Update 28
इतना मोटा, लम्बा और मुलायम त्वचा का लंड, कितनी अकड़ थी उसके अंदर , वो तो पागल सी हुई जा रही थी उसे अपने हाथों और मुंह के अंदर महसूस करते हुए , उसने अपनी जिंदगी के लगभग 18 साल निकाल दिए थे बिना किसी लंड को टच किये बिना और अब वो उन सभी सालों का हिसाब जल्द से जल्द चुकता कर देना चाहती थी.
वो अपनी जीभ से लोकेश अंकल के लंड के सुपाड़े को किसी आइसक्रीम कोन कि तरह चाट रही थी, और उसपर अनगिनत किस्सेस भी कर रही थी..
अपने लंड को मिल रही इतनी इज्जत से लोकेश भी खुश हो गया..
उसने एक हाथ से काव्या के बालों को पकड़ा और दूसरे से उसकी गर्दन दबोच ली और उसके सर को ऊपर नीचे करता हुआ अपने लम्बे लंड से उसके मुंह को चोदने लगा..
ये बेशक काव्या कि जिंदगी कि पहली लंड चुसाई थी, पर वो कर ऐसे रही थी कि लोकेश को भी लग रहा था कि वो काफी खेली खायी लड़की है..
और लोकेश मन ही मन हैरान भी हो रहा था कि इतनी सी उम्र में ही उसने लंड चूसने कि ऐसी महारत हासिल कर ली है , पर जो भी था, वो इन पलों का पूरा आनंद लेता हुआ अपना लंड चुस्वा रहा था …
और जल्द ही उसके लंड ने जवाब दे दिया और एक के बाद एक कई रॉकेट उसके लंड से निकलकर काव्या के मुंह के अंदर पहुँच गए..
और वो अंत तक उसे चूसती रही..
जब वो पीछे हुई तो उसके दोनो गाल फूले हुए थे, यानि उसने लोकेश का माल अपने मुंह के अंदर ही इकठ्ठा किया हुआ था..
उसने लोकेश कि तरफ बड़े ही सेक्सी अंदाज में देखा और झील कि तरफ झुककर अपने होंठों को गोल करके एक पिचकारी मारी, और सारा माल बाहर निकाल दिया.
काव्या : “सॉरी, मुझे इसका स्वाद पसंद नहीं है, इसलिए निकाल दिया ”.
काव्या ने अपनी जिंदगी में आज पहली बार किसी के रस को अपने मुंह से चखा था, और थोडा अजीब सा स्वाद था वो ,इसलिए अंदर नहीं निगल पायी , शायद आने वाले टाइम में निगल पाये, पर आज नहीं …
गहरे नीले रंग के पानी पर लम्बी सी लकीर खिंच गयी सफ़ेद रंग कि, जो धीरे-२ पानी के अंदर विलीन हो गयी..
लोकेश : “यहाँ इतनी जगह नहीं है कि मैं ढंग से तुम्हारे इस अहसान का बदला चुका सकू ”.
काव्या : “कोई बात नहीं अंकल, अभी तो हमारे पास काफी दिन हैं यहाँ , शायद रात तक ही कोई रास्ता निकल आये ”.
अभी भी पंद्रह मिनट बचे थे, और ये बात काव्या भी जानती थी, उसने लोकेश को जल्द से जल्द वापिस चलने को कहा.
उसे पता था कि समीर और उसकी माँ पीछे से क्या करेंगे और वो देखना चाहती थी कि वहाँ क्या हो रहा है ….
लोकेश ने भी कोई बहस नहीं कि, वैसे भी, बेटी के बाद माँ के जलवे देखने के लिए वो भी उत्सुक था.
पर उन्हें क्या पता था कि जो आज वो देखने जा रहे हैं वो उन दोनों कि जिंदगी हमेशा के लिए बदल देगा
दूसरी तरफ, जैसे ही लोकेश और काव्या नाव पर बैठकर समीर कि नजरों से ओझल हुए, उसने नीचे खड़े-२ ही रश्मि को आवाज लगायी
समीर : “रश्मि …… रश्मि ……. जल्दी से नीचे आओ ”

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