निशा पापा के लंड को इतने पास से देखकर डर गयी और चुपचाप मसाज करने लगी। पर थोडी देर बाद वह लंड को निहारती रही।तभी जगदीश राय को महसूस हुआ की उसका लंड लूँगी से बाहर निकल गया है, और उसने हाथ आगे लाकर लंड को अंदर डालना चाहा।
निशा: पापा…।यह क्या…।मैँने कहाँ था हाथ पीछे…।जब तक मेरी मसाज पूरी नहीं हुई है…
जगदीश राय : पर…बेटी… मैं तो…यह…लूंगी… लूँगी ठीक कर रहा था…
निशा: कोई ज़रुरत नहीं…।।हथ पीछे ले जाईये…।लून्गी जहाँ है वही ठीक है…जिसको बहार आना था खुद ही आ गया… है है।
और निशा ने हँस दिया।
जगदीश राय : पर… बेटी…मुझे…
निशा: पापा…आंखें बंद…। बिलकुल बंद…वैसे भी मुझे उसे देखने में कोई दिकत नहीं तो आप को क्यों…
जगदीश राय फिर से आँखें बंद किया। अपने बेटी के सामने लंड पूरा खुला दिखाई देता सोचकर, उसका लंड पूरा कड़क हो गया। निशा अब जगदीश राय के जांघो पर लुंगी के अंदर हाथ डाल कर हाथ फिरा रही थी। और यह करते वक़्त निशा जानबूजकर जगदीश राय की टट्टो को भी सहला देती।
अपने टट्टो पर निशा के मुलायम हाथो के स्पर्श लगते ही जगदीश राय के मुह से आह निकली।
जगदीश राय : आह…हहह
निशा समझ गयी की जगदीश राय को मसाज बहुत पसंद आ रही है। वह फ्राइडे के अपने प्लान से खुश थी।
इस बार निशा ने अपने बाये हाथ को जगदीश राय के टट्टो पर रहने दिया और सिर्फ अपने दाये हाथ से पैरो का मसाज करने लगी। बायां हाथ धीरे धीरे टट्टो को सहला रहा था।
थोड़ी देर बाद,
निशा: पापा… यह लूँगी की वजह से मैं आपके कमर तक नहीं पहूँच पा रही हु… उसे उतार देती हु मैं…
जगदीश राय : आआह अरे।।नही…बेटी …लूंगी रहने दो…।
पर पहले ही निशा ने जगदीश राय की पूरी लूँगी खोल दी और जगदीश राय एक छोटे बच्चे की तरह पूरा नंगा, तेल से लथपथ, अपने बेटी के सामने लेटा था।
कठोर लंड पूरा खड़ा सीलिंग फैन के तरफ था। निशा एक हाथ से बेशरमी से पापा के बड़े टट्टो को सहला रही थी। निशा धीरे धीरे दुसरा हाथ से जगदीश राय के पेट में तेल लगा रही थी।
लंड जोरो से हिल रहा था। छलाँगे मार रहा था।
निशा से अब रहा नहीं गया, और उसने बिना देर करते हुए अपने दाए हाथ से पापा के 9 इंच लंबे लंड को थाम लिया।
लंड इतना मोटा था की निशा के हाथो में समां नहीं रहा था।निशा ऐसा महसूस कर रही थी जैसे उसने लोहे के गरम रॉड को पकड़ लिया हो।
जगदीश राय निशा के लंड को पकडते ही ऑंखें खोल दी और आँख फाडे निशा को देखने लगा। निशा मुठ मारने के इरादे से , हाथ हिलाना शुरू किया। जगदीश राय पागल हो गया।
उसने तुरंत वह किया जो निशा को अनुमान नहीं था।
जगदीश राय ने एक झटके से निशा को दोनों हाथो से पकड़कर अपने छाती के उपर खीच लिया।
निशा: पापा…।वाट…क्या कर रहे हो…।रुको…।
जगदीश राय अब एक भेड़िया बन चूका था।
निशा अपने आप को पापा के बॉहो से छुड़ाने लगी पर जगदीश राय ने अपने हाथो से निशा के सभी बटन तोड़ दिये। निशा के दोनों बड़े चूचे शर्ट के बाहर कुद पडे।
निशा जगदीश राय के ऊपर गिरती है, उसके चूचे पापा के गरम खुरदरा छाती पे रगड खा रही थी। अब निशा गरम हो चुकी थी।।
निशा: पापा…प्लीस…।पापा…मत करो।। मैं…तो …बस ।।यु ही…।मज़ाक़…आह आह्ह।
जगदीश राय ने कुछ नहीं कहा। उसके कान बंद थे। जगदीश राय तुरंत पलटा और निशा निचे आ गयी और जगदीश राय उपर।
जगदीश राय की एक्सपीरियंस अब निशा की जवानी पर भारी पड़ रहा था।
ओर निशा समझ नहीं पा रही थी की क्या हो रहा है। जगदीश राय ने अपना सर झुका कर निशा की एक गुलाबी निप्पल लेके अपने मुह में चूस लिया।
निशा: आआआहहह…आआआह… पापाआ…आहहहह…क्याआआ।।ओह्ह्ह्हह्
जगदीश राय अब बेदरदी से निशा के निप्पलों को चबा रहा था। निशा की चूत पूरी गीली होकर इस एहसास से झडने लगी। निशा का शरीर पूरा अकड गया और चूत खुल गई और पानी छोडने लगी।
निशा: आआअह्ह्ह पापा…।यह ऊऊ…।।
और अपने हाथो से पापा के बालो में हाथ फेरते हुए उनके सर को अपने मम्मो के ऊपर दबा रही थी।
तब अनुभवी (एक्सपेरिएंस्ड) जगदीश राय बिना मौका गवाते हुये, तुरंत अपने पैरो से निशा के जाँघो को फैला दिया।
और इसके पहले निशा कुछ समझती ,गरम हुए चूत में एक ज़ोरदार झटका महसूस हुआ।
और निशा जोर से चिल्लायी।
निशा: आहःआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह।
निशा की कूँवारी चूत इतनी टाइट थी की जगदीश राय के मोटे लंड को बहुत मेहनत करनी पड़ रही थी।
जगदीश राय ने दूसरा झटका तुरंत ही मार दिया और आधा लंड निशा की मासूम कुँवारी चूत को चीरते हुए घूस गया।निशा दर्द के मारे पैरो को अपने पापा के ऊपर पटकने लगी। उसके ऑंखों से आँसू बहने लगे।
जगदीश राय ने 1 मिनट तक निशा को अपनी बाँहों में पकडे रहा और मौका मिलते ही निशा की निप्पल को चूस देता।
थोड़ी देर बाद निशा आहें लेते हुए शांत हुई। जगदीश राय ने प्यार से निशा के बालों में हाथ फेरा, और निशा के गालों को चूमते हुए कहा।
जगदीश राय: कोई बात …नहीं बेटी…बस हो ही गया…अब।
और यह कहते हुए जगदीश राय ने अपना मोटा लंड 1 इंच बाहर निकाला। बाहर निकालते वक़्त निशा की कसी चूत बाहर की तरफ खींच गई।
और जगदीश राय ने वह झटका दिया जिससे निशा की जान निकल गयी। पुरा 9 इंच लंड , केवल 3 झटको में, जगदीश राय ने निशा की कुवारी चूत में पुरा पेल दिया था।
यूं लग रहा था जैसे जगदीश राय ने अपने बेटी से अपने छेडख़ानी का बदला लिया हो। निशा का पूरा शरीर जगदीश राय के निचे तड़प उठा।वो रो रही थी चिल्ला रही थी।
निशा: आह…पापा…प्लीज…बहोत…दर्द…।।ओह्ह गॉड़
निशा की बड़ी गांड काँप रहे थे। जगदीश राय ख़ुद को निशा के ऊपर से उठाया और निशा की चूत की तरफ देखा।
जगदीश राय के 9 इंच के लंड का कोई निशान नहीं था क्युकी वह पूरा निशा की कुँवारी चूत में समाया हुआ था।

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