अध्याय 57
मैं थका हुआ अपने कमरे में ही लेटा हुआ था ,बहुत ही शुकुन इस बात का था की मेरी बहने मेरे साथ ही थी..
मैं अभी अभी होटल से आया था ,तभी कमरे का दरवाजा खुला और निशा ने पूर्वी को अपने साथ अंदर लाया ,मैं उन्हें ध्यान से देख रहा था,निशा पूर्वी का हाथ पकड़े हुए अंदर ला रही थी,वो मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी,आखिर इन लड़कियो का इरादा क्या था ..??
वो दोनो पहले की तरह ही मेरे आजू बाजू आकर लेट गई और मुझे अपने बांहो में घेर लिया …इतना सुखद अहसास होता है जब आपको प्यार करने वाले आपके पास हो…
मैं भी अपने दोनो हाथो से उनके बालो को सहला रहा था,निशा ने पहला कदम उठाया और मेरे शर्ट को निकाल फेका,मुझे इससे गुदगुदी का अहसास हुआ और मैं खिलखिला उठा,
वो दोनो ही अपने झीनी नाइटी में थे,मैं ऊपर से कपड़ो से विहीन था और मेरे शरीर पर उसके गुद्देदार वक्षो की चुभन को महसूस कर रहा था,
मैं उनके प्यार से भरा जा रहा था,निशा एक्टिव थी लेकिन पूर्वी थोड़ी शर्मा रही थी ,वही पूर्वी जो कभी मुझसे नही शर्माती थी वो आज शर्मा रही थी उसे देखकर मुझे उसके ऊपर बहुत प्यार आ रहा था लेकिन मैं कोई भी जल्दबाजी नही करना चाहता था क्योकि मुझे निशा का भी तो डर था ना जाने वो क्या मीनिंग निकाल लेगी ,
इधर निशा की सांसे तेज होने लगी थी मुझे पता था की उसे क्या चाहिए लेकिन मैं भी पूर्वी के होने के अहसास से भरा हुआ थोड़ा सकुचा रहा था जिसे निशा ने भांप लिया था…
वो प्यार से मेरे गालो को अपने होठो में भरे हुए उन्हें चूसने लगी ,
“अब भी क्यो दीवार हमारे बीच आ रही है क्या भइया,अब तो पूर्वी भी हमारे खेल में शामिल हो सकती है “
निशा ने हम दोनो को ही ऐसे झेड़ा था की हम दोनो ही शर्मा गए और पूर्वी वँहा से भागने को हुई लेकिन निशा ने उसका हाथ पकड़ कर उसे रोक लिया
“तू ही तो कह रही थी ना की भाभी को देखकर कुछ कुछ हो रहा था तो रुक जा ना आज अच्छे से उसे कर लेते है “
पूर्वी और भी बुरी तरह से शर्मा गई ,उसका गोरा चहरा लाल हो चुका था,उसके फुले हुए गालो से जैसे खून गिर रहा हो,उसके होठ फड़कने लगे थे ,नजर नीची थी लेकिन होठो पर एक मुस्कान थी …
आज मैंने पहली बार अपनी बहन को ऐसे देखा था जैसे वो अपने प्रेमी के पास खड़ी हो .
मैं भी तो उसका प्रेमी ही था लेकिन रिश्ते अलग थे,मैं उसके प्रेम था लेकिन प्रेम का एक्सप्रेशन ही अलग था…
जो आज बदलने वाला था ,या यू कहे की कुछ दिनों से बदल रहा था…
पूर्वी ना गई ना ही फिर से लेटी ,लेकिन निशा ने उसका हाथ पकड़े हुए ही मेरे कानो में कुछ कहा
“आज इसे भी जन्नत दिखा दो भइया,आप आगे नही बढ़ोगे तो ये कभी आगे नही बढ़ेगी “वो बोल कर मुस्कुराई ,जो लड़की कभी मुझे बांटना नही चाहती थी आज वो मुझे बांट रही थी ‘
मेरी प्रश्न से भरी हुई निगाहों को उसने पहचान लिया था ,
“मैं आपको नही बांट रही हूं ,असल में मुझे ये समझ आ गया है की प्यार को बंटा ही नही जा सकता “
उसने मुस्कुराते हुए मुझे देखा
अब मुझे ही शुरुवात करना था दीवार तो पहले ही गिर चुकी थी और मर्यादाओं से हम कब के बाहर आ चुके थे ..
मैंने पूर्वी का हाथ थमा और उसे अपने ओर जोरो से खिंच लिया ,वो मेरे सीने से आ लगी …
उसका कोमल लेकिन भारी सीना मेरे चौड़ी बालो से भरी हुई छाती में आ धसे थे ,उसके होठ मेरे होठो के पास ही थे ,दोनो ही होठ फड़फड़ा रहे थे,मेरा हाथ उसके कमर को कस रहा था ,वो शर्मा रही थी जैसे नई नई दुल्हन सुहागरात को शर्माती हो ,सच में आज मैंने अहसास किया था की पूर्वी का जिस्म और रूप ऐसा था जिसे कोई भी मर्द पाना चाहे,मासूम से चहरे और मासूम से मन में प्यार और समर्पण की कलियां खिलने लगी थी ,और वो बेसुध सी हो रही थी ,मैं इस अहसास को समझ सकता था लेकिन जैसा समर्पण पूर्वी का मेरे लिए था वो तो भाग्यवानों को ही नसीब होता है और मैं उन्ही भाग्य के धनी लोगो में था ..
वो शरमाई हुई कमसिन सी कली थी उसकी सुर्ख होठो में आखिर मैंने अपने होठो को रख ही दिया ,वो जैसे तड़फ ही गई ,वो कसमसाई और अपने होठो को खोलकर मुझे पूरा आमंत्रित करने लगी ,जैसे जैसे मैं उसके होठो को चूसे जा रहा था उसकी और मेरी जीभ दोनो ही गुथमगुत्थि किये जा रहे थे ,वो दोनो ही मिलकर एक नया अहसास हमारे मन में भरे जा रहे थे जो की हवस तो बिल्कुल भी नही था,
पूर्वी के आंखों से आंसू की कुछ बूंदे निकल गई ये उस समर्पण की बूंदे थी जो एक लड़की अपने प्यार के लिए करती है ,
निशा हमे देखकर बस आंसू ही बहा रही थी,और मुस्कुरा रही थी,
ये सुखद था और साथ ही मन को सुकून देने वाला भी था,निशा ने अपने हाथो को आगे बड़ा कर अपने नाइटी को पूरा खोल दिया ,कोई आश्चर्य नही था की वो अंदर से पूर्ण नग्न ही थी ,उसका शरीर कमरे के माध्यम प्रकाश में जगमगाने लगा था,लेकिन हम दोनो का ही ध्यान उसकी ओर नही था ,वो मेरे और पूर्वी के शरीर से बाकी वस्त्रों को निकालने में व्यस्त हो गई थी,जबकि पूर्वी और मैं बस एक दूजे के होठो के जरिये एक दूजे के दिल में उतर रहे थे..
कुछ ही देर में एक बिस्तर में तीन नग्न शरीर लेटे हुए थे ,मैं सीधे लेटा हुआ था जबकि पूर्वी और निशा मेरे ऊपर थी ,दो जवान कलियों के बीच होने का अहसास क्या होता है जो आपसे इतना प्यार करती है ….??जैसे जन्नत में आ गए हो..
मेरा लिंग अब भी मुरझाया हुआ ही था ,मैं अब भी पूर्वी के होठो से मद का पान कर रहा था वही कभी कभी उसके आंखों से बहते हुए आंसुओ को भी अपने होठो से पी रहा था ,वो भी मेरे आंखों में गालो पर अपने होठो को यदाकदा रख दिया करती थी ,
लेकिन निशा ने मुझे ऐसे रहने नही दिया वो मेरे लिंग को अपने होठो से सहलाने लगी ..
“आह……..”
मेरे मुह से अनायास ही निकल गया ..
उसका मुह मेरे लिंग को भर रहा था और उसके लार से मेरा लिंग और भी चिकना हो रहा था ,उसने ऊपर की त्वचा को नीचे किया और अपने थूक से उसे गीला करके अपने मुह से मुझे सुख की दरिया में डुबो दिया ..
मैं मगन था और मेरी बहने भी अपने अपने जगह में मगन थी ..
पूर्वी अपने जिस्म को मुझसे और भी जोरो से सटा रही थी और सिसकिया ले रही थी ,मैं उसकी उत्तेजना को समझ नही पा रहा था लेकिन मुझे आभास हुआ की निशा पूर्वी के योनि को भी अपने हाथो से मसल रही है ,पूर्वी भी उत्तेजित होकर मेरे होठो को काटने और खाने पर उतारू हो गई थी ,
अब मैंने भी निशा जो की इतनी मेहनत कर रही थी उसे भी थोड़ा सुख पहुचने की सोची ,मैंने अपना हाथ आगे बढ़कर उसके कूल्हों को सहलाया ,उसके कसे हुए भारी और मखमली चूतड़ों को सहलाते हुए मैं उसकी पीछे से ही अपने हाथ को उसके योनि पर लाया ,वो तप रही थी लेकिन फिर भी गीली थी ,उसमे हल्के बाल उग आये थे ,मैं उन बालो पर अपने हाथ फेर रहा था और उसकी गीली योनि को भी ऊपर से ही सहला रहा था ,वो भी उत्तेजित थी ..
अब हम तीनो ही उत्तेजना की अवस्था में आ चुके थे ,तीनो की आंखे बंद थी और एक दूजे के शरीर से सुख ले रहे थे,निशा का मुह मेरे लिंग की मालिस कर रहा था वही निशा का हाथ पूर्वी के योनि की जबकि मेरा हाथ निशा की योनि की मालिस कर रहा था,तीनो ही एक दूसरे पर गुथे जा रहे थे…
मैंने थोड़ी आंखे खोली तो मुझे कमरे के गेट पर कोई खड़ा हुआ दिखा ,मैंने ध्यान दिया वो काजल थी ,
मेरी और काजल की आंखे मिली वो अविश्वास से हमे देख रही थी,हमारी नजर मिलते ही मेरे होठो पर एक मुस्कान आ गई ,
कल मैं उसे देख रहा था और वो ममुस्कुरा रही थी और आज वो मुझे देख रही थी और मैं मुस्कुरा रहा था,मैं कुटिल मुस्कान से उसे देख रहा था,उसका चहरा ये सब देखकर लाल हो चुका था ,उसकी आंखे बड़ी हो गई थी ..
माना वो कैसे भी हो लेकिन फिर भी थी तो मेरी पत्नी,और मैं भले ही बाहर कुछ भी करता हु लेकिन आज ये सब उसके आंखों के सामने ही हो रहा था ,जिसे देखकर वो जल रही थी ,मैं इस अनुभव को कल महसूस कर चुका था ,उसकी मुठ्ठी कसे जा रही थी और मुझे ये देखकर बहुत ही मजा आ रहा था,मेरी निगाहे मानो उसे ये कह रही हो की देख, देख मुझे भी प्यार करने वालो की कमी नही है ,और जो लोग तेरे जिस्म से खेलते है वो बस हवस के लिए खेलते है लेकिन मेरे पास सच में प्यार करने वाले है…
काजल के आंखों में आंसू छलकने वाले थे ,वो इसे देखकर उत्तेजित भी थी लेकिन आंखों में आंसू भी आ रहे थे,जलन से उसका सीना भी जल रहा होगा ,ये मेरे साथ भी हो चुका था और मैं इस स्तिथि को समझ सकता था,वो मेरी आंखों में देखकर जाने को पलटी ,लेकिन मैंने तभी पूर्वी के कूल्हे में एक जोरदार चपात लगा दी ..
“आउच “पूर्वी दर्द और मजे से बोल पड़ी और पूर्वी की आवाज सुनते ही काजल तुरंत ही पलट गई और हमे देखने लगी मेरी मुस्कान और भी गहरा गई थी ,वो गुस्से भरे नयनो से मुझे देखकर चली गई लेकिन मैं जानता था की वो गुस्सा नकली था,उसकी आंखे बता रही थी की वो और भी देखना चाहती थी ,वो उत्तेजित थी और इसलिए वो वँहा से निकलना चाहती थी ..
मैं ये भी जानता था की वो बाहर नही जा पाएगी वो घर में ही रहेगी जब तक हमारा काम खत्म नही हो जाता लेकिन वो बहनों के नजर में भी नही आना चाहेगी…
आखिर मेरा लिंग भी पूरी तरह से गीला हो चुका था और साथ ही मेरी बहनों की योनि भी ,
मैं उनको अपने से अलग किया और निशा को हटा कर पूर्वी को अपने नीचे लिटा लिया ,निशा मेरे ऊपर आ गई और मेरे पीठ को चाटने और काटने लगी ,
मैंने पूर्वी के निगाहों में देखा ,वो शर्मा कर ही सही लेकिन उत्तेजक निगाहों से मुझे देख रही थी और जैसे कह रही थी की अब आगे बढ़ो…
मैं आगे बढ़ा और अपने लिंग को उसकी योनि में सहलाने लगा,वो मुझे पूरी तरह से जकड़ कर मुझसे खुद को सटाने लगी ,
उसकी गीली योनि में मेरा लिंग फिसलने लगा था ,लेकिन अब भी वो बहुत टाइट था,धीरे धीरे ही सही लेकिन मेरे लिंग का ऊपरी भाग उसके योनि में धंस गया ,वो मछली जैसे छटपटाई लेकिन मेरे होठो को अपने होठो से मिलाते हुए थोड़ी शांत हो गई ,मैं हल्के हल्के धक्के से अपना लिंग उसके अंदर पूरी तरह से प्रवेश करवा दिया…
नई नई जवानी में खिली हुई योनि ने लिंग को मजबूती से जकड़ रखा था, ऐसा अहसास मुझे पहली बार हुआ था, हल्के बाल भी लिंग से रगड़ खा जाते थे, मेरा लिंग पूर्वी के योनि रस से पूर्णतः भीग चुका था,और थोड़ी आसानी से उसके अंदर जा रहा था, उसके आंहो से पूरा कमरा गूंजने लगा था ,उसकी योनि हर रगड़ के पहले ढीली हो जाती और जब लिंग पूरी तरह से अंदर जाता तो तो कस जाती थी ,इतना सुखद अहसास मुझे सच में कभी नही हुआ था,वो मुझे मेरी बहन से मिल रहा था,मेरी प्यारी सी छोटी बहन से ,लेकिन सुख तो सुख होता है जंहा से भी मिले…
वही निशा मेरे ऊपर झा गई थी वो अपने जिस्म को मेरे बदन पर रगड़ रही थी और अपने होठो और हाथो से मेरे हर अंगों को नहला रही थी,
उत्तेजना तेज हुई और मैं मैंने जोर जोर से धक्के देना शुरू दिया,
“आह आह आह “
पूर्वी की सिसकारियां पूरे कमरे में गूंजने लगी थी ,उसकी आंखे बंद थी और ओ उस मजे की गहराई में खोई हुई थी ,उसका कमर ऊपर उचक रहा था और मेरा कमर उसके कमर में धंसे जा रहा था,उसका सारा शरीर अकड़ गया और वो जोरो के झड़ी,उसने मेरे कंधे पर अपने दांत गड़ा दिए थे…
अब वो शांत किसी लाश सी गिर गई थी ,शरीर में कोई हलचल नही हो रही थी ,मेरा लिंग इतना पानी पाकर तृप्त महसूस हो रहा था और वो ज्यादा अकड़े जा रहा था,मैं भी अपने चरम के निकट था,लेकिन मैंने अपने लिंग को निकाला नही और अपनी बहन के गर्भ में झड़ने लगा,वो मेरा गर्म लावा अपने अंदर महसूस करके और भी ज्यादा तृप्त होने लगी और मेरे होठो को अपने होठो से चूसने लगी थी ……
मैं थककर जब पूर्वी से हटा तो निशा मेरे ऊपर चढ़ गई अभी तो मुझमें वो हिम्मत नही थी की मैं फिर से कुछ कर पाऊ लेकिन निशा कहा मानने वाली थी ,उसनें मेरे लिंग को अपने होठो में भर लिया,पूर्वी मुझसे सटी हुई मुझे बांहो में भरकर सो रही थी वही निशा मेरे लिंग को अपने होठो में भरे हुए चूस रही थी ,मैं जब दरवाजे की ओर देखा तो मेरे होठो की मुस्कान फैल गई ,सामने काजल खड़े हुए अपने साड़ी के ऊपर से ही अपने योनि को मसल रही थी ,मुझे मुस्कुराता हुआ देख वो गुस्से से भर गई वो झूठा गुस्सा था और मुझे मारने का इशारा किया ,मैं हल्के से हँस पड़ा,वो अधीर थी जैसे अब तब रो ही डाले लेकिन ये रोना दुख का नही बल्कि उत्तेजना का था,जब उत्तेजना ज्यादा बढ़ जाए तो भी व्यक्ति का रोना निकल जाता है………..
अब मेरा लिंग तैयार था निशा को भरने के लिए ,मैंने सोए हुए ही उसे अपने} ऊपर कर लिया ,निशा ने भी अपने योनि में मेरे लिंग को सटाया और मेरे ऊपर कूदने लगी,मैं फिर से आनद के गहराई में जा रहा था,ये तब तक चलता रहा जब तक की मैंने उसे भर ही नही दिया ,तब तक काजल को भी समझ आ गया था की अब उसका यंहा रुकना ठीक नही है ….

