हाय मेरा नाम बिन्दू साक्षी है, मेरी शादी आज से 3 साल पहले विमल से हुई थी। विमल मेरी माँ की सहेली का बेटा है.. वो एक बिजनेस कंपनी में जॉब करता है और अक्सर टूर पर रहता है।
हमारी सेक्स लाइफ ठीक-ठाक ही चल रही थी। शादी से पहले मैं बिल्कुल कुँवारी थी.. यानि किसी मर्द ने मुझे चोदा ना था। मेरा रंग गोरा है.. कद 5 फीट 5 इंच और जिस्म भरा हुआ है.. मेरी चूचियाँ 36 सी नाप की हैं.. चूतड़ों का उभार 36 इंच और बलखाती हुई कमर 28 इंच की है।
शादी से पहले मेरी एक सहेली थी शशि.. जो की मेरी सहेली भी थी और विमल की रिश्ते की चचेरी बहन भी थी।
शशि की शादी आज से दो साल पहले अविनाश से हुई थी.. अविनाश भी टूरिंग जॉब पर रहने वाला बन्दा था। शशि एक चालू लड़की थी.. जिसका कई लड़कों के साथ अफेयर चल रहा था। उसकी ससुराल दिल्ली में थी.. लेकिन अब उसके पति का ट्रान्स्फर हमारे शहर यानि गुड़गाँव में ही हो गया था।
उसका ट्रांसफर जब होने वाला था उससे पहले.. एक दिन मुझे शशि का फोन आया- साली बिन्दू.. मैं तेरे शहर आ रही हूँ.. खूब मज़े करेंगे दोनों.. अगर विमल भैया से मन भर गया हो.. तो मेरे पास बहुत हट्टे-कट्टे मुस्टंडे यार हैं.. जो मेरी तस्सली खूब अच्छी तरह करवाते हैं.. अगर विमल भैया के लंड से बोर हो गई हो.. तो बता देना.. मैं इस इतवार को ही पहुँच रही हूँ.. मेरा एड्रेस लिख लो.. वहीं मिलते हैं.. और बता.. विमल भैया का 6 इंच का लंड अभी तक तुझे खुश रख रहा है या नहीं?
मैं शशि की बात सुन कर शरम से लाल हो रही थी और कहीं विमल ना सुन ले.. इस लिए बोली- अच्छा यार.. मिलते हैं..
‘क़िसका फोन था.. बिन्दू..?’ विमल ने पूछा।
‘मेरी सहेली और आपकी बहन शशि का.. वो बता रही थी कि अविनाश का ट्रान्स्फर भी गुड़गाँव में हो गया है.. जल्द ही वो यहाँ रहने आ रहे हैं।’
अचानक ही मेरी नज़र विमल की पैन्ट के सामने वाले हिस्से पर गई.. जहाँ मुझे नज़र आ रहा था कि उसका लंड खड़ा हो रहा था।
‘अच्छा.. तब तो अच्छा है.. तेरी सहेली आ जाएगी और तेरा मन भी बहल जाएगा.. शशि बहुत हँसमुख लड़की है.. अच्छी कंपनी मिल जाएगी हम लोगों को..’
विमल स्वभाविक होकर ही बात कर रहा था लेकिन मुझे लगा कि वो शायद शशि के प्रति आकर्षित हो रहा है।
मेरी आँखों के सामने शशि का मांसल जिस्म उभर आया.. मेरी सहेली के नितंब भरे हुए थे.. जिनको अक्सर मैंने अपने पति को निहारते हुए देखा था।
आज कल मेरी और विमल की सेक्स लाइफ बोरियत भरी हो चुकी थी.. लेकिन शशि के नाम पर मेरे ठरकी पति का लंड तन गया था।
खैर.. देखेंगे क्या होता है..
मेरे घर में मेरी माँ और छोटा भाई संजय हैं.. संजय 20 साल का है और माँ का नाम रजनी है.. जो कोई 46 साल की हैं। पिता जी का देहांत हो चुका है.. शशि के घर में उसका भाई जिम्मी था।
इतवार के दिन मैं और विमल.. शशि से मिलने गए।
शशि ने बहुत टाइट जीन्स पहनी हुई थी जिससे उसके नितम्ब बहुत उभरे हुए थे। ब्लू जीन्स के ऊपर उसने सफेद टी-शर्ट पहनी हुई थी.. जिसमें से उसके भारी वक्ष बाहर आने को तड़प रहे थे।
उसके निप्पल कपड़े से बाहर निकलने को बेताब दिख रहे थे।
‘विमल भैया.. कैसे हो.. अपनी शशि की कभी याद नहीं आई.. भैया.. ऐसा लगता है.. आप तो हमको भूल ही गए.. लगते हो।’ ये कहते हुए शशि मेरे पति के गले लग गई और विमल ने उसको अपने आलिंगन में ले लिया।
दोनों ऐसा मिल रहे थे जैसे बिछड़े आशिक मिल रहे हों..
अविनाश ने इसका बिल्कुल बुरा नहीं माना और वो मेरी तरफ बढ़ा और मैं उसकी बाँहों में समा गई।
‘जीजाजी जी.. क्या हाल हैं? आपने तो कभी फोन भी नहीं किया.. क्या बात है.. शशि ने ऐसा क्या जादू कर दिया है.. जो हम याद ही ना रहे.. जीजाजी जी..?’
जीजा साली आपस में गले मिले !
अविनाश ने मुझे अपने आलिंगन में लेकर प्यार से मेरी पीठ पर हाथ फेरा।
‘क्या बताऊँ बिन्दू.. काम में इतना व्यस्त हो गया था.. कि टाइम ही नहीं मिला.. अब आराम से मिलेंगे.. बस इस हफ्ते मुझे टूर पर जाना है.. फिर अगले हफ्ते मैं फ्री हूँ.. विमल भैया.. क्या आप फ्री होंगे अगले हफ्ते? यार पार्टी करेंगे.. इसी बहाने हमारी बीवियाँ खुश हो जाएँगी और हम भी दो-दो पैग पी लेंगे।’
विमल हंस कर बोला- ठीक है.. मैं भी इस हफ्ते टूर कर लेता हूँ और अगला हफ़्ता फ्री रख लेता हूँ।
मैंने देखा कि विमल का हाथ शशि की चूचियां पर रेंग रहा था.. उधर अविनाश ने भी मेरी चूचियां को अंजाने में दबा दिया।
मेरे जिस्म में एक करेंट सा लगा और मैं थरथरा सी गई.. थोड़ी देर में विमल और अवी पीने लग पड़े और हम दोनों सहेलियां गप्पें मारने में लग गईं।
‘अब बता.. मेरी बन्नो.. कोई नया यार बनाया कि नहीं.. और या फिर सिर्फ़ भैया से ही चुदवा रही है? भैया तो नए शिकार की तलाश में लग रहे हैं.. बिन्दू.. मेरी रानी.. मर्द एक औरत से बंध कर नहीं रह सकता..’
मैं हंस कर बोली- और तेरे जैसी चालू लड़की एक मर्द से खुश नहीं रह सकती.. अब यहाँ मेरे पति को पटाने आई है? साली.. याद रखना.. विमल तेरा भाई भी है.. कहीं अपनी आदत से मजबूर हो कर मेरे पति को बहनचोद ही ना बना देना.. वर्ना मैं भी तेरे पति को पटा लूँगी..’
शशि मेरे गले में बाँहें डालती हुई बोली- बिन्दू.. मेरी रानी.. तेरा पति तो है ही बहनचोद.. ना जाने कब से बहन-बहन बोल कर मेरे साथ ठरक करता रहा है.. अभी भी भैया मेरी चूचियों पर हाथ फेर रहे थे.. और फिर मर्द का कोई धर्म नहीं होता.. जहाँ औरत देखी.. ये लोग चोदने का प्लान बना लेते हैं। अविनाश कौन सा कम है.. अगर मौका मिले तो अभी तुझे चोद डाले.. मर्द ज़ात तो होती ही है कुत्ता.. और मैं हूँ सेक्स से भरी हुई कुतिया.. जिसकी तसल्ली एक लंड नहीं करवा सकता.. खैर छोड़.. मेरी जान तू बता.. कोई यार बनाया है कि नहीं?’
मैंने बता दिया कि विमल के साथ सेक्स में अब वो मज़ा नहीं रहा.. लेकिन मैंने कोई यार नहीं बनाया.. बनाती भी किसे?
‘यार मैं तो चुदाई की भूखी हूँ और अगर तू भी असली औरत है.. तो तेरा भी मन तरह-तरह के लंड लेना चाहता होगा.. हम ऐसा करेंगे कि तू अवी को पटा लेना और मैं विमल भैया को पटा लूँगी.. एक-एक बार चुदवा कर हम परमानेंट स्वैपिंग करने का माहौल बना लेंगे। जब अवी तुझे और विमल मुझे चोदना चाहेगा.. तो हम दोनों ये काम खुल्लम-खुल्ला करने की शर्त रखेंगे.. बस फिर तो सब हमाम में नंगे हो जाएँगे.. उसके बाद हमारी चाँदी हो ज़ायगी मेरी रानी.. दिल्ली में मेरे यार रघु.. जगन.. वीरू और शाहिद रहते हैं.. सभी के साथ ऐश करवाऊँगी तुझे.. रघु और जगन का तो 10-10 इंच का लौड़ा है.. मेरी जान चुदाई क्या होती है.. तुझे सब पटा चल जाएगा.. तेरी चूत का भोसड़ा ना बन जाए तो कहना..’
मैं तो शशि की बात सुन कर दंग ही रह गई.. मेरी चूत से भी पानी बहने लगा और मुझे अपनी चूचियों पर अवी जीजाजी के हाथ अब भी स्पर्श करते महसूस होने लगे।
‘शशि.. साली तू बहुत गंदी है.. बिल्कुल रंडी.. एकदम कुतिया.. तू पटा लेगी विमल को?’
शशि तैश में आकर बोली- साली.. अगर शर्त लगाएगी.. तो 5 मिनट में विमल को बहनचोद ना बना दिया.. तो मेरा नाम बदल देना.. अभी बोल.. वो 5 मिनट में वो मुझे चोदेगा भी.. और दीदी भी बोलेगा.. तू घबरा मत.. बस अपने जीजाजी को पटाने की सोच.. खैर.. एक प्लान है मेरे पास.. हम भी अन्दर जा कर शराब पी लेते हैं.. और नशे का बहाना बना कर.. आज ही पति बदलने का काम कर लेते हैं..’
मैं कुछ समझ ना सकी तो बोली- वो कैसे?
शशि बोली- ये मुझ पर छोड़ दे.. अब चल..
मैं मन्त्र-मुग्ध सी उसके पीछे चल दी।
हम दोनों जब अन्दर गईं.. तो शशि शरारत से बोली- अवी.. यार हम को भी महफ़िल में शामिल नहीं करोगे? भैया.. क्या हमको शराब ऑफर नहीं करोगे?
शशि जानबूझ कर अपनी गाण्ड मटकाती हुई विमल के सामने गई और बैठ कर उसकी जांघों पर हाथ फिराती हुई बात करने लगी।
मेरा पल्लू भी सरक गया और अवी मेरे नंगे उरोज़ एक भूखे जानवर की तरह देखने लगा।
‘मेरा भी मन कर रहा है कि मैं एक पैग पी ही लूँ.. पीना कोई मर्दों का ही अधिकार नहीं है.. क्यों जीजू?’ ये कहते हुए मैं आगे की तरफ और झुक गई.. जिससे मेरी चूचियां अवी के सामने पूरी नंगी हो गईं।
उधर विमल ने भी शशि को अपनी तरफ खींच लिया और शशि ने अपना सिर उसके सीने पर रख दिया।
‘मुझे कोई एतराज़ नहीं.. अगर तुम लोग पीना चाहते हो.. क्यों अविनाश.. हो जाए थोड़ी सी मस्ती? लेकिन मेरी बहना.. कहीं पी कर बहक मत जाना..’
शशि ने भी अपनी बाँहें विमल के गले में डालते हुए कहा- भैया.. अगर बहक भी गई तो क्या होगा..? यहाँ मैं आपकी बहन हूँ और बिन्दू लगती है.. अवी की साली.. भाई-बहन में कोई भेद होता नहीं और साली तो होती ही आधी घरवाली.. क्यों अवी?’
वो बस हंस पड़ा और मेरे कंधों पर हाथ फेरने लगा।
मेरा बदन अब सेक्स की आग से जलने लग पड़ा था।
‘भैया.. हमको भी दो ना.. मैं गिलास ले कर अभी आई..’
शशि रसोई से गिलास लेने चली गई.. जब वो चल रही थी.. तो विमल बिना किसी शरम के शशि के मादक और ठुमकते हुए चूतड़ों को निहार रहा था और ये अवी भी देख रहा था।
‘विमल यार तू तो बहुत बेशरम हो गया है, बहनचोद.. अपनी बहन की ही गाण्ड घूर रहे हो? साले.. शशि मेरी पत्नी है..। तेरी बिन्दू यहाँ है.. उसको देख अच्छी तरह..’
विमल भी हंस कर बोला- अवी.. मेरे यार.. यारों में तेरा क्या और मेरा क्या.. जो मेरा है.. वो तेरा है और जो तेरा है.. वो मेरा है.. अब तेरी पत्नी पर मेरा भी तो कुछ हक है कि नहीं? जब तू बिन्दू को आलिंगन में ले रहा था तो मैंने कुछ बोला? यारों में सब कुछ बाँट लिया जाता है.. अगर किसी को एतराज़ ना हो.. चल एक और पैग बना.. आज का दिन यादगार बना देते हैं..’
शशि रसोई से गिलास लेने चली गई.. जब वो चल रही थी.. तो विमल बिना किसी शरम के शशि के मादक और ठुमकते हुए चूतड़ों को निहार रहा था और ये अवी भी देख रहा था।
‘विमल यार तू तो बहुत बेशरम हो गया है, बहनचोद.. अपनी बहन की ही गाण्ड घूर रहे हो? साले.. शशि मेरी पत्नी है। तेरी बिन्दू यहाँ है.. उसको देख अच्छी तरह।’
विमल भी हंस कर बोला- अवी.. मेरे यार.. यारों में तेरा क्या और मेरा क्या.. जो मेरा है.. वो तेरा है और जो तेरा है.. वो मेरा है.. अब तेरी पत्नी पर मेरा भी तो कुछ हक है कि नहीं? जब तू बिन्दू को आलिंगन में ले रहा था तो मैंने कुछ बोला? यारों में सब कुछ बाँट लिया जाता है.. अगर किसी को एतराज़ ना हो.. चल एक और पैग बना.. आज का दिन यादगार बना देते हैं।’
तभी शशि आ गई और उसने दो पैग बना लिए- मैं बहुत कम पीती हूँ और मुझे जल्दी ही नशा हो जाता है।
शराब कड़वी थी तो मैंने कहा- शशि साथ में कुछ नमकीन नहीं है? ये बहुत कड़वी है।
मैंने घूँट भरते हुए कहा।
शशि बोली- चल हम रसोई में जा कर एग्स फ्राई कर लेते हैं.. ये भी खा लेंगे.. क्यों अवी एग्स खाओगे?
अवी नशे में हंस कर बोला- जानेमन आज तो तुम लोगों को खा जाने का मन कर रहा है.. अगर खिला ही है तो अपने आम चुसवा लो हम दोनों से.. क्यों विमल? और आपको कुछ खाना है.. तो हमारे केले हाज़िर हैं।’
मेरा तो शरम से बुरा हाल हो गया.. उसकी बेशरमी की बात सुन कर।
‘हाँ हाँ.. खा लेंगे.. आपके ‘केले’ भी अवी.. लेकिन अगर केले में दम ना हुआ तो? वैसे मैं और बिन्दू भी बहुत भूखी हैं.. हम केले के साथ आपके लुकाट भी चूस लेंगी।’
सभी हंस पड़े और मैं और शशि रसोई में एग्स फ्राई करने लगीं।
शशि ने मेरे ब्लाउज में हाथ डाल कर मेरी चूचियाँ मसल डालीं और बोली- बिन्दू.. मेरी जान.. क्यों ना आज ही पति बदल कर टेस्ट क्या जाए.. अवी और विमल अब नशे में हैं.. हमको कुछ करने की ज़रूरत नहीं है.. विमल भैया तो कब से मुझे सेक्सी नज़रों से घूर रहे हैं और अवी तो कल्पना में तेरे कपड़े उतार रहा है। क्यों ना देखा जाए कि विमल को मैं कैसी लगती हूँ.. और तुझे अवी का लंड कैसा लगता है.. एक बार खुल गए तो हम लोग बिना किसी डर के फ्री सेक्स की दुनिया में प्रवेश कर सकते हैं। मेरी रानी.. आजकल ग्रुप सेक्स का बहुत चलन है.. खूब मज़े करेंगे ओके?
मेरे अन्दर तो एक आग भड़क उठी थी..
मुझे अवी एक कामुक मर्द नज़र आ रहा था और मेरी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था। उत्तेजना में आ कर मैंने शशि को आलिंगन में ले लिया और उसके होंठों को चूमने लगी।
‘साली.. तूने मुझे आज बहुत गरम कर दिया है और ऊपर से शराब का नशा.. आज जो होना है.. हो जाने दो.. मुझे तू अपने पति के साथ चुदाई कर लेने दे.. और तू मेरे पति से चुदवा ले.. सखी।’ ये कहते हुए मैंने शशि की चूचियाँ मसल डालीं।
मेरी साँस बहुत तेज़ी से चल रही थी.. मेरा अपने आप पर काबू ना रहा।
‘चल बिन्दू.. पहले हम कपड़े बदल लें.. इससे काम और आसान हो जाएगा।’
शशि मुझे अपने कमरे में ले गई और उसने सारे कपड़े उतार कर एक खुला हुआ घुटनों तक पहुँचने वाला पाजामा और बिना बाज़ू की शर्ट पहन ली और मुझे भी ऐसी ही एक और ड्रेस दे दी।
पाजामा और शर्ट के नीचे हम बिल्कुल नंगी थीं.. मैंने देखा कि शशि ने भी मेरी तरह अपनी चूत ताज़ी शेव की हुई थी।
जब मैंने अपनी साड़ी और ब्लाउज उतारा तो वो मस्ती से भर गई.. और मेरी चूत को मुठ्ठी में भर कर कस दिया।
‘अरे मादरचोदी.. तू भी बहुत गरमा गई है.. मेरे पति को चोदने के विचार से.. अवी ठीक चोदेगा तुझे.. मेरी बन्नो.. साली तेरी चूत से तो नदियाँ बह रही हैं.. मेरे लिए भी पति बदलने का पहला मौका है। चल अन्दर चल कर देखते हैं.. इन कपड़ों में क्या बिजली गिराती है तू.. मेरे पति देव पर?’
इस शर्ट का गला इतना लो-कट था कि कल्पना की कोई ज़रूरत ना बची थी.. जब मैं अन्दर जाने के लिया मुड़ी.. तो शशि ने मेरे नितम्ब पर ज़ोर से चाँटा मारा.. तो मेरी चीख निकल गई- ओह्ह.. शशि साली कुतिया.. मार क्यों रही है साली?
शशि शर्त से मुस्कुराती हुई बोली- क्योंकि मेरे पति.. तेरी डबल रोटी जैसी गाण्ड पर चांटे ज़रूर मारेंगे और शायद तेरे पिछवाड़े का भी आज ही महूरत कर दें.. भारी गाण्ड का बहुत रसिया है अवी।
जब हम कमरे में गईं तो मर्दों की आँखें खुली की खुली रह गईं.. विमल के मुँह से निकल गया- ओह्ह.. भेंचोद.. कितनी सेक्सी हैं ये दोनों औरतें।
अवी तो बस मुझे देखता ही रह गया।
‘यार गर्मी बहुत थी.. तो हमने चेंज कर लिया.. पसीने से भीग रही थीं हम दोनों.. तुम तो यहाँ एसी में बैठे हो.. हम औरतों को रसोई में काम करना पड़ता है.. मेरे तो मम्मों से पसीना नीचे तक जा रहा था.. ओह्ह.. बिन्दू यहाँ आराम है.. बैठ जाओ और शराब के मज़े लो।’
तभी विमल के ताश की गड्डी उठा ली और बोला- चलो कार्ड्स खेलते हैं.. सभी का मनोरंजन हो जाएगा.. क्यों बिन्दू खेलोगी?
मैं भी अब इस सेक्स के गेम में शामिल होने को तैयार थी।
‘विमल यार आज जो गेम भी खेलोगे.. मैं साथ हूँ.. मुझे लगता है कि आज का दिन हम भुला नहीं पाएँगे.. लेकिन गेम की शर्त क्या होगी? हारने वाला कितने पैसे देगा जीतने वाले को? भाई मेरे पास तो बस 500 रुपये हैं..’ मैंने कहा।
तो अवी बोल उठा- मेरी प्यारी साली साहिबा.. अँग्रेज़ लोग एक गेम खेलते हैं.. स्ट्रीप पोकर.. वो ही क्यों ना खेला जाए? जो हारता है.. अपने जिस्म से एक कपड़ा उतारेगा.. शशि को ये गेम पसंद है.. क्यों शशि?
शशि हंस पड़ी- यार नंगी तो होना ही है.. फिर ताश की गेम में क्यों ना हुआ जाए?
मुझे लगा कि अवी और विमल भी वो ही प्लान बना चुके थे.. जो मैं और शशि बना कर आए थे।
हम चारों बैठ गए और विमल ने कार्ड्स बाँट दिए।
‘बिन्दू.. अभी से सोच लो.. अगर हार गईं तो सभी के सामने कपड़े उतारने पड़ेंगे..’
मैं भी अब शराब के नशे में टुन्न हो चली थी, ‘पति देव को अगर अपनी पत्नी को नंगा दिखाने में कोई शरम नहीं है.. तो पत्नी को क्या एतराज़ होगा.. पति देव?’
सभी हंस पड़े.. पहली बाजी विमल हारा.. शशि ने आगे बढ़ कर कहा- विमल भैया की पैन्ट उतारी जाए.. ठीक है?’
हम सभी ने मंज़ूरी दे दी और शशि ने विमल की पैन्ट की बेल्ट खोली और नीचे सरका दी।
मेरा पति अब कच्छा पहने हुए बैठा था.. उसको कोई शरम नहीं थी। क्योंकि उसका लंड तो तना हुआ था.. शशि ने विमल की जाँघों पर हाथ फेरा.. तो अवी बोल उठा- शशि मेरी रानी.. विमल का तो पहले ही खड़ा है.. अगर तुमने हाथ फेरा तो कहीं छूट ही ना जाए।
सभी हंस पड़े।
दूसरी बाजी में हार हुई शशि की.. अवी ने कहा- विमल यार अब बारी तेरी है.. ले लो बदला.. मेरी बीवी से.. मेरी मानो तो इसका पजामा उतार दो.. कम से कम अपनी बहन की चूत के दर्शन तो कर लो।
विमल मुस्कुराते हुए उठा- ठीक है यार.. अगर तू अपनी बीवी की चूत दिखवाना ही चाहता है.. तो देख ही लेते हैं.. क्यों शशि.. मेरी बहना.. कहीं नीचे पैन्टी तो नहीं पहन रखी?
शशि भी बेशरामी से बोली- भैया.. अपनी बहन की चूत देखने का शौक है.. तो पजामा उतार कर ही देखनी होगी.. मुझे भी लगता है कि तुम बहुत बरसों से मेरी चूत के दीदार करने के इच्छुक हो.. क्यों बिन्दू से दिल नहीं भरा?
विमल ने शशि को होंठों पर किस किया और फिर पजामे का एलास्टिक नीचे को खींच दिया।
जब वो एलास्टिक नीचे सरका रहा था तो उसने जानबूझ कर उंगलियाँ उसकी फूली हुई चूत पर रगड़ डालीं।
अवी मुस्कराते हुए बोला- विमल.. साले तू हरामी का हरामी रहा.. साले शशि की चूत को स्पर्श करने की इजाज़त तुझे किसने दी? साले अपनी बहन की चूत पर हाथ फेरते हुए कैसा लगा?
शशि बोली- अवी.. मैं अपनी चूत पर जिसका हाथ फिरना चाहती हूँ.. फिरा सकती हूँ.. मेरे विमल भैया से शिकायत मत करना.. जब तेरी बारी आएगी.. तो बिन्दू पर हाथ साफ़ कर लेना।
तीसरी बाज़ी अवी हारा.. विमल ने मुझे उसकी पैन्ट उतारने को बोला.. जब मैंने उसकी पैन्ट उतारी तो वो बोला- शशि.. तेरी सहेली के हाथ से नंगे होना मज़े की बात है।
तभी मेरे हाथ अवी के नंगे लंड से जा टकराए।
‘उइईए माँ… ये क्या? आपने कच्छा नहीं पहना?’
अवी हंस पड़ा- क्यों साली साहिबा.. हमारा हथियार पसंद नहीं आया.. जो चीख मार दी आपने? आपकी सखी इसकी पर्फॉर्मेन्स से तो काफ़ी खुश है।
उसका लंड किसी गुस्साए नाग की तरह फुंफकार रहा था।
अवी ने जानबूझ कर पैन्ट के नीचे कुछ नहीं पहना था.. उसका लंड विमल के लंड से थोड़ा बड़ा था।
ताश के खेल के साथ शराब के पैग भी सबके गलों को निरन्तर तर करते जा रहे थे जिससे माहौल और भी नशीला होता जा रहा था।
अगली बाजी शशि फिर हार गई और बिना कुछ बोले विमल ने उसकी शर्ट उतार डाली।
अब शशि के मोटे-मोटे मम्मे सबके सामने खुल गए थे और मेरी सखी मादरजात नंगी हो गई थी।
विमल ने आगे झुक कर उसके एक निप्पल को चूम लिया।
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‘बहनचोद.. विमल.. ये फाउल है.. मादरचोद तेरी बीवी एक भी गेम नहीं हारी और मेरी को तू नंगा कर चुके हो.. और ये ही नहीं साले.. तुम अपनी ही बहन का दूध भी पी रहे हो..’ विमल बोला।
‘अवी यार.. हिम्मत है तो मेरी बीवी को हरा दो और कर दो उसको नंगा.. मुझे कोई एतराज़ नहीं.. मेरी बीवी भी हम सभी के बराबर ही है।’
अब की बारी मैं हारी.. तो सभी बहुत खुश हुए
अगली बाजी शशि फिर हार गई और बिना कुछ बोले विमल ने उसकी शर्ट उतार डाली।
अब शशि के मोटे-मोटे मम्मे सबके सामने खुल गए थे और मेरी सखी मादरजात नंगी हो गई थी।
विमल ने आगे झुक कर उसके एक निप्पल को चूम लिया।
‘बहनचोद.. विमल.. ये फाउल है.. मादरचोद तेरी बीवी एक भी गेम नहीं हारी और मेरी को तुम नंगा कर चुके हो.. और ये ही नहीं साले.. तुम अपनी ही बहन का दूध भी पी रहे हो..’ विमल बोला।
‘अवी यार.. हिम्मत है तो मेरी बीवी को हरा दो और कर दो उसको नंगा.. मुझे कोई एतराज़ नहीं.. मेरी बीवी भी हम सभी के बराबर ही है।’
अब की बारी मैं हारी.. तो सभी बहुत खुश हुए।
‘साली साहिबा.. अब आई हमारी बारी.. मैं भी तेरी शर्ट उतार कर नंगा करता हूँ तुझे.. देखूं तो सही कि… चूचियां पत्नी की अधिक सेक्सी है या साली की?’
अवी के हाथों ने पहले तो मेरी चूचियों को अच्छी तरह टटोला.. मेरी चूचियां पत्थर की तरह कड़ी हो गई थीं।
कसम से अवी का हाथ लगते ही.. मैं पागल हो गई। मेरी शर्ट उतार कर जब उसने मेरी चूचियां को चुम्बन किया.. तो मैं चुदासी हो गई। मैं चाहती थी कि आज मुझे अवी चोद डाले.. मेरी चूचियां गुलाबी हो गईं।
‘ऊऊओह.. अवी मत करो.. प्लीज़ीईईई..’
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अवी ने मुझे होंठों पर चुम्बन किया और बोला- साली साहिबा.. जब आपने हाथ लगा कर मेरे लंड को दीवाना बनाया था.. भूल गईं..? अभी तो आपकी चूत को नंगा करना बाकी है।’
अब सब कुछ खुल्लम-खुल्ला हो चुका था बस लौड़े चूतों में लगने बाकी रहे गए थे।
शराब ने हमारी सारी झिझक को खत्म कर दिया था।
फिर हारा अवी.. और विमल ने मुझसे कहा- बिंदु डार्लिंग.. अब अपने जीजा को कर दो पूरा नंगा.. उतार दो इससकी कमीज़ भी।
मैंने वैसे ही किया.. अवी का सीना काले बालों से ढका हुआ था और जब उसने मुझे अपने सीने से लगाया तो मेरी कड़क चूचियां उसकी छाती के स्पर्श से फटने को आ गईं।
अवी ने एक हाथ मेरे पजामे में डाल कर मेरी चूत को स्पर्श किया.. तो मेरी सिसकारी निकल गई.. मेरी चूत से पानी की धारा बह रही थी।
‘साली साहिबा.. आपकी चूत तो पागल हुई जा रही है.. क्यों ना इसका इलाज मैं अपने लंड से कर दूँ..? विमल यार.. आज मेरी बात मान लो.. प्लीज़.. तुम शशि को चोदो और मुझे बिंदु को चोद लेने दो। इतनी गरम चुदासी चूत मैंने आज तक नहीं देखी.. अगर किसी को एतराज़ है.. तो अभी बोल दे।’
विमल और शशि ने ‘हाँ’ बोल दी.. वो हैरान हुए जब मैंने कहा- मुझे एतराज़ है.. जीजाजी मुझे आज की पार्ट्नर्स बदलने की स्कीम पर एतराज़ है.. अगर करना ही है.. तो फ़ैसला हो जाए कि ये अरेंजमेंट हमेशा के लिए होगा.. हम चारों आपस में किसी के साथ भी.. जब चाहें.. जो करना हो कर सकते हैं। अगर मंज़ूर है.. तो बोलो।
अवी ने मेरी चूचियां को चूमते हुए कहा- साली साहिबा.. आपने तो मेरे मन की बात कर डाली.. लेकिन शायद विमल को रोज़ रोज़ अपनी बहन चोदना पसंद ना आए।
विमल ने शशि को अपनी गोदी में उठाते हुए कहा- अगर तुम्हारा ये प्रोग्राम अच्छा है.. तो फिर इस में कोई एतराज़ क्यों? चलो एक पैग और बनाओ.. हमारे इस नए रिश्ते के लिए.. आज पता चल जाएगा कि घर की चूत कितनी स्वादिष्ट होती है।
शशि उठी और पैग बना कर ले आई.. अवी ने मुझे अपनी गोद में बिठा लिया और शशि विमल की गोद में जा बैठी।
विमल के सिवाय हम सभी नंगे थे.. अवी का लंड मेरी गाण्ड में घुसने की कोशिश कर रहा था।
जब मैंने देखा तो विमल शशि की चूत को हाथों से रगड़ रहा था और जब उसके गिलास से कुछ शराब शशि की चूचियां पर गिरीं.. तो विमल उसको चाटने लगा।
‘ओह्ह.. मेरे बहनचोद भाई.. ये क्या कर रहे हो.. मैं तो कब से जल रही हूँ.. लो चूस लो मेरी चूचियां.. आआहह.. दबा कर चूसो भैया… हाय… मैं मर गई.. मेरी चूत एक शोला बनी हुई है… बस करो भैया.. अब नहीं रहा जाता… पेल डालो अपना पापी लंड अपनी बहन की चूत में.. मैं मरीईईई…. उउउफफ.. भैयाअह… चोद डालो मुझे.. ऊऊओह बहनचोद.. बहन के लण्ड.. आह..’
अवी ने अब शराब अपने लंड के सुपारे पर गिरा डाली.. और मुझे चाटने को बोला।
उसका सुपारा उठक-बैठक कर रहा था और जब मैं उसको चाटने के लिए झुकी.. तो उसने खड़ा लंड मेरे मुँह में डाल दिया।
मैंने आँखें बंद करके उसके लंड को चूसना शुरू कर दिया और उसके अंडकोष हाथों में ले कर मसलने लगी।
अवी मेरे मुख को किसी चूत की तरह चोदने लगा- ओह बहनचोद बिंदु.. बिल्कुल रांड है तू.. मेरी पत्नी जैसी रांड है तू.. जो अपने भाई से चुदवाने को तड़प रही है.. बहन की लौड़ी.. आआअहह…रुक जाओ.. वरना मैं झड़ जाऊँगा.. तेरी माँ की चूत.. साली बस कर।’
मैं भी अवी को झड़ने नहीं देना चाहती थी. इसलिए रुक गई।
‘विमल.. चलो हम सबको.. हमारे किंग साइज़ डबलबेड पर चल कर.. एक साथ चुदाई शुरू करनी चाहिए.. वहाँ मैं तुझे अपनी बहन को चोदते देखना चाहता हूँ.. चाहे वो मेरी बीवी ही है।’
विमल ने शशि का नंगा जिस्म बाँहों में उठा लिया और उसको बिस्तर पर ले गया। अवी ने मुझे उठा लिया और मैं और शशि साथ-साथ नंगी ही बिस्तर पर चित्त लेट गईं।
दोनों मर्द लोगों के लंड रॉड की तरह खड़े थे।
‘साली साहिबा.. मैं तो तुझे घोड़ी बना कर चोदना चाहता हूँ.. क्योंकि तेरी गाण्ड मुझे बहुत सेक्सी लगती है.. मैं अपना लंड पीछे से तुम्हारी मदमस्त चूत में जाता हुआ देखना चाहता हूँ।’
मैं अपने मर्द के हुक्म का पालन करती हुई घोड़ी बन कर हाथों और घुटनों पर झुक गई।
‘हाँ मेरे हरामी पतिदेव.. मैं जानती थी तू यही करेगा.. अब मेरी सहेली की गाण्ड भी चाट ले.. क्योंकि तुझे थोड़ी देर बाद अपना लौड़ा उसकी गाण्ड में भी घुसाना है..’ शशि बोली।
वो विमल की तरफ मुड़ी- मुझे क्या हुक्म है भैया? मुझे भी घोड़ी बनाओगे क्या? अगर घोड़ी बनाओगे.. तो भी ठीक है.. क्योंकि कम से कम बहनचोद बनते वक्त बहन की शक्ल नहीं देख पाओगे..’ शशि बोली।
विमल ने कहा- बहना.. बहनचोद रोज़-रोज़ तो बना नहीं जाता.. कब से तमन्ना थी तुझे चोदने की.. पहली बार तो देखना चाहता हूँ कि मेरी बहना भी चुदाई के लिए तैयार है अपने भैया से? मेरी लाड़ो बहना.. मैं चाहता हूँ कि तुम मेरे ऊपर चढ़ कर मुझे बहनचोद बनाओ.. मैं अपनी बहन की चूत में अपना लंड जाता हुआ देखना चाहता हूँ.. लेकिन पहले एक बार अपनी चूत मेरे मुख से लगा कर अपनी नमकीन चूत का स्वाद तो चखा दो.. मेरी बहना.. अपनी चूत को मेरी ज़ुबान पर रख दो.. प्लीज़!’
विमल लेट गया और शशि उसके ऊपर चढ़ कर उसे अपनी चूत चटवाने लगी।
अवी ने पीछे जाकर एक उंगली शशि की गाण्ड में डाल दी और ऊँगली से उसकी गाण्ड छोड़ने लगा।
‘अवी मादरचोद.. हट जा.. साले तुझे बिंदु जैसी हसीन राण्ड मिली है.. और तू हम भाई-बहन को आराम से चुदाई नहीं करने दे रहे हो.. लगता है.. किसी दिन भैया से तेरी गाण्ड मरवानी पड़ेगी मुझे।’
शशि की गाण्ड तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थी।
असल चुदाई की स्टेज सज चुकी थी.. अवी मेरे पीछे झुका और अपनी ज़ुबान को मेरी गाण्ड में घुसा कर चाटने लगा।
मेरी गाण्ड आज तक कुँवारी थी.. एक नया आनन्द मेरे बदन को मिल रहा था।
उधर शशि अब उठी और अपनी दोनों जांघों को फैला कर विमल के लंड पर सवार होने लगी। विमल ने अपने हाथ उसकी चूचियां पर कस दिए और शशि ने उसका लंड हाथ में पकड़ कर अपनी चूत पर रख दिया और नीचे बैठने लगी।
अवी ने भी अब गाण्ड चाटना बंद कर दिया और मेरे ऊपर चढ़ गया।
अवी का सुपारा किसी आग के शोले जैसा गरम था.. उसने मेरे नितम्बों को फैलाया और जांघों के बीच से लंड मेरी चूत में ठेल दिया।
‘आआआह.. भैय्आआअ… अन्दर जा रहा है तेरा लंड.. ऊऊओह बहनचोद बन गए तुम विमल भैया.. तेरी बहन तुमसे चुद रही है आज… शाबाश मेरे भाई.. चोद लो मुझे.. आह्ह।’
लगता था कि विमल का लंड शशि की चूत की जड़ तक समा गया था। अवी का सुपारा भी मेरे अन्दर फंस चुका था और मैं आनन्द के सागर में गोते लगा रही थी।
‘उर्र्ररज्ग्घह… डाल दो जीजा.. चोद लो अपनी साली को… मादरचोद एक ही बार में घुसा दो जीजा.. मत रोको.. पूरा पेलो भोसड़ी के मुझे… उउस्स्ईई.. हाय मर गई मेरी माँ… आआआआह.. पेलो जीज्ज़आा..’
अवी ने अब एक ही झटके में पूरा लंड पेल दिया.. उसका लंड मेरी चूत में बुरी तरह फिट हो गया और वो मुझे कुतिया की तरह चोदने लगा।
मैं भी अपनी कमर उचका कर अपनी गाण्ड को उसके लंड पर मारने लगी।
पूरा कमरा ‘फॅक..फॅक..’ की आवाज़ों से गूँज उठा.. एक बिस्तर पर हम चार लोग जन्नत की सैर कर रहे थे।
विमल ने अपनी बहन के कूल्हे जकड़ लिए और नीचे से अपने चूतड़ों को उठा कर उसे चोदने लगा। अवी भी अब एक कुत्ते की तरह हाँफ रहा था।
‘अवी मादरचोद थक गए क्या..? देखो मेरा पति कैसे चोद रहा है तेरी लुगाई को? तुझ में दम नहीं है क्या भोसड़ी के..? साले चोद अपनी साली को.. ज़ोर से.. ज़ोर से… अन्दर तक पेल अपना लंड जीज़्ज़ाअ माँ के लौड़े.. साले.. ले.. आह।’
अवी ने मेरे बाल पकड़ लिए और घोड़े की लगाम की तरह खींच कर मुझे धकापेल चोदने लगा।
अब उसका लंड मेरी कोख से टकराने लगा। बाज़ू में अपनी सहेली और अपने पति को देख कर मेरी उत्तेजना की कोई सीमा ना रही और मैं झड़ने लगी।
‘ओह्ह.. ज़ोर से चोद.. मैं झड़ी.. अवी चोद मुझे.. आआहह… मैं झड़ रही हूँ..ऊऊह.।’
अवी ने भी धक्के तेज़ कर दिए।
मुझे लगा कि वो भी मंज़िल के नज़दीक है। अचानक लंड रस की गरम धारा मेरी चूत में गिरने लगी और मेरा चूत रस.. अवी जीजाजी के लंड रस से मिल गया।
उधर शशि ने एक चीख मारी और विमल पर ढेर हो गई.. हम चारों झड़ चुके थे।

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