पर मेरे इस ग़लत कहने का कुछ भी सही असर मॉम पर नही पड़ रहा था….
जैसे शुरू में मुझे और सोनिया दी को आपस में कुछ करने से डर सा लगता था, वैसा कुछ भी इस वक़्त मॉम और सोनिया के बीच फील नहीं हो रहा था…
दोनो बड़े ही आराम से बाते कर रहे थे, बावजूद इसके की इस वक़्त सोनिया दी पूरी नंगी खड़ी थी उनके सामने..
मॉम : “वॉव …. तुम सही कह रही थी, बड़ी ब्रेस्ट ही सही लगती है… इन्फेक्ट तुम्हे देखकर मुझे अपनी कॉलेज टाइम की याद आ गयी… मैं भी लगभग ऐसी ही दिखती थी… बल्कि मेरी ब्रेस्ट तो तुमसे थोड़ा बड़ी थी उस वक़्त…”
और ये बात तो सच ही है
उनकी ब्रेस्ट सच में काफ़ी बड़ी थी, और जितनी बड़ी थी उतना ही उन्होने मेंटेन करके रखा हुआ था उसे…
आज वो शायद 45 के आस पास थी पर ब्रेस्ट एकदम तनी हुई सी रहती थी.
उनकी बातें सुनकर मैं अपनी मॉम की ब्रेस्ट साइज़ का अंदाज़ा लगाने की कोशिश करने लगा..
शायद 38 की होंगी..
पर जो भी था, उनकी इन रसीली बातों को छुपकर सुनने में मज़ा बहुत आ रहा था..
हालाँकि अभी भी मेरे अंतर्मन के हिसाब से ये ग़लत था पर सोनिया दी के बाद शायद मुझे इस तरह का हर ग़लत सही लगने लग गया था.
इसी बीच एक बार फिर मॉम ने सोनिया दी की ब्रेस्ट को हाथ में पकड़ कर उनका वजन नापना शुरू कर दिया..
उनके दोनो हाथ में सोनिया दी के गुब्बारे उछल कूद मचा रहे थे, हालाँकि सोनिया दी के चेहरे पर कोई एक्शप्रेशन नही था पर मुझे पता था की जब बात उनके निप्पल्स तक पहुचेगी तो ये एक्शप्रेशन बदलते देर नही लगेगी…
और हुआ भी ऐसे ही.
मॉम के दोनो हाथ सोनिया के मोम्मे नापने में बिज़ी थे और उनके हाथ के अंगूठे किसी साँप की तरह सरकते हुए उनके निप्पल्स पर आ लगे और उन्हे सहलाने लगी…
एक तेज साँस सोनिया दी ने अपनी नाक के थ्रू भरी, जैसे दुनिया की सारी ऑक्सिजन अपने अंदर समेट लेना चाहती हो…
मॉम के चेहरे पर वही शरारत भरी मुस्कान फिर से आ गयी… मैने आज से पहले उनका ये नॉटी अवतार कभी नही देखा था.
मॉम : “लगता है ये तुम्हारा सेंसेटिव पॉइंट है…”
सोनिया दी ने गहरी साँस लेते हुए कहा : “ये तो सभी का होता है…ये पॉइंट है ही ऐसा…”
मॉम ने मुस्कुराते हुए कहा : “मेरा नही है….”
सोनिया ने शरारती नज़रों से मॉम को देखा और बोली : “अच्छा जी…मैं चेक करू क्या…”
मॉम : “हाँ कर ले…मुझे क्या दिक्कत है..”
इतना कहते हुए उन्होने अपनी ब्रेस्ट सोनिया के सामने लहरा दी…
मेरा तो कलेजा मुँह को आ गया…
धाड़-2 की आवाज़ें दिल से सॉफ सुनाई देने लगी…

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मॉम को तो जैसे कोई फ़र्क ही नही पड़ा.. सोनिया ने अपनी उंगली से उनके उभरे हुए निप्पल को पकड़ लिया और ज़ोर से दबा दिया, तब भी मॉम पर कोई असर नही पड़ा…
यानी वो सही कह रही थी
सोनिया : “वॉव मॉम, इट्स अमेज़िंग…मुझे तो लगता था की सभी लेडीज़ में यही वीक पॉइंट है…आपमे नही है”
मॉम (हंसते हुए) : “ऐसा नही है की मुझे कुछ होता नही था…शादी से पहले, इन्फेक्ट तुम दोनो के पैदा होने से पहले ये पायंट्स भी बहुत सेंसेटिव थे…पर…”
सोनिया : “पर क्या मॉम …”
मॉम : “पर, तुम दोनो को दूध पिलाते हुए, ख़ासकर विक्की को, इनका सेंसेशन ख़त्म होता चला गया… विक्की तो उन्हे सक्क करते हुए इतनी ज़ोर से काटा करता था की कई बार तो इनमे से ब्लड़ भी निकल आया करता था… और शायद तभी से इनकी सेंसेटीविटी भी ख़त्म हो गयी है…”
मॉम की ये बात सुनकर मेरा तो बुरा हाल हो गया…
मॉम तो ये केवल बोल रही थी और मैं उस वक़्त अपने आप को उसी जगह पर रखकर ये सोच रहा था की मॉम मुझे गोद में लिटा कर दूध पिला रही है…
और मैं चपर -2 करके, उनके निप्पल्स को अपने तेज दांतो से काटता हुआ, उनका दूधु पी रहा हू…
और साथ ही साथ मुझे अपने आप पर गुस्सा भी आ रहा था की मेरी वजह से मॉम के निप्पल्स पंचर हो गये, वरना आज भी वो उतने ही सेंसेटिव होते…
सोनिया : “तो इसका मतलब अब आपका कोई भी पॉइंट सेंसेटिव नही है…”
मॉम (शरमाते हुए) : “ये मैने कब कहा…”
सोनिया के साथ-2 मेरी आँखे भी फैल कर चौड़ी हो गयी, जब उन्होने अपना हाथ सीधा सोनिया की चूत पर रख दिया…
वो बेचारी तो ऐसे काँपी जैसे ठंडा पानी डाल दिया हो उसके बदन पर…
मुझसे अच्छा सोनिया की दशा इस वक़्त भला कोई और कैसे जान सकता था…
पहले उसके निप्पल्स और अब उसकी गर्म चूत , दोनो एक से बढ़कर एक सेंसेटिव पॉइंट थे…
भले ही मॉम का हाथ सोनिया की चूत पर था पर बताना वो ये चाह रही थी की उनका भी यही सेंसेटिव पॉइंट है…
और ये बात जैसे ही सोनिया की समझ में आई उसका हाथ भी मॉम की चूत की तरफ सरकने लगा…
और मॉम ने मना भी नही किया, बल्कि उसके हाथ को महसूस करके वो भी ठीक वैसे ही काँपी जैसे सोनिया दी काँपी थी. लाइक डॉटर, लाईक मॉम.
”ससससससससस आआआआआह्हः ”
बंद अलमारी में मेरा बुरा हाल हो चुका था
एक तो अंदर वैसे ही गर्मी थी उपर से इतना गर्म सीन देखकर मेरे बदन से पसीने निकलने लगे.

अपना पूरा पंजा उसपर लगाकर उसने चूत पर ऐसा दबाव बनाया की मॉम का शरीर हवा में उठ सा गया…
‘ओह्ह्ह गॉड ….. सोनी……उम्*म्म्ममममम डोंट डू इट…… कुछ हो रहा है….”
और अंदर खड़ा हुआ मैं सोनिया को कोस रहा था की ये क्या करने पर उतारू हो गयी है वो…
भला अपनी मॉम के साथ कोई बेटी ऐसा करती है क्या…
और करना भी है तो उसे ये सोच लेना चाहिए था की मैं अंदर ही हूँ …
उनकी आवाज़ सुन सकता हूँ …
इनफॅक्ट मैं तो दरार में से उन्हे देख भी पा रहा था, इसके बावजूद वो मॉम के साथ ये सब करने पर लगी हुई थी..
सोनिया पर तो अब कोई भूत सा चढ़ चुका था…
ठीक वैसा ही जैसा तनवी के साथ मज़े करते हुए चड़ता था.
और ठीक उसी वक़्त ही मॉम ने सोनिया से पूछ भी लिया : ”ममम…….लगता है….अह्ह्ह्हम्म्म…तुम …अभी भी….उस…उस तनवी के साथ….वो सब…वो सब करती हो…..”
ओह्ह गॉड ..
इसका मतलब मॉम को उनके लैस्बियन सैक्स का पहले से पता था, और ये 9th स्टॅंडर्ड से ही वो सब करती आ रही थी…
और शायद इसलिए ही मॉम-डेड ने सोनिया को उससे दूर , बोर्डिंग में पढ़ने के लिए भेज दिया था.
सोनिया भी कांपती हुई सी आवाज़ में बोली : “यएसस्स मॉम….. पहले तो हम दोनो छोटे थे…पर अब नही रहे… एन्ड आई एम् 18 नाउ…. इसलिए मैं कुछ भी कर सकती हूँ …..”
मॉम तो पहले ही इतने प्यार से बात कर रही थी, उन्हे तो बल्कि मज़ा मिल रहा था, इसलिए वो भला किसलिए मना करती उसे वो मौज लेने से..
वो बोली : “उम्म्म….हाँ ……इट्स ओक….इसी उम्र में मैने भी…..अह्ह्ह काफ़ी मज़े लिए थे….हॉस्टिल में ….अपनी फ्रेंड्स के साथ…..”
सोनिया ने अपना नंगा बदन उनसे सटाते हुए कहा : “तो क्या आप आज एक बार फिर से वो मज़े लेना चाहेंगी…अपनी बेटी के साथ….”
उसकी ये बात सुनकर तो मेरा दिल धड़कना ही भूल गया…
यानी सोनिया अपनी खुद की मॉम से, यानी हमारी मॉम से , लैस्बियन सैक्स करना चाह रही थी.
और सबसे बड़ी बात ये की मेरे कमरे में होते हुए
हालाँकि मॉम को ये बात पता नहीं थी…
पर सोनिया तो ये अच्छे से जानती थी,
उसके बावजूद वो ऐसा कर रही थी.
मैं फुसफुसाने लगा : “नो …. सोनिया दी नो…. ये ग़लत है…. ये मत करना…. ”
मुझे समझ नही आ रहा था की मैं ये क्यों कह रहा था, हालाँकि अंदर से मैं भी वो सब देखना चाह रहा था
ये सब देखते हुए मुझे जो मज़ा मिल रहा था उसे मैं बयान नही कर पा रहा था
पर फिर भी मैं सोनिया दी की इस बात से सहमत ना होकर उन्हे ग़लत कह रहा था.
शायद इसलिए की….की… मैं उस खेल में शामिल नही था.
पर अचानक मेरे मन में ख़याल आया की शायद सोनिया दी ये सब मेरे लिए ही कर रही हो..
इसका मतलब, वो चाहती थी की मैं मॉम के साथ भी वो सब करू जो मैंने सोनिया दी के साथ किया है.
अपनी खुद की मॉम के साथ…
पर ये तो शायद और भी ज़्यादा ग़लत होगा…
कोई भला अपनी खुद की माँ के साथ कैसे सैक्स कर सकता है…
उस माँ के साथ जिसने उसे जन्म दिया है, उसे अपना दूध पिलाया है.
मेरे दिमाग़ में ये सब चल रहा था और मेरे लंड का बुरा हाल था..
थोड़ी देर पहले दो बार झड़ने के बाद वो एक बार फिर से स्टील का हुआ पड़ा था…
और इस बार सोनिया के लिए नही बल्कि मॉम के बारे में सोचकर.
यही हाल मेरे साथ पहले भी हुआ करता था जब मैं सोनिया के बारे में सोचता था,
मेरे लंड ने मेरे दिमाग़ की बात कभी सुनी ही नही, हमेशा मेरे ख़िलाफ़ जाकर अकेला खड़ा हो जाता था..
जैसे इस वक़्त खड़ा था.
एकदम कड़क होकर,
मुझे चिड़ाता हुआ सा…
और ज़ोर से चिल्लाकर कहता हुआ सा की ”ये ग़लत नही है….. जैसे सोनिया के साथ चुदाई करना ग़लत नही था, वैसे ही मॉम के साथ करना भी ग़लत नही होगा…”
पर चुदाई की बात अभी से कैसे आ गयी, अभी तो सोनिया अपने मज़े लेने में लगी थी…
ये तो मेरा अनुमान था की वो मॉम को मेरे लिए तैयार कर रही है, पर अभी के हिसाब से तो वो उन्हे खुद के लिए तैयार कर रही थी.
वो खुद तो पहले से नंगी थी, उसने मॉम की साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया
ब्लाउस मे उनकी तनी हुई छातियाँ कमाल की लग रही थी , मॉम के चेहरे पर अनेको भाव आने-जाने लगे…
वो शायद अंदर से निश्चय नही कर पा रही थी की अपनी बेटी के साथ ये करना सही है या नही…
पर उनके चेहरे को देखकर ऐसा लग नही रहा था की वो मना करने की पोज़िशन में रह गयी है…
आज इस छोटी सी अलमारी में खड़े होकर मैं उन माँ – बेटी के एक नये प्यार का गवाह बनने वाला था.
मॉम खड़ी-2 सिसक उठी…
सोनिया : “मॉम, याद है जब मैं छोटी थी तो आपकी नेवल से कितना खेला करती थी…इसे चूमती रहती थी…और आपको गुदगुदी होती तो मुझे कितना अच्छा लगता था…”
मों : “हाँ , याद है… मैं साड़ी पहन कर जब बेड पर लेटी होती थी तो एक तरफ से तुम और दूसरी तरफ से सोनू, मेरे नंगे पेट पर चड़कर, मुझे कितना तंग किया करते थे…”
उनकी बाते सुनकर मैं अलमारी में खड़ा हुआ ये सोचने की कोशिश कर रहा था की ‘कम्बख्त, ये सब मुझे क्यो नही याद है…’
मॉम ने आगे कहा : “और सोनू तो मेरा दूध पीते हुए अपना एक हाथ जब तक मेरी नाभि में नही घुसाता था तब तक चैन से दूध नही पीता था…एक तरफ उसके पैने दाँत और दूसरी तरफ नाभि पर नर्म उंगलियाँ मुझे कितना परेशन करती थी, ये मैं नही बता सकती…”
सोनिया दी एकदम से मॉम के और करीब आई और बोली : ” चलो, आज बता देना, की वो सब करने से क्या फील होता था आपको…”
इतना कहते हुए उसने मॉम के ब्लाउज़ के बटन खोलने शुरू कर दिए….
मुझे तो विश्वास ही नही हो पा रहा था की सोनिया सच में ऐसा कर रही है.
अभी तक उनकी बाते सुनकर यही लग रहा था की एक माँ अपनी बेटी से अपनी अतरंग बाते और पुरानी यादे ताज़ा कर रही है…
पर यहाँ तो सच में कुछ होने जा रहा था
जो उनके बीच की वो सब दूरिया भी कम करने वाला था
जिसे जनरेशन गेप कहते है..
सोनिया ने तो उनके ब्लाउज़ के बटन खोलकर वो जनरेशन गेप अपनी तरफ से ख़त्म कर दिया था
और मैं मान रहा था की शायद सोनिया को अभी इन बातों की ज़्यादा समझ नही है और अपनी उत्तेजना के आवेग में बहकर वो ऐसा कर रही है.
पर मॉम तो समझदार है ना
वो भला क्यो उसे मना नही कर रही..
वो क्यों अपनी खुद की बेटी के साथ ऐसे संबंध बनाना चाहती है
जो दुनिया की नज़र में तो ग़लत है ही
इस वक़्त मेरी नज़र में भी ग़लत है.
पर मॉम और सोनिया दी के मन से शायद ये आवाज़ नही निकलती थी की ‘ये ग़लत है’ इसलिए सब कुछ बड़े आराम से होता जा रहा था.
मॉम के ब्लाउज़ के पाट खुलते ही उनकी वाइट ब्रा में क़ैद मुम्मो के साक्षात दर्शन हो गये ..
एकदम कसे हुए और बड़ी मुश्किल से समाए हुए थे उनमें वो…
सोनिया दी ने पीछे हाथ करके उनकी ब्रा के हुक्स भी खोल दिए और ब्रा ढीली होते ही उसने बड़ी तेज़ी से दोनो कपड़ों को एकसाथ नीचे खींच कर निकाल दिया, जैसे कोई ठरक चढ़ चुकी हो उसमें….
और उसके बाद जो नज़ारा मेरी और सोनिया दी की आँखो के सामने आया उसे मैं तो जिंदगी भर भूल ही नही सकता…
इतने बड़े बड़े…
इतने मोटे मोटे
एकदम वाइट
और लाल-2 निप्पल
ऐसे मोम्मे तो मैने आज तक ब्लू फ़िल्मो में भी किसी के नही देखे थे..

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”उफ़फ्फ़ माँ…. तुम तो काम की देवी लग रही हो इस वक़्त…क्या मोम्मे है तुम्हारे….वाउ….”
और सोनिया दी तो पागल ही हो गयी…
उन्हे तो और भी बड़े लग रहे थे वो,एकदम पास जो खड़ी थी उनके…
मॉम ने अपने मोटे-2 मुम्मो को सोनिया दी के बूब्स पर ज़ोर से मसला

उसके निप्पल्स पर अपने निप्पल्स लगाकर अपने साथ-2 उसे भी उत्तेजना के उस शिखर पर पहुँचा दिया जिसके लिए वो दोनो ना जाने कब से तड़प रहे थे.
और सोनिया ,बिना कुछ बोले , मॉम को धक्का देते हुए बेड तक ले गयी और उन्हे उसपर गिरा दिया…
और अपना मुँह सीधा उनके दांये मोम्मे पर लगाकर उस लाल सुर्ख शहतूत के दाने को अपने मुँह में भर लिया और ज़ोर-2 से सक्क करने लगी.
मॉम की आँखे बंद हो गयी
एक हाथ से उन्होने सोनिया का सिर दबोच कर अपनी छाती से लगाया और दूसरे हाथ से बिस्तर की चादर को कस कर जकड़ लिया और ज़ोर से चिल्लाई
”उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ सोनिया……………. उम्म्म्मममममममममम मममममम धीरे बेटा….धीरे……दर्द होता है…….अहह”
पर वो अब रुकने वाली नही थी
आख़िर थी तो मेरी ही बहन ना…
मेरा जब उन्हे देखकर ही इतना बुरा हाल हो रहा था तो उसका क्या हो रहा होगा…
वो अपने मुँह में भरकर उन बूब्बो को निचोड़ने में लगी थी.

और फिर उसने अपना हाथ उनके नंगे पेट पर रखकर उनकी नाभि में घुसा दिया…
वो और बुरी तरह से तड़प उठी.
निप्पल और नाभि पर हुए एकसाथ प्रहार को महसूस करके उन्हे शायद अपनी जवानी के वही दिन याद आ गये जब वो मुझे और सोनिया दी को दूध पिलाया करती थी.
सोनिया यही नही रुकी
उसके हाथ नीचे की तरफ सरके और उसने मॉम के पेटीकोट का नाड़ा खोल कर उसे भी नीचे खिसका दिया, नीचे उन्होने एक ब्लैक कलर की पेंटी पहनी थी जो उनकी चूत से निकल रहे रस से नहा चुकी थी….
और उस कच्छी को उतारकर सोनिया ने वो काम किया जिसकी मुझे भी आशा नही थी…
सोनिया ने उसे बड़ी ही बेदर्दी से नॉचकर उतारा और उसे घुमाकर मेरी तरफ उछाल दिया.
सोनिया को शायद मेरा भी ख़याल था
वो कच्छी उस अलमारी के दरवाजे से टकराकर नीचे गिर पड़ी, जिसमें मैं खड़ा होकर वो सब देख रहा था…
उनकी चूत से निकल रहे रस की खुश्बू इतनी तेज थी की मेरे नथुने फड़फडा उठे…
और मैने नीचे बैठकर, दरवाजा हल्का सा खोलकर उस कच्छी को अंदर ले लिया.
ऐसा लगा जैसे मैने उसे पानी के टब से निकाला है…
इतनी गर्म और गीली थी वो.


