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आशा तेज़ी से सिसकी ले रही थी। और लग नहीं रहा था की उसके साथ कोई जबरदस्ती की जा रही हो।

लडीके ने सिर्फ अपना शर्ट उतारा था।

और जगदीश राय ने देखा की वह पीछे आशा की गांड पर अपना बायाँ हाथ फेरकर अंदर बाहर कर रहा है। जिसकी वजह से आशा भी अपनी गांड और कमर खड़े खड़े आगे पीछे हिला रही है।

दोनो इतने मदहोश थे की दोनों की ऑंखें बंद थी। और उन्हें पता भी नहीं चला की जगदीश राय वहां खड़ा है।

जगदीश राय ने यह सब नज़ारा कुछ चंद सेकड़ो में देख लिया था।

और वह गुस्से से आग बबुला हो गया।

जगदीश राय (गुस्से में): आशा…।।यह क्या हो रहा है…मेरे घर में…यु बास्टर्ड …।कौन है तू…।।साला।

अचानक से हुए शोर से दोनों आशा और वह लड़का चौक गये। और अपने पापा को देखकर आशा चिल्लायी

आशा: पापा…ओह गॉड…।सॉरी पापा…।सॉरी…।हम यही…।।या गॉड

और आशा ने अपने हाथो से पास पड़े उसकी छोटी सी टीशर्ट से अपने चूचो और चूत को छिपाने का असफ़ल प्रयास किया।

जगदीश राय बहुत गुस्से में था। वह तेज़ी से उस लड़के के तरफ बढा। लड़का घबरा गया।

लडका: अंकल…सॉरी…मैं निकल रहा हु…अंकल…सॉरी सॉरी…।

इसके पहले की जगदीश राय कुछ करता लड़का बड़े ही फुर्ति से अपने शर्ट उठा कर वहां से दौड पडा।
जगदीश राय उसके पीछे भागा पर जब तक वह सीडियों से लड़खड़ाते निचे पंहुचा लड़का दरवाज़े से फ़रार हो चूका था।

आशा डरकर की उसके पापा कुछ कर न बैठे, नंगी पीछे भागी आयी, अपने टी शर्ट छाती में पकडे।

जगदीश राय ने उसे देखा और जा के दरवाज़ा बंद कर दिया, ताकि बाहर के लोग उसे नंगी न देखे।

आशा तुरंत अपने रूम की तरफ चल दी।

पुरी घर में सन्नाटा छाया हुआ था। जगदीश राय तेज़ी से सास ले रहा था। वह किचन में घूसकर एक गिलास पानी पी लिया और खुद को शांत करने की कोशिश की।

जगदीश राय (मन में): यह सब क्या हो रहा है…आशा की यह मज़ाल …।वह भी इतनी छोटी उम्र में पर मैं करू भी तो क्या…।

तभी जगदीश राय को निशा की बात याद आयी। जवान होने पर, बाप को बेटी का दोस्त बनना पड़ता है।

कोई 5 मिनट वही डाइनिंग टेबल के चेयर पर बैठने के बाद, वह फिर आशा की रूम की तरफ चला।

रूम का दरवाज़ा अभी भी खुला था। आशा अभी भी नंगी खड़ी थी। वह एक छोटी सी टीशर्ट अपने छाती से लिपटाये।

टी शर्ट इतनी छोटी थी की सिर्फ उसकी निप्पल और चूत के बीच का हिस्सा छुप रहा था और वो भी मुश्किल से।

जागदीश राय का ग़ुस्सा आशा को ऐसे देखकर थोड़ा सा ग़ायब हो गया।

जगदीश राय: यह सब …।कब से।।चल रहा है…ह्म्म्मम्म।

आशा चुप बैठी। सर झुकाये खडी थी।

जगदीश राय: बोलो…अब छुपाने की…जरूररत नहीं…कौन था वह हरामी…।बोलो…जल्दी।।

आशा: आप ग़ुस्सा मत होईये…मैं सब बताती हु…

जगदीश राय: अच्छा…।तो बोलो…

आशा: वह मेरा बॉयफ्रेंड है…हम ५ महीने से जानते है…एक दूसरे को…।

जगदीश राय: क्या…5 महीनो से चल रहा है यह सब…वह तुम्हारे स्कुल में पढता है? अभी जाता हु उसके बाप के पास…

आशा (थोडा मुस्कुराते): नहीं…वह तो काम कर रहा है…इंजीनियर है…उसकी पढाई सब हो गयी।।

जगदीश राय: मतलब।।वह स्टूडेंट नहीं है…और तुम उसके साथ…कहाँ मिला तुम्हे…बताओ…

सवाल पूछते हुए जगदीश राय आशा की नंगे शरीर को निहार भी रहा था। और धीरे धीरे उसके लंड पर प्रभाव पडने लगा।

आशा भी खूब जानती थी। इसलिए उसने भी जान बुझकर कपडे नहीं पहने।

और वैसे ही नंगी रहकर जावब दे रही थी। वह जान चुकी थी की पापा की नज़रे कहाँ कहाँ घूम रही है।

आशा: एक कॉमन फ्रेंड की ओर से…मेरी एक सहेली है…उसका कजिन भाई है वह…

जगदीश राय: पर तुझे शर्म नहीं आयी…यह सब करते हुए तेरी।।उमर ही क्या है…अगर इस उम्र में कुछ उच-नीच हो गया तो क्या होगा इस घर की इज़्ज़त का…सोचा कभी तूने…

आशा: पापा…मैंने ऐसा कुछ नहीं किया जिससे घर की इज़्ज़त को धक्का लग सके…बस थोड़ा सा मजा कर रही थी।

आशा ने यह कहते अपने हाथो से टीशर्ट ठीक किया और इसी बहाने अपने हाथो से अपने चूचे मसल दिए।

जगदीश राय यह देखकर हिल गया।

चूचे इतने मस्त आकार के थे की उसके मुह में पानी आ गया और लंड खड़ा होने लगा।

जगदीश राय (संभालते हुए):मम्म।।मज़ा…क्या यह मजा है…इसे मजा कहते है…

आशा (थोडा मुस्कुराते): और फिर क्या कहते है…जो आप और निशा दीदी करते है वह मजा नहीं तो और क्या है…

जगदीश राय , एक मिनट समझा नहीं की जो उसने सुना वह ठीक सुना या नही। वह दंग रह गया।

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