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अनु जब घर पंहुची तो उसकी हाल खराब हो रही थी

आज वो चुदते-2 बची थी

पर इस बचने में उसका ही नुक्सान हुआ था ये वो अच्छे से जानती थी…

चुदायी के इतने करीब पहुंचकर वो इतना तो जान चुकी थी कि ये मुई चुदाई होगी बड़ी मजेदार

घर पहुंचकर उसे क्या करना है वो अच्छे से जानती थी…

ताला खोलकर उसने अंदर से दरवाजा बंद किया

और ड्राइंग रूम से लेकर बेडरूम तक अपना एक-2 कपडा निकाल कर फेंकती चली गई…

बेड तक पहुंचती-2 वो पूरी नंगी थी…

एक हाथ अपने नन्हे बूब्स पर था और दूसरा रसीली चूत पर

भले ही उसने उस वक्त शुक्र मनाया था कि जज्बातों में बह कर वो सर से चुद नहीं गई, उनके पिताजी सही वक्त पर आ गए…

पर इस वक्त अपनी चूत रगड़ते हुए वो उन्हीं पलों को सोचकर, कामदेव के रथ पर सवार होकर दूसरी ही दुनिया में उड़ी जा रही थी

‘’ ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह सर …… .. कितना मजा आ रहा था आपके साथ ……। उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म् सिर्रर ……… ”

अपने निप्पल्स को उँगलियों से उमेठती हुई वो सर से शिकायत किए जा रही थी

“क्यों इतनी देर लगायी… मुझे पकड़ने में……. आआआ ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् मेरे करीब आने में…….. मुझे किस्स करने में………ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह सर ……..’’

सर के नाम कि दो उँगलियाँ  उसने  अपनी तर बतर चूत में उतार रखी थी….

गीली तो वो इतनी थी कि सर का लंड तो क्या उनके टट्टे तक उतार लेती इस  वक्त अपने अंदर,

फिसल कर अंदर चले जाते निगोड़े…

उनके अंधे विशाल लंड और गोल मटोल टट्टों को सोचते हुए उसके हाथों की गति और तेज हो गई और वो झड़ते हुए एक बार फिर से बुदबुदाने लगी

” सर ….आआआआआआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् प्लीज़ वादा करो। मेरी इस चूत को….. चाटोगे ……अपने मुंह में लेकर…..इसे…..आह्ह्ह्ह…..जोर से चूसोगे…….कोई दया नहीं……बेझिझक……आह्ह्ह्ह्ह डाल देना……अपना लंड इसके अंदर……अंदर तक……”

और उसका कश्मीरी जिस्म अकड़ कर रह गया जब उसके अंदर की ज्वाला बूंद-2 करके चूत के रस्ते पिघलकर बाहर आ गयी.

झड़ने के बाद अस्त व्यस्त सी अनु ऐसी ही नंगी सो गई,

जानती थी कि शाम को मां के आने से पहले वो सब ठीक कर लेगी।

उधर सुधीर सर की KLPD होने के बाद उससे भी बुरी हाल थी….

अपने टयूशन सेंटर में पहली बार किसी स्टूडेंट को चोदते -२ रह गए थे….

उनके मां बाप ने आखिरी वक्त पर आकर सब गड़बड़ कर दिया था..

ऊपर से एक नई मुसिबत भी लाए थे वे मेरे साथ…

सुधीर की शादी का मामला,

उनकी उम्र इतनी हो चुकी थी पर अभी तक शादी नहीं की थी इसलिए इस बार उसके माँ पिताजी निश्चय करके आये थे की उनकी शादी की बात पक्की करके रहेंगे

पर उन्हें कौन समझाए कि भले ही सुधीर की उम्र 38 है पर उसे अपने से आधी उम्र की लड़कियों का शोक है,

उनका ही दीवाना है वो,

इसलिए शायद वो गर्ल्स स्कूल में टीचर की जॉब कर रहा था ताकी नवयौवन से भरपुर कलियों के इर्द गिर्द रह सके…

और बीच-2 में उसकी किस्मत जब उसपर मेहरबान होती तो कच्ची कलियों का कुंवारापन चुनने का अवसर भी उसे मिल जाता था

पर इन सबसे अनु की बात सबसे अलग थी…

एक तो आज तक उसने ऐसी सैक्सी , सुंदर, दूध से नहायी हुई लड़की नहीं देखी थी

ऊपर से आज के किस्से के बाद उसे पता चल ही चूका था कि अंदर से वो कितनी गरम है,

बस अब उसी आंच पर अपनी रोटियां सेकनी थी सुधीर को …

भले ही आज के लिए उसके पिता ने आकर खेल बिगड दिया था

पर वो जानता था कि आने वाले दिनों में वो उसके जिस्म को कितने चाव से चखने वाला है

अगले दिन स्कूल में जब अनु और निशा मिले तो दोनों के पास एक दूसरे को सुनाने के लिए लम्बे किस्से थे.

अनु ने तो एक-2 पल की बात, मिर्च मसाला लगा कर सुना डाली

पर जब निशा ने उसे सुनाना शुरू किया तो उसे लगा की जो कल उसके साथ हुआ था ठीक वैसा ही निशा के साथ भी हुआ है

निशा की कहानी, उसकी जुबानी

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कल जब मैं संजू के साथ उसकी बाइक पर बैठकर गई तो मुझे भी शायद पता नहीं था कि आज मेरे साथ क्या होने वाला है

पहले तो रोज मुझे अपने झोंपड़े में ले जाता था,

जहां वो मेरी पढने में मदद करता था,

मेरे स्लैबस के हिसाब से मुझे ट्यूशन दिया करता था,

और इसी बीच उसके इधर उधर के टच मुझे उत्तेजित करते रहते हैं…

कल तो मैंने अपने एक बूब्स को उसकी बाजू पर प्रेस करके जब सामने रखी बुक उठाई थी तो उसकी हालत देखने लायक थी

इसलीए आज कुछ ज्यादा करने की हिम्मत थी शायद मुझमें ..

इसलिए मैंने आज संजू जो इस तरह से पकड़ा हुआ था कि मेरे दोनों बूब्स उसकी कमर में धंसे जा रहे वे,

वो भी अपनी कमर लचका-2 कर मेरे चुभ रहे निपल्स की खुर्चन महसूस करके उत्तेजित हो रहा था

और जब हम दोनों उसके झोपड़े में पहुंचे तो संजू की आंखों में दिख रही बेचैनी साफ बता रही थी कि अंदर से उसका क्या मन है…

मैंने भी उसे तड़पाने के लिए अपनी स्कूल जेकेट उतार दी जिसके बाद मेरे कसे हुए बूब्स देखकर उसकी आंखे चमक उठी

“अब देखते ही रहोगे या कुछ करोगे भी…”

संजू : “उम्म हां…क…क्या करूं…। …”

मैं : “कल वाला चैपटर शुरू करो ना फिर से…कुछ डाउट है अभी तक मुझे…”

”ओह्ह…ओके …चलो करते हैं “

इतना कहकर वो बुक्स खोलकर कल वाला चैपटर फिर से समझाने लगा..

मैं गौर से देख रही थी कि उसकी नजरें चोरी छुपे मेरी क्लीवेज़ पर ही टिकी थी…

मैं थोड़ा और झुक गई तो अंदर तक की गोलाइयाँ पूरी दिखाई देने लगी…

मेरे चेहरे और हाथों की तुलना में मेरा सीने वाला हिसा कुछ ज्यादा ही गोरा है,

इसलिए उसे देखकर आहें भर रहा था वो .

मन तो मेरा भी कर रहा था कि इसे तड़पाना बंद करू और आगे बढ़कर कुछ मजे ले लूँ , पर उसी वक्त बाहर से किसी की आवाज आई

“संजू…ओ संजू…अंदर ही है क्या”

संजू वो आवाज सुनकर चोंक गया…और बोला “ये साला बंटी कहाँ से आ गया इस वक्त”

संजू ने पहले भी बताया था कि बंटी उसका दोस्त है और अक्सर वो दोनो मस्ती किया करते हैं

वो कुछ बोल पाता इससे पहले ही बंटी अंदर आ गया…

वो भी देखने में एकदम छपरी था, बिल्कुल संजू जैसा

बंटी : “आइला… तू भी अपने आइटम के साथ है आज…”

संजू ने घूर कर उसे देखा और चुप रहने को कहा

बंटी : “ओह सॉरी….पर यार…सुन ना…तेरी हेल्प मांगता है….वो क्या है ना आज वो अपनी गर्लफ्रेंड रूपा है ना…वो साथ आई है…और तुझे तो पता है अपनी हालत कैसी रहती है…तो कुछ देर के लिए तेरी खोली मिल जाती तो….कसम से यार…बस आधा घंटा, इस से ज्यादा नहीं लगेगा अपुन को…’’

मेरा तो मुंह खुला का खुला रह गया…

कहां तो हम अभी तक पहली किस करने की कोशिश कर रहे हैं और कहां वो सीधा फकिंग करने आ गए थे ..

संजू : “यार बंटी …तू पागल है क्या….देख रहा है ना कि मैं पढ़ रहा हूँ …”

“पता है की तू क्या पढ़ रहा है और क्या पढ़ा रहा है है …”

उसकी रहस्यमयी मुस्कान बता रही थी कि संजू ने उसे हम दोनों के बारे में मुझे सब बात बता रखी है..

बन्टी : ‘यार बस…बस आधा घंटा…तू अगर चाहे तो यहीं रह…मैं अंदर चला जाता हूँ ….”

संजू कुछ बोल पाता इससे पहले ही बंटी ने बाहर से रूपा को बुलाया और उसे लेकर अंदर चला गया

हम दोनो एक दूसरे को देखते रह गए..

संजू : “सॉरी….वो वो…क्या है ना…मैं …मैं “

“इट्स ओके संजू….मैं समझ गयी, कोई बात नहीं…आज का अधूरा काम हम कल कर लेंगे…”

मैंने जान बुझकर अपनी क्लीवेज़ की तरफ इशारा करते हुए कहीं ये बात…

और उसकी भुखी नजरें साफ बता रही थी की अपने दोस्त की वजह से आज वो किस सुख से वंचित रह गया है

मैं जैसे ही अपनी जैकेट और बेग उठाकर बाहर जाने लगी तो अंदर से रूपा की आवाज सुनाई दी

“उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ छोड़ न बंटी , आआआअह्ह … .कमीने … ..धीरे … .काट मत कुत्ते “

बंटी कितना भरा बैठा है अंदर से ये रूपा की आहें बता रही थी

जाना तो मैं वैसे भी नहीं चाहती थी

ऊपर से उन दोनों की अआवाजें सुनकर मेरे कदम आगे बढ़ने को तैयार ही नहीं हुए …

मैंने अपने होंठों को जीभ से गीला करके कुछ बोलना चाहा पर गले से कुछ निकल ही नहीं पाया,

चतुर चालाक संजू ने ये बात नोट कर ली और मेरा हाथ पकड़कर धीरे से बोला

”ओके…चले जाना…पर इनका खेल देखकर…”

इतना कहकर वो मुझे थोड़ा उनके करिब ले गया,

दरवाजे के नाम पर एक चादर टांग कर झोपड़े में एक कमरे को अलग बना दिया गया था,

चादर हटायी तो अंदर का नजारा साफ दिखायी देने लगा

मैंने उसके कहने पर अंदर झाँका तो मेरी सांसे ही अटक गई….

बंटी ने रूपा के सारे कपड़े निकाले दिए वे और वो उसकी चूत को बुरी तरह से चूस रहा था…

वो खुद भी पूरा नंगा था और उसकी टांगो के बीच उसका मूसल जैसा लंड ऐसे झूल रहा था जैसे 2 मोटे केले एक साथ बाँध कर लटका दिए हो ..

ऐसा  लंड तो मैंने पोर्न मूवीज में देखा था

और वो दोनो इस वक्त पोर्न स्टार जैसे ही लग रहे वे…

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दोनों ही सांवले रंग के थे पर कपडे निकलने के बाद उतने ही खूबसूरत लग रहे थे

अचानक मुझ एहसास हुआ की संजू मेरे पीछे आ गया है …

मैंने कुछ नहीं कहा..

मेरी पूरी बॉडी को अपने आप से ढक सा लिया था उसने

हम दोनों ही अंदर का कार्यकर्म देखने लगे, उसके हाथ मेरी कमर पर आ गए,

मैंने फिर भी कुछ नहीं कहा…

मेरी खामोशी को उसने हाँ समझा और धीरे-2 अपने हाथ ऊपर करने शुरू कर दिए

और कुछ ही देर में मेरे आमों पर उसका कब्ज़ा था…

मेरी सांस अटक कर रह गई,

सर पीछे होकर उसके कांधे पर गिर गया,

आंखें बंद हो गई,

उसकी उँगलियों ने कपड़ों के ऊपर से ही मेरे निप्पल्स को मसलना शुरू कर दिया,

कुछ आहें अंदर से रूपा निकाल रही थी और कुछ मेरे मुंह से निकल गई,

उसने अपने होंठ मेरी गर्दन पर रख कर उसे चूम लिया.

बस अब मुझसे बर्दाश्त करना मुश्किल था,

मैं एक झटके में पलटी और उसके चेहरे को पकड़कर उसके होंठों पर अपने होंठ रखकर चूसने लगी

वो भी भुखे भेडिये की तरह मेरी गोरी चमड़ी पर अपने पैने दांतो से निशान बनाता चला गया..

उसने अपने होंठ मेरी गर्दन पर रखकर मुझे बुरी तरह से दबोच लिया

फिर मेरे कुल्हे पकड़कर संजू ने मुझे ऊपर खींचा और मैंने अपनी टाँगे उसकी कमर पर लपेट दी और उसपर सवार हो गई

हम दोनों एक दूसरे से बुरी तरह चिपके हुए थे , किस्स हर पल और गहरी होती चली जा रही थी,

देर थी तो बस कपड़े उतारने की फिर जो अंदर हो रहा था ओ बाहर भी होने में देर नहीं लगनी थी

पर आज के लिए शायद उसकी किस्मत में भी चुदाई नहीं लिखी थी…

वो कुछ और कर पाते तभी बाहर से आ रहे शोर ने उनके रंग में भंग डाल दिया…

संजू : “अब ये क्या भसूड़ी है…”

उसने बेमन से मुझे अपनी गोद से नीचे उतारा,

मैं अभी भी उसे चूमने में लगी थी,

जैसे मैं जानना ही नहीं चाहती थी कि बाहर क्या हो रहा है

संजू ने बड़ी मुश्किल से मुझे समझाया की देखकर तो आने दो की माजरा क्या है

इतना कहकर वो बाहर निकल गया

में बीच में खड़ी बाहर से आ रहे शोर और अंदर से आ रही सिसकारियां सुनके पशोपश में थी की करुं तो क्या करूं.

मैंने अंदर झाँका तो बनती ने पोजीशन चेंज करके रूपा को पलट कर उसे पीछे से चूसना शुरू कर दिया था,

बेचारे नहीं जानते थे की उनकी मस्ती पर भी ब्रेक लगने वाला है

संजू भगता हुआ वापस अंदर आया और चिल्ला कर बोला: “वो म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन वाले आए हैं, सबके झोपड़े तोड़ने को बोल रहे है….”

बनती भी उसकी बात सुनकर जल्दी से कपडे पहन कर बाहर निकला

मैं भी हैरान परेशान थी की ये क्या हो गया एकदम से…

ये तो इनके घर हैं

उन्हें कैसे निकाल सकते हैं, उन्हें तोड़ कैसे सकते हैं

पर हम बड़े घरों में रहने वालों को इनके दुखों का अंदाजा नहीं होता की कैसी मुसीबतों का सामना करके वो अपनी जिंदगी गुजारते हैं

पर जो भी था अब कुछ नहीं हो सकता था

बंटी भी झल्लाता हुआ हुआ बोला : “इन सालों को आज ही का दिन मिलना था इस काम के लिए….हरामियों ने जीना दूभर कर रखा है…साले ढंग से चुदाई भी नहीं करने देते..”

संजू ने फिर से घूर कर उसे देखा की कम से कम इस लड़की का तो लिहाज कर

रूपा भी अपने कपडे पहनती हुई बुदबुदा रही थी,

उसकी चूत की खुजली भी नहीं मिट पायी थी,

झोपड़े में चार जिस्म वे और सभी प्यासे रह गए थे

बंटी और रूपा वहां से निकल गए और संजू भी मुझे लेकर बाइक पर मुझे घर छोड़ आया

निशा की कहानी सुनकर अनु और निशा ने एक दूसरे की तरफ देखा और फिर दोनो हाई फाइव देकर ठहाका लगाकार हंस दी,

दोनो ही जानती थी कि कल लगभाग एक जैसे ही दोनो का पोपट कटा है

पर जैसे कल हुआ, उसपर दोनो में से किसी का जोर नहीं था, वैसे ही आने वाले दिनों में जो होने वाला था उसपर भी दोनो का कोई बस नहीं चलने वाला था..

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