फानन में अपने कपडे उतारे और ऋतू की दोनों टांगो को पकड़ कर उसकी बहती हुई चूत के नीचे कुत्तो की तरह मुंह खोलकर बैठ गए और ऊपर से हो रही अमृत वर्षा का आनंद सीधा अपने मुंह में लेने लगे, और फिर उन्होंने ऋतू की एक-२ टांग को अपनी गर्म जीभ से चाटना शुरू कर दिया, वो जैसे उसकी मोटी जांगो को अपनी जीभ के ब्रश से पोलिश कर रहे थे, जैसे -२ वो उसकी टांग को चाट रहे थे, ऋतू की टांगो में एक नयी तरह की चमक से आती जा रही थी,..
वो खड़ी हुई मचल रही थी, दोनों के सर के ऊपर हाथ रखकर वो उन्हें और जोर से चाटने के लिए उकसा रही थी..
“अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह सनी…….विशाल्ल्ल्ल……चाटो…..मेरी टाँगे…..अह्ह्हह्ह …म्मम्मम…..ओफ्फफ्फ्फ़…….मजा आ रहा है…अह्ह्ह….गुदगुदी….हो रही है…….अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ”
और अचानक सन्नी ने अपनी जीभ उसकी खुली हुई चूत के अन्दर डाल दी…ऋतू तो अब जैसे उसके मुंह को कुर्सी समझ कर बैठी थी वहां..वो नीचे था अपना मुंह ऊपर किये, उसकी चूत पर लगाये और ऋतू उसके बालों को पकडे बैठी थी वहां उसके मुंह पर अपनी चूत टिकाये..
मैंने भी अब कपडे उतारे और उसकी जांघो को चाटना शुरू कर दिया, दूसरी जांघ विशाल चाट रहा था, बीच में सन्नी था…विशाल ने उसके पैरों की उंगलिया अपने मुंह में लेकर चुसनी शुरू कर दी..
ऋतू की तो जैसे जान ही निकल गयी, उसे लगा की उसके पैरों की उँगलियों को चुस्वाने में भी उसे वैसा ही आनंद मिल रहा है जैसा उसकी चूत को चूसने में मिलता है,
उसने अपने पैरों को उसके मुंह में ठूसना शुरू कर दिया, और अपनी चूत को और जोरों से सन्नी के मुंह पर ठोंकना…
मैंने भी उसके पेरों की उँगलियाँ अपने मुंह में डाली, बड़ी ही मुलायम थी वो, उसे गुदगुदी भी हो रही थी, और मजा भी आ रहा था..
अब उसका हाल ऐसा था मानो उसके शरीर में एक नहीं बल्कि तीन – तीन चुते हैं, जिसे तीन अलग-२ लोग चूस रहे हैं और उसे मजा दे रहे हैं… “अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह हह मरररर गयी…..अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आशु………सन्नी…….विशाल्ल्ल……..अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह म्मम्मम्म बड़ा मजा आ रहा है…… चुसो इन्हें….ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ….इतना मजा आज तक नहीं आया….आशु…..भैय्या…..अह्ह्ह……..”
और फिर मैंने उसकी चूत पर अपने होंठ लगाये और सन्नी ने मेरी जगह ले ली..आज सच में उसकी चूत भी बड़ी ठंडी और मुलायम और नम सी लग रही थी..
शायद उसे ऐसा मजा पहली बार मिल रहा था…इसलिए…मैं समझ गया की उसके पैर की उंगलिया उसका वीक पॉइंट है. और फिर विशाल भी उसकी चूत को चाटने के लिए उसके नीचे आया और मैं उसके पैरों की तरफ गया..
ऋतू की चूत से निकलते पानी से हम तीनो पूरी तरह से भीग चुके थे, आज तक मैंने जितनी भी चुते मारी थी, उनमे ऋतू ही ऐसी थी जिसमे से सबसे ज्यादा रस निकलता था, और आज भी वो हमें अपने रस से नहलाने में लगी हुई थी, पर अब उसकी चूत में लंड निगलने की खुजली होने लगी थी, उसने मेरी तरफ देखा और इशारे से पूछा, मैंने उसे आँखों हो आँखों में चुदने को कहा…मेरा इशारा पाते ही उसने अपनी चूत को नीचे बैठे विशाल के मुंह से हटाया और उसके कंधे पर हाथ रखकर , उसकी छाती से अपनी गीली चूत को रगड़ते हुए, नीचे की और आने लगी, विशाल को तो अपनी किस्मत पर विश्वास ही नहीं हुआ, उसने सोचा भी नहीं था की ऋतू अपने आप अपनी चूत में उसका लंड लेने को तैयार हो जायेगी..
जैसे ही विशाल के लंड ने ऋतू की चूत को छुआ, ऋतू ने विशाल का मुंह पकड़ा और उसे अपने दांये मुम्मे के ऊपर दबा दिया, विशाल ने अपना मुंह खोला और ऋतू के तने हुए निप्पल ने विशाल के मुंह में प्रवेश किया और नीचे विशाल के तने हुए लंड ने ऋतू की चूत में..
“अह्ह्हह्ह्ह्ह विशाल……अह्ह्हह्ह म्मम्मम्म बड़ा लम्बा लंड है…..तुम्हारा….विशाल…ओह्ह्ह्हह्ह माय गोड…..अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह फक में…..विशाल….फक मी….विथ यु लॉन्ग पेनिस…. .”
ऋतू ने ना जाने कितने लम्बे और मोटे लंड लिए थे अपनी नन्ही सी चूत में, पर फिर भी वो विशाल के मामूली से लंड को लम्बा कह रही थी, मैं समझ गया की वो सिर्फ उसे ज्यादा उत्तेजित करने के लिए ही ऐसा कह रही है, वर्ना उस कमरे में इस वक़्त मेरे से लम्बा और मोटा लंड किसी का नहीं था..
और जैसा ऋतू चाहती थी, वैसा ही हुआ, अपने लंड की तारीफ सुनकर तो विशाल के अन्दर का जानवर जाग गया उसने ऋतू के दोनों मुम्मे स्टेरिंग की तरह पकडे और उन्हें चबाते हुए, दबाते हुए, मसलते हुए, नीचे से अपने लंड का एक्सेलेटर दबा दिया और अपने लंड के लम्बे-२ प्रहार करने लगा उसकी वेलवेट जैसी चूत में…
“अह्ह्ह ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ अह्ह्ह्ह ईई धीरे…..धीईएरे…..अह्ह्ह्ह मार डाला आःह्ह………धीरे विशाल…..तुम्हारे दांत लग रहे हैं…..अह्ह्हह्ह ….ओयीईई …..मर गयी रे…..म्मम्मम…..मजा आ रहा है….विशाल्ल्ल्ल…..और तेज….अह्ह्हह्ह हाआन्न्न हा….ऐसे ही….अह्ह्हह्ह …….अह्ह्ह…..”
सन्नी बेचारा विशाल की किस्मत देखकर जल सा रहा था, उसने सोचा था की पहले वो ऋतू की चूत मारेगा, पर विशाल ने बाजी मार ली, पर तभी उसे ऋतू की गांड का छेद दिखाई दिया, उसने अपने लंड पर थूक मली और उठ कर ऋतू के पीछे जा लगा और सटा दिया अपना थूक से भीगा सुपाडा उसकी गांड के भूरे से छेद पर…
जैसे ही ऋतू ने अपनी गांड के छेद पर उसके लंड की दस्तक सुनी, उसने मुड़ कर देखा और सन्नी को पाकर, मुस्कुराते हुए उसने अपनी गांड के मसल्स ढीले किये और उसके लंड के लिए पीछे का दरवाजा खोल दिया ..
सन्नी ने भी बिना कोई देरी किये अपना लंड अन्दर डाल दिया… “अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह …..मर गयी रे…..म्म्म्मम्म्म्मम्म ”
“दो-दो लम्बे लंड ….अह्ह्ह्हह्ह्ह्तुम दोनों तो मेरी जान लेकर रहोगे….अह्ह्हह्ह्ह्ह …..म्मम्म….” और उसने पीछे मुंह किया और सन्नी के सर को पकड़कर उसे अपनी तरफ खींचा और उसके होंठो को चूसने लगी, किस्स करने लगी उसे टायटेनिक वाले पोस में.. फर्क सिर्फ इतना था की ये रोज़ यानी ऋतू इस समय नंगी थी और उसकी गांड में पीछे से जेक यानी सन्नी का लंड था…और साथ ही साथ आगे से उसकी चूत में भी विशाल का लंड था, कुल मिला कर मुझे वो टायटेनिक मूवी, वो भी 3D में अपने सामने देखने में काफी मजा आ रहा था..अब देखना ये था की कोन सबसे पहले डूबता है..
मैं भी अपना लंड लेकर ऋतू के पास पहुंचा और उसने मेरे लम्बे लंड को देखते ही लपका और उसे चुसना शुरू कर दिया, आगे बैठा हुआ विशाल उसके दांये मुम्मे को बच्चे की तरह चूस रहा था, पीछे उसकी गांड मार रहा सन्नी बांये मुम्मे को मसलते हुए, उसके कंधे को चाट रहा था, और गांड में धक्के भी मार रहा था, और ऋतू मेरे लंड पर अपनी जीभ से और दांतों से अपनी कलाकारी दिखाने में लगी हुई थी.. और सबसे पहले ऋतू की चूत में फंसे विशाल के लंड ने उसकी चूत के समुन्दर में डूबना शुरू किया और अपना रस वहां के खारे पानी में मिलाने लगा…
“अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ऋतू……..मैं तो गया……अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ओफ्फ्फ्फ़ ……फुक्क……..फक्क………अह्ह्हह्ह ……..” और उसने अपना पसीने से भीगा मुंह ऋतू के गीले मुम्मो के बीच छुपा लिया.
विशाल के पीछे-२ उसका दोस्त सन्नी भी अपने लंड की पतवार को ऋतू की गांड में ज्यादा देर तक नहीं चला पाया और उसने भी अपने लंड से झाग निकालनी शुरू कर दी, जो उसकी गांड रूपी अथाह समुद्र में लीन होती चली गयी..
“अह्ह्ह्हह्ह ह्ह्ह्हहह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह….ऋतू……माय डार्लिंग……अह्ह्हह्ह ऊफफ्फ्फ्फ़….ओग्ग्ग्ग………..”
ऋतू के दोनों छेद उन दोनों के रस से भर चुके थे, वो अपने तीसरे छेद यानी मुंह में भी रस भरकर, एक साथ तीनो छेदों को रस से भरने का कीर्तिमान बनाना चाहती थी, इसलिए उसने जल्दी -२ मेरे लंड को चुसना और मेरी गोटियों को मसलना शुरू कर दिया…उसकी मेहनत रंग लायी और मेरे लंड से भी ढेर सारा रस निकलकर उसके मुंह में जाने लगा और उसने बिना कोई बूँद वेस्ट करे वो सारा रस अपने पेट में उतार दिया…
आज पहली बार उसकी चूत, गांड और मुंह में एक साथ लंड से निकले रस आये थे, जो तीन नदियों की भाँती अलग-२ रास्तो से होकर उसके शरीर के अन्दर एक जगह मिलकर महासागर का निर्माण कर रहे थे.
उसे आज जितनी संतुष्टि कभी नही मिली थी..
उसके बाद ऋतू जब उठी तो उसकी चूत और गांड में से उन दोनों का रस निकल-२ कर नीचे गिरने लगा, जिसे वो अपने हाथो से इकठ्ठा करके अपने मुंह में भरने लगी..फिर उसने सभी के लंड चुसे और उन्हें साफ़ सुथरा करके चमका दिया.
विशाल और सन्नी का तो जैसे जन्म सफल हो गया था.
वो दोनों थोड़ी देर तक बैठे रहे और फिर कपडे पहन कर वापिस अपने-२ घर चले गए..अगले दिन आने का वादा करके..
ऋतू भी इस ठुकाई से बुरी तरह से थक चुकी थी, उसे उठने में भी आलस आ रहा था.. मैंने टाइम देखा तो 6 बजने वाले थे, यानी पापा के आने का टाइम हो चुका था.
थोड़ी ही देर में बेल बजी और नीचे से पापा की आवाज आई, वो सोनी से मम्मी और हम दोनों के बारे में पूछ रहे थे,
सोनी ने बताया की मम्मी तो अपनी सहेली के घर गयी है और हम दोनों ऊपर है, फिर पापा के ऊपर आने की आवाज आई, मैंने और ऋतू ने अपने नंगे शरीर के ढकने की कोई कोशिश नहीं की…
पापा : “हाय…बच्चो…ओहो…यहाँ तो मस्ती चल रही है…गुड है.”
ऋतू : “हाय पापा…गुड इवनिंग..आओ न….मैं आपकी थकान उतार दूं…”
ऋतू ने सेक्सी लहजे में पापा को चुदाई का निमंत्रण दिया, ये साली ऋतू भी न…अभी-२ उसने तीन लंड लिए हैं और फिर से पापा से चुदाई करवाने को तैयार हो गयी…कमाल है ये..
पापा : “नहीं …ऋतू..अभी नहीं, मैंने और मम्मी ने अभी एक पार्टी में जाना है, और तुम भी अब अपना ये तरीका, यानी एक दुसरे के साथ कमरे में नंगे, कभी भी चुदाई करने का, बदल लो कुछ दिनों के लिए…
तुम्हे याद है न..कल तुम्हारे दादाजी आ रहे हैं…वो घर में कैसे कपडे पहने या कैसे रहे इन सब में काफी स्ट्रिक्ट हैं…तुम्हे पता तो है..तुम्हारी मम्मी को भी उनके सामने अपने सर को हमेशा पल्लू या चुन्नी से ढक कर रहना पड़ता ,
वो थोड़े पुराने विचारों के हैं…और हम लोग तो आजकल की दुनिया से भी काफी आगे निकल चुके हैं…जो उनकी समझ से बाहर हैं..मैं नहीं चाहता की जब तक वो यहाँ रहे उन्हें हमारे बारे में किसी भी तरह का शक हो..
उनके जाने के बाद तो फिर से तुम जो चाहे, जब चाहे, किसी के साथ भी चुदाई कर सकते हो..पर जब तक वो हैं, तब तक नहीं…समझ गए न..”
मैं और ऋतू एक साथ बोले : “जी पापा…समझ गए”
और फिर पापा नीचे चले गए.
ऋतू (नाराजगी भरे स्वर में ) ” ये क्या भैय्या…दादाजी तो मुझे सबसे अच्छे लगते हैं, और उनके आने पर मैं सबसे ज्यादा खुश थी, पर मैंने ये तो बिलकुल नहीं सोचा था की उनके आने के बाद मेरी चूत प्यासी ही रह जायेगी, तुम तो जानते हो की मैं आपसे चुदे बिना एक दिन भी नहीं रह सकती, पापा का लंड लेने में भी कितना मजा आता है और आज तो विशाल और सन्नी ने भी ऐसा मजा दिया की मैं तो सोच रही थी की अपनी सहेलियों को भी बुला कर अपने घर में एक दिन सभी मिलकर एक साथ चुदाई का प्रोग्राम बनाते हैं…
पर ये दादाजी के आने से तो सब गड़बड़ हो जाएगा..कुछ करो न…भैय्या…मैं आपसे चुदे बिना नहीं रह सकती…प्लीस..”
मुझे उसकी इस हालत पर बड़ी दया आ रही थी..
मैं : “तू फिकर मत कर ऋतू..मैं कुछ सोचता हूँ…”
और मैं सोचने लगा की दादाजी से कैसे निपटा जाए…पर मुझे उस वक़्त कुछ सूझ नहीं रहा था, क्योंकि दादाजी सही में काफी स्ट्रिक्ट थे इन सब बातों में, मुझे याद है एक बार, जब मैं और ऋतू एक दुसरे को पकड़ने के लिए घर में भाग रहे थे और मैंने जब ऋतू को पकड़कर उसे सोफे पर गिरा दिया था और उसके पेट में गुदगुदी करने लगा तो दादाजी ने देख लिया था और उन्होंने मुझे ऐसा करने पर काफी डांटा था और कहा था की अब ऋतू बड़ी हो रही है…मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए…भाई बहन को ऐसा करना शोभा नहीं देता..वगेरह – २ …
चलो जो होगा देखा जाएगा..
मैं और ऋतू उठे और कपडे पहन कर नीचे आ गए, मम्मी भी आ चुकी थी तब तक, पापा उन्हें भी दादाजी के बारे में बता रहे थे, मम्मी भी ये सोचकर की उनकी तरह-२ की चुदाई अब बंद हो जायेगी, काफी परेशान सी लग रही थी..
अब मैं आपको अपने दादाजी के बारे में बताता हूँ
उनकी उम्र लगभग 62 साल है, और वो अभी भी अपने खेतों में हल चलाना , ट्रेक्टर चलाना इत्यादि खुद ही करते हैं, जिसकी वजह से उनका शरीर काफी बलिष्ट है और उम्र भी काफी कम लगती है,
वो पापा के बड़े भाई जैसे लगते हैं, ना की उनके पिता की तरह, वो शुरू से ही बड़े अनुशासन में रहने वाले रहे हैं, गांधी के नियमो का पालन करने वाले.,
दादी का देहांत दस साल पहले हो चूका था, और वो अकेले रहते थे गाँव में, पर उन्होंने कभी भी दूसरी शादी करने की बात सोची भी नहीं, कई लोगो ने उन्हें ये राय दी पर उन्होंने ये कहकर की उनके जीवन में सिर्फ एक ही औरत थी जिसे उन्होंने प्यार किया है और वो थी उनकी पत्नी, उसके अलावा वो किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकते…
जब खेती का टाइम नहीं होता था तो वो कुछ समय अपने दोनों बेटो यांनी हमारे या राकेश अंकल के घर पर जाकर गुजारते थे..और इस बार उन्होंने हमारे घर पर आने की सोची थी जिसे लेकर सभी लोग परेशान से लग रहे थे,
हम सभी को उनके आने की बड़ी ख़ुशी थी पर अपने जीवन में आये इस नयी तरह की आजादी, जिसमे हम कभी भी किसी की भी चूत मार लेते थे, उसके खोने का डर था. और आप तो जानते हैं की एक बार चुदाई की आदत लग जाए तो उसे बदलना कितना मुश्किल है..
मतलब कुल मिला कर हमें उनके सामने अपने इस नए खुलेपन को छुपाना होगा और एक दुसरे से चुदाई को थोड़े दिनों तक के लिए भुलाना होगा.. सभी की बाते सुनकर सोनी का तो रोना ही फूट गया, उस बेचारी की चूत की अभी तो ढंग से ठुकाई भी नहीं हुई थी और अब ये करफ्यू …. वो अपनी किस्मत को मन ही मन कोस रही थी और साथ ही साथ अन्नू को भी, उसकी ही नजर लगी थी उसकी ताजा चुदी चूत को..
मम्मी और पापा तैयार होकर पार्टी में चले गए, उनके जाते ही सोनी रोती हुई मेरे पास आई और बोली “बाबु…ये क्या…मेरी चूत की खुजली तो अभी तक पूरी तरह से मिटी भी नहीं है और अब ये तुम्हारे दादाजी आ रहे हैं…
मैं क्या करुँगी..मुझे तो ये सोचकर ही कुछ हो रहा है की आपसे बिना चुदे मैं अपने दिन कैसे निकलूंगी…कितना मजा आ रहा था..और अब आपके दादाजी आ जायंगे कल तो सब बंद..मुझे नहीं पता…आप कुछ करो…”
पहले ऋतू और अब सोनी…दोनों मुझे कुछ करने को उकसा रही थी, पीछे खड़ी हुई अन्नू की सूरत भी देखने लायक थी…
वो वैसे तो अपनी चूत में कई लंड ले चुकी थी पर जब से हमारे घर के लंड लेने शुरू किये थे उसने भी अपने मोहल्ले को लोंडो को भाव देना बंद कर दिया था,…मतलब अब उसकी चुदाई यहाँ नहीं हुई तो वो ना घर की रहेगी न घाट की..
सभी के चेहरे लटके हुए थे, और मुझे मालुम था की उन लटके हुए चेहरों को कैसे खिले हुए चेहरों में बदला जा सकता है..मैंने अपनी जींस नीचे गिरा दी और अपना अन्डरविअर भी… और उनके चेहरों के सामने मेरा लंड चमकता हुआ दिखाई देने लगा..और जैसा मैंने कहा था, उनके चेहरे एक दम से खिल उठे, क्योंकि उन्हें मालुम था की दादाजी के आने से पहले सिर्फ आज का ही दिन है उनके पास जिसमे वो खुल कर चुद सकती हैं…
सोनी ने अपनी चोली उतार डाली…और नीचे उसने विशाल और सन्नी के द्वारा लायी गयी नयी ब्रा पहनी हुई थी, पर उसके मोटे मुम्मे उनके द्वारा लायी गयी ब्रा में ठीक से समां नहीं पा रहे थे, नाप तो शायद उन्होंने ठीक ही लिया था अपनी हथेलियों से उसके मुम्मो का…पर पता नहीं क्यों, तंग निकली ये निगोड़ी ब्रा उसकी…
मैंने उसे भरोसा दिलाया की मैं उसके लिए नयी ब्रा मंगवा दूंगा..वो खुश हो गयी और फिर जब उसने नीचे अपना घाघरा उतार कर , ब्लेक पेंटी में फंसी हुई, अपनी मांसल गांड दिखाई तो उसे देखकर मेरे मुंह में तो पानी आ गया, वो ज्यादा टाईट होने की वजह से उसे काफी सेक्सी लुक दे रही थी, मैंने उसे अपने पास बुलाया और उसके सेक्सी कुल्हों को मसलते हुए उसके होंठों का रस पीना शुरू कर दिया,
अन्नू ने भी अपने कपडे उतार दिए थे, और वो नंगी होकर मेरी टांगो के बीच जगह बनाकर बैठ गयी और मेरे खड़े हुए लंड को चूसकर उसे चुदाई के लिए तैयार करने लगी..
ऋतू तो अभी-२ चुद कर आई थी पर लंड को देखते ही ना जाने उसकी चूत में क्या खुजली होने लगती है, वो भी नंगी होकर उन दोनों के साथ मेरे लंड के मजे लेने को तैयार हो गयी,
शायद वो ये भी सोच रही थी की ना जाने अगली बार कब चुदाई करने को मिले, इसलिए वो आज, ज्यादा से ज्यादा बार चुद कर अपना कोटा पूरा करना चाहती थी, पर वो बेचारी ये नहीं जानती थी की चूत को तो हर दिन लंड चाहिए..
मैंने सोनी की ब्रा को पीछे से खोल दिया और उसके कबूतर उड़ कर मेरे मुंह से आ टकराए, मैंने उनके पर पकड़कर उन्हें चूमना शुरू कर दिया, अन्नू ने मेरा लंड चूसते हुए अपनी बहन की कच्छी को पकड़ा और उसे उतार दिया, ऋतू भी अन्नू के पास बैठ गयी और उसकी नंगी चूत में मुंह डालकर उसके रस को पीने लगी..
वो तीनो तो ऐसे पेश आ रही थी जैसे आज उनकी जिन्दगी का आखिरी दिन है, कल के बाद उन्हें कुछ नहीं मिलने वाला…बड़ी व्याकुलता दिखाई दे रही थी तीनो के अन्दर..
अन्नू तो मेरे लंड को अपने मुंह में ऐसे चूस रही थी मानो उसे उखाड़कर घर ले जायेगी… सोनी भी अपने पुरे शरीर और खासकर अपने मोटे मुम्मो को मेरे मुंह में डालकर ज्यादा से ज्यादा मजा लेने को तैयार थी..
“अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बाबु……चुसो इन्हें…..सुबह से आपने देखा भी नहीं…इन्हें….देखो ये दोनों आपके बच्चे नाराज हैं आपसे…नुन्नु और मन्नू….सुबह से बोल रहे हैं…पापा कहाँ है….चुसो अब इन्हें….अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह …….म्मम्मम ओग्ग्ग्ग ओह्ह्हह्ह बाबु…..अह्ह्ह्ह हाआन्न्न…..काटो….खा जाओ….अह्ह्ह….ओग्ग्ग्ग….” उसे कुछ ज्यादा ही लाड आ रहा था मुझपर…अपने मुम्मो को मेरे बच्चे बना डाला..
मैंने भी उन्हें बाप का प्यार देना शुरू कर दिया..मेरा क्या जा रहा था.
ऋतू की तेज और पैनी जीभ ने अन्नू की चूत के अन्दर अपना कमाल दिखाना शुरू कर दिया…
अन्नू मेरे लंड को चूस रही थी पर अपनी चूत पर होते ऋतू की जीभ और दांतों के हमलो से उसकी हालत बड़ी खराब हो रही थी… अंत में उसने मेरा लंड अपने मुंह से निकाल दिया और ऋतू को नीचे लिटाकर उसके मुंह पर अपनी चूत के सहारे जा बैठी…अब ठीक है…
और फिर उसने अपने कुल्हे हिला हिलाकर उसके मुंह और दांतों पर जब अपनी चूत रगडनी शुरू की तो उसकी चीखों से पूरा घर गूँज उठा..
“अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ऋतू..दीदी……क्या चुस्ती हो…….अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह और जोर से चुसो……मेरी चूत…..अह्ह्ह्हह्ह ओफ्फ्फ्फ़ ओफ्फफ्फ्फ़ ओह्ह्हह्ह्ह्ह मर गयी….मम्मी…..अह्ह्हह्ह……..क्या कर रही हो…..काटो मत न…..अह्ह्ह्ह……हां यही……यही…चुसो….अऊओफ़ फू फ्फोफोफ्फ़ ओ फफफफ फ्फूफूफ़ …..”
ऋतू के मुंह में शायद उसकी क्लिट आ गयी थी, जिसे चूसकर वो मजे ले रही थी और अन्नू के तो कुत्ते फेल हो गए ….
उसने अपनी चूत को रगड़ने की स्पीड उतनी ही बढ़ा दी उसके मुंह पर……
सोनी की चूत भी बहकर नीचे कीचड़ सा जमा कर रही थी, वो उछल कर मेरी गोद में आ चड़ी और मेरे लंड के ऊपर अपनी चूत को रखकर अपनी टाँगे लपेट दी मेरी कमर पर…
मेरा लंड स्र्रर्र्र्रर्र्र करके उसकी गीली सी चूत के अन्दर जा पहुंचा…
अह्ह्हह्ह्ह्ह बाबु…….चोद डालो मुझे ………सुबह से तड़प रही हूँ…मैं आपके लंड के लिए….अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह म्मम्मम्म क्या लंड है आपका…साब…..अह्ह्हह्ह……जोर से और जोर से….”
मैंने उसके कुल्हे अपने पंजो में दबाये और उसकी चूत में लंड से धक्के मारना शुरू कर दिया….वो भी मेरी गोद में उछल -२ कर बड़े मजे से चुदाई करवा रही थी, उसके उछलने से उसके मोटे मुम्मे मेरे मुंह पर थपेड़े मार रहे थे…मैंने उसके उछलते हुए मुम्मो को अपने मुंह में केच करने की कोशिश की और सफल भी हो गया…
जैसे ही उसका दांया निप्पल मेरे मुंह में अटका उसकी जान ही निकल गयी, मैंने शायद कुछ ज्यादा ही तेज पकड़ लिया था उसके निप्पल को, मैंने जैसे ही उसे छोड़ा, तो पाया की मेरे दांतों की वजह से उसके निप्पल के चारों तरफ निशान सा बन गया है और उसमे से थोडा खून भी निकल रहा है…वो तड़प रही थी…
मैंने उसके निप्पल को मुंह में भरा और उसे चुब्लाना शुरू कर दिया…दर्द होने के बावजूद उसके शरीर में से मजे की तरंगे उठने लगी और वो अपना दर्द भुला कर और तेजी से अपनी चूत को मेरे लंड पर पटकने लगी…. और जल्दी ही उसकी चूत के अन्दर से रस का फव्वारा फूट पड़ा और नीचे लेटी हुई उसकी बहन के मुंह पर आकर गिरा…उसके मुंह से होता हुआ उसका रस नीचे लेटी हुई ऋतू के मुंह तक जा पहुंचा…जिसके मुंह जितना आया उन्होंने उसे चाट कर साफ़ कर दिया…
मेरा लंड अभी भी खड़ा था, मैंने सोनी को नीचे उतरा और अन्नू को अपने पास आने को कहा…वो ऋतू के मुंह से उठी और मेरे लंड को पकड़कर मुझे सोफे तक ले गयी और अपनी मोटी गांड उठा कर मुझे बोली…
” डाल दो साब…..पीछे से डालो मेरी चूत में अपना लंड….”
मैंने उसकी बात मानी और ऋतू की द्वारा चाटी गयी चूत , जो काफी गीली हो चुकी थी, में अपना लंड डाला और धक्के मारना शुरू कर दिया….
सोनी मेरे लंड से उतर कर ऋतू के पास गयी और उसके ऊपर 69 वाले पोस में लेट गयी, ऋतू को तो उसकी चूत में से निकलती रसमलाई चाटने में बड़ा मजा आया, सोनी ने भी ऋतू की चूत पर जब मुंह लगाया तो वहां से निकलते मीठे पानी के झरने से अपनी प्यास बुझाने में उसे भी काफी मजा आने लगा…
मैंने अन्नू को गांड के छेद में अपना अंगूठा फंसाया और उसे मसलने लगा, उसे बड़ा मजा आ रहा था चूत में लंड और गांड में अंगूठा लेने में.. “अह्ह्हह्ह ह्ह्ह्हह्ह हाय…..मर गयी……साब…..क्या मारते हो….आआअप…..अह्ह्ह्हह्ह…..हाँ ऐसे ही करो….और जोर से….गांड को मसलो न…साब….चोदो मुझे…….”
मैंने उसके कुलहो पर जमे मांस को अपनी उँगलियों से आटे की तरह गूंधना शुरू कर दिया..और लंड को उसकी चूत की दीवारों से पटकना…
जल्दी ही मेरे लंड से रस की बारिश होने लगी और उसकी चूत में से भी रस का बाँध फूट पड़ा, दोनों तरफ से प्रेशर आकर उसकी चूत के अन्दर एक बवंडर सा बनाने लगा और जल्दी ही उस प्रेशर की वजह से उसकी चूत में से रस की पिचकारियाँ बाहर की और रिसने लगी…
“अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह होय्य्य्य…….मार गयी……मैं तो गयी……अह्ह्ह्हह्ह…..साब……मजा आ ….. अआः …….. गया….अह्ह्हह्ह…… ओफ्फ्फ्फफ्फ्फ़…….म्मम्मम्मम……”
और गहरी साँसे लेती हुई उसकी गांड नीचे की और लेंड करने लगी..मेरा लंड पूपप करके उसकी चूत से बाहर निकल आया और उसके पीछे मेरा और उसका रस भी…
ऋतू भी झड चुकी थी , उसका मीठा पानी पीकर सोनी की प्यास भी बुझ गयी ..जल्दी ही सभी लोग सोफे पर एक लाइन में आ बैठे, नंगे और एक दुसरे के शरीर से खेलने लगे…
चुदाई तो हो गयी पर फिर से हम सभी आने वाले कल की चिंता में आकर ये सोचने लगे की कल से ये चुदाई कैसे संभव होगी…
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