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Update 42

समीर की शह मिलते ही काव्या समीर के पास गयी और सीधा उसकी गोद मे जाकर बैठ गयी, समीर भी उसकी इस हरकत से चोंक सा गया, पर काव्या बड़े ही आराम से उसके गले मे अपनी बाहें डालकर बोली : “पापा, आप ही बताइए, हम घूमने आए है, ऐसी ड्रेसस यहा ना पहनु तो कहा पहनु, वैसे भी यहा कोई देखने वाला नही है..”
समीर की साँसे तेज़ी से चलने लगी, उसे तो यकीन ही नही हो रहा था की काव्या ऐसी हरकत करेगी, उसके लंड ने अपना सिर उठना शुरू कर दिया था, जिसे काव्या अपनी गान्ड के नीचे सॉफ महसूस कर रही थी , वो थोड़ा और चिपक कर बैठ गयी समीर से, जिसकी वजह से उसकी छोटी गेँद समीर की गर्दन से टच करने लगी, अब तो समीर के लंड ने पूरी बग़ावत कर दी और उफान मारते हुए काव्या की गांड पर धक्के मारने लगा..
रश्मि ने भी जब देखा की काव्या कितने प्यार और अपनेपन से समीर की गोद मे जाकर बैठ गयी है, तो उसने भी आगे टोकना सही नही समझा, शादी के बाद से ही समीर और काव्या के बीच का तनाव उसकी परेशानी बना हुआ था, पर अब समीर काव्या को अपनी बेटी की तरह अपनी गोद मे बिताकर उसकी तरफ़दारी कर रहा था तो रश्मि को ये देखकर बहुत अच्छा लगा..
अब उसे कौन बताए की समीर के मन मे क्या चल रहा है…
थोड़ी देर तक वहाँ बैठने के बाद काव्या उठ खड़ी हुई और जाते-2 उसने एक और काम किया और वो भी इतनी तेज़ी से की समीर को रियेक्ट करने का समय ही नही मिला, काव्या ने देखा की जैसे ही रश्मि की नज़रें दूसरी तरफ गयी, उसने जल्दी से समीर के होंठों पर एक हल्की सी पप्पी दी और बोली ”थेंक्स पापा , बाय , मैं उपर अपने कमरे मे हू” और वहाँ से उठकर अपने रूम मे भागती चली गयी..
वो बेचारा अपने लंड को मसलता हुआ, उसकी मोटी गाण्ड कि थिरकन ही गिनता रह गया.
रश्मि को कुछ पता भी नही चला, और समीर अपने होंठों पर उसके रुई जैसे होंठों के स्पर्श से सिहर उठा था, और अपने होंठों को मसलता हुआ उन्हे अपनी जीभ से भिगो कर चूस रहा था.
रात का खाना खाने के बाद सभी सोने की तैयारी करने लगे, शाम को जिस तरह से काव्या ने समीर के लँड को खड़ा कर दिया था, उससे एक बात तो पक्की थी की वो आज रश्मि की खूब बजाएगा..
और अपने रूम मे जाते ही उसने अपने पुर कपड़े निकाल फेंके और सोफे पर जाकर बैठ गया.
रश्मि नहाने गयी हुई थी उस वक़्त, समीर ने उसे पहले से ही बोल दिया था की वो बिना कपड़ो के और बिना अपने बदन को पोंछे बाहर आएगी..
अपने बदन को शावर जैल से मसलने के बाद वो ऐसे ही भीगी हुई सी बाहर निकल आई, उसके नंगे बदन से पानी की बूंदे बहकर नीचे गिर रही थी और कारपेट को भी गीला कर रही थी
समीर ने सिगरेट सुलगा ली और दूसरे हाथ मे पेग पकड़ लिया और रश्मि से बोला : “अब मेरे पास कुतिया की तरह चलती हुई आओ ”
रश्मि ने समीर को ना कहना तो सीखा ही नही था अब तक, और वैसे भी, सेक्स के मामले मे वो अब इतना खुल चुकी थी की उसे भी मज़ा आने लगा था ऐसी हरकतें करने मे..
वो अपने घुटनो के बल बैठ गयी और हाथों को आगे रखकर धीरे-2 चलती हुई समीर की तरफ बढ़ने लगी.
उसके उरोजों पर अटका हुआ पानी, इकट्ठा होकर उसके निप्पल्स तक जा रहा था और बूंदे बनकर नीचे गिर रहा था, जैसे मोटी तोप से छोटे-2 पानी के गोले निकल रहे हो.
उसके पास आते ही समीर ने अपने पैर की उंगलियों से उसके चेहरे की बूँदो को मसलना शुरू कर दिया और फिर उसके होंठों के अंदर अपना अंगूठा डाल दिया, जिसे वो बड़े भयानक ढंग से चूसने लगी, जैसे वो पैर का अंगूठा ना हो उसका लॅंड हो.

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