लंड के कारनामे – फॅमिली सागा – Update 41

लंड के कारनामे - फॅमिली सागा - Incest Sex Story
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“तुम्हारा क्या मतलब है….?” सोनी ने पूछा, आज स्किन टाईट टी शर्ट में वो ग़जब की लग रही थी.
“अगर मैं तुम्हे बता दूं तो तुम मेरा विश्वास नहीं करोगे…, तुम्हे मेरे साथ चल कर देखना पड़ेगा.” मैंने कहा.
“और वो तुम कैसे करोगे और क्या दिखाओगे” इस बार मोनी ने पूछा, वो अपनी मचलती जवानी छोटी सी निक्कर और टी शर्ट में छुपा कर इठला रही थी.
“हम आज रात प्रोग्राम के टाइम तुम्हारे कॉटेज में आयेंगे और तुम्हे दिखायेंगे..” मैंने उस हूर परी की आँखों में देखकर कहा.
“मुझे तो ये सब बड़ा अजीब सा लग रहा है….” सोनी ने कहा.
“ये अजीब से भी ज्यादा अजीब है….मैं शर्त लगा कर कह सकता हूँ” मैंने उससे कहा.
इतने में हमारी बत्तें सुनकर वो चोदु रेहान बोल पड़ा “तुम कहना क्या चाहते हो..खुल कर बताओ…और शर्त लगाने वाली बात है तो पता तो चले की किस बात पर शर्त लग रही है” उसने अपने गंदे दांत निकालते हुए कहा.
“तुम इसमें इंट्रेस्स्टेड हो या नहीं…बस ये बताओ” मैंने मोनी और सोनी को देखते हुए कहा.
“ये हम तभी बतायंगे जब तुम हमें पूरी बात बताओ” सोनी ने अपना फैसला सुना दिया..
“ठीक है अगर तुम सुनना ही चाहती हो तो बताता हूँ, पर ध्यान रहे, तुम मुझपर नाराज मत होना, क्योंकि मैं अपनी बात प्रूव भी कर सकता हूँ” मैं उससे कहा.
“ठीक है…बोलो” वो चोदु बोला..
“तो सुनो…जब हम सभी बच्चे रोज रात को प्रोग्राम देख रहे होते है तो तुम्हारे पेरेंट्स ग्रुप सेक्स करते हैं. “मैंने उनसे कहा, वो तीनो मेरी बात सुनकर मुझे घूर कर देखने लगे..और उनके चेहरे पर गुस्से के भाव साफ़-२ दिखाई देने लगे.
“ये क्या बकवास कर रहे हो तुम…हमने तुमसे दोस्ती की और तुम हमारे पेरेंट्स के बारे में ऐसी गन्दी बात कर रहे हो, वो एक दुसरे को बहुत प्यार करते है, उन्हें ग्रुप सेक्स करने की क्या जरुरत है…तुमने ऐसा सोचा भी कैसे….” सोनी ने गुस्से से तमतमाकर कहा.
“हाँ …तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ऐसी बात करने की, हमारे पेरेंट्स के बारे में ऐसी बात करने की इजाजत तुझे किसने दी…साले…अपनी औकात में रह..अगर ये लडकियां तेरे साथ ना होती तो मैं तेरा कचूमर निकाल देता..” रेहान ने दांत पिसते हुए कहा.
“मेरा भाई जो कह रहा है वो सही है, मैं इस बात का सबूत हूँ” ऋतू ने बीच में बोलते हुए कहा.
ऋतू की बात सुनकर सोनी, मोनी और रेहान थोड़ी देर के लिए चुप हो गए और सोचने लगे.
“देखो तुम मेरा विश्वास करो, जो मैं कह रहा हूँ वो सच है, ये मैं आज रात के प्रोग्राम के समय साबित भी कर दूंगा, और ये बात मैं तुम लोगो को इसलिए कह रहा हूँ की अब हम दोस्त हैं, और अगर तुम्हारे पेरेंट्स ऐसी कोई हरकत कर रहे हैं तो इसके बारे में तुम्हे मालुम होना ही चाहिए,,,,अगर तुम्हे ये बात हमारे पेरेंट्स के बारे में पहले मालुम चलती तो क्या तुम मुझे न बताती हमारी दोस्ती के कारण…बोलो” मैंने उन्हें समझाते हुए कहा.
“हाँ शायद मैं बताती…पर लोग ऐसी घटिया हरकतें नहीं कर सकते…खासकर हमारे पेरेंट्स…” सोनी ने अपना तर्क दिया.
“ठीक है ..फिर आज रात खुद देख लेना..और उसके बाद मैं तुम्हे एक और सीक्रेट बताऊंगा…” मैंने कहा.
“ठीक है…हम तैयार हैं…पर अगर तुम झूट बोल रहे हो तो मैं ये सारी बात अपने और तुम्हारे पेरेंट्स को बता दूंगी.” सोनी ने कहा.
“ठीक है, मुझे मंजूर है..” मैंने कहा,
“तो अब हम ठीक दो घंटे बाद प्रोग्राम वाली जगह पर मिलते हैं. ” और ये कहकर सोनी और मोनी चले गए.
“मैं भी देखता हूँ की तुम्हारी बातों में कितनी सचाई है…”रेहान ने मुझे घूरते हुए कहा और ऋतू की तरफ देखकर मुस्कुरा दिया और वो भी चला गया..साला कमीना..मैंने उसकी गन्दी नजर भांप कर उसे मन ही मन गाली दी.
“क्या सच में तुम ये सब करना चाहते हो…” नेहा अभी भी डर रही थी.
“अरे तुम देखती जाओ..कितना मजा आने वाला है…तुम बस मजे लो” मैंने उसके गोल चूतडों पर हाथ मारते हुए कहा और हम भी वापिस अपने कोट्टेज की तरफ चल दिए.
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