निशा: ”आआआआआआआआआआआआहह ऊऊऊऊऊऊओह मररर्र्र्र्र्र्र्र्र्रर्र्र्ररर गईईईईईईईईईईईईईईsssssssss ….. आआआआआआआआआहहsssssssssss पापाsssssssss…………………………….”
आशा भागकर उसके करीब गई और बेड पर चढकर वो निशा के चेहरे को चूमने लगी ।
वो तो ऐसे दिलासा दे रही थी उसे जैसे वो बरसो से चुदती आई है, आशा अपने होंठ उसके होंठो पर रखकर उसे बुरी तरह से चूसने भी लगी.
आशा की किस का जवाब भी देना शुरू कर दिया था निशा ने….दोनो एक दूसरे के होंठों को किसी भूखी बिल्लियों की तरह से चूस रही थी…और आशा ने जब देखा की निशा का दर्द अब गायब हो चुका है तो वो बेमन से वापिस अपनी जगह पर जाकर बैठ गयी..
निशा ने जाते हुए उसे थेंक्स भी कहा…और फिर अपने पापा के साथ वो एक बार फिर से मस्ती के खेल में शामिल हो गयी.
अब तो वो अपनी टांगे दोनो दिशाओ में फेलाकर पूरे जोश से अपने पाप के लंबे लंड को अंदर तक ले रही थी…और सिसकारियाँ मारकर उसे और ज़ोर से चोदने के लिए उकसा भी रही थी…
निशा:”आआआआआआआआहह पापा…….. मेरी जानssssssssss ……. और तेज़ी से करो……………… उम्म्म्ममममममममममम…… आहह पापा………….. मजा आ रहा है ………………….. उम्म्म्ममममममममम….. इसी मज़े के लिए कब से तरस रही थी….. आआआआआआआआहह …….. ऐसे ही………………. हमेशा मेरे अंदर ही रहना …………………. दिन रात……………….चोदो मुझे ………………मेरे प्यारे पापा………………………. सिर्फ़ मेरे पापा……………..”
दूर बैठी छोटी बहन आशा बुदबुदा उठी ..’तेरे ही क्यो….मेरे भी तो पापा है…
वो अपनी चूत को खोलकर मसल रही थी ….. और साथ ही साथ बाहर की तरफ निकले हुए क्लिट के दाने को भी रगड़कर अपनी गर्मी शांत करने की कोशिश कर रही थी।
लेकिन जगदीश राय और निशा में से किसी का भी ध्यान उसकी तरफ नहीं था, वो दोनों तो बुरी तरह से एक दूसरे को चोदने में लगे हुए थे
जगदीश राय भी अपनी पागल सी हुई जा रही बेटी को इस तरह से चोदकर बावला हुए जा रहा था, और वो इस मौके का भरपूर फायदा उठा रहा था….
आख़िरकार ज़ोर-2 से चिलाते हुए निशा झड़ गयी …
निशा: ”आआआआआआआआहह ओह माय गॉड ……………. पापा ………………… आई एम कमिंग ………………”
जगदीश राय भी चिल्लाया : “मैं भी आआआआआआय्य्ाआआआआ… मेरी ज़ाआाआआनन्न….”
निशा : “अंदर ही निकालो ………….पापा…………. आज मेरे…………………. अंदर ही निकााआआाआल्लो…..”
लेकिन यहाँ ना तो कंडोम लगाने का टाइम था और ना ही जगदीश राय ने कुछ समझदारी दिखाई….और उपर से निशा खुद ये बात बोल रही थी की उसके रस को अंदर ही निकाले….क्या वो प्रेगञेन्ट होना चाहती है….ये बात आशा को परेशान कर रही थी.
निशा ने भी ऐसा कुछ नही सोचा था….लेकिन इस मौके पर आकर वो एक बार अपने अंदर तक अपने पापा के प्यार को महसूस करना चाहती थी…इसलिए उसने एक सेकेंड में ही ये सोच लिया की आज जो हो रहा है, होने दो…बाद में टेबलेट ले लेगी…
जगदीश राय ने भी एक सांड की तरह हुंकारते हुए अपने लंड का सारा पानी अपनी प्यारी बेटी की चूत के अंदर निकाल दिया….
”आआआआआआआआआआअहह मेरी ज़ाआाआआआअन्न् ……ये ले………………….”
जगदीश राय ने अपनी प्यारी बेटी के लिए सहेज के रखा हुआ प्रेम रस पूरी तरह से उसकी प्यासी चूत
मे उडेल दिया , अपनी बाल्स को पूरी तरह से खाली कर दिया उसने..
निशा की चूत ने भी जगदीश राय के लंड को किसी वेक्यूम क्लीनर की तरह चूस डाला और पूरी तरह से तृप्त होकर पस्त हो गयी.
और फिर गहरी साँसे लेता हुआ उसके मुम्मों पर सिर रखकर लेट गया…उसका लंड अपने आप फिसलकर बाहर निकल आया…और पीछे से निकला दोनो के प्यार का मिला जुला पानी में लिपटा सफ़ेद जूस…
आशा ने जो आज देखा था उसे सोचकर उसका पूरा शरीर गर्म सा हो रहा था….वो भी कुछ देर में इसी लंड से गांड मरवाएगी …और उसका भी ऐसे ही पानी निकलेगा…वो भी मज़े लेगी…वो भी चिल्लाएगी….ये सब सोचते-सोचते वो मुस्कुरा दी।
जगदीश राय और निशा दोनो ने नोट ही नही किया की उनके पीछे खड़ी आशा उनके इस मिलन को देखकर कैसे अपने बूब्स और चूत को रगड़ रही है…
उसे पता था की अभी तक उसका नंबर नही आया है,इसलिए वो इस तरह से दूर खड़ी होकर अभी के लिए तो बस यही कर सकती थी…पर वो ऐसी थी नही…वो जानती थी की आजकल की दुनिया में ऐसे दूर रहकर कुछ नही मिलने वाला…बड़े लोग हमेशा छोटो को दबाते है..उनके हक को खुद छीनकर ले जाते है…भले ही अभी के लिए इन दोनों बहनों में ऐसी कोई भी भावना नही थी पर इस तरह दूर खड़े होकर वो निश्चिन्त तौर पर कुछ खो ही रही थी…या ये कह लो की उसकी बहन सारे मज़े खुद लेकर उसे ऐसे मज़े से वंचित रख रही थी..
और कुछ पाने के लिए वो उन दोनो के करीब आ गयी…
वो भी तो नंगी ही थी…इसने अपना वो नंगा बदन अपने पापा से ले जाकर चिपका दिया…
क्योंकि वो जानती थी की जो भी उसके साथ होगा वो पापा के लंड द्वारा ही होगा…
इधर जगदीश राय और निशा अब दूसरे राउंड के लिए पूरी तरह तैयार थे,जगदीश राय और निशा दोबारा एक दूसरे के होठों को चबाने में मशगूल हो गए,पर जगदीश राय को जब आशा के गर्म बदन का एहसास हुआ तो उसने अपनी किस्स तोड़ी और आशा की तरफ देखा…निशा भी उसे देखकर समझ चुकी थी की उसकी बदन में भी अब कुलबुलाहट शुरू हो चुकी है….दोनो ने मुस्कुराते हुए आशा को भी अपनी बाहों मे जगह देकर उसे अंदर घुसा लिया….और फिर एक साथ तीनो ने अपने-2 मुँह आगे कर दिए और तीन तरफ़ा स्मूच शुरू हो गयी….
दोनो बिल्लियों की तरह जगदीश राय के होंठों को ही चूसने का प्रयास कर रही थी…जगदीश राय भी कभी एक को तो कभी दूसरी को फ्रेंच किस कर रहा था…ऐसे अलग-2 नर्म होंठों को चूसने में उसे बहुत मज़ा आ रहा था…ऐसा ही कुछ वो उनकी चुतों के साथ भी करना चाहता था.
जगदीश राय ने तुरंत वो सामूहिक किस्स तोड़ी और अपनी गोद मे बैठी निशा को नीचे उतार दिया…वो तो उसपर से उतरने को ही राज़ी नही हो रही थी…पर जब जगदीश राय ने उसकी गर्म चूत में उंगली डाली तब जाकर वो नीचे उतरी…
उन दोनो को जगदीश राय ने धक्का देकर बेड पर लिटा दिया, जगदीश राय अपने होठों पर जीभ फिर रहा था, दोनो बहने उसे ऐसा करते हुए देख रही थी और अपनी चूत में उंगली और मुम्मो पर पंजा लाकर उसके आगे बढ़ने का इंतजार कर रही थी…
जगदीश राय के लण्ड को देखकर दोनो की चूत में से नींबू पानी निकल रहा था..
जगदीश राय ने दोनो की बहती हुई चूत देखी और वो उनके पैरों के पास आकर बैठ गया…अब तक दोनो समझ चुकी थी की उनके साथ क्या होने वाला है…दोनो ने एक दूसरे का हाथ जोरों से पकड़ लिया…
जगदीश राय ने दोबारा सबसे पहले निशा की चूत में अपना मुँह डाला…वहाँ से इतना गीलापन निकल रहा था की उसे एक पल के लिए ऐसा लगा की वो लिम्का पी रहा है…एकदम शहद में लिपटा खट्टा-मीठा सा स्वाद था उसकी चूत के रस का…
कुछ देर तक उसे चूसने के बाद वो आशा की तरफ पलटा…और अपनी जीभ लगाकर उसका स्वाद चखा…वो थोड़ा मीठा था…उसने अपने होंठों और दाँतों से उसकी चूत पर हमला कर दिया…
वो तड़प उठी…और तड़पकर उसने पास लेटी निशा को पकड़कर अपने उपर खींच लिया…और उसके मम्मों को जोरों से चूसने लगी…
”आआआआआआआआआहह माय बैबी…”
निशा को अपनी छोटी बहन अपनी बच्ची जैसी लग रही थी…जो अभी पैदा हुई थी…वो उसे माँ बनकर अपना दूध पिलाने लगी…नीचे से जगदीश राय उसकी चूत चूस रहा था और उपर से वो निशा के मम्मे चूसकर अपना सारा मज़ा आगे ट्रान्स्फर कर रही थी…
कुछ देर बाद जगदीश राय फिर से निशा की चूत पर आ लगा…और ऐसा उसने करीब 3-4 बार किया….कभी आशा तो कभी निशा की चूत चाटता…
अब निशा भी उठकर आ गई और अपने पापा के साथ साथ आशा की चूत चाटने लगी।जल्दी ही आशा की चूत ने जवाब दे दिया।आशा काफ़ी देर से बिलख रही थी…और आख़िरकार उसकी चूत ने पानी छोड़ ही दिया…
वो भरभराकर झड़ने लगी….जगदीश राय और निशा ने मिलकर उसकी चूत का पानी पी डाला..
अब जगदीश राय की बारी थी…निशा ने उन्हें बेड पर लिटा कर पीछे पिल्लो लगा दिया और खुद उनकी टाँगो के बीच पहुँच गयी…दूसरी तरफ से आशा भी आ गयी…फिर दोनो ने मुस्कुराते हुए एक दूसरे को देखा और मिलकर जगदीश राय के लंड पर टूट पड़ी…जगदीश राय का लंड जिसमे अभी भी निशा की चूत का पानी और वीर्य लगा हुवा था।लेकिन दोनों बहनें रंडियों की तरह अपने पापा का लंड चूसने चाटने लगी।
जगदीश राय ने तो बेड की चादर को ज़ोर से पकड़ लिया जब उसपर ये हमला हुआ तो…निशा ने उसके लण्ड को निगल लिया था और आशा ने उसकी गोटियों को….
ऐसा लग रहा था जैसे भूखे इंसानों को 1 महीने बाद कुछ खाने को मिला है…
जगदीश राय के लंड को चूस चूस करके दोनों खाने लगी…उनकी गर्म जीभे , तेज दाँत और नर्म होंठों के मिश्रण से उसे बहुत गुदगुदी भी हो रही थी…पर उससे ज़्यादा मज़ा भी बहुत आ रहा था…
जगदीश राय ने हाथ आगे करके दोनों के मुम्मे सहलाने शुरू कर दिए…दोनो के निप्पल एकदम कड़क हो चुके थे…उन्हे मसलने में उसे बहुत मज़ा आ रहा था…जगदीश राय दोनों के निप्पलों को दोनों हाथों से नोंच रहा था।
दोनों जगदीश राय के लंड को बुरी तरह से चूस रहे थे, एक गोटियां चूस रही थी तो दूसरी लंड.
दोनों बहने नंगी जगदीश राय के सामने थी..जगदीश राय के मुँह में पानी आ गया उन गोरी-2 छातियों को देखकर ।
और उसने आशा को अपनी तरफ खींचकर अपने होंठ लगा दिए उसके मुम्मों पर और जोरों से चूसने लगा..
आशा ने जगदीश राय के सिर को पकड़कर और ज़ोर से अपनी छाती में घुसा लिया और चिल्लाई : “ओह पापा…….. ज़ोर से सक्क्क करो….. बहुत परेशान करते है ये…. दबाओ इन्हे….. चूसो…. काट लो दांतो से….. अहह …ओह पापा …… सस्सस्स ..”
जगदीश राय ने उसके बूब्स पर दांतो से काटना शुरू कर दिए…
कुछ देर तक अपनी ब्रेस्ट चुसवाने के बाद वो बड़े ही प्यार से बोली : “पापा….. मुझे भी चूसना है…”
जगदीश राय मुस्कुरा दिया उसके भोलेपन को देखकर…
कितनी मासूमियत से वो खुद ही उसके लंड को चूसने के लिए बोल रही थी…
इससे उसके उतावलेपन का सॉफ पता चल रहा था…
जगदीश राय जानता था की वो ज़्यादा देर तक तो इस खेल को बड़ा नही पाएगा,क्योंकि 5 दिन से वो झड़ा नहीं था। पर जितने मज़े वो ले सकता है उतने वो ले लेना चाहता था.
जगदीश राय ने हामी भर दी..

