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थोड़ी देर बाद डोरबेल बजती है।
नीतू: आवाज़ देते हुए।
माँ लगता है पापा आ गये।
और दरवाजा खोलने जाती है।
ईधर सरला जल्दी २ तैयार होती है
दरवजा खोलते ही ये अरुन नहीं रवि था नीतू का पति
दरवजा बंद करते हुए नीतू का मूड ख़राब हो जाता है
वो तो सोच रही थी की अरुन आया होगा।
नीतू: माँ ये आये है।
और रवि कमरे में चला जाता है चेंज करने
और नीतू सरला के रूम को नॉक करती है
माँ
सरला: कौंन
नीतू: मैं हूँ खोलो।
सरला: क्या हुआ गेट खोलते हुए।
नीतू अंदर आ जाती है।
सरला का मूड ख़राब हो जाता है
नीतू; क्या हुआ माँ।
सरला: अब सूट कैसे पहनू। रवि आ गया और वो
मुझे सूट में नहीं देखेंगे तो उनका मूड ख़राब हो जायेगा ।
नीतू: तो पहन लो आप इनकी फ़िक्र क्यों करती हो पापा को जो अच्छा लगे वो पहनो उनकी ख़ुशी ज्यादा मायने रखती है।
सरल: पर
नीतू: पर बर छोडो वो कुछ नहीं बोलेंगे बोल दूंगी की जब पापा नहीं होते तो दिन में माँ सूट पहन लेती है।
सरला: नहीं उनको अच्छा नहीं लगेगा की मैं रवि के सामने सूट पहनू। मैं उनसे बात कर लेती हू।
और अरुन को कॉल करती है
और रवि आ गया है बता देती है।
अरुण: नीतू है न वो समझा देगी और पापा को भी उसको बोलो समझायेगी की माँ को सूट पहनने दे घर में।
नीतु इशारा करते हुए सरला को ।बोल दो ठीक है।
सरला ठीक है जैसी आप की मर्ज़ि
कितने देर में आप आ रहे हो।
अरुण: बस १० मिनट थोड़ा ज़ाम था।
और सरला कॉल काट देती है।
नीतू:मैंने बोला था न पापा कुछ नहीं बोलेंगे ।
सरला: पर पूछना भी ज़रूरी था।
तभी रवि नीतू को आवाज़ देता है
और तभी दरवाजे की डोरबेल बजती है।
नीतू: अब की पक्का पापा होंगे ।
सरला: तुझे उनको पापा बोलने में बड़ा मजा आ रहा है अपने भाई को।
नीतू: मजा क्या जब उनकी आप के साथ शादी हुई है तो वो मेरे पापा हुआ न ।
सरला चल जाके गेट खोल बाहर खड़े है वो ।
नीतु गेट खोलती है और अरुन अंदर आ जाता है
तभी रवि भी ड्राइंग रूम में आ जाता है।
वो कुछ बोलता उससे पहले ही।
अरुण: माँ आपने भी नीतू के आते ही सूट पहन लिया
सरला कुछ बोलति उससे पहले नीतू।
नीतू: हाँ तो कुछ लाइफ में चेंज होना चाहिए और आज कल तो सब सूट पहनती है माँ ने पहन लिया तो क्या और मैं तो आज पापा से भी बोलने वाली हूँ।
अरून जैसा आप दोनों की मर्ज़ि।
तभी रवि।
नीतु सही तो बोल रही है।
नीतु देखा इनको भी कोई प्रॉब्लम नही।
अब ठीक है
अरुन ओके मुझे क्या प्रॉब्लम पापा को हो सकती है।
नीतू; उनको मैं समझा दूँगी।
और सब खाने की तयारी करते है।
अरून और रवि डायनिंग टेबल पे
और सरला और नीतू किचन में।
तभी नीतू बाहर आती है और इतने में अरुन किचन में जाता है।
और सरला की कमर पे हाथ फेरता है
सरला: जाओ जान कोई आ जाएगा।
अरुण: कोई नहीं आयेगा
और उसके चूतड़ पे थपड मारता है।
और सरला के मुह से आह निकल जाता है
नीतु सुन लेती है और किचन में आ जाती है और अरुन बाहर चला जाता है।
नीतू: पापा ने छेडा था ना।
सरला: चुप कर ।
नीतू: क्यों , बोलो ना
सरला: हाँ।
नीतू: क्या किया।
सरला: वही बैक पे थप्पड और चुप हो जाती है।
नीतू: माँ लगता है पापा को आप की बैक बहुत पसंद है।
सरला: चुप कर बेशरम।
और नीतू हँस देती है।
माँ मैं उनके साथ खाना ख़ाती हु और पापा को सर्व करने की लिए बोलति हूँ फिर आप दोनों को मस्ती करने जा मौका मिल जायेगा और सरला कुछ बोलति उससे पहले हँसते हुए बाहर आ जाती है और अरुन को किचन में भेज देती है।
नीतु और रवि दोनों डायनिंग टेबल पे ऐसे बैठे थे कि रवि की पीठ किचन की तरफ और नीतू साइड से बैठे थी और तिरछी नज़र से किचन में देखती है।
इधर अरुन किचन में
सरला के बुटक्क पे फिर थप्पड मार देता है।
सरला: क्यों मार रहे हो।
अरुण: ये इतने उभरे हुए क्यों है
सरला: चुप रहो।
अरुण: बताओ न जान।
सरला: आपके लिए और आप ने गाण्ड मार मार कर बाहर निकाल दिए है।
अरुण: बस दस दिन में
सरला: आप के लिए दस दिन ही काफी थे कितना बड़ा है आप का।
अरुण: क्यों अच्छा नहीं लगता।
सरला: बहुत अच्छा है मेरा छोटू ।
जाओ उनको पुडी दे आओ।
और अरुन उनको पुडी सर्व करके फिर किचन में आ जाता है।
अरुण: अंदर क्या पहनी है मेरी जान।
सरला: वही जो आप ने बोला था।
अरुण: दिखाओ ना।
स: कोई देख लेगा बाद मैं
अरुण; नहीं मुझे अभी देखना है।
और सरला के पीछे खड़े हो कर निचे बैठता है और सरला की सलवार जो इलास्टिक वाली थी निचे सरका देता है और सरला के चूतड़ पे किस करने लगता है।
सरला: प्लीज छोड दो कोई आ जायेगा।
अरुण: अभी चोदता हूँ ।
सरला: मैं चोदने की नहीं छोड़ने के लिए बोल रही हू।
ईधर नीतू तिरछी नज़र से अपने माँ और भाई की करतुत देख रही थी सरला के चेहरे के एक्सप्रेशन ऐसे थे जैसे अरुन ने कुछ किया हो।
हो भी क्यों न अरुन ने सरला की पेंटी भी निचे सरका दी थी और आगे आकर उसकी चुत चाट रहा था।
सरला; ओह छोड तो कोई आ गया तो क्या सोचेगा
पर अरुन कुछ नहीं बोलता।
और सरला भी एकदम से निचे बैठ जाती है ।
अरुन के दोनों गालो ओ पकड़ कर प्लीज अभी मान जाओ बाद में पक्का आप जो बोलोगे वो करुँगी।
अरुण: पक्का आज दोगी।
सरला: हाँ पक्का मेरी जान और उसके लिप्स पर किस कर के उठ जाती है।
और नीतू साइड से सब देख रही थी अपनी माँ और नए पापा का रोमांस।

तभी नीतू आवाज़ देती है अरुन अब तुम खा लो मैं सर्व कर देती हूँ।
सरला: उठ जा अरुन नीतू आ जायेगी
और अरुन और सरला उठ जाते है
और नीतू किचन में आ जाती है और अरुन बाहर
नीतू: क्या चल रहा था।
सरला: कहाँ।
नीतू: किचन मैं नीचे।
सरला: कुछ नहीं बस वो अरुन और चुप हो जाती है।
नीतू: लगता है पापा बहुत रोमांटिक है।
मौका मिला नहीं की चालु।
सरला: चुप कर बदमाश तू भी कम नहीं है अरुन से।
नीतू: हु तो उसकी बहन।
कुछ देर ऐसे बात करते २ सरला नीतू से।
सरला: नीतू तेरी थोड़ी हेल्प चाहिये।
नीतू: हाँ बोलो माँ।
सरला: वो क्या है न कि।
नीतू: हाँ बोलो न।
सरला:अरुन कुछ टाइम मेरे साथ अकेले में टाइम स्पेंड करना चाहता है और तेरे और रवि के होते हुए ये पॉसिबल नहीं है तो तुम दोनों कहीं बहार घुम आओ।
नीतू: अच्छा जी अब हम दोनों कबाब में हड्डी बन रहे है।
सरला: ऐसा कुछ नहीं है।
नीतू: तो क्या है।
सरला: बोल न ।
नीतू: ओके ओके बाबा मैं ले जाऊंगी उन्हें ।
अच्छा एक बात पुछु।
सरला: हाँ पुछ।
नीतू: आप दोनों कहा तक पहुंचे ।
सरला: मतलब
नीतू: मतलब फिजीकली।
सरला: शरम नहीं आती अपनी माँ से ऐसे बात करते हुए।
नीतू: ओह हो शरम जैसे आप को आती है।अपनी बेटी से बोल रही हो थोड़ा टाइम दे दो अकेले में।
सरला: चुप कर।
नीतू: बताओ न माँ।
सरला: क्या बेटी।
नीतू: यही की आप और पापा कहाँ तक पहुचे रोमांस में।
सरला: चुप कर।
नीतू: बताओ न माँ।
सरला: जो एक पति और पत्नी के बीच होता है।
नीतू: तभी आप को पता है की मैं पापा के छोटू को देख कर बेहोश हो जाऊँगी।
सरला; नीतू की पीठ पर थप्पड मारते हुए चुप कर बेशरम ।
और नीतू हँसते हुए तो आप को टाइम स्पेंड करना है मैं कुछ करती हू और बाहर आ जाती है।

और नीतू बाहर आ कर रवि से
चलो न कहीं बाहर चलते है घुमने।
रवि: नहीं यार काफी थक गया हु ,कल भी टाइम से जाना है।
थोड़ी देर रेस्ट कर लेता हूँ और अरुन के रूम में चला जाता है।
नीतु ने भी जिद की पर रवि नहीं मानता और बेड पे लेट जाता है।
बाहर आ कर सरला से अरुन भी वही था।
नीतू: माँ वो आराम कर रहे है मैं भी सोच रही हूँ थोड़ा आराम कर लु और आप दोनों भी थोड़ा रेस्ट कर लो और रूम में चलि जाती है।

सरला और अरुन के रूम में जाने का वेट करती है
उसके मन में बहुत कुछ चल रहा था।
इधर सरला और अरुन दूसरे रूम में आ जाते है।
और गेट बंद कर लेते है और अरुन सरला पर टुट पड़ता है।
सरला: आराम से जान कही भाग नहीं रही और अरुन का साथ देने लगती है।
थोड़ी ही देर में दोनों के सरीर पे एक भी कपडा नहीं था।सरला नीतू की बजह से संतुष्ट थी की वो रवि को सम्हाल लेगी पर उसे ये नहीं पता था की उस टाइम दो ऑंखें इन दोनों को देख रही थी और ये कोई
और नहीं नीतू थी जो इन दोनों को दरवाजा के की होल से देख रही थी और रवि सो रहा था और उसने दरवाजा बाहर से बंद कर दिया ताकि रवि बाहर न आ सके।

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