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निशा ने पापा की एक दूसरी शर्ट पहनी थी। जो कल वाली शर्ट से छोटी थी। शर्ट सिर्फ उसके गाण्ड तक पहुच रही थी। निशा की बड़ी गांड शर्ट के अंदर मुश्किल से समां रही थी।

निशा: क्यों… कैसी लग रही हु…।

जगदीश राय: क्या कैसी लग रही हो?

निशा: कमाल है।।आप मुझे घूर रहे है।। और मुझसे पूछ रहे है।।क्या?

जगदीश राय: वह तो…मैं कुछ और सोच रहा था…

निशा: अच्छा जी…।ठीक है।। पर बताईये तो सही… कैसी लग रही हु…

जगदीश राय: बताया तो था कल…

निशा: वह कल वाली शर्ट के लिए…आज यह दूसरी शर्ट है…यह हाफ शर्ट है…। कल वाली फुल शर्ट थी।

जगदीश राय: मुझे तो कोई फर्क नहीं नज़र आ रहा … वैसी ही लग रही हो…

जगदीश राय परिस्थिती से बचना चाहता था।

निशा: मैं आपसे बात नहीं करूंगी…जाइए…

और निशा मटकते चल दी। चलते वक़्त शर्ट निशा की गांड से उछलकर गांड के निचले हिस्से को दिखा रहा था।

फिर निशा झाड़ू ले आयी। और कहा।

निशा: पापा फैन बंद कर रही हूँ। डाइनिंग टेबल के निचे बहुत खाना गिरा पड़ा है। सशा अभी भी खाना गिरा देती है खाते वक़्त।

जगदीश राय ने जब निशा को देखा तो उसे पसीना आने लगा

अब तक जगदीश राय निशा की जाँघो पर घूर रहा था। पर अब उसने जाना की निशा शर्ट का पहला २ बटन खोल रखी है। जिसमें उसकी चूचो की गल्ला (क्लीवेज) साफ़ दिख रही थी। निशा के चुचे शर्ट के अंदर तने हुए थे। और पतली कॉटन शर्ट में से निशा की निप्पल्स का आकार साफ़ दिख रहा था।

निशा कोई अप्सरा की तरह लग रही थी।

जगदीश राय को यह जानते देर नहीं लगी की निशा ने ब्रा नहीं पहनी है। निशा ने झाड़ू मारना शुरू कर दिया। जब भी निशा झुकति , जगदीश राय को निशा की आधि से ज़ादा गोरी मुलायम बड़े चूचे दिख जाती।

जगदीश राय निशा को पुरे रूम में झाड़ू लगाते हुए घूरे जा रहा था। वह निशा के चूचे और गाण्ड की एक भी खुला दृश्य खोना नहीं चाहता था।

निशा अब झाड़ू लगा कर कमरे के बीच में आ गयी। सारा कचरा हॉल के सेण्टर में इक्कत्रित किया था।

निशा ने अब अपने पापा के ऑंखों में आंखें डाल कर देखा। उसने देखा की उसके पापा उसे घूर रहे है।

और फिर निशा झुकी। पूरी झुकी।

थियेटर के परदे की तरह सरकती हुयी, छोटी सी शर्ट निशा की गांड को अपने पापा के सामने प्रदर्शित कर दिया।

और जगदीश राय दंग रह गया। जगदीश राय को वह दिख गया जिसे देखने के लिए उसने कल्पना भी नहीं की थी।

गाँड के सुन्हरे गालो के बीचो बीच , जाँघो से सुरक्षित , छिपी सुन्दर चूत उसके आँखों के सामने था।

निशा ने पेंटी भी नहीं पहनी थी।

जगदीश राय का लंड लोहे की तरह तनकर फड़फड़ा रहा था। साफ़ सुथरी चूत इतनी सुन्दर लग रही थी की जगदीश राय को उसे चूमने का दिल किया।

निशा उस्सी पोजीशन में कम से कम 2 मिनट तक झूकी रही। और फिर मुडी।

निशा: अब पापा, मेरी यह शर्ट कैसे लग रही है।।?

जगदीश राय निशा की चूत देखकर इतना गरम हो चूका था की उनकी कान लाल हो चुके थे।

जगदीश राय अपने होश में नहीं था।

निशा: बोलो पापा…

जगदीश राय: क्या …।बेटी… हाँ…। सब ठीक है…।

निशा: हाँ हाँ …क्या ठीक है…मैं पूछ रही हो… शर्ट कैसी लग रही है आपको अभी…

जगदीश राय , होश में आते हुये, निशा की ऑंखों में घूरते हुए, तेज़ी से सासे लेते हुए, हाथो से खड़े लंड को सहलाते हुये।।

जगदीश राय: बहूत सेक्सी है… बहूत बढ़िया… सुपर्ब…।तुम अप्सरा लग रही हो बेटी…मॉडल की तरह

निशा: हम्म्म…। यह हुई न बात…

ओर निशा किचन के तरफ चल दी।

निशा किचन में आते ही , किचन के टॉप पर हाथ रखकर झूक गयी और अपने आँखें बंद कर सर झुकाये खड़ी रही।

उसका दिल ज़ोरो से धड़क रहा था और पैर कांप रहे थे।

अपने पापा को चूत दिखाने में जो हिम्मत उसने जुटायी थी, वह सिर्फ वह ही जानती थी।

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