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मेरे लंड में भी तनाव आना शुरू हो गया, अपनी बहन को दो वेह्शियों के बीच देखकर, मैं अपनी जगह से उठा और ऋतू के सर के पास जाकर खड़ा हो गया, उसने मेरा लटकता हुआ लंड अपने मुंह के पास देखा तो झट से उसे अपने मुंह में लेकर चूसने लगी.
अब वो एक साथ तीन -२ मर्दों के बीच बैठी हुई उनका मनोरंजन कर रही थी, मैंने मन ही मन में सोचा, ऋतू की बच्ची आज तो तू गयी….
रेहान से अब रहा नहीं गया उसने नीचे झुककर ऋतू की चूत पर अपना मुंह लगा दिया और उसकी फैली हुई चूत की पलकों के बीच अपनी पेनी जीभ डाल कर कुरेदने लगा..ऋतू सिसक उठी..
आआआआआआआआअह्ह्ह्ह रेहाआआआआआआन्न म्मम्मम्मम
और वो रेहान को बड़े ही प्यार से देखते हुए उसके सर के ऊपर हाथ फेरने लगी, जैसे वो उसका पालतू कुत्ता हो….

नाजिर का मोटा लंड अपने पुरे शबाब में आने लगा था..उसने ऋतू के सर को एक झटके से अपनी गोद में खींचा और वो उसके लंड के ऊपर जा गिरी..आँखों के सामने काला नाग था, उसने आँखें बंद की और उसे मुंह में डाल कर चूसने लगी..
“हाआआन्न ऐसे ही चुसो….आआआआआआअह्ह्ह ”
नाजिर ने कहा और अपना सर पीछे करके अपने लंड को चुस्वाने के मजे लेने लगा..
मैं ऋतू के ऊपर खड़ा हुआ उसे बाप बेटे के बीच पिसता हुआ देख रहा था, मेरे सामने ऋतू के झूलते हुए चुचे थे, मेरे मन में कुछ अलग करने का विचार आया, जो काफी दिनों से मैं सोच रहा था, उसके चुचे चोदने का….मैंने अपनी दोनों टाँगे उसके पेट के दोनों तरफ रखी और नीचे बैठ गया और अपना लंड उसके लटकते हुए चूचो के बीच फंसा कर उन्हें पकड़ लिया और इस तरह से उसके मखमली उभारों का दबाव मेरे तने हुए लंड पर पड़ने लगा, मैंने धीरे -२ धक्के देने शुरू कर दिए…
नीचे से रेहान ने ऋतू की क्लिट को अचानक अपने मुंह में भर लिया और दांतों से दबा दिया… वो चिल्ला पड़ी…
“आआआआआआअह्ह्ह ओयय भोंसडीके साले मार डालेगा क्या….धीरे कर….” उसकी टाँगे कांप रही थी उसके इस प्रहार से…रेहान ने सॉरी बोला और फिर से उसकी चूत में कुछ ढूँढने लग गया..
नाजिर ने भी अपने बेटे को समझाया…”अरे बेटा…जिस चीज से तुम्हे इतने मजे मिलते हैं उसे इस तरह से तकलीफ नहीं दिया करते…समझे…”
मैंने मन ही मन में कहा…साला कसाई, अपनी चुदाई के समय इन बातों का ख्याल नहीं रहता क्या..
मैंने अपने दोनों हाथों से ऋतू के उभारों को थाम रखा था, उसके दोनों पिंक कलर के निप्पल्स मैंने अपनी उँगलियों से पकड़ रखे थे और उन्हें दबा भी रहा था, जिस वजह से ऋतू की सिस्कारियां बड़े ही मीठे स्वर में बाहर आ रही थी…
आआआआआअह्ह्ह्ह म्मम्मम औयीईईइ ……..अह्ह्ह्हह्ह ऊऊह्ह्ह …………..
ऋतू नाजिर के लंड को बड़े प्यार से चाट रही थी, उसने नीचे मुंह करके उसकी गोलियां भी अपने मुंह में भर ली और चूसने लगी…नाजिर की दोनों टाँगे हवा में उठ गयी ऋतू की इस हरकत से …आज तक उसकी गोटियाँ किसी ने अपने मुंह में नहीं ली थी….नाजिर नीचे लेट गया और ऋतू को अपनी गोटियाँ चाटने के काम में लगा दिया…
और अचानक ऋतू और नीचे हुई और नाजिर की भद्दी सी बालों वाली गांड के छेद पर अपनी जीभ फिरने लगी…मुझे तो बड़ी ही घिन्न आई की ऋतू ऐसा क्यों कर रही है…पर शायद उत्तेजना के नशे में उसे कुछ भी नहीं सूझ रहा था, वो तो बस नाजिर को ज्यादा से ज्यादा मजे देने के चक्कर में गंदे से गन्दा काम करने में लगी हुई थी…नाजिर को ज्यादा मजे देगी तभी तो उसे नाजिर ज्यादा मजे देगा..
अब नाजिर ने से ज्यादा सेहन नहीं हुआ उसने ऋतू को अपने ऊपर खींच लिया और उसके होंठों को चूसने लगा…उसके विशाल से शरीर के ऊपर ऋतू किसी छोटे बच्चे जैसी लग रही थी, काले रंग पर गोरी लड़की..
ऋतू के बाल खुल चुके थे और उसके चेहरे को ढक कर उसे और भी कामुक बना रहे थे, ऋतू तो बस अपनी आँखें बंद करे नाजिर के होंठों को चूसने में ऐसी लगी हुई थी की उसे बाकी के दोनों लोगो का ध्यान ही नहीं रहा जैसे…मैंने उसे ध्यान दिलाने के लिए उसके सर के ऊपर आया और अपना लंड उसके मुंह के पास लेजाकर खड़ा हो गया..उसके बाल खींचे और उसके मुंह में अपना लंड डाल कर हिलाने लगा…
नाजिर ने अपने खड़े हुए खम्बे को नीचे से अपने हाथों से अडजस्ट किया और ऋतू को उसपर बिठा दिया..ऐसा लग रहा था की ऋतू नाजिर के लंड पर नहीं किसी कुर्सी पर बैठी हुई है..क्योंकि वो एक तरह से हवा में लटकी हुई थी और फिर नाजिर ने ऋतू के दोनों कंधो को पकड़ कर उसे नीचे की तरफ दबाया…ऋतू चिल्लाती हुई नीचे आने लगी..
आआआआआआआआअह अयीईईईईईईईईइ मरररर गयीईईईई …….अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह अह्ह्हह्ह्ह्ह …
और अंत में उसके चुतड नाजिर के शरीर से जा टकराए और उसका पूरा लंड ऋतू की चूत में धंस सा गया…वो हिल भी नहीं पा रही थी, ये पहली बार नहीं था की वो नाजिर के लंड को अपनी नन्ही सी चूत में ले रही थी पर इस बार भी उसका लंड बड़ी ही तकलीफ दे रहा था…और यही तकलीफ ऋतू को मजा भी दे रही थी..

थोड़ी देर ऐसे ही बैठे रहने के बाद ऋतू ने हिलना शुरू किया और अब उसके मुंह से मीठी – २ सिस्कारियां निकलने लगी…
“आह्ह्ह्हह ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ म्मम्म और तेज चोदो मुझे अंकल….अह्ह्ह्ह बड़ा ही मजेदार है आपका मोटा लंड…..और तेज चोदो न…..अह्ह्हह्ह्ह्ह” वो चिल्लाने लग गयी थी..
पीछे बैठे रेहान से भी अब रहा नहीं गया और वो उठ कर ऋतू के पीछे आया और उसे अपने बाप के ऊपर लिटा दिया..ऋतू कुछ समझ पाती उससे पहले ही उसने अपना मोटा लंड उसकी गांड के छेद पर टिका दिया और एक तेज धक्का मारा…..
“आआआआआह्ह्ह ….साले मोटे गेंडे…निकाल वहां से…..मैं साथ एक दोनों का नहीं कर पाउंगी…..”
वो पहले भी डबल पेनेट्रेशन करवा चुकी थी पर इतने मोटे लंडो से नहीं….पर रेहान नहीं रुका और उसने एक दो और तेज धक्के मारकर अपना पठानी लंड उतार दिया उस बेचारी ऋतू की गांड में….
नीचे से उसके बाप नाजिर ने और तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए…अब उसने ऋतू को अपने बाहों में जकड रखा था और नीचे से धक्को पर धक्के मार रहा था…ऊपर से रेहान ने भी अपने धक्को की गति बड़ा दी और ऋतू की गांड के छेद को और खुला करने में लग गया…
मैं नीचे अपने पंजो के बल बैठ गया और उसके मुंह में अपना लंड दोबारा डाल दिया…
रेहान ने ऋतू के गोल चुतड पकडे और अपनी राजधानी एक्सप्रेस चला दी …उसके हर झटके से ऋतू चिल्ला पड़ती थी, नीचे लेटा उसका बाप नाजिर अपने मोटे लंड को सिर्फ उसकी कमसिन सी चूत में डाल कर लेटा हुआ था, क्योंकि बाकी का काम ऋतू खुद ही कर रही थी अपने आप आगे पीछे होकर…
मैंने ऋतू के चेहरे पर इतना संतोष पहले कभी नहीं देखा था, वो सही में चुदाई में एक्सपर्ट हो चुकी थी, लंड खाने वाली, मैं सोचने लग गया की अभी पिछले महीने तक वो सिर्फ अपनी चूत में एक डिल्डो लेकर मजे कर लेती थी और आज उसके चारों तरफ लंडो की भरमार है, वो भी नहीं जानती होगी की पिछले महीने से अब तक वो कितनी बार चुद चुकी है..
अचानक नाजिर को भी थोडा जोश आया, उसने भी नीचे से धक्के मारने शुरू कर दिए, ऋतू को लगा जैसे उसकी चूत का कबाड़ा बन जाएगा आज तो..
वो चिल्लाने लगी…
आआआआआह्ह्ह ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ्फ़ मर्रर्रर्र गयीईईई अह्ह्हह्ह्ह्ह……..
उसने मेरे लंड को अपने हाथों में पकड़ लिया और उसपर थूक फेंककर उसे मसलने लगी, मैंने भी अपनी आँखें बंद कर ली और मजे लेने लगा, जल्दी ही मेरा ओर्गास्म अपने चरम सीमा पर पहुंचकर वीर्य के रूप में बाहर निकल पड़ा और मैंने अपनी पिचकारियों से ऋतू के चेहरे को भिगो डाला, कई बूंदे तो नीचे लेटे नाजिर के चेहरे पर भी पड़ी जिसे ऋतू ने अपनी गुलाबी जीभ से चाटकर साफ़ कर दिया…
मैं झड़ने के बाद साइड में बैठ गया, अब मैं ऋतू को उन दोनों बाप बेटे के बीच चुदता हुआ देख रहा था.
नाजिर के मन में अलग तरीके से चोदने का विचार आया उसने रेहान को अपना लंड ऋतू की गांड में से निकालने को कहा और खुद भी ऋतू को अपने लंड से सटाए हुए खड़ा हो गया, उसका लंड अभी भी ऋतू की चूत में फंसा हुआ था, ऋतू उसकी गोद में चढ़ कर अपनी टांगो को उसकी कमर में लपेटी और अपनी बाँहों को उसकी गर्दन में लपेटी गहरी साँसे ले रही थी, खड़े होने के बाद नाजिर ने रेहान को इशारा किया और रेहान ने पीछे से आकर ऋतू की गांड में फिर से अपना लंड डाल दिया और इस तरह ऋतू हवा में ही दोनों का लंड लिए चुद रही थी, ये बिलकुल वैसा ही था जैसे पापा और चाचू ने ऋतू को चोदा था, पर यहाँ लंड के साइज़ थोड़े बड़े थे.
ऋतू ने अपना मुंह पीछे किया और रेहान के मुंह को पकड़ कर उसके मोटे होंठ चूसने लगी, उसके शरीर की लचकता देखते ही बनती थी, हवा में लटक कर वो कलाबाजी दिखा रही थी, रेहान ने अपने हाथ आगे करके ऋतू के चुचे अपने हाथों में पकडे और तेजी से दबाने लगा, नाजिर और रेहान दोनों ऋतू की कमर को पकड़ कर उसे ऊपर नीचे कर रहे थे..
कमरे में सेक्स का म्यूजिक चल रहा था.
अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह ओफ्फो ओफ्फ्फ उफ ओफ्फ्फ ऑफ़ ओफ्फ्फ ऊऊऊऊआआ याआआ ऐसे ही अआः म्मम्मम्मम्म और तेज चोदो न मुझे…..अह्ह्ह्ह रेहान…..अंकल….मजा आ गया…….अह्ह्हह्ह….
और तेज आवाजें निकलती हुई वो झड़ने लगी, उसकी चूत में से सेलाब की तरह उसका जूस निकलते हुए नीचे जमीं पर गिरने लगा…. पर रेहान और नाजिर तो रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे, ऋतू झड़ने के बाद ढीली होकर हवा में लटक सी गयी पर नाजिर ने उसे अपने लंड से ऐसा जकड़ा हुआ था की वो सिर्फ हवे में उछालने के सिवाय कुछ नहीं कर पा रही थी, रेहान और नाजिर ने तो जैसे ऋतू की चूत की चटनी बनाने की कसम ही खा ली थी, ऋतू की चूत बड़ी सेंसेटिव हो चुकी थी पर उसका ख्याल कोई नहीं कर रहा था..वो दर्द के मारे चिल्लाने लगी…
अह्ह्ह्हह्ह छोड़ दो न प्लीस …..मुझसे और नहीं होगा…….अह्ह्ह्हह्ह हैईईईइ ……अह्ह्ह्हह्ह प्लीस मत करो….न…….अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ओयीईए……मम्मी……..मर्रर्रर्र गयी रे……….अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह …इसी बीच अपनी चूत को लगातार घिसने की वजह से उसके अन्दर एक और ओर्गास्म बनने लगा था, जिसकी वजह से उसे दर्द में भी मजा आने लगा….अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह म्मम्मम्मम ऐसे ही…..करो…….अह्ह्हह्ह्ह्ह
उसके बदले हुए रूप को देखकर मुझे भी हंसी आ गयी और मेरे मुंह से निकला…साली चुद्दक्कड़….

रेहान के शरीर से पसीने निकलने लगे थे, और जल्दी ही वो भी अपने चरम स्तर पर पहुँच गया और उसने पीछे से अपनी राईफल से दनादन कई गोलियां उसकी गांड की गुफा में दाग दी…और जोर से चिल्लाने लगा…
अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ले साली…….ले मेरा माल अपनी गांड में…….अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह …….
और उसने अपने लंड वापिस खींच लिया उसकी गांड में से, लंड के पीछे -२ उसका सारा रस भी बाहर आकर नीचे गिरने लगा…. रेहान हाँफते हुए नीचे लेट गया.
अब मैच सिर्फ ऋतू और नाजिर के बीच हो रहा था….

नज़िर ने अपना बेट ऋतू की गीली पिच में डाल रखा था और उसकी बाल्स को अपने हाथों में लेकर चोके छक्के मार रहा था…. तकरीबन दस मिनट के बाद उसने भी अपना लंड ऋतू की चूत में खाली करना शुरू कर दिया….
अपनी चूत में आयी बाड़ को महसूस करते ही ऋतू ने भी दूसरी बार हवा में लटके हुए झड़ना शुरू किया और नाजिर के गले में अपनी पकड़ को और मजबूत बनाते हुए चिल्लाने लगी….
हन्न्न्नन्न्न्न …….म्मम्मम्मम मजा आ गया…….आआआह्ह्ह अंकल …..अह्ह्हह्ह्ह्ह ओफ्फफ्फ्फ़ …..
मैं नीचे बैठे हुए देखा की नाजिर का लंड धीरे से फिसलकर ऋतू की चूत से बाहर निकल गया और नाजिर ने ऋतू को नीचे उतार दिया, वो तो निढाल सी होकर नीचे गिले फर्श पर बैठ गयी और नाजिर के लटकते हुए लंड को अपने मुंह में भरकर उसे साफ़ करने लगी….दुसरे हाथ से वो अपनी फूली हुई चूत और गांड को मसल रही थी…

हम सभी ने अपने कपडे पहने और बाहर आकर बाकि लोगो के साथ खाना खाने लगे, ऋतू से ठीक से चला भी नहीं जा रहा था, पर खाना भी जरुरी था..
उसकी हालत देखकर रूबी और हिना मुस्कुरा दी, वो समझ गयी की रेहान और नाजिर ने आज ऋतू की काफी बजायी है. हम सभी ने एक साथ खाना खाया और वापिस अपने काटेज में आ गए..
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