मैंने उसे समझाते हुए कहा “देखो सोनी, हमारे घर में कोई भी एक दुसरे से शर्म नहीं करता, सभी एक दुसरे के साथ मस्ती भी करते हैं और मजे भी लेते हैं, तुम जब तक यहाँ हो, तुम भी मस्ती करो और मजे लो..जैसे तुम्हारी छोटी बहन ले रही है..देखो, और क्या तुम कल वाले अधूरे काम को पूरा नहीं करना चाहोगी.. .”?? और मैंने उसे अपनी तरफ खींच लिया, उसके मोटे चुचे मेरे सीने से लग गए, उसने अन्नू की तरफ देखा जिसके आगे मेरे पापा और पीछे हरीश अंकल खड़े होकर उसके गर्म और ताजे ग़ोश्त के मजे ले रहे थे.
वो जानती तो थी की उसकी बहन सभी गंदे काम करती है, पर आज शायद पहली बार उसे अपने सामने ही रंगरेलियां मनाते हुए देख रही थी, जिसकी वजह से उसकी चूत में भी सीलन आने लग गयी थी, मैंने उसके शरीर को मसलना शुरू किया और उसके फेले हुए कूल्हों को दबाकर उसके शरीर से उठने वाली तरंगो को और तेज कर दिया.
उसके मुंह से हलकी -२ सिस्कारियां निकलने लगी थी, अचानक उसने मेरी तरफ मुंह किया और मेरे होंठों को चूसने लगी, किसी प्यासी मछली की तरह, और मेरे मुंह से सारा पानी निकालकर पीने लगी. वो काफी गर्म हो चुकी थी, वो जानती थी की कल वाली घटना के बाद आज उसकी चुदाई तो पक्की है,
और जब उसने हमारे घर का रंगीन माहोल देखा, जहाँ बाप-बेटी, माँ-बेटा, सभी लोग एक दुसरे के साथ मजे लेने में लगे हुए हैं, और यहाँ तक की उसकी छोटी बहन के शरीर से भी सभी खेल रहे हैं तो वो क्यों पीछे रहे,
उसके अन्दर की जवानी भी फूट फूटकर बाहर आने लगी, उसके निप्पल कड़क होकर सूट के ऊपर तन गए और मेरी छाती में चुभने लगे.
मैंने एक हाथ से उसके सूट का किनारा पकड़ा और उसे ऊपर करके निकाल दिया..और फिर उसकी मेली सी ब्रा भी निकाल फेंकी, अब वो भी हमारी तरह ही आधी नंगी हो चुकी थी..
आज उसके चुचे कुछ ज्यादा ही मोटे, कड़क और दबंग टाइप के लग रहे थे, उनपर सजे निप्पल तो गजब ढा रहे थे, मेरे लंड ने अपना पूरा विकराल रूप ले लिया था. अयान अब मम्मी के नीचे वाली हिस्से को भी उतारने में लगा हुआ था, दीपा आंटी भी अपनी बहन के साथ खड़ी हुई अपने बेटे के उबलते हुए लंड को देखकर गर्म होने लगी थी.
मम्मी ने आज नीचे कच्छी भी नहीं पहनी हुई थी, अयान ने उन्हें नीचे जमीन पर लिटाया और उनकी चूत पर अपने होंठ रखकर वहां से गरमा गरम पानी पीने लगा, दीपा आंटी साथ में खड़ी होकर अपनी चूत और चुचे को एक साथ मसल रही थी, उन्होंने अपने आप ही अपने बाकी बचे हुए कपडे उतार फेंके और नंगी होकर वो भी अपनी बड़ी बहन के साथ वहीँ जमीन पर लेट गयी,
ये सोचकर की शायद उनका भी नंबर आएगा, चूत चटवाने का…अयान ने उन्हें निराश नहीं किया , थोड़ी देर तक मम्मी की चूत चाटने के बाद उसने अपनी मम्मी दीपा की टांगों के बीच लेटकर उनकी चूत से निकलते हुए रसीले पानी को पीकर उनकी चूत को तृप्त किया…और अपनी जीभ को भी..
ऋतू और सुरभि ने एक दुसरे के चुचे चाटने शुरू कर दिए, वो दोनों आज लेस्बियन वाले मूड में थी, उन्हें मालुम था की आज लंडो की कमी पड़ेगी, दो-दो नयी चूतें जो आई थी आज..
पर कोई बात नहीं , वो रात को चुद कर अपना हिसाब पूरा कर लेंगी, और तब तक एक दुसरे की चूतें चाटकर ही काम चला लेंगी.
पापा ने अन्नू को अपने ऊपर लिटा लिया था..और उसकी जींस उतार कर उसे भी नीचे से नंगा करके उसे अपने मुंह की सवारी करने लगे, ऊपर खड़े हुए हरीश अंकल ने अपना लंड बाहर निकाला और पापा के मुंह के ऊपर बेठी हुई रंडी के मुंह में डालकर मजे लेने लगे. साले दोनों सांढू मिलकर उस रसीली अन्नू का बैंण्ड बजाने की तय्यारी कर रहे थे.
हमारे घर के पीछे वाले आधे हिस्से में घाॅस है और आधे में फर्श..
मैंने सोनी को घाॅस पर लिटाया और उसके नीचे वाले हिस्से को भी नंगा कर दिया..
उसने नीचे काले रंग की पेंटी पहन रखी थी, जिसमे से उसकी फूली हुई चूत बड़ी दिलकश लग रही थी, मैंने उसपर हाथ फेरा तो उसके मुंह से एक आह सी निकल गयी…
“आआआआआआआआह्ह्ह्ह बाबु……अम्म्मम्म्म्म ….अह्ह्ह्ह …”
उत्तेजित होने की वजह से उसके मुंह से लार निकल कर उसके होंठों को भिगोने लगी. बड़ी ही सेक्सी लग रही थी वो उस समय…
मैंने ऊपर उठकर उसके गीले होंठों को चुसना शुरू कर दिया और उसके चुचे अपने हाथों में पकड़कर दबाने लगा, आज उसके निप्पल बड़े ही कड़क थे, मानो पत्थर के हो चुके हो…
मैंने सर नीचे किया और उसके दांये निप्पल को मुंह में लेकर चूसने लगा, बड़ा ही खट्टा सा स्वाद था उसके जिस्म का..भीनी -२ सी महक आ रही थी, शायद पावडर लगा कर आई थी वो अन्दर…
मैंने जीभ से उसके उरोजों को चाटना शुरू किया और उसके पेट से होता हुआ, नाभि पर आकर अपनी जीभ अन्दर डालकर वहां कुरेदने लगा, उसे शायद गुदगुदी हो रही थी ऐसा करने से…पर जब मैंने थोडा और नीचे होकर उसकी चूत को पेंटी के ऊपर से ही अपने मुंह में भींच लिया तो उसकी तो बोलती ही बंद हो गयी,
उसने मेरे सर को अपनी चूत के ऊपर दबा कर मुझे और जोर से अपनी चूत को चाटने और काटने पर मजबूर कर दिया. मैंने एक हाथ से उसकी कच्छी को पकड़ा और उसे उतार दिया, उसके भीने रस में डूबी कच्छी को मैंने जब खींचकर पेरों से नीचे उतारा तो उसकी चूत का पूरा रस उसकी टांगों से रगड़ खाता हुआ उसे भिगोता चला गया..
मैंने नीचे से उसकी टांगों को चाटना चुरू किया और सारा रस अपनी जीभ में समेटते हुए ऊपर तक आया और उसकी चूत पर आकर मैंने दोबारा जब उसकी नंगी चूत को अपनी जीभ से छुआ तो उसके मुंह से एक अजीब तरह की हुंकार निकली…”हुऊऊऊ ,…….आआआह्ह ….ऊऊऊ बाबु……..मरररर गयी……अह्ह्हह्ह्ह्ह स्स्स्सस्स्स्स स्सस्सस्सस ,,,,,,म्मम्मम्म ”
और फिर मैंने अपनी जीभ और होंठ से उस शहद वाली झील से पानी पीना शुरू किया, मैं जितना साफ़ करता, अन्दर से और पानी बाहर आ जाता..
मैं झक्क मारकर ऊपर की तरफ चल दिया, मैं जानता था की इसका पानी तो अब पूरी जिन्दगी निकलता ही रहेगा..मैंने अपना तना हुआ लंड उसके मुंह के पास करके उसके मुंह में पेल दिया,
वो चपर -२ करके बड़ी ही बेसब्री से उसे चाटने लगी, मेरी गांड के नीचे उसके पेने से निप्पल थे जो मुझे चुभ से रहे थे, मैंने हाथ नीचे करके उन्हें अपनी उँगलियों से दबाना शुरू किया..वो लंड चुसे जा रही थी और मचलती जा रही थी.
ऋतू और सुरभि ने 69 वाले पोस में एक दुसरे की चूत को आइसक्रीम की तरह चुसना शुरू कर दिया था, आज उनकी चूत से काफी मलाई निकल रही थी, जिसका मजा वो दोनों ले रहे थे.
वैसे असली मलाई तो अयान के हिस्से में थी, जो उसे अपनी माँ और मेरी माँ की चूत के अन्दर बारी-२ से घुसकर बड़े मजे से खा रहा था. पापा ने सोनी को नीचे धकेला और उसकी चूत को अपने लंड पर टीकाकार उसे नीचे कर दिया…वो बहकती हुई सी पापा के मोटे मुशटंडे लंड पर बैठ गयी.. आआआआआअह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह…..आपका तो छोटे बाबु जैसा ही है….”
साली ने अपना मुंह खोलकर बता ही दिया की वो मेरे से चुद चुकी है…पर मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था.. तभी पीछे से आकर हरीश अंकल ने उसकी गांड के छेद में अपनी थूक से भीगी ऊँगली डाली और रास्ता बनाकर वहां अपना लंड टिका दिया, और फिर उसके मुम्मे पकड़कर एक तेज झटका मारा..
“अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ओह्ह्ह्हह्ह…….धीरे….करो बाबु……इतने मोटे लंड पहली बार गए हैं…मेरी चूत और गांड में….” हरीश अंकल अपने छोटे से लंड की तारीफ सुनकर फुले नहीं समाये…वो समझ रहे थे की मोटे लंडो में उन्हें भी शामिल किया जा रहा है, पर वो शायद नहीं जानते थे की वो मेरे और पापा के लंडो की बात का रही है..
पर जो भी हो, इस बात ने हरीश अंकल के अन्दर एक नया जोश भर दिया और फिर जो उन्होंने रेल चलायी अन्नू की गांड में, वो साली कुतिया की तरह चिल्लाने लगी…नीचे से मेरे पापा और पीछे से हरीश अंकल, दोनों ने अपने लंडो को उसकी चूत और गांड के अन्दर ऐसे पेलना शुरू किया जिसका कोई जवाब ही नहीं था…और वो बेचारी…बीच में फंसी हुई…जोर जोर से चिल्ला रही थी..
“अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बाबु……अह्ह्हह्ह्ह्ह होऊँ……..अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ओफ्फ्फ्फ़ ओफ्फफ्फ्फ़ अह्ह्ह्ह अयीईई अह्ह्ह्हह्ह धीएरे…….माआआआ माआआआ मर्र्र ई रे……आःह्ह ओफ्फ्फफ्फ्फ़ मैं आई…..आःह्ह ऊऊऊ अऊऊऊओ……..”
और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया..पर पापा और हरीश अंकल पर तो जैसे भूत चढ़ गया था, उनकी स्पीड कम नहीं हुई.वो लगे रहे. उसके बाद ना जाने अन्नू की चूत ने कितनी बार पानी छोड़ा होगा वो भी नहीं जानती थी शायद.
मम्मी ने दीपा आंटी को अपने ऊपर खींच लिया और उनके होंठ चूसने लगी, मैंने पहली बार मम्मी को अपनी बहन को किस करते हुए देखा था, दीपा आंटी भी अपनी चूत को मम्मी की चूत पर रगड़ रही थी.. पीछे से अयान ने मौका देखकर मम्मी की चूत में अपना लम्बा सा लंड पेल दिया..
“अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह अयान…….बेटा…….अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह अह्ह्हह्ह हान्न्न्न ”
और फिर वो अपनी बहन के होंठ चाटने लगी…
थोड़ी देर धक्के मारने के बाद उसने अपना लंड निकाला और थोडा ऊपर करके अपनी मम्मी की चूत पर टिकाया और धक्का मारकर उनकी रसीली सुरंग के अन्दर दाखिल हो गया…
” अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ह्ह्ह्हह्ह हूऊऊऊ …. म्मम्मम्मम्म ”
उन्होंने अपने चुचे पकड़कर मम्मी के मुंह में डाले जैसे अपनी बड़ी बहन को दूध पिला रही हो.
अब अयान बारी बारी से मम्मी और दीपा मौसी की चूत को मार रहा था…
मेरे लंड को पूरी तरह से चूसने के बाद मैं थोडा नीचे हुआ..वो समझ गयी की अब वो समय आ गया है जिसका इन्तजार हर लड़की करती है, यानी उसकी चूत की सील टूटने का..
मैंने उसकी दोनों टाँगे पकड़ी और उन्हें हवा में उठा दिया…उसकी आँखें मेरी आँखों से मिली, मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा, उसका पूरा शरीर अकड़ गया..मैंने उसकी चूत से निकलते हुए रस से अपने लंड के सिरे को भिगोया…और फिर उसकी चूत की कोमल सी पंखुड़ियों को खोलकर हलके से अपना भार उसकी चूत में डाला…उसकी आँखे बाहर निकलने को आ गयी….वो डर रही थी…
“बाबु….दर्द…हो रहा है…..”
मैंने नीचे झुककर उसे चूम लिया, पर नीचे झुकने की वजह से मेरा लंड उसकी चूत में थोडा और अन्दर चला गया, इसलिए जब मैं उसे चूम रहा था तो उसके मुंह से हलकी सी चीख निकल रही थी, पर मेरे मुंह में होने की वजह से वो वहीँ घुट कर रह गयी,
मैंने ज्यादा देर करना उचित नहीं समझा और अपनी पूरी ताकत से एक तेज झटका मारा….उसके मुंह से एक गुब्बारे जैसे हवा निकली, और पीछे से उसकी चीख… “अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ह उयीईईईईईईइ मार डाला……अह्ह्हह्ह्ह्ह बड़ा दर्द हो ररह है……अह्ह्हह्ह्ह्ह ”
मेरे लंड पर उसके गर्म खून का एहसास हुआ….मैं समझ गया की उसकी कुंवारी चूत का उद्घाटन हो चूका है…
मैं थोड़ी देर तक उसके नम से होंठों को चुसता रहा और हाथों से उसके चुचे दबाता रहा..
फिर मैंने अपनी कमर धीरे-२ हिलानी शुरू की, और जल्दी ही स्पीड से उसकी चूत को मारने लगा…
अब उसकी चीख सिस्कारियों में बदल चुकी थी, उसके हिलते हुए मुम्मो को देखकर, मैंने तेजी से उसकी चूत में धक्के लगाने शुरू कर दिए… उसने अपनी टाँगे हवा में उठाकर और खोल ली और मेरी लय से लय मिलकर मुझे और खुद को मजे देने में लग गयी.
ऋतू और सुरभि एक दुसरे की चूत को कई बार झाड कर पी चुकी थी, उनमे और हिम्मत नहीं बची थी..सो वो एक किनारे पर बैठकर अपने पुरे परिवार को देखने लगी.
अयान ने अपनी बहादुरी दिखाते हुए मम्मी को दो बार धाराशायी कर दिया था, दीपा आंटी भी कई बार झड चुकी थी….
और जब अयान के लंड में से रस निकलने की बारी आई तो उसने मम्मी और दीपा आंटी को सामने लिटाकर उनके ऊपर अपने लंड से पिचकारियाँ मारकर उनके नंगे जिस्मों को भिगोना शुरू कर दिया…
सच में, असली होली तो अब खेल रहे थे वो..
और वो साली रंडी अन्नू, जिसने ना जाने कितने ही लंड लिए थे आज तक अपनी चूत और गांड में, वो दोनों बुड्डों पर भारी पड़ रही थी, पहले हरीश अंकल और फिर पापा ने उसकी चूत और गांड में अपना वीर्य दान किया….पर अंत तक वो न झड़ी…
उसने पापा और हरीश अंकल को नीचे लिटाया और उनके मुंह के ऊपर खड़ी होकर अपनी चूत को बड़ी ही बेरहमी से मसलने लगी.
.”अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्हह्ह्ह्ह साले……झड़ गए….दोनों….मेरी चूत तो प्यासी ही रह गयी…..अह्ह्ह्हह्ह……..”
और फिर उसकी चूत के अन्दर का लावा फूटा…और उसके साथ शायद उसका पेशाब भी….उसके गाड़े पानी की बोछारें पापा और अंकल के ऊपर थी…और ऊपर खड़ी हुई रंडी अन्नू जैसे अपनी चूत की पिचकारी से उन्हें भिगोती हुई कह रही हो….होली है….
उसकी चूत से निकलता हुआ रस पापा और हरीश अंकल के चेहरे और पेट को भिगो रहा था….और अंत में जब उसकी टंकी खाली हो गयी तो वो बेजान पत्ते जैसी लहरा कर अपने ही बनाये हुए कीचड में गिर पड़ी और गहरी साँसे लेने लगी.
मेरा लंड भी अब झड़ने के काफी करीब था…सोनी का शरीर ठंडा सा पड़ चूका था, वो शायद झड चुकी थी, मैंने सोचा की लंड बाहर निकाल कर उसके चेहरे को भिगो दूं, पर कुंवारी चूत के अन्दर झड़ने का लालच मुझे वो करने नहीं दे रहा था,
मैंने मन ही मन सोचा, कल ऋतू से लेकर कोई गोली दे दूंगा, देखी जायेगी….और अगले ही पल मेरे लंड की पिचकारी भी चल पड़ी और मैंने उसकी चूत की दीवारों पर होली खेलनी शुरू कर दी…….
उसे भी जब अपनी चूत के अन्दर गर्म पानी का एहसास हुआ तो उसने अपनी टाँगे मेरे चार्रों तरफ लपेट दी और मेरे सर को अपने वक्ष स्थल पर रखकर उसे सहलाने लगी…
उसके पसीने की महक मुझे अब भी मदहोश कर रही थी..
मैंने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाला, और उसके पीछे से मेरा रस और उसकी चूत से निकला खून भी बाहर आने लगा… मैंने पाईप उठा कर उसकी चूत को साफ़ किया और बारी बारी से सभी वही खड़े होकर नंगे नहाने लगे…
ऐसी होली की कल्पना तो मैंने कभी नहीं की थी…
नहाने के बाद भी सोनी वहीँ जमीन पर पड़ी रही और अपने अन्दर से निकल रहे लावे का मजा लेती रही..उसकी चूत में अभी तक मेरे लंड से निकली रगड़ की तरंगे उठ रही थी.
पहली बार चुदी थी वो अपनी जिन्दगी में, इसलिए चुदने के साथ ही अब उसकी चूत बाहर की दुनिया के लिए अपने किवाड़ खोल चुकी थी, जिसमे जो चाहे अब आ जा सकता था,
चुदाई में इतना मजा आता है , ये अगर उसे पहले पता होता तो वो काफी पहले चुद चुकी होती, वो तो उसकी माँ और छोटी बहन ने उसे बच्ची बना कर रखा हुआ था और खुद ना जाने कहाँ-२ से लंड खाती होंगी..
जितना समय उसने बिन चुदे बिताया है, अब उतना ही समय वो चुदना चाहती थी उसने प्रण कर लिया की अपने खोये हुए टाइम को वो चुदाई में लगाकर पूरी दुनिया के लंडो से चुदवायेगी , यही इसका प्रायश्चित्त होगा.
मैंने उसके शरीर को पूरी तरह साफ़ करने के बाद उठाया, और अपनी बाँहों में लेकर अपने कमरे की तरफ चल दिया ..
मेरे पीछे पीछे अन्नू भी आ गयी, उसे शायद अपनी बहन की कुछ ज्यादा ही फिकर थी.. मैंने सोनी को अपने बिस्तर पर ले जाकर लिटाया और उसे गौर से देखने लगा, वो सफ़ेद चादर पर किसी नागिन की तरह लहरा रही थी, उसका नंगा बदन जैसे जल रहा था, क्योंकि उसके शरीर का सारा पानी सूख चूका था, बिना पोंछे …
मैंने उसकी टांगो को उठाया और उसकी चूत के सामने बैठ गया अपने घुटनों के बल, उसकी चूत को पहली बार मैं गौर से देख रहा था, जो अभी-२ चुदी थी, चुदने की वजह से वो काफी लाल हो चुकी थी, बिलकुल उसके गालों की तरह .. अन्नू मेरे पीछे आकर खड़ी थी, वो मुझे अपनी बहन की चूत के सामने बैठे देखकर समझ गयी की एक और राउंड चलेगा अभी यहाँ… मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ डालकर चाटना शुरू किया..
अन्नू उसकी बगल में आकर बैठ गयी, और उसके मुम्मो को सहलाने लगी, और साथ ही साथ अपनी चूत में भी ऊँगली डालकर खुजाने लगी. मेरे मुंह में ताजे पानी की स्मेल और उसकी चूत के अन्दर से निकले गाढ़े रस की खुशबू आ रही थी, मेरी जीभ उसे पूरी तरह से साफ़ करने में लगी हुई थी.
वो मचल रही थी, एक तो मेरी जीभ थी उसकी चूत में और दूसरा उसकी बहन उसके निप्पल्स को मसल रही थी.. और फिर जब अन्नू ने नीचे मुंह करके उसके निप्पल को मुंह में भरा तो उसकी चीख निकल गयी..
“आआआआआआआआह्ह्ह्ह अन्न्नूऊऊ ……म्मम्मम्म ….अह्ह्हह्ह ….क्या हो रहा है ये मुझे…….कितना मजा आ रहा है आज……चूस….अन्नु……चूस….मेरे….दूध…..पी ले मेरी रानी……अजजा………आआ …….अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह हाआन्न्न…काट मत ऋ….अह्ह्ह्ह ….”
और जब मैंने अपनी होंठों से उसकी चूत की पंखुड़िया चुसनी शुरू की तो वो उठ कर बैठ गयी,
उससे बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था… “आःह्ह्ह हह ओफ्फफ्फ्फ़ बाबु……आज मेरी सारी खुजली मिटा दो….हन्न्न्नन्न चूस इसे ऐसे ही…….अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह म्मम्मम्म मर्र्र्रर गयी रे…..अह्ह्ह्हह्ह…..”
उसने मुझे ऊपर खींचा और मुझे बिस्तर पर पटक दिया…और खुद मेरे ऊपर सवार हो गयी….. मेरा खड़ा हुआ लंड उसकी गांड से टक्कर मार रहा था….उसकी चूत से टपकता हुआ शहद मेरी गोटियाँ भिगो रहा था…….मैंने ऊपर मुंह करके उसके मुम्मो को अपने मुंह में भरा और चूसने लगा…वो बोली.. “मेरे उरोजों पे रेंगते तेरे होंठ, मुझे मदहोश किये जाते हैं कुछ करो ना, हम तेरे आगोश में बिन पिए बहक जाते हैं ”
साली को चुदाई के समय भी कविता सूझ रही है…वो मेरे लंड को अपनी चूत में लेना चाहती थी…
पर मैं उसे थोडा और तड़पाना चाहता था…मैं उसकी चूत में लंड डाल नहीं रहा था. मेरी हरकत देखकर उसने अपनी बहन की तरफ देखा और बोली….
“अन्न्न्नु…..बाबु मुझे तडपा रहा है…….कुछ कर ना…..”
अपनी बड़ी बहन की आज्ञा मानकर अन्नू उसके पीछे आई और मेरे लंड और सोनी की चूत के बीच अपना मुंह डालकर रे लंड को अपने गीले मुंह में पकड़कर कैद कर लिया मेरी तो सिसकारी सी निकल गयी उसके मुंह में अपना लंड फंसा पाकर…
.”आआआआह्ह्ह्ह अन्नु……क्या कर रही है….साली…..अह्ह्ह्हह्ह ..”
मेरे साली बोलने पर सोनी तो ऐसे खुश हो गयी जैसे मैं उससे शादी करके सही में उसकी बहन को साली बना दूंगा…उसने बड़ी प्यार भरी नजरों से मेरी तरफ देखा और बोली…
“ओह्ह्ह….मेरे राजा….आ भी जा ना……कितना तड्पाएगा…..डाल देना….”
साली इतने प्यार से बोलेगी तो चूत क्या गांड भी मार लूँगा तेरी… मैंने अपना विरोध करना छोड़ दिया….
अब मेरा लंड स्टील जैसा हो चूका था…अन्नू ने मेरे लंड को अपने मुंह से निकला और अपनी लम्बी जीभ से अपनी बहन की चूत को चाटा…और उसके ऊपर जमा हुआ गाड़ा रस इकठ्ठा करके निगल गयी…
अन्नू की जीभ अब सोनी की चूत पर थी और उसकी गर्दन मेरे लंड से टकरा रही थी… उसने भी अब ज्यादा देर करना उचित नहीं समझा और मेरे लंड को फिर से अपने होंठों के आगे दबाकर अपनी बहन की चूत के हवाले कर दिया.. मेरे लंड की महक जैसे ही उसकी ताजा चुदी चूत को मिली उसने मेरे लंड को अपनी मखमली चादर में लपेट लिया..
चूत तो अभी भी टाईट थी उसकी..जिसमे मेरे लंड के जाने में थोड़ी सी प्रोब्लम हुई पर चुदने को बेताब बनी बैठी रंडी जैसी सोनी ने उस दर्द की परवाह किये बिना जोर जोर से उछलना शुरू कर दिया मेरे लंड के ऊपर…
और थोड़ी ही देर में फिर से उसे मजा आने लगा…
वो चीखने लगी….”अह्ह्हह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह आआआ ओफ्फ्फ्फ़ ओफ्फ्फ्फ़ ओह्ह्ह ओह्ह्ह्ह ….मेरे राजा….रोज चुदेगी अब ये तेरी सोनी…..तू चोदे या तेरा बाप चोदे….अह्ह्ह्ह मुझे रोज लंड चाहिए अपनी चूत में….”
वो बिफर चुकी थी….उसकी जुल्फे चेहरे को ढक कर उसे बड़ा नशीला सा बना रही थी…
पीछे लेटी हुई अन्नू अभी भी अपनी जीभ निकाले, पिस्टन जैसे चल रहे लंड को चाट रही थी….एक दो बार तो उसकी जीभ लंड और चूत में फंसकर उसकी बहन की चूत में भी घुस गयी…बड़ा मजा आ रहा था, इन दोनों ठरकी बहनों के साथ….
अन्नू की चूत भी पानी छोड़ रही थी…वो उठ कर मेरी तरफ आई और अपनी बहन की तरफ मुंह करके मेरे मुंह पर बैठ गयी, उसकी रसभरी चूत ने मेरे पुरे मुंह को गीला कर दिया..मैंने अपने मुंह और लंड से एक साथ कमाल दिखाना शुरू किया…
नीचे से झटके देकर सोनी को चोदने लगा और ऊपर से अपने मुंह को झटके देकर अन्नू की चूत को…
मैं अपने सर को ऐसे झटके दे रहा था मानो मैं उसकी चूत में उगे हुए अंगूर उछल कर अपने मुंह से तोड़ने की कोशिश कर रहा हूँ…
अन्नू की गद्देदार गांड मेरे चेहरे को बड़े प्यार से दबा कर मुझे और भी उत्तेजित कर रही थी….
मैंने ऊपर हाथ करके अन्नू के मोटे स्तनों को पकड़ा और उन्हें दोहना शुरू किया…. और फिर हाथ आगे करके सोनी के तने हुए पर्वतों से भी बर्फ खुरचने लगा..
अचानक अन्नू ने आगे मुंह करके अपनी बड़ी बहन के होंठों को अपने मुंह में दबा लिया… पहले तो वो चोंक गयी पर फिर उसने भी उसका साथ देना शुरू कर दिया…सच में बड़ा प्यार था इन दोनों बहनों में ..
वो दोनों एक दुसरे को चूम चाट रही थी और उन दोनों के बीच मेरे हाथ उनकी छातियों के बीच फंसकर मसले जा रहे थे, दोनों तरफ से.. पुरे कमरे में पुच पुच…फचक फचक …चपर चपर….की आवाजें गूँज रही थी…
सोनी झड़ने के काफी करीब थी..उसने अपनी स्पीड बड़ा दी और जोरों से आवाजें निकाल कर मुझपर कूदने लगी…
“अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह बाबु……चोदो मुझे…..जोर.से……अह्ह्ह्हह्ह ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ ऑफ…..अह्ह्हह्ह फाड़ डालो सोनी की चूत……अह्ह्हह्ह मारो मेरी चूत….अपने मोटे लंड से….अह्ह्हह्ह…….औइ…….माँ ….मैं तो गयी रे….अह्ह्ह्ह…”
और उसकी चूत में से गर्म बर्फ पिघल कर मेरे लंड को भिगोने लगी…अपनी बहन को देखकर अन्नू ने भी अपनी चूत को मेरे मुंह के ऊपर रगड़ना तेज कर दिया और जल्दी ही वहां से भी बारिश होने लगी मेरे मुंह के ऊपर और अन्दर….
उसका इतना पानी निकला की मेरे मुंह और गालों के साथ-२ मेरी आँखों को भी भिगो गया… मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था…इसलिए मैंने भी अपने हथियार डाल दिए और अपने लंड से लगभग दो तोला वीर्य निकाल कर सोनी की चूत को भिगो दिया…
अन्नू मेरे लंड से उठी और मेरे लंड के पास जाकर, अपनी बहन की चूत से निकलते हुए लाजवाब मिश्रण को चाटने लगी… सोनी नीचे झुकी और मेरे मुंह से अपनी बहन की चूत से निकला रस जीभ से उठा उठा कर पीने लगी…
हम सभी थक चुके थे..अब काफी भूख लगी हुई थी..दो बार लगातार चुदाई के बाद अब मेरे पेट में चूहे कूद रहे थे…मैंने उन दोनों को लेकर नीचे की और चल दिया…हम सभी अभी भी नंगे थे..
नीचे उतरते हुए मेरे लंड के साथ साथ उन दोनों के मुम्मे ऐसे उछल रहे थे जैसे रबर से बंधी बाल ऊपर नीचे होती है..
मैं बीच में था और वो दोनों नंगी नौकरानिया मेरे दोनों तरफ, मैं उस समय अपने आपको किसी राजा से कम नहीं समझ रहा था, जिसकी सेवा में दो नंगी दासियाँ साथ चल रही थी..न जाने कब राजाजी का मन कर जाए चुदाई के लिए.
नीचे सोफे पर एक अलग ही प्रोग्राम चल रहा था. मम्मी अपने जीजाजी के लंड के ऊपर बैठ कर टीवी देख रही थी, उनके हाथ में रिमोट था और उनकी चूत में हरीश अंकल का लंड .
अंकल लेटे हुए थे और मम्मी की पीठ उनकी तरफ थी, मम्मी ऊपर नीचे हो रही थी और टीवी भी देख रही थी..
चुदाई और टीवी सीरियल यही दोनों काम मम्मी को सबसे अच्छे लगते थे.अंकल ने हाथ ऊपर करके मम्मी के लटकते हुए पपीते दबा दिए तो उनके मुंह से चीख निकल गयी..
.”आआआआह्ह्ह ये क्या कर रहे हो….थोडा धीरे…..” और फिर से वो टीवी देखने में व्यस्त हो गयी.
अयान चेयर पर बैठा था उसके नीचे कुतिया की तरह ऋतू उसके लम्बे लंड की लम्बाई अपने मुंह से नाप रही थी. उन दोनों की आँखें बंद थी, बड़े मजे से ऋतू उसका लम्बा लंड चूसकर मजे ले रही थी. और अन्दर के कमरे से आती चीखे सुनकर जब मैं वहां गया तो देखा पसीने से तर बतर सुरभि पापा के साथ नंगी जमीन पर लेटी हुई आने वाली मुसीबत को सोचकर घबरा रही थी,
पापा अपने लंड पर सरसों का तेल मल रहे थे और कुछ तेल उस सुरभि की गांड पर भी लगा था, मैं समझ गया की आज पापा सुरभि की गांड में अपना मोटा लंड उतारेंगे..यही सोचकर सुरभि की आँखें घूम रही थी.. पापा ने नीचे झुककर सुरभि की टाँगे ऊपर उठाई और उन्हें अपनी छाती से सटाकर अपना लंड उसकी गांड पर लगा दिया और एक तेज झटका मारकर उसके पिछले दरवाजे से अन्दर दाखिल हो गए..
“आआआआआआआआह्ह्ह्ह अंकल…..अह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ मरर गयी…..अह्ह्ह्ह ……..”
और फिर वो शान्त हो गयी…पापा का लंड उसकी गांड की सतह तक उतर चूका था..उन्होंने नीचे झुक कर उसके उभरे हुए निप्पल को मुंह में भरा और चूसने लगे… और फिर उन्होंने पीछे होकर उसकी गांड में तेजी से धक्के मारने शुरू किये तो रुके ही नहीं…पुरे कमरे में सुरभि की चीखे गूंजने लगी.
उन दोनों को मजे आ रहे थे.
मैंने अन्नू को कहा की नीचे लेट कर सुरभि की चूत चाटे और उसे मजे दे,
वो मेरा आर्डर मान कर नीचे लेट गयी और सुरभि की चूत को चाटने लगी..
दीपा मौसी कहीं नजर नहीं आ रही थी, मैं उन्हें देखने के लिए बाहर गया तो पाया की वो किचन में खड़ी हुई चाय बना रही हैं. मैंने उनसे कहा “अरे मौसी…आप चाय क्यों बना रही है…ये है न, इनसे कहो , ये बना देंगी…” मैंने सोनी की तरफ इशारा करके कहा.
“ये नौकरानिया कम रंडियां ज्यादा हैं….जिन्हें सिर्फ चुदवाने में ही मजा आ रहा है, काम की तो इन्हें कोई फ़िक्र है ही नहीं…”
मौसी की बात सुनकर मेरे साथ खड़ी हुई सोनिया का चेहरा शर्म से झुक गया, सही भी था वैसे, ये दोनों जब से आई थी, काम कम , चुदाई ज्यादा कर रही थी…पर मजा तो दे रही थी न सभी को ..
सोनी आगे हुई और मौसी को कहा “आप हटिये …मैं बना देती हूँ चाय….” मौसी पीछे हुई और नंगी सोनी चाय बनाने लगी. मैं समझ चूका था की मौसी इस समय गुस्से में है, एक तो उनकी कोई चुदाई करने वाला नहीं था और ऊपर से उन्हें खुद चाय बनानी पड़ रही थी,
मैंने उनके गले में अपने हाथ डालकर कहा “आप गुस्से में बड़ी खुबसूरत लगती हो….मौसी….”
मेरी बात सुनकर उनके चेहरे पर मुस्कान तैर गयी, वो इठला कर बोली “अरे रहने दे…जब से ये दोनों छिपकलियाँ आई हैं, तुने तो मुझे एक बार भी ढंग से नहीं देखा (नहीं चोदा)…
मैंने उनके दोनों मुम्मे पकड़ कर दबा दिए और उनकी आँखों में देखकर कहा “मैं तो हमेशा आपकी सेवा में हाजिर हूँ, जब चाहो मुझसे अपनी तारीफ (चुदाई ) करवा लो ..”
और मैंने सूट के ऊपर से ही उनके दोनों निप्पल पकड़ कर उँगलियों से मसलने शुरू कर दिए.
मैंने उनका सूट ऊपर से उतार दिया, उन्होंने नीचे ब्रा नहीं पहनी हुई थी, उनके निप्पल अकड़ कर बाहर निकल चुके थे, उन्होंने मेरे लंड के ऊपर हाथ फेरना शुरू कर दिया, मैंने उन्हें किचन की स्लेब से सटाया और नीचे बैठ कर उनकी सलवार के ऊपर से ही चूत के ऊपर मुंह लगा दिया, वो मचलने सी लगी और मेरे बाल पकड़ कर जोरों से सिस्कारियां लेने लगी…
“आआआह्ह्ह्ह अह्ह्ह ओफ्फफ्फ्फ़ फफफफ मम्म राजा बेटा……अह्ह्ह्हह्ह चूस इसे….अह्ह्हह्ह….. ” और उन्होंने अपनी सलवार का नाडा खोला और उसे नीचे गिरा दिया, साली मौसी ने नीचे कच्छी भी नहीं पहनी हुई थी..
मेरे सामने उनकी गीली चूत जिसपर कोई बाल भी नहीं था, चमकती हुई , अपना रस बरसाती हुई खड़ी थी, मैंने जीभ निकाल कर उनकी चूत को ऐसे चाटना शुरू किया जैसे तिल्ले वाली कुल्फी..
उनकी चूत से निकलता हुआ गाड़ा रस मेरे गले को ठंडक दे रहा था..मैंने उनके नीचे हाथ लगाकर उन्हें स्लेब पर बिठा दिया और खुद खड़ा होकर उनकी टाँगे खोल कर उनकी चूत को फिर से चाटने लगा.
साथ खड़ी हुई सोनी की चाय तो कब की बन चुकी थी, वो अब हमारे बीच चल रहे खेल को देखकर गर्म होने लगी और उसकी बनायीं हुई चाय ठंडी. मौसी ने उसे बेसब्री से हम दोनों की तरफ देखते हुए पाया और फिर जब उनकी नजर उसकी ताजा चुदी चूत पर गयी तो उनके मुंह में भी पानी आ गया, अभी थोड़ी देर पहले वो गर्म चाय पीना चाह रही थी और अब वो गर्म चूत का स्वाद लेना चाहती थी..
उन्होंने सोनी को इशारे से अपनी तरफ बुलाया , और जैसे ही सोनी उनके पास गयी उन्होंने उसके होंठों को चुसना शुरू कर दिया.. वो घबरा गयी, थोड़ी देर पहले ही मौसी उसे गाली दे रही थी और अब प्यार कर रही है…पर मौसी के चूसने से उसकी चूत में से और गर्मी निकलने लगी तो उसे भी मजा आने लगा,
मौसी ने अपना हाथ नीचे करके उसकी चूत पर लगाया और ढेर सारा शहद इकठ्ठा करके उसे चाट लिया, बड़ा अच्छा स्वाद था सोनी की रसीली चूत का…
उन्होंने मुझे पीछे किया और सोनी को अपनी जगह पर स्लेब पर बिठाया, और उसकी टांगे चौडी करके उसकी चूत पर अपने होंठ टिका दिए…और फिर सर पीछे करके मुझे इशारे से उन्हें पीछे से चोदने को कहा…
मैंने उनकी मोटी गांड को थामा और अपना लंड उनकी चूत के रस में डुबोकर गिला किया, और फिर चूत के छेद पर उसे फिर से टीका कर एक झटका मारा, और मेरा लंड उनकी चूत के अन्दर सरकता चला गया.
“अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अयीईईई …………जरा धीरे बेटा…..अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ” और फिर से उन्होंने अपना मुंह सोनी की चूत में डाल दिया और चूसने लगी वहां का रस. सोनी ने भी अपना सर पीछे करके मजे लेने शुरू कर दिए थे, उसकी ताज़ा चुदी चूत पर मौसी की जीभ ऐसे लग रही थी, जैसे कोई दूध में डुबोकर रुई लगा रहा हो..उसे काफी गुदगुदी भी हो रही थी और रोचक तरंगे भी उठ रही थी उसकी चूत के अन्दर से. उसने हिम्मत करके मौसी के सर को पकड़ा और उन्हें अपनी चूत पर घिसना शुरू कर दिया, जैसे गाजर को घिस रही हो हलवा बनाने के लिए. और हलवा तो बन ही रहा था उसकी चूत का, बाकी रही बात मिठास की तो वो उसकी चूत के अन्दर से अपने आप बाहर निकल रही थी.
मेरे लंड पर अब मौसी के रस की सफेदी दिखाई देने लगी थी, मैंने उनकी चूत में अपने लंड को तेजी से धकेलना शुरू कर दिया..
मेरे हर धक्के से वो भी आगे की और सरक जाती और उनके आगे लेटी हुई सोनी की चूत में उनकी जीभ थोडा और अन्दर चली जाती. कुल मिलकर हम सभी को काफी मजा आ रहा था.
बाहर से मम्मी की चीखों की आवाज तेज हो गयी, शायद वो झड़ने वाली थी..
“आह्ह्हह्ह्ह्ह हान्न और तेज चोदो मुझे,……अह्ह्ह्हह्ह डालो और अन्दर तक….अह्ह्ह…..”और उनके साथ ही साथ हरीश अंकल के हुंकारने की आवाजें भी आने लगी, वो दोनों एक दुसरे के ऊपर झड़ चुके थे.
बाहर से अयान और ऋतू की चीखे तो बंद ही नहीं हो रही थी, ऋतू अब अयान के लंड के ऊपर बैठ कर उछाल रही थी , जिसकी वजह से वो शायद कई बार झड चुकी थी.
सोनी भी काफी देर से अपने अन्दर एक सेलाब सी लेकर बैठी थी, जैसे ही उसका सैलाब टूटा उसके गाड़े रस के पीछे -२ उसका पेशाब भी बाहर की और निकलने लगा, दीपा आंटी के लिए ये नया अनुभव था, उन्होंने थोड़ी देर तक तो उसके रस को अपने होंठों से चूसा पर जैसे ही कसेला सा पेशाब का स्वाद उनके मुंह में आया वो पीछे हो गयी,
उनके चेहरे पर सीधा सोनी की गर्म चूत से निकलते हुए प्रेशर की बोछार पड़ी और उनका पूरा चेहरा भीग गया, उन्होंने अपना चेहरा नीचे कर लिया और उनके सर के ऊपर से होती हुई सुनहरे रंग की पिचकारी उनकी पीठ को भिगोने लगी और फिर सीधा मेरे लंड के ऊपर गिरने लगी…
बड़ा ही अजीब सा दृश्य था, कोई अगर हमारी फोटो लेता तो सामने स्लेब पर लेटी हुई सोनी की चूत से निकलती पिचकारी, दीपा आंटी की पीठ के ऊपर से होती हुई मेरे लंड को भिगो रही थी जो उनकी चूत में था,
लंड को थोडा और गीलापन मिल गया और मैंने उनकी चौडी गांड को पकड़ कर उनकी चूत में और तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए…..
“आआआआअ अह्ह्ह अहह आआ आआ आआ आया आआ …….”
दीपा आंटी के मुंह से सिर्फ लम्बी आँहे ही निकल रही थी.. और अंत में मेरे लंड ने भी उनकी गीली चूत से निकलते हुए रस की गर्माहट पाकर झड़ना शुरू कर दिया और मैंने अपना सारा वीर्य उनकी चूत में दान कर दिया.
सभी झड़ने के बाद नोर्मल हुए और मैंने इशारा करके सोनी को अपने सामने बेठने को कहा, वो महारानी सिंहासन से नीचे उतरी और मेरे सामने बैठ कर मेरे लंड को साफ़ करने लगी,
और फिर मैंने उसका सर पकड़कर दीपा मौसी की चूत पर लगाया और उसने वहां से हम दोनों का मिला जुला रस चाटकर उनकी चूत को भी चकाचक बना दिया. फिर मैंने उसे वहां की सफाई करने को कहा और मैं दीपा आंटी के साथ बाहर आ गया.
ऋतू और अयान भी झड चुके थे, और एक दुसरे को साफ़ करने में लगे हुए थे 69 के पोज़ में
पापा और सुरभि दुसरे कमरे से बाहर निकले , और उनके पीछे-२ अन्नू भी, मैंने अन्नू को सभी के लिए दोबारा चाय बनाने को कहा और हम सभी वहीँ सोफे पर नंगे बैठकर टीवी देखने लगे.
शाम को खाना बनाने के बाद अन्नू ने अपने मोबाइल से किसी को फ़ोन किया, और फिर अपनी दीदी से बोली “बाबूजी तो अभी तक नहीं आये गाँव से…कह रहे हैं कल आयेंगे..”
उनके पिताजी होली के लिए अपने गाँव गए थे, पर किसी कारणवश वो वहीँ रह गए, ये सुनकर मैंने पापा की तरफ देखा, वो भी सोनी की चूत मारना चाहते थे, उन्होंने उन दोनों से कहा “तुम एक काम करो…तुम अकेले क्या करोगी घर पर रहकर …आज रात यहीं रह जाओ, कल जब तुम्हारे बाबूजी आ जायेंगे तो चली जाना….”
उन दोनों ने एक दुसरे की तरफ देखा और फिर हंस कर उनसे कहा. “ठीक है…जैसा आप कहें…मालिक.”
आज की रात कुछ ख़ास होने वाली थी, क्योंकि कल हरीश अंकल की फॅमिली भी चली जायेगी, इसलिए उनकी आखिरी रात थी हमारे घर पर आज, इसलिए पापा ने कहा की आज सभी ड्राविंग रूम में ही नीचे बिस्तर लगा कर एक साथ सोंयेगे…सभी को ये सुझाव पसंद आया और खाना खाने के बाद मैंने और अयान ने मिलकर डायनिंग टेबल और सोफा हटाया, और सुरभि और ऋतू ने नीचे बिस्तर लगाया..
सभी तो पहले से ही नंगे थे, पापा ने सोनी को अपने पास बुलाया और उसके मोटे और शानदार चुचे दबाने लगे.
अयान ने अन्नू को, हरीश अंकल ने सुरभि को, मैंने ऋतू और मम्मी को चोदना शुरू किया..
उस रात कोई नहीं सोया… सभी ने बारी-२ से सोनिया और अनीता की चूत मारी, और साथ ही साथ सुरभि, ऋतू, दीपा और मम्मी की भी. ठनके ने बाद हम सभी लगभग पांच बजे सोये, जब मेरी आँख खुली तो बारह बजने वाली थे, सभी लोग गहरी नींद में नंगे एक दुसरे में घुसे सो रहे थे.
हरीश अंकल की ट्रेन 4 बजे की थी , वो तैयारी करने लगे और दोबारा जल्दी मिलने का वादा करके वो रवाना हुए,
पर जाने से पहले सभी ने एक दुसरे की दोबारा चुदाई भी करी और उन्होंने हम सभी का धन्यवाद भी किया जिसकी वजह से वो सभी इस तरह के मजे ले पाए और आगे भी लेंगे..
अगले दिन सन्डे था, सभी ने आराम किया,
रात को ऋतू मेरे कमरे में ही सोयी.
अगले दिन से हमारे कॉलेज खुल रहे थे. मुझे काफी उत्सुक्तता थी क्योंकि मैं अब विशाल और सन्नी को आगे के मजे भी दिलाना चाहता था. और ऋतू की सहेलियों से भी पुरे मजे लेना चाहता था.
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