Reading Mode

निशा की चूत 4 इंच मोटे लंड से खीचकर फ़टने के कगार में थी।

और फिर जगदीश राय ने वह देखा जिसको देखकर उसको ख़ुशी हुई। कसी हुई चूत से लंड से सरकते हुए लाल खून निकल रहा था।

जगदीश राय खुश हुआ की निशा अब तक कुँवारी थी और उसे कूँवारी चूत मारने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

जगदीश राय पूरा लंड निशा की चूत में डाले कम से कम 3 मिनट वेट किया।

वह निशा को अब पूरा गरम करके चोदना चाहता था। और निशा की कान, गर्दन और चूचो को चाट और चूम रहा था निप्पलो को दांतो से धीरे धीरे काट रहा था।

कुछ देर बाद निशा को चूत का खिचाव महसूस हुआ। जगदीश राय ने पेलना शुरू किया।

पहले धीरे से, फिर जोर से। पुरे कमरे में सिर्फ निशा और जगदीश राय की चीखों और आह की आवाज़ थी।

कोई 10 मिनट चोदने के बाद, जगदीश राय ने अब पूरा ताकत से अपनी बेटी को पेलना शुरू किया।

जगदीश राय: ओह निशा…।आह आहः

और तभी जगदीश राय को सुबह से तडपा रही ओर्गास्म आने का अनुमान हुआ।

उसने लंड तुरंत बाहर निकाल लिया। निशा अचानक से लंड के बाहर खीचने से चीख पडी।

और निशा की आँखे जगदीश राय के लंड पर गयी।जगदीश राय का लंड पूरा खून से लाल था और फिर २ सेक्ण्ड में लंड ने वीर्य फेकना शुरू किया।

जगदीश राय: आअह आआअह्ह बेटी…।यह ले……।

गरम लंड का पहला माल निशा के पेट और चूचो पर जा गिरा। निशा लंड की गर्मी को देखकर चौक गयी।

जगदीश राय कम से कम 1 मिनट तक जोर जोर से झड़ता रहा। और फिर बेड पर एक ज़ख़्मी शेर की तरह गिर पडा।

निशा, चुदाई ,से लथपफ अपनी पैर खोले पड़ी रही। कुछ 5 मिनट बाद बड़ी मुश्किल से वह उठी।

और अपने चूत और जांघ पर लगे खून को देखकर चौक और डर गयी। जगदीश राय उसे देख रहा था। दोनों कुछ बोलने के स्थिथि में नहीं थे।

निशा बेड से उठी और नंगी होकर लंगडाते हुए रूम के बाहर जाने लगी।

जगदीश राय: निशा बेटी…।।

निशा मुडी और जगदीश राय के ऑंखों में देखा। उसके ऑंखों में आँसू भरे थे।

जगदीश राय : आई ऍम सॉरी बेटी…।मुझे माफ़ कर दो…मैं अपने आपे में नहीं था…।तुम मसाज…।

निशा बिना कुछ कहे अपने रूम के तरफ चल देती है।

निशा कमरे के अंदर जाकर सीधे बाथरूम में चलि गयी। वह आघात स्थिति में कुछ सोच नहीं पा रही थी।
ओर फिर शावर के निचे खड़ी हो गयी।

पहले सम्भोग का दर्द शावर के पानी से मिटाने की कोशिश कर रही थी।

गरम पानी निशा की दर्दनाक चूत को सहलाता गया। निशा को आराम मिलता गया और दिमाग खुलता गया।

और फिर निशा रोने लगी। खूब रोने लगी।

उसे पता नहीं चल रहा था की वह क्यों रो रही है पर आँसू रुक नहीं रहे थे।

बाथरूम के सफ़ेद फर्श पर लाल खून के धब्बे दिखाई दे रहे थे।

निशा की आसुओं ने पानी की मदद से खून को धोने में सफल हो ही गयी थी। और खून के साथ निशा को अपना कुंवारापन बहता हुआ महसूस हुआ।

निशा पानी के निचे 20 मिनट तक ऐसे ही सर झुकाये खड़ी रही। फिर धीरे से शावर से बाहर आकर, शारीर टॉवल से पौछने लगी।

और अपने आप को बाथरूम के मिरर के सामने पाया।

मिरर के सामने , उसकी आँखों ने , एक लड़की नहीं बल्कि एक औरत को देख लिया था। एक बहुत ही सुन्दर औरत, जो उसकी पापा के शब्दो में किसी अप्सरा के काम नहीं है।

और फिर निशा के होटों में मुस्कान आ गयी।

निशा (मन में): देखा माँ, आज तुम्हारी निशा ने अपने ही पापा के साथ वह किया जो तुम सोच भी नहीं सकती… बचपन से तुम मुझे सुशील लड़की बनाने में लगी थी…निशा यह मत कर।। वह मत कर। पैर फैलाके मत बैठ…छोटे कपडे मत पहन… अपनी छोटी बहनो के लिए आदर्श बन…।सब बकवास…।सब बकवास…तंग आ चुकी थी मैं तुम्हारी इस बकवास से…आज मैं पहली बार गन्दी फील कर रही हु…। और देखो मुझे सिर्फ ख़ुशी ही हो रही है…।आज मैं पहली बार आज़ाद हुई हु… तुम्हारी सड़ी हुई सोच के कैद से…।

निशा अपने आप से मिरर के सामने खड़ी रहकर यह सोचती रही।

उसे एहसास हुआ की वह अपने पापा को सिड्यूस कर रही थी, वह दरअसल , पापा के लिए नहीं बल्कि खुद के लिए कर रही थी। खुद को आज़ाद पाने के लिये।।।

और फिर मुस्कुराते हुए अपने गीले बालो को सवारना शुरू किया।

फिर निशा अपने रूम में चलि गयी। वह पूरी नंगी थी। और अब उसे अपने नंगेपन पर गर्व हो रहा था।

निशा ड्रेसिंग टेबल से सामने बैठ गयी और अपने दोनों पैर ड्रेसिंग टेबल के इर्द-गिरद रख दिया।

और उसके ऑंखों के सामने उसकी चूदी हुई चूत मिरर में एक खिले हुए फूल की तरह नज़र आयी।

एक नयी नवेली दुलहन की तरह वह अपने चूत को घुरे जा रही थी।

चूत, जो पहले, छोटी हुआ करती थी, अब फुलकर खुल गई थी। और अंदर का लाल भाग भी साफ़ दिखाई दे रहा था। पहेली चुदाई के कारण चूत के होठ सुजे हुए थे और लाल हो गए थे।

निशा ने अपना एक हाथ जब चूत पर हाथ रखा तो दर्द महसूस हुआ। पर वह धीरे धीरे अपने चूत को सहलाने लगी। धीरे धीरे दर्द मीठा होता गया और शरीर में मस्ती की लहर आने लगी।

निशा के ऑखों के सामने उसके खून से लथपथ पापा का मोटा लंड का लाल सुपाडा चमकने लगा।

उसने अपने ड्रेसिंग टेबल के ड्रावर में से वेसलिन का डिब्बा उठाया और वेसिलीन लेकर अपने चूत के होटों पर मल दिया।

फिर निशा ने अपने नंगापन को टॉवल से ढक लिया।

निशा (मन में): मुझे आशा और सशा के आने से पहले पापा के रूम से चद्दर हटाना होगा। नहीं तो चादर पर खून दिखाई देगा। अब 2 बजे बजे है।4 बजे तक वो आने वाले थे। उन्हें इस बात की भनक भी नहीं पडना चाहिए।

और वह रूम के दरवाज़े के तरफ चल दी।

निशा(मन में): क्या मेरे इस तरह टॉवल में जाना ठीक होगा…।पापा के सामने…।।पर अब उनसे क्या छुपाना…।

और आज़ाद निशा जगदीश राय के रूम के तरफ चल देती है…।

Please complete the required fields.