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हम सभी इतनी चीखे मार रहे थे की हमें दुसरे कमरे का ध्यान ही नहीं रहा, वहां दुसरे कमरे में सभी एक दुसरे की बीबियों की चूत मार रहे थे, जब मंजू ने दुसरे कमरे से आती आवाज सुनी तो अपनी चूत से मेरे पापा का लंड बाहर निकाल कर वो शीशे वाली जगह के पास गयी जहाँ से उसे आवाजें आ रही थी, उसने जब शीशा हटाया तो दुसरे कमरे का नजारा देखकर उसके होश उढ़ गए, वहां हम सभी को नंगा लेते देखकर और अपनी दोनों बेटियों को भी हमारे साथ देखकर वो चकरा सी गयी, सोनी मेरे लंड को अन्दर लिए अभी भी मेरी छाती पर लेटी हुई हांफ रही थी..
मंजू ने अपनी बड़ी बेटी को नंगे मेरे ऊपर लेटे हुए देखा और वो समझ गयी की उसकी बेटी तो चुद चुकी है, ये सोचते ही उसके मुंह से एक हांफने जैसी आवाज निकल गयी, जिसे सुनकर मैंने शीशे वाली जगह पर देखा और मंजू आंटी को अपनी तरफ देखते हुए पाकर मैं समझ गया की उन्होंने सभी कुछ देख लिया है. ऋतू ने भी देखा की मैं शीशे वाली जगह देख रहा हूँ तो उसने भी वहां मंजू आंटी को खड़ा हुआ देखकर अपनी चूत चाटती मोनी को और जोर से अपनी चूत पर दबा दिया, मंजू आंटी की आँखें फैलती जा रही थी अपनी बेटियों की करतूते देखकर..
सोनी ने अपनी साँसे सँभालते हुए जब देखा की मेरी नजर कहाँ है तो वहां अपनी माँ को अपनी तरफ घूरते पाकर वो भी सहम सी गयी, मेरा लंड अभी भी उसकी चूत में पड़ा हुआ उसके अन्दर अजीब तरह की तरंगे छोड़ रहा था जिससे उसे बड़ा मजा आ रहा था पर एकाएक अपनी माँ को देखकर उसने मेरा लंड अपनी चूत में मसलना बंद कर दिया जिसकी वजह से वो बाहर आ गया और वो मेरे मुरझाये हुए लंड के ऊपर से हट कर बैठ गयी.
मोनी ने जब चूत चाटना बंद किया तो उसने अपना मुंह ऊपर किया, उसका पूरा मुंह ऋतू के रस से नहाया हुआ चमक रहा था, ऋतू उसकी माँ को पहले ही देख चुकी थी इसलिए उन्हें और किलसाने के लिए उसने मोनी को ऊपर खींचा और अपने होंठो से उसके रसीले होंठ चाटते हुए अपने ही रस का स्वाद लेने लगी और बोली “क्यों मोनी…मजा आया के नहीं..”
मोनी : “अरे ऋतू दीदी, सही में आपकी चूत का स्वाद बड़ा ही नशीला है, मेरा मन कर रहा था की आपका रस निकलता रहे और मैं पीती रहूँ..” और उसने अपनी बड़ी बहन सोनी की तरफ देखा जो शीशे वाली जगह पर अपनी माँ को देखकर सहमी बैठी थी, मोनी ने भी जब देखा की उनकी माँ उन्हें चुदते हुए देख रही है तो वो भी डर गयी और सोचने लगी की अब क्या होगा.
वो ऋतू से बोली : “अरे ये तो मोम है ….हे भगवान्, उन्होंने सब कुछ देख लिया है…अब क्या होगा..”
मैं : ” अरे डरो मत, कुछ नहीं होगा”
तभी बाहर का दरवाजा खुला और मंजू आंटी और पंकज अंकल नंगे ही हमारे कमरे मैं दाखिल हुए और आते ही चिल्ला कर बोले : “ये क्या हो रहा है, क्या कर रहे हो तुम लोग …”
मैंने कहा : “यहाँ वो ही हो रहा है जो आपके कमरे में हो रहा है, और हम वो ही कर रहे हैं जो हमने कल आप लोगो के साथ किया था…यानी सेक्स.”
मंजू : “पर ये हमारे बच्चे हैं, तुम ऐसे कैसे कर सकते हो”
मैंने कहा “क्या आपने हमारी मम्मी, जिनकी चूत और गांड अभी पंकज अंकल मार कर आ रहे हैं, और पापा, जिनका लंड मंजू आंटी अपनी चूत, गांड और मुंह में लेकर आ रही है, को बताया की कल आप लोगो ने हम दोनों भाई बहन की भी चुदाई की थी…नहीं ना..हमने आज रात आप लोगो को अपने दुसरे फ्रेंड्स के साथ और हमारे पेरेंट्स के साथ भी ग्रुप सेक्स करते हुए देखा, कल कोई और था आपके साथ जब आपने हमारे साथ सेक्स किया था, जब आप ये सब कर सकते हो तो सोनी और मोनी क्यों नहीं कर सकती”
“ये तो पागलपन है” मंजू आंटी चिल्लाई “तुम जानते भी हो की तुम क्या कह रहे हो”
“हाँ मैं जानता हूँ की मैं क्या कह रहा हूँ” मैंने कहा “सेक्स एक बड़ी ही मजेदार चीज है, अगर आपका कोई इमोशन इसके साथ जुड़ा ना हो तो इसमें सबसे ज्यादा मजा आता है, बहुत बढ़िया है ये, एक अच्छी एक्सर्साईज़ है ये तो”
“लेकिन हमारे बच्चे …” मंजू ने फिर से कुछ कहना चाहा..
“ये अब बड़े हो रहे हैं…हैं ना..आपको तो इनपर नाज होना चाहिए की आपको देखकर ये सीख रहे हैं और आगे बढ़ रहे हैं..क्या आपको लगता है की जो आप कर रहे हैं वो सही है..?” मैंने कहा
“हम यहाँ अपने आप को डिस्कस नहीं कर रहे हैं” पंकज ने कहा.
पीछे से आवाज आई “क्यों नहीं कर रहे हैं…जबकि ये सब कुछ आप लोगो से जुड़ा हुआ है” उन्होंने पीछे मूढ़ कर देखा तो हमारे मम्मी पापा खड़े थे, वो भी बिलकुल नंगे.
“नहीं पूर्णिमा…आप समझ नहीं रहे हैं, ये इतना आसान नहीं है हमारे लिए..” मंजू ने मेरी माँ से कहा.
“ये हमारे लिए भी आसान नहीं था, लेकिन फिर हमने भी ये कबूल कर लिया की हमारे बच्चे भी हम लोगो की तरह खुले विचारों वाले हैं..
इसलिए हमने ये डिसाईड किया की इन बच्चो को हमसे ही सीखना चाहिए..ना की किसी बाहर वाले से, जहाँ से कुछ और गड़बड़ की आशंका हो..” मम्मी ने उन्हें समझाते हुए कहा.
“थेंक यू मोम…” मैंने मम्मी को कहा और उठकर उनके पास जाकर खड़ा हो गया,
“क्या आप लोगो को हमारे बच्चो के साथ कल रात मजा आया था ?” मम्मी ने मंजू से पूछा
वो शर्मा सी गयी और बोली “मैं क्या कहूँ..ये दोनों कल जब नंगे हमारे पास आये तो हमसे ना कहा ही नहीं गया..”
“आप लोग इन्हें ना भी कर सकते थे, अगर आपके मन में अपने बच्चो के लिए अच्छे विचार हैं तो दुसरो के बच्चो के लिए भी वोही विचार होने चाहिए…” मम्मी ने कहा.
“मैं आपके कहने का मतलब समझ गयी…” मंजू ने गहरी सांस लेते हुए कहा “हमें तो बस अपनी बच्चियों को एकदम से सेक्स करते देखकर यकीन ही नहीं हुआ की वो इस उम्र में ये सब कर सकती हैं…मुझे इनकी चिता हो रही थी पर लगता है ये सच में बड़ी हो गयी हैं…”
“ओह मोम….हम ठीक हैं..हमें भी ये सब करने में बड़ा मजा आया” मोनी ने आगे बढ़कर अपनी माँ से कहा.
“आशु..ऋतू..नेहा..तुम सभी चलो यहाँ से, इन्हें आपस में बातें करके अब सब कुछ निपटाने दो..” पापा ने हमसे कहा.
“ठीक है…” ऋतू बोली और हम सभी अपने कपड़े पहनने लगे, ऋतू ने मोनी से कहा “तुम लोग हमारे कमरे में आ सकते हो…अगर तुम चाहो तो..”
मोनी बोली “बिलकुल…मुझे भी काफी मजा आया आज, हम जरूर आयेंगे”

अपने पापा का लंड सोनी को बड़ा ही मीठा लग रहा था, अचानक उसके पापा, पंकज से सब्र नहीं हुआ और उन्होंने उसे उठाकर अपनी बाँहों में कैद कर लिया और अपने घनी मूंछो वाले होंठ उसके कोमल होंठो पर रख दिए..सोनी हमेशा से ही अपने पापा की घनी मूंछो की दीवानी थी, वो फ़िल्मी एक्टर कमल हसन जैसी मूंछे थी, वो उन्हें अपनी जीभ से भिगो-भिगोकर चुबलाने लगी और उनके गीले होंठो से कबड्डी खेलने लगी, दोनों में ही एक दुसरे के होंठो को दबाने और चूसने की होड़ सी लगी हुई थी, और फिर पंकज ने अपने होंठ उसकी गर्दन से चिपकाते हुए नीचे की तरफ जाना शुरू कर दिया…अपने पापा के गीले होंठो के स्पर्श से उसका शरीर सिहर रहा था, उसके लरजते हुए होंठो से अजीब-२ सी आवाजें आ रही थी, अपनी पतली उँगलियाँ वो अपने पापा के घने बालों में गुम-घुमाकर उन्हें और उत्तेजित कर रही थी, पापा के होंठ जब उसके खड़े हुए उरोजों तक पहुंचे तो उसकी सिहरनता और भी बढ गयी, उसके मुंह से अपने आप एक मादक चीख निकल गयी.
अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह पाआआआआआआआआआआआआआपाआआआ ….. म्म्म्मम्म्म्मम्म मूऊऊऊओ ….
उसने अपनी ऑंखें नीचे करके देखा तो उसके पापा अपनी लम्बी जीभ निकाल कर उसके निप्पल के चारों तरफ घुमा रहे थे, उसके कठोर निप्पल और एरोहोल पर उभरते छोटे -२ दाने उनकी कठोरे जीभ से टकरा कर सोनी को और भी उत्तेजित कर रहे थे, सोनी चाहती थी की उसके पापा उन्हें और जोर से काटे, बुरी तरह से दबाये, वो अपने साथ उनसे वेह्शी जैसा बर्ताव करवाना चाहती थी, पर उसके पापा तो उसे बड़े प्यार से सहला और चूस रहे थे…इसलिए उसके मुंह से कुछ अजीब से शब्द निकलने लगे..
आआआआआह पपाआआअ जोरसे चुसो नाआआआअ..अपनी सोनी कोssssssssssssssssssss…..
हां ऐसे हीईईईईई आआआआआआआह्ह काआआआआतूऊओ मेरे निप्पल को दांतों सीईईईईईए आआआआअह्ह्ह्ह दबाओ इन्हें अपने हाथों सीईईईईई…..आआआआआआआआह्ह्ह्ह चबा दालूऊऊऊऊ इन्हीईईईईईए मत तडपाओ….ना पपाआआआ प्लीस …….
अपनी बेटी की बातें सुनकर पंकज समझ गया की वो जंगली प्यार चाहती है, इसलिए उसने अपनी फुल सी बेटी के जिस्म को जोर से मसलना और दबाना दबाना, चुसना और काटना शुरू कर दिया.
आआआआआयीईईईईईईईईईईईई हाआआआआआन्न ऐसे हीईईईईईईईइ उयीईईईईईईईईईइ नहीईईईईईईईई….. अयीईईईईईईईईईईईईईइ ओह्ह्हह्ह्ह्हह्ह याआआआआआआआअ पपाआआआआआ येस पपाआआआ म्मम्मम्मम्म मजाआआआआअ आआआआआआआआअ गयाआआआआआआआअ वो अपने पापा का सर पकड़कर अपनी छाती पर घुमा रही थी.
बेरहमी से काटने की वजह से उसके सफ़ेद उरोजों पर गहरे लाल निशान बन गए थे, जिनपर उसे दर्द भी हो रहा था पर अपने पापा के साथ प्यार का खेल खेलने और मजे लेने के चक्कर में उसे ये दर्द भी मीठा लग रहा था..
पंकज ने उसके सपाट पेट को चुमते हुए नीचे की तरफ जाना शुरू किया और अंत में अपने पंजो और घुटनों के बल बैठ कर उन्होंने सोनी के एक पैर को अपने कंधे पर रख कर उसकी आग उगलती चूत के ऊपर अपना मुंह लगा दिया. आआआआआआआआआआआआह्ह्ह पापा…….
सोनी बड़े प्यार से अपने प्यारे पापा को देख रही थी, पंकज उसकी चूत को चाटते हुए उसे एकटक देख रहा था और जोर से पपाआआआआआ …सोनी चिल्लाई.. और उसके पापा ने चूत चाटने की स्पीड और बड़ा दी..आज ही उसकी चूत को मैंने फाड़ा था इसलिए थोड़ी बहुत सुजन आ गयी थी उसपर, पर उसके पापा की जीभ उसकी चूत पर मरहम का काम कर रही थी, इसलिए उसे भी बड़ा ही मजा आ रहा था.
थोड़ी ही देर में उसकी चूत में फिर से वोही अजीब तरह की तरंगे उठने लगी और अचानक ही उसने अपनी चूत से अपने अन्दर का लावा बाहर उड़ेल दिया..नीचे बैठे उसके पापा को जैसे एक झटका सा लगा पर उन्होंने अपना मुंह नहीं हटाया उसकी चूत से और सारा गर्म पानी पी गए वो अपनी प्यारी सी बेटी का.
वो हवा में अटकी हुई हांफ रही थी, उसका शरीर निढाल सा हो गया और उसने अपने गोल चुचे पापा के सर से सटा दिए और गहरी साँसे लेने लगी.
पंकज का लंड अभी भी खड़ा था, उसने अपने बेटी को अपने ऊपर लिटाया और अपना हाथ नीचे करके अपना लंड उसकी नन्ही सी चूत में फंसा दिया..वो अभी अपने ओर्गास्म से संभल भी नहीं पायी थी की उसके पापा के एक तेज धक्के ने उनका पूरा आठ इंच का मोटा लंड उसकी चूत में उतार दिया…
अयीईईईईईईईईईईईईईईईई पपाआआआआआआआअ वो चिल्ला पड़ी…
सभी की नजरें उस तरफ उठ गयी, उसकी पत्नी मंजू, जो अपनी छोटी बेटी की चूत चाट रही थी, वो उठी और अपने पति से बोली “पंकज डार्लिंग….थोडा धीरे करो….अपनी ही बच्ची है…”, पंकज ने उसे देखा और अपना सर हिला कर आश्वासन दिया और फिर दोनों अपने काम में लग गए.
पापा का पूरा लंड अपनी चूत में लेकर सोनी थोड़ी देर तक नम सी होकर लेटी रही और फिर पापा ने जब नीचे से धीरे-२ धक्के मारने शुरू किये तो उसके गोल चूतड भी थिरक-थिरककर अपने पापा का साथ देने लगे..
हर धक्के के साथ उसके अन्दर का आनंद और भी बढता जा रहा था, उसने अपने पापा को बेतहाशा चूमना और चुसना शुरू कर दिया…
पुछ्ह्ह्हह्ह्हह्ह …..हाआआआआन्न पपाआआआआआअ और तेज…….और तेज….और तेज….हाआआअन ऐसे ही… आआआआआह्ह म्मम्मम्मम्म ओह ओह ओह ओह ओह ओह ओह हा अ हा हा हा हा हा हा…..
पंकज भी अपनी बेटी को चोदते हुए उसके चुचों का रसपान कर रहा था, जिसकी वजह से सोनी और तेजी से मचलने लगी, उसकी चूत से फिर से एक सेलाब निकलने की तय्यारी करने लगा, पंकज ने भी जब देखा की वो झड़ने वाला है तो उसने अपना लंड बाहर निकालने की सोची पर सोनी ने उसे रोक दिया और उनकी आँखों में देखकर बोली…. नहीईईईई पपाआआआआअ…बाहर नहीईईई…..अन्दर ही डालो……..प्लीस………..
पंकज को अपने कानो पर विश्वास ही नहीं हुआ, की उसकी सगी बेटी अपने पापा का रस अपनी कुंवारी चूत में चाहती है…उसने ज्यादा न सोचते हुए अपना लंड उसकी चूत में खाली करना शुरू कर दिया..
आआआआआआआआआआआअह्ह्ह वो जोर से चिल्लाये….
और एक के बाद एक कई झटके उसकी कमसिन सी चूत में देकर वो झड़ने लगे..अपने पापा का गरमागरम रस अपनी चूत में पाकर सोनी भी निहाल सी हो गयी और उसके अन्दर के सेलाब ने भी अपने पापा के लंड के ऊपर ही अपना असर दिखाते हुए झड़ना शुरू कर दिया.
आआआआआआआआआआआआह्ह पपाआआ…म्म्म्मम्म्म्मम्म ……अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ….मजा आ गया…..पापा… और उसने अपने पापा को चूम लिया

थोड़ी देर लेटने के बाद वो उठी और लंड को बाहर निकाला, लंड के बाहर आते ही उसकी चूत में से ढेर सारा रस निकल कर लंड के ऊपर गिर गया, वो नीचे हुई और लंड के चारों तरफ फैले अपने और पापा के रस को चाटने लगी और फिर रसीले लंड को अपने मुंह में लेकर चूसकर उसे भी साफ़ कर दिया, दुसरे हाथ से अपनी चूत के अन्दर के रस को भी समेटा और उसे भी चाट कर गयी..
“म्मम्मम्मम्म पापा आपका रस तो बड़ा ही मीठा है….आज से रोज सुबह मैं जूस के बदले आपके लंड का रस पियूंगी..” पापा भी अपनी बेटी की भोली सी बात पर मुस्कुरा दिए.
मेरा लंड भी अपनी मम्मी की चूत के अन्दर काफी तेजी से आ जा रहा था, आज वो काफी खुल कर चुदाई करवा रही थी, उनके मोटे-२ चुचे केरे मुंह पर थपेड़े मार रहे थे.
मैंने उनके मोटे कूल्हों को पकड़ा हुआ था और अपनी एडियों के बल उठ कर, नीचे लेटा उनकी चुदाई कर रहा था, उनके मुंह में सिस्कारियों की झड़ी लगी हुई थी.
.उफ्फ्फ ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ्फ़ अआः अह अह अह अह अह अ होफ्फ्फ़ ओफ्फ्फ्फ़ ओफ्फ्फ्फ़ फक्क मीई……अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह हाआआआआन्न ….
और अंत में उन्होंने अपनी गर्म चूत में से मलाईदार रस छोड़ना शुरू कर दिया….. आआआआआआआआआअह्ह्ह्ह मैं तो गयीईईईईईईईईईइ……….ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह गोड……..
मैंने उन्हें नीचे लिटाया और अपना लंड निकालकर, उनकी दोनों टाँगे उठा कर, अपने लंड को उनकी गांड में लगा दिया, उनकी आँखें विस्मय से फ़ैल गयी…मैंने जब से अपनी माँ को चुदते हुए देखा था, मैं तभी से उनकी मोती और फूली हुई गांड मारना चाहता था, आज मोका लगते ही मैंने अपना लंड टिकाया उनकी गांड के पर और एक तेज धक्का मारा….. आआआआआआआआह्ह्ह्ह वो चिल्ला पड़ी…
उनकी गांड का कसाव सही में लाजवाब था, मैंने तेजी से झटके देने शुरू किये, गांड के कसाव के कारण और उनके गद्देदार चूतड़ों के थपेड़ों के कारण मुझे काफी मजा आ रहा था. मेरे नीचे लेटी माँ की चूचियां हर झटके से हिल रही थी, उन्होंने उसे पकड़ कर उन्हें दबाना शुरू कर दिया और मेरी आँखों में देखकर सिस्कारियां सी भरने लगी….
आआआआआआअह्ह्ह म्मम्मम्मम ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ अह्ह्ह्ह शाबाश बेटा…..और तेज करो…..हाँ ऐसे ही……आआआह्ह्ह्ह
वो दोबारा उत्तेजित हो रही थी…मेरे हर झटके से वो अपनी गांड हवा में उठा कर अपनी तरफ से भी ठोकर मारती थी….और जल्दी ही मेरे लंड ने जवाब दे दिया और मैंने एक तेज आवाज निकालते हुए उनकी कसी हुई मोटी गांड में झड़ना शुरू कर दिया…
आआआआआआआह्ह मोम्म्म्म …….मैं आआयाआआआआ …..आआआआआआअह्ह्ह उन्होंने मेरे सर के ऊपर हाथ रखा और बोली….
आजाआआआ मेरे लाआआअल्ल ….. आआआआआआअह्ह्ह और वो भी झड़ने लगी.
अपने जवान बेटे की चुदाई देखकर उनकी आँखों से ख़ुशी के मारे आंसू आने लगे और वो मुझे गले लगाये, मेरे लंड को अपनी गांड में लिए, लेटी रही.
पापा भी आज काफी खुंखार दिख रहे थे, उन्होंने ऋतू की चूत का भोसड़ा बना दिया अपने लम्बे लंड के तेज धक्को से, ऋतू तो जैसे भूल ही गयी थी की वो कहाँ है…अपने पापा के मोटे लंड को अन्दर लिए वो तेजी से चिल्ला रही थी….
आआआआआआह्ह्ह पपाआआआ और तेज मार साले…..बेटी चोद…भोंस्डीके…मार अपनी बेटी की चूत…….आआआआआआआआह माआआआअर कुत्ते……..ओफ्फफ्फ्फ़ अयीईईईईईईईई वो बडबडा भी रही थी और सिस्कारियां भी मार रही थी….
जल्दी ही दोनों अपने आखिरी पड़ाव पर पहुँच गए और ऋतू ने अपनी टाँगे पापा की कमर के चारों तरफ lapet ली और अपने दोनों कबूतर उनकी घने बालों वाली छातियों में दबाकर और उनके होंठो को अपने होंठो में फंसाकर वो झड़ने लगी..
आआआआआआआआआआआह्ह्ह पपाआआआआआआआअ म्मम्मम्मम्म अपने लंड पर बेटी के गर्म रसाव को महसूस करते ही उनके लंड ने भी अपने बीज अपनी बेटी के खेत में बो दिए….
और वो भी झड़ते हुए उसके नर्म और मुलायम होंठो को काटने लगे….और उसके ऊपर ही ढेर हो गए. उधर अपनी बेटी की चूत चाटते हुए मंजू आंटी भी काफी उत्तेजित हो चुकी थी, अपने एक हाथ से वो खुद ही खुजला कर अपनी चूत की गर्मी बाहर निकाल रही थी, मोनी जो नीचे लेटी अपनी चूत अपनी माँ से चटवा रही थी और खुद वो नेहा की चूत को चाट रही थी, उसके शरीर के अन्दर अचानक एक सुस्सुराहत सी होने लगी… वो कुछ समझ पाती इससे पहले ही उसकी चूत के अन्दर से पेशाब का एक फव्वारा सा फुट निकला और उसकी माँ मंजू के मुंह से जा टकराया…
मंजू आंटी पहले तो चोंक गयी पर फिर अन्दर से आती गर्म पेशाब की फुहारों को अपने मुंह से टकराते पाकर उन्हें भी काफी मजा आने लगा और वो अपना मुंह अपनी बेटी मोनी की चूत से थोडा दूर किये , अपनी आँखें बंद करके उस गर्म बारिश का मजा लेने लगी… जब बारिश बंद हुई तो उन्होंने अपना मुंह दोबारा अपनी बेटी की चूत में लगा दिया..जल्दी ही मोनी के शरीर में असली वाली सुस्सुराहत होने लगी…
अब वो जान गयी थी की वो झड़ने वाली है इसलिए उसने अपने ऊपर बैठी नेहा की चूत को और तेजी से चुसना शुरू कर दिया…नेहा भी अपनी चूत पर ये तेज हमला बर्दाश्त नहीं कर पायी और वो झड़ने लगी, उसका गर्म अमृत नीचे लेटी मोनी में मुंह के अन्दर तक जा रहा था…
नेहा के झड़ते ही उसकी चूत ने भी अपना रस अपनी माँ के मुंह में डाल दिया और वो उसे सड़प-२ करके पीने लगी..
नेहा ने झड़ने के बाद नीचे उतर कर मंजू आंटी की चूत पर अपना मुंह लगा दिया और उसके अन्दर से कुछ खींचने की कोशिश करने लगी, जल्दी ही उनका रस बाहर की तरफ खींचता चला आया और उसके मुंह से जा टकराया…वो भी उसे जल्दी से पीने लगी.
पुरे कमरे में सेक्स की खुशबू आ रही थी…सभी ने थोड़ी देर नंगे लेटे हुए बातें करी और दोबारा मिलने का वादा करके हम सभी ने अपने कपडे पहने और बाहर निकल गए.
आज के इस ग्रुप सेक्स ने हम सभी को काफी नजदीक ला दिया था..
हम सभी अपने कमरे में पहुंचे और दरवाजा खोलते ही हम हैरान रह गए, अन्दर अजय चाचू और आरती चाची के साथ रेहान और हिना थे..
अजय चाचू किसी पागल कुत्ते की तरह नंगी लेटी हिना की चूत में अपना मुसल जैसा लंड पेल रहे थे, और वो चुद्दकड़ आरती चाची तो मुसलमानी लंड को देखकर बिफर सी गयी और उसके मोटे लंड पर चढ़ कर अपनी बुर को बुरी तरह से रगड़ रही थी. हम सभी को देखते ही अजय चाचू और आरती चाची मुस्कुरा दिए और बोले “अच्छा हुआ आप लोग आ गए, ये दोनों बच्चे आशु और ऋतू को पूछते हुए आये थे और मैं और आरती चुदाई में लगे हुए थे, इन्होने बिना किसी तक्कलुफ़ के हमारे साथ शामिल होने की बात कही…और हम इनकार नहीं कर पाए…देखो तो कैसे आरती उछल-२ कर रेहान के मोटे लंड से चुदवा रही है…और ये हिना तो बड़ी ही प्यारी है..इसकी टाइट चूत को मारकर इतना मजा आ रहा है की मैं क्या बताऊँ…”
मैंने देखा की हिना ने हम सभी की आवाजें सुनते ही अपनी ऑंखें खोली और मेरी तरफ देखकर एक आँख मार दी, उसे चाचू के लंड को अपनी चूत में डलवाने में बड़ा ही मजा आ रहा था, उसके मोटे चुचे हर झटके के साथ आगे पीछे हो रहे थे, उसकी टाँगे हवा में थी, और हाथ सर से ऊपर…पूरी चुद्दकड़ बन चुकी थी वो पिछले दो दिनों में..
आरती चाची भी हमारी तरफ मुढ़ी और मम्मी को देखकर बोली…”आओ दीदी…यहाँ आ जाओ…बड़ा ही मजा आ रहा है..इस मुस्सल्ल्ले के लंड से…मेरी तो काफी दिनों से इच्छा थी की किसी मुसलमान के मोटे लंड से चुदाई करवाऊ…और मेरी ये इच्छा आज पूरी हुई है…मजा आ गया इस मोटे का लंड लेने में..आआआआआआआअह्ह्ह्ह .”
हम सभी अभी-२ चुदाई करके आये थे, इसलिए थोडा थक गए थे, हमने ये बात चाचू को बताई और कहा तुम मजे लो हम थोड़ी देर बैठ कर आप लोगो की चुदाई देखेंगे..और फिर शामिल भी हो जायेंगे.. और वो चारों फिर से अपनी चुदाई में लग गए..
मम्मी, ऋतू और नेहा बड़े ही गौर से रेहान को आरती चाची की चुदाई करते हुए देख रहे थे और पापा एक नयी लड़की को देखकर फिर से ताव में आने लगे थे, हिना के दिलकश चुचे उनकी आँखों में एक अलग ही चमक पैदा कर रहे थे.
नेहा तो पहले से ही रेहान के लंड की दीवानी थी और आज उसकी चूत में कोई लंड भी नहीं गया था, इसलिए वो आगे बढ़ी और अपनी मम्मी के पास जाकर खड़ी हो गयी..आरती चाची ने जब देखा की उनकी बेटी बड़े चाव से उसे चुदते हुए देख रही है तो उसने उसे पुचकारकर अपने पास बुला लिया और उसे अपने झूलते हुए चुचे पर झुका कर उसके मुंह में अपना निप्पल डाल दिया…
आआआआआआआआआह्ह्ह्ह वो धीरे से चिल्लाई…
नेहा ने अपने दांतों से अपनी माँ के दाने को चुसना शुरू कर दिया…नीचे से रेहान का लंड और ऊपर से अपने दाने पर बेटी के होंठो का दबाव पाकर आरती चाची रेहान के लंड पर नाचने सी लगी….पापा तो जैसे हिना के हुस्न को देखकर सब कुछ भूल से गए थे..वो अपने छोटे भाई को हिना की चूत मारते देखकर फिर से उत्तेजित हो गए और अपना लटकता हुआ लंड मसलते हुए उनके पास जाकर खड़े हो गए.. हिना ने जब देखा की मेरे पापा उसके पास खड़े हैं तो उसने मेरी तरफ देखा..मैंने सर हिला कर उसे इशारा किया और वो समझ गयी की ये मेरे पापा हैं…उसने मुस्कुराते हुए हाथ बड़ा कर मेरे पापा का लंड पकड़ लिया…
स्स्स्सस्स्स्स उनके मुंह से एक सिसकारी सी फुट गयी… अपनी बेटी की उम्र की जवान लड़की अगर लंड पकडे तो ऐसा ही होता है…
फिर उसने लंड को दबाना और मसलना शुरू कर दिया..जल्दी ही उनका विशाल नाग अपने पुरे शबाब पर आ गया..हिना भी उनके लम्बे लंड को देखकर हैरान रह गयी…चाचू ने जब देखा की पापा पूरी तरह तैयार हैं तो उन्होंने हिना की चूत से अपना लंड बाहर निकाल लिया और पापा से बोले..
“भैय्या आप आ जाओ..आप मारो इस गर्म कुतिया की चूत..”
“अरे नहीं अजय…ऐसे कैसे…तुम एक काम करो..तुम नीचे लेट कर इसकी चूत मारो और मैं पीछे से इसकी गांड मरूँगा…” पापा ने कहा.
“नहीईई … “हीना जोर से चिल्लाई “मेरी गांड में अभी तक किसी ने ऊँगली भी नहीं डाली है..अगर मारनी है तो मेरी चूत ही मारना…वहां तो बड़ा ही दर्द होगा..”
वो गांड से कुंवारी है..ये सुनते ही पापा की आँखों में एक अजीब सी चमक आ गयी..
और वो बोले “अरे बेटा…कोई बात नहीं …अगर तुम अपनी गांड नहीं मरवाना चाहती हो तो कोई बात नहीं…हम दोनों भाई तुम्हारी चूत में ही लंड डालकर गुजारा कर लेंगे…पर क्या हम दोनों एक साथ तुम्हारी चूत तो मार ही सकते है…तुम अजय पर उलटी होकर लेट जाओ..वो नीचे से अपना लंड तुम्हारी चूत में डालेगा और फिर थोड़ी देर बाद वो निकाल लेगा और मैं पीछे से डाल दूंगा…ये तो ठीक है न…”
“ह्म्म्म जी अंकल…” उसने समझते हुए कहा.
मैं पापा की योजना समझ तो गया था पर देखना चाहता था की वो क्या करते हैं…वैसे उनकी बातें सुनकर और चुदाई देखकर मेरे लंड ने भी हरकत करनी शुरू कर दी थी..
ऋतू भी अपने होंठो पर जीभ फिर कर अपने एक हाथ को अपनी चूत पर रगड़ रही थी.
अजय चाचू नीचे लेट गए और उन्होंने हिना को अपने ऊपर खींच लिया और अपना लंड वापिस उसकी चूत में डाल दिया..नीचे से लंड डालने के एंगल से लंड पूरी तरह उसकी चूत में जा रहा था..
आठ दस धक्के मारने के बाद चाचू ने अपना लंड निकाल लिया और पीछे खड़े पापा ने अपना मोटा लंड टिका दिया उसकी फुद्दी पर…और एक करार झटका मारा..
अयीईईईईईईईईईइ मर्र्र्रर्र्र्र गयीईईईईई अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह और हिना लुडक कर चाचू के ऊपर गिर गयी…
पापा का मोटा लंड उसकी कमसिन सी चूत के अन्दर घुस गया था और चूत के नए दरवाजे खुल गए थे जहाँ और किसी का लंड अभी तक नहीं पहुंचा था…उसके गुदाज चुचे चाचू के मुंह के ऊपर थे..उनके तो मजे हो गए, उन्होंने उन चुचों को चुसना शुरू कर दिया…जिसकी वजह से हिना का दर्द भी थोडा कम हुआ…पीछे से रेलगाड़ी फिर चल पड़ी और पापा उसके मोटे चूतडों को थामे जोर-२ से धक्के मारने लगे…हिना का दर्द भी अब कम हो गया था और उसकी सिस्कारियां गूंजने लगी मजे के मारे हम्म्म्म अ हा हा अ अह अह आः ऊओफ उफ ओफ्फोफ़ ऑफ़ ऑफ़ ऑफ़ उफ ऑफ ऑफ ऑफ़ आह आह्ह ……..म्मम्मम जोर से करो ना……अंकल…..प्लीस….और तेज मारो…..
तभी पापा ने अपना लंड निकाल दिया उसकी चूत से … अब चाचू की बारी जो थी.. वो परेशान सी हो गयी…
लेकिन अगले ही पल चाचू ने नीचे से फिर से अपना लंड डाल दिया…और वो फिर से खो गयी चुदाई की खाई में… .थोड़ी देर बाद जब दोबारा पापा का नंबर आया तो उन्होंने थोड़ी देर तक लंड नहीं डाला…वो चाचू के ऊपर उलटी पड़ी हुई मचल रही थी…अपनी मोटी गांड पीछे करके पापा के लंड का इन्तेजार कर रही थी….डालो ऩाSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSS प्लीस…….वो चिल्लाई…
पापा ने अपना गीला लंड इस बार उसकी गांड के छेद पर रख दिया…वो समझ गयी और चिल्लाई..नहीईईई …..वहान्न्न्नन्न नहीईईईईईईईईइ प्लीस ……..पर तब तक देर हो चुकी थी…पापा के एक झटके ने उसे चाचू के ऊपर फिर से गिरा दिया…और इस बार पापा का लंड उसकी गांड के छेद को फाड़ता हुआ अन्दर जा धंसा…उनके लंड का सुपाडा अन्दर जाकर अटक गया था…उन्होंने रहम नहीं किया और एक और धक्का मारा… आआआआआआआआआआआअह्ह्ह्ह मरररर गयीईईईईईईईईइ …..अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह पापा के दो चार और तेज झटकों ने उसकी गांड का बैंड बजा दिया..उनका पूरा आठ इंच लंडा लंड उसकी गांड में घुस चूका था…नीचे से चाचू ने फिर से उसके दानो से दूध पीना शुरू कर दिया…वो हिल भी नहीं पा रही थी…पापा बड़ी ही बेरहमी से उसकी गांड मार रहे थे…अचानक चाचू ने नीचे से अपना लंड उसकी चूत में लगा दिया…और पापा के द्वारा दिए तेज झटके से उनका लंड उसकी चूत के अन्दर तक चला गया….
अब दोनों भाई उस मुसल्माननी की गांड और चूत एक साथ मार रहे थे….बड़ा ही कामुक दृश्य था… ऋतू भी अपने पापा और चाचू की कलाकारी देखकर मंत्र मुघ्ध सी उन्हें देख रही थी…उसने अपने पुरे कपडे उतार फैंके और मेरे सी लिपट गयी.
मेरे कपडे भी कुछ ही देर में नीचे जमीन पर पड़े हुए थे.. रेहान के मोटे लंड पर बैठी आरती चाची अचानक जोर-२ से चिल्लाने लगी… आआआआआआह्ह अह अह अह अ हा आह आह आह आह उफ उफ उफ उफ उफ आआआआआआअह्ह और तेज मार साले कुत्ते…..आआआआआअह्ह मजा आ गया….और उसने अपना रस छोड़ दिया रेहान के लंड के ऊपर… वो हटी और नेहा ने कब्ज़ा जमा दिया उसके लंड पर…रेहान ने नेहा को नीचे पटका और अपना मुसल डाल दिया बेचारी नेहा की छोटी सी चूत में……वो मजे से चिल्लाई….आआआआआआआआअह्ह रेहाआआआआन …….म्मम्मम्म ..
ऋतू ने मुझे धक्का देकर मुझे नीचे गिराया और मेरे लंड को अपनी गीली चूत पर टीकाकार उसके ऊपर बैठ गयी…म्म्मम्म्म्मम्म …… और धक्के मारने लगी…मैंने अपने हाथ अपने सर के नीचे रख लिए और लंड को अपनी बहन की चूत में डाले मजे लेने लगा.
मम्मी आगे आई और गहरी सांस लेती अपनी देवरानी आरती की चूत को किसी पालतू कुतिया की तरह चाटने लगी…चाची ने भी सर घुमा कर मम्मी की चूत पर अपने होंठ टिका दिए..और दोनों 69 की अवस्था में एक दुसरे को चूसने लगे. वहां रेहान ने नेहा की चूत को ऐसे चोदा की उसकी चीखें निकल गयी..और वो भी झड़ने लगी….
आआआआआअह्ह्ह्ह रेहाआआआआन्न मैं तो गयीईईईइ…….और वो भी गहरी साँसे लेने लगी.. साले रेहान ने दोनों माँ बेटी को चोद दिया था और फिर भी उसका मुसल खड़ा हुआ था…
उसने चारों तरफ देखा …उसकी बहन को पापा और चाचू एक साथ चूत और गांड में चोद रहे थे…उसने हमारी तरफ देखा और पीछे आकर अपना लंड ऋतू की गांड के छेद में फंसा दिया… ऋतू को जैसे ही रेहान के मोटे लंड का एहसास अपनी गांड के छेद में हुआ वो सिहर उठी…उसने डबल पेनेटरेशन कभी भी नहीं किया था… उसने भी अपनी गांड के छेद को फैलाया और उसके अन्दर रेहान ने तेज शोट मारकर अपना लंड धकेल दिया.. आआआआआआआआह्ह्ह वो चिल्ला उठी…
भले ही उसकी गांड पहले फट चुकी थी पर रेहान के मोटे लंड ने उसे और भी ज्यादा फाड़ कर रख दिया….अब पुरे कमरे में दो लड़कियां चार लंड ले रही थी एक साथ… रेहान ने ऋतू की चूत से अपना लंड निकाल लिया… ऋतू ने हैरानी से पीछे मुड कर देखा और रेहान ने अपना लंड उसकी चूत पर टिका दिया…मेरा लंड पहले से ही वहां पर था…उसके मोटे लंड का एहसास पाकर मैंने अपना लंड बाहर निकलना चाहा की शायद वो मेरी बहन की चूत मारना चाहता है…. पर उसने दबाव डाल कर मेरे लंड को बाहर नहीं आने दिया..और अपना लंड उसी छेद में फंसा कर एक तेज झटका मारा….ऋतू की चूत के धागे खुल गए….उसका मुंह खुला का खुला रह गया….
“अयीईईईईईईईईईईईइ मर्र्र गयीईई साले कुत्ते…भेन के लंड…निकाल अपना लोडा मेरी चूत से…..फट गयी….आआआआआआह्ह्ह्ह …” उसकी आँखों से आंसू आने लगे. उसकी नन्ही सी चूत में दो विशालकाय लंड जा चुके थे… ..उसकी चूत में तेज दर्द हो रहा था….शायद वो थोड़ी फट भी गयी थी और खून आ रहा था…पर रेहान नहीं रुका और उसने एक और शोट मारकर अपना लंड पूरा उसकी चूत में डाल दिया…मेरे लंड के साथ एक दूसरा लंड अब ऋतू की चूत में था..हम दोनों का लंड एक दुसरे की घिसाई कर रहा था…और दोनों की गोलियां एक दुसरे के गले मिल रही थी….ऋतू के लिए ये एक नया एहसास था..उसकी चूत की खुजली अब शायद मिट जाए ये सोचकर मैंने फिर से नीचे से धक्के देने शुरू कर दिए…रेहान ने भी मेरे साथ ताल मिलायी और अब हम दोनों उसकी नन्ही सी चूत में अपने-२ लंड पेल रहे थे…दो लंड जल्दी ही अपना रंग दिखने लगे…और ऋतू की दर्द भरी चीखें मीठी सिस्कारियों में बदल गयी….
आआआआआआआह्ह्ह्ह म्मम्मम्म …..साले कुत्ते…..रेहान…..तुने तो मेरी चूत ही फाड़ डाली…..आआआआअह्ह्ह पर जो भी है….म्मम्मम्म मजा आ रहा है……..मारो अब दोनों….मेरी चूत को….आआआआह्ह्ह्ह और फिर तो हमने उसकी जो रेल बनायीं…जो रेल बनायीं….वो देखते ही बनती थी..
हिना की हिम्मत भी अब जवाब दे रही थी….उसकी गांड के अन्दर सबसे पहले पापा ने अपना वीर्य छोडा…आआआआआआआआअह्ह्ह्ह वाह मजा आ गयाआआ…..वो चिल्लाये….

हिना भी अपनी गांड में गर्म लावा पाकर पिघलने लगी और चाचू के लंड को और अन्दर तक घुसाकर कूदने लगी..जल्दी ही चाचू और हिना भी एक साथ झड़ने लगे…
आआआआआअयीईईईईईईइ ….म्मम्मम्म मैं तो गयी………आआआआआअह्ह्ह्ह ….. ऊऊओफ़ गोड..
मैं भी अपनी मंजिल के काफी करीब था…रेहान का भी वोही हाल था, वो पहले ही दो चूतें मार चूका था इसलिए वो भी झड़ने वाला था…ऋतू तो ना जाने कितनी बार झड चुकी थी अपनी चूत में दो-२ लंड लेकर….सबसे पहले रेहान ने पिचकारी मारी…अपने लंड के चारों तरफ, ऋतू की चूत में और किसी के लंड का गर्म पानी पाकर एक अजीब सा एहसास हुआ…मैंने भी उसी पानी में अपना पानी मिला कर उसकी चूत को भिगोना शुरू कर दिया….दोनों के लंड से निकलता पानी उसकी नन्ही सी चूत में नहीं आ पा रहा था और वो नीचे की तरफ रिसता हुआ मेरे ही पेट पर गिरने लगा….
मम्मी भी आरती चाची के चूसने की वजह से झड़ने लगी.
ऋतू उठी और मेरे और रेहान के लंड को एक साथ अपने मुंह में लेकर चूसने लगी…और फिर उसने पेट पर गिरे वीर्य को भी साफ़ किया..सारा रस पीने के बाद उसने जोर से डकार मारा….और हम सभी की हंसी निकल गयी…
हम सभी चुदाई करने के बाद इतने थक चुके थे की हिलने की भी हालत नहीं हो रही थी, पापा ने रेहान और हिना से कहा के तुम लोग आज यहीं सो जाओ.
तो रेहान बोला “नहीं अंकल इसकी क्या जरुरत हिया, हमारा काटेज पास ही में है, हम चले जायेंगे, और वैसे भी मम्मी पापा हमारा वेट कर रहे होंगे..हम कल फिर आयेंगे ”
“अरे नहीं रेहान…मेरा मन नहीं है आज यहाँ से जाने का..” हिना ने कहा, वो अपनी चूत और गांड से रिसते हुए रस को अपनी उँगलियों से मसल रही थी. उसकी चूत में लगता है और भी खुजली बाकी थी.
मैंने रेहान से कहा “एक काम करते हैं..हम अंकल आंटी को बोल के आते हैं की तुम दोनों आज रात को यहीं रुकने वाले हो…ठीक है ना..” मैंने उन दोनों से कहा और ऋतू की तरफ देखा.
“हाँ ठीक है…तुम जाकर उनसे कह दो..अगर वो मान जाते हैं तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है..” रेहान अपनी ख़ुशी को काबू में करते हुए बोला.
मैंने ऋतू को इशारा किया अपने साथ चलने के लिए और वो झट से कपडे पहन कर मेरे साथ बाहर की और चल दी.

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