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सोनिया ये सुनकर अटपटा सी गयी और बोली : “वो….ना….नही मोंम …बस ऐसे ही…..उम्म्म….’

सोनिया दी ने जो आख़िर में सिसकी ली वो शायद बाहर माँ ने भी सुनी पर उसे अनदेखा करती हुई वो बोली : “अच्छा …ठीक है…सोनू कहा है…उसे स्कूल के लिए देर हो रही है…”

सोनू भला कहाँ मिलता, वो तो इस वक़्त अपनी बहन की चूत मारने में बीज़ी था..

सोनिया : “मोंम …आज तो वो सुबह जल्दी स्कूल चला गया….बोल रहा था की फुटबॉल प्रेक्टिस है आज….”

उसका ये सफेद झूट सुनकर मेरी भी आँखे फटी रह गयी…. और मैं रुक गया
पर मेरे रुकने से वो फिर से मुझे धक्का देकर फिर से चूत मारने को कहने लगी..
और सच कहूँ दोस्तो, उस वक़्त सोनिया दी का ऐसा करना मुझमें एक अलग ही तरह का रोमांच भर गया…एक थ्रिलिंग भरा एहसास था वो…

मोंम : “ओह्ह ….ठीक है….वो चला गया तो क्या हुआ…तू दरवाजा तो खोल…कुछ बात करनी है…”

सोनिया दी ने लड़खड़ाती हुई सी आवाज़ में कहा : “ओह….नो…नो मोंम ….आप…अभी यहाँ से जाओ…..मैं आती हूँ नीचे….कुछ देर मे….”

मोंम भी जिद्दी थी , वो बोली : “नही….मैने कहा ना…मुझे कुछ बात करनी है….खोलो अभी के अभी…”

सच में बड़ा ही रोमांचक दृशय था…
सोनिया दी बाथरूम के दरवाजे पर घोड़ी बनकर मुझसे चुदवा रही थी और थोड़ी ही दूर, दरवाजे के पीछे हमारी मोंम दरवाजा खड़का रही थी…
मेरे धक्के मारने की स्पीड थोड़ी और तेज हो गयी….
पूरे कमरे में सोनिया दीदी की हल्की सिसकारियाँ गूँज रही थी….
मैं तो दम साधे बस झटके मार रहा था.

मॉम के भी कान खड़े हो गये, सोनिया दी की हल्की सिसकारियाँ सुनकर

वो बोली : “तुम नहा रही हो या कुछ और कर रही हो….?”

सोनिया दी के लार टपका रहे होंठों से बड़ी मुश्किल से निकला : “हाँ मॉम …नहा ली हूँ बस….कपड़े निकाल रही हूँ ….”

उधर मोंम के चेहरे पर एक रहस्यमयी सी मुस्कान आ गयी…
वो धीरे से बोली : “ओके … ओके …टेक योर टाइम….ये सब तो नेचुरल है इस ऐज में …कर लो आराम से…”

ओ तेरी….
इसका मतलब मोंम ने समझा था की सोनिया दी मास्टरबेट कर रही है…

हा हा

मेरी तो हँसी निकल गयी…
पर दबी हुई सी…
क्योंकि मोंम को ज़रा सा भी एहसास हो गया की मैं अंदर ही हूँ तो सब गड़बड़ हो जाएगा…

पर मैने ये एहसास नही होने दिया और मैं अपने काम में लगा रहा.

और सोनिया भी शरमाने की एक्टिंग सी करती हुई बोली : “क्या मोंम ….आप भी ना….अहह”

और उसने एक बार फिर से सिसकारी मारकर खुद ही ये जता दिया की मोम का अंदाजा सही है.

इसी बीच सोनिया दी ने मेरे लंड को बाहर निकाल कर अपनी गांड का रास्ता दिखा दिया…
पहले भी उनकी गांड में मेरा लंड जा चुका था इसलिए दोबारा डालने में ज़्यादा तकलीफ़ नही हुई…
और गांड भीगी होने की वजह से वो ज़्यादा ही चिकनी हुई पड़ी थी
लंड को उसकी टनल मे घुसने में ज़्यादा तकलीफ़ नही हुई…
मेरा लंड सरसराता हुआ अंदर घुसता चला गया..

सोनिया दी ने अपनी खाली हुई चूत में 4 उंगलियाँ एक साथ ठूस कर उसे भी मसलना चालू रखा और अपनी गांड में मिल रही अंदरूनी सिकाई को महसूस करके वो सिसकारी मारने लगी..

मोंम वो सिसकारी सुनकर समझ गयी की वो झड़ने के करीब है…
माँ बेटी के बीच का ये प्यार भरा एंगल तो मैने आज ही नोट किया था..
ऐसा लग रहा था की मोंम और सोनिया दी पहले भी इस तरह से ओपन्ली बाते कर लेती थी..

मैं भी झड़ने के करीब पहुँच गया था…

मैं थोड़ा आगे झुका और सोनिया के कान को अपने मुँह मे भरकर धीरे से कहा : “दी…..आई एम् एबाउट टू कम…..”

वो भी फुसफुसाई : “उम्म्म्मम……कम इनसाइड मी सोनू….कम इनसाइड मिईीईईई”

उनके कहने का तरीका ही इतना सैक्सी था की मैं अपने आप को और रोक ही नही पाया…
और ताबड़तोड़ तरीके से उनकी गांड में झड़ता चला गया…

”ओफफफफफफफ्फ़……….फकककककककककक”

और मेरे लंड का शहद अपनी गांड में समेट कर वो ज़ोर से कसमसाई

”आआआआआआआआहह एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स…. फकककककककक”

और ये शायद उसने मोंम को सुनाने के लिए ही बोला था….

मेरे पास अब आराम करने का समय नही था….
मैने जल्दी से अपना लंड बाहर निकाला…
पास पड़े टावल को पानी में भिगो कर अपने लंड और सोनिया दी की बह रही गांड के छेद को सॉफ किया…
टावल से उनकी चूत को भी अच्छी तरह से सॉफ करके मैने उन्हे दे दिया, जिसे उन्होने अपनी बॉडी पर लपेट लिया…

मैं पहले ही सोच चुका था की मुझे क्या करना है…
मैं भागता हुआ सा एक पुरानी अलमारी के अंदर घुसा और उसे अंदर से बंद कर लिया..

कमरे और बाथरूम की हालत सही करके सोनिया दी ने दरवाजा खोल दिया…
मोंम मुस्कुराती हुई सी अंदर आ गयी…
उनको देखकर सॉफ पता चल रहा था की वो आज कुछ ख़ास बातचीत करने के मूड में है…

वैसे भी मॉम के हिसाब से तो मैं घर पर था ही नही
स्कूल जा चुका था
इसलिए वो दोनो खुलकर बाते करने वाले थे…

और मैने ये सब अलमारी के अंदर छुपकर सुनने का निश्चय कर लिया, मुझे भी आख़िर जानना था की दोनो माँ-बेटी किस हद्द तक फ्रेंक है..

मॉम : “सो….कैसा रहा….”

माँ ने आँखे नचाते हुए जब ये पूछा तो सोनिया दी ने शरमाते हुए अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया…
अलमारी की दरार से मैं उन्हे देख पा रहा था…

दोनो के चेहरे के एक्शप्रेशन ऐसे थे जैसे दो पुरानी सहेलियाँ कुछ नमकीन बातें कर रही है..

सोनिया : “मोंम …आप भी ना…बस भी करो…”

मोंम : “ओके … मैने तो पहले भी कई बार तुम्हे ये बताया है की इट्स नॅचुरल….मैं भी अपनी हॉस्टिल लाइफ में मास्टरबेट करती थी…इन्फेक्ट ये करना ज़रूरी है…हमारी बॉडी के हार्मोंस के लिए…”

माँ द्वारा दी जा रही ये शिक्षा मुझे आश्चर्यचकित कर गयी…
पापा ने तो कभी मुझे ऐसा नही बोला की बेटा मुट्ठ मारा करो, ये तुम्हारी सेहत के लिए सही है…
मेरे तो मन में आया की काश मैं भी लड़की होता, माँ मुझे भी ऐसी अच्छी वाली बातें सिखाती.

फिर माँ ने वो किया जिसकी मुझे तो क्या, शायद सोनिया को भी उम्मीद नही थी..

मोंम ने थोड़ा आगे आकर सोनिया दी की ब्रेस्ट को पकड़ लिया…
और उसे दबाकर , नीचे हाथ लगाकर उसे परखने लगी…
जैसे मार्केट से कोई फ्रूट लेने आई हो.

सोनिया : “मोंमsssss ….ये क्या कर रहे हो…”

मॉम : ”मैं कई दिनों से नोट कर रही हूँ की ये पहले से ज़्यादा बड़े हो गये हैं…और थोड़े भारी भी…”

मैं मुस्कुरा दिया…
आख़िर मेरा ही तो कमाल था ये जिसका गुणगान इस वक़्त माँ कर रही थी.

सोनिया : “सो वॉट मोंम … आजकल छोटी ब्रेस्ट वाली लड़कियो को कोई देखता भी नही है…इसलिए डेली इनकी मसाज करती हूँ मैं …इनफॅक्ट अभी वही करने वाली थी की आप आ गये…”

मोंम : “और इससे पहले तुमने कहाँ की मसाज करी थी…”

मोंम की बात सुनकर , इस बार शरमाने के बदले वो भी बड़ी बेशर्मी से उनके हाथ को अपनी चूत पर रखती हुई बोली : “यहाँ की….खुश…यही सुनना चाहती थी ना आप…”

मोंम : “हा हा….तुम अभी भी वैसी ही हो, ज़रा सी बात पर चिढ़ जाती हो….”

सोनिया : “नही मोंम …मैं चिढ़ नही रही..वो बस…इतने दिनों के बाद आपसे इस तरह की बात हो रही है तो थोड़ा ऑकवर्ड सा लग रहा है…अब मैं बड़ी हो गयी हूँ …”

मोंम ने उसे अपनी छाती से लगाते हुए कहा : “माँ के लिए बच्चे हमेशा छोटे ही रहते हैं… वैसे, ज़रा मैं भी तो देखु की मेरी बेटी कितनी बड़ी हो गयी है…”

इतना कहते हुए उन्होने सोनिया दी का टावल खींच कर निकाल दिया…
सोनिया को रिएक्ट करने का मौका ही नही मिला…
पर उसकी बॉडी लॅंग्वेज से पता चल रहा था की उसे इस बात से ज़्यादा फ़र्क नही पड़ रहा ..
क्योंकि उसके बाद उसने मॉम से टावल वापिस लेने की जिदद नही की.

अब सोनिया दी मोम के सामने नंगी खड़ी थी

मेरा लटका हुआ लंड फिर से अकड़ने लगा , और इस बार सोनिया दी के नंगे बदन को देखकर नहीं बल्कि मॉम को ऐसा करते देखकर।।।।

मैं उन्हें देख भी रहा था, और उनके बारे में गंदे ख्याल ना आएं उनसे बचने के लिए अपना तकिया कलाम भी दोहरा रहा था

”ये गलत है , ये गलत है ”

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