पापा को ऑफिस में जरुरी काम से जाना था सो वो चले गए., दीपा आंटी दुसरे कमरे में बैठी हुई टीवी देख रही थी, और मैं सोफे पर बैठा हुआ मोबाइल गेम खेल रहा था और सुरभि मुझसे चिपकी बैठी हुई थी, अयान और ऋतू ऊपर अपने कमरे में ना जाने क्या कर रहे थे..
मम्मी ने अपने जीजू को बड़े प्यार से नाश्ता कराया..बीच-२ में मैं उन दोनों को तिरछी निगाहों से देख भी रहा था..आखिर मम्मी ने अपने हुस्न का जादू अपने जीजू पर चलाना शुरू कर ही दिया..
“अरे जीजू…आप ये एक और परांठा लो न…” मम्मी ने जबरदस्ती उनकी प्लेट में परांठा डाला..
“नहीं पूर्णिमा…दीदी…और नहीं…रहने दो…पूरा पेट भर गया है…” उन्होंने मना किया.
पर मम्मी ने जबरदस्ती उनके हाथ को पकड़ा और परांठा डाल दिया..और ये सब करते हुए उनकी साडी का पल्लू नीचे गिर गया..
हरीश अंकल की आँखों के सामने मम्मी के दुधिया कलश उजागर हो गए..मम्मी ने उन्हें पहले से ज्यादा बाहर निकाल रखा था… सिर्फ उनके एरोहोल का दिखना बाकी था..पर उन्होंने ऐसा जताया की कुछ हुआ ही न हो…और जिद्द करती रही उनसे परांठा खाने की..बिना अपना पल्लू ठीक किये.. और हरीश अंकल अपनी फटी हुई आँखों से इधर उधर देखते हुए, की कोई और तो नहीं देख रहा उन्हें और उनकी साली को, वो परांठा खाने लगे जबरदस्ती.. अपनी साली को नाराज नहीं करना चाहते थे..नहीं तो शो ख़त्म होने का डर था.
.मम्मी ने भी अपने जीजू को भूखी नजरों से अपनी छाती की तरफ घूरते हुए पाया तो उन्होंने मन में सोचा…कौन कहता है की इन्हें सेक्स में रूचि नहीं है… और ये सोचते हुए उन्होंने अपने जीजू के लंड की तरफ देखा…जहाँ उनकी पेंट में होती हलचल देखकर उनके रोंगटे खड़े हो गए..
मम्मी को हरीश अंकल हमेशा से ही अच्छे लगते थे…पर ज्यादा काम की वजह से, कम कमाई और छोटा शहर होने की वजह से उनपर बुढ़ापा जल्दी असर कर गया था… वो थोड़े कमजोर से दिखते थे, कानो के ऊपर बाल भी सफ़ेद थे, चेहरा दुबला पतला सा था, बिना दाढ़ी और मूंछ के वो काफी स्मार्ट लगते थे.
मम्मी को पापा की मूंछों से भी काफी ऐतराज रहता था, उन्हें हमेशा से क्लीन शेव वाले लोग ही पसंद आते थे…और अपने जीजू भी मम्मी को इसी वजह से काफी पसंद थे..
जल्दी ही उन्होंने नाश्ता ख़त्म कर दिया , मम्मी ने उनसे कहा..आप जाकर थोडा आराम कर लो, मैं चाय भिजवाती हूँ..अभी..” और ये कहकर उन्होंने ऋतू को आवाज लगायी..अंकल गेस्ट रूम में चले गए..
ऋतू दोड़ती हुई आई, मैंने देखा की उसने कसी हुई टी शर्ट पहनी हुई है…और नीचे सफ़ेद रंग की छोटी सी निक्कर ..बड़ी दिलकश और सेक्सी लग रही थी वो..
मम्मी ने उसे कुछ समझाया और चाय लेकर अंकल के पास भेजा और खुद अपनी बहन दीपा के पास जाकर बैठ गयी और उन्हें अभी तक की बात बताने लगी.. मैं छुप कर ऋतू के पीछे गया और देखने लगा..
ऋतू चाय लेकर हरीश अंकल के पास गयी और उनसे इधर उधर की बातें करने लगी.. अपनी साली के हुस्न को देखकर उनका लंड अभी तक तना हुआ था और उनकी बेटी को ऐसी ड्रेस में देखकर तो उनका छोटा सिपाही झटके ही मारने लगा…
उन्होंने अपने लंड वाले हिस्से को न्यूज़ पेपर से ढका और चाय पीने लगे बड़ी मुश्किल से.. मेरे पीछे सुरभि भी खड़ी होकर अन्दर कमरे का नजारा देख रही थी, खिड़की से…
ऋतू अपनी टाँगे मोड़कर ऊपर बैठ गयी और उसकी मोटी जांघे हरीश अंकल की आँखों के सामने चमकने लगी.. और उसके बीच कपडे के ऊपर से ही ऋतू की चूत का ताजमहल देखकर हरीश अंकल के होश ही उड गए..और उनका चेहरा पसीने से नहा गया.
ऋतू ने उन्हें ऐसी हालत में देखा और पूछा..”अरे अंकल…क्या हुआ..आप को इतना पसीना क्यों आ रहा है…”
अंकल : “पसीना…कुछ..नहीं…ऐसे ही..गर्मी है न…” उन्होंने हडबडाते हुए कहा..
ऋतू : “गर्मी …आज तो बिलकुल भी नहीं है…रात को तो हम सभी रजाई में सोये थे..आप को क्यों गर्मी लग रही है..” उसने मुस्कुराते हुए उनकी आँखों में देखकर कहा.
उनसे कुछ कहते नहीं बना..
ऋतू उठकर उनकी गोद में आकर बैठ गयी और अपनी बाहें डाल दी उनकी गर्दन में..और बोली “क्या हुआ अंकल…आपकी तबियत तो ठीक है न…” ऋतू का दांया चुचा उनके चेहरे से टकरा रहा था..
अंकल : “हाँ…हाँ..मैं ठीक हूँ…तुम ठीक से बैठो न…यहाँ..” उन्होंने बेड की तरफ इशारा किया , वो घबरा रहे थे की कोई कमरे में ना आ जाए..
ऋतू : “मैं ठीक हूँ…अंकल..आप भूल गए..जब मैं बचपन में आपके घर आती थी तो आपकी गोद में बैठकर ही खाना खाती थी..और कहानियां भी सुनती थी..”
अंकल : “बेटा ऋतू…अब तुम बच्ची नहीं रही हो…अब तुम.. जवान हो गयी हो..” उन्होंने हकलाते हुए कहा..
उनकी हालत देखने लायक थी..एक जवान लड़की छोटी सी निक्कर में उनकी गोद में बैठी हुई थी और उसके चुचे उनके कंधे और मुंह को छु रहे थे.
ऋतू : “अच्छा…मैं जवान हो गयी हूँ…सच में…मैं भी सब को यही कहती हूँ…पर मम्मी पापा अब तक मुझे बच्ची समझते हैं… आप ही बताओ की मैं आप को कहीं से बच्ची लगती हूँ क्या…” और उसने अपने होंठों पर जीभ फेरते हुए अंकल के कान के ऊपर उँगलियाँ फैरानी शुरू कर दी..हरीश अंकल का चेहरा उत्तेजना के मारे लाल हो चूका था..पर वो डर रहे थे की बाहर सभी लोग बैठे हैं, उनकी बीबी भी और बच्चे भी, ऐसे हालत में वो कोई गलत काम नहीं करना चाहते थे..पर लंड के आगे सभी मजबूर हो जाते हैं..
उन्होंने कहा..”कोन कहता है..तुम बच्ची हो…लगती तो पूरी जवान हो…मैं चेक करता हूँ…तुम दरवाजा बंद कर आओ..नहीं तो कोई आ जाएगा..”
ऋतू झट से उठी और अपनी मोटी गांड उछालती हुई दरवाजा बंद करके वापिस आ गयी और वापिस अपने अंकल की गोद में बैठ गयी.
“अब बताओ…मैं जवान हूँ या नहीं…” उसने अपनी गांड को अंकल की गोद में मसलते हुए कहा..
अंकल ने इस बीच अपना लंड अडजस्ट कर लिया था..पर ऋतू की गांड का मुलायमपन पाकर उनके लंड ने फिर से बगावत कर दी और वो उछलने लगा..
अंकल ने ऋतू के चेहरे पर हाथ रखा और धीरे -२ उसे नीचे ले जाकर उसकी गर्दन तक ले आये और थोडा और नीचे ले जाकर उसके उभारों के ठीक ऊपर ले आये.. ऋतू की साँसे तेज होने लगी थी…मेरे पीछे खड़ी हुई सुरभि की साँसे भी दौड़ने लगी..अपने पापा की हरकतों को देखकर..
हरीश : “तुम्हारी…चेस्ट..मतलब…ब्रेस्ट…का साइज़..क्या है…” उन्होंने धीरे से पूछा.
ऋतू ने शान से अपनी छाती बाहर निकाली और बोली “34b ..”
“ह्म्म्म……” उन्होंने कुछ सोचते हुए कहा..”पर लगता तो नहीं है..की ये इतने बड़े हैं..
ऋतू ने नाराज होने का नाटक किया और बोली “क्या मतलब…मैं झूठ बोल रही हूँ क्या…एक मिनट रुको…” और उसने झट से अपनी टी शर्ट उतार दी.. अन्दर उसने काले रंग की ब्रा पहनी हुई थी नेट वाली…और उसके अन्दर से उसके उफनते हुए अर्धनग्न स्तन, बिलकुल सफ़ेद रंग के, मानो चिल्ला कर अंकल को बुला रहे हो…
अंकल के तो होश ही उड़ गए …इतने पास से अपनी साली की बेटी के चुचे देखकर..नेट के बीच से उसके गुलाबी निप्पल्स झाँक रहे थे, जो तन कर ब्रा की जाली फाड़ कर बाहर आने को तैयार थे..
“अब बोलो…अंकल…क्या कहते हो…अब भी विश्वास नहीं हुआ …” वो किसी बच्चे जैसा बर्ताव कर रही थी…
और अंकल बेचारे सोच रहे थे की ऋतू सच में अपने बचपने में है और वो क्या कर रही है उसे भी पता नहीं है… पर ये बात तो हम सब लोग जानते थे की वो कितनी बड़ी चुद्दक्कड़ है और वो उन्हें लुभाने के लिए ये सब नाटक कर रही हैं यहाँ… ताकि मैं कुछ और दिन नयी चूतों का मजा ले सकू..और वो लंडो का..
अंकल ने हडबडाते हुए कहा…”हाँ…हाँ..सच में ये तो मुझे अब 36 के आस पास लग रही है…” ये बोलते हुए उनके मुंह से लार टपककर ऋतू की जांघ पर जा गिरी… साफ़ जाहिर था की इतने मोटे चुचे देखकर उनके मुंह में पानी आ गया था..
ऋतू की चिकनी जांघ पर उनकी लार गिरी तो उसके पुरे शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गयी…जैसे गर्म तवे पर किसी ने पानी की बूँद डाल दी हो.. और उसके मुंह से एक सिसकारी निकली… अह्ह्ह्हह्ह ….ये क्या है… अंकल….आपके मुंह से तो पानी निकल रहा है..” अब ऋतू की आँखों में गुलाबी डोरे तैरने लगे थे..
हरीश : “ये..ये…मैंने इतने सुन्दर…चुचे…. कभी नहीं देखे…इसलिए…इन्हें देखकर मुंह में पानी आ गया…” वो धीरे से बोले.
ऋतू सनसना उठी अपने अंकल की बात सुनकर…और बोली “आप मेरे सबसे अच्छे वाले अंकल हैं…बचपन से ही आप मुझे सबसे ज्यादा प्यार करते हैं… और मुझे भी आप काफी अच्छे लगते हैं…
आज मैंने आपको अपने जवान शरीर को दिखाया है..क्या आज आप इन्हें प्यार नहीं करेंगे…” और ये कहते हुए उसने अपनी ब्रा के स्ट्रेप को नीचे गिरा दिया और उसके दोनों ब्रेस्ट उछल कर बाहर आ गए ..अंकल के चेहरे के सामने.. उन्हें बिलकुल विशवास नहीं हुआ की ऋतू ने ऐसा किया..वो कुछ कहना चाहते थे पर ऋतू ने उनके सर के पीछे हाथ रखा और उनका चेहरा दबा दिया अपनी छाती पर..और चिल्ला पड़ी… “चुसो….इन्हें…अंकल…मेरे जवान जिस्म को देखो और प्यार करो इससे… चाटो…और मुझे भी अपने प्यार का एहसास करवाओ और बताओ की मैं जवान हो चुकी हूँ…..अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह……”
अंकल के मोटे होंठ ऋतू के मखमली और मुलायम मुम्मे पर फिसलने लगे..उनके मुंह में जैसी पानी की टंकी लगी हुई थी…इतनी लार निकल रही थी उसके से…एक ही मिनट में उसके दोनों स्तन थूक से गीले होकर चमकने लगे…
अंकल ने अपने दोनों हाथों से उसके दोनों चुचों को पकड़ा और एक एक करके उसके निप्पल्स को चूसा…मसला…चाटा …और अपनी जीभ से अपनी ही लार को साफ़ करते हुए जल्दी ही उसके दोनों स्तनों को चमका डाला…
लगभग 15 मिनट तक वो उसको चाटते रहे और जब वहां पूरा सूखा पड गया तब अचानक ऋतू ने उनके मुंह को अपनी तरफ खींचा और उनकी सूख चुकी जीभ को फिर से अपने मुंह से गीला करने लगी…चूस चूसकर….
“कोई आ जाएगा…..”अंकल ने कहा..
“कोई नहीं आएगा…आप बस मुझे प्यार करो…” ऋतू ने ये कहते हुए उनके सारे कपडे उतार डाले… अब वो बिलकुल नंगे थे..उनका लंड लगभग चार इंच का था…पर आज नयी और जवान चूत पाकर वो थोडा ज्यादा लम्बा होने का नाटक कर रहा था. अब मेरा और मेरे पीछे खड़ी हुई सुरभि का ध्यान सिर्फ अंकल के लंड पर था..
उनके लंड के चारों तरफ काफी बाल थे..और बीच में खड़ा हुआ लंड काफी ठुमक रहा था..
ऋतू के मुंह से निकला..”सो क्यूट..” जैसे कोई छोटा बच्चा देखकर कहता है और उसे चूमने के लिए आगे आता है..उसने भी ऐसा ही किया और नीचे बैठकर उसने अंकल के लंड को चूमा..और मुंह में लेकर चूसने लगी.
अंकल की आँखें बंद हो गयी ऋतू के ऐसा करते ही…शायद दीपा आंटी ने आज तक उनका लंड नहीं चूसा था..सुड़प-२ की आवाजें निकालते हुए ऋतू उन्हें मजे देने में लगी हुई थी..
उसकी चूसने की स्पीड और उत्तेजक तरीके से जल्दी ही अंकल के लंड का बुरा हाल हो गया पर जब तक वो अपना लंड बाहर निकाल पाते उन्होंने ऋतू के मुंह में ही झड़ना शुरू कर दिया…
अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऋतू बेटा……मैं तो गया…..अह्ह्हह्ह….हैईईई…….ओह्ह्ह्हह्ह भाग्वान्न्नन्न….अह्ह्ह्हह्ह …स्सस्सस्सस
उन्हें बड़ी शर्मिंदगी हो रही थी की वो अपनी उत्तेजना को कण्ट्रोल नहीं कर पाए और झड गए. शायद ऋतू की जवानी का असर था. मेरे पीछे खड़ी हुई सुरभि भी अपने बाप का लंड देखकर काफी उत्तेजित हो चुकी थी..लड़की चाहे जितने भी लंड ले चुकी हो…पर जब वो अपने बाप या भाई का लंड देखती है तो उसकी चूत में एक अलग तरह की ही खुजली होती है और आज वोही खुजली सुरभि की चूत में भी हो रही थी..उसने मेरी पेंट के अन्दर हाथ डाला और मेरा लंड बाहर निकाल कर उसे आगे पीछे करने लगी.
थोड़ी देर बाद अंकल ने ऋतू को उठाया और फिर से उसके चुचे दबाते हुए चूसते हुए उसे बेड तक ले आये..और उसे नीचे लिटाकर उसकी निक्कर के साथ-२ काले रंग की पेंटी भी उतार डाली…
और ऋतू की फैली हुई गांड की बनावट देखकर और उसके बीच में लम्बी दरार जिसके अन्दर से पानी की धार निकल रही थी..
उसकी फूली हुई चूत की लाल रंग की फांके उन्हें स्ट्रोबेरी जैसी लग रही थी..जिसमे से निकलता हुआ खट्टा मीठा रस उन्हें अपनी तरफ खींच रहा था और जल्दी ही उन्होंने अपनी जीभ निकली और बैठ गए ऋतू की चूत की डायनिंग टेबल पर उसके रस का स्वाद लेने के लिए..
अपनी चूत पर अंकल की जीभ का स्पर्श पाते ही ऋतू के शरीर में एक करंट सा लगा और वो उठ कर बैठ गयी..और उसने अपनी दोनों टाँगे चड़ा दी अंकल के कंधो पर और उन्हें अपनी तरफ भींच लिया और उनके सर के ऊपर हाथ रखकर दबाव बनाने लगी अपनी चूत के ऊपर.. अंकल के सर के साथ-२ ऋतू भी अपनी गांड को हिला रही थी..वो थोडा ऊपर नीचे होकर अपनी स्ट्राबेरी को अंकल के होंठों से घिस रही थी..और फलस्वरूप उसका मीठा रस सीधा अंकल के मुंह में जा रहा था..
नीचे बैठे अंकल अपने लंड को भी मसल रहे थे और अपने छोटे सिपाही को फिर से मैदान में लाने की तय्यारी कर रहे थे..ताकि ऋतू की चूत भी मार सके… ऋतू की आँखें बाहर की तरफ निकलने लगी अंकल इस तरह से चूस रहे थे,
उसके चेहरे के भाव से पता चल रहा था की आज तक उसकी चूत को इतनी अच्छी तरह से किसी ने नहीं चाटा..यानी उनका लंड छोटा ही सही..जीभ काफी बड़ी है.. और जल्दी ही अंकल की मेहनत रंग लायी
अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अंकल…….यहान्न्नन्न ऐसे ही…येस्स……. ओह बहुत बढ़िया…..अह्ह्हह्ह्ह्ह मजा आ गया……म्मम्मम्म….ई ओग्ग्ग ओग्ग्ग ओफ्फ्फ ऑफ ऑफ ऑफ ओफ्फफ्फ्फ़…….मर्र्र गयी रे……..अह्ह्ह्ह स्सस्सस्स…. और उनके मुंह के अन्दर ही ऋतू ने जल की वर्षा करनी शुरू कर दी..और उनकी चूत के पुजारी बने बैठे अंकल ने वो सारा प्रसाद हड़प कर डाला..
तब तक अंकल का लंड भी खड़ा हो चूका था…ऋतू हांफ रही थी अपने ओर्गास्म के बाद और अंकल ने अपना लंड आगे किया और उसकी चूत के छेद पर रखा…तभी बाहर से ऋतू की मम्मी की आवाज आई…
“ऋतू…..ओ ऋतू…..कहाँ है….जल्दी से किचन में आ…”
अंकल हडबडा गए….ऋतू के चेहरे पर भी निराशा सी आ गयी…उसकी चूत में अभी तक आग लगी हुई थी…पर मम्मी ने ना जाने क्या सोचकर एन मौके पर उसको बुलाया …
उन दोनों ने जल्दी से कपडे पहने और ऋतू बाहर की और भागी..अंकल अपने दिल को थामे वहीं कमरे में बैठे थे..वो शायद अपनी किस्मत को धन्यवाद दे रहे थे की आज ऋतू जैसी जवान लड़की के साथ उन्होंने मजे लिए..बस चूत नहीं मार पाए…
मेरा लंड तन कर पूरा खड़ा हो चूका था…सुरभि के कोमल हाथों ने उसे और भी उकसा दिया था…हम घर के पीछे खड़े थे जहाँ छोटा सा बगीचा था..और ऊपर की तरफ काफी घने पेड़ थे..और पीछे की तरफ एक पानी की टंकी थी जहाँ से पोधों को पानी दिया जाता था..
नीचे की जमीन काफी मुलायम थी और कहीं-२ पर गीली भी..सुरभि ने मारे उत्तेजना के मुझे अपनी तरफ खींचा और नीचे गिर पड़ी..कीचड में..पर उसे अपने कपडे गंदे होने की कोई परवाह नहीं थी..
वो मेरे सामने नीचे जमीन पर पड़ी हुई थी और अपनी लॉन्ग स्कर्ट को ऊपर करके नीचे से अपनी नंगी चूत को सहला रही थी..वो काफी गर्म हो चुकी थी… मैंने उसकी आँखों में देखते हुए अपनी जींस को उतारा और अपना लंड बाहर निकाल कर सीधा कूद गया उसकी जाँघों के बीच..निशाना बिलकुल सही लगा..और मेरा लंड घप्प से सीधा उसकी चूत के अन्दर चला गया…
उसके ऊपर के कपडे मैंने उतारने की कोई जहमत नहीं उठाई…वहां कुछ था ही नहीं..सपाट मैदान था…मैंने उसके होंठों को चूसा और गीली मिटटी पर पड़ी हुई सुरभि की चूत का बैंड बजाने लगा..
किसी को अंदाजा भी नहीं होगा अन्दर की मैं और सुरभि बाहर खुले में चुदाई कर रहे है…कोई आ भी जाता तो हमें डर नहीं था…सभी लोगों को चुदाई का चस्का लग चूका था..
सिर्फ सुरभि के पापा के आने का ही डर था…पर वो तो अन्दर अपने ही सपनो में खोए हुए थे..सुरभि काफी तेज चीखती थी इसलिए मैंने उसके मुंह पर पूरी तरह से कब्ज़ा किया हुआ था ताकि अन्दर बैठे उसके पापा को उसकी आवाज न सुनाई दे.. पर फिर भी वो कुनकुना रही थी..अन्दर ही अन्दर..
ग्न्नन्न म्मम्मम्म आआह्ह्ह्ह म्म्मम्म्म्माह्ह्हह्ह अम्मम्मम्मा अम्म्म अग्ग्ग्गग्न्नन्न ,,,,…..
और मैंने जल्दी ही अपने लंड का सारा पानी उसकी चूत की बाल्टी में डाल दिया…और तभी उसके मुंह से अपना मुंह हटाया…वो हाँफते हुए बोली…”इतनी बुरी तरह से और इतनी गन्दी तरह से मैं पहली बार चुदी हूँ…भाई….थेंक यू…” और फिर वो मुझे चूमने लगी..
मेरे भी सारे कपडे गंदे हो चुके थे कीचड में…हम दोनों उठे और अन्दर की तरफ जाने लगे तभी कमरे में मम्मी आई, जहाँ अंकल अभी तक बैठे हुए थे…मैं और सुरभि फिर से अन्दर देखने लगे..
मम्मी : “जीजू…ये मैं क्या सुन रही हूँ….आप लोग आज रात की ट्रेन से जा रहे हैं…?” उनके स्वर में नाराजगी थी..
अंकल : “हाँ….मैंने तो आपको परसों भी कहा था की हमारी टिकट बुक हैं आज के लिए…”
मम्मी : “वो मैं कुछ नहीं सुनना चाहती….आप अभी सन्डे तक यहीं रहिये…अभी बच्चों के कॉलेज खुलने में भी टाइम है..सिर्फ तीन दिनों की ही तो बात है…”
अंकल : “नहीं दीदी…आप समझा करो…मैं पिछले 15 दिनों से छुट्टी पर हूँ…मुझे ऑफिस में रिपोर्ट भी करनी है कल …मैं नहीं रुक सकता…”
मम्मी : “मैं कुछ नहीं जानती…आप को मेरी कसम …आप नहीं जायेंगे…बस…” मम्मी ने जिद्द करी.
अंकल : “ये आप क्या कह रही हैं…इसमें कसम देने वाली क्या बात है…आप समझा…..करो…….”
और ये बोलते हुए अंकल एक दम से रुक गए…क्योंकि..मम्मी का वो सरकता हुआ पल्लू फिर से गिर गया था…और अंकल के सामने फिर से उनके तरबूज दिखने लगे थे…थोड़ी देर तक कमरे में कोई कुछ नहीं बोला..
और फिर मम्मी ने कहा..”मैं सब जानती हूँ….आप क्या देख रहे हैं…”
वो घबरा गए जैसे मम्मी ने उनकी चोरी पकड़ ली हो.. पर जब उन्होंने देखा की मम्मी ने अपना पल्लू ठीक नहीं किया है तो उनकी भी हिम्मत थोड़ी बढ़ गयी…
उन्होंने मम्मी की आँखों में देखकर कहा “अच्छा…बताओ फिर…मैं क्या देख रहा हूँ…” और ये कहते हुए वो मम्मी की तरफ बढ़े..
मम्मी उन्हें अपनी तरफ आते देखकर दीवार से जा सटी…और उनकी साँसे तेजी से चलने लगी…वो नाटक कर रही थी या सच में उत्तेजना के मारे ऐसा कर रही थी…पता नहीं.
उनके जीजू पास आये और फिर से बोले…”बोलो न दीदी…क्या देख रहा हूँ मैं…”
मम्मी : वही….जो मैं दिखा रही हूँ….पर आप तो कुछ समझते ही नहीं….लल्लू कहीं के…” और वो धीरे से हंसने लगी…
अंकल सब समझ गए की मम्मी उन्हें खुली लाइन दे रही है…अभी थोड़ी देर पहले ही उन्होंने उनकी बेटी से मजे लिए थे…और अब माँ भी…जिनके हुस्न को उन्होंने हमेशा से चाहा था…और आज उनकी किस्मत पर जैसे भगवान् ने मेहरबानी की वर्षा सी कर दी हो…
उन्होंने अपने कांपते हाथों से मम्मी के अर्धनग्न मुम्मों को पकड़ा….मम्मी ने सीईईईईईए की आवाज निकालते हुए अपनी आँखें बंद कर ली…और अंकल के हाथ के ऊपर अपना हाथ रखकर अपनी ही चुचों का मर्दन करने लगी…
अंकल के हाथों के नीचे इतने बड़े और मुलायम चुचे आज तक नहीं आए थे… उन्होंने उनके उभरे हुए चुचे को ऊपर से चाटना शुरू किया और जैसे ही उन्होंने ब्लाउस खोलने की कोशिश की.
मम्मी ने उन्हें रोक दिया और बोली “नहीं …जीजू…अभी नहीं…बाहर सभी लोग बैठे हैं….मैं रात को आउंगी…आपके पास…बस आप सन्डे तक यहीं रुक जाओ न प्लीस…” और उन्होंने अपने जीजू के होंठों को चूम लिया…अब इस बात को तो कोई पागल ही मन करेगा…उन्होंने झट से हाँ कर दी…और मम्मी किसी छोटे बच्चे की तरह से ख़ुशी के मारे उनसे लिपट गयी…और फिर वो दोनों बाहर की और चल दिए..
हम दोनों भी अन्दर चल पड़े…अन्दर मम्मी सभी को ये खुशखबरी दे रही थी की अब सभी लोग सन्डे तक वहीँ रुकेंगे…ये सुनते ही दीपा आंटी के साथ-२ अयान और ऋतू भी ख़ुशी से झूम उठे…
तभी अंकल ने हमें कीचड वाले गंदे कपड़ों में देखा और बोले…”तुम बच्चे अभी तक मिटटी में खेल रहे हो….पता नहीं कब बड़े होगे तुम लोग…” उन्हें क्या मालुम था की हम क्या खेल खेलकर आये हैं. वो ख़ास कर अपनी बेटी सुरभि की तरफ देखकर बात कर रहे थे..
तभी बीच में ही दीपा मौसी बोली…” चलो सुरभि तुम ऋतू के साथ ऊपर जाओ और नहा लो…चेंज करके नीचे आना… और आशु तुम भी ऊपर जाओ…नहाने…” उन्होंने जब मेरी तरफ रहस्यमयी हंसी में देखा तो मैं समझ गया की मौसी को सब पता चल चूका है की ये कपडे कैसे गंदे हुए.
मैं, ऋतू और सुरभि ऊपर की तरफ चल पड़े…और पीछे -२ अयान भी आ गया…
मैं और सुरभि एक साथ बाथरूम में घुस गए…और मेरे पीछे -२ अयान और ऋतू भी आ गए वहीँ पर…
बाथरूम में घुसते ही मैंने अपने कपडे उतार कर साइड में रख दिए और जब मैंने सुरभि की तरफ देखा तो वो भी अपना आखिरी वस्त्र यानी ब्रा उतार रही थी…पता नहीं वो ब्रा क्यों पहनती है…कुछ है तो नहीं उसके पास सिवाए बड़े-२ निप्पल्स के.. शायद वो न दिखें चमकते हुए इसलिए वो ब्रा पहनती थी..खैर..जैसे ही मैंने सुरभि की गांड देखी तो मेरे मुंह में पानी आ गया…काफी दिनों से मैंने गांड नहीं मारी थी..
चूत मार मारकर बोर सा हो गया था..आज इसकी गांड मारी जाए..मैंने ये सोचकर उसकी गांड पर हाथ रखा ही था की ऋतू और अयान भी घुस आये बाथरूम में..
ऋतू : “भाई…क्या इरादा है तुम्हारा…बड़े प्यार से सहला रहे हो सुरभि की गांड..”
मैं : “इरादा खतरनाक है ऋतू…आज तो मैं इसकी गांड मारूंगा..” और ये कहते हुए मैंने उसकी गांड के अन्दर अपनी ऊँगली घुसा दी.
“अह्ह्हह्ह्ह्हह्हsssssssss निकालो इस्ससेsssssssssssss………अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ” वो जोर से चिल्लाई…
मैं उसकी चीख सुनकर घबरा गया… उसकी चीख हमेशा की तरह काफी तेज थी..और किसी का तो कुछ नहीं पर उसके पापा के आने का डर था..इसलिए मैं घबरा गया..और अपनी ऊँगली निकाल ली.
ऋतू बोली : “वैसे तो मैंने बाहर का दरवाजा बंद कर दिया है और यहाँ का दरवाजा भी बंद है…इसलिए आवाज नीचे तक नहीं जायेगी… पर सुरभि थोडा धीरे चीखो..नीचे से तुम्हारे पापा के आने का डर है …” वो समझ गयी और उसने हाँ में सर हिलाया.
अयान और ऋतू भी एक दुसरे को चुमते हुए अपने कपडे उतारने लगे..और कुछ ही देर में वहां बाथरूम में हम चारों नंगे खड़े हुए थे. मैंने सुरभि को अपनी तरफ खींचा और उसके तपते हुए होंठों पर अपने होंठ रख दिए…
उसके गीले होंठों ने मुझे मदहोश सा कर दिया था…बड़ा रस टपक रहा था उनमे से…शायद उसे अपनी गांड मरवाने का काफी उत्साह था.
दूसरी तरफ अयान ने ऋतू को वहीँ जमीन पर लिटाया और उसकी चूत की फांके खोलकर अन्दर की बनावट को गौर से देखने लगा..
ऋतू : “क्या देख रहे हो भाई…”
अयान : “मैंने आज तक किसी चूत की बनावट नहीं देखी..आज मौका मिला है आराम से तुम्हारी चूत को देखने का…”
ऋतू (मचलते हुए) : “जब किसी की चूत में आग लगी हो तो उसे दूर से देखकर मजे नहीं लिए जाते…आओ और अपने पानी से मेरी चूत की आग बुझाओ…” और ये कहकर उसने अयान को बड़ी ही प्यासी निगाहों से देखा..
अयान ने उसकी आँखों में देखते हुए अपनी जीभ निकाली और नीचे झुककर उसकी चूत के अन्दर डाल दी…
“अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह म्मम्मम्मम्म स्सस्सस्स ओह अयान्न्न्नन्न क्यों तडपा रहे हो…..अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह लंड डालो यहान्न्न्नन्न जीभ से कुछ नहीं होगा…. अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ”
अयान ने उसकी कोई परवाह नहीं की और उसकी चूत को चाटना जारी रखा, शायद वो जानता था की लड़की को ज्यादा मजा देने के लिए पहले उसकी चूत चाटना जरुरी है…और फिर जब लंड डालोगे तो ऐसे मजे देगी की लंड भी सोचेगा…आज हुआ क्या है इसको..
मैंने भी सुरभि को वहीँ लिटा दिया जमीन पर.. बाथरूम थोडा छोटा था..इसलिए उसका शरीर ऋतू के शरीर से छु रहा था…और सुरभि का चेहरा अपने भाई अयान की तरफ था..
मैं उसकी टांगो को ऊपर उठाया और उसकी गांड के छेद पर अपनी जीभ लगायी…बड़ी गन्दी से स्मेल आ रही थी…मैं पास पड़े पानी से उसकी गांड को अच्छी तरह से साफ़ किया और फिर से उसको चाटा…अब ठीक था.
मैं अपनी जीभ उसकी गांड से घुमा कर चूत तक ले जाकर वापिस गांड तक ले आता था…उसकी चीख निकल रही थी…पर उसनी अपने भाई का एक हाथ पकड़कर अपने मुंह में ठूस लिया…और चूसने लगी, ताकि उसकी आवाज बाहर तक ना जाए…
अयान ने ऋतू की क्लिट को अपने होंठों में दबाया और उसे लोलीपोप की तरह से चूसने लगा..ऋतू तो मजे के मारे दोहरी सी हो गयी और उसने अपने दांयी तरफ मुड़कर मुझे पकड़ लिया और मेरे कंधे पर अपने दांत गड़ा दिए..
“अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह अयान्न्न्नन्न …….धीएरे…….अह्ह्हह्ह्ह्ह म्म्मम्म्म्मम्म अऊऊह ऊह्ह्ह्ह ये क्या कर रहे हो……. अह्ह्ह्हह्ह ह्न्नन्न्न्नन्न्न्न ऐसे ही……चुसो……इसे……..अह्ह्हह्ह म्म्मम्म्म्मम्म ऑफ ओफ्फफ्फ्फ़ ओफ्फ्फ ओह गोड…..”
मैंने अपनी जीभ को पेना किया और उसे घुसा दिया सुरभि की गांड में….मेरी नाक उसकी चूत के बिलकुल ऊपर थी …जिसमे से निकलता हुआ रसीला पानी उसे भिगो रहा था…और नीचे आते हुए मेरे होंठों से होता हुआ उसकी गांड को और भी चिकना बना रहा था,
कुल मिलकर मेरे मुंह से निकलती लार के साथ साथ उसकी चूत से निकलता पानी दोनों मिलकर उसकी गांड को सींच रहे थे…और आने वाली चुदाई के लिए तैयार कर रहे थे…
ऋतू अब मेरे कंधे को चूसने और चाटने भी लग गयी थी और वहां दूसरी तरफ सुरभि भी अपने भाई के हाथ के साथ साथ उसके पेट और कंधे को चूमने में लगी हुई थी…
कुल मिलकर वहां सेक्स का दंगल सा चल रहा था, सभी एक दुसरे से गुथम गुथा होकर मजे ले रहे थे और दे भी रहे थे..
मैंने अपना हाथ ऊपर किया और सुरभि के मोटे कंचे जैसे बड़े और कठोर निप्पल्स को अपनी उँगलियों से उमेठना शुरू कर दिया…वो चिल्लाने लग गयी मेरी इस हरकत से..
“अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह आशु…….भाई……..अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह …… म्मम्मम्मम …..नन्न्न्नान्न अ …….. ओफ्फ्फ्फ़…….मर्र्र गयी…… अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ओह या……. येस्स्स्स……. ऐसे.ही….अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह म्मम्मम्म….चाटो मेरी गांड…..दबाओ मेरे निप्पल्स……अह्ह्ह्ह…दबाओ इन्हें….और बड़ी कर दो मेरी छाती को भी…..अह्ह्ह्हह्ह…….”
मैं समझ गया की वो अपनी सपाट छाती को लेकर काफी दुखी रहती होगी…हर लड़की का अरमान होता है की उसकी ब्रेस्ट बड़ी हो, जिसे वो दुनिया को दिखा सके, उसकी सुन्दरता में चार चाँद लगा सके, जिन्हें दबा कर और दबवा कर वो मजे ले सके, सभी लडको और अंकल लोगो की नजरें हमेशा से मोटे चुचे वाली लड़कियों को ढूंढती हैं…वो भी शायद यही चाहती थी की उसके भी चुचे मोटे हो और वो भी उनका इस्तेमाल करके पुरे मजे ले सके और दे भी सके..
मैंने पास में पड़ा हुआ साबुन उठाया और अपने हाथों में मलकर झाग बना ली, और सुरभि को उठा कर बिठा दिया और खुद उसके पीछे जाकर बैठ गया, मैंने अपनी टाँगे आगे करके अपना लंड सटा दिया उसकी गांड से और मेरी टाँगे उसकी टांगो के साथ आगे की तरफ फ़ैल गयी..
मैंने पास में पड़ा हुआ साबुन उठाया और अपने हाथों में मलकर झाग बना ली, और सुरभि को उठा कर बिठा दिया और खुद उसके पीछे जाकर बैठ गया, मैंने अपनी टाँगे आगे करके अपना लंड सटा दिया उसकी गांड से और मेरी टाँगे उसकी टांगो के साथ आगे की तरफ फ़ैल गयी..
वो कुछ समझ नहीं पा रही थी की मैं क्या करना चाह रहा हूँ…फिर मैंने अपने हाथ आगे किये और साबुन वाले हाथों से उसकी प्लेन ब्रेस्ट को मसाज देना शुरू कर दिया…
म्मम्मम्मम्म स्सस्सस्स अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कहती हुई उसने अपना सर पीछे किया और उसे मेरे कंधे पर टिका दिया,
मैंने अपने झाग वाले हाथों से उसके निप्पल्स को पकड़ा उसके चारों तरफ वाले हलके गुदाज हिस्से को सहलाया और हलके से दबाना शुरू कर दिया, और अपना हाथ घुमा घुमा कर मैंने उन्हें मालिश देनी शुरू कर दी…
और उसके कानो में कहा…”ऐसे ही रोज किसी न किसी से मालिश करवाया करो…जल्दी ही निकल आयेंगे…इनमे से रसीले आम …….” और मैंने उसके कानो को अपने मुंह में लेकर ऐसे चूसा जैसे वो उसके होंठ हो….
उसकी तो हालत खराब हो गयी मेरा ऐसे करते ही..
मेरी देखा देखी ऋतू ने भी अयान से कहा की वो उसकी ब्रेस्ट की भी ऐसे ही मालिश करे…और वो भी बिलकुल सुरभि के सामने आकर बैठ गयी, जगह छोटी थी, इसलिए उसने अपनी टाँगे सुरभि और मेरी जाँघों के ऊपर चड़ा दी और अयान को अपने पीछे आने को कहा.. अब उसके मोटे झूलते हुए चुचे सुरभि की छाती से टकरा रहे थे, और मेरे हाथों के पीछे वाले हिस्से से भी. मैंने उसकी मालिश करना जारी रखा..ऋतू थोडा और आगे खिसकी और अब उसकी चूत बलकुल सुरभि की चूत के साथ लगाकर उसकी घिसाई कर रही थी, ऋतू ने जैसे ही सुरभि की चूत से उठती आग को महसूस किया उसने आगे बढकर उसके होंठों को चूम लिया..
सुरभि के लिए ये पहला अवसर था जब किसी लड़की ने उसे चूमा था…पर ऋतू के कोमल और ठन्डे होंठों का स्पर्श उसे काफी अच्छा लगा और उसने भी उसका साथ देते हुए उसे चूमना और चुसना शुरू कर दिया…
पीछे से अयान ने ऋतू के मोटे लहराते हुए चुचों को अपने झाग वाले हाथों से पकड़ा और उन्हें मसलना शुरू कर दिया…
बीच-२ में मैं भी अपने हाथ आगे करके ऋतू के मुम्मों को थाम लेता और अयान अपनी बहन सुरभि के मोटे निप्पल्स को… वो जानता था की वापिस जाकर अब उसे ही अपनी बहन की मालिश करनी पड़ेगी…और अब ये उसका दायित्व था की वो अपनी बहन के चुचे उगाये रोज मालिश करके.. इसीलिए थोड़ी सी प्रेक्टिस वो यहीं पर कर रहा था…उन दोनो का शरीर साबुन के झाग की वजह से काफी फिसलन भरा हो चूका था…
नीचे फर्श पर भी काफी झाग इकठ्ठा हो चुकी थी…मैं सोच रहा था की काश हमारे बाथरूम में बाथटब होता तो उसमे ये सब करने में कितना मजा आता…पर कोई बात नहीं ये मजा भी निराला है…
ऋतू ने अपनी चूत को सुरभि की चूत से घिसना भी शुरू कर दिया था…और उनके होंठ तो पहले से ही एक दुसरे की थूक को निगलने में लगे हुए थे…
मैंने सोचा अब ये सही मौका है…और मैंने थोडा जोर लगाकर सुरभि को ऊपर उठाया और अपना तना हुआ लंड उसकी गांड के नीचे लगा दिया… सुरभि समझ गयी की अब समय आ गया है… जब उसकी गांड का उदघाटन होगा…
मैंने काफी झाग लगा कर उसकी गांड और अपने लंड को चिकना बना लिया और उसकी गांड के छेद पर लंड को टीकाकर मैंने अपने हाथ उसके कंधे पर रखे और उसे नीचे की तरफ धकेल दिया…
उसकी गांड को चाटने की वजह से और झाग लगाने की वजह से जो चिकनाई आई थी वो काफी काम आई…और मेरा लंड किसी रोकेट की तरह उसकी गांड में ऊपर की तरफ घुसता हुआ उसकी गांड के उपग्रह की जमीन से जा टकराया….
वो चिल्ला पड़ी…. “अह्ह्ह्हह्ह अयीईईईईईइ ओफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ मार डाला…… अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ……. ओह गोड…..मेरी गांड फट गयी……….अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह …..” वो काफी तेज चीख रही थी…
ऋतू ने आगे होकर उसके मुंह को अपने मुंह में जकड़ा और उसे चूसने लगी…और उसकी छाती को भी मसलने लगी. और साथ ही साथ उसने भी अपनी गांड उठाई और अयान को आगे आने का इशारा किया..
वो थोडा आगे खिसका और उसने भी अपना खड़ा हुआ लम्बाआआ लंड उसकी गांड के छेद पर टिकाया और बाकी काम ऋतू ने किया… उसके लंड नुमा कुर्सी पर बैठ गयी वो धम्म से…और छम्म से वो लौड़ा उसकी गांड की सुरंग के अन्दर घुसता चला गया…
“म्मम्मम्मम्म अह्ह्ह्हह्ह अयान……सच में….तुम्हारे लंड की जितनी तारीफ़ करूँ कम है…..अह्ह्ह्हह्ह……मजा आ गया………” मजे तो अयान के भी आ गए थे…उसकी मोटी गांड के अन्दर अपना लंड घुसाकर..
और फिर मैंने और अयान ने उन दोनों की कमर को पकड़ा और उन्हें अपने अपने लंड के ऊपर नीचे करना शुरू किया…काफी मेहनत वाला काम था…पर मजा भी काफी आ रहा था…
मेरा लंड तो जैसे किसी आग की भट्टी में झुलस सा रहा था…उसकी गांड में से काफी गर्मी निकल रही थी…पर मजा भी आ रहा था… वो दोनों अपने चूतें भी रगड़ रही थी एक दुसरे के साथ और मेरे और अयान के हाथ बारी-२ से उनकी मालिश भी कर रहे थे साबुन वाले हाथों से….
पुरे बाथरूम में उनकी आंहें गूंज रही थी…
वो सुरभि तो काफी तेज चीख रही थी.. “अह्ह्ह्हह्ह म्मम्मम्मम अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आशु भाई….अब मजा आ रहा है…..मुझे नहीं मालुम था…गांड मरवाने में इतना मजा है…..अह्ह्ह्हह्ह ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ फ़ूओफ़्फ़्फ़ फ फुक्क में हार्डड……….अह्ह्ह्हह्ह और तेज…..हां ऐसे ही…..ओह येस्स्स्स…..ओह येस्स्स्स……म्मम्मम्म…”
ऋतू भी बडबडा रही थी……
“अह्ह्ह्हह्ह अयान्न्न्न फाड़ डालो मेरी गाडं अपने लम्बे लंड से……अह्ह्ह्हह्ह हन्न्न्न ऐसे ही…..तेज मारो……घुसा दो……और अन्दर…….तेज….और तेज……अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह म्मम्मम्मम…..”
पीछे से गांड की घिसाई और आगे से चूत की…दोनों की हालत देखने लायक थी….और साथ ही साथ मेरी और अयान की भी…. जल्दी ही ऋतू और सुरभि की चूतों ने गले मिलते हुए एक दुसरे पर थूकना शुरू कर दिया….और उन दोनों की चूत से गर्म पानी की बोछारें निकलकर एक दुसरे को भिगोने लगी…
मैंने और अयान ने भी अपने-२ लंड का गुबार उन दोनों की गांड में उतार दिया…और अपने सफ़ेद और गाड़े वीर्य से उनकी गांड के छेद को भर दिया…
अच्छी तरह नहाने के बाद हम सभी तैयार होकर अच्छे बच्चों की तरह नीचे आकर बैठ गए.
दीपा आंटी सोफे पर बैठी टीवी देख रही थी….और शायद मन ही मन अगली चुदाई की योजना भी बना रही थी.
मम्मी किचन में सभी के लिए खाना बना रही थी, ऋतू भी उनकी मदद के लिए वहां चली गयी, हरीश अंकल वहां खड़े हुए उनसे बात कर रहे थे, मम्मी ने साडी पहनी हुई थी और उनका काटन का ब्लाउस पसीने में बिलकुल भीग चूका था और अन्दर से उनकी ब्रा बिलकुल साफ़ देखी जा सकती थी..
अंकल की भूखी निगाहें उन्हें चोदने में लगी हुई थी..मम्मी को भी मालुम था की अंकल की नजरें उनके पसीने से भीगे जिस्म को भेद रही है…इसका पूरा मजा लेते हुए वो उनसे बात करने में लगी हुई थी..
जैसे ही ऋतू किचन में आई, अंकल का चेहरा खिल उठा, उसके चुचों का स्पर्श अभी भी उनके मुंह में था, मम्मी का चेहरा दूसरी तरफ था, इसका फायदा उठाकर अंकल ने ऋतू की गांड पर हाथ रखकर उसे दबा दिया,
बदले में ऋतू उनकी तरफ घूमी और पेंट में से उनका लंड पकड़कर उसे मसल दिया..वो चिल्ला पड़े..अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मम्मी (घूमकर उनकी तरफ आई और बोली) “क्या हुआ…?”
अंकल : “कुछ नहीं…ये ऋतू का पैर मेरे पैर के ऊपर आ गया…” और वो ऋतू को घूरकर देखने लगे जैसे कह रहे हो..ये क्या बदतमीजी है..
ऋतू ने बड़ी मुश्किल से अपनी हंसी दबाई और बोली “सॉरी अंकल…मेरा ध्यान कहीं और था…”
मम्मी फिर से अपना काम करने लगी, ऋतू अंकल के पास आई और झटके से उनके होंठों को चूम लिया और बिना आवाज के, कान पकड़ कर “सॉरी..” बोली.
अंकल उसके सॉरी बोलने के ढंग से खुश हो गए.
अंकल :”दीदी…आपने हमें रोक तो लिया है तीन दिनों के लिए…पर कुछ प्लान भी है या नहीं…हम करेंगे क्या…”
मम्मी : “करना क्या है…मौज मस्ती करेंगे….और क्या.” और ये कहते हुए उन्होंने अपनी साडी के पल्लू से अपना पसीना साफ़ किया.
अंकल का पूरा ध्यान उनके लगभग भीगे हुए शरीर पर था..वो बोले “कल से कुछ ज्यादा ही गर्मी हो रही है…अब तो सर्दियाँ गयी ही समझो..आप को तो साडी पहन कर काम करने में काफी तकलीफ होती होगी.”
मम्मी : “हाँ होती तो है…पर मैं अक्सर सिर्फ गाउन पहन कर ही काम करती हूँ, अन्दर भी कुछ नहीं पहनती…” और ये कहते हुए वो अपने जीजू को देखकर मुस्कुराने लगी..
अंकल : “अच्छा…तो आप आज इतना तक्कलुफ़ क्यों कर रहे हो…जाओ और चेंज करके अपना गाउन पहन लो..देखो कितना पसीना निकल रहा है..”
मम्मी कुछ न बोली और रोटियां बेलने में लगी रही और मंद मंद मुस्कुराती रही..
ऋतू : “चलो अंकल मैं आपको अपना कमरा दिखाती हूँ…पहली तारीख को मुझे अपना प्रोजेक्ट सबमिट करना है, मैं आपको दिखाती हूँ की कैसा बना है…”
मम्मी : “ऋतू खाने का समय है…बाद में दिखा देना..”
अंकल : “अरे…कोई बात नहीं…खाना अभी बना लो , सभी साथ में खायेंगे…तब तक मैं इसका प्रोजेक्ट देख लेता हूँ…चलो ऋतू…” और ये कहते हुए वो ऊपर की तरफ चल दिए.
मैं समझ गया की ऋतू की चूत में खुजली हो रही है और वो अंकल का लंड लेने जा रही है ऊपर..समझ तो मम्मी भी गयी थी, इसलिए वो मुझे देखकर होले से मुस्कुराने लगी..
मैं जल्दी से उनके पीछे चल दिया और अपने कमरे में जाकर छेद से दुसरे कमरे का प्रोग्राम देखने लगा.
अपने कमरे में जाते ही ऋतू ने दरवाजा बंद किया और उछल कर अंकल की गोद में चढ़ गयी…और फिर से सॉरी…कहते हुए उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए..
अंकल लगभग पांच मिनट तक उसे हवा में लिए खड़े रहे और उसके कोमल गुलाबी होंठों का रस पीते रहे. अंकल ने उसे किसी फुल की तरह से उठा रखा था..उसने अभी भी वही छोटी सी निक्कर पहनी हुई थी, जिसमे से उसकी मोटी जांघे फंसी हुई सी चमक कर उन्हें अपनी तरफ खींच रही थी,
उन्होंने अपना हाथ उसकी नंगी टांगो में फंसाया और उसे सहारा देते हुए चूमने लगे..
ऋतू : “मैंने ज्यादा तेज दबा दिया न…” और ये कहकर वो नीचे उतरी और उनकी पेंट की जिप खोल दी..और उनके छोटे सिपाही को बाहर निकला..और उसे भी चूम कर सॉरी बोला…जो किसी लड़ाई के मैदान में जाने के लिए बिलकुल तैयार था..
अब वो उसे चूसकर अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहती थी…उसने झट से अपनी निक्कर उतारी, टी शर्ट को सर से घुमा कर फेंका और अपनी ब्रा खोलकर नंगी हो गयी..
अंकल उसकी फुर्ती देखकर हैरान रह गए…उन्होंने उसकी चूत को देखा जो रस से नहाकर चमक रही थी…उसने शायद आज ही शेव करी थी अपनी चूत की …
वो कुछ कहने वाले थे इससे पहले ही ऋतू ने उन्हें बेड की तरफ धक्का दिया और उन्हें पीठ के बल लिटा दिया..और उछल कर उनके ऊपर सवार हो गयी…
अंकल : “ऋतू…रुको…क्या तुमने पहले कभी किया है…? ” उन्हें शायद उसके चीखने या चूत में से खून निकलने का डर था..
ऋतू : “अंकल….ये तो आप जल्दी ही जान जायेंगे…” और ये कहकर उसने उनके लंड को अपनी चूत पर टिकाया …
अंकल की साँसे वहीँ अटक कर रह गयी…
“ओह…अंकल….मैंने आपको पहले कभी बताया है या नहीं….पर आप मुझे हमेशा से ही अच्छे लगते थे….और मैं हमेशा आपको इस तरह से प्यार करना चाहती थी..” ऋतू की आँखों में वासना के लाल डोरे तेर रहे थे.
अंकल ने उसकी बाते सुनी और उन्हें ऋतू पर बड़ा प्यार आ गया…वो कुछ बोलने ही वाले थे की ऋतू ने अपनी चूत को उनके लंड पर ढीला छोड़ दिया…और वो उनके लंड के टॉप फ्लोर से फिसलती हुई ग्राउंड फ्लोर तक आ गयी एक ही सेकंड में…. “ओफ्फ्फफ्फ्फ़ फुक्क……म्मम्मम…..स्स्सस्स्स्सस्स्स ”
उनका लंड बिना किसी बाधा के उसकी चूत के अन्दर तक चला गया था.. अंकल समझ गए की लड़की खायी पीई हुई है…अब उन्हें भी कोई डर नहीं था.. उन्होंने उसके लटकते हुए मुम्मे अपनी हथेली में समेटे और उन्हें मसलने लगे…
आज तक उन्होंने इतने सुन्दर मुम्मे नहीं देखे थे…बिलकुल सही आकार में और दूध जैसे सफ़ेद, भरे हुए, मोटे दाने, जिन्हें मसलने से लड़की के पुरे शरीर में तरंगे उठने लगे…
उन्होंने अपने लंड से उसी चूत में नीचे से धक्के मारने शुरू कर दिए और अपना मुंह ऊपर करके ऋतू के निप्पल्स को एक एक करके चूसने और काटने लगे… नीचे चूत पर लंड का प्रहार और ऊपर निप्पल्स पर अंकल के दांतों का हमला ऋतू के लिए असहनीय हो गया और वो जोरों से चीख मारकर अपनी मोटी गांड को अंकल के लंड के ऊपर पटकने लगी…
“अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अंकल……ये क्या……..कर्र्रर्र्र रहे हूऊऊऊऊ……अह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह ओह गोड…..फुक्क में…अंकल…….फुक्क में हार्डरssssssssssssss….अह्ह्ह्हह्ह ओहssssssssssssssss येस….हंन्न्न्न…..अह……अ……अंकल……..तेज चोदो ना…..अपनी ऋतू को……..अपना लंड डाल दो…..मेरी चूत में….अह्ह्हह्ह हांन्न……ऐसे ही….ओफ्फ्फ्फ़….मैं तो गयी……अह्ह्ह…….”
और ये कहते हुए उसने अंकल के छोटे से सिपाही को अपनी चूत के रस से नहलाना शुरू कर दिया….और गहरी साँसे लेती हुई उनकी छाती के ऊपर गिर पड़ी..अपने मुम्मो के बल.
ऋतू की चूत के मसल्स अंकल के लंड के चारों तरफ अपनी पकड़ बना रहे थे…और ढीले पड़ रहे थे..
अंकल ने थोड़ी देर तक उसकी कमर को सहलाया और जब वो शांत हो गयी तो उसने मुस्कुराते हुए अंकल को चूमा और नीचे उतर कर घोड़ी बन कर लेट गयी… अंकल जल्दी से नीचे उतरे और रस से सना हुआ लंड पीछे से उसकी चूत में डाला…और धक्के मारने लगे…
उन्होंने पीछे से ऋतू की फैली हुई गांड की बनावट देखी जो उन्हें किसी बड़े दिल के आकार की लग रही थी…और उन्होंने उसे मसलना और कचोटना शुरू कर दिया….और साथ ही साथ उसकी चूत भी मारने लगे..
ऋतू एक बार में हमेशा दो या तीन बार तक ओर्गास्म कर लेती थी…और जब अंकल ने उसकी गांड से छेड़छाड़ करनी शुरू की तो उसके अन्दर एक और ओर्गास्म बनने लगा और उसने तकिये के अन्दर मुंह घुसाए सिसकना शुरू कर दिया… अह्ह्हह्ह अंकल…..मजा आ रहा है…..हान्न्न्नन्न ऐसे ही मसलो…मेरी गांड…को…अह्ह्ह्हह्ह आप बहुत अच्छे है … अह्ह्ह्ह चोदो मुझे…..जोर से…और जोर …से अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह
अंकल ने भी बुदबुदाना शुरू कर दिया….
“अह्ह्हह्ह्ह्ह ऋतू…..क्या चूत है……तेरी…..अह्ह्ह्ह मजा आ गया……….ओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ्फ़ ओफ्फ्फ्फ़….”
अंकल आगे की तरफ धक्का मार रहे थे और ऋतू पीछे की तरफ, और उन दोनों के झटके बीच में आकर एक दुसरे से टकरा रहे थे और ऋतू की चूत के अन्दर तरंगे पैदा कर रहे थे…
जल्दी ही अंकल भी अपने आखिरी पड़ाव पर पहुँच गए…और वो चिल्लाये….मेरा निकलने वाला है….आह्ह्हह्ह्ह्ह…..कहाँ निकालूं……. मेरे अन्दर ही…….अह्ह्हह्ह्ह्ह मैं आपको महसूस करना चाहती हूँ……
अंकल ने ये सुना तो हैरान रह गए…उन्हें क्या मालुम था की वो पिछले एक महीने से गोलियां ले रही है…और साथ ही साथ अलग-२ तरह के लंड से अपनी चुत की सिंचाई भी करवा रही है……
पर अंकल के लिए अब और कण्ट्रोल करना मुश्किल हो गया और उन्होंने अपने लंड का झरना खोल दिया…और उनके लंड से सफ़ेद पानी ऋतू की झील में जाकर गिरने लगा….
“अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह म्मम्मम्मम्म……मजा आ गया……अह्ह्हह्ह्ह्ह…….” ऋतू के चेहरे पर संतुष्टि के भाव थे…
अंकल नीचे उतारे और ऋतू के साथ लेटकर हांफने लगे…ऋतू ने अपनी चूत से उनका रस इकठ्ठा किया और चाट गयी और यम्मी कहकर और रस निकला और चाटने लगी…. और फिर उनके लंड पर झुककर उसे चूसने लगी और उसे भी चमका डाला…
अंकल अपनी आँखे बंद किये अपनी किस्मत को सराहने में लगे हुए थे और मजे ले रहे थे..
अंकल और ऋतू चुदाई के बाद नंगे एक दुसरे को सहलाने लगे.
तभी नीचे से मम्मी की आवाज आई…”ऋतू …ओ ऋतू…नीचे आ जा..खाना तैयार है…”
अंकल और ऋतू जल्दी से उठे और अपने कपडे पहन कर नीचे की तरफ चल दिए. मैंने भी अपने अकड़े हुए लंड को मसला और नीचे की और चल दिया.

