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अगली सुबह मैंने अपने लंड के चारो तरफ गीलेपन का एहसास पाया, कोई मेरा लंड चूस रहा था, मैंने अपने दोनों तरफ देखा, ऋतू और नेहा दोनों अपने मोटे-२ चुचे मुझमे घुसेड़े आराम से सो रही थी, मैंने नीचे देखा तो पाया की आरती चाची मेरा लंड मुंह में लेकर चूस रही है, मुझे अपनी तरफ देखता पाकर वो मुस्कुरा दी और मुझे गुड मोर्निंग बोलकर फिर से मेरा लंड चाटने लगी, मेरे शरीर की हलचल पाकर ऋतू भी जाग गयी और जब उसने देखा की चाची मेरे लंड से ब्रुश कर रही है तो उसकी चूत भी सुबह की खुमारी में रस से सराबोर हो गयी, उसने थोड़ी जगह बनाकर चाची को बेड पर आने को कहा, चाची ऊपर आई और अपनी टाँगे ऋतू के चेहरे के ऊपर करके वापिस मेरा लंड चाटने लगी, नेहा भी अब जाग चुकी थी, अपनी माँ को सुबह-२ नंगी लंड चूसते देखकर उसके बदन में भी आग लग गयी और उसने मुझे चूमना शुरू कर दिया, मैंने अपने हाथ उसके उभारों पर रख दिए और उन्हें दबा दबाकर उन्हें और बड़ा करने लगा..नेहा के चुचों के बारे में एक बात कहना कहता हूँ, वो बड़े ही मुलायम है पर उसके एरोहोल और निप्पल उतने ही कठोर, वो किसी कील की तरह मेरे हांथों में चुभ रहे थे, मैंने उन्हें और जोर से दबाना शुरू कर दिया, और उतनी ही बेदर्दी से उसके नाजुक होंठो को भी चुसना जारी रखा.
तभी दरवाजा खुला और हमारे पापा अन्दर आ गए, उन्होंने जब देखा की अन्दर सुबह की चुदाई की तय्यारी चल रही है तो वो चुपचाप अन्दर आये और अपने कपडे उतार कर वो भी ऊपर चढ़ गए, चाची की चूत तो वो कई बार मार चुके थे, और कल रात उन्होंने ऋतू की भी जम कर चुदाई करी थी, इसलिए आज उनकी नजर नेहा के कमसिन जिस्म पर थी, नेहा जो मेरे मुंह में घुसी हुई कुछ ढून्ढ रही थी, उसकी टाँगे छोड़ी करके पापा ने अपना मुंह उसकी चूत पर रख दिया और उसे चूसने लगे.
नेहा ने जब अपनी चूत पर अपने ताऊ जी की गर्म जीभ को पाया तो उसकी उसकी रस बरसाती चूत से एक कंपकपी सी छूट गयी आआआआआआआआआआआआअह्ह्ह्ह….म्म्मम्म्म्मम्म…..हाआआआआअन्न्न ऐसे ही……जोर से……. और वो पापा को और जोर से अपनी चूत को चूसने के लिए प्रोत्साहित करने लगी..
जवान लड़की की चूत पाकर पापा भी दुगने जोश से अपने experience का इस्तेमाल उसे करते हुए उसकी चूत की तलाशी लेने लगे.
वहां अजय चाचू की जब नींद खुली तो चाची को बगल में ना पाकर उन्होंने भागकर शीशे वाली जगह देखा और वहां का नजारा देखकर वो नंगे ही हमारे कमरे में दौड़कर चले आये, उनकी पत्नी मेरा लंड चूस रही थी और उनके बड़े भाई उनकी बेटी की चूत चाट रहे थे और उनकी पत्नी की चूत को उनकी भतीजी साफ़ कर रही थी, कमरे में अब सिर्फ ऋतू की चूत ही बची थी जो खाली थी, वो उसकी तरफ चल पड़े, और वहां पहुंचकर अपनी लम्बी जीभ का इस्तेमाल करके ऋतू की चूत और गांड बारी-२ से चाटने लगे.
पुरे कमरे में सिस्कारियां गूंज रही थी.
पापा का लंड पूरी तरह से खड़ा हो चूका था, वो खड़े हुए और नेहा की एक टांग को हवा में उठाकर अपना लंड उस छोटी सी चूत पर टिका दिया, उनका टोपा काफी बड़ा था, नेहा की छोटी सी चूत के सिरे पर वो फंस सा रहा था, उन्होंने थोडा जोर लगाया तो नेहा दर्द से बिलबिला उठी….आआआआआआआआह्ह्ह्ह धीरे डालो बड़े पापा….धीरे…..
लंड का टोपा अन्दर जाते ही बाकी का काम उसकी चूत की चिकनाई ने कर दिया, वो उस पतली सुरंग में फिसलता चला गया..अयीईईईईईईईईईईईईई मर गयी……और पापा ने तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए…
अह अह अह अह अह अह …उसके मोटे चुचे मेरे सीने से टकरा रहे थे और उसके खुले मुंह से निकलती लार मेरी छाती पर टपक रही थी…
चाची भी उठ खड़ी हुई और मेरे दोनों तरफ टाँगे करके अपनी चूत को मेरे लंड पर टिकाया और नीचे बैठ गयी. अब उनके मोटे तरबूज भी मेरी आँखों के सामने झूल रहे थे, मैंने हाथ बदकार उन्हें भी सहलाना शुरू कर दिया, चाची थोडा और आगे हुई और मेरे सीने पर लेती हुई अपनी बेटी नेहा के होंठो पर अपने होंठ रख दिए और उन्हें चूसने लगी.
ऋतू जो अब तक अपनी चूत चट्वाकर काफी गर्म हो चुकी थी उसने चाचू के मुंह से बड़ी मुश्किल से अपनी चूत छुडवाई और उनके लम्बे लंड को एक किस करके उनके ऊपर चढ़ बैठी, बाकी काम चाचू ने कर दिया अपना खड़ा हुआ लंड उसकी रस टपकाती चूत में डालकर. अब हमारे कमरे में तीन चुदाई चल रही थी और सभी बड़े जोरो से आवाजें निकाल-निकालकर चुदाई कर रहे थे..
ऋतू चिल्लाई…आआआआआआह्ह्ह चाअचूऊऊऊऊऊ…….चोदो मुझे …और जोर से……अह………
नेहा भी बोली…..बड़े पापा……डालो अन्दर तक अपना मोटा लंड……आआआआह्ह और तेज चोदो अपनी नेहा को बड़े पापा……..
चाची भी कहाँ पीछे रहने वाली थी….आआआआअह्ह आशु……डाल बेटा…अपनी चाची की चूत कैसी लगी….बता ना…..
मैंने उनकी आँखों में देखा और कहा….भेन चोद…..कुतिया……कितने लोगो से मरवा चुकी है….तेरी माँ की चूत….साली….कमिनी..बता मुझे…
चाची ने उखड्ती साँसों से कहा. “बड़े लंड लिए है अपनी चूत में….पर अपनों का लेने में जो मजा है वो कहीं नहीं है….चोदो मुझे…दुनिया की हर चाची को तेरे जैसा भतीजा मिले जिसका इतना मोटा लंड हो तो मजा ही आ जाए…बिना पूछे डाल दिया कर अपना लंड मेरी चूत में कभी भी….कहीं भी…आआआआआआह्ह्ह्ह ….”
चाची लगता है मेरे लंड से कुछ ज्यादा ही इम्प्रेस हो गयी थी.
मैंने उनके होर्न अपने हाथों में पकडे और अपने इंजिन की स्पीड बड़ा दी.
तभी दरवाजा दुबारा खुला और मम्मी वहां खड़ी थी..
“तुम लोगो को कोई शर्म है के नहीं” मम्मी ने अन्दर आकर पुछा.
“हाय मोम…गुड मोर्निंग…”मैंने उनसे कहा.
उन्होंने पापा की तरफ देखा और कहा “आप तो कम से कम इन्हें रोकते, पर आप तो खुद ही यहाँ लगे हैं अपनी भतीजी की मारने में”
पापा ने जवाब दिया “पूर्णिमा, अब ये लोग हमारे कहने से रुकने वाले तो हैं नहीं, और कल जब सब कुछ हो ही चूका है तो आज इनकार करने से क्या फायदा, आओ तुम भी आ जाओ ऊपर.”
“हाँ मम्मी, आप यहाँ आओ, मेरे मुंह के ऊपर मैं आपकी चूत चुसना चाहता हूँ, बड़ी प्यास लगी है मुझे…” मैंने अपनी जीभ अपने होंठो पर फिराते हुए कहा.
“हाँ भाभी …आ जाओ ऊपर…” चाचू ने भी जोर दिया.
मम्मी ने सभी की बात सुनी और अपना सर हिलाते हुए उन्होंने अपनी हार मान ली और उन्होंने अपना गाउन वहीँ जमीन पर गिरा दिया और नंगी ऊपर बेड पर चढ़ गयी और मेरे मुंह के ऊपर आकर बैठ गयी, मेरी लम्बी जीभ उनकी चूत का इन्तजार कर रही थी, जैसे -२ वो नीचे हुई, मेरी पेनी जीभ उनकी चूत में उतरती चली गयी.
आआआआआआआआआअह्ह्ह्ह उन्होंने एक लम्बी सिसकारी मारी और मैंने अपनी जीभ से उनकी क्लिट को दबाना और चुब्लाना शुरू कर दिया, उनका मुंह मेरे लंड की तरफ था, जहाँ चाची मेरे लंड की सवारी करने में लगी हुई थी, चाची ने आगे बढकर मम्मी के मोटे जग्ग्स को पकड़ा और उन्हें फ्रेंच किस करने लगी, मम्मी अपनी चूत मेरे मुंह पर बड़ी तेजी से रगड़ रही थी.
मैं जिस तरह से मम्मी की चूत चाट और चबा रहा था उन्हें काफी मजा आ रहा था, आज अपने बीच तीनो बच्चो को शामिल करके सेक्स करने का मजा लेने में लगे थे सभी बड़े लोग.
उन्होंने अपनी दाई तरफ देखा जहाँ उनके पति अपनी भतीजी की चूत का तिया पांचा करने में लगे थे. और बायीं तरफ उनकी लाडली बेटी अपने चाचू के लंड को ऑंखें बंद किये मजे से उछल-२ कर ले रही थी. और उनके नीचे लेता उनका बेटा उनकी चूत चाटने के साथ -२ अपनी चाची को भी चोद रहा था..इतनी कामुकता फैली है इस छोटे से कमरे में.
तभी चाची ने एक तेज आवाज करते हुए झड़ना शुरू कर दिया….और वो निढाल होकर नीचे लुडक गयी..मेरा लंड उनकी गीली चूत से निकलकर तन कर खड़ा हुआ था, मम्मी ने जब अपने सामने अपने बेटे का चमकता हुआ लंड देखा तो उनके मुंह में पानी आ गया उन्होंने नीचे झुककर मेरे लंड को अपने मुंह में भर लिया और उसे चूस चूसकर साफ़ करने लगी, मैंने पलटकर मम्मी को नीचे किया और घूमकर उनकी चूत की तरफ आया और अपना साफ़ सुथरा लंड उनकी फूली हुई चूत पर टिका दिया…मैंने उनकी आँखों में देखा और कहा…आई लव यू मोम….और अपना लंड उनकी लार टपकाती चूत में उतार दिया..
आआआआआआआआआह्ह्ह्ह म्म्म्मम्म्म्मम्म …मम्मी ने मेरा लंड पूरा निगल लिया और मेरी कमर पर अपनी टांगो का कसाव बना कर मुझे बाँध लिया…”बस थोड़ी देर ऐसे ही लेटे रहो…..मैं तुम्हारा लंड अपनी चूत में अन्दर तक महसूस करना चाहती हूँ….” मैं उनकी छाती पर लेता रहा और उनके अधखुले होंठो को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा.
धीरे -२ उन्होंने नीचे से धक्के मारने शुरू कर दिए, मैंने उनकी टांगो का जाल खोला और उन्हें अपने दोनों हाथों से पकड़कर उनकी टांगो को और भी चोडा कर दिया और लगा धक्के पे धक्के मारने अपनी माँ की चूत में..
उनके मुंह से बरबस ही बोल फुट पड़े…आआआआअह्ह्ह चोद मुझे बेटा….चोद डाल….और अन्दर डाल. अपना लंड….मादरचोद….चोद मुझे…भोंस्डीके…भेन चोद….चोद मुझे…..आआआआआह्ह्ह डाल अपना मोटा लंड अपनी माँ की चूत में….आः आह ह्ह्ह्हहहाहा आहा ह्ह्ह हा अ ह्ह्ह्हह्ह ..
मैंने भी उनकी चूत मारते हुए कहा…”ले साली रंडी….बड़ी सती सावित्री बनती है….अपने देवर से चुद्वाती है और मुझसे शर्मा रही थी…और अब लंड डाला है तो दुगने मजे ले रही है…कुतिया कहीं की…साली रंडी…”
“हाँ मैं रंडी हूँ…तेरी रंडी हूँ मैं आज से…चोद मुझे…घर पर जब भी तेरा मन करे चोद देना मुझे…अपने दोस्तों से भी चुदवाना अपनी रंडी माँ को….अपने टीचेर्स से भी चुदवाना अपनी माँ को…शाबाश बेटा चोद मुझे…”
मम्मी पहले जितना शर्मा रही थी उतनी ही खुल गयी थी अब..
पापा ने इतनी टाईट चूत आज तक नहीं मारी थी, नेहा के कसाव के आगे उनके लंड के पसीने छुट गए और उन्होंने अपनी बाल्टी उसकी चूत में खाली कर दी. नेहा अभी भी नहीं झड़ी थी.
चाचू के लंड को ऋतू अजीब तरीके से दबा रही थी अपनी चूत से,
उन्होंने भी अपनी जवान भतीजी के आगे घुटने टेक दिए और झड़ने लगे उसकी चूत के अन्दर. ऋतू भी बिना झाडे रह गयी, उसने नेहा को इशारा किया और उसे अपने पास बुलाकर उसकी टांगो के बीच अपनी टाँगे फंसाकर अपनी चूत से उसकी चूत को रगड़ने लगी, दोनों की चूत जल रही थी, और जल्दी ही उन्होंने एक दुसरे की चूत को अपने रस से नहलाना शुरू कर दिया.
आआआआआआआआह्ह्ह येस्सस्सस्स बेबी ……ओह…फचक्क्क्क आआआह्ह्ह …
मम्मी भी मेरे लंड की सवारी को ज्यादा नहीं कर पायी और उन्होंने एक दो झटके मारे और झड़ने लगी….आआआआआआअह्ह्ह्ह मैं तो गयी…..आआआआअह्ह्ह मजा आआअ गयाआआअ….. आआआआआआआआआआआआआअह्ह्ह्ह .
मैंने उनकी चूत की गर्मी महसूस करी और मैंने भी अपना रस अपनी जननी की चूत में उतार दिया.
चारों तरफ वीर्य और चूत के रस की गंध फैली हुई थी.
सबने एक दुसरे को चूमना और सहलाना सुरु किया और बारी-२ से सबकी चूत और लंड साफ़ किये और फिर सभी उठ खड़े हुए…नाश्ता भी तो करना था.
और मुझे सोनी और मोनी का ख्याल आया, कल वाली शर्त जीतने के बाद आज उनकी चूत भी तो मारनी है मुझे…
मैं, ऋतू और नेहा एक टेबल पर बैठे नाश्ता कर रहे थे तो वहां वो चोदु रेहान आ गया और हमारे साथ बैठ कर गप्पे मारने लगा, मैंने अपनी नजरें चारों तरफ दौडाई पर मुझे सोनी और मोनी कहीं न दिखाई दी.
रेहान कल वाली बात कर रहा था. उसे विशवास ही नहीं हो रहा था की कल मैंने और ऋतू ने सोनी और मोनी के मोम डैड के साथ चुदाई करी, कल की चुदाई देखकर वो हमसे आज खुल कर लंड-चूत की बातें कर रहा था.
रेहान : “अरे ऋतू, कल तो मजा आ गया, मुझे लगता तो था की तुम लंड चूसने में माहिर हो पर कल देख भी लिया, तुम्हारी ब्रेस्ट बड़ी सुन्दर हैं और पीछे की गोलाइयाँ तो ग़जब की हैं, मैं तो कल से बैचैन हूं तुम्हे नंगा देखकर! ”
ऋतू अपनी तारीफ़ सुनकर मुस्कुरा दी, उसके दिल में भी अब थोड़ी बहुत हलचल होने लगी थी.
नेहा जो पिछले दो दिनों से रेहान को देखकर मचल उठती थी वो बीच में बोल पड़ी “अरे तुमने अभी देखा ही क्या है, आगे -२ देखो हम क्या-२ करते हैं”
रेहान, नेहा की तरफ़ा देखते हुए : “अच्छा तो आप भी इस खेल में शामिल है, हमें भी तो बताओ की आप और क्या-२ कर सकती हैं”
“तुम्हारा लंड अपनी चूत में लेकर सुबह से शाम तक तुमसे मरवा सकती हूँ” नेहा ने उसकी आँखों में देखते हुए मादक स्वर में कहा.
रेहान का मुंह खुला का खुला रह गया. ऋतू और नेहा जोर-२ से हंसने लगी.
“क्यों क्या हुआ, अब कहाँ गयी तुम्हारी बेचैनी” ऋतू ने उससे पुछा, अब वो भी नेहा के साथ-२ मजे ले रही थी.
“हंस लो, हंस लो..जब सही में मेरा लंड लोगी तो पता चलेगा की क्या मुसीबत मोल ले ली तुमने…” और रेहान भी हंसने लगा.
मुझे उनकी बातों से बड़ी जलन सी हो रही थी, मुझे वो शुरू से ही पसंद नहीं था और आज वो साला मेरे सामने बैठा मेरी बहनों से चुदाई की बातें कर रहा था.
मैंने ऋतू के कान में कहा “ऋतू, इस मादरचोद को ज्यादा भाव न दो, तुम दोनों इससे दूर ही रहो..”
ऋतू भी मेरे कान में बोली “भाई…तुम क्यों जल रहे हो..मैं तो बस मजे ले रही हूँ, तुम्हे क्या मैंने कभी रोका है किसी और से मजे लेने के लिए..” उसके लहजे में थोडा गुस्सा भी था.
मैं समझ गया की उनको समझाना बेकार है, नेहा तो पहले से ही रेहान पर लट्टू थी.
मैंने जल्दी से नाश्ता किया और वहां से उठ खड़ा हुआ, मैंने नेहा से कहा “तो ठीक है तुम मजे लो, मैं तो चला”
मैं उठ कर वहां से आगे चल दिया, थोड़ी दूर चलने पर मैंने देखा की एक पेड़ के नीचे एक लड़की बैठी हुई एक किताब पड़ रही थी, मैंने सोचा चलो इसपर ट्राई मारते हैं.
मैं उसके सामने पहुंचा तो उसकी खूबसूरती को देखकर मैं दंग रह गया, बला की खुबसूरत थी वो लड़की, लम्बी, गोरी, पतली कमर, छोटे-२ टेनिस बोल जितने चुचे, लम्बे बाल, काले सलवार सूट में उसका हुस्न कहर ढा रहा था.
“हाय …मेरा नाम अशोक है..क्या मैं यहाँ थोड़ी देर बैठ सकता हूँ” मैंने उसके पास पहुंचकर कहा
उसने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा और मुस्कुरा कर बोली “हाँ हाँ क्यों नहीं, आईये..”
मैं वहीँ जमीन पर उसके पास बैठ गया और बोला “आप यहाँ अकेली बैठी है…कोई साथ नहीं है आपके”
“दरअसल मैं यहाँ किसी को भी नहीं जानती, मैं अपनी फॅमिली के साथ यहाँ आई हूँ, मेरा नाम हिना है” उसने कहा.
“तो क्या हुआ हिना, हमें भी यहाँ कोई नहीं जानता, पर हमने भी यहाँ कई दोस्त बनाये है, जब तक तुम ऐसे कोने में बैठी रहोगी तो दोस्त कैसे मिलेंगे..” मैंने उसे समझाया.
“हाँ वो तो है…पर ..मेरा सवभाव ऐसा ही है..मुझे इन सबमे बड़ी शर्म आती है..u know ..” कहते -२ वो रुक गयी.
“चलो कोई बात नहीं, अब मैं यहाँ आ गया हूँ, तो क्या तुम मेरी दोस्त बनना पसंद करोगी” मैंने उसकी नशीली आँखों में देखते हुए अपना हाथ उसकी तरफ बड़ा दिया.
वो मेरी बात सुनकर मुस्कुरा दी और मेरे हाथ को थाम लिया, उसके नाजुक हाथों के ठन्डे स्पर्श से मेरा पप्पू अपनी औकात पर उतर आया. बड़ी मुश्किल से मैंने बैठे -२ उसका एंगल सही किया.
“और कोन-२ है तुम्हारी फॅमिली में…” मैंने उससे पुछा .
“मेरे मोम डैड और मेरा बड़ा भाई..रेहान” उसने कहा
रेहान का नाम सुनकर मैं चोंक गया..अच्छा तो ये उस रेहान की बहन है, अब मजा आएगा. वो साला मेरी बहनों को चोदने की सोच रहा है, अब तो मैं भी उसकी बहन की चूत मार कर ही रहूँगा..वैसे ये हिना उसकी बहन ना भी होती तो भी मैं इसे छोड़ता नहीं..इतनी खुबसूरत थी वो.
मैंने वापिस घूम कर दूसरी तरफ देखा तो दूर टेबल पर बैठे ऋतू, नेहा और रेहान उठ कर ऊपर पहाड़ी की तरफ जा रहे थे, मैं समझ गया की नेहा और ऋतू अब रेहान से चुदे बिना नहीं मानेगी, और वो उसे उसी पहाड़ी वाली चट्टान पर ले जा रहे थे..चुदने के लिए.
मैंने अपने मन में उसकी चुदाई की योजना बनानी शुरू कर दी.
“चलो हिना मैं तुम्हे यहाँ पर एक खुबसूरत जगह दिखाकर लाता हूं”
“कौन सी जगह ?” उसने पुछा.
“इस पहाड़ी इलाके की सुन्दरता वाली जगह…तुम चलो तो सही, बड़ा मजा आएगा…” मैंने उसके हाथों को पकड़ा और उसे खड़ा कर दिया.
वो मेरे साथ चल पड़ी.
मैं उससे बातें करते हुए उसी पहाड़ी की तरफ चल पड़ा.
धीरे -२ चलते हुए मैंने उन लोगो से काफी फासला बना कर रखा हुआ था, थोड़ी ही देर में मैं उस जगह पर पहुँच गया, मैं उसे चट्टान वाली जगह के बिलकुल पीछे ले गया जहाँ से दूसरी तरफ का नजारा दिखाई दे रहा था, उस जगह पर पहुँच कर वो सही में काफी खुश हो गयी थी, वहां की ऊँचाई से पूरी घाटी नजर आ रही थी, इस नज़ारे को देखकर उसने मेरा हाथ जोर से पकड़ लिया और मुझसे बोली “अरे वाह..क्या नजारा है, ऐसा लगता है अल्लाह ने खूबसूरती की पूरी कायनात यहाँ पर सजा कर रख दी है…” उसका शरीर मुझसे रगड़ खा रहा था और मेरा बुरा हाल हो रहा था.
तभी दूसरी तरफ से एक सिसकारी की आवाज आई….आआआआआआआआआह्ह्ह
वो रेहान की आवाज थी. हिना का ध्यान भी उस तरफ चला गया..मैंने उससे धीरे से कहा “लगता है वहां कोई है..चलो देखते है…” मैंने उसे चुप करने का इशारा किया और उसे अपने साथ चिपका कर उसी चट्टान की तरफ चल पड़ा.
वहां एक कोने में पेड़ के पीछे छिपकर हम दोनों खड़े हो गए, घनी झाड़ियों और पेड़ की आड़ में वो लोग हमें नहीं देख सकते थे.
वहां का नजारा देखकर हिना का मुंह खुला का खुला रह गया. रेहान वहां ऋतू और नेहा के बीच अपनी जींस उतार कर खड़ा हुआ था और उसका मोटा और लम्बा लंड वो दोनों नीचे बैठी हुई बारी-२ से चूस रही थी. मैंने इतना मोटा लंड आज तक नहीं देखा था, मेरा लंड जो की सात इंच का था पापा और चाचू का भी लगभग बराबर ही था, पर इस साले रेहान का लगभग साड़े आठ इंच का तो होगा ही और मोटाई भी उसी के अनुसार थी, काफी मोटा था, ऋतू की आँखों की चमक बता रही थी की उसे लोडा पसंद आया था, इसलिए वो कुतिया उसे बड़े मजे से अपने मुंह में ले-लेकर चूस रही थी.
“अरे ये तो मेरा भाई रेहान है…या अल्लाह ये क्या कर रहा है यहाँ पर, और ये लड़कियां कौन है…..तौबा-२ ..मुझे ये सब नहीं देखना चाहिए..” ये कहकर वो पीछे मूढ़ कर जाने लगी.
“अरे हिना रुको तो सही….ये तुम्हारा भाई है तो क्या हुआ…वो जिन लड़कियों से ये सब कर रहा है वो दोनों मेरी बहने हैं…” मैंने उसे शांत लहजे में कहा.
वो मेरी बात सुनकर हक्की-बक्की रह गयी.
मैंने आगे कहा “देखो..हर लड़का और लड़की सेक्स करता है…हम सभी के आस पास वाले यानि हमारे मम्मी पापा, भाई बहन , दोस्त और सभी रिश्तेदार भी…लेकिन उनको सेक्स करते हुए देखने का अवसर तुम्हे कभी नहीं मिलता..कई बार हमारे मन में अपने ही रिश्तेदारों के लिए कई बुरे विचार आते हैं..पर उन्हें हम साकार नहीं कर सकते, क्योंकि ये सब समाज में बुरी नजर से देखा जाता है..और आज हमें जब मौका मिला है की हम अपने भाई बहन को सेक्स करते हुए देखे तो इसे तुम मत गवाओं..देखो और मजे लो” मेरे मुंह में जो निकला मैं बोलता चला गया उसका कोई मतलब निकला के नहीं, मुझे नहीं मालुम, पर मेरी बात सुनकर वो वहीँ खड़ी हो गयी, और उधर उसके भाई का लंड मेरी बहनों के चूसने से खड़ा हो गया.
“पर तुम ये बात किसी से न कहना…की मैंने ये सब देखा..” उसने सकुचाते हुए मुझसे कहा.
“ठीक है..” मैंने उससे कहा और उसकी पतली कमर पर हाथ रखकर उसे अपने से चिपका लिया..
रेहान ने खड़े-२ अपनी टी शर्ट भी उतार दी.थोडा थुलथुला शरीर था उसका..
रेहान का लंड खड़ा होकर उसकी नाभि को टच कर रहा था…इतना लम्बा था उसका. नेहा और ऋतू ने भी बैठे हुए अपनी टी शर्ट उतर दी , अब वो दोनों सिर्फ ब्रा और जींस में बैठी उस मुसल्ले का लंड चूस रहीं थी.
नेहा ने काले रंग की ब्रा और ऋतू ने जामनी रंग की ब्रा पहनी हुई थी. बड़ी सेक्सी लग रही थी दोनों उस ड्रेस में. रेहान ने अपने हाथ उन दोनों के पीछे रखे और अपनी कुशलता दिखाते हुए अपनी उँगलियों से एक ही झटके से दोनों की ब्रा खोल दी..उन दोनों की ब्रा उछल कर उनकी छातियों से अलग हो कर छिटक कर नीचे गिर गयी.
नेहा अपनी लम्बी जीभ का इस्तेमाल करके रेहान के लंड को नीचे से ऊपर तक ऐसे चाट रही थी जैसे कोई आइसक्रीम हो…बीच-२ में ऋतू और नेहा एक दुसरे को फ्रेंच किस भी कर रही थी.
हिना की साँसे उस नज़ारे को देखकर तेज होने लगी, वो खड़ी हुई अपनी टांगो को एक दुसरे से रगड़ रही थी, मैं समझ गया की लौंडिया गर्म हो रही है.
मैंने उसे अपने आगे खड़ा कर लिया और इस तरह उसके गुदाज चुतड मेरे खड़े हुए लंड को ठोकर मार रहे थे.
मैं उसके साथ चिपक कर खड़ा हो गया, उसने इस बात का कोई विरोध नहीं किया. मैंने अपना लंड सीधा किया और उसके मोटे-२ चूतडो से चिपक कर खड़ा हो गया. रेहान का लंड कभी ऋतू और कभी नेहा अपने मुंह में भरकर चूस रही थी, उसकी हुंकार से पता चल रहा था की उस कमीने को कितना मजा आ रहा था.
नेहा खड़ी हो गयी और उसने झट से अपनी जींस नीचे उतारी और अपनी पेंटी को भी उतार कर मादर्जात नंगी हो गयी और उसने रेहान के होंठो पर अपने होंठ टिका दिए..
रेहान ने नेहा के चूतड़ों को जोर से पकड़ा और उसे चुसना शुरू कर दिया, फिर उसने अपने दोनों हाथों से उसके मोटे ताजे कबूतर पकडे और उनपर अपने दांत गड़ा दिए, नेहा की चीख निकल गयी उसके इस वेहशिपन से..आआआआआआआआआआआआआआअह्ह्ह धीएरीईईईईई रेहाआआआआआआआआअन आआआआआआआह
नेहा ने अपना दूसरा स्तन अपने हाथ में पकड़ा और रेहान के मुंह में परोस दिया…उसे भी रेहान ने काट कर नेहा के निप्प्ल्स के चारों तरफ एक गहरा निशाँ बना दिया..
हिना की साँसे मानो अटक कर रह गयी अपने भाई के इस रूप को देखकर..
रेहान बड़ी बेरहमी से नेहा और ऋतू की छातियाँ मसल रहा था, उन दोनों की मस्ती से भरी चीखे पूरी वादियों में गूंज रही थी.. हिना ने मेरी तरफ देखते हुए कहा ” ये ऐसा क्यों कर रहा है…कितनी तकलीफ हो रही होगी तुम्हारी बहन को…तुम कुछ करते क्यों नहीं….”
मैंने पीछे से उसके उरोजों पर हाथ रख कर दबा दिया…और बोला “क्या करूँ , तुम ही बोलो”
वो मेरे हाथों के कसाव से और मेरे जवाब से सहम सी गयी, पर उसने मेरे हाथों को अपनी छाती से नहीं हटाया, और फिर से आगे की तरफ देखने लगी.
मैंने उसके छोटे-२ सेबों को दबाना शुरू कर दिया, बड़े कड़क थे उसके कश्मीरी सेब, मीठे भी होंगे, ये सोचकर ही मेरे मुंह में पानी आ गया, मैंने हाथ नीचे से घुमाकर उसके सूट के अन्दर डाल दिया और ब्रा के ऊपर से ही उन्हें दबाने और सहलाने लगा, उसपर मस्ती सी छाती जा रही थी, अपने सामने अपने ही भाई का लम्बा लंड देखकर और अपने चूतड़ों पर मेरे मोटे लंड का दबाव पाकर. मैंने दूसरा हाथ उसकी पानी टपकती चूत पर रख दिया और अपने दोनों हाथों से उसे ऊपर और नीचे एक साथ सहलाने लगा.
हिना ने अपनी आँखें बंद करली और अपना सर पीछे करके मेरे कंधे पर टिका दिया, और अपने दोनों हाथ मेरे दोनों हाथों पर रख कर मुझे और तेजी से दबाने के लिए उकसाने लगी. उसकी चूत से किसी भट्टी जैसी गर्मी बाहर आ रही थी. रेहान ने नेहा को काफी देर तक चूसने के बाद उसे चट्टान पर लिटा दिया और ऋतू को उठाकर अपने सीने से लगा लिया, अब वो ऋतू के शरीर से खेल रहा था, ऋतू जो रेहान का लंड देखकर दंग रह गयी थी, वो बार-२ उसके लम्बे लंड को अपनी चूत वाली जगह से घिस रही थी, वो जल्दी से इस मोटे डंडे को अपनी चूत में उतारना चाहती थी, ऋतू ने रेहान के होंठ चूसते हुए अपनी जींस के बटन खोने और उसे उतार दिया, हमेशा की तरह उस कुतिया ने आज भी नीचे कच्छी नहीं पहनी थी.
रेहान ने उसे भी चट्टान पर लिटा दिया और अब दोनों नंगी रंडियां अपनी टाँगे आसमान की तरफ उठाय लेटी थी, रेहान ने बारी -२ से उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया, पहले उसने नेहा की चूत को चखा और फिर ऋतू की चूत में अपनी जीभ डाली, वो खुरदुरी चट्टान पर अपनी चूत एक खुरदुरी जीभ से चट्वाकर मचल रही थी.
फिर ऋतू से सहन नहीं हुआ और उसने रेहान के बाल पकड़कर उसे उठाया और चिल्ला कर बोली “भोंसडीके ..डाल अपना लंड मेरी चूत में…अब सहा नहीं जाता, फाड़ दे अपने लंड से मेरी चूत को….”
पर रेहान सिर्फ मुस्कुराता रहा उसने अपना लंड उसकी चूत में नहीं डाला, बल्कि अपने रस टपकाते लंड से उसकी जांघो पर ठोकरें मारने लगा, वो उसे तडपा रहा था, वो बोला “साली कुतिया…नीचे तो बड़ा बोल रही थी..अब देख, मेरा लम्बा लंड देखकर कैसे चुदने की भीख मांग रही है…साली रंडी कहीं की…तेरी चूत को तो मैं अपने कुत्ते से चुदवाऊंगा, मेरा कुत्ता रेम्बो तेरी चूत को काट काटकर पूरी रात तेरी पिलाई करेगा, तब तुझे पता चलेगा की चुदाई क्या होती है…”
“हाँ हाँ चुदवा लेना मुझे अपने कुत्ते से भी पर अभी तो ये मुसल मेरी चूत में डाल न रेहान,….इतना मत तरसा….प्लीस ….” रितु उसके सामने भीख मांग रही थी.
“चल एक शर्त पर, तुझे मेरा पेशाब पीना होगा पहले” रेहान ने ऋतू से कहा.
उसकी बात सुनकर ऋतू और नेहा के साथ-२ मैं और हिना भी सकते में आ गए.. पर ऋतू ने अगले ही पल उठ कर उसके मोटे लंड को अपने हाथ में लेकर अपने मुंह का निशाना बनाया और बोली…”जल्दी निकाल अपना पेशाब…”
रेहान मुस्कुराया और थोड़ी कोशिश करने के बाद उसके पीले रंग की एक मोटी धार ऋतू के मुंह की तरफ चल दी, ऋतू के खुले मुंह ने उसे केच कर लिया और पीने लगी, पर बहाव तेज था, इसलिए जल्दी ही उसका मुंह भर गया और गोल्डन पानी उसकी छातियों से होता हुआ, चूत को भिगोता हुआ, नीचे जमीन पर गिरने लगा. ऋतू जल्दी-२ उसके पेशाब को पी रही थी, अंत में रेहान ने मूतना बंद कर दिया, ऋतू उठी और वापिस अपनी जगह जाकर लेट गयी.
मेरे मन में ऋतू के लिए घिन्न सी आ गयी पर फिर मैंने सोचा, मैंने भी तो उसे अपना पेशाब पिलाया था, शायद लड़कियों को इसका स्वाद अच्छा लगता है.
रेहान ने आगे बढकर अपने मोटे लंड को ऋतू की छोटी सी चूत पर रखा और एक करार झटका दिया…
आआआआआआआआआआआआअह्ह्ह्ह मर्र्र्रर गयीईईईईईईई ……अभी तो रेहान का सुपाडा ही अन्दर गया था. मैंने हिना की तरफ देखा वो बड़े ध्यान से अपने भाई को मेरी बहन को चोदते हुए देख रही थी.
मैंने हिना की सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसकी सलवार और पेंटी को एक साथ नीचे उतार दिया. पहले तो उसने थोडा विरोध किया पर जब मैंने अपने होंठो से उसके नर्म होंठ चूसने शुरू किये तो उसने भी अपनी रजामंदी दे डाली..
“मैंने ये सब कभी नहीं किया…प्लीस ध्यान रखना” उसने मेरे कानो में धीरे से कहा. मैं समझ गया की वो कुंवारी है. उधर रेहान ने अपना लंड थोडा बाहर निकाला और एक और तेज झटका दिया , ऋतू की तो बुरी हालत हो गयी, उसकी चूत थोड़ी सी साइड से फट गयी, और रेहान का पूरा लंड दनदनाता हुआ उसके गर्भाशय से जा टकराया..ऋतू की आँखें बाहर उबल कर आ गयी, उसने थोडा सीधा होकर रेहान की कमर को थाम लिया और उसे और झटके मारने से रोक दिया, पर रेहान ने उसकी एक न सुनी और उसे वापिस उसी अवस्था में लिटाकर और तेजी से धक्के मारने लगा…ऋतू ने अपना मुंह पीछे कर लिया..
नेहा जो ऋतू की बगल में लेती हुई थी उससे अपनी बहन का दर्द देखा न गया और वो उछल कर उसके ऊपर आ कर लेट गयी, नेहा ने ऋतू के दोनों हाथों के पकड़ा और अपने होंठ उसके होंठों पर टिका दिए और उन्हें चूसने लगी दोनों के मोटे-२ चुचे एक दुसरे से रगड़ खा रहे थे , ऋतू की चूत में रेहान का लंड था और उसकी चूत के थोडा ऊपर ही नेहा की चूत थी.
नेहा के चूसने से ऋतू का दर्द थोडा कम हुआ, अब रेहान के झटकों से भी उसे मजा आ रहा था, उसने किस को तोडा और चिल्लाना शुरू कर दिया…”आआआआआआआह्ह रेहाआआआआआन ..चोदो मुझे…चोदो मेरी चूत को अपने लम्बे लंड से…और तेज…और तेज…..आआआह अह अह अह अह अ हा हहा अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ….” ऋतू को काफी मजा आ रहा था और तभी रेहान ने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकल लिया …और लंड निकालकर उसने उसे ऊपर वाली नेहा की चूत पर टिकाया और एक जोरदार झटका मारा….अब चिल्लाने की बारी नेहा की थी..”अयीईईईईईईईईईइ मर गयीईईईइ कुत्ते….कमीने….हरामजादे……कटुए….निकाल इसे मेरी चूत से बाहर…..है राम फाड़ डाली मेरी चूत….”
अब ऋतू ने उसके होंठो को पकड़ा और चूसने लगी, पीछे से रेहान ने उसकी चूत का बैंड बजाना चालू रखा….और फिर उसे भी मजा आने लगा लम्बे लंड से…
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