रंडियो का घर – Update 29 | Incest Story

रंडियो का घर - Incest Adultery Sex Story
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अध्याय 29
“रुको “मेरी आवाज से निशा रुक गई जिसने अभी अभी मेरे लिए दरवाजा खोला था,

जेल से आने के समय काजल फिर के होटल चले गई थी ,निशा ने दरवाजा खोला और सर झुकाए जाने लगी ,मुझे ये बात बहुत ही तकलीफदेह लग रही थी की मेरी ही बहन मुझसे ऐसे पेश आ रही थी ,शायद वो उस दिन की मेरी बातो को अब भी अपने दिमाग में बसा कर रखे थी…

“तुम ऐसे मुझसे भाग क्यो रही हो “निशा पलट भी नही रही थी और सर झुकाए खड़ी थी …

“कुछ भी तो नही भइया “

“पूर्वी कैसी है “

“ठिक है अपने कमरे में है “मैंने निशा से अभी बात करना उचित नही समझा ,मैं सीधे ही उनके कमरे की ओर बढ़ा,आज उसने मुझे नही रोका ,मैं कमरे में था और मेरे सामने मेरी प्यारी बहन पूर्वी लेटी हुई थी,मुझे देखते ही वो खुसी से उछाल पड़ी,वो आज ही घर आयी थी और मैं उससे अभी मिल रहा था…

“कैसी है मेरी जान “मैं उसके पास ही बिस्तर में जाकर बैठ गया ,वो उठाने को हुई लेकिन मैंने उसे लिटा दिया ..

“अरे मुझे कोई उठाने क्यो नही देता है “

उसकी मासूमियत में तो दुनिया कुर्बान थी ..

मैं हंसा

“मैं पूरी तरह से ठीक हु भइया अब तो मैं कालेज भी जा सकती हु “

कालेज ?????

मैंने तो ये सोचा ही नही था,अब क्या मेरी बहनों का कालेज जाना ठीक होगा क्योकि जो मैंने किया था उससे पूरे कालेज में इन्ही की चर्चा हो रही होगी,और उनको खतरा भी होगा …

मेरे मनोभाव शायद पूर्वी की समझ में आ गए थे..

“अरे जिसका आपके जैसा भाई हो उन्हें अब कोई कुछ नही बोलेगा आप क्यो फिक्र कर रहे हो “

पूर्वी ने मेरे मन की बात सुन ली थी ,

“कुछ दिन रेस्ट कर ले फिर मैं ही तुझे कालेज छोड़कर आ जाऊंगा “मैंने उसके बालो को सहलाते हुए कहा ,

“क्या भइया आप भी ….कितना रेस्ट करूँगी मैं ,बोर होई जाती हु यंहा लेटे लेटे ..और आप फिक्र मत करो मेरी अब मुझे कुछ भी नही होगा “

“ह्म्म्म “

मैं भी चुप हो गया और उसके जख्मो को देखने लगा ,ज्यादा गहरा घाव नही बना था,लेकिन जलने वाली जगह में निशान बच गया था,घाव पूरी तरह से ठीक था और उसकी चमड़ी से उसके नस दिख रहे थे,ऊपर की त्वचा जल गई थी ,मुझे उसे देखकर फिर से बड़ा दुखी हुआ ,

“देखो ना भइया सब तो ठीक हो गया है और मुझे कोई कमजोरी भी नही है अब “

वो उठकर मेरे गले में झूल गई ,मुझे मेरी पुरानी पूर्वी वापस मिल गई थी ,मैं उसे अपने गले से लगा कर रखा रहा,मेरी नजर उस कमरे में पड़ी…..

यही वो कमरा था जंहा मेरे आने से मेरी बहनों को परेशानी थी ,आज उन्हें कोई परेशानी नही हो रही थी इसका मतलब था की उन्होंने वो चीज हटा दी होगी ,मैं ध्यान से देखने लगा सभी कुछ तो ठीक था बस एक चीज के ,एक दीवाल जो की बिस्तर के बाजू ने ही था,मुझे लगा की उसपर कोई पोस्टर चिपका हुआ रहा होगा जिसे अभी अभी निकाला गया था,क्योकि पोस्टर तो निकल गया था लेकिन उस जगह का कलर बाकी दीवाल के कलर से अलग था,मैं फिर से नजर दौड़ाया और मुझे वो पोस्टर भी दिख गया,जो की निशा के स्टडी टेबल के नीचे में मोड़कर रखा गया था,क्या था उस पोस्टर में जिसे मेरी बहने मुझसे छिपा रही थी ,???

मैं ज्यादा खुफिया गिरी नही करना चाहता था …

मुझे निशा का आभास हुआ जो की मेरे पीछे ही खड़ी थी ,मैं जब पलटा तो उसने फिर से नजर झुका लिया,मैंने पूर्वी को देखा और आंखों ही आंखों में पूछा कि क्या हुआ ..

उसने उसने अपनी नजर बड़ी करके मुझे बताया की आपके ही कारण हुआ है ये अब मनाओ …उसका चहरा और एक्प्रेशन देखकर मुझे हँसी आ गई लेकिन मैं बस मुस्कुराया …

मैंने निशा का हाथ पकड़ा और बिस्तर में बिठा दिया ,वो अब भी नजर गड़ाए हुए बैठी थी ,

“मुझसे नाराज हो ???”

मैंने कहा ही था की वो वँहा से उठ कर चली गई ,मैंने देखा था की उसके आंखों में आंसू थे …हम दोनो ही उसे जाते हुए देखते रहे लेकिन कोई कुछ भी नही बोल पाया ,वो कमरे से बाहर चली गई शायद किचन में …

“इसे क्या हो गया है “मैं पूर्वी की तरफ मुड़ा जो की उदास दिख रही थी ..

“भईया ……..”वो भी चुप हो गई और उसने उस पोस्टर की तरह उंगली की जो की गोल मोड़कर रखा गया था,मुझे पता था की यही वो पोस्टर है जोकि कभी इस दीवार मके लगा रहा होगा ..

“उसे देखो “

पूर्वी ने उदास स्वर में ही कहा ..

मैं उठकर उस तक पहुचा और उसे खोला …

मेरी नजर फ़टी की फ़टी रह गई थी ,ये था जिसे मेरी बहने मुझसे छिपा रही थी ……

मैं चौक कर फिर से पूर्वी को देखने लगा

“हम नही चाहते थे की आपको इसका पता चले लेकिन …..दीद आपसे बहुत प्यार करती है भइया और ये इसका सबूत है ,”

मेरी बहन मुझसे प्यार करती है तो इसमें छिपाने वाली क्या बात थी ???

ये उस पोस्टर से पता लग रहा था,जिसके बीच में एक दिल बना हुआ था जिसपर मेरी फ़ोटो लगी थी ,उसके चारो ओर सिर्फ मेरी ही फ़ोटो थी,ऐसा लग रहा था की किसी नवजवान लड़की को प्यार हो गया हो और वो अपने महबूब की तस्वीरों से दीवाल को सजाने के लिए इसे बनाया हो ,निशा की मेहनत इसमें साफ नजर आ रही थी ,मेरी कुछ चुनिंदा तस्वीरों से उसने एक आदमकद का पोस्टर बनाया था…मेरी आंखे भर गई ..

“मैं भी आपसे प्यार करती हु भइया लेकिन दिदि का प्यार कुछ अलग ही है …वो आपके लिए पागल है ,यहां तक की जब आपकी शादी हुई थी तब सबसे ज्यादा वही रोइ थी …मैं जानती हु की ये गलत है लेकिन ………..”

पूर्वी थोड़ी चुप हो गई ,मुझे काजल ने कुछ तो बता दिया था लेकिन आज मैं इसे फील भी कर सकता था …

“दिदि ने तो भाभी को भी धमका दिया था ,वो तो भाभी को भी ……..”जैसे पूर्वी को होशं आया हो की वो क्या बोल रही है ,वो चुप हो गई जैसे कोई सदमा लगा हो ,मैं उसके पास जा बैठा

“भाभी को भी क्या “

पूर्वी के चहरे में एक डर आ गया था मैं जानता था की वो क्या बोलना चाहती थी ..

“कुछ नही भइया “

“मुझसे कब तक तुम लोग झूट बोलकर निशा को बचाने की कोशिस करोगे ..मैं जानता हु की उसने काजल को मारने की कोशिस की थी और तुझे भी …..”कमरे में एक अजीब सा सन्नाटा पसर गया था …

“मैं ये भी जानता हु की जो एसिड अटैक तेरे ऊपर हुआ वो उसी ने करवाया था…”

अब पूर्वी रोने लगी थी ,

मैंने उसे अपने सीने से जकड़ लिया ,

“मैं जानता हु मेरी जान की तुम निशा को कितना प्यार करती हो ,उसकी हर गलतियों के बावजूद और मैं ये भी जानता हु की निशा के लिए ये सहना बहुत ही मुश्किल होता है की मैं उसके अलावा किसी और को प्यार दिखाऊ,मैं जानता हु की वो बीमार है और उसे अगर कुछ ठीक कर सकता है तो मेरा प्यार ..लेकिन इसका ये तो मतलब नही हुआ की मैं तुझे प्यार करना बंद कर दूंगा ……….अब तो निशा भी जानती है की मुझे उसके बारे में पता चल गया है शायद इसी लिए वो मुझसे इतनी दूर भाग रही है,लेकिन वो दिल की अच्छी है ,वरना अभी तक वो काजल और तुझपर और भी हमले करवा सकती थी ,उसे अपनी गलती का अहसास है लेकिन वो बीमार है ,जब उसे उत्तेजना होती है तब उसमें कुछ भी सोचने समझने की शक्ति नही बच पाती,और जब गलती हो जाए तो फिर पछताने के सिवा और कोई चारा नही बचता “

पूर्वी मेरे सीने से लगी हुई सिसक रही थी ..

“भइया सच में दिदि अच्छी है ,मेरे ऊपर हमला तो करवा दिया लेकिन फिर वो इतना रोइ है ,,,,,,,वो तो ठीक से खाना भी नही खा पा रही है प्लीज् उसे मनाओ शायद जब आप उसे समझाओगे तभी तो ठीक हो पाएगी…सच में हमशे बहुत बड़ी गलती हो गई,हमे आपको सब कुछ पहले ही बता देना था ,अगर हम आपको पहले ही बता देते तो शायद मुझेपर ये अटैक ना होता और ना ही भाभी मुसीबतों में फंसती “वो रोती रही ..

“फिक्र मत कर मेरी जान मैं सब कुछ सम्हाल लूंगा अब उसे सम्हालना मेरे ऊपर है …”

मैं थोड़े देर और पूर्वी के साथ ही बैठा रहा और फिर बाहर जाकर निशा की ओर रुख किया ,वो अभी किचन में ही थी………

“ये क्या कर रही हो “

मैं निशा को देखकर चौक गया था,उसके बाल बिखरे हुए थे और वो किचन में जमीन में बैठी थी ,ऐसा लग रहा था जैसे वो बहुत ही रोई हो ,उसने मुझे देखा उसकी आंखे बता रही थी की उसकी हालत क्या थी ,आंखों का काजल आंसुओ की वजह से फैल गया था,कपड़े अस्त व्यस्त थे जैसे उसने उसे जोरो से खिंचा हो ,वो एक बहुत ही दर्दनाक मानसिक द्वंद से गुजर रही थी …

लेकिन मेरे लिए डर का कारण था वो धारदार चाकू जो उसने अपने हाथो में पकड़ रखा था…मुझे देखते ही वो ऐसे चौकी जैसे कोई चोर चौक जाता है,

उसके इरादे समझ कर मेरे दिल की धड़कने ही रुक गई ..

“नही निशा …”मैं जोरो से बोल गया और दौड़कर उसके पास पहुचा ,वो मुझसे बचने लगी जैसे मैं उसका बलात्कार करने वाला हु …

वो मुझे खुद को छूने भी नही देना चाहती थी

“नही भइया मत छुओ मुझे ..मैंने पाप किया है भइया …मैंने पाप किया है…”

मैंने हाथ बढ़ाया लेकिन वो फिर से पीछे हट गई ..

‘मेरी बहन मेरी बात सुन मैं तुझसे बहुत प्यार करता हु ,निशा मेरी जान सुन मेरी बात “

मेरे आंखों में पानी आने लगा,ऐसा लगा जैसे उसकी इस हालत का जिम्मेदार मैं ही था,दिल तडफ गया और आंखों से वो पानी टूटकर गिर पड़ा ,

“नही भइया ,मैंने पाप किया है भइया मुझे मत छूना आप भी गंदे हो जाओगे भइया,मुझे मर जाना चाहिए मुझे मर जाने दो ..”

मैं जैसे रो ही पड़ा लेकिन निशा को जैसे कुछ फर्क ही नही पड़ रहा था,वो अभी भी सिमटी हुई बैठी थी मेरे रोने से उसे कोई फर्क नही पड़ रहा था,वो अपने ही धुन में थी लेकिन उसकी इस हालत को देखकर मैं बुरी तरह से टूट गया था ,

लेकिन ये समय टूटने का नही था,अगर मैं टूटा तो हो सकता था की मैं अपनी बहन को हमेशा के खो दु,क्या मैं इतना भी मजबूत नही था जितनी मेरी छोटी बहन और मेरी बीवी थी जिन्होंने इतने दिनों तक मुझसे ये बात छुपाए रखी थी …और निशा को पूरी तरह से सम्हाल कर रखा था…

लेकिन आज निशा की हालत सबसे खराब थी ,कारण था मेरे द्वारा उसे बोले गए वो शब्द जो उसे अंदर ही अंदर से खोखला कर रहे थे,अगर मुझे पता होता की इसकी हालत ऐसी हो जाएगी तो मैं उस पर कभी ये जाहिर ही नही होने देता की मुझे सब कुछ पता है ,मैं इसे साधारण ऑब्सेशन समझ रहा था लेकिन आज मुझे पता चला की काजल ने मुझे जल्दी कुछ करने को क्यो कहा था,

निशा बहुत ही बेचैन और डरी हुई लग रही थी ,जैसे किसी लड़की के साथ जबरदस्ती की जा रही हो और वो एक कोने में सिमट कर बैठी हो ,वही हालत इस समय निशा की थी वो एक कोने में सिमट कर बैठी हुई थी …और मुझे दूर रखने को कह रही थी ,

मेरे सामने सबसे बड़ी प्रॉब्लम थी वो चाकू जिसे उसने कस कर पकड़ रखा था ,मैंने उसका ध्यान भटकना ही ठीक समझा ..

“निशा ,,,मेरी बहन मेरी आंखों में देख ,क्या तुझे लगता है की मैं तुझसे नाराज हु ….”

वो थोड़ी देर को शांत हुई

“देख मेरी आंखों में मैं तो दुनिया में सबसे ज्यादा तुझसे ही प्यार करता हु ..फिर ये गलत कैसे हुआ मेरी बहन …क्या तू भूल गई उस दिन को अगर काजल नही आती तो हम एक ही हो जाते ….है ना “

मेरी बात से वो बहुत ही शांत हो गई थी लेकिन अब भी उसके हाथ चाकू पर मजबूती से बंधे हुए थे ..

वो एक सोच में पड़ गई थी जिसने मुझे एक मौका दिया ..

“अगर तुझे मेरी बात पर यकीन नही तो मेरे कमरे में चल ,मैं तुझे पूर्वी और काजल से भी ज्यादा प्यार करता हु ,मैं तुझे सब से ज्यादा प्यार करता हु “

मैं एक उमंग में बोल गया ,मैंने अपने बात में पूरी तरह से फिलिंग भरी क्योकि मैं नही चाहता था की उसे मेरे झूट का पता चले ,

“सच्ची ..”उसकी आवाज में एक अद्भुत भोलापन था

“आप झूट तो नही बोल रहे हो “

वो धीरे से बोली

“पागल मेरी बात तुझे झूट लग रही है ..मेरे गले से लग के देख ..आ मेरे पास आ “

वो अब भी झिझक रही थी ,मैं उसके पास नही जा रहा था क्योकि वो हड़बड़ाहट में कोई गलत कदम भी उठा सकती थी ..

“आना …अपने भाई पर तुझे भरोषा नही है ,मैं तो सोचता था की तुम मुझे बहुत प्यार करती हो लेकिन तुम्हे तो मुझपर भरोषा ही नही है …”मैंने रूठने की एक्टिंग की

“और जब भरोषा ही नही है तो छोड़ो मैं जा रहा हु “

ये बोलते हुए मेरे दिल की धड़कने भी रुक गई थी क्योकि मैं वँहा से नही जाना चाहता था लेकिन निशा को ये बोलना पड़ा ,अगर वो कोई प्रतिक्रिया नही करती तो मेरे लिए सचमे एक मुसीबत खड़ी हो जाती ..मैं थोड़ा मुड़ने को हुआ

“नही …”

निशा की आवाज ने मुझे हिम्मत दी मैं झट से उसकी ओर हुआ

“नही मैं आपके ऊपर भरोषा करती हु भइया “

उसके आंसू सुख चुके थे वो अभी अभी नार्मल कंडीसन में नही आयी थी और मुझे अभी उसे नार्मल नही करना था अभी तो मुझे उसके हाथ से वो चाकू छुड़वाना था

“तो आ मेरे गले लग जा ,वरना मैं चला “

वो मेरे आंखों में देखने लगी जैसे मुझे नाप रही हो …

“सच में तू मुझसे प्यार वयार नही करती ,सब दिखावा है तेरा “

मैं हल्के गुस्से में बोला ताकि उसके दिल में बात लगे और वो तुरंत कुछ ऐसा करे जिससे मुझे मौका मिल जाए ,

“नही भइया मैं आपसे बहुत प्यार करती हु “

वो मेरी ओर बड़ी और मैने उसे खीचकर अपने सीने के लगा लिया ,जैसे एक ज्वालामुखी फटा हो वो जोरो से रोने लगी ,मुझसे लिपटे हुए उसके आंसुओ से मेरे कपड़े भीगने लगे थे मैंने उसे अपने सीने से ऐसे कसा था जैसे मैं उसे अपने अंदर समाना चाहता था ,मैं जानता था की उसके लिए रोना कितना जरूरी था,,,मैंने उसके हाथो से वो चाकू निकाल कर दूर रख दिया और उसे जकड़कर बस वही बैठ गया ,उसका रोना बंद नही हुआ लेकिन उसने मेरे गालो में चुम्बनों की बरसात ही कर दी ,उसके थूक से मेरा पूरा चहरा गीला हो गया था,वो मुझे पागलो की तरह चूम रही थी ..

“I LOVE YOU BHAIYA …I LOVE YOU BHAIYA..I LOVE YOU BHAIYA,….I LOVE YOU BHAIYA…I LOVE YOU BHAIYA…I LOVE YOU BHAIYA …I LOVE YOU BHAIYA..I LOVE YOU BHAIYA,….I LOVE YOU BHAIYA…I LOVE YOU BHAIYA “

वो बोलते हुए थक भी नही रही थी और मुझे चूमे जा रही थी उसके मुह से बस एक ही बात निकल रही थी ,मैंने तो जैसे उसके सामने खुद को सिलेंडर ही कर दिया था ,जब वो रुकी तो मैंने फिर से उसे जोरो से जकड़ा ,मैं उसे उठाकर अपने कमरे में ले गया और बिस्तर में डाल दिया ,उसके आंखों में अब भी आंसू थे ,मैं उसके बाजू में सोया और उसे जकड़ लिया ,वो फिर से मुझे चूमने लगी ..

“भइया क्या आप सच कह रहे हो सबसे ज्यादा मुझे प्यार करते हो …”

मैं मुस्कुराया

“कैसे साबित करू ,इतना भी यकीन नही है अपने भइया पर “

वो मुझसे लिपट गई

“नही भइया मैं बस आपको खोना नही चाहती “

“दुनिया की कोई ऐसी ताकत है क्या जो मुझे मेरी बहन से जुदा कर दे …और तुझे काजल और पूर्वी से क्या डर है ,क्या तुझे लगता है की उनके कारण मैं तुझसे अलग हो जाऊंगा ,अरे पागल तू मेरी है और मैं तेरा हु,तूने ऐसा सोच भी कैसे लिया की काजल और पूर्वी तुझे मुझसे अलग कर देंगे ,,,क्या तुझे मेरे प्यार में विस्वास ही नही है “

ना जाने कब मैं एक्टिंग करते करते सच बोलने लगा था,मेरी हर बात मानो मेरे दिल से आ रही थी और मेरे आंखों का वो आंसू भी झूठा नही था जो अभी अभी मेरे आंखों से गिरा था …

“मुझे माफ कर दो भइया मैं आपको समझ ही नही पाई “

मैंने उसे फिर से जकड़ लिया ,वो सुबकते हुए ही मेरे सीने में समाई हुई सोने लगी थी ,वो मानसिक थकान उसके ऊपर हावी हो गया था और वो धीरे धीरे नींद के आगोश में जा रही थी …मेरे दिल में आया की मैं उसके होठो को चूम लू लेकिन आज वो सही समय नही था ,मुझे अपनी बहन की बेहद ही फिक्र हो रही थी ,जिस तरह की मानसिक स्थिति उसकी थी वो प्यार से ज्यादा पागलपन बन चुका था ,मुझे पहले अपने प्यार के बल में ही उसे सही करना था और मैं इसके लिए कुछ भी करने को तैयार था………

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