निशा: पर…।
जगदीश राय: बेटी।।यह उम्र तुम्हारे घूमने के… मजा करने के है…खाना तो ज़िन्दगी भर बनाना है…इसलिए जाओ…और कल हाँ कर दो…मुझसे पैसे ले लेना।
निशा खुश होकर, वीर्य लगे गालो से, पापा को चूम ली।
जगदीश राय: पर।।बेटी…एक समस्या है…मेरे इसके क्या होगा…
जगदीश राय ने मुस्कुराते हुए अपने लंड की तरफ इशारा किया।
निशा: इसका …आप…।१५ दिन तक…आराम दीजिये…हाथ से भी नहीं करना ठीक है…।मैं जब आऊँगी तब आपको एक स्पेशल गिफ्ट दुँगी। तब तक यह मुझे तडपता हुआ खड़ा मिलना चाहिये।।।
जगदीश राय: अरे तुम तो यह ही कहोगी।।तुम्हारे टूर पर तो लड़के भी होंगे…क्यूँउउ…
निशा: धत। पापा…मैं तो आपके सिवा किसी को हाथ भी नहीं लगाने दूँगी…
निशा के इस जबाब से जगदीश राय कुछ सोचने लगा।
निशा उठकर बाथरूम चली गयी। और थोड़े देर बाद फ्रेश होकर , साफ़ होकर आयी।
वह नंगी खड़े होकर अपना बाल बनाने लगी।
जगदीश राय: बेटी…एक बात पूछ्ना चाहता हु…।
निशा: हाँ पापा पुछो।
जगदीश राय: बेटी।।तुम अपने पापा के साथ।।मेरा मतलब है…यह सब…यह संबंध।
निशा (सर झुकाते हुए): मैं समझ गयी पापा…
जगदीश राय: बेटी …मैं यह नहीं चाहता की ।।इसकी वजह से ।।तुम और लड़को को पसंद न करो।।मेरा क्या।।आज है कल नहीं…पर तुम्हे शादी करके एक विवाहित जीवन बीतानी है…मैं यह चाहता हु…
निशा: ओह ओह पापा…आप कहाँ चले गए…पापा , आपके साथ रास लीला रचाने के बाद ।।मुझे तो बल्कि फ़ायदा हुआ है…अब मैं अन्य लड़कियों की तरह लड़को को ताकती नहीं रहती…मैं अब लड़को से शरमाती भी नहीं… अब मैं लड़को को उनके क्वालिटीज़ के अनुसार परखती हूँ।…।
जगदीश राय: अच्छा…
निशा: तो अब बेफिक्र रहिये…मैं कोई घर बैठने वाली नहीं हूँ।।
निशा: और अब मेरे पढाई मैं भी मार्क्स अच्छे आने लगे है…क्युकी मैं लड़को और एडल्ट मूवीज से डिस्ट्रक्ट नहीं होती…
जगदीश राय यह सुनकर खुश भी हुआ और आश्चर्य चकित भी।
जगदीश राय: फिर तो…यह…अच्छी बात है… है न…
निशा (हँसते हुए): और नहीं तो क्या…।हे हे…मैं तो कहती हु…हर लड़की का पहला बॉय फ्रेंड उनके पापा होने चाहिये…हे हे
जगदीश राय: निशा को गोद में बिठा लिया। और हँसते हुए चूमने लगा।
ऑफिस के सभी लोग गपशप लड़ा रहे थे। पर जगदीश राय को सीट पर बैठना मुश्किल हो रहा था।
आज निशा को घर से गए हुए सिर्फ 2 दिन हुए थे। और जगदीश राय का जीना मुश्किल हो गया था।
ऑफिस में बैठा नहीं जा रहा था और घर में मन नहीं लगता था।
और जगदीश राय से बुरा हाल जगदीश राय के लंड का था। पिचले 2 महीनो से निशा लगातार लंड की सेवा करती थी।
जब निशा के महीने चल रहे होते, उस वक़्त भी निशा लंड को चूस चूस कर उसका रस निकालती।
और 2 दिन से लंड को निशा की प्यारी चूत और मुह की कमी महसूस हो रहा था। वह अब निशा को कॉलेज ट्रिप पर भेजने के फैसले से पछता रहा था।
जगदीश राय से मुठ भी नहीं मारा जाता। ऑफिस के औरतो को भी घूरता। उसे डर लगने लगा की ऐसा ही चलता रहा तो जल्द ही वह अपने नौकरी से हाथ धो बेठेंगा।
और आज तो उसकी हालत ज्यादा बुरा था। लंड पिछले 2 घण्टो से खड़ा था। और पूरी शरीर में गर्मी फ़ैली हुई थी।
जगदीश राय ने तुरंत एक सिक लेटर लिख दिया और पिओन के द्वारा अपने बॉस को भेज दिया। और बिना कुछ बोले और कहे, देरी हो जाने से पहले , वहां से निकल गया।
रास्तो की लड़कियो और औरतो को ताकते हुए वह घर पहुंचा। दोपहर के 2:30 बजे थे। आशा और सशा शाम के 4-5 बजे तक आयेंगे। तो उसके पास 2-3 घंटे है। उसने सोचा की किसी तरह मुठ मारकर खुद को थोड़ा आराम दे दे।
दरवज़ा खोलते ही , उसे ऊपर के कमरे से कुछ हँसने की आवाज़ सुनाई दी।
जगदीश राय(मन में): अरे…यह क्या…आशा घर पर…इस वक़्त…
तभी जगदीश राय को आशा की मदहोश भरी सिसकियाँ और कुछ शब्द सुनाई दिए
आशा: ओह…।इट्स फीलस सो गुड…आहाहहह…।धीरे करो न…।हाँ वही…।आह…और…अंदर…
जगदीश राय आशा की यह आवाज़ सुनकर बुरी तरह चौक गया। वह भागा भागा ऊपर के कमरे की तरफ गया और तेज़ी से दरवाज़ा खोल दिया।
और अंदर का नज़ारा देखकर सुन्न हो गया।
अंदर आशा पूरी नंगी खड़ी थी। वह बेड के किनारे खड़ी थी।
उसके बदन पे एक भी कपडा नहीं था पर उसने अपने वाइट शूज नहीं उतारे थे।
और आशा के बेड पर एक सांवला सा लड़का बैठा हुआ था। जो आशा की दाए चूचो को मुरा मुह में घूसा कर बेदरदी से चूस रहा था।

