रोज़ी एक बड़ी ही सैक्सी स्माइल के साथ उपर उठकर अपनी पेंटी को भी उपर चड़ाया और राजेश के होंठो पर एक प्यारा सा किस्स करके बोली
‘’मैं तो आपकी फेन हो गयी डॉक्टर राजेश….सी यू सून’’
इतना कहकर वो अपनी छोटी सी गांड मटकाती हुई बाहर निकल गयी…
और पीछे रह गया राजेश…जो अपनी चेयर पर बैठकर मुस्कुराए जा रहा था…ये उस यकीन की मुस्कान थी जो उसे हो चुका था की ज़रूर इस नेकलेस में ही कुछ जादू है जो उसकी किस्मत का सितारा ऐसे बुलंद हो रहा है.जाने से पहले वो नेकलेस को उतार कर वहीं टेबल पर रख गयी थी…उसे वापिस अपने बेग में रखकर वो पोस्टमार्टम की रिपोर्ट बनाने में लग गया…और शाम होने के बाद वो अपने घर की तरफ चल दिया…
अब इस हार की ताकत वो जान चुका था , पर बेचारे को ये नहीं पता था की पहले वो सही था, अब गलत है . पर इस गलती में भी उसे शायद लाइफ के वो पल मिलने वाले थे जो उसने सोचे भी नहीं थे । जैसे आज की शाम, जो उसके लिए कुछ ख़ास होने वाली थी
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अब आगे
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राजेश जब घर पहुँचा तो उसके लिए मंच पहले से ही सज चुका था…
शाम होने से पहले राधिका अपनी बेटी चाँदनी के साथ आ चुकी थी,
रजनी ने जो कुछ भी उसके कहने पर राजेश के साथ किया था वो उसे सुना डाला था.
राधिका भी बड़े मज़े ले-लेकर वो सब सुन रही थी,
शायद राजेश की जो हालत हुई होगी, उसे सोचकर उसे मज़ा आ रहा था..
और जो प्लान उन्होने बनाया था, राजेश को एक झटका देने का वो अब पूरा हो चक्का था..
हालाँकि उनमें से किसी को भी इस बात का पता नही था की राजेश ने वो डायरी पढ़ ली है जिसमें उनके सारे प्लान लिखे थे,
पर आज हॉस्पिटल में हुई घटना के बाद राजेश उस डायरी में लिखी बातों को भी शेफाली का जादू मानकर फिर से नेक्क्लेस की शक्ति पर यकीन करने लगा था…
इसलिए अब उस डाइयरी में लिखी बातों का कोई महत्व नही रह गया था..
राजेश को बस अब ये एहसास हो चुका था की उस हार का असर एक हफ्ते तक रहता है,
जो अब रजनी, पिंकी और ईशा पर से उतर चुका है,
उसे बस उस हार को उनके गले में एक बार फिर से पहनाना था..
और दूसरी तरफ, रजनी की सारी बातें सुनने के बाद राधिका ने उन्हे अब ये समझा दिया था की जिस प्लान के हिसाब से वो लोग पहले चल रहे थे,
उसी के हिसाब से वो अब चलेंगे..
यानी राजेश को फिर से राजा बनाकर उसके साथ कुछ भी करने को तैयार रहेंगे..
और इस बार इस गेम में राधिका भी हिस्सा लेगी क्योंकि शुरू से इस प्लान को बनाकर सबसे ज़्यादा तो उसी की चूत कुलबुला रही थी..
खैर, जैसे ही राजेश घर पर आया सभी संभल कर बैठ गये..
पिंकी ने दरवाजा खोला और मुस्कुराते हुए उसका स्वागत किया,
हाथ से बेग ले लिया और बड़े ही प्यार से उसे देखा जैसे अपनी चुदाई के लिए आमंत्रित कर रही हो..
पर राजेश सुबह वाली बात भुला नही था…
उसे बिना हार पहनाये वो उससे कोई पन्गा नहीं लेना चाहता था
इसलिए उसकी हँसी से भी इस वक़्त उसे डर लग रहा था, उसे बिना कुछ बोले वो अंदर आ गया.
ड्रॉयिंग रूम में राधिका और चाँदनी को देखकर उसके दिल की धड़कन तेज हो गयी…
राधिका को तो वो कब से पेलना चाहता था, चाँदनी से भी लगभग सब मज़े ले ही लिए थे उसने पिछली बार
पर सुबह की घटना की वजह से अब वो थोड़ा चौकन्ना था…
अंदर आकर वो सोफे पर बैठा और सबसे बाते करने लग गया..
पिंकी चाय बनाकर ले आई और सब चाय पीते हुए नॉर्मल तरीके से बाते करते रहे..
अचानक ईशा ने राजेश से पूछा : “पापा, वो नेक्क्लेस कहाँ है…राधिका आंटी ने देखा नही है अब तक…मैने सोचा दिखा दूँ पर कहीं मिल ही नही रहा…’’
राजेश एक पल के लिए तो घबरा गया…
पर अचानक उसे फिर से उस नेक्क्लेस की शक्ति का एहसास हुआ जिसे वो आज सुबह रोज़ी पर आजमा भी चुका था…
ऐसे में इस वक़्त इन सभी को अगर उसने वो हार एक बार फिर से पहना दिया तो एक बार फिर से उसके यानी शेफाली के प्रभाव में आ जाएँगे..
और फिर वो उनके साथ वही मस्ती दोबारा कर सकता है जो अब तक कर रहा था..
या करने की सोच रहा था..
और इस वक़्त तो राधिका भी यहाँ थी और उसे तो वो नेक्क्लेस पहना कर ही रहेगा…
वो तुरंत उठा और अपने बेग से वो नेक्क्लेस निकाल लाया और बोला : “अर्रे ये आज लंच बॉक्स के साथ लिपट कर मेरे साथ ही आ गया था…मैं जब लंच करने लगा तो देखा…’’
राजेश के हाथ में उस नेक्क्लेस को देखकर राधिका बोली : “अरे …वाउ…ये तो बहुत प्यारा है….मुझे भी ये पहन कर देखना है…’’
इतना कहते हुए वो झत्ट से उठकर राजेश के पास आई…
और उसके उठने का झटका इतना जोरदार था की उसका पैर फिसला और वो लड़खड़ाती हुई सीधा जाकर राजेश की गोद में आ गिरी…
राजेश के आधे उठे लॅंड पर जैसे ही राधिका की नरम गांड का दबाव पड़ा वो विकराल रूप लेने लगा….
और तब उसे इस बात का भी एहसास हुआ की उसका दाँया हाथ उसके मोटे तरबूज जैसे मुम्मे पर है….
बेचारे ने सकुचाते हुए अपना हाथ खींच लिया पर राधिका के चेहरे पर आई शरारती हँसी को उसने ज़रूर नोट कर लिया जो बता रही थी की उसने बुरा नही माना…
वो सॉरी बोलते हुए उसके साथ वाली सीट पर बैठी और हार लेकर अपने गले में डाल लिया…
जैसे ही उसने हार डाला ,उसकी आँखे फिर से राजेश की तरफ मुड़ गयी …
उसने राजेश के चेहरे को देखा और फिर उसकी नज़रें फिसलकर जब नीचे लॅंड पर पहुँची तो वहां एक अच्छा ख़ासा तंबू बन चुका था, जिसे देखकर उसके चेहरे पर हवस उभर आई….
और राजेश को वो नेक्क्लेस का असर लगा..
वो भी मुस्कुरा दिया और आँख मारकर उसका यानी शेफाली का स्वागत किया..
राधिका : “वाव् ….इट्स सो प्रेटी….देखो ना चाँदनी …कैसा लग रहा है….ब्यूटिफुल ना…’’
चाँदनी : “यस …मोंम …मैने तो पहले ही कहा था आपसे….ये आपको भी अच्छा लग रहा है…मुझे भी काफ़ी अक्चा लगा था….रूको मैं पहन कर दिखाती हूँ …’’
इतना कहकर उसने वो नेककलेशस अपनी माँ से लिया और अपने गले से लगाकर दिखाया…
अब उसके चेहरे के एक्सप्रेशन जानने की बारी फिर से राजेश की थी …
चाँदनी ने भी उसी मदहोशी और प्यासी नज़रों से राजेश को देखा…
राजेश ने उसे देखकर भी आँख मार दी…
और मन ही मन बुदबुदाया ‘दो तो आ गयी अंदर….अब ये तीन और बची है…’
राजेश : “एक काम करो ना…सब पहन कर देखो….मैं बताता हूँ की किसे सबसे ज़्यादा सूट कर रहा है….ओक ‘’
राजेश ये छोटा सा खेल खेलकर उस नेक्क्लेस के जाल में सभी को फँसाने की कोशिश कर रहा था और उसकी चाल को समझकर वो सभी उसे बेवकूफ़ समझ कर मन ही मन मुस्कुरा रहे थे…
चाँदनी के बाद ईशा ने और फिर रजनी ने भी वो नेक्क्लेस अपने गले में पहन कर सबको दिखाया…
सिर्फ़ पिंकी बची थी.
राजेश : “अर्रे पिंकी…तुम भी पहनो ना…शरमाओ मत….तुम भी तो हमारे घर की सदस्य जैसी ही हो….पहनो..’’
बेचारी ने सकुचाते हुए वो हार पहन कर दिखाया और एक बार फिर से डॉक्टर के लॅंड को अपनी चूत में लेने की कल्पना मात्र से उसका शरीर सिहर उठा….
और उसने गुलाबी आँखों से राजेश को देखा जो मुस्कुरा कर उसे आँख मार रहा था…
उसने शरमाते हुए नज़रें नीचे कर ली और हाह उतार कर किचन में भाग गयी..
अब राजेश को पूरी तसल्ली हो चुकी थी की वो सब उसकी बॉटल में उतर चुकी है..
अब तो बस एक -1 करके उन्हे पेलना था उसे…
और इन सबमे किसका नंबर पहले लगाए वो यही सोच रहा था..
अपनी बीबी को तो वो बरसों से पेलता आ रहा था…
और पिछले कुछ दिनों में तो कुछ ज़्यादा ही मज़े दिए थे उसने…
पिंकी के साथ भी उसने अच्छी तरह से मज़े ले लिए थे…
अब उसके घर में ईशा बची थी…
जिसे वो ना जाने कब से चोदना चाह रहा था….
चूसम चुसाई भी लगभग हो चुकी थी, सिर्फ़ चोदना बाकी रह गया था..
और वहीं दूसरी तरफ उन माँ बेटी की जोड़ी पर भी उसकी काफ़ी दिनों से नज़र थी…
चाँदनी और राधिका..
आज चाँदनी को यहीं रोक लिया जाए तो उसे चोदा जा सकता है..
यही सोचकर उसने राधिका से कहा : “आज आप चाँदनी को यही रहने दीजिए…कल संडे है..आज बच्चे एक साथ रह लेंगे..पार्टी करेंगे…’’
उसने मुस्कुराते हुए चाँदनी को देखा जिसकी आँखों में पहले से ही चमक आ चुकी थी…
और हंसते हुए बोली : “आई डोंट हॅव एनी प्राब्लम….चाँदनी चाहती है तो वो रुक सकती है….बट …मुझे कार चलाने में थोड़ी दिक्कत है, चाँदनी मुझे लेकर आई है, तो मैं घर कैसे जाउंगी …’’
राजेश तपाक से बोला : “मैं छोड़ आऊंगा आपको घर…डोंट वरी…’’
जब राजेश ने ये कहा तो दोनो की नज़रें मिली और वो दोनो मुस्कुरा दिए…
जैसे चुदाई का वक़्त और जगह मिल गयी हो दोनो को…’’
रजनी भी समझ गयी की आज उसका पति राधिका को अच्छे से पेलेगा..
इसलिए वो भी उसकी तरफ देखकर उसे एक आँख मारकर मुस्कुरा दी.
चाय पीने के बाद राजेश अपने रूम में फ्रेश होने चला गया और नहा धोकर एक जीन्स और वाइट टी शर्ट पहन कर आ गया…
जिसमें वो काफ़ी स्मार्ट लग रहा था.
राधिका भी सबको बाइ बोलकर राजेश के साथ अपने घर की तरफ चल दी.
पूरे रास्ते दोनो इधर-उधर की बाते करते रहे ये जानते हुए की घर पहुँचकर क्या होने वाला है..
घर के सामने जब कार रुकी तो राजेश अंदर बैठा रहा और राधिका उतर गयी और थेंक्स बोलकर अपने घर की तरफ चल दी…
बेचारे राजेश का चेहरा देखने लायक था…
वो तो क्या -2 सोचकर बैठा था…
राधिका भी जान बूझकर उसे तड़पाने के लिए ऐसा कर रही थी…
पर वो जानती थी की खड़े लॅंड को ज़्यादा इंतजार नही करवाना चाहिए, उसे बैठने में देर नही लगती…
फिर उसे ही डबल मेहनत करनी पड़ेगी लॅंड उठाने में …
इसलिए वो बड़ी ही अदा के साथ पलटी और बोली : “आप प्लीज़ अंदर आइए ना…एक-2 ड्रिंक हो जाए, फिर चले जाना…’’
उफ़फ्फ़…..
एक तो ये खुद इतनी सैक्सी उपर से ड्रिंक पिलाने का ऑफर…
ऐसे डेड्ली ऑफर को वो कैसे मना कर सकता था भला…
और वैसे भी वो यहाँ आया ही इसी अभिलाषा में था…
ये दारू तो बहाना था बस राधिका के घर जाने का.
उसने जल्दी से कार पार्क की और राधिका के पीछे-2 अंदर आ गया.
उसका घर काफ़ी आलीशान था…
पहले भी वो 1-2 बार फॅमिली के साथ आ चुका था वहां …
पर आज की बात कुछ ओर थी.
वो अंदर आ गया और राधिका ने दरवाजा बंद करके कहा : “आप बैठिए राजेश जी, मैं फ्रेश होकर आती हूँ …तब तक आप प्लीज़ स्टार्ट कीजिए..’’
उसने सोफे के पीछे बनी बार की तरफ इशारा करते हुए कहा.
राजेश बार स्टूल पर बैठा और ब्लैक लेबल बॉटल के 2 हेवी पेग बनाए…और राधिका का इंतजार करने लगा.
और जब वो आई तो ऐसा लगा जैसे कयामत उसकी तरफ चलती हुई आ रही है…
उसने इतना सैक्सी सा गाउन पहना हुआ था जिसमें से उसके बिना ब्रा के मोटे मुम्मे थिरकते हुए सॉफ दिख रहे थे…
गाउन साइड से स्लिट था जिसकी वजह से उसकी जाँघो का दूधियापन सॉफ दिख रहा था..
कुल मिलाकर वो चुदाई के पूरे मूड में थी.
राधिका आई और साथ वाले स्टूल पर बैठते हुए अपनी ड्रेस की तरफ इशारा करके बोली : “वो क्या है ना की रात के टाइम मैं थोड़ा रिलॅक्स होकर रहती हूँ …इसलिए ये…’’
राजेश : “इट्स ओ ओके ….आई डोंट माइंड…इनफॅक्ट…आप इस ड्रेस में बहुत सैक्सी लग रहे हो….’’
ये बात राजेश ने इतने कॉन्फिडेंस से इसलिए कही थी क्योंकि उसे पता था की वो इस वक़्त नेक्क्लेस के प्रभाव में है, इसलिए वो उसे बुरा भला नही कहेगी…
राधिका भी उसकी बात सुनकर शरमाते हुए अपना पेग उठा कर पीने लगी…
राजेश ने भी सिप ली और ड्रिंक पीने लगा…
अब वो सोच रहा था की कैसे बात आगे बड़ाई जाए…
और तभी उसे ध्यान आया की वो भला इन बातो को क्यों सोच रहा है…
राधिका पर तो नेक्क्लेस का असर होगा ही…
ऐसे में वो खुद ही उसपर मेहरबान होकर उसे चुदाई करने देगी …
और उसकी किसी भी बात का बुरा नही मानेगी…
बस ये बात उसके अंदर कॉन्फिडेस लाने के लिए बहुत थी…
उसने अगले 2 घूंठ में ही पूरा पेग खाली कर दिया जिससे दारू एक ही बार में उसके सिर भी चढ़ गयी…
आँखे लाल हो गयी उसकी…
और उन सुर्ख आँखो से जब उसने राधिका के मोटे मुम्मो को देखा तो राधिका को भी अपने पूरे शरीर में एक सुरसुरी सी महसूस हुई….
ये वो एहसास था जिसे हर वो स्त्री महसूस करती है जब उसकी जाँघो के बीच की नमीं उसे एक ऐसे नशे की तरफ खींचती है जिसमे गिरने के बाद वो दुनिया को भूल जाती है …
राधिका भी उस नशे मे गिरने के लिए तैयार बैठी थी…
बाकी का काम राजेश ने कर दिया,
वो एक झटके से उठा और राधिका को बाहों में भरके उसकी गर्दन पर अपने गीले होंठ रख दिए..
ये सब इतनी जल्दी हुआ की राधिका को संभलने का मौका भी नही मिला…
पर उसके मुँह से एक लम्बी सिसकारी ज़रूर निकल गयी…
एक तो राजेश की जोरदार पकड़ ने उसके मोटे मुम्मों को उसकी छाती से रगड़कर पीस डाला था
और उपर से उसके होंठो ने उसके सबसे सेन्सिटिव पॉइंट यानी गर्दन पर हमला कर दिया था…
और वो अपने होंठो से इस वक़्त उसे ऐसे चूस रहा था जैसे ड्रॅक्यूला अपने शिकार का मज़ा लेता है.
‘’सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स……………………. आआआआआआआआआअहह…………. ओह…….. राजेईईईश्ह’’
राजेश को तो पहले से ही विश्वास था की वो उसका विरोध नही करेगी…
क्योंकि उसके अनुसार वो इस वक़्त राधिका को नही बल्कि शेफाली को अपनी बाहों में भर रहा था…
पर उसके रसीले बदन को बाहों में भरकर वो बाकी की सारी बातें भूल गया…
और यही हाल इस वक़्त राधिका का था…
क्या प्लानिंग की थी , क्यों की थी , वो सब इस वक़्त उसे याद भी नही था…
याद था तो बस राजेश का लॅंड
जिसके सपने उसने ना जाने कब से देखे थे..
और वो इस वक़्त उसके अंदर जाने के लिए मचल रहा था…
मचल तो उसका हाथ भी रहा था लॅंड पकड़ने के लिए,
इसलिए उसने बिना कोई विलंब किए अपना हाथ नीचे किया और राजेश की पेंट पर बने तंबू को अपनी हथेली से ढक लिया..धक् क्या लिया उसे भींच दिया अपने हाथों से
बेचारा राजेश खड़े लॅंड पर हुए हमले से कराह सा उठा..
‘’आआआआआआआआआआहह………. एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स…………..’’
राजेश के लॅंड पर हमला हो और वो चुपचाप बैठा रहे, इतना भी शरीफ नही था वो डॉक्टर…
उसने तुरंत अपने पंजे उसके दोनो मुम्मो पर जमाए और उन्हे जोरों से भींच डाला…
इस बार कराहने की बारी राधिका की थी….
‘’आआयययययययययययययययययययययययययययीीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई……..अहह……ढीईईईईरईईईईईईईयययी’’
मुममे इतने मोटे थे की राजेश के हाथों मे नही समा रहे थे…
उसने उन्हे दबाते हुए अपना मुँह उपर किया और उसके तपते होंठो पर अपने होंठ रखकर उन्हे चूसने लगा..
राधिका के बिना ब्रा के मुम्मे इतने मुलायम थे की उन्हे अपने मुँह पर रगड़ना चाहता था राजेश…
इसलिए उसने उसका गाउन पकड़कर उतार डाला…
एक ही पल में वो सैक्स की मूरत उसके सामने नंगी खड़ी थी…
कुछ पलों तक तो वो उसके नंगे जिस्म को निहारता ही रहा….
फिर जब होश आया तो उसपर फिर से टूट पड़ा…
होंठो को चूसते हुए उसने अपना चेहरा नीचे किया और एक-2 करके दोनो निप्पलों को मुँह में भरकर जी भरकर उसका दूध पिया….
और फिर उन कड़क निप्पल से युक्त मुम्मों को अपने चेहरे पर ऐसे रगड़ने लगा जैसे उनसे अपना चेहरा सॉफ कर रहा हो…
उनसे मसाज करवाने लगा वो अपने चेहरे की…
इतने मोटे , नर्म, मुलायम मुम्मो को अपने मुँह पर रगड़ने के बाद वो किसी और ही दुनिया में खो सा गया…
पर नीचे से आ रही भीनी खुश्बू ने उसका ध्यान अपनी तरफ खींचा….
वो बिना अपने होंठ उसके बदन से हटाए नीचे जाने लगा और सीधा लेजाकर उसकी फड़क रही पुस्सी पर जमाए और उन्हे ऐसे चूसने लगा जैसे बच्चा अपनी माँ का निप्पल चूसता है…
दूध तो नही निकला उसमें से पर ढेर सारा रास ज़रूर निकल कर उसके मुँह में जाने लगा…
अब तो उसे ऐसे रसीले जूस के स्वाद की पहचान भी होने लगी थी….
जैसे की ये रस…
थोड़ा नमकीन और खट्टापन लिए था,
जो दर्शाता था की उसे खट्टी चीज़ें कितनी पसंद है….
अभी तक जितनी भी चूतें उसने चूसी थी, उसमें से सिर्फ़ ईशा की ही चूत थी जो एकदम शरबत की तरह मीठी थी…
और होती भी क्यों नही,
उसे मीठा इतना पसंद था की हर वक़्त चॉक्लेट, आइसक्रीम, केक , स्वीट्स और जो भी मिल जाए वो खाती रहती थी…
वही सब तो नीचे से निकल कर उसके जैसे ठर्कियों के मुँह का स्वाद बनता था…
लेकिन जो भी हो,
खट्टा, मीठा, नमकीन या कुछ और….
चूत की चुसाई का अपना ही मज़ा है…
और वो मज़ा इस वक़्त राजेश भरपूर तरीके से ले रहा था.
‘’आआआआआआआआआआआआआआआआआअहह…… ओह राजीईईईईईश………. उम्म्म्मममममममममममममममममममममममममम…….. कब से…….. अहह कब से प्यासी हूँ मैंssssss ……..आज मेरी प्यास बुझा दो……..पी जाओ मुझे……….मज़ा दो मुझेsssssssss ……….चूसोsssssssss ……..चाट जाओ…..आआआआह्ह्ह्हह्ह ’’
राजेश ने भी एक पल के लिए उसके चेहरे को देखा, जो आँखे बंद किए ये सब बड़बड़ा रही थी…..
और सोचने लगा की ये कैसी प्यास है शेफाली की जो बुझती ही नहीं
पर बेचारा ये नही जानता था की हर औरत , हर लड़की का बदन ऐसे ही प्यासा होता है और उनकी प्यास बुझाना उसके और हम जैसे मर्दों का काम है..
खैर, एक गहरी साँस लेकर वो एकबार फिर से उसकी वेल्वेट जैसी चूत की परतों की खुदाई करने लगा…
राजेश ने उसे पीछे धकेलते हुए सोफे पर चित्त लिटा दिया…
एक हाथ से उसके मोटे मुम्मे को मसलते हुए, दूसरे से उसकी गांड को दबाने लगा…
मुँह से तो वो उसकी चूत का जल्जीरा पी ही रहा था…
अपने शरीर पर एक साथ हो रहे हमलों ने राधिका की हालत खराब कर दी…
वो उस सोफे पर बिन पानी मछली की तरह तड़पने लगी
ऐसा लग रहा था जैसे राजेश उसके अंदर का पानी खाली कर रहा है
और वो उस चुसाई का आनंद लेती हुई कमान की तरह कमर उठा कर दोहरी होती चली गयी
राधिका उसकी साँप जैसी जीभ पर अपनी चूत को छुवा कर ऐसे नाच रही थी जैसे बीन की ताल पर नागिन नाचती है…
राजेश की जीभ इतनी लंबी थी तो उसका लॅंड कितना लंबा होगा…
जब वो अंदर जाएगा…
यही सोचकर उसकी चूत का पानी नल की तरह बहे जा रहा था..
अब उससे ज़्यादा बर्दाश्त नही हो रहा था. उसने अपनी चूत को उसके मुँह से ना चाहते हुए भी ज़बरदस्ती छुड़वाया और उसे घसीट कर अपने बेडरूम में ले गयी…
क्योंकि आगे जो एक्शन होने वाला था उसके लिए ड्रॉयिंग रूम का वो सोफा छोटा पड़ जाता..
वहां जाते हुए राजेश के कपड़े एक-2 करके उतरते चले गये…
और जब राधिका ने उसे अपने मोटे गद्दे वाले बेड पर धक्का दिया तो वो पूरा नंगा हो चुका था…
अब वो किसी लोमड़ी की तरह अपने मोटे मुम्मे लटकाए हुए उसकी तरफ बढ़ने लगी…
उसकी आँखों में राजेश का मोटा लॅंड चमक रहा था…
जिसे वो कुछ ही देर में अपनी चूत में लेने वाली थी…
पर उस से पहले उसे चूस्कर उसे गीला करना भी तो बनता था, ताकि वो एक ही बार में उसकी चूत की परतों में उतरता चला जाए…
लॅंड के ठीक उपर पहुँचकर उसने उसे पकड़ा और अपनी जीभ से टच किया…राजेश की ठंडी सिसकारी निकल कर पूरे कमरे में फैल गयी..
और फिर बिना किसी दूसरी चेतावनी के राधिका का सिर नीचे तक आया और उसने एक ही बार में उसके साढ़े सात इंची लॅंड को अपने मुँह से नाप लिया..
और फिर तो वो रुकी ही नही,
उसे ऐसे चूसने लगी जैसे पति के मरने के बाद आज पहली बार लॅंड चूसने को मिला हो…
वो इतनी ज़ोर से उसे चूस रही थी जैसे उसे उखाड़ कर अंदर ही निगल जाएगी…
वो तो राजेश ने उसके सिर पर हाथ रखकर उसकी स्पीड पर ब्रेक लगाया वरना उसकी उत्तेजना के आगे उसका लॅंड टूट कर बिखर ही जाता…
राधिका को भी जैसे होश आया….
अब वो लॅंड पूरा थूक में भीगकर ऐसे चमक रहा था जैसे तेल का लेप किया हो उसपर…
थूक से सना हुआ…
चूत में जाने के लिए एकदम पर्फेक्ट ड्रेस थी ये…
वो उपर तक खिसकती हुई आई और लॅंड के उपर अपनी चूत रखकर राजेश की आँखो में देखा…
और मुस्कुराती हुई अपनी चुदाई के लंबे सफ़र पर निकल पड़ी..
राजेश को जब उसकी चूत की टाइटनेस का एहसास हुआ तो उसे लगा जैसे वो किसी 25 साल की लड़की को चोद रहा है…
ऐसा लग ही नही रहा था की वो चाँदनी जैसी जवान लड़की की माँ है..
पर जो भी था, ऐसी टाइट चूत को मारने का मज़ा ही कुछ और होता है….
उसने अपने हाथ उसके मुम्मो के स्टेयरिंग पर लगाए और अपने लॅंड का ट्रक उसकी चूत के हाइवे पर सरपट दौड़ाने लगा…
मुम्मे पकड़कर नीचे से मिल रहे झटकों ने राधिका की चीखें ही निकलवा दी…
राजेश के तगड़े झटके उसके मस्त बदन पर ऐसी लहरें पैदा कर रहा था जिन्हे महसूस करके उसकी बरसों पुरानी प्यास बुझती चली गयी..
‘’आआआआआआआआआआआआआअहह …..ओह मररररर गयी………अहह….. मजाआाआअ आआआआआआआ गय्ाआआआ…… एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स राजेश…….. छोड़ो मुझे………. अहह……. तुम्हारा लॅंड बहुत मोटा है……. उम्म्म्ममममममममममम….. मजेदार है……… मजाआ आ रहा है…….. उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़……….. ज़ोर से चोदो मुझे………….. राजेश………… ‘’
राजेश ने एक झटके से उसे बेड पर नीचे लिटाया और खुद उसकी टॅंगो खोलकर उपर पहुँच गया, ये सब उसने अपना लॅंड निकाले बिना किया..
और फिर अपने लॅंड को पूरा अंदर तक धकेलकर उसकी बच्चेदानी से टकराकर ऐसे झटके मारे उसने की जो चीखें निकल रही थी राधिका की वो भी उत्तेजना के मारे गले मे ही अटक कर रह गयी….
ऐसा तो उसने आज तक महसूस नही किया था…
सही सुना था उसने अपनी सहेली रजनी से की उसका पति राजेश जब उसे जमकर चोदने पर आता था तो उसकी साँसे अटक सी जाती थी…
कुछ ऐसा उसके साथ भी हो रहा था इस वक़्त…
फेकिंग तो उसने कितनी बार करवाई थी पर असली चुदाई क्या होती है , ये आज उसने जाना था.
और जल्द ही उसकी चुदाई के परिणाम आने शुरू हो गये….
उसके ऑर्गॅज़म के रूप में ..
राजेश के लॅंड ने ऐसे झटके मारे की एक के बाद एक उसके करीब 2-3 ऑर्गॅज़म एक साथ आ गये…
ये भी उसकी लाइफ में पहली बार हुआ था….
आज तो वो राजेश के लॅंड की कायल हो गयी थी..
और अंत मे जब राजेश ने झड़ना शुरू किया तो उसकी चूत का कुँवा पूरी तरह भर सा गया….
जो बरसों से प्यासा था..
पर आज के बाद वो प्यासा रहने वाला नही था.
जब उसकी चूत का कुँवा लबालब भर गया तो अंदर से राजेश का माल निकलकर बाहर गिरने लगा…
उस वक़्त भी राजेश का लॅंड इतना कड़क था की एक और चूत का पानी निकलवा सकता था वो..
ऐसी चुदाई करवाकर उसे होश हि रही रहा की वो कहाँ है…
कुछ देर बाद जब उसे होश आया तो राजेश नंगा ही उसके सामने चेयर पर बैठकर शराब का दूसरा पेग बनाकर पी रहा था…
इस शराब ने उसकी चुदाई का रंग दुगना कर दिया था…
अपना नंगा और गदराया बदन लिए वो शराबी सी चलती हुई बाथरूम की तरफ चल दी.
और फ्रेश होकर जब वो आई तो राजेश अपने कपड़े पहन कर वापिस जाने की तैयारी में था…
हालाँकि उसने राजेश को रोकने की कोशिश की पर वो नही माना…
पर अगले दिन आने का वादा ज़रूर कर गया वो.
उसे विदा करके वो मुस्कुराती हुई वापिस आई और अपने उसी बिस्तर पर आकर सो गयी जिसमे से अभी तक सैक्स की खुश्बू आ रही थी..
और राजेश चल पड़ा अपने घर की तरफ ,
जहाँ राधिका की बेटी चांदनी उसका इंतजार कर रही थी.













