निशा अपने पापा के स्किन के स्पर्श से कामुक तो हुई। उसने ख़ुद को को संभाल कर पैरो का मसाज शुरू किया।
करीब १० मिनट दायी पैर का मसाज करती रही। जगदीश राय को बहुत मजा आ रहा था। निशा के कोमल हाथ, उसकी गरम गोरी जाँघ का स्पर्श, उसके चूचो का मसाज के वक़्त पैरों पर लगना और पुरे कमरे में निशा और उसकी तेज़ सास। निशा की चूत भी गिली हो चलि थी।
अब निशा जगदीश राय के जांघो पर झूककर बायीं पैर का मसाज करने लगी। निशा को जगदीश राय की बाये पैर की उँगलियाँ मिल नहीं रही थी। जगदीश राय को डर लग रहा था की निशा अगर और झुकि तो उसके दोनों बड़े बूब्स उसके पैरों में मसल जाएंगे।
जगदीश राय: बेटी मैं यह पैर उठाकर यहाँ रख देता हूँ। तुम्हे आसानी होगी।
निशा: आप लेटे रहिये। मुझे कोई तकलीफ नही। मैं घुटने पर होकर मसाज कर लूंगी…
और फिर निशा उठी और अपने दाए पैर पर खडे होकर, बायीं घुटने(कनी) को बेड पर रखकर , अपने पापा के बाए पैर पर झुकी।
और ऐसा करते हुआ निशा ने जगदीश राय को वो नज़ारा दिखा दिया जिससे जगदीश राय के मुह में पानी आ गया और लंड ने लुंगी के भीतर से ज़ोर का झटका मारा।
छोटी शर्ट जो बड़े मुश्किल से गांड को छुपा रही थी, अब हार मानते हुआ निशा की पूरी गांड को खोलकर पापा के सामने पेश किया था। निशा की गांड का उपरी हिस्सा गाण्ड की दरार को चीरते हुआ ऊपर से निकल रहा था।
जगदीश राय निशा की गांड को बेशरमी से घूरे जा रहा था। जो गांड जीन्स और स्कर्ट में बड़ी लगती थी आज नंगी होने पर और भी बड़ी और सुन्दर लग रही थी।
निशा बाए पैर की मसाज करते करते अपने पापा के खडे लंड को देखा और मुस्कुरा दि। वह जानती थी की उसकी गांड के सामने हर मरद हथियार डाल देगा। वह खुद अपने गाण्ड को कई बार मिरर में निहार चुकी थी।
निशा अपने दोनों जाँघे सिमटकर खड़ी थी। वह जानती थी पापा कुछ देर गांड को निहारने के बाद चुत देखने का प्रयास ज़रूर करेंगे।
कुछ देर मसाज करने के बाद, निशा ने पीछे चोरी से देखा। जगदीश राय अब सर को मोड़कर निशा की चूत देखने का प्रयास कर रहा था। वह समझ रहा था की निशा उसे यह करते हुआ देख नहीं पायेगी। पर निशा समझदार थी, उसने अपने पापा की चोरी पकड़ ली थी।
वह अब जानबूजकर मसाज करते हुए अपनी गाण्ड को हिला रही थी, ताकि जगदीश राय को चूत देखने में और दिक्कत हो। वह अपने पापा को छेड रही थी।
जगदीश राय, इतना गरम हो चूका था, की बेडशीट भी गरमा गया था। उसका लंड अब लोहे की तरह खड़ा हो चूका था और उससे छूपने का कोई कोशिश नहीं कर रहा था।
जगदीश राय, निशा की चूत की एक झलक के लिए अब तरस रहा था, पर वह उसे मिल नहीं रहा था। जगदीश राय अब हार मान चूका था।
निशा अपने पापा को इस हालत में देखकर तरस आ गयी। उसने एक झटके में अपने दोनों पैर को खोला।
जगदीश राय ने वह देखा जो वह पिछले 20 मिनट से देखने को तरस रहा था। गोरी मुलायम गांड के बीच में छिपी लाल पेंटी का छोटा सा हिस्सा जगदीश राय को दिखाई दिया। निशा ने अपने पापा को चूत का नज़ारा देखते हुए देख लिया।
निशा: पापा, मसाज अच्छी लग रही है।
जगदीश राय (चूत पर से नज़र नहीं हटाते हुए): हाँ आ बेटी…।बहुत मजा आ रहा है।
अब निशा ने वह किया जिसका जगदीश राय को उम्मीद नहीं थी।
निशा जगदीश राय के जांघो पर झुक गयी। और अपने गाण्ड और पैरों को पूरी तरह खोल दिया और अपनी बड़ी गांड को पीछे ढकेल दिया। अब थोंग का चूत वाला पूरा हिस्सा जगदीश राय के नज़रों के सामने 1 फिट की दूरि पर था। और निशा उसे पूरा खोलकर दिखा रही थी। चूत का हिस्सा पूरा गिला हो चूका था और उसे देख जगदीश राय के मुह में पानी आ गया।
उसी वक़्त साथ ही निशा ने अपने बाए हाथ को सहारे के लिए मोड़ दिया और सीधे उसे पापा के खड़े लंड के ऊपर रख दिया। निशा के बाँहों(एआरएम) का हिस्सा पापा के गरम कठोर लंड की गर्मी जांच रहा था।
जगदीश राय निशा की पेंटी में-छिपी-चूत और लंड पर गरम बाहों का स्पर्श सहना असंभव था।
जगदीश राय निशा के बाँहों के स्पर्श से आँखें बंद कर लिया। निशा पहली बार एक गरम लंड को हाथ लगाये थी, उसकी चूत पूरी गिली हो गयी थी और पानी छोडने के कगार पर थी। निशा के मम्मे अब पापा की पैरो पर भी रगड रहे थे और उसके निप्पल्स अँगूर की तरह खडे हो गए थे।
निशा: अब…मसाज… कैसा लग रहा है…। पापा।। एह…
जगदीश राय (तेज़ सासों से और आंखें बंद कर): बहूत…बढ़िया…बेटी…।
निशा अब दाए हाथ से दोनों पैरो में हाथ घूमाने लगी। और साथ साथ अपनी गांड हिलाने लगी और अपनी बाहों से पापा के लंड को हल्के हल्के हिलाने लगी।
निशा: अब पापा…
जगदीश राय (आंखे आधी खोले, चूत को घूरते हुए): और बढ़िया…बेटी…आह।।आह
निशा ने अब अपनी बाहों का ज़ोर बढाते हुए उसे तेज़ी से गोल-गोल घुमाने लगी। अब उसके बाहों के नीचे पापा का लंड एक खूंखार जानवर की तरह मचल रहा था।
जगदीश राय अब पागलो की तरह सर घुमा रहा था। उसका अब पानी छुटने वाला था, जो वह रोकने की कोशिश कर रहा था।
निशा: अब अछा लग रहा है पापा…
निशा की बाँहों की घुमान, चूत का नज़ारा और सवाल पुछने के अन्दाज़ से, जगदीश राय का लंड अब एप्पल की तरह फूल गया। और फिर वही हुआ जिसका उसे डर था, लंड ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया ।

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