Update 77
तभी एकदम से समीर बोला : “अब मेरी बारी ….”
समीर की बात सुनकर रोज़ी एकदम से घबरा राई….उसने तो पहले मज़ाक -2 मे लोकेश को अपनी गांड मसलने के लिए ऑफर कर दी थी..पर जिस तरह से उन्होने उसे मसला था, उसे अंदर से कुछ-2 होने लगा था…वो करने क्या आई थी और कर क्या रही थी यहाँ…पर वो बॉस लोग थे…उन्हे मना करना उसे अच्छा नही लगा…वो धीरे-2 चलती हुई समीर के सामने जाकर खड़ी हो गयी..
समीर ने अपने हाथ के दोनो पंजे उसकी गांड पर रख दिए…और उन्हे ज़ोर-2 से दबाने लगा…ऐसा लगा की किसी 5 स्टार होटल का तकिया है वो…इतनी मखमली और गद्देदार गांड थी रोज़ी की…पूरी तरह से हलवे से भरी हुई…समीर ने लोकेश की तरफ देखा तो उसने इशारा करते हुए उसे थोड़ा और आगे बढ़ने को कहा…समीर ने एकदम से उसकी कमर पर हाथ रखकर रोज़ी को अपनी तरफ खींचा और उसके दांये नितम्ब पर एक जोरदार दाँत मारकर उसके माँस को अपने मुँह मे भर लिया..
रोज़ी दर्द से बिलबिला उठी…: “आईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई …….. ये क्या कर रहे हो सर ………. दर्द हो रहा है…आआआआआआआआआआह ”
और उसने आगे होते हुए अपनी मांसल गांड के हिस्से को समीर के मुँह से छुड़वाया …
समीर : “आई एम सॉरी रोज़ी…..मुझे पता नही एकदम से क्या हो गया था…मुझे माफ़ कर दो…”
और वो एकदम से उठ कर अंदर चला गया.
उसके अंदर जाते ही लोकेश ने रोज़ी को डांटते हुए कहा : “तुम्हारा दिमाग़ खराब हो गया है क्या….तुमने अपने बॉस को नाराज़ कर दिया….सिर्फ़ एक किस्स ही तो कर रहे थे वो वहाँ…हाथ लगाने में और किस्स करने में भला क्या फ़र्क है…अच्छे भले मूड का सत्यानाश कर दिया तुमने तो…इतनी अच्छी नौकरी दिलवाई थी मैने तुम्हे, अब पता नही वो भी रहेगी या नही ..”
रोज़ी का रहा सहा नशा भी एकदम से हवा हो गया….इतनी मुश्किल से तो उसको ये नौकरी मिली थी…और वो भी इतनी बाड़िया सैलेरी पर..अभी तो पहली सैलेरी भी नही मिली और नौकरी जाने की नौबत आ गयी..
वो रुंआसी सी हो गयी और लोकेश से बोली : “पर सर …वो मुझे बाइट कर रहे थे…मुझे काफ़ी दर्द हुआ , तभी मैने उन्हे ऐसा कहा…वरना मेरा ऐसा कुछ भी इरादा नही था…”
लोकेश : “अब ये मुझे बताने से क्या फायदा …पर अभी भी कुछ नही बिगड़ा है…तुम अंदर जाओ..अपने बॉस के पास और वो जो करना चाहते हैं, उन्हे करने दो…तुम्हारी इच्छा के विपरीत वो कुछ नही करेंगे…बस थोड़े बहुत मज़े ही तो ले रहे हैं…लेने दो…और तुम भी लो…”
इतना कहते हुए लोकेश ने एक और केन खोकर रोज़ी को दी और बोला : “ये लो…इसको पी लो…तुम्हे अच्छा लगेगा…और मज़ा भी आएगा..”
रोज़ी की समझ मे आ गया की उसने कितनी बड़ी ग़लती कर दी है…और अब वो उस ग़लती को सुधारने के लिए कुछ भी करने को तैयार थी..उसने लोकेश के हाथ से केन लिया और एक ही झटके मे उसे अपने मुँह से लगा कर गटागट पीने लगी…कुछ बियर बाहर निकलकर उसकी गर्दन से होती हुई अंदर चली गयी..पर वो लगातार होंठ लगाकर पीती रही और उसने आधे से ज़्यादा केन एक ही बार मे खाली कर दिया.
उसने अपनी आँखे ज़ोर -2 से झपकाते हुए अपने सिर को ज़ोर से झटके दिए…शायद वो उसके सिर पर चड चुकी थी..
फिर बड़े ही सेक्सी अंदाज में मुस्कुराते हुए उसने लोकेश को देखा और बोली : “आप ठीक कहते हैं सर …मैने ग़लत किया….अब देखना आप मेरा कमाल…”
और वो झूमती हुई सी अंदर चली गयी…लोकेश भी अपनी बियर लेकर उसके पीछे-2 अंदर आ गया.
समीर सोफे पर बैठा हुआ अपना सिर पकड़ कर लोकेश को कोस रहा था, क्योंकि उसकी वजह से ही वो अपनी मर्यादा भूलकर इस लड़की के साथ हद से आगे बड़ गया था…उसने ये भी नही सोचा की उसको क्या फील हो रहा होगा, उसकी मर्ज़ी और दर्द की परवाह किए बिना वो कैसे वहशी सा बनकर उसकी गांड पर काट खा रहा था…ये उसको शोभा नही देता…वो तो ऐसा था ही नही…आज लोकेश के उकसाने पर उसने ये क्या कर दिया…अब पता नही रोज़ी उसके बारे में क्या सोचेगी…नौकरी तो वो छोड़ ही देगी..पर उससे नज़रें भी वो कैसे मिला पाएगा कभी..शायद उसके ऊपर केस भी कर दे
वो ये सोच ही रहा था की रोज़ी एकदम से उसके सामने आकर बैठ गयी…और उसके दोनो हाथ पकड़ कर बोली : “आई एम सॉरी सर ….मेरी वजह से आपका मूड खराब हो गया…मैं ऐसा बिल्कुल भी नही करना चाहती थी…पर आपने वो बाइट ही इतनी ज़ोर से किया की मुझे काफ़ी दर्द हुआ…पर फिर भी मुझे ऐसा नही करना चाहिए था…आप अपना मूड खराब करके अंदर आ गये मुझे ये बिल्कुल अच्छा नही लगा…प्लीज़ सर …मुझे माफ़ कर दीजिए ना…प्लीज़…”समीर की तो कुछ समझ मे नही आ रहा था की ये एकदम से पासा उल्टा कैसे हो गया…वो तो खुद को दोषी मान कर अंदर आ गया था…ये रोज़ी को क्या हो गया जो खुद को दोषी मान रही है और उससे माफी भी माँग रही है..
तभी मुस्कुराता हुआ लोकेश अंदर दाखिल हुआ….समीर समझ गया की ज़रूर ये इस वक़ील के तेज दिमाग़ की कुछ उपज है, साले ने एकदम से पूरी गेम ही पलट दी.
समीर को कुछ ना बोलता हुआ देखकर रोज़ी एकदम से खड़ी हुई और समीर की तरफ अपनी गांड करके वो फिर से खड़ी हो गयी और बड़ी ही सेक्सी आवाज़ मे बोली : “सर …प्लीज़….आप करिए वो फिर से…बड़ा मज़ा आ रहा था…”
पर समीर ने इस बार अपनी तरफ से पहल करना सही नही समझा…और वो मुँह झुकाए बैठा रहा…बीच-2 मे वो बियर के सीप भी ले रहा था.
रोज़ी समझ गयी की बॉस कुछ ज़्यादा ही गुस्सा हो गये हैं….वो अपनी आवाज़ मे मिश्री घोलती हुई बोली : “देखिए ना सर …आपने जो बाइट किया था, उसका निशान कितना गहरा बन गया है…”
और उसके बाद सिर्फ़ समीर को स्कर्ट की साइड जीप खुलने की और उसके नीचे खिसकने की आवाज़ ही सुनाई दी…और फिर ताज़ा चूत के रस की गंध एक झोंके की तरह उसके चेहरे से टकराई…उसने हैरान होते हुए उपर देखा तो दंग रह गया…रोज़ी ने अपनी स्कर्ट नीचे खिसका दी थी..और सिर्फ़ अपनी पेंटी मे खड़ी होकर अपनी गांड पीछे की तरफ उभार कर समीर को दिखा रही थी..
उसने ब्लेक कलर की लैस वाली पेंटी पहनी हुई थी, जिसमे उसकी मदमस्त जवानियाँ बड़ी दिलकश लग रही थी
और सच मे उसकी गांड पर एक गहरा निशान बन गया था…समीर के 6-7 दाँत सॉफ नज़र आ रहे थे…बड़े ही गहरे थे वो…शायद समीर ने उत्तेजना मे आकर कुछ ज़्यादा ही ज़ोर से काट लिया था उसके मांसल नितम्ब पर…
समीर की आँखो के सामने रोज़ी के गोरे-2 और भरंवा नितम्ब नाच रहे थे…और उनपर हाथ रखकर रोज़ी खुद उन्हे समीर के सामने परोस रही थी..
समीर ने लोकेश की तरफ देखा, जो अपनी आँखे फाड़ कर आधी नंगी रोज़ी को देखकर पलकें झपकाना भी भूल चुका था…और फिर मंद-2 हंसते हुए समीर ने फिर से उसकी कमर पर हाथ रखा और उसकी गांड को अपनी तरफ खींच कर उस जगह पर अपने होंठ रगड़ दिए, जहाँ उसने बाइट किया था..
और समीर के इस नाज़ुक प्रहार से रोज़ी तड़प उठी..
आज शायद उसकी जिंदगी में पहली बार ऐसा कुछ होने वाला था , जिसके लिए हर लड़की तड़पती है. रोज़ी लड़खड़ा सी गयी समीर ने जब उसकी गांड पकड़कर उसको झंझोरा…उसका पूरा बदन काँप सा गया…अगर लोकेश उसके आगे आकर ना खड़ा हो गया होता तो वो नीचे ही गिर जाती.
लोकेश ने भी मौके का फायदा उठाया और लड़खड़ाती हुई रोज़ी के सामने आकर सहारे की तरहा खड़ा हो गया…उसके नर्म उरोज उसके कंधे से रगड़ खाकर बुरी तरह से पिस गये.
समीर तो अपनी ही धुन में रोज़ी की गांड का तिया पांचा करने मे लगा था…उसके नर्म कुल्हों को जगह -2 से चूम कर..अपनी जीभ से उन्हे चाट कर अपने प्यार की मोहर लगा रहा था उसके पिछवाड़े पर..
रोज़ी ने लोकेश की बाजू ज़ोर से पकड़ ली ..और गर्म साँसे उसके चेहरे पर छोड़ते हुए वो फुसफुसाई : “देखिए ना सर …समीर सर क्या कर रहे हैं…”
लोकेश : “तो मना कर दो ना….रोक दो उन्हे…और घर वापिस चली जाओ..”
वो जानता था की रोज़ी ये काम तो बिल्कुल नही करेगी…सिर्फ इसलिए नहीं की उसे अपनी नौकरी की चिंता थी…बल्कि इसलिए भी क्योंकि उसे भी अब वो सब अच्छा लग रहा था..और ये बात तजुर्बेदार वकील ने उसकी आँखो मे पढ़ ही ली थी…तभी उसे ऐसा करने के लिए कह रहा था जो वो खुद नही करना चाहती थी.
पर एक जवान लड़की की जिंदगी का पहला सेक्स एनकाउंटर भी बड़ी अजीब चीज़ होता है…वो जानती है की सभ्य समाज में वो सब ग़लत है…और इसलिए वो आज तक ऐसा कुछ नही कर पाई जिसकी वजह से वो अपनी या अपने घर वालो की नज़रों में गिर जाए…पर ये सेक्स होती ही इतनी कुत्ती चीज़ है की जब इसका एहसास शरीर पर होना शुरू होता है तो समाज की माँ चोदकर सब कर गुजरने का मन करता है…और फिर खुलते हैं एक नयी मौज मस्ती के रास्ते जिसपर चलकर वो कच्ची कली फूल बन जाती है..
रोज़ी के हाथ लोकेश के उपर बुरी तरह से जकड़ बनाकर अपना दबाव डाल रहे थे..लोकेश सीधा उसकी आँखो में देख कर उसकी हालत का अंदाज़ा लगाने की कोशिश कर रहा था..वो जानता था की अंदर से उसकी क्या हालत हो रही है..ऐसा सुखद एहसास जब एक नवयोवना को पहली बार मिलता है तो वो क्या-2 फील करती है वो ये सब समझने की कोशिश कर रहा था.
लोकेश के घर वापिस जाने की बात का रोज़ी ने कोई जवाब नही दिया..बस अपने होंठों पर दाँत मारकर अपनी बाहर निकल रही सिसकी पर काबू पाया उसने…
समीर के हाथ उसकी कमर से उपर होते हुए शर्ट के अंदर दाखिल हो गये..और ये वो पल था जब लोकेश ने रोज़ी के शरीर मे एक बार फिर थरथराहट महसूस की….और फिर लोकेश को अपने और रोज़ी के बीच, उसके कपड़ों के अंदर से समीर के हाथ उपर की तरफ आते हुए महसूस हुए…और वो जब तक समझ पाता, उन हाथों ने रोज़ी के दोनो स्तनों को पकड़कर अपनी गिरफ़्त में ले लिया..
रोज़ी की आँखे फैल सी गयी…उसके होंठ लरज गये…काँपने लगे वो…उसकी आँखों मे अजीब सी खुमारी उभर आई..
वो फिर बोली : “देखिए ना सर …समीर सर तो आगे ही बढ़ते जा रहे हैं…”
अब लोकेश ने भी उसको उकसाया : “देखो रोज़ी…यहा तुमसे कोई ज़बरदस्ती नही कर रहा …तुम चाहो तो अभी भी वापिस जा सकती हो…पर मुझे पता है ये सब तुम्हे भी अच्छा लग रहा है…बोलो…लग रहा है ना…”
रोज़ी : “हाँ …पर …”
लोकेश : “पर क्या ???”
रोज़ी : “वो ….वो ….सर बड़ी ज़ोर से दबा रहे हैं ….इन्हे बोलिए की थोड़ा धीरे करे….”
ये सुनकर लोकेश मुस्कुरा दिया और बोला : “तुम खुद ही क्यो नही बोल देती …”
वो चाहता था की वो खुद खुलकर सामने आए…क्योंकि जब तक लड़की खुलकर सब ना कहे या करे, मज़ा ही नही आता..
रोज़ी ने झिझकते हुए पीछे मुँह करके, अपनी गांड के अंदर घुसे हुए समीर को कहा : “सर …आप प्लीज़ थोड़ा आराम से कर लो…मुझे उसमें कोई प्राब्लम नही होगी…”
रोज़ी ने ये बात कहकर जैसे अपने उपर एक नयी मुसीबत बुला ली..क्योंकि समीर ने समझा की उसने खुलकर उसे कुछ भी करने की छूट दे दी है..अब वो उसके साथ कुछ भी करे, उसे कोई प्राब्लम ही नही है..शायद आगे खड़े वकील ने उसे पूरी तरह से बोतल मे उतार लिया है…
इतना सोचने के साथ ही समीर ने एक ही झटके मे उसकी ब्लेक लैस वाली पेंटी को बीच मे से पकड़ा और दोनो तरफ खींचकर फाड़ दिया..
छर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर की आवाज़ के साथ रेशमी पेंटी के 2 टुकड़े हो गये…और उसकी नंगी गांड के नीचे लटकते चूत के रसीले होंठ प्रकट हो गये..रोज़ी ने अपनी चूत पर हाथ फेरकर अपने अंदर से बह रहे रस को साफ़ किया
और शॉक के मारे बेचारी रोज़ी कुछ बोल ही नही पाई…उसे विश्वास ही नही हो रहा था की इतना सभ्य सा दिखने वाला उसका बॉस एक ही झटके मे उसे इस तरहा नंगा कर देगा…और वो कुछ बोल पाती इससे पहले ही समीर की जीभ किसी साँप की तरहा लपलपाती हुई उसकी टाँगो के बीच घुसी और एक ही झटके मे उसकी चूत को डस लिया.
रोज़ी का मुँह खुला का खुला रह गया…गोल आकार मे आकर…और उसमे से गर्म साँसे निकलकर लोकेश के चेहरे को एक बार फिर झुलसाने लगी..
”आआआआआआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ”
लोकेश ने भी बियर का केन एक किनारे पर रखकर अपने लंड को मसलना शुरू कर दिया..वो भी फटने वाली हालत में पहुँच चुका था…उसने पेंट की जीप खोली और अपने 8 इंच के लंड को बाहर निकाल कर उसे ताजी हवा खिलाई..

