चाँदनी का पूरा शरीर सागर की लहरो जैसे उपर नीचे हो रहा था…ख़ासकर उसकी छातियाँ..
सोनू की नज़रें जब उसकी उठती गिरती छातियों पर गयी तो वो तड़प भरी आवाज़ में बोली : “अब क्या देख रहे हो तुम….”
अब तो सोनू भी उसका खेल समझ चुका था…
वो उसकी शराबी आँखो में देखता हुआ बोला : “तुम्हारे बूब्स….”
वो फिर से कांपती हुई आवाज़ में बोली : “पसंद आए क्या ये तुम्हे …?”
सोनू : “हां ….बहुत….”
जैसा चाँदनी ने पिछली बार किया था, वैसा ही उसने इस बार भी किया…
वो आगे आई और सोनू के चेहरे को अपनी छातियों में दबा कर भींच लिया…
नर्म तकिये जैसा एहसास हुआ सोनू को…
पॉलीफिल फ़ैसी नर्म छातियों ने उसके चेहरे को दबाकर एक अलग ही दुनिया में पहुँचा दिया.
सोनू के हाथ उसकी नंगी पीठ पर घूम रहे थे…और तभी उसके हाथ में उसकी चोली की डोरी आ गयी.
चाँदनी उसके कान में फुसफुसाई : “खींच दो इसे…”
सोनू तो पहले भी यही करने वाला था
चाँदनी के कहने की देर थी और उसने डोरी को खींच दिया…
एक ही गाँठ लगी हुई थी पीछे, जिसने उसकी चोली को बाँधकर उसके जोबन को संभाला हुआ था..
और डोरी खुलते ही उसकी चोली ढलक कर नीचे गिरने को हो गयी…पर उसके हिम पर्वत ज्यों के त्यों खड़े रहे.
फिर उसने धीरे-2 अपनी चोली खुद ही निकाल दी…और फिर जो सोनू ने देखा, शायद ही किसी ब्लू फिल्म में भी देखने को मिले…
इतने गोरे-चिट्टे और बड़े मुममे ठीक उसकी आँखो के सामने थे…
और उनपर लगे हुए लाल रंग के अनार दाने तो कमाल के थे…
कुल मिलाकर उसकी छातियाँ किसी धमाल से कम नही थी…
चाँदनी ने उसके हाथ पकड़कर अपनी छातियों पर रख दिए और कसमसाकर बोली : “कैसे लगे ये….ह्म्म्म …..बोलो ना….”
अब ये भी कोई पूछने वाली बात थी
वो खुद जानती थी की उसके जैसे बूब्स शायद ही किसी और लड़की के होंगे
पर शायद वो ऐसा पूछकर अपनी तारीफ सुनना चाहती थी.
और वो भी दिल खोलकर..दोनो हाथों से
उसने अपने हाथ उनपर रखे और हाथ के अंगूठों से उसके अनार दानों को कुरेदने लगा..
वो तो पहले ही अपने पूरे आकार में आ चुके थे, पर सोनू के इस सेंसुअल टच से वो और ज्यादा निखर कर बाहर आ गये.
चाँदनी उसकी कलाकारी को देखकर कसमसाने के सिवा कुछ और कर ही नहीं पाई.
उसने अपने पंजों को उसने नर्म मुलायम छातियों पर दबाया और उन्हे ज़ोर-2 से दबाने लगा….
ऐसा लग रहा था जैसे पानी से भरे रबड़ के गुब्बारे को भींच रहा है वो…
सोनू जितनी ज़ोर से उन्हे भींचता, चाँदनी को उतना ही मज़ा मिलता…
और वो उतनी ही ज़ोर से चिल्लाती…
”आआआआआआआआआआहह…….उऊऊऊ फकककर…….अहह……खा जाओ इन्हे…..सोनू…..अहह……..बाइट मीssssईsssssss……….. सक इट……… फील इट ….आआआआआआआहह”
फिर तो सोनू टूट ही पड़ा अपने दाँत लेकर उनपर….
अपने दांतो के नीचे जब उसने उसके पफ़्फ़ी से निप्पल्स को दबोचा तो वो अपने पंजों पर खड़ी होकर उसके मुँह से उन्हे निकालने की कोशिश करने लगी…
पर सोनू पर तो जैसे उन अंगूर के दानो का नशा चढ़ चुका था..
उन्हे दाँतों से दबाने के बाद उसे ऐसा एहसास हुआ जैसे शराब की बूंदे निकल कर उसके मुँह में आ गयी है…
बस, फिर तो चाँदनी की लाख कोशिशों के बाद भी उन्हे छोड़ने पर राज़ी नही हुआ वो..
और आख़िर में जब उन्हे छोड़ा तो उसकी साँसे फूल चुकी थी…
शायद चूसने के चक्कर में साँस लेना भी भूल गया था सोनू.
चाँदनी ने उसके चेहरे को उपर किया और उसके होंठों पर होंठ लगाकर उसे ऑक्सिजन देने लगी…
दोनो एक दूसरे के होंठों को बुरी तरह चूस रहे थे….
चाँदनी के बूब्स से भी सॉफ्ट थे उसके होंठ…
और एकदम स्ट्रॉबेरी जैसे मीठे…
वो काफ़ी देर तक उन्हे चूसता रहा और अपने हाथों से उसकी कड़क और मोटी गांड को भी दबा रहा था वो…
चाँदनी ने किस्स तोड़ी और उसकी आँखो में देखते हुए बोली : “ये भी पसंद है तुम्हे…?”
वो अपनी गांड की बात कर रही थी, जिसे सोनू बुरी तरह से मसलने में लगा था…
सोनू बेचारा हकला कर रह गया उसे जवाब देते हुए : “ह …हन….हन….हाँ… ”
और वही हुआ…
जैसा उसने सोचा था…
वो पलटकर अपनी गांड उसकी तरफ घुमा कर खड़ी हो गयी और उसे पीछे करते हुए उसने सोनू के चेहरे से छुवा दिया और अपने हाथ पीछे करते हुए चाँदनी ने उसके चेहरे को पकड़कर ज़ोर से अपनी गांड में दबा कर भींच लिया..
सोनू के लिए ये एहसास थोड़ा अलग था…
उसकी गांड थोड़ी सख़्त थी, पर मुलायम भी थी…
उसके बूब्स का एहसास पिल्लो जैसा था तो गांड का एहसास रज़ाई जैसा लगा उसे…
थोड़ी और बड़ी…
थोड़ी और सख़्त..
पर नर्म और गर्म उतनी ही.
वो अपना चेहरा उसपर रगड़ ही रहा था की उसके चेहरे और गांड के बीच का परदा नीचे गिर गया…
चाँदनी ने अपने लहंगे का नाडा खोल दिया था, और वो भारी लहँगा एकदम से नीचे आ गिरा…
सोनू के होंठ उसके नर्म चूतड़ों पर आ लगे…
उसने एक ट्रांसपेरेंट थोंग पहना हुआ था…
आगे की तरफ एक पेच था और पीछे की डोरी गांड की गहराई में धँसी हुई थी.
वो घूम कर उसकी तरफ खड़ी हो गयी, और अपने बूब्स को उछाल कर सोनू को दिखाने लगी
इस वक़्त वो सिर्फ़ एक छोटी सी पारदर्शी कच्छी में खड़ी थी उसके सामने…
और दूसरी तरफ सोनू अभी तक सूट बूट में बैठा हुआ था ..
चाँदनी ने उसके हाथ पकड़ कर अपनी थोंग के दोनो तरफ लगाए और उसका साथ देते हुए उसने वो एकमात्र कपड़ा भी अपने जिस्म से अलग कर दिया…
धीरे-2 वो रेशमी पेंटी उसकी मखमली टाँगों से फिसलकर नीचे जा गिरी..
और अब वो उसके सामने पूरी की पूरी नंगी खड़ी थी..
हालाँकि उसकी कमसिन बहन सोनिया के सामने वो कुछ भी नही थी, पर नंगी होने के बाद हर लड़की खूबसूरत ही लगती है..
इसलिए सोनू भी इस वक़्त उस चाँदनी के बदन की दमकती रोशनी में खो सा चुका था…
और जब वो उसकी तरफ पलटी तो एक पल के लिए वो साँस लेना भी भूल गया उसके नंगे बदन को देखकर..
अभी कुछ देर पहले ही वो उससे पहली बार मिला था और अब वो उसके सामने इस तरह से नंगी खड़ी थी
इसका मतलब सॉफ था
वो अपने भाई की शादी पर मिले इस मौके को पूरी तरह से एंजाय करना चाहती थी.
और अब उसने पहली बार उसकी नंगी चूत को देखा…
जो एकदम सफाचट थी…
शादी उसके भाई की थी पर तैयारी उसने कर रखी थी चुदने की.
उसकी चूत के चेहरे पर चमक रही बूंदे देखकर सोनू के मुँह में पानी आ गया..
वो फिर बोली : “ये पसंद आई तुम्हे….”
सोनू ने मुस्कुराते हुए एक बार फिर से हाँ कर दी…
बस, फिर क्या था..
चाँदनी ने उसे बेड पर धक्का दिया और कूदकर उसके उपर चढ़ गयी…
और सीधा आकर वो उसके मुँह पर बैठ गयी….
और अपनी चूत के नर्म होंठों को उसके होंठों पर रगड़ते हुए बोली : “देन….सक मीssss ……चूसो मुझे…..चाटो ……ज़ोर से….आहह….”
सोनू तो अब इस कला में पूरी तरह से पारंगत हो चुका था…
इसलिए एक और नयी चूत को मुँह में लेकर जब उसने उसे चुभलाना शुरू किया तो वो ऐसे मचलने लगी जैसे उसकी चूत में किसी ने बिजली की नंगी तार डालकर बटन ओंन कर दिया हो…
उसके मचल रहे जिस्म और मुँह से निकलती आवाज़ों को सुनकर सॉफ पता चल रहा था की उसके अंदर उसकी लाइफ के बड़े ओर्गास्म का निर्माण हो रहा है….
”आआआआआआआआआआहह उउ सकर…..आआआआआहह सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स…… यू आर सोओ गुडssssss ….. सोनू……. ज़ोर से चाटो …इसे….. साक्षी सही कहती है, तुम्हारे लिप्स में जादू है…..अहह…… ऐसे ही सक करो…..मुझे…..अहह… ज़ोर से………..”
और इतना कहते-2 अचानक उसका पूरा शरीर काँपने सा लगा…
जैसे उसके अंदर कोई सूनामी आ गयी हो…
और वो सूनामी उसकी चूत के रास्ते बाहर निकल आई.
”आआआआआआआआआआहह सोनू………………….आई एम कमिंग…आई एम कमिंग…”
एक जोरदार आवाज़ के साथ उसकी पुसी से ढेर सारा रज्ज निकल कर सोनू के चेहरे को भिगो गया….
और वो थर -2 कांपती हुई सी साइड में गिरकर गहरी साँसे लेने लगी..
अब आलम ये था की
सोनू अभी तक पूरे कपड़ों में
बेड पर लेटा हुआ था
और उसका लंड पूरा खड़ा था…
पूरी नंगी होकर………..
झड़कर…………………………
अपने मज़े लेकर………………….
एक तरफ लुढक चुकी थी.
और बड़ी ही प्यार भरी नजरों से उसे देख रही थी
पर इसका मतलब ये नही था की उसे सोनू की चिंता नही थी.
अभी भी उसके पास काफ़ी टाइम था….
अपनी साँसों को काबू में करने के बाद वो साँप की तरह सरक कर उसके करीब आई और उससे लिपट कर उसके चेहरे पर लगे अपनी ही चूत के रस को अपनी जीभ से सॉफ करके निगलने लगी…
और सोनू के चेहरे को अच्छी तरह चमकाने के बाद चाँदनी ने तिरछी नज़र से उसके लंड की तरफ देखा…
सोनू उसी के अंदाज में बोला : “पसंद है क्या वो तुम्हे….ह्म्म्म्मम बोलो”
जवाब में चाँदनी मुस्कुरा दी….
एक बार फिर से वो खेल शुरू होने वाला था.









