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जगदीश राय का 9 इंच का लंड स्ट्रिंग अंडरवियर से झाकने की बहूत कोशिश रहा है।

निशा : अब आप अपने हाथ पीछे ही रखेंगे …समझे…।

निशा धीरे से एक चुम्बन जगदीश राय के लंड पर , अंडरवियर के ऊपर से लगा देती है।

जगदीश राइ: अह्ह्ह्हह…।

जगदीश राय , आने वाले मज़े को सोचकर अपनी ऑंखें बंद कर लेता है।

निशा अपने पापा के लंड के आस पास अंडरवियर के ऊपर से चूमने लगती है …चाटने लगती है। वह अपने पापा को और गरम करना चाहती थी।

जगदीश राय का लंड जैसे फ़टने के कगार पर आ गया था।

जगदीश राय: बेटी …अब रहा नहीं जाता…।ले लो इसे अपने गरम मुह में…।

जगदीश राय को कटोरी ने आहट सुनि और अचानक उसे अपने लंड पर तेज़ गर्मी महसूस हुई।

निशा ने अपने पापा के लंड पर थोडा सा गरम शहद (हनी) डाल दिया था।

और शहद इतना गरम था की अंडरवियर के ऊपर गिरने के बावजूद, लंड को चटका लग ही गया।

जगदीश राय दर्द के मारे चीख़ पडा।

जगदीश राय: बेटी यह क्या…।आआह्ह्ह।

निशा ने तुरंत अपने पापा के लंड को अंडरवियर के ऊपर से मुह में ले लिया और शहद चाटने और चुसने लगी।

जगदीश राय दर्द और उतेजना के बीच में आके फस गया। उसे समझ नहीं आ रहा था की क्या हो रहा है।
दरद के मारे लंड सोना चाहता था पर निशा के होठो ने एक अलग गर्मी पैदा कर दी थी।

जगदीश राय: ओह्ह्ह्ह बेटी…।।आह…।ओह बेटी…।

कुछ समय चाटने के बाद , निशा ने तुरंत पापा का अंडरवियर उतार फेका। ऐसा लग रहा था की वह अपने पापा को दर्द दे रही है।

जगदीश राय का पूरा लंड गरम शहद के वजह से लाल हो चूका था , पर लंड अभी भी पूरा खड़ा था।

निशा ने लंड को हाथ भी नहीं लगाया। और सीधे पापा के टट्टो को चूम लिया। दोनों टट्टे ऊपर नीचे उछल रहे थे।

निशा कभी चाटती, तो कभी टट्टो के अंडो को मुह में लेके चूसती।

जगदीश राय: वाहहहह …।माज़ा आ गया।

तुरन्त निशा ने गरम शहद के कुछ बूँदे टट्टो पे छिडक दिया।

जगदीश राय टेबल पर ही उछल पडा। और तडपने लगा, गरम शहद गिरते ही टट्टे दर्द के मारे उछलने लगे।

जगदीश राय टट्टो को हाथ से साफ़ करने हाथ आगे बढ़ाये। निशा ने तुरंत उनका हाथ पकड़ लिया।

निशा: हाथ पिछे…।।

जगदीश राय: क्याआ…कर रही हो बेटीई…दर्द हो रहा है…।।निकालो इससे…

निशा: किसे…इसे…

कहते हुए निशा ने कुछ गरम शहद की बूँदे और टट्टो बे गिरा दिया।

जगदीश राय: ओह्ह्ह मा…।आआअह्ह्ह्ह

लंड अभी दर्द के मारे सिकुड़ना शुरू हुआ।

निशा ने तुरंत लंड को मुह में ले लिया और बेदरदी से चूसने लगी।

पर उसने गरम शहद को टट्टो पर से साफ़ नहीं किया।

अब टट्टो के दर्द के बावजूद निशा की चूसाई इतनी अच्छि थी की लंड फिर से खड़ा होना शुरू हुआ। और देखते ही देखते पुरे आकर में आ गया।

निशा लंड चुसती रही और टट्टो पे गरम शहद फेकती रही। जगदीश राय तडपता रहा।

फिर निशा ने धुआँधार चूसाई शुरू की।

निशा: अब मैं रुक नहीं सकती…मुझे आपका मलाई चाहिए…दीजिये मेरा नास्ता ।

जगदीश राय: रुकना नहीं बेटी…मैं आने ही वाला हु…।

निशा ने कुछ 5 मिनट बाद अपने पापा का लंड फूलते हुए महसूस किया। वह समझ गयी की पापा अभी झडने वाले है।

वह लंड चुसती रही।

जगदीश राय: आह…बेटी…यह…।ले…।तेराआ…नाश्ता…चूस ले।

तभी अचानक से निशा ने लंड बाहर निकाल लिया। और कटोरी उठाई और पूरा का पूरा बचा हुआ गरम शहद लंड पर पलट दिया।

लोहे जैसे गरम लौडे पर गरम शहद के गिरने से , जगदीश राय चीख़ पडा।

निशा के सामने अपने पापा का 9 इंच का मोटा लंड , भूरा कलर का शहद से लथपथ था, शहद में डूबा हुआ था।

शहद की गर्मी से दर्द और ओर्गास्म दोनों एक साथ महसूस हो रहा था।

जगदीश राय: यह क्या…नहीईई बेटी…।दरदडडड…।मेरा छुट रहा है।

और फिर निशा ने भूरे शहदः के भीतर से सफ़ेद वीर्य के छींटे उडती दिखाई दी। सफ़ेद रंग का गाढ़ा और भूरे शहद के सामान था।

फड्फडा कर लंड , लावा की तरह, उगलता गया। वीर्य 9 इंच की लंड की लम्बाई , भूरे शहद के ऊपर से तैर रही थी।

निशा, न होठ से न हाथो से लंड को सहला रही थी। खड़ा लंड खुद ब खुद हवा में झूलता हुआ झडते जा रहा था।

निशा बड़े ही आश्चर्य से दृश्य देखती रही।

और फिर अपने पापा का गरम शहद और गरम वीर्य में लथपथ लंड को पूरा मुह खोलकर भीतर ले लिया।

लंड मुह में आते हि, जगदीश राय ज़ोर का दहाड़ मारा और लंड और तेज़ी से झडने लगा।

निशा बड़ी ही एकाग्रता से शहद और वीर्य को चाटती जा रही थी।

आज पहली बार उसने वीर्य का स्वाद चखा था। और उसे बिलकुल भी बुरा नहीं लग रहा था। शायद शहद थोड़ी मदद कर रही थी।

निशा कूछ 10 मिनट तक शहद और वीर्य चाटती गयी.

आज पहली बार उसने वीर्य का स्वाद चखा था। और उसे बिलकुल भी बुरा नहीं लग रहा था। शायद शहद थोड़ी मदद कर रही थी।

निशा कूछ १० मिनट तक शहद और वीर्य चाटती गयी।

और जगदीश राय , हाफ्ता रहा। पूरा लंड लाल हो चूका था। लंड की चमड़ी दर्द कर रहा था।

निशा ने फिर टट्टो को भी चाटकर साफ़ किया।

कफी सारा शहद और वीर्य लंड से गलकर , टट्टो से सैर करके , गांड तक पहुच गयी थी।

निशा : पापा…चलिए …अपना पैर पूरा ऊपर कीजिये…।

जगदीश राय बिना कुछ कहे ,पैरो को कंधे तक ले गया। और निशा ने अपने पापा का साफ़ सुथरी गांड में से शहद और वीर्य चाटने लगी।

गाँड पर निशा की जीभ लगते ही जगदीश राय के लंड से वीर्य कुछ बूंद और निकल पडा।

जब निशा ने पापा के सब अंग शहद और वीर्य से साफ कर दिया, तो संतुष्ट होकर राहत की सास ली।

जगदीश राय: यह क्या था बेटी…मैं ने ऐसा कभी सोचा नहीं था।।।

निशा: क्यों आपको मजा नहीं आया…।

जगदीश राय:मज़ा तो बहुत आया…पर …पर…दर्द भी बहुत हुआ…देखो तो ।।मेरे लंड को…कैसा लाल हो गया है…अगले ४ दिन तक तो इसे हाथ भी नहीं लगा सकता…

निशा: आप ने तो कहा था न…जो सजा देना चाहे दे सकती हो…सो यह थी मेरी सजा…हे हे…याद आया…

जगदीश राय:ओह ओह…तो मेरी बेटी …अपनी पापा से बदला ले रही थी…

निशा:।हाँ जी…स्वीट बदला…।हा हा

जगदीश राय : चलो सजा तो पूरा हुआ…

निशा: जी नही…अब और सजा मिलेगी…रुको …चलो बैडरूम में…आपको तो अपनी निशा को आज पुरे दिन खुश करना था न।

जगदीश राय: अरे नही…अभी नहीं…।लन्ड तो बहुत जल रहा है…।

निशा हँस पडी।

जगदीश राय, उठकर बाथरूम जाने लगा।

तब निशा ने रोक लिया।

निशा: पापा…एक मिनट…ये क्या है…यहाँ तो प्यार से दो बूंद लटक रहे है।।

जगदीश राय के अर्ध-खडे लंड में वीर्य का बूंद लगा हुआ था।

निशा ने अपने मुठी से पापा के लंड को बेदरदी से अपनी तरफ खीच लिया।

चोट खाया हुआ लंड निशा के इस बरताव से जगदीश राय चीख़ पडा।।

जगदीश राय: अरे …बेटी… लंड नहीं…आह्ह्ह्हह

निश ने तुरंत लंड को मुह में ले लिया। और वीर्य चाट लिया।

लंड को मुँह के सलीवा से राहत महसूस हो रहा था।

जगदीश राय: अरे वाह… तुम्हारे मूह में आराम मिल रहा है…

निशा: इसलिए तो कहती हु चलो बेडरुम।पुरा दिन अब लंड मेरे मुह में होगा। ठीक है…

जगदीश राय: अच्छा…तो यह सब तुम्हारी चाल थी…लंड मुह में घुसाये रखने की…

निशा: हे हे…हाँ…आल माय प्लानिंग…एक मिनट…बैडरूम में जाने से पहले।।।

फिर निशा ने लंड को बाहर निकाला। लंड अब फिर से थोड़ा खड़ा हो चूका था।

 

निशा ने लंड को अपने मुठी में लेकर ज़ोर से दबाया। जगदीश राय गुर्राने लगा।

लंड के द्वार पर एक छोटी सी प्यारी सी वीर्य के बूंद उभरकर आयी।

निशा ने उसे चाटते हुए कहा।

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