सौतेला बाप – Update 86 | Incest Sex Story

सौतेला बाप - Incest Sex Story
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Update 86

पर अभी के लिए तो वो सिर्फ़ उसे देख ही सकता था.. दबा तो वो रहा ही था रश्मि की…
रश्मि ने उसके हाथ को पकड़ कर अपने मुँह की तरफ कर लिया और उसकी लंबी-2 उंगलियाँ चूसने लगी..
”ओह समीर….. कितना लंबा लंड है तुम्हारा…… उम्म्म्ममममम ….. अंदर तक महसूस हो रहा है मुझे….. ऐसा लग रहा है की मेरी नाभि तक घुसा है ये…..”
अपनी नाभि वाले हिस्से पर उसने समीर के दूसरे हाथ को रख दिया और ज़ोर से दबा दिया….और एक पल के लिए तो समीर को भी यही लगा की उसके लंड की हलचल उसने महसूस की नाभि वाली जगह के आस पास…
और फिर उसी हाथ को थोड़ा और नीचे करके उसने अपने अंगूठे से रश्मि की चूत के होंठ फेलाए और उसे अंदर घुसा कर वहाँ मसाज करने लगा..
”उम्म्म्ममममममममम ….. क्यो तडपा रहे हो मुझे ……. हम्म्म्म्म्म ……”
रश्मि की हालत देखने वाली थी इस वक़्त….और वो बुरी तरह से अपनी चुदाई में डूब चुकी थी…ये भी नही देखा उसने की उसकी बेटी काव्या कनखियो से,अपनी अधखुली आँखो से उसके चेहरे के हर इंप्रेशन देख रही है… उसने देखा की रश्मि अपना मुँह उपर करे हुए समीर द्वारा मिल रही चूत मसाज का मज़ा ले रही है…उसकी आँखे बुरी तरह से बंद थी…एक तो उसके लंबे लंड को अंदर लेकर और उपर से उसके अंगूठे से अपनी चूत के दरवाजे की रगड़ाई करवाकर…
और इसी बात का फायदा उठाकर समीर का दूसरा हाथ लहराकर काव्या की तरफ चल दिया और उसने अपने मन की इक्चा पूरी करते हुए उसके मुम्मे को दबोच लिया और ज़ोर से दबा भी दिया…
काव्या तो तड़प कर रह गयी… इतनी देर से अपनी माँ को ऐसे मज़े लेते देखकर उसका भी मन कर रहा था की उसका बाप उसके शरीर को भी ऐसे ही तोड़ मरोड़ डाले..मसल डाले उसे… और अपनी छाती को समीर के हाथो मसलता पाकर वो मचल उठी…पर अपनी माँ की वजह से वो उस सिसकारी को दबा गयी जो इस वक़्त उसके मुँह से निकलनी चाहिए थी…
समीर को तो ऐसा लगा की उसकी हथेली में छेद हो जाएगा काव्या के निप्पल से…इतना पेना हो चुका था वो इस वक़्त…बुरी तरह से अकड़ कर चुभ सा रहा था वो उसे…और उसकी ब्रेस्ट तो पत्थर की हो चुकी थी…अभी कुछ देर पहले भी वो इतनी कड़क नही थी जितनी अब हो रही थी…पर उसकी पारखी और दमदार उंगलियों ने उन पत्थरों को भी पिघला दिया और अपनी ताक़त से उन्हे भी भींच कर उसके शरीर मे जल रही आग और भी भड़का दी…
उधर रश्मि अपनी ही मस्ती मे समीर के लंड पर उछल रही थी…और इधर उसकी बेटी फ्री के मज़े ले रही थी..
काव्या ने समीर के हाथ को ज़बरदस्ती पकड़कर अपनी चूत की तरफ मोड़ा और वहाँ लेजाकर ज़ोर से अपनी चूत उसके हाथ पर दे मारी…और ऐसा करते हुए उसकी कमर हवा में 4 इंच उपर उठ गयी, मानो वो अपनी चूत को उसके हाथ के अंदर झोंक देना चाहती हो…और चूत भी कैसी…अपने ही रस में डूबी हुई…सनी हुई….गीली सी..
समीर की पूरी हथेली गीली हो गयी….
और तभी रश्मि ने आँखे खोल दी…समीर ने झट से अपना हाथ वापिस खींच लिया और काव्या भी अपनी सोने वाली मुद्रा में आ गयी…
रश्मि : “आआआआअहह ……….. समीर…….आज तो मन कर रहा है की ऐसे ही बैठी रहूँ …..बट मैं अब कभी भी झड़ सकती हू….. आई एम लविंग इट….”
समीर : “रूको ….अभी मत झड़ना तुम ……”
और इतना कहकर उसने एक पलटी मारकर रश्मि को नीचे गिरा दिया, काव्या की बगल में, और खुद उपर की तरफ आ गया…
अब समीर उसकी जांघों के बीच बैठा था….उसने अपना वो हाथ जिसपर काव्या की चूत का रस लगा हुआ था, सीधा लेजाकर रश्मि की चूत के उपर लगाया और ज़ोर से मसल दिया…और ऐसा करते हुए वो सारा शहद जो उसने काव्या की चूत के छत्ते से इकट्ठा किया था, उसे रश्मि की चूत से निकल रहे रस के साथ मिला दिया…और फिर उस रसीली हथेली को चाट लिया…
”उम्म्म्ममममममममम ……..कितना मीठा है ये….”
वो एक तीर से दो निशाने लगा रहा था….अपनी बेटी और पत्नी को एक ही डायलॉग से खुश करके ..
दोनो यही समझ रही थी की उसके प्रॉडक्ट की तारीफ हो रही है..
काव्या तो बेबस थी पर रश्मि नही, उसने अपनी चूत के रस की तारीफ सुनी और समीर के सिर को पकड़ कर अपनी टाँगो के बीच खींच लिया…और चिल्लाई : “उम्म्म्मम…… तो और चाटो इसको….और पूरे मज़े लो….”
समीर को भला क्या प्राब्लम हो सकती थी…उसने अपना मुँह खोला और रश्मि की चूत के उपर अपने होंठ लगाकर जोरों से सकक्क करने लगा…
सपड़ -2 की आवाज़ सुनकर काव्या की चूत में भी चींटियाँ रेंगने लगी…उसने फिर से अपनी आँखे खोली और अपनी माँ को आँखे बंद करके तकिया पकड़कर मज़े लेते देखा…और समीर तो दिख ही नही रहा था उसे, वो लगा हुआ था अपनी बीबी की गुफा की सफाई करने में ..
और काव्या का हाथ फिर से अपनी चूत की तरफ रेंग गया…और पायजामे के उपर से ही उसने उसे मसलना शुरू कर दिया…मन तो उसका भी कर रहा था की ज़ोर से सिसके…चीखे मारे…पर आज उसका दिन नहीं था…वो तो चोरी के मज़े ले रही थी…और ऐसे मे चीखे मारना बिल्कुल मना होता है, वरना चोरी पकड़ी जाती है..
कुछ देर की चुसाई के बाद समीर उपर उठा और अपने लंड को लेकर थोड़ा आगे खिसक आया…और फिर रश्मि की आँखो मे देखते हुए उसने अपना लंड एक बार फिर से उसकी गहरी और गर्म चूत में पेल दिया..
”आआआआआआआआअहह समीईईर्…… हर बार ऐसा लगता है की पहली बार जा रहा है…. कितना मोटा है तुम्हारा…… उम्म्म्मममममम….”
समीर भी मुस्कुरा दिया, अपने पार्ट्नर से ऐसी कॉमेंट्स सुनकर मर्द का सीना और चोडा जो हो जाता है..
और धीरे-2 समीर ने अपने धक्कों की स्पीड बड़ा दी…और कुछ ही देर मे उसकी रेलगाड़ी ने स्पीड पकड़ ली और वो पूरी रफ़्तार से रश्मि की चुदाई करने लगा…
हर झटके से रश्मि के मुम्मे उपर तक उछलते और उसकी ठोडी से टकराते…और साथ ही पूरा पलंग भी ऐसे झटकों से हिल रहा था..
और पलंग के हिलने की वजह से रश्मि की बगल में सो रह काव्या का शरीर भी उपर नीचे हिचकोले खा रहा था..और जो झटके समीर रश्मि को मार रहा था वही झटके काव्या को भी लग रहे थे और उसके मुम्मे भी उपर नीचे हो रहे थे, भले ही वो टी शर्ट में थे, पर उसके और उसकी माँ के मुम्मे एक ही लय में उपर नीचे हो रहे थे…और ये सीन बड़ा ही सेक्सी लग रहा था समीर को..
समीर चोद तो रश्मि को रहा था पर उसकी नज़र काव्या के मुम्मों पर थी…और वो ये तो जानता ही था की वो जाग रही है,बस आँखे बंद किए वो झटके ले रही है…एक तरह से ऐसा लग रहा था की वो भी अपनी माँ की बगल में लेट कर चुद रही है… एक ना दिखाई दे रहे इंसान से..और उसके चेहरे के एक्सप्रेशन भी वो सॉफ देख पा रहा था… जिस तरह से अपनी आँखे मूंदे रश्मि अपनी चुदाई के मज़े ले रही थी ठीक वैसे ही काव्या भी अपनी आँखे बंद किए उन झटकों से मिल रहे आनंद को अंदर तक महसूस कर रही थी.
अचानक काव्या ने फिर से आँखे खोली और इस बार समीर और काव्या की आँखे चार हो गयी…दोनो एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा दिए..और काव्या ने अपने होंठों को गोल करके एक किस्स उछाल दी समीर की तरफ, जिसे उसने अपना हाथ आगे करके कॅच किया और अपने होंठों पर चिपका लिया..
और इन सबसे बेख़बर रश्मि एक बार फिर से झड़ने के करीब पहुँच गयी..
और वो चिल्लाने लगी
”अहह समीर….उफफफफ्फ़..उम्म्म्म अहह अहह ऊगगगगगगग और ज़ोर से ….और तेज … और अंदर ….ह उम्म्म्मम ….”
समीर समझ गया को वो अब किसी भी वक़्त झड़ सकती है…इसलिए उसने अपना लंड एक बार फिर से बाहर खींच लिया..
रश्मि ने चोंक कर अपनी आँखे खोल ली और चिल्लाई : “अभी क्यो निकाल लिया……मेरा बस होने ही वाला था….”
पर समीर के दिमाग़ मे एक और शरारत जन्म ले चुकी थी… उसने रश्मि की कमर पकड़ कर उसे घुमा दिया…रश्मि भी समझ गयी की समीर उसकी डोगी स्टाइल में मारना चाहता है…वैसे तो ये पोज़ उसका भी फेवरेट था, इसलिए वो भी बिना आना कानी के पलटी और अपनी गांड उपर की तरफ उभार कर लेट गयी…और बोली : “जल्दी डालो ना…. अब सहन नही होता मुझसे……”
समीर ने अपना लंड ठीक निशाने पर लगाया और उसकी चौड़ी गांड के स्टेयरिंग को पकड़ कर अपना ट्रक उसके फिसलन भरे हाइवे में पहुँचा दिया..
और फिर एक्सीलेटर देकर अपनी स्पीड एक बार फिर से बड़ा दी…
एक बार फिर से उसके झटकों से पलंग और उन दोनो के शरीर हिचकोले खाने लगे..
और अब वक़्त था समीर के दिमाग़ में आई खुराफात का..
उसने एक-2 झटके ऐसे मारे की रश्मि का सिर आगे की तरफ खिसक आया और वो पलंग की बेक से आ टकराया..
रश्मि ने चुदाई करवाते हुए गुज़ारिश की : “रूको समीर, मुझे सिर के उपर ये पलंग का हिस्सा लग रहा है, मुझे थोड़ा पीछे होने दो बस…”
और समीर ने उसे पीछे होने की जगह तो दी नही बल्कि धक्के मारकर उसका स्टेयरिंग काव्या की तरफ घुमा दिया…और अब रश्मि का चेहरा उसकी बेटी की तरफ घूम गया..और फिर एक-2 और झटके मारकर उसने रश्मि को अपनी ही बेटी के चेहरे के बिल्कुल करीब पहुँचा दिया..
अपनी चूत में लंड ले रही रश्मि के लिए ये पहला मौका था की जब वो किसी की उपस्थिति में चुदाई करवा रही थी…और वो भी अपनी जवान हो चुकी बेटी के सामने…
रश्मि का चेहरा हर झटके से खिसक कर काव्या के चेहरे के और नज़दीक जा रहा था, और ये काम समीर जान बूझकर ही कर रहा था…
रश्मि अब बार-2 शिकायत करके समीर की तंद्रा नही तोड़ना चाहती थी…उसे भी पता था की ऐसे चुदाई मे बार-2 टोकने से मर्द को कितना गुस्सा चड़ता है..इसलिए वो चुप रही…और एक वक़्त ऐसा आया जब उसके मुँह से निकल रही गर्म साँसे सीधा उसकी बेटी काव्या के चेहरे से टकराने लगी..
रश्मि तो सोच रही थी की उसकी बेटी गहरी नींद में सो रही है…और ऐसे में उसे महसूस हो रहे झटकों से वो उठने वाली तो है नही, और वैसे भी अब उनका खेल 5 मिनट का ही रह गया था…अपनी चूत के अंदर से मिल रही तरंगो से ये एहसास हो चुका था उसे,वो अब 1-2 मिनट में ही झड़ने वाली थी ..और समीर की स्पीड भी बता रही थी की वो भी अब कभी भी झड़ सकता है..
रश्मि का चेहरा काव्या के उपर था और रश्मि के सामने उसकी बेटी के लरज रहे होंठ थे…जिन्हे अभी कुछ देर पहले ही काव्या ने अपनी जीभ से गीला किया था…आज रश्मि ने इतने गोर से और इतने करीब से उन्हे पहली बार देखा था..वो बड़े ही टेंप्टिंग से लग रहे थे…उन्हे देखकर वो मंत्रमुग्ध सी हो गयी…उन दोनो के होंठ में सिर्फ़ 2 इंच का फासला था..और तभी समीर के और और झटके ने उस 2 इंच के फ़ासले को भी ख़त्म कर दिया और रश्मि के खुले हुए होंठ अपनी बेटी के रस भरे होंठों से जा चिपके..
रश्मि ने पीछे होना चाहा पर समीर ने थोड़ा और आगे होकर उसके सिर को और दबा दिया, बेचारी अपना सिर ना तो पीछे कर पाई और ना ही उपर…उसे लग रहा था की समीर को शायद पता नही है की उसके और काव्या के होंठ मिल चुके हैं, वो अपनी ही मस्ती में उसकी चूत मारता हुआ उसके बालों को घोड़ी की लगाम समझ कर उसकी चूत मार रहा है..पर उसे क्या पता था की ये तो समीर की चाल थी, उसने जान बूझकर उसे ऐसी पोज़िशन में पहुँचाया और धीरे-2 ख्सिका कर उसे काव्या के होंठो तक भी…
अब वैसे भी सिर्फ़ एक मिनट का खेल रह गया था…इसलिए रश्मि ने भी पीछे की तरफ वापिस जाने का दबाव बनाना छोड़ दिया..और वैसे भी काव्या के होंठों पर रगड़ खा रहे उसके होंठ उसे एक अलग ही एहसास दे रहे थे…और ना जाने क्या कशिश थी काव्या के रसीले होंठों मे, रश्मि ने उसके होंठ चूसने शुरू कर दिए…पहले तो धीरे-2 और फिर अपने हाथ से उसके चेहरे को पकड़ कर ज़ोर -2 से स्मूच..
ऐसा लग रहा था की जैसे बरसों से बिछड़े दो प्रेमी आपस में स्मूच कर रहे हैं… और काव्या का तो शॉक के मारे बुरा हाल था…जब उसे पहली बार अपनी माँ की गर्म साँसे अपने चेहरे पर महसूस हुई तो उसके सारे शरीर के रोंगटे खड़े हो गये…और फिर धीरे-2 जब उनके होंठ उससे टकराए और फिर उन्होने उसे चूसना शुरू किया तो वो पागल सी हो गयी…अपनी माँ के हिसाब से तो उसकी नींद इतनी पक्की थी की ऐसा सब करने के बाद भी वो उठने वाली नही थी…पर वो उठी तो पहले से हुई थी और अब अपने उपर ऐसे हमले होते देखकर पहले से ज़्यादा बहने लगी थी उसकी चूत ….

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