Update 100
समीर ने फोन रख दिया और लोकेश से जल्दी गाड़ी चलाने को कहा. लोकेश तो पहले से ही तेज गाड़ी चला रहा था क्योंकि आज तो उसके चेहरे के आगे सिर्फ़ काव्या की ताज़ा-ताज़ा चुदी चूत घूम रही थी. आज ही जब वे दोनों रोज़ी की चुदाई एक साथ कर रहे थे, समीर ने उसे बताया था की उसने काव्या की सील तोड़ दी है. लोकेश अच्छी तरह से जानता था की काव्या की यह मंशा थी की वो लोकेश से चुदवायेगी तो सही पर वो पहली बार समीर से चुदवायेगी. अब समीर ने उसका रास्ता क्लीयर कर दिया था.
कुछ ही देर मे समीर का घर आ गया. तीनों दरवाजे तक पहुँचे और समीर ने बेल बजाई. रश्मि ने हमेशा की तरह अपना नंगा शरीर चादर से ढँका और दरवाजा खोल दिया. विक्की और काव्या अभी तक बेसूध हो कर सो रहे थे.
दरवाजे पर लोकेश और समीर के साथ रोज़ी को खड़ा देखकर रश्मि चोंक गयी. उसने सोचा की शायद आज ये दोनो किसी गस्ती को उठा लाए हैं, ग्रूप सेक्स करने के लिए. क्योंकि पहनावे से वो लड़की एक कॉल गर्ल ही लग रही थी … पर थी वो बड़ी सुन्दर.
समीर: “रश्मि, इससे मिलो. ये है मेरी नयी सेक्रेटरी, रोज़ी.”
रश्मि: “ओहो, तो ये रोज़ी है … मैने समझा की … हा हा … चलो छोड़ो … आओ अंदर आओ.”
थोड़ी मायूसी ज़रूर हुई थी उसे क्योंकि वो तो एक नये लंड की कल्पना कर रही थी. अब उसकी नज़रें लोकेश की तरफ थी और दोनो ही एक दूसरे को देखकर मंद-2 मुस्कुरा दिए.
सभी अंदर आ गये..
अंदर आते ही समीर और लोकेश के मुँह से एक साथ निकला: “काव्या कहाँ है?”
और वो दोनो एक दूसरे को देख कर रहस्यमय ढंग से मुस्कुरा दिए. शायद ये सोच कर की जैसे हर बार वो दोनो मिल कर एक साथ मज़े लेते हैं, वैसे ही अब काव्या का मज़ा भी मिल कर लूटेंगे.
तभी जैसे समीर को कुछ याद आया. वो बोला: “और कौन है घर में … जिसके बारे में तुम फोन पर बता रही थी.”
रश्मि: “खुद ही चल कर देख लो … अपने बेडरूम में.”
रश्मि अभी तक उसे सस्पेंस मे रख रही थी. समीर अपने बेडरूम की तरफ चल दिया … और उसके पीछे-2 रोज़ी और लोकेश भी… और लास्ट में रश्मि भी मटकती हुई बेडरूम की तरफ चल दी… उसने अब अपनी चादर उतार फेंकी थी और वो ऐसे ही चलती चली जा रही थी … नंगी.
बेडरूम मे पहुँच कर समीर ने लाइट ऑन करी तो देखा की उसके बिस्तर पर उसकी बेटी काव्या नंगी सो रही है. और साथ में है एक नौजवान लड़का और वो भी पूरा नंगा… पूरे कमरे में सेक्स की महक फेली हुई थी. समीर को समझते देर नही लगी की वो लड़का कोई और नही बल्कि विक्की है, काव्या का बाय्फ्रेंड.
वो लड़की के बदले कोई लड़का निकला इस बात का समीर को बहुत अफ़सोस हुआ पर उसने उसे अपने चेहरे पर नही आने दिया. उसका ध्यान एक बार फिर से अपनी सेक्रेटरी की तरफ चला गया. आज सुबह उसकी चूत लेते हुए उसने उसकी गांड मे उंगली करी थी पर उसने वहां कुछ भी करवाने से मना कर दिया था. अब उसका निशाना था रोज़ी की गांड, जिसे वो आज किसी भी कीमत पर मारना चाहता था. और इसके लिए माहौल में पहले से ही काफ़ी गर्मी थी. देरी थी तो बस रोज़ी को उस गर्मी में पिघालने की.
उसने रोज़ी को इशारे से कपड़े उतारने को कहा और उसने बिना कुछ बोले अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए. वोड्का का नशा उस पर अब धीरे-2 चढ़ने लगा था. रास्ते में कार में बैठ कर उसने समीर के उफनते हुए लंड पर जिस तरह अपनी थिरकती उंगलियो का कमाल दिखाया था, उसकी तरंगो से कार की सीट तक गीली हो चुकी थी. इसलिए वो अपनी चूत के चारों तरफ की घुटन को जल्द से जल्द उतार देना चाहती थी.
रश्मि तो पहले से ही नंगी खड़ी थी, पीछे की तरफ. वो आगे की तरफ आई और उसने लोकेश को चारों तरफ से अपनी गिरफ़्त में ले लिया. लोकेश की नज़रें तो बेड पर सोई हुई काव्या को आँखो से चोदने में लगी हुई थी, जिसके उभरे हुए चूतड़ देख कर उसके लंड का बुरा हाल था.
रश्मि ने पीछे से हाथ ला कर उसके लंड वाले हिस्से को टटोला और उसमे उफान मार रहे अजगर को अपनी उंगलियों में दबोच लिया. वो समझ चुकी थी की उसका लंड काव्या को देख कर खड़ा हो रहा है. वो उसके कान में फुसफुसाई: “सोच क्या रहे हो? आगे बढ़ो. देखो उसकी चूत कैसे मचल-2 कर तुम्हे बुला रही है.”
वो उसे और ज़्यादा उत्तेजित करना चाहती थी ताकि उसके कड़क लंड को अपनी चूत में ले सके. वो समझ चुकी थी की आज इस कमरे मे वासना का नंगा नाच होगा. उसे भी अपनी बेटी को लोकेश से चुदवाने में कोई प्राब्लम नही थी. ये तो वो हमाम था जिसमे आज सब नंगे थे.
समीर भी अपने कपड़े उतार कर सोफे पर जा बैठा और अपनी सेक्रेटरी को शॉर्ट हेंड पर लगा दिया, यानी लंड चुसाई पर. और वो भी बड़े चाव से अपने नाज़ुक मुँह में समीर के लंड को ले कर चाटने लगी.
रश्मि ने एक अच्छी भाभी की तरह अपने खास देवर लोकेश के कपड़े एक-2 करके उतार दिए और धीरे से धक्का दे कर उसे बेड पर लिटा दिया. वो खुद लपक कर उसकी टाँगो के बीच बैठ गयी. एक झटके में ही उसने उसके शक्तिशाली लंड को अपने मुंह में दबोच लिया. लोकेश का सिर काव्या के गद्देदार चूतड से टकराया. वो अपने पेट के बल सोई हुई थी. लोकेश को तो ऐसे लगा जैसे कोई मखमली पिल्लो आ गया है उसके सिर के नीचे… और उसकी चूत के इतने करीब आ जाने की वजह से वहां से आ रही भीनी-2 खुश्बू ने उसे पागल कर दिया.
लोकेश ने अपना सिर नीचे खिसकाया और ज़ोर लगा कर काव्या की एक टाँग उठा कर अपना मुँह उसकी जांघों के बीच खिसका दिया. उसने उसकी चूत को अपने होंठों पर लगा लिया. काव्या गहरी नींद में थी, इसलिए इतनी उथल-पुथल के बावजूद उसकी नींद नही खुली. लोकेश ने अपनी जीभ से उसकी चूत को सहलाना शुरू कर दिया.
बेड पर लेटे हुए लोकेश का लंड रश्मि चूस रही थी और उसकी बेटी ओंधी हो कर अपनी चूत के बल लोकेश के मुँह के उपर पड़ी हुई थी. अपनी चूत पर लोकेश की गर्म जीभ को महसूस करके वो धीरे-2 गरमाने लगी… भले ही वो गहरी नींद में थी पर अपनी कमर को हिला-2 कर वो अपने चूतामृत को उसके मुँह में आराम से पहुँचा रही थी.
इस बीच समीर का लंड पूरी तरह से तैयार हो चूका था, पर रोज़ी की गांड मारने से पहले वो उसकी गांड को तर कर देना चाहता था, अपनी लार से ताकि अंदर जाने में उसे कोई परेशानी ना हो.
इसलिए उसने उसे उठाया और बेड की तरफ चल दिया. बेड के अगले हिस्से में तो लोकेश एंड कंपनी ने कब्जा जमा रखा था, इसलिए वो उनके पीछे की तरफ चला गया, जहाँ विक्की आराम से सो रहा था.
समीर ने रोज़ी को घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी चूत पर अपने होंठ लगा दिए. वो उत्तेजना से चीख उठी, ”आआआआआह … ओह बोस्स्स … उम्म्म … इस्स्स्स्सस्स … ऐसे ही … आह!”
घोड़ी बनी रोज़ी के मुँह के ठीक सामने विक्की का मुरझाया हुआ लंड पड़ा था, जो कब उसने निगल लिया उसे भी पता नही चला. विक्की की नींद ज्यादा गहरी नही थी. अपने हथियार पर हमला होते ही वो एकदम से जाग गया … और चोंक कर उठ बैठा.
और जब अपने चारों तरफ उसने नज़र दौड़ाई तो उसका दिमाग़ भी चकरा गया. वो तो आराम से चुदाई करने के बाद काव्या के साथ नंगा सो रहा था. फिर एकदम से ये कौन-2 आ गये है कमरे में?
उसने रश्मि को देखा जो बड़े चाव से लोकेश के लंड को चूसने में लगी थी. उसने आँखो का इशारा करके उसे बस मज़े लेने को कहा.
फिर उसने लोकेश को देखा, जिसका चेहरा तो दिख ही नही रहा था, क्योंकि उसके उपर तो काव्या अपनी चूत फेला कर सो रही थी. और फिर उसने अपने लंड को चूस रही हसीना की तरफ देखा, जिसके रेशमी बालों ने उसके चेहरे को ढका हुआ था पर उसके लटक रहे संतरों और पीछे निकले खरबूजों को देख कर वो इतना ज़रूर समझ गया की माल काफ़ी जबरदस्त था. उसके ठीक पीछे समीर को उसकी चूत चूसते हुए देख कर वो समझ गया की ज़रूर काव्या का बाप अपने साथ कोई जुगाड़ ले कर आया है… और ये दूसरा आदमी शायद लोकेश ही है, जिसके बारे में काव्या ने उसे बता रखा था.
अब उसे क्या फ़र्क पढ़ रहा था. वो तो यहां मज़े लेने के लिए ही आया था आज. ऐसे में अगर उसे एक्सट्रा मज़ा मिल रहा हो तो उसे भला क्या प्राब्लम हो सकती थी. सो वो आराम से अपने सिर के पीछे हाथ लगा कर अपने लंड की चुसाई का मज़ा लेने लगा.
और इसी बीच लोकेश ने एक जोरदार हमले से काव्या की चूत को पूरा अपने मुँह में ले लिया और दांतो से काट भी लिया. और ऐसा हमला अपनी चूत पर होता देख कर गहरी नींद में सो रही काव्या भी एकदम से उठ गयी. उसे तो ऐसा लगा की शायद सोते हुए कोई कीड़ा उसकी चूत में घुस गया है. वो छिटक कर एकदम से अलग हो गयी … और जैसा झटका थोड़ी देर पहले विक्की को लगा था, ठीक वैसा ही काव्या को भी लगा … एकदम से कमरे मे इतने लोग देख कर. वो घबरा सी गयी … अपनी माँ को लोकेश अंकल का लंड चूसता देख कर और रोज़ी को विक्की का लंड चाटते देख कर वो समझने की कोशिश कर रही थी की ये क्या हो रहा है … रोज़ी से वो मिल चुकी थी एक बार, जब वो अपने पापा के ऑफीस गयी थी. पर नंगी हो कर वो इतनी जबरदस्त निकलेगी, ये उसने नही सोचा था. और उसके प्यारे पापा इस वक़्त अपनी सेक्रेटरी की चूत चूसने में लगे थे.
लोकेश: “अब इतना हैरान होने की ज़रूरत नही है, काव्या. चलो, जल्दी से वापिस उपर आओ … अभी तो मज़ा आना शुरू हुआ था.”
काव्या तो सुबह से यही करने में लगी हुई थी इसलिए उसे दोबारा कहने की ज़रूरत नही पड़ी. वो उछल कर अपने लोकेश अंकल के मुँह पर सवार हो गयी और अपनी चूत पहले की तरह एक बार फिर से चुसवाने लगी. आख़िरकार सेक्स से उसे उतना ही प्यार हो गया था जितना अपनी माँ से था अब तक.
समीर ने अपनी जीभ का डायरेक्शन अब रोज़ी की चूत से हटा कर उसकी गांड पर कर दिया… सुबह तो वो अपने बॉस को एक बार मना कर चुकी थी वहां किसी भी प्रकार की एंट्री के लिए. पर इस बार वो ऐसा नही करना चाहती थी. और वैसे भी माहौल इतना गर्म हो रहा था की अब उसने मन ही मन अपने दूसरे छेद का उद्घाटन करने की बात को सोचना शुरू कर ही दिया था.
और इस वक़्त उसके सामने इतना जवान लंड भी तो था, विक्की का, जिसे वो जानती नहीं थी और जो अपनी कमीनी आँखो से उसके रसीले होंठों को अपने लंड के गिर्द लिपटे हुए देख कर आहे भर रहा था.
काव्या तो लोकेश के मुँह पर अपनी चूत ऐसे घिस रही थी मानो घुड़सवारी कर रही हो. उनके बालों को पकड़ कर वो अपना मुँह उपर करते हुए जोरदार चीखो से कमरे मे संगीत का रंगारंग कार्यकर्म प्रस्तुत कर रही थी, ”ऊऊह … आहह … ओह … अंकल … सकक्क मी …इस्स्स्स्स … ऐसे ही … हां जीभ से … अंदर तक … डालो … आआआआईईईईईईई!”
उसने अब तक 2-3 बार लोकेश अंकल से उपर-2 के मज़े लिए थे. आज वो पूरा मज़ा लेना चाहती थी. पर उसके लंड पर तो पहले से ही उसकी माँ ने कब्जा किया हुआ था, जो लंड को चूस्कर शायद अपनी चूत के लिए तैयार कर रही थी.
काव्या खिसक कर नीचे की तरफ आ गयी… अपनी गीली चूत को लोकेश की छाती से रगड़ते हुए… उसके पेट पर मसलते हुए वो उसके लंड से आ टकराई… और अपनी माँ के चेहरे से भी.
एकदम से अपनी बेटी की मचल रही चूत को अपने चेहरे के सामने देख कर बेचारी माँ का दिल पसीज गया और उसने अपनी चुदाई कुर्बान करते हुए लोकेश के खड़े हुए लंड को धीरे से काव्या की चूत के मुहाने पर लगाया और बाकी का काम काव्या ने कर दिया, एक झटके से नीचे की तरफ होकर.
”आआआह अंकल! … कब से तरसी हूँ इसके लिए … अब बुझेगी मेरी प्यास!”
एक बाप को जब ये सुनना पड़े की उसकी बेटी उसके ही दोस्त से चुदवाने के लिए तरस रही है तो उसके दिल पर क्या बीती होगी इसका अंदाज़ा आप खुद लगा सकते है… पर समीर ऐसा नही था… उसे इन बातों से कोई फ़र्क नही पड़ता था… पर ये सुन कर की काव्या लोकेश के लिए कब से तरस रही थी, उसे अचंभा ज़रूर हुआ क्योंकि आज तक तो उसने यही सोचा था की वो सिर्फ़ उसके लंड के लिए तरस रही थी.

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