Reading Mode

एक तरफ मैं सोनिया के सोये रहने से उसपर गुस्सा हो रहा था
और अब उसके उठने की टाइमिंग पर मेरी झांटे सुलग कर रह गयी….
आख़िर देखने तो देती की मॉम क्या करने मे मूड मे है…

मॉम ने जब पलटकर सोनिया को देखा तो वो भी एक पल के लिए सकपका सी गयी…
पर अब उन दोनो के बीच काफ़ी खुलापन आ चुका था, इसलिए वो डरी बिल्कुल भी नही…
हालाँकि ऐसे अपने बेटे को नंगा करके, खुद भी नंगी होकर वो अपनी बेटी के सामने खड़ी थी
और कोई भी ये देखकर सॉफ पता कर सकता था की वहां क्या चल रहा है…
और सोनिया तो वैसे भी ज़रूरत से ज़्यादा ही समझदार थी
उसके दिमाग़ की घंटी तो आँख खुलते ही बज गयी जब उसने अपनी माँ को अपने भाई के लंड पर झुके हुए देखा….
और शायद वो थोड़ा और सब्र करती तो आगे का नज़ारा भी लेटे -2 देख सकती थी…
पर उसे शायद किसी बात का आभास हो गया था
इसलिए उसने उठने की एक्टिंग करते हुए उन्हे ‘वो’ करने से रोक दिया
जो वो करने वाली थी…
आख़िरकार मेरी इस “माँ” फिल्म की डायरेक्टर वही तो थी
अपनी मर्ज़ी के बिना वो कैसे कोई सीन बनने देती..
ये वाला सीन तो उसकी स्क्रिप्ट में था ही नही..

मॉम : “वो….बस…ऐसे ही….इसे सोते हुए देखा तो …वो कल वाली बात याद आ गयी….इसकी गहरी नींद में सोने वाली…”

सोनिया : “और आपने सोचा की उस गहरी नींद का एक और बार फायदा उठा लिया जाए…है ना…”

मॉम ने सकुचाते हुए हाँ में सिर हिला दिया….
कितनी मासूमियत से उन्होने अपना जुर्म कबूल कर लिया था…

सोनिया : “मॉम , मैने कहा था की ये रात के समय गहरी नींद में सोता है, और ये तो सुबह का समय है…ऐसा कुछ ख़तरनाक करोगी तो इसके उठने का भी तो डर है ना…”

मॉम : ”पर इसने आते ही कहा था की ये पूरी रात सोया नही है…और इसकी आँखे देखकर लग भी रहा था, इसलिए मैने ये सब…”

अब तो उन्हे भी थोड़ी बहुत शर्म सी आ रही थी…
अपने हाथो से उन्होने अपनी छातियो को ढक लिया…
सोनिया का भी दिल पसीज सा गया की क्यों वो सुबह -2 मॉम को शर्मिंदगी का एहसास दिला रही है…

सोनिया : “इट्स ओके मॉम ….इन्फ़ेक्ट मैं भी आपकी जगह होती तो शायद यही करती…एंड देखो तो इसके पेनिस को…..ओह्ह माय गॉड मॉम ….इतने कड़क लंड को सामने रखकर आपसे सब्र कैसे हो रहा है…मुझसे तो बिल्कुल भी नही हो रहा…”

इतना कहकर उसने झत्ट से अपनी टॉप उतार कर साइड में फेंक दी..जैसे वो भी अब मैदान में कूदने को तैयार हो

मैने अधखुली आँखो से उसकी तरफ देखा और अपनी बहन की मदमस्त चुचियो की कड़कड़ाहट देखकर मेरे लंड ने एक जोरदार सलामी दी उसे..

और उस सलामी को सोनिया ने सॉफ देखा…
और पल भर में ही वो समझ गयी की मैं जाग रहा हूँ और एक बार फिर से कल वाली सिचुएशन में फँस गया हूँ …
ना मैं सो सकता हूँ और ना ही जाग सकता हूँ ..

ऐसे मामलो में मेरी बहन काफ़ी शरारती है
मुझे सताने में उसे काफ़ी मज़ा मिलता है
और इससे जो तकलीफ मुझे होने वाली थी वो अच्छे से जानती थी.

मॉम ने एक बार फिर से मेरी तरफ चेहरा कर लिया और अपनी छाती दबाते हुए मेरे खड़े हुए लंड को घूरने लगी..

सोनिया उनके पीछे आई और अपनी बाहें उनके गले में डालकर बोली : “क्या सोच रही हो मॉम …क्या इरादे है आपके…”

मॉम : “इरादे तो बहुत कुछ करने के है….पर वो करना ग़लत होगा…”

यार…ये भेंन का लौड़ा ”ग़लत” शब्द कब मेरा पीछा छोड़ेगा..

मेरी तो मुट्ठियां भींच गयी ये सुनते ही…
पर सोनिया के चेहरे पर एक स्माइल तैर गयी..

वो मुझे सुनाते हुए, मॉम से बड़े प्यार से बोली : “तो ठीक है मॉम ….जो ग़लत है वो ग़लत ही रहने दो…अभी के लिए जो सही है, वो कर लो…”

उसने जब आँख घुमाते हुए मॉम से ये कहा तो मॉम ने उसके गालो पर एक कचोटी काट ली और बोली : “वही तो करने जा रही थी की तू उठ गयी…”

अब तो सोनिया के साथ-2 मैं भी देखना चाहता था की वो क्या करने के मूड में थी..

सोनिया : “तो शुरू हो जाओ ना मॉम ..रोका किसने है…”

सोनिया की बात सुनते ही मॉम अपनी थिरकती हुई गांड लहराते हुए मेरे बेड पर चढ़ गयी…
और उन्होने मेरे चेहरे के दोनो तरफ टांगे कर ली…
उनका चेहरा मेरी टाँगो की तरफ था…

मेरा तो शरीर सुन्न सा होने लगा ये सोचकर की वो क्या करने वाली है..

फिर वो धीरे-2 नीचे बैठ गयी…
मैने आँखे खोलकर देखा तो मुझे लगा जैसे अंतरिक्ष से कोई विमान मेरे चेहरे पर उतर रहा है…
वो देखने में इतना खूबसूरत था की एक पल के लिए मैं भूल ही गया की मैं सोने की एक्टिंग कर रहा हूँ …
उस विमान में आगे एक दरवाजा था जो लाल रंग की लालिमा लिए हुए था…
और पीछे भी एक दरवाजा था जो शायद आपातकालीन स्थिति के लिए था…
पर आया – जाया दोनो से सकता था…
मैन दरवाजे से एक नशीली महक बाहर निकल रही थी और कुछ चिपचिपा सा रस भी…
शायद अंदर की दीवारो पर पुताई का काम जोर-शोर से चल रहा था…

और सबदे बड़ी बात
उस अंतरिक्ष यान की शेप बड़ी तराशि हुई सी थी…
अच्छी ख़ासी इंजीनियरिंग का जीता जागता नमूना था वो…

और जैसे ही उस विमान ने मेरे चेहरे पर लैंड किया, मेरी तो साँस ही रुकने को हो गयी…
वो दरवाजा सीधा मेरे चेहरे पर आकर लग गया और अपने आप खुलता चला गया…
अंदर का रसीला द्रव्य जिसे मैं पुताई समझ रहा था, मेरे चेहरे को भिगोने लगा..

एक ठंडी सिसकारी मॉम के मुँह से निकल कर पूरे कमरे में फैल गयी..

”ओह यसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स…..म्*म्म्मममममममम…”

उनसे ज़्यादा तो मेरा मन कर रहा था चीख मारने को….
ऐसे मालपुवे जैसी चूत रोज-2 नही मिलती चूसने को….
मुझे तो पहली बार एहसास हुआ की इन रसीली शादीशुदा औरतों की चूत का स्वाद कुँवारीयो से कितना अलग होता है…
ठीक वैसे ही जैसा कक्चा फल थोड़ा खटास लिए होता है और पका हुआ मिठास लिए…
मॉम की चूत भी ठीक वैसी ही थी…
पूरी मिठास लिए हुए…
जैसे तरबूज खाने से मुँह मीठे रस से भर जाता है वही हाल मेरा इस वक़्त हो रहा था…
मुँह के दोनो तरफ से मॉम की चूत का रस लकीरे बनकर नीचे गिर रहा था…

हे भगवान इतना रस रखती कैसे है ये औरतें अपनी चूत में समेट कर…
इन्हे तो शिशियों में भरकर बेचा जाए तो ठर्कियो के तो मज़े हो जाएँगे…
शराब को छोड़कर इस नशे की लत्त पड़ जानी है सबको..

मॉम ने चीख मारने के साथ अपने शरीर को मेरे लंड पर झुका दिया और अब वो प्रॉपर 69 की पोज़िशन में मेरे लंड को चूस रही थी..

मॉम अपनी चूत को मेरे मुँह पर किसी गाजर मूली की तरह घिस्स रही थी…
और मेरे लंड को भी जोरो से चूसकर उसका रस निकालने में लगी थी..

रात भर साक्षी की चूत मारने के बाद अपने लंड को मॉम के मुँह में पाकर मेरा ऑर्गॅज़म एक बार फिर से सांतवे आसमान पर जा पहुँचा

ये मॉम भी एकदम झल्ली है…
मैं पूरे जोश के साथ उनकी चूत को चूस रहा था और उन्हे मेरे उठने का आभास भी नही था…
कही ऐसा तो नही की उन्हे पता हो और वो जान बूझकर ऐसा कर रही थी…
नही-नही…
ऐसा नही हो सकता….
मॉम भला ऐसा क्यों करेगी…
अपनी तरफ से जान बूझकर वो ऐसा हरगिज़ नही कर सकती…

पर जो भी था, उस बड़े सीताफल जैसी गांड को चूसने में बड़ा मज़ा मिल रहा था..

और जल्द ही मेरा शरीर अकड़ने लगा…

मॉम ने तुरंत सोनिया से कहा : “देख…देख…तेरे भाई का शरीर अकड़ रहा है….ये जल्द ही झड़ेगा …आजा तू भी….यहां आजा…”

ये मॉम भी ना…
इनकी हमेशा से आदत रही है, हर चीज़ अपने बच्चों के साथ मिल-बाँटकर खाती है….
आज ये मेरे लंड का रस भी वो सोनिया के साथ बाँटकर पीने के चक्कर में थी..

और ऐसा हुआ भी..

जैसे ही मेरे लंड से पिचकारियां निकली, उन दोनो माँ बेटी के चारों होंठ मेरे लंड पर आ चिपके…
हर बूँद को उन दोनो ने अपने नाज़ुक होंठो और जीभ से समेट लिया….
खा लिया सारा माल मेरा…
निगल गयी दोनो मेरे रस को…
बुझा ली उन्होने अपनी-2 प्यास मेरे पानी से.

और प्यास तो मैने भी बुझाई मॉम की चूत से निकल रहे रस से…
मेरे गर्म पानी को पीकर उनकी चूत ने भी अपनी कटोरी का पानी गिरा दिया…
जो मेरे मुँह में भरता चला गया..

और जैसे ही उस विमान ने मेरे चेहरे पर लैंड किया, मेरी तो साँस ही रुकने को हो गयी…
वो दरवाजा सीधा मेरे चेहरे पर आकर लग गया और अपने आप खुलता चला गया…
अंदर का रसीला द्रव्य जिसे मैं पुताई समझ रहा था, मेरे चेहरे को भिगोने लगा..

एक ठंडी सिसकारी मॉम के मुँह से निकल कर पूरे कमरे में फैल गयी..

”ओह यसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स…..म्*म्म्मममममममम…”

उनसे ज़्यादा तो मेरा मन कर रहा था चीख मारने को….
ऐसे मालपुवे जैसी चूत रोज-2 नही मिलती चूसने को….
मुझे तो पहली बार एहसास हुआ की इन रसीली शादीशुदा औरतों की चूत का स्वाद कुँवारीयो से कितना अलग होता है…
ठीक वैसे ही जैसा कक्चा फल थोड़ा खटास लिए होता है और पका हुआ मिठास लिए…
मॉम की चूत भी ठीक वैसी ही थी…
पूरी मिठास लिए हुए…
जैसे तरबूज खाने से मुँह मीठे रस से भर जाता है वही हाल मेरा इस वक़्त हो रहा था…
मुँह के दोनो तरफ से मॉम की चूत का रस लकीरे बनकर नीचे गिर रहा था…

हे भगवान इतना रस रखती कैसे है ये औरतें अपनी चूत में समेट कर…
इन्हे तो शिशियों में भरकर बेचा जाए तो ठर्कियो के तो मज़े हो जाएँगे…
शराब को छोड़कर इस नशे की लत्त पड़ जानी है सबको..

मॉम ने चीख मारने के साथ अपने शरीर को मेरे लंड पर झुका दिया और अब वो प्रॉपर 69 की पोज़िशन में मेरे लंड को चूस रही थी..

मॉम अपनी चूत को मेरे मुँह पर किसी गाजर मूली की तरह घिस्स रही थी…
और मेरे लंड को भी जोरो से चूसकर उसका रस निकालने में लगी थी..

रात भर साक्षी की चूत मारने के बाद अपने लंड को मॉम के मुँह में पाकर मेरा ऑर्गॅज़म एक बार फिर से सांतवे आसमान पर जा पहुँचा

ये मॉम भी एकदम झल्ली है…
मैं पूरे जोश के साथ उनकी चूत को चूस रहा था और उन्हे मेरे उठने का आभास भी नही था…
कही ऐसा तो नही की उन्हे पता हो और वो जान बूझकर ऐसा कर रही थी…
नही-नही…
ऐसा नही हो सकता….
मॉम भला ऐसा क्यों करेगी…
अपनी तरफ से जान बूझकर वो ऐसा हरगिज़ नही कर सकती…

पर जो भी था, उस बड़े सीताफल जैसी गांड को चूसने में बड़ा मज़ा मिल रहा था..

और जल्द ही मेरा शरीर अकड़ने लगा…

मॉम ने तुरंत सोनिया से कहा : “देख…देख…तेरे भाई का शरीर अकड़ रहा है….ये जल्द ही झड़ेगा …आजा तू भी….यहां आजा…”

ये मॉम भी ना…
इनकी हमेशा से आदत रही है, हर चीज़ अपने बच्चों के साथ मिल-बाँटकर खाती है….
आज ये मेरे लंड का रस भी वो सोनिया के साथ बाँटकर पीने के चक्कर में थी..

और ऐसा हुआ भी..

जैसे ही मेरे लंड से पिचकारियां निकली, उन दोनो माँ बेटी के चारों होंठ मेरे लंड पर आ चिपके…
हर बूँद को उन दोनो ने अपने नाज़ुक होंठो और जीभ से समेट लिया….
खा लिया सारा माल मेरा…
निगल गयी दोनो मेरे रस को…
बुझा ली उन्होने अपनी-2 प्यास मेरे पानी से.

और प्यास तो मैने भी बुझाई मॉम की चूत से निकल रहे रस से…
मेरे गर्म पानी को पीकर उनकी चूत ने भी अपनी कटोरी का पानी गिरा दिया…
जो मेरे मुँह में भरता चला गया..

मैं तो उनकी तरह सिसकारिया भी नही ले सकता था…
पर जो भी था, मुझे मज़ा बहुत मिला था..

सब कुछ ख़त्म होने के बाद मॉम मेरे उपर से उतरी और एक टावल लेकर उन्होने मेरे लंड और चेहरे को बड़े आराम से सॉफ किया…
चेहरा सॉफ करते-2 उन्हे ना जाने कैसे मुझपर एक बार फिर से प्यार आ गया और उन्होने मेरे होंठो को चूम लिया…

उफ़ ….
यहाँ मुझसे सब्र करना मुश्किल हो रहा था…
पर वो तो अच्छा हुआ मॉम ने सिर्फ़ एक हल्की सी चुम्मी लेकर मुझे छोड़ दिया..
वरना कुछ देर और उनके होंठ मुझपर लगे रहते तो मैने उन्हे ज़ोर से स्मूच कर लेना था..

फिर दोनो ने मिलकर मुझे भी कपड़े पहनाए और खुद भी पहन लिए..

सोनिया : “मॉम ..ऐसा कब तक चलता रहेगा…आई मीन..सोनू के साथ सोते-2 ये सब करना…एक ना एक दिन तो उसे पता चल ही जाएगा…फिर क्या होगा..”

मॉम ने चेहरा झुका लिया…
उनके पास कुछ नही था बोलने के लिए..

पर वो शायद सोनिया से ही इसका सोल्युशन सुनना चाहती थी…
इसलिए उसकी तरफ देखकर और भोला सा चेहरा बनाकर वो बोली : “तो तू ही बता ना…और क्या हो सकता है…”

अब सोनिया की बारी थी एक रहस्यमयी मुस्कान देने की…
वो बोली : “इफ़ यू वांट …मैं आपकी मदद कर सकती हूँ ..बस आपको सब कुछ वैसे ही करना पड़ेगा…जैसा मैं कहूँगी…”

मॉम चुप्प रही…
उनकी चुप्पी से मेरे दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी.

फिर उनकी दबी हुई सी आवाज़ आई : “जैसे तू ठीक समझे…”

और इतना कहते हुए वो कमरे से निकल कर बाहर चली गयी..

मैं एक बार फिर से कल की तरहा उठकर खड़ा हो गया…
गहरी साँसे लेते हुए मैं और सोनिया एक दूसरे को देख रहे थे…
और फिर हम दोनो खिलखिलाकर हँसने लगे…
एक दूसरे से गले मिलकर, एक दूसरे को बेतहाशा चूमने लगे…
स्मूच करने लगे…

और जब हम शांत हुए तो मैने कहा : “मान गया दी..आख़िर आपने मॉम को भी अपने जाल में फँसा ही लिया…पर मुझे एक बात समझ में नही आ रही…ये सब लंबा खींचने की ज़रूरत क्या है… एक ही बार में जो काम हो सकता है उसके लिए क्यों इतने दिनों तक तरसे…”

सोनिया : “देखो सोनू…ये एक माँ और बेटे के रिश्तो के बीच की दीवार को तोड़कर दूसरे रिश्ते को बनाने का सवाल है…और ऐसे काम मे जल्दबाज़ी सही नही है…धीरे-2 करने से ही उनकी और तुम्हारी शर्म जाएगी और एक बार ये रिश्तो की दीवार और शर्म तुम्हारे बीच से गिर गयी तो जो मज़ा मिलेगा, उसका मुकाबला किसी और चीज़ से कर ही नही पाओगे तुम…”

बात तो वो सही कह रही थी..

अब तो मुझे भी इंतजार था की वो मॉम को क्या-2 करने को कहेगी…

अभी तो दिन की शुरूवात थी, पूरा दिन पड़ा था, देखते है क्या होगा आज..

Please complete the required fields.