ये कह कर निशा जल्दी से पापा के लंड के मोटे सुपाडे को चूम लिया और फिर कुतिया बन गयी. अब उसकी चूचियाँ बिस्तर पे टिकी हुई थी और चूतड हवा में लहरा रहे थे. निशा चूतड चुदवाने की मुद्रा में उचका रखे थे. जगदीश राय निशा के विशाल चूतडो को देख कर गरम हो गये. उन्होने निशा के दोनो चूतडो को अपने हाथ में दबोचा और अपना मुँह उनके बीच में घुसेड दिया. अब निशा कुतिया बनी हुई थी और जगदीश राय उसके पीछे कुत्ते की तरह निशा के चूतडो के बीच मुँह दिए उसकी चूत चाट रहे थे.
फिर उन्होने निशा के चूतडो को पकड़ के चौड़ा किया और उसकी गांड के छेद के चारों ओर जीभ फेरने लगे. निशा तो अब सातवें आसमान पे थी. बहुत ही मज़ा आ रहा था. इतने में जगदीश राय ने अपनी जीभ निशा के गांड के छेद में घुसेड दी. निशा ये ना सह सकी और एकदम से झड़ गयी. काफ़ी देर तक इसी मुद्रा में निशा की चूत और गांड चाटने के बाद उन्होने दोनो हाथों से निशा के चूतडो को पकड़ा और अपने मोटे लंड का गरम गरम सुपारा निशा की लार टपकाती चूत पे टिका दिया……..
निशा का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा. तभी जगदीश राय ने एक ज़बरदस्त धक्का लगा दिया और उनका लंड चूत को चीरता हुआ पूरा अंदर समा गया.
“ आाऐययईईई….आआअहह….आह.” निशा के मुँह से ज़ोर की चीख निकल गयी.
जगदीश राय“बेटी ऐसे चिल्लाओगी तो आशा और सशा जाग जाएगी.”
निशा“आप भी तो हमें कितनी बेरहमी से चोद रहे हैं पापा.” जगदीश राय के मोटे मूसल ने निशा की चूत को बुरी तरह से फैला के चौड़ा कर दिया था . अब जगदीश राय ने निशा की कमर पकड़ के धक्के लगाना शुरू कर दिया. आसानी से उनका लंड निशा की चूत में जा सके इसलिए अब उसने टाँगें बिल्कुल चौड़ी कर दी थी. मीठा मीठा दर्द हो रहा था. निशा अपने ही बाप से कुतिया बन के चुदवा रही थी.
“ निशा बेटी तुम्हारी चूत तो बहुत टाइट है.” फ़च फ़च.. फ़च…..फ़च फ़च….फ़च… की आवाज़ें ज़ोर ज़ोर से आ रही थी. निशा की चूत बुरी तरह से पानी छोड़ रही थी. वह इतनी उत्तेजित हो गयी थी की अपने चूतड पीछे की ओर उचका उचका के अपने पापा का लंड अपनी चूत में ले रही थी.
जगदीश राय“ निशा मेरी जान, तुम्हारी मम्मी को चोद कर भी आज तक इतना मज़ा नहीं आया था”बहुत मज़ा आ रहा है बेटी।
निशा:मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा है पापा।3 दिनों से मेरी चूत में बहुत खुजली हो रही थी।आज जाकर मेरी गर्मी शांत हुई।और चोदो पापा।
निशा तो वासना में पागल हुई जा रही थी. शायद अपने ही बाप से चुदवाने के एहसास ने उसकी वासना को और भड़का दिया था.
जगदीश राय निशा के चूतडो को पकड़ के ज़ोर ज़ोर से धक्के मारते हुए बोले,
“निशा बेटी. सच इन चूतडो ने तो हमारा जीना ही हराम कर रखा था.आज इसे फाड़ने में बहुत मज़ा आया और तुम्हारा ये गुलाबी छेद!” ये कहते हुए उन्होने एक उंगली मेरी गांड में सरका दी.
“आआआहह…….. ईीइससस्स… ये क्या कर रहे हैं पापा?”
जगदीश राय:“बेटी तुम्हारे पापा ने आज पहली बार इस छेद को प्यार किया है?” पापा अब मेरी गांड में उंगली अंदर बाहर कर रहे थे.
“आईईIईईIई
ईईईईईई निशा समझ गयी थी कि अब पापा फिर से गांड मारना चाहते थे.निशा को मालूम था कि पापा को गांड मारने का बहुत शौक है. अपने ही बाप से फिर से गांड मरवाने की बात सोच सोच कर वह बहुत उत्तेजित हो गयी थी और निशा की चूत तो इतनी गीली थी कि रस बह कर उसकी टाँगों पे बह रहा था. आख़िर वही हुआ जिसका उसे अंदेशा था.
पापा निशा की गांड में उंगली करते हुए बोले,
“ निशा बेटी हम तुम्हारे इस गुलाबी छेद को भी प्यार करना चाहते हैं.”इसमें अपना मोटा लंड डालके पेलना चाहता हूँ।
“हाय पापा आपको हमारे चूतड इतने पसंद हैं तो कर लीजिए जी भर के उस छेद से प्यार. आज की रात मैं पूरी तरह से आपको खुश करना चाहती हूँ.”
जगदीश राय:“शाबाश मेरी जान , ये हुई ना बात. हमे पता था की हमारी प्यारी बिटिया हमे गांड ज़रूर देगी. अब अपने ये मोटे मोटे चूतड थोडे से और ऊपर करो”
निशा ने चूतड ऊपर की ओर इस तरह उचका दिए कि पापा का लंड आसानी से गांड में जा सके. पापा ने निशा की गांड से उंगली निकाली और नीचे झुक के अपनी जीभ निशा की गांड के छेद पे टीका दी. निशा की तो वासना इतनी भड़क उठी थी की अब और सहन नहीं हो रहा था.वासना के नशे में वो धीरे धीरे निशा की गांड चाट रहे थे और कभी कभी जीभ गांड के छेद में घुसेड देते. एक हाथ से वो मेरी गीली चूत सहला रहे थे.
जगदीश राय: “सच बेटी तुम्हारी गांड बहुत ही ज़्यादा स्वादिष्ट लग रही है. तुम्हारी गांड में से बहुत मादक खुश्बू आ रही है.” निशा को आज तक ये बात समझ नहीं आई थी कि लड़को को लडकियों की गांड चाटने में क्या मज़ा आता है. अब पापा ने निशा की चूत के रस में से सना हुआ लंड उसकी गांड के छेद पे टिका दिया. हाय राम ! निशा के पापा उसकी गांड फिर से मारने जा रहे थे. निशा भी कुतिया बनी उस पल का इंतज़ार कर रही थी जब पापा का लंड उसकी गांड में घुसेगा. पापा ने निशा के चूतडो को पकड़ के चौड़ा किया और साथ ही एक ज़ोर का धक्का लगा दिया.
निशा: “ आआईयईई……आआआअहह….इसस्स्स्स्स्स्स्स्सस्स” जैसे ही लंड का मोटा सुपाडा निशा की गांड में घुसा उसके मुँह से चीख निकल ही गयी.
जगदीश राय: “हाय मेरी जान ! क्या मस्त गांड है तुम्हारी!” पापा ने निशा के चूतड पकड के एक ज़ोर का धक्का लगा के आधे से ज़्यादा लंड निशा की मोटी गांड में पेल दिया.
निशा: “आआईईईआआआआआ……..ऊऊऊऊऊओ……….ईईस्स्स्स्स्स स.” निशा का दर्द के मारे बुरा हाल था.उसे पक्का विश्वास था कि आज तो फिर से उसकी गांड ज़रूर फटेगी, लेकिन पापा से गांड मरवाने की चाह ने उसे अँधा कर दिया था.
जगदीश राय: निशा बेटी जितना मज़ा तुम्हारी गांड मार के आ रहा है उतना मज़ा तो तुम्हारी मम्मी की गांड मार के कभी नहीं आया.” निशा को सबसे ज़्यादा खुशी इस बात की थी की उसको चोदने में पापा को मम्मी से भी ज़्यादा मज़ा आ रहा था. इस बार जगदीश राय ने पूरा लंड बाहर खीच कर एक ज़बरदस्त धक्के के साथ पूरा लंड जड़ तक निशा की गांड में पेल दिया.
निशा: “ऊऊऊऊीीईईईईईईईईईईईई………………आआआआआआआआआआ आ……..आआआआआअहह….मर गयी….ईीइससस्स”
अब जगदीश राय ने ज़ोर ज़ोर से धक्के मार मार के लंड निशा के गांड के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया था. हर धक्के के साथ उनके बॉल्स निशा की चूत पे चिपक जाते.पापा अब जोर जोर से निशा की गाँड मार रहे थे।साथ ही साथ चूत में भी अपनी ऊँगली पेलने लगे थे जिससे निशा एक बार फिर झड़ गयी.
पापा के धक्के अब तेज़ होते जा रहे थे और शायद वो झड़ने वाले थे. अचानक निशा को अपनी गांड में गरम गरम पिचकारियाँ सी महसूस हुई. पापा झड़ गये थे. निशा की गांड लाबा लब उनके वीर्य से भर गयी थी. उन्होने जैसे ही निशा की गांड से अपना लंड बाहर खींचा।
वीर्य गांड में से निकल कर निशा की चूत और जांघों पे बहने लगा. निशा पीठ के बल लेट गयी और अपनी गांड से निकला हुआ पापा का लंड अपने मुँह में ले लिया . पूरा लंड, बॉल्स और जांघें मेरी चूत के रस और उनके वीर्य के मिश्रण में सनी हुई थी. उनके लंड से मेरी चूत और गांड दोनो की गंध आ रही थी.निशा ने बडे प्यार से जगदीश राय लंड और बॉल्स को चाट चाट के सॉफ किया. पापा भी 3 घंटे से निशा को चोद रहे थे. वो भी तक कर निढाल हो गये थे।फिर निशा भी अपने कपडे पहन कर अपने रूम में सोने चली गई।
अगले दिन जगदीश राय लंच से पाँच मिनट पहले ही ऑफिस से छुट्टी लेकर घर आ गया था लेकिन आशा अभी नहीं आई थी।आशा को कॉल किया तो बोली 10 मिनट में आ रही हूँ।तब जगदीश राय ने बियाग्रा की 1 गोली खा ली।आज आशा से उसे बदला लेना था।
ठीक 10 मिनट बाद आशा आ गई।डोर बंद करके अंदर आते ही आशा ने अपने सभी कपडे उतार फेंके।वो अपने पापा के सामने पूरी नंगी थी।वो भी दिन में उसका नंगा बदन चमक रहा था।उसकी गांड में फँसी पुंछ को देखकर जगदीश राय का लंड फुंफकारने लगा।
जगदीश राय आशा के पास जाकर 1 हाथ से उसकी पुंछ और गांड सहलाने लगा।इधर आशा ने जगदीश राय के कपडे निकालने शुरू कर दिए।थोड़ी ही देर में वो भी आशा की तरह पुरे नंगे थे।अब आशा अपने पापा के आगे घुटनों पर बैठ गई और जगदीश राय के लंड को किसी कुतिया की तरह चाटने लगी।फिर आशा अपने पापा के लंड को मुँह में भर कर चूसने लगी।
जगदीश राय :आशा…. बेटी…. थोड़ा और अंदर लो बेटी… नाक से सासे लेती रहो ….
आशा आँखो से हामी भरी …..
जगदीश राय धीरे धीरे लंड अंदर धकेलने लगा …
आशा के गले की दीवारो पे उनका लंड ठोकरे मारने लगा …
धीरे धीरे पूरा लंड आशा के मुह में घुस गया …
उसे तो विश्वास ही नहीं हो रहा था …
जगदीश राय की झांटे आशा के नाक पे लग रही थी …
आशा के गले में खराश होने लगी थी …
लेकिन आशा मना भी नहीं कर पा रही थी …
उसके मुँह से गुं गुं की आवाज निकलने लगी …
जगदीश राय ने लंड वापस खींचा तो आशा ने सांस ली …
थोड़ी देर बाद जगदीश राय ने अपना पूरा लंड फिर से आशा के गले तक उतारा …और आशा के मुँह में पेलने लगा।
जगदीश राय के चहरे पे स्वर्गीय आनंद की अनुभूति दिख रही थी …
कुछ देर आशा का मुह ऐसी ही चोदने के बाद जगदीश ने अपना लंड निकाल लिया …..
फिर जगदीश राय ने आशा को अपनी गोद में उठाया…
और पलंग पे ले गए …जगदीश राय अब पलंग पे बैठे थे …और आशा उनकी गोद में …फिर जगदीश राय ने आशा की गांड में घुसी पूँछ को सहलाने लगे।फिर धीरे धीरे उन्होंने आशा की गांड से पूँछ निकाल दिया।

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