कमसिन बहन – Update 7 | Incest Sex Story

कमसिन बहन - Incest Seductive Sex Story
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फिर मंजू को पिछले सारे दिनों की बाते एक झटके में याद आ गयी….

की कैसे उसका खुद का दिल विक्की के लिए धड़कता था…कैसे उसे देखकर उसके निप्पल टाइट से हो जाते थे….
कैसे बाइक के पीछे बैठकर वो अपने मुम्मे उसकी पीठ से रगड़ती थी….और उसके बारे में सोचकर अपनी चूत को रगड़ने में कितना मज़ा आता था….और विक्की ने कितनी बार उसे चोकोबार खिलाई थी…

आज उन सभी चोकोबार का बदला उतारने का वक़्त आ गया था….वैसे भी विक्की के लंड से निकल रही भीनी गंध उसे अपनी तरफ खींच रही थी…उसने धीरे से अपना मुँह खोला और अपनी जीभ बाहर निकाल कर विक्की के लंड को नीचे से उपर तक चाट लिया और फिर उपर जाते ही उसके लंड को मुँह में लेकर अंदर निगल गयी.

आज शायद विक्की को भी नही पता था की उसके साथ क्या-2 होने वाला है.

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अब आगे
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”आआआआआआआआआअहह मंजू………………… मेरी ज़ाआाआअनन्…चूस इसको……… चाट मेरे लंड को ……..खा जा इसे….”

‘मेरी जान’ शब्द ने जैसे मंजू पर किसी जादू जैसा प्रभाव डाला…
उसके अंदर एक नयी सफूर्ती सी आ गयी….
वो दुगने जोश के साथ उसके लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी…
अब तक उसे लंड का स्वाद भी अच्छा लगने लग गया था इसलिए उसे भी अपनी तरफ से एक्सट्रा प्रेशर देने में कोई तकलीफ़ नही थी…

और अचानक उसके लॅंड से ढेर सारा रस निकलकर मंजू के मुँह मे जाने लगा….
ये सब इतनी जल्दी हुआ की ना तो विक्की को उसे रोकने का मौका मिला और ना ही उसके सिर को हटाने का..
बल्कि उसके हाथ तो मंजू के सिर पर और तेज़ी से दबाव बनाने लगे ताकि उसके लंड की एक-2 बूँद सीधा उसके अंदर जाए…
मंजू भी हैरान थी की ये अचानक लंड से क्या निकलने लगा…कहीं वो मूत तो नही रहा उसके मुँह में..
पर फिर कुछ स्वाद से भरी गाड़ी मलाई जब उसे गले से नीचे जाती महसूस हुई तो उसे समझते देर नही लगी की ये क्या है…
स्वाद तो बुरा था नही उसकी मलाई का..
इसलिए वो भी गटागट उसे पीती चली गयी, कुछ अंदर गयी तो कुछ बाहर निकलकर गिर गयी
वो तब तक उसके लंड को चूसती रही जब तक विक्की के लंड का पाइप खाली नही हो गया…

विक्की तो निढाल सा हो गया एकदम से…
ऐसा लग रहा था उसे जैसे मंजू ने लंड के मध्यम से उसकी जान ही निकाल ली है..

मंजू ने अपने होंठो पर लगे रस को अपनी उंगलियो से इकट्ठा किया और उसे अंदर निगलकर चूस गयी…
ऐसा करते हुए वो किसी गुंडी से कम नही लग रही थी.

विक्की कुछ देर बाद खड़ा हुआ और बाथरूम के अंदर जाकर अपने चेहरे को पानी से धोने लगा…
तब जाकर उसकी गर्मी निकली…
कहाँ तो उसने कुछ देर पहले सोच लिया था की वो आज मंजू को पूरा नंगा करके उसे पूरी तरह से चाटेगा
उसके मखमली जिस्म के अच्छे से मज़े लेगा और शायद चुदाई का भी कोई सीन बन जाए…
और कहाँ उसके लंड ने झड़ने के बाद सारे समीकरण ही बदल डाले थे…
अब तो उसका मंजू को किस्स करने का भी मन नही कर रहा था…
बस किसी तरह यहां से निकल जाए यही सोचता हुआ वो बाहर आ गया…

मंजू तब तक उसी टॉपलेस हालत में बैठी थी….
वो उठी और विक्की के गले से लिपट गयी और फिर धीरे-2 विक्की के गले से लेकर उपर तक किस्स करने लगी..
पर विक्की का मूड अब बदल चुका था…
उसने मंजू को पीछे करते हुए कहा :” मंजू….अब मुझे चलना चाहिए….घर पर भी सब राह देख रहे होंगे…और तेरे मम्मी पापा भी तो आने ही वाले है…कल मिलते है…ओके …”

इतना कहकर वो बिना उसके जवाब की प्रतीक्षा किए बाहर निकल गया और अपनी बाइक लेकर घर आ गया…
और पीछे बेचारी मंजू अपना खुला सा मुँह लिए उसके इस बर्ताव को देखती रह गयी.

 

घर आते ही जब उसकी नज़रें नेहा से मिली तो उसकी आँखों में छुपी हँसी देखकर उसे समझते देर नही लगी की वो उस से क्या पूछना चाहती है…
वो भी जानती थी की उसके घर वो आज ज़रूर कुछ ना कुछ करके ही आया होगा…
पर ऐसे सीधा कुछ उस से पूछने की हिम्मत नही हो रही थी उसकी.

रात को जब सभी ने खाना खा लिया तो विक्की चुपचाप अपने रूम में चला गया…
किचन का काम निपटा कर नेहा और उसकी माँ भी फ्री हो गये और अपने-2 बेड पर जाकर सो गये…

पर नेहा की आँखो में तो आज नींद थी ही नही….
जब से वो वापिस आई थी उसके सामने सुबह से शाम तक की सारी बाते घूम रही थी…
वो खुद भी हैरान थी की कैसे उसने अपने भाई के सामने इतनी बेशर्मी से अपने कपड़े उतार दिए और वो भी मंजू के सामने …
और वो साली मंजू भी तो कैसे अपनी छातिया उसके भाई को दिखा रही थी…
उसकी नज़रो से सॉफ पता चल रहा था की वो विक्की को दिल ही दिल में चाहती है, पर ना जाने क्यों एक बहन होने के बावजूद उसे इस बात से जलन सी हो रही थी …

शायद वो भी मन ही मन अपने भाई को चाहती है…..
ऐसा सोचते ही उसका चेहरा एकदम लाल हो गया और वो मंद-2 मुस्कुराने लगी..

उसने इधर-2 उधर नज़रें घुमाई और अपने मम्मी पापा के रूम को अच्छे से चेक किया, थके होने की वजह से उनके ख़र्राटों की आवाज़ें बाहर तक आ रही थी.

फिर वो दबे पाँव पलटी और किसी बिल्ली की तरह बिना आवाज़ के उछलते हुए अपने भाई के रूम की तरफ चल दी…

वहां पहुँचकर उसने देखा की विक्की अपने बेड पर औंधा लेटा हुआ है और अपने फोन पर कुछ चेक कर रहा है…

नेहा ने इस वक़्त एक लंबी सी स्कर्ट और टी शर्ट पहनी हुई थी और अंदर उसने कुछ भी नही पहना था.

वो दबे पाँव उसके बेड तक गयी और उछलकर उसकी पीठ पर बैठ गयी..

विक्की भी एकदम से चोंक गया…
पर ज़्यादा डरा नही,क्योंकि उसे पता था की नेहा उपर ज़रूर आएगी..
पर उपर आते ही उसके उपर ऐसे चढ़ जाएगी, इसका अंदाज़ा नही था उसे..

विक्की : “अरे मोटी…हट मेरे उपर से…कचुम्बर निकालेगी क्या मेरा…”

वो तो पहले से ही मस्ती के मूड में थी, वो विक्की की पीठ पर अपने मुम्मे बिछा कर उसपर लेट गयी, और उसके कानों के पास मुँह लाकर बोली : “इतने सालो बाद मुझे घोड़े की सवारी करने को मिली है, ऐसे कैसे जाने दूँ …”

विक्की ये सुनकर मुस्कुरा दिया,
बचपन में उसका रोज का काम होता था घोड़ा बनकर अपनी बहन को पूरे घर में घुमाना ,
इस चक्कर में उसके सारे कपड़े गंदे हो जाते थे और उसके घुटने भी छिल जाते थे
उसे खुद इस काम में बड़ा मज़ा आता था…
शायद उसके नर्म कूल्हे उसे उस वक़्त भी उतना ही उत्तेजित करते थे जितना आजकल कर रहे हैं…

आजकल तो कुछ ज़्यादा ही कर रहे है….
क्योंकि इस वक़्त नेहा के कुल्हो के साथ-2 उसकी चूत भी उसकी गांड पर रगड़ खा रही थी…
लेटने के बाद तो वो उसकी चूत का ताप सॉफ महसूस कर पा रहा था…

और नेहा ने जब घोड़े वाली बात बोली तो वो लेटे -2 ही उसके उपर हिचकोले लेकर उसकी पीठ की सवारी का आनंद भी लेने लगी….
ऐसा करते हुए उसका एक-2 अंग विक्की के शरीर पर घिस्से मार रहा था….
उसके नन्हे स्तन भी और उनपर लगे निप्पल्स भी …
साथ ही साथ उसकी उभरी हुई कमसिन चूत भी …

आज इतने सालो बाद एक बार फिर से विक्की को घोड़ा बनाकर उसकी सवारी करने में उसे सच में आनंद आ रहा था…
विक्की भी अपनी पीठ और कमर पर महसूस हो रही गर्मी का आनंद लेते हुए धीरे-2 मुस्करा रहा था…

नेहा के बाल विक्की के चेहरे पर दोनो तरफ से गिरकर उन दोनो को ढक चुके थे…
उसके होंठ विक्की के कान के इतने करीब थे की उसकी गहरी हो रही सांसो की आवाज़ उसे सॉफ सुनाई दे रही थी….
वो साँसे धीरे-2 हल्की सिसकारियों में बदलने लगी…
विक्की को ऐसा लग रहा था जैसे वो इयरफोन लगा कर कोई चुदाई का वीडियो देख या सुन रहा है,
ऐसी सैक्सी आवाज़ें निकल रही थी नेहा के मुँह से…

अचानक नेहा की जीभ बाहर आई और उसने विक्की के कान को चाट लिया…
ये स्पर्श ऐसा था मानो नागिन ने छू लिया हो उसके कानो को डसने से पहले…
विक्की लगभग उछल सा पड़ा पर नेहा के वजन से दबे होने की वजह से वो निकल नही पाया…

 

विक्की ने दबी हुई सी आवाज़ मे पूछा :” नेहा….ये..ये क्या हो रहा है तुम्हे….चलो उतरो नीचे….तुम्हारे वजन से मेरी जान निकल रही है…”

पर नेहा पर उसकी बात का कोई असर ही नही पड़ा…
उसने तो जैसे सुना ही नही…
अब वो उसके कान को चाटने लग गयी थी अपनी जीभ से…

और नेहा की जीभ विक्की के पूरे शरीर में एक बिजली की लहर की तरह काम कर रही थी….
और जब उससे सहा नही गया तो वो अपना पूरा ज़ोर लगा कर बेड पर सीधा हो गया…
नेहा एक झटके मे उसकी पीठ से फिसलकर नीचे बेड पर गिरी पर उतनी ही डुर्ती से वो वापिस उसके उपर भी आ गयी…
फ़र्क अब ये था की वो उसकी पीठ पर नही बल्कि उसके सीने पर लेटी थी…

विक्की का लंड इस वक़्त किसी मीनार की तरहा उपर खड़ा था, ये भी एक कारण था उसके सीधे होने का क्योंकि उल्टा लेटे होने की वजह से उसका खड़ा हुआ लंड उसे परेशान कर रहा था..

अब उसकी बहन के नन्हे स्तन उसके सीने पर थे और उसकी मखमली चूत का गर्म एहसास उसके खड़े हुए लंड पर…

नेहा भी विकी के खड़े लंड को अपनी चूत पर महसूस करके मचल रही थी…
कल जब विक्की ने उसके नन्हे बूब्स को चूसा था तो उनकी कसक अभी तक उसके अंदर थी…
एक अजीब सी खुजली हो रही थी उसके निप्पल्स पे जिन्हे अब सिर्फ़ और सिर्फ़ विक्की ही मिटा सकता था…

और विक्की के लिए भी अब सब्र करना मुश्किल हो रहा था….
उसने अपने होंठ जैसे ही आगे किए, नेहा उसपर किसी भूखी बिल्ली की तरहा टूट पड़ी और अपना शरीर उसपर रगड़ते हुए उसे बुरी तरह से स्मूच करने लगी…

एक के बाद अब दूसरी स्मूच सच में विक्की के कॉन्फिडेंस को बड़ा रही थी…
इन कमसिन जवानियों को अपनी बाहों में भरकर चूमने का आनंद वो सच में एंजाय कर रहा था..

ख़ासकर अब…
अपनी बहन के साथ…

शायद आज शर्म की एक और दीवार टूटने के कगार पर थी उन दोनो भाई बहनो के बीच..

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