सौतेला बाप – Update 13 | Incest Sex Story

सौतेला बाप - Incest Sex Story
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Update 13

पर शायद कुछ देर के लिये..
उनकी तो आज सुहागरात थी..
पर उसका असर काव्या पर क्या हो रहा है ये शायद ना तो रश्मि ने सोचा था और ना ही समीर ने….!
दोनों सहेलिया पूरी रात ढंग से सो नहीं पायी, रश्मि और समीर ने आतंक जो मचा रखा था दूसरे कमरे में, ऐसा लगता था जैसे दोनों वियाग्रा कि गोलियां खाकर आये हो , थकने का नाम ही नहीं ले रहे थे दोनों.
रात के चार बज रहे थे और दूसरे कमरे से अभी भी रश्मि के बजने कि आवाजें आ रही थी.
श्वेता : “यार, एक बात तो माननी पड़ेगी, ये तेरे समीर पापा का स्टेमिना है कमाल का, औरतें को तो कोई फर्क नहीं पड़ता, वो चाहे जितनी बार अपनी चूत में लंड ले सकती है, पर एक ही लंड बार-२ तैयार होकर अंदर जाए, ये कमाल कि बात है ”.
काव्या : “इसमें कमाल कि क्या बात है ”.
श्वेता : “यार, तू न अक्ल से बच्ची ही है अभी तक, तुझे नहीं पता कुछ भी, यु नो , आदमी के पेनिस को दोबारा फ़किंग के लिए तैयार होने के लिए कम से कम तीन-चार घंटे का समय लगता है, और वो भी जवान लड़को को, और तेरे पापा को तो देख जरा, उनकी उम्र फोर्टी को क्रॉस कर चुकी है उसके बावजूद उनका जोश तो देख जरा, तेरी मम्मी के तो मजे हो गए, इतने सालो कि प्यास अब दिन रात प्यार करके बुझेंगी आंटी जी, ……. हा हा ”..
काव्या को उसकी बात का जरा भी बुरा नहीं लगा, चुदाई कि बातें करना तो आम बात थी दोनों के बीच, पर अपनी माँ के बारे में ऐसी बाते सुनकर भी उसे बुरा नहीं लगा, इतनी ट्यूनिंग तो बन ही चुकी थी दोनों के बीच आज कि रात.
दूसरे कमरे से थपा थप कि आवाजें लगातार बढ़ती ही चली जा रही थी.
श्वेता : “यार, मुझसे तो रहा नहीं जा रहा , चल न, दोबारा से बालकनी में चलते हैं, मुझे उन्हें फिर से देखना है ”..
काव्या उसे मना करती, इससे पहले ही वो भागकर बाहर निकल गयी और छोटी सी दिवार फांदकर साथ वाली बालकनी में और फिर दिवार फांदकर मम्मी-पापा कि बालकनी में पहुँच गयी.
काव्या के पास भी अब कोई चारा नहीं था, देखना तो वो भी चाहती थी उन्हें दोबारा, पर शायद अपनी इच्छा जाहिर नहीं कर पा रही थी , वो भी दीवारे फांदकर वहाँ पहुँच गयी..
श्वेता पहले से ही झुकी हुई अंदर का नजारा देख रही थी..
काव्या ने भी अंदर देखा, उसके पूरे शरीर में सिहरन सी दौड़ गयी, समीर ने उसकी माँ रश्मि को बेड पर लिटाया हुआ था और पीछे से उसकी चूत का बेंड बजा रहा था , रश्मि के मोटे-२ मुम्मे खिड़की कि तरफ थे जिन्हे झूलता हुआ देखकर श्वेता और काव्या के मुंह में पानी आ गया.
”ओह्ह्ह्हह्ह समीिर अह्ह्ह्हह्ह्ह येस्स येस्स अह्ह्ह्ह ओह्ह्हह्ह उम्म्म्म्म्म्म्म येस्स्स्स अ अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ”
श्वेता धीरे से फुसफुसाई : “यार तेरी माँ कि ब्रेस्ट देखकर तो मन कर रहा है कि इन्हे चूस लू बस , और तेरे पापा के पेनिस को तो देख जरा , कितना लम्बा है, काश मैं होती तेरी माँ कि जगह ”..
श्वेता अपनी बात कर रही थी और काव्या अपने बारे में सोच रही थी, खुद को वो अपनी माँ कि जगह रखकर देख रही थी, अगर वो उसकी माँ कि जगह ऐसी अवस्था में होती तो भले ही उसकी ब्रेस्ट ऐसे न हिल रही होती, छोटी है न इसलिए, पर पेनिस के अंदर जाने और बाहर आने में जो आवाजें आ रही है, वो जरुर और भी भयंकर होती , अपनी टाईट चूत पर इतना तो भरोसा था उसे..
तभी चीखती चिल्लाती रश्मि कि चूत से समीर का लंड निकल आया और पीछे-२ निकला रश्मि का ढेर सारा पेशाब , और वो भी फव्वारे कि शक्ल में ….
रश्मि आनंद विभोर होकर चिल्ला पड़ी : “अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह उम्म्म्म्म्म्म ओह्ह्ह्ह समीर, बोल रही थी न, इतनी देर से, जाने दो मुझे बाथरूम, देखो, क्या गंद फेला दिया है ”
समीर के झटके बंद नहीं हुए, वो हँसता हुआ बोला : “यही गंद तो मुझे पसंद है मेरी जान, सुकरटिंग का अलग ही मजा है, चलो डालो अंदर इसे फिर से ”..
समीर का इशारा अपने लंड कि तरफ था जो फिसल कर बाहर आ गया था, रश्मि ने उसके मचलते हुए लंड को कुछ देर तक अपनी बह रही चूत के होंठों पर मसला और उसे पूरा नहला दिया फिर एक ही झटके में फिर से अंदर धकेल दिया..
श्वेता तो ये सीन देखकर बुरी तरह से गर्म हो गयी.
वो बोली : “यार, तेरे पापा को तो सारी तरकीबे आती है, इनसे चुद कर सच में बड़ा मजा आएगा ”..
दोनों सहेलियां फिर से अंदर देखने लगी, अपने-२ जहन में खुद को रश्मि कि जगह रखकर चुदते हुए.
शायद चौथी बार था उनका , पर फिर भी समीर को देखकर लग नहीं रहा था कि वो थके हुए हैं , सटासट धक्के मारकर वो चुदाई कर रहे थे.
अचानक समीर ने अपना लंड बाहर खींच लिया, और उठकर रश्मि के चेहरे के पास आ गया, शायद इस बार वो उसके चेहरे पर अपना माल गिराकर संतुष्ट होना चाहता था.
एक दो झटके अपने हाथों से मारकर जैसे ही अंदर का माल बाहर आया, काव्या और रश्मि को लगा जैसे दुनिया रुक सी गयी है, स्लो मोशन में उन्हें समीर के लंड का सफ़ेद और मसालेदार दही रश्मि के चेहरे पर गिरता हुआ साफ़ नजर आया..
रश्मि के चेहरे को अपने पानी से धोने के बाद,बाकी के बचे हुए रस को समीर ने उसके मुम्मों पर गिरा दिया, और वहीँ बगल में लेटकर पस्त हो गया.
शायद ये उनका आखिरी राउंड था.
काव्या ने श्वेता को चलने के लिए कहा, पर जैसे ही श्वेता उठने लगी, उसके सर से खिड़की का शीशा टकरा गया और एक जोरदार आवाज के साथ वो शीशा टूट गया, दोनों सहेलियों कि फट कर हाथ में आ गयी.

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