Update 15
और काव्या को तो विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उसके साथ ऐसा सलूक किया जा रहा है, जिस समीर पापा कि चुदाई देखकर उसकी चूत में भी पानी भर गया था कल रात और वो उनसे चुदने के सपने देखने लगी थी ,वो उसके साथ ऐसा बर्ताव कर रहे हैं, वो सब रात भर का प्यार नफरत में बदलता जा रहा था अब..
समीर ने एक और झापड़ उसे रसीद किया और फिर बोला : “सच बोल, तू ही थी न रात को वहाँ ”.
काव्या ने आग उगलती हुई आँखों से समीर को देखा और ना में सर हिला दिया..
समीर ने उसे धक्का दिया और उसका सर दिवार से जा लगा, और उसके माथे पर एक गोला सा बन गया , वो दर्द से बिलबिला उठी.
समीर उसके करीब आया और फिर से उसके बालों को पकड़ा और उसके चेहरे के करीब आकर गुर्राया : “मेरी बात कान खोलकर सुन ले साहबजादी, ये मेरा घर है, और मेरी मर्जी के बिना यहाँ का पत्ता भी नहीं हिल सकता, फिर से ऐसी कोई भी हरकत न करना कि मैं तुझे और तेरी माँ को धक्के मारकर इस घर से निकाल दू , समझी , अगर यहाँ रहना है तो सीधी तरह से रह ”.
और फिर बाहर निकलते हुए वो पीछे मुड़ा और बोला : “ये बात हम दोनों के बीच रहे तो सही है, वरना अंजाम कि तुम खुद जिम्मेदार होगी ”.
ये सारा किस्सा रश्मि को न पता चले, इसकी धमकी देकर समीर बाहर निकल आया …… अपने बिस्तर पर दर्द से बिलखती हुई काव्या को छोड़कर .
उसने उसी वक़्त श्वेता को फ़ोन करके रोते-२ सारी बात बतायी , उसे भी विश्वास नहीं हुआ कि समीर ऐसा कुछ कर सकता है उसके साथ , श्वेता ने काव्या को अपने घर पर आने के लिए कहा.
वो नहा धोकर तैयार हो गयी, तब तक रश्मि भी उठ चुकी थी, और सबके लिए नाश्ता बनाकर टेबल पर इन्तजार कर रही थी, समीर और काव्या जब टेबल पर आकर बैठे तो दोनों ने एक दूसरे कि तरफ देखा तक नहीं.
रश्मि ने अपनी बेटी को उदास सा देखा तो उसके पास आयी और तभी उसके माथे पर उगे गुमड़ को देखकर चिंता भरी आवाज में बोली : “अरे मेरी बच्ची, ये क्या हुआ, ये चोट कैसे लगी ”.
काव्या ने नफरत भरी नजरों से समीर कि तरफ देखा, जो बड़े मजे से नाश्ता पाड़ने में लगा हुआ था, और फिर धीरे से बोली : “कुछ नहीं माँ, रात को बिस्तर से गिर गयी थी, ऐसे बेड पर सोने कि आदत नहीं है न, इसलिए ”.
समीर उसकी बात सुनकर कुटिल मुस्कान के साथ हंस दिया..
अपना नाश्ता करने के बाद काव्या अपनी माँ को बोलकर श्वेता के घर पहुँच गयी.
उसके कमरे में पहुंचकर उसने विस्तार से वो सब बातें बतायी जो आज सुबहउसके साथ हुई थी , जिसे सुनकर श्वेता का खून भी खोलने लगा
श्वेता : “साला, कमीना कहीं का , देख तो कितने वहशी तरीके से पीटा है तुझे, ”
उसने काव्या के माथे को छूकर देखा, वहाँ अभी तक दर्द हो रहा था
श्वेता : “यार, जिस तरह से तू समीर के बारे में बता रही है, मुझे तो लगता है कि ये कोई साईको है, अगर जल्द ही इसका कुछ नहीं किया गया तो शायद किसी दिन ये आंटी के साथ भी ऐसा कुछ ना कर दे ”
ये बात सुनते ही काव्या सिहर उठी, उसे अपनी माँ से सबसे ज्यादा प्यार था और उसे वो ऐसे पिटते हुए नहीं देख सकती थी
काव्या : “नहीं, मैं ऐसा नहीं होने दूंगी ….”
श्वेता : “वो ऐसी हरकत ना करे, ना ही तेरे साथ और ना ही आंटी के साथ, इसके लिए हमें कुछ करना होगा ”
दोनों ने एक दूसरे को देखते हुए सहमति से सर हिलाया, दोनों ने मन ही मन दृढ़ निश्चय कर लिया कि चाहे कुछ भी हो जाए , वो कभी समीर को ऐसा कुछ नहीं करने देंगी
उनके अंदाज को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता था कि वो अपनी बात पूरी करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं
दोनों समीर से निपटने कि रणनीति तैयार करने लगी
श्वेता : “देख, अभी कुछ दिन के लिए तो तू बिलकुल चुपचाप रह , तेरा ये सौतेला बाप क्या करता है, कौन-२ उसके दोस्त है, किन बातों से खुश होता है, किनसे नाराज होता है, ये सब नोट करती रह, उसके बाद हम उसके हिसाब से आगे का प्लान बनाएंगे ”.
काव्या : ”पर इससे क्या होगा …??”.
श्वेता : “हमें बस ये सुनिश्चित करना है कि जो आज तेरे साथ हुआ है वो दोबारा न हो, और न ही कभी तेरी माँ के ऊपर ऐसी नौबत आये ”.
काव्या : “और जो उसने मेरे साथ किया है आज,उसका क्या ”
श्वेता : “उसका भी बदला लिया जाएगा , तू चिंता मत कर , तभी तो मैं कह रही हु, उसपर नजर रखने के लिए, हमें उनकी कमजोरी पकड़नी है, ताकि उसका फायदा उठाकर हम अपनी मर्जी से उन्हें अपने इशारों पर नचा सके ”
काव्या कि समझ में उसकी बात आ गयी ..

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