रूम मे आकर सोनिया ने दरवाजा धीरे से बंद कर लिया और लाइट जला दी.
मैने झट्ट से आँखे मूंद ली…
लंड वाले हिस्से पर मैने पहले से ही एक मोटी सी चादर रख दी थी क्योंकि सोनिया और मोंम का इंतजार करते हुए ही मेरा लंड बुरी तरह से खड़ा हो चुका था.
और फिर मुझे एक ठंडी सी सिसकारी सुनाई दी…
मैं ये सोचने की कोशिश करने लगा की ये किसकी हो सकती है..
सोनिया की या मोंम की…
पर सोनिया ने मेरी वो पहेली हल कर दी
वो बोली : “अर्रे मॉम , क्या हुआ…सोनू को देखकर ऐसी ठंडी आहें क्यों भर रही हो…”
उसके बोलने के लहजे से ही पता चल रहा था की वो चुटकी ले रही है..
मॉम शरमा गयी…
वो बोली : “तू भी ना…आजकल बहुत शैतान हो गयी है….अब ये लाइट तो बंद कर दे …मुझे शरम आ रही है…”
सोनिया : “मुझसे ?”
मॉम : “नही रे…वो..वो है ना…तेरा भाई…जो सामने सो रहा है…वो जाग गया तो…”
सोनिया : “वो तो लाइट ऑफ होगी तब भी उसे पता चल ही जाएगा की क्या चल रहा है हमारे बीच…”
मॉम : “तू सुधरेगी नही ना…लाइट बंद कर दे ना..प्लीज़…”
सोनिया का दिल पसीज गया…
उसने लाइट तो बंद कर दी पर ज़ीरो वॉट का बल्ब ऑन कर दिया…
हल्की लाल रोशनी पूरे कमरे में फैल गयी…
लाइट बंद करते ही सोनिया ने बिना वक़्त गँवाए मॉम को एक बार फिर से पकड़ लिया और उन्हे स्मूच करने लगी..
मॉम के भी मुँह से लार बह-बहकर बाहर निकल रही थी…
उन्होने उसे सोनिया के मुँह में उड़ेलना शुरू कर दिया…
सोनिया ने एक उंगली मॉम की चूत में डाली और वो घी से भीगी उंगली अपने और मॉम के होंठो के बीच लाकर उसे चूसने लगी…
थोड़ी मिठास सोनिया के मुँह में गयी तो थोड़ी मॉम के…
अपनी ही चूत का रस पीकर वो एक बार फिर से बावली सी हो गयी…
ठीक वैसे ही जैसी मॉल के टाय्लेट में हो गयी थी…
उन्होने भी अपनी 2 उंगलिया एक साथ सोनिया की चूत में घुसेड कर उसका रस निकाल लिया…
और अकेले चूसने के लालच में उन्होने सोनिया को परे कर दिया और सारा रस खुद ही पी गयी…
यही नही उन्होने सोनिया को उसी के बेड पर धक्का दिया और उसकी टांगे फैला कर उसकी चूत पर अपने होंठ लगा दिए…
अपनी बेटी की कुँवारी चूत का रस पीकर ही उनकी ये प्यास बुझने वाली थी…
ऐसे आराम से अपने बिस्तर पर नंगा लेटकर, अपनी मॉम से अपनी चूत चुस्वाकार सोनिया को भी बहुत मज़ा आ रहा था…
उसने आँखे खोल कर मेरी तरफ देखा और हल्के अंधेरे में हमारी आँखे एक दूसरे से टकराई…
मेरे और उसके चेहरे पर एक सैक्सी सी स्माइल आ गयी…
मॉम तो हमे ऐसा करते देख नही पा रही थी…
इसलिए मैने अपना सिर थोड़ा सा उठा रखा था ताकि उन्हे मज़े करते हुए आसानी से देख सकूं.
पर मेरा पूरा ध्यान मॉम की तरफ भी था की कही एकदम से वो मुझे देख ले तो मैं संभल सकूं..
सोनिया ने हाथ पीछे करके अपने हेंडबेग से अपना डिल्डो निकाल कर मॉम को दे दिया…
मॉम ने भी मुस्कुराते हुए उसे लिया और अपने मुँह में डालकर उसे गीला किया और फिर धीरे-2 उसे अपने बेटी की चूत में धकेलने लगी…
मेरी तो साँसे ही अटक गयी ये देखकर…
और मैं सोचने लगा की क्या मॉम एक दिन ऐसे ही मेरा लंड पकड़ कर सोनिया दी की चूत में धकेलेंगी..
और मेरे अंदर से आवाज़ आई…हाँ ..जल्द ही..
जैसे-2 वो डिल्डो सोनिया की चूत में जा रहा था, उसके शरीर का कसाव बढ़ता जा रहा था…
और वो आधा ही अंदर गया था की सोनिया चीख पड़ी : “बासस्स्सस्स माँ ….बसस्सस्स…..और अंदर मत डालो….वरना मेरी चूत फट जाएगी…”
मॉम को लगा की वो डिल्डो उसकी झिल्ली से जा टकराया है पर असल में सोनिया मॉम को ये दिखाना चाहती थी की वो अभी भी कुँवारी ही है…वरना ये डिल्डो वो आसानी से पूरा हड़प जाती..
वो पागल सोनिया ये नही जानती थी की उसके ये वर्ड्स मेरे उपर क्या प्रभाव डाल रहे है…
वैसे वो ये सब मेरे लिए ही कर रही थी…
मॉम से चूत चुस्वाकार वो खुद भी मज़े ले रही थी और अपनी लाईव हालत की कमेन्ट्री सुनाकर मुझे भी वो एहसास दे रही थी..
मैने अपने लंड को मसलना शुरू कर दिया..
और अचानक सोनिया दी का पूरा शरीर कांप सा गया और उनकी चूत से एक गाड़ा, मीठे पानी का फव्वारा 1 इंच तक हवा में उछल गया…
जिसका सारा पानी मॉम के चेहरे को भिगो गया…
उन्होने भी अपनी लाडली बेटी का ये अमूल्या अमृत वेस्ट नही होने दिया…
चपर -2 करके वो सारा पी गयी..
पीना तो मैं भी चाहता था वो रसीला पानी…
सोनिया को भी पता था की ये मुझे कितना पसंद है…
पर बेचारी अपने ही ऑर्गॅज़म में डूबी हुई मेरे निराश से चेहरे को देख ही नही पाई..
कुछ ही देर में जब सोनिया दी शांत हुई तो वो अपने बेड से उठी और उसने मॉम के चेहरे को पकड़ कर उनके मुँह से वो मिठास चटनी शुरू कर दी…
ऐसा लग रहा था जैसे दो ख़ूँख़ार बिल्लिया लड़ाई कर रही है…
प्यार भरी लड़ाई…
सोनिया ने मॉम को धक्का देकर घोड़ी बना दिया….
और मॉम भी अपनी बेटी का कहना मानकर ज़मीन पर अपने पाँव फेला कर खड़ी हो गयी….
सोनिया ने एक बार फिर से उस डिल्डो का सहारा लिया और उसे बड़ी ही बेरेहमी से मॉम की चूत में घुसेड दिया…
घोड़ी बनी मॉम बुरी तरह से हिनहीना उठी..
”आआआआआआआआआआहह उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़….. मररर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर गयी रे………. अहह…..”
पर उन्होने सोनिया की तरह उसे अंदर लेने से ज़रा भी मना नही किया…
एक-2 इंच करके सोनिया ने वो पूरा 9 इंच का मोटा डिल्डो मॉम की चूत में घुसा दिया…
इस बात से ही अंदाज़ा लगाया जा सकता था की उनकी गुफा में कितनी गहराई है….
मेरे लंड का अंदर जाने के बाद क्या हाल होगा, ये तो बाद मे ही पता चलेगा..
पर इस वक़्त तो मॉम को मज़ा मिल रहा था…
”ओह बैबी……. मज़ा आ रहा है…ऐसे ही करो…शाबाश…..लीक इट….चाटो इसे अब……निकालो ये नकली प्लास्टिक…अपनी जीभ डालो अंदर……….खा जाओ इसे….मेरी…मेरी….चूत को…..खा जाओ….”
उफ़फ्फ़…..
कितना असहाय था मैं ….
मॉम की इन रसीली बातो को सुनकर मेरा मन तो कर रहा था की मैं उन्हे अपनी कला का जोहर दिखा दूँ ….
जीभ तो क्या अपना लंड भी घुसा दूँ उनकी चूत में और दिखा दूँ उन्हे की इस प्लास्टिक के लंड में कुछ नही धरा है…
असली चीज़ यही होती है…
लॅंड..
देसी लॅंड.
पर उन्हे शायद मेरे मन की बात सुनाई नही दी….
सोनिया ने अपनी मॉम की बात मान ली और उस नकली लंड को बाहर निकाल फेंका…
और फिर मॉम की चूत पर अपना मुँह लगाकर सोनिया ने उसे चाटना शुरू कर दिया…
मॉम शायद बेड पर वापिस जाना चाहती थी…
ऐसे घोड़ी बनकर अपनी चूत चटवाने में उन्हे मज़ा नही आ रहा था..
पर सोनिया के दिमाग़ में कुछ और ही चल रहा था…
उसने उन्हे मेरे बेड की तरफ धकेलना शुरू कर दिया…
अपने मुँह और जीभ का ज़ोर लगाकर वो मॉम की गांड पर धक्का लगाती और कुछ ही देर में मॉम मेरे बेड तक पहुँच गयी…
और फिर जैसे ही वो घूमकर खड़ी हुई, सोनिया उनकी चूत पर एक बार फिर से टूट पड़ी…
बेचारी मॉम लड़खडाकर मेरे ही बेड पर गिर गयी…
मेरे पैरो से कुछ ही दूर …
उफ़फ्फ़…..
ये सोनिया दी ने मुझे किस बंधन में बाँध दिया था…
मैं चाहकर भी कुछ नही कर पा रहा था…
मेरी खुद की माँ ..पूरी नंगी..मेरे ही बेड पर पड़ी थी…
और मैं दम साधकर सोने के अलावा कुछ नही कर पा रहा था..
मॉम ने कसमसाते हुए कहा : “आआआआआहह सोनी……रुक जा……रुक जा ना……अपने बेड पर चल….यहाँ नही……आआआआआआअहह….सोनू जाग जाएगा…..रुक ज़ाआाआआ अहह”
पर सोनिया ना रुकी….
वो अपनी कुशलता का पूरा इस्तेमाल करते हुए मॉम की चूत चूसती रही….
मॉम अब जल बिन मछली की तरह तड़पने लगी थी…
शायद उनके अंदर एक नये ऑर्गॅज़म का निर्माण हो रहा था….
इसलिए वो भी उसी मज़े में डूब कर उस चूत चुसाई का मज़ा लेने लगी……
मचलने लगी….
तड़पने लगी.
और तड़पते -2 उनके हाथ मेरे घुटनो पर आ लगे…
एक पल के लिए तो वो भी रुक सी गयी…
पर सोनिया दी के हमलो ने उन्हे फिर से उस आनंदसागर में खींच लिया….
धीरे-2 उनके हाथो ने मेरे लंड पर पड़ी चादर को खींच कर अलग कर दिया….
मेरा लंड एफ्फ़िल टावर की तरह खड़ा था…
जिसके पीछे मुझे मॉम का चेहरा भी नही दिखाई दे रहा था….
उनके मुँह से एक साथ 2 सिसकारियां निकल गयी….
एक अपनी क्लिट के नाम की और दूसरी मेरे लंड के नाम की…
एक पल के लिए फिर से मॉम का शरीर ठंडा पड़ गया…
कोई हलचल ही नही हुई…
जैसे कोई सदमे में हो…
उनका हाथ मेरे लंड पर था…
उन्होने उसे टटोल कर देखा ..
वो पूरा खड़ा था….
उपर से नीचे तक नापा उन्होने उसे…
उसकी लंबाई का अंदाज़ा लगाया…
अपना हाथ उसके चारो तरफ कसकर उसकी मोटाई नापी……
और फिर जैसे उन्हे कुछ हो गया….
वो एक झटके से उठ खड़ी हुई…
पास पड़ी चादर से उन्होने खुद को ढक लिया…
सोनिया भी ये देखकर हैरान रह गयी की ये मॉम को अचानक हुआ क्या है…
मों : “सोनी….ये..ये…सोनू …ये..ये तो जाग रहा है….”
मेरी तो फट्ट कर हाथ में आ गयी….
हमारी चोरी पकड़ी जा चुकी थी….
अब हमारी खैर नहीं थी












