रमेश फुल कॉन्फिडेंस में अरुन के रूम में था की नीतू के होते हुए सरला और अरुन कुछ नहीं करेंगे।
पर बेचारा।
और किस करने के बाद अरुन सरला और नीतू को प्लान बताता है की किस तरह प्रीति और परी का बैंड बजाना है।
नीतु प्रीति को आवाज़ देती है।
और प्रीति रूम में आ जाती है और सरला रूम से बाहर और नीतू बाथरूम जाने का बोलकर बाथरूम में घुस जाती है और अरुन और प्रीति अकेले रह जाते है
और इधर परी रात भर के सफर से थक गई थी तो वो सो गई ।
और सरला रमेश के पास आ कर
चलो एक सीन दिखाऊँ।
और रमेश जब अपने रूम में झाकता है तो अंदर
अरून प्रीति को बुरी तरह मसल रहा था।
और प्रीति अरुन के लंड को पकड़ कर मसल रही थी।
प्रीति: आआह्ह्ह्हह्ह बहुत तडपी हु बेचारे ले लिए और अरुन के सामने अपने घुटनो पे बैठ जाती है और अरुन के लंड को पेण्ट से बाहर निकाल कर चुसने लगती है।
बाहर सरला
क्या देख रहे हो।
रमेश बुरी तरह पागलो की तरह अंदर देख रहा था।
की उसकी छोटी बहन उसके बेटे के लंड को चूस रही थी।
अंदर।
अरुण:बुआ नीतू आ जायेगी।
प्रीति: उउउउउउउह डिस्टर्ब मत कर आ जायेगी तो उसे भी पकड़ कर चोद देना और दोबारा लंड चुसने लगती है।
अरुण: आआआ आ आप तो बोल कर गई थी इस बार जब आओगी तो रानी की भी दिलबाओगी।
प्रीति: हाँ में सर हिलाती है।
और लंड को मुह से निकाल कर।
पहले उसकी माँ को तो ठण्डा कर। बेटी की तो दिला दूंगी इसीलिए लाई हूँ।
और अब कोई सवाल नहीं। पहले गला तर करने दे अपने अमृत से।
और लंड चुसना शुरु कर देती है।
बाहर रमेश आंखे फाड़ कर देख रहा था।
सरला: अब क्या अपनी बीवी की तरह बहन को चुदते देखोगे।
पर रमेश कुछ नहीं सुनता।
अंदर
प्रीति सटासट अरुन के लंड को चुसे जा रही थी।
अरुण: आआआआ बुआ मेरी एक इच्छा है।
प्रीति: क्या।
अरुण: की आप को और परी दी को एक साथ एक ही बेड पे पूरा नंगा कर के चोदुं।
प्रीति: लंड चुसती रहती है।
और प्रीति की बेरहम चूसाई से अरुन प्रीति के मुँह में जल्दी झड जाता है।
और प्रीति अरुन का लंड का सारा पानी पी जाती है।
और चाट कर साफ़ करने के बाद मुह से निकालती है।
प्रीति: साथ तो चुदाना पड़ेगा क्यों की परी तेरे मुसल को अकेले झेल नहीं पायेगी उसे मेरी ज़रूरत पड़ेगी। मैं ही तेरे मुसल को अपने हाथों से पकड़ कर परी की चुत में डालूँगी और अपनी गाण्ड में भी ।जो पिछ्ली बार रह गई थी।
अरुण: परी दी की गाण्ड भी।
प्रीति: हाँ बाबा पहले उसकी माँ की तो मार ले एकदम कुंवारी सील पैक गाण्ड फिर बेटी की भी दिला दुँगी।
अरुण: पर पापा तो घर पे है।
प्रीति ; उन्हें छोड़ उनका इन्तज़ाम हो जाएगा।
तभी नीतू बाथरूम से बाहर आ जाती है।
बाहर रमेश अरुन के रूम में सरला के साथ
रमेश सर पकड़ कर बैठा था।
सरला: क्या हुआ।
रमेश: वो तो खुद………
सरला: वही तो…….. किस किस को रोकोगे।
करने दो जो कर रहा है जब वो खुद चुदने के लिए आई है।
तो तुम कबाब में हड्डी क्यों बन रहे हो।
मज़ा लेने दो उन्हें और तुम क्या कहते हो।
वोयेगेरिसम उसका मजा लो चुत तो चुत होती है ।
मा की हो बेटी की हो बहन की हो चुदती तो लंड से ही है।
और तुम्हे पता है की अरुन का लंड कितना दमदार है।
तुम्हारी खानदान की हर औरत को चोद कर खुश रख सकता है और माँ भी बना सकता है।
और रमेश के काँधे पे हाथ फेर कर।
सिर्फ एन्जॉय करो अपने बेटे के द्वारा की गई चुदाई को।
अल द बेस्ट पास्ट हब्बी ।मैं जा रही हु प्रेजेंट हब्बी के पास फिर से चुदने और तुम्हारी बहन और भांजी है ।
तुम्हारी बेटी नीतू है नीतू भी अरुन से चुद चुकी है।
और अरुन की नंबर २ रांड है ।पहला नंबर मेरा है
ये सब देख के रमेश की आंखे फटी की फटी रह जाती है।
सरला रमेश के पास से अरुन के पास आ जाती है।
वहाँ पे प्रीति नीतू और अरुन थे परी सो रही थी।
अरून झड़ने के बाद बेड पे लेट गया था।
सरला: अरुन तुम लेटे क्यों हो।
प्रीति: वो थोड़ा थक गया है।
सरला: क्यों ऐसा क्या किया इसने।
प्रीति: इसने नहीं मैंने किया है।
सरला: क्या किया इसने अरुण।
अरुण:माँ वो ।
सरला:क्या वो
प्रीति: मैं बताती हु।
मैने इसका पानी निकाला है।
सरला: मतलब
प्रीति: वही जो एक लड़की एक लड़के के साथ करती है।
लंड चुसाई।
सरला: दी तुम नहीं सुधरोगी।
प्रीति: अब सुधरने की उम्र नहीं है भाभी।
सरला: अच्छा अब चुप करो , तुम्हारे भाई घर पे है।
प्रीति: तो क्या फ़र्क़ पड़ता है।
सरला:अगर वो आ गये तो।
प्रीति: बात तो सही है कुछ इन्तज़ाम करना पडेगा
पर भाभी आप ने कुछ किया या अभी तक सिर्फ देखा है।
सरला: अरुन की ओर देखते हुए जैसे पूछ रही हो की बता दे।
और अरुन हाँ में सर हिलाता है।
सरला: जब ननद ने ले लिए तो मैं कैसे मना करती
रूम में तो बोल कर गये थी की मस्त है।
प्रीति: सच भाभी
सरला: हाँ
पर अब प्रॉब्लम हो गई है।
प्रीति: क्या हुआ।
सरला: वो तुम्हारे भाई को पता चल गया है।
प्रीति: क्या कह रही हो
और सारी बात प्रीति को बता देति है
प्रीति: भाभी तुम ने हमारी बात क्यों बताइ।
सरला: और क्या करती कब तक तुम्हारे भाई के झूठ को बरदास्त करती।
पहले प्यार नहीं किया फिर झूठी कहानी बनाइ।
मै मज़बूर हुई अपने बेटे से रिश्ता बनाने कै लिए उनकी बजह से।
ओर उन्होंने मुझसे फिर झूठी कहानी बनाइ।
ओर दी अगर आप को अरुन से प्यार है और आप को मज़े लेने है तो अपने भाई से डरने की क्या ज़रूरत है
अब मैं भी नहीं डरती और जो करना है खुल के करती हूँ।
ओर आगे भी करुँगी और अरुन के पास जा कर उसके लंड को मसल देति है।
अरुण: आआआह मैंने क्या किया जान।
सरला: कुछ नहीं मेरे बच्चे और झुक के अरुन के लंड को किस कर देती है।
प्रीति: क्या बात है भाभी।
माँ हो तो ऐसी ,अगर सब के पास ऐसी माँ हो तो उसे किसी और की क्या ज़रूरत ।
जब एक माँ अपने बेटे को अपने पति के सामने प्यार कर सकती है तो एक बहन को शरमाने की क्या ज़रूरत
और सरला के पास आ कर अरुन के लंड को मसल देती है।
अरुण: आआआअह्ह अब आप को क्या हुआ
और तभी नीतू भी आ कर अरुन के लंड को पकड़ कर मसल देती है।
अरुण:सिसकते हुए एक काम करो इसे उखाड लो और जो करना है करो।
सरला: नीतू आराम से बेटा ।
मेरे बेटे का लंड है कोई बबल गम नहीं की जिसका मन किया उसे खींच दिया ।
और अरुन को अपनी बाँहों में ले लेती है।
और ये सब तो मज़े ले रहे थे और बाहर हमारे रमेश बाबू अपना माथा पीट रहे थे की उनसे इतनी बड़ी गलती कैसे हो गई जो उसने अपने बेटे को अपनी बीवी चोदने दी।
और उसी का नतीजा है की आज उसके घर में खुला ग्रुप सेक्स लाइव चल रहा था।
अंदर
सरला प्रीति से
सरला: पर परी की कैसे दिलबाओगी मेरे राजा को
प्रीति: भाभी आप उसकी चिंता मत करो आप को मैं उसकी भी अपने भाई को दिखा कर ही उसकी चुत का उद्घाटन करवाऊँगी।
बहुत तड़प रही है मेरी बेटी उसका पति तो कमाने के चक्कर में दुबई में बेठा है और मेरी बेटी यहाँ एक अच्छी चुदाई के लिए तड़प रही है।
सरला: हाँ तो देर किस बात की है बुला लो उसे भी और शामिल कर लो उसे भी हमारी रांडो की गैंग में।
अरुन की रांड नम्बर ४।
प्रीति: हाय भाभी तुम कितनी गन्दी हो गई हो रांड बोल रही हो अपने आप को।
सरला: क्या करुं दी ये मेरा बेटा है न अरुन इसने अपने लंड की चुदाई से अपना दिवाना बना लिया है।
और इसे सब को अपनी रंडी बनाने का शौक़ है ।
मै रांड नम्बर १ नीतू नंबर २ तुम नंबर ३ और परी अब नंबर ४ जो बनने के लिए बेकरार है।
प्रीति: अच्छा अरुन को देखते है तो साहब को रांड पसंद है।
अरुण:हाँ मेरी रांड नंबर ३ चल अब फटाफट बुला अपनी बेटी को।
जल्दी से चोद कर उसे भी टाइटल दे दू रांड नम्बर ४।
और इस खानदान की एक और औरत मेरी रांड बनेगी।
प्रीति: ज़रूर मेरे राजा और उठ कर बाहर आने लगती है और रमेष भाग कर रूम में आ जाता है।
प्रीति रूम में आने के बाद।
प्रीति: परी उठ जा बेटी।
रमेश: सोने दे ना।
प्रीति: नहीं भाई जिस काम के लिए आई है वो भी ज़रूरी है।
रमेश: किस काम के लिए।
प्रीति: काम होने दो फिर बता दूंगी । परी उठ जा बेटी
परी उठ जाती है ।
परी: क्या माँ कितना अच्छा सपना देख रही थी और आप ने जागा दिया।
प्रीति: अब सपनो की दुनिया से बाहर आ तेरा सपना सच होने वाला है चल अरुन बुला रहा है।
परी: क्या कह रही हो माँ बात हो गई क्या।
प्रीति: हाँ वो इंतज़ार कर रहा है।
रमेश: किस काम की बात हो गई ।
प्रीति: आप के काम की बात नहीं है ये बच्चो के बीच का मामला है और परी को साथ ले लेती है और रमेश से।
प्रीति: आप जरा इसकी बेटी को सम्हाल लेना वह बच्चो का काम नहीं है और परी को ले कर अरुन के रूम में आ जाती है।
वहां पर सब को देख कर परी ।
परी: माँ यहाँ तो सब है।
प्रीति: ये सब भी तेरी तरह दीवानी हो गई है उसकि।
परी: क्या बोल रही हो माँ।
मामी और नीतू भी।
प्रीति: हाँ मेरी बेटी ये भी।
सरला: हाँ परी हम भी क्या करे है तो औरत ही ना
आदमी के दिल पे निर्भर मन किया तो कर लिया नहीं तो इंतज़ार करो कब तक इंतज़ार करे कभी तो हमें अपने मन का करना चाहिए और हम ने कर लिए आज तेरी बारी।
परी: मामी अरुन तो आप का बेटा है।
सरला: तो क्या हुआ इसी लिए तो सब से ज्यादा प्यार करता है इसलिए तो मेरी चाल बिगाड रखी है।
और अरुन के उपर से बेडशीट हटा देती है ।
और अरुन के खड़े लंड को देख कर परी के मुह से चीख निकल जाती है।
परी प्रीति से
परी: माँ ये क्या है।
प्रीति: वही जिस के लिए तू आई है।
परी: पर माँ ये तो किसी गधे का लग रहा है।
किसी गधे का काट के बेचारे को लगा दिया है।
सरला: बेटा इसी बजह से तो तेरी मामी लँगड़ा के चलती है।
तुम लोग तो कुछ दिन के लिए आओगे और चले जाओगे और बाकि दिन तो मुझे ही झेलना है इस गधे के लंड को।
परी: पर मामी मैं नहीं ले पाऊँगी।
प्रीति: क्या बोल रही है तु।
देख नीतू ने कितनी प्यार से लिया और वो तो अभी माँ भी नहीं बनी है और तू तो एक बच्चे को जनम दे के अपनी चुत चुदवा चुकी है फिर भी डर रही है
सरला: रहने दो दी अभी बच्ची ही तो है जब इतने दिने से ले ले कर भी मैं अभी तक लँगड़ा रही हु तो इसका डर तो लाजमी है।
कोई बात नहीं परी पहले अपनी माँ को लेते हुए देखो फिर बाद में सोच कर बताना की क्या करना है।
सरला नीतू से
सरला चल बेटी पहले इन माँ बेटी को करने दे बाद में हम माँ बेटी का नंबर आयेगा।
नीतु ऐसे मुह बनाती है जैसे कह रही हो की पहले मैं।
सरला: उसको ऑंखों से इशारा करते हुए पहले परी का नंबर लगने दे और उसका हाथ पकड़ कर बाहर को जाने को होती है।
बाहर किसी के कदमो की आवाज़ आती है जैसे कोई दरवाजा के पास ही हो।
सरला: देख लो दी आप के भाई को चैन नहीं है कैसे दरवाजा पे कान लगा के खड़े थे।
क्यूं न उनको भी अंदर बुला लो और दिखा दो उनको की उनका बेटा कैसे ज़बर्दस्त चुदाई करता है उनकी बहन और भांजी की।
प्रीति: भाभी क्यों कबाब में हड्डी बुला रही हो ।
१ घंटे की तो बात है
आप दोनों उन्हें सम्हाल लो बाद में जब आप का नम्बर आएगा तब हम सम्हल लेंगी।
परी: इसका मतलब मामा जी बाहर खड़े है ।
प्रीति: हाँ तेरे मामा को चुदाई देखने का नया शौक लगा है इसलिए दरवाजा पे खड़े हो कर चुदाई देख कर मज़े लेते है।
परी: नहीं मुझे शरम आएगी ये ही सोच कर की मुझे कोई देख रहा है
सरला: नहीं परी शरम नहीं आएगी पर मजा आएगा की तुम्हे चुदते हुए कोई देख रहा है ।
ओर वो तुम्हारा कोई अपना है।
बड़ा अच्छा लगता है सोच २ कर की कोई हमें देख कर मुट्ठ मार रहा है पर कुछ कर नहीं सकता और न ही रोक सकता है।
बाहर रमेश खड़े हो कर सब सुन रहा था।
पर क्या करे ये सिचुएशन तो उसने ही खड़ी की थी।
तो अब देखना और सहना भी उसे ही पडेगा।
अभी बात ही चल रही थी की
दरवाजा पे ड़ोरबेल बजती है।
सरला: अब कौन आ गया।
और बाहर आकर रमेश को देखते हुए दरवाजा खोलती है और सामने उसकी माँ और भाई खड़े थे।
और सरला
मा आप इतनी जल्दी।
सरिता: क्यों नहीं आ सकती।
सरला: नहीं माँ अंदर आओ आप ही का घर है।
अंदर आ कर।
रमेश सरला के भाई और माँ को देख कर खुश हो जाता है की अब सरला और अरुन क्या करेंगे।
तभी अरुन परी और प्रीति भी बाहर आ जाते है।
और उनको देख कर उदास हो जाते है।
खास कर प्रीति और परी क्यों की अरुन को तो पता था की सरिता को सब पता है।
सभी के होने से दिन में कुछ नहीं हो पाया ।
पर सरला ने सरिता से मिल कर सारी बात बता दी ।
प्रीति और परी के बारे में
सरला और सरिता छत पे
सरला: माँ अब भाई के होते हुए कैसे होगा ।
सरिता: इन सब की ज़रूरत क्या है बेटी।
कहिं ऐसा न हो इस सब के बाद अरुन तुमसे दुर हो जाए।
सरला: नहीं माँ ऐसा नहीं होगा और इसमें अरुन की भलाई हैं।
सरिता: क्यु
सरला: क्योंकी माँ उसकी सेक्स पावर बहुत है वो मुझ अकेले से सम्हाल नहीं रहा जब भी वो मेरे साथ सेक्स करता है मेरी हालत ख़राब कर देता है।
मै उसे ठण्डा नहीं कर पाती।
और उस बजह से मुझे डर है की वो मुझ से दुर न हो जाये ।वो दुर हो उससे अच्छा है जो भी हो मेरे सामने हो और मैं उसे अपने हिसाब से कण्ट्रोल कर सकु।
सरिता: देख ले अपनी समझदारी से ।
मै क्या हेल्प करूँ तेरी । वो बता।
सरला: मेरी तो समझ में कुछ नहीं आ रहा है।
सरिता: अच्छा बेटी ये बता जब भी मैं तुझ से बात करती हु तो तू अरुन की बहुत तारीफ करती है । क्या
अरुन की सेक्स स्टैमिना इतना है की तुझ जैसे दो बच्चो की माँ भी उसे सटिस्फ़ाई नहीं कर पा रही।
सरला: हाँ माँ सच बोल रही हु।
मुझे अपने तीनो जगह ले कर उसका पानी निकलवाना पड़ता है ।
सरिता: मतलब ।
सरला: माँ समझा करो।
सरिता: एक जगह तो मुझे पता है पर तीन जगह कौन से है।
सरला: माँ आप भी न इतनी बड़ी हो गई हो और आप को नहीं पता।
सरिता: सच मुझे नहीं पता तेरे पापा कौन से मरद है
बस ग़ुस्सा के अलावा क्या है बस सेक्स किया और सो गये। अपना काम होना चाहिए बस ।
मै भी तेरी तरह तडपी हु बेटी।
बस तेरी खुशकिस्मती की तुझे अरुन मिल गया और मैं इतनी हिम्मत नहीं कर पाई और कर लेती तो क्या होता
तेरी भाभी भी परेसान है तेरा भाई भी तेरे पापा की तरह है।
सरला: माँ हम लोगो की किस्मत इतनी ख़राब क्यों है।
सरिता: छोड़ बेटी।
सरला: माँ तीन जगह मतलब
मुह चुत और गाँड।
सरिता: चौकते हुए पागल है।
मुह और गाण्ड में कौन लेता है
सरला: मैं और कौन अरुन ने ही सिखाया है मुझे ।
सरिता: हे भगवान इस नए जमाने को क्या हो गया है।
सरला: कुछ नहीं हुआ माँ बस हमें पता नहीं थी था क्यों की हमारे पति किसी काम के नहीं थे।
और अरुन सब जनता है।
सरिता: तभी तो लँगड़ा कर चल रही है।
सरला: आप भी न माँ ।और शरमा जाती है।
सरिता: कितनी भोली है मेरी बेटी जो अपनी माँ से शरमा रही है।
जीसे सब कुछ बता रखा है।

Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.