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हवस का वो तूफ़ान जब थमता है, तो पीछे सन्नाटा और कड़वी हकीकत छोड़ जाता है। आर्यन बिस्तर पर निर्जीव सा पड़ा था, उसका शरीर पसीने और थकान से चूर था। अंजलि उठी, उसके चेहरे पर अभी भी वह सफेद निशान थे जो उसके ‘पतन’ और आर्यन की ‘मर्दानगी’ की गवाही दे रहे थे। वह बिना कुछ बोले बाथरूम की ओर बढ़ गई।

बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ आ रही थी। अंजलि अपना चेहरा साफ़ कर रही थी, और यहाँ बिस्तर पर लेटे आर्यन के दिमाग में एक दूसरा ही मंजर शुरू हो गया।

जैसे-जैसे शरीर की उत्तेजना शांत हुई, आर्यन के दिमाग पर चढ़ा वह ‘जानवर’ धीरे-धीरे उतरने लगा। ५ मिनट के अंदर ही उसे उन शब्दों की गूँज सुनाई देने लगी जो उसने अभी-अभी चीख-चीख कर कहे थे।

आर्यन के कानों में खुद की आवाज़ गूँजी— “रांड… छिनाल… कुतिया…” उसे यकीन नहीं हो रहा था कि ये शब्द उसी के मुँह से उसकी माँ के लिए निकले थे। जिस माँ ने उसे उंगली पकड़कर चलना सिखाया, जिसने उसे दुनिया की हर बुराई से बचाया, आज उसी माँ को उसने बिस्तर पर सबसे गंदी गालियां दी थीं।

आर्यन का दिल तेज़ी से धड़कने लगा। उसे अपनी परवरिश याद आने लगी। वह सोचने लगा, “क्या मैं इतना गिर गया हूँ? क्या हवस ने मुझे इतना अंधा कर दिया कि मैंने अपनी माँ की ममता का ज़रा भी लिहाज नहीं रखा? मैंने उन्हें अपमानित किया, उनके चेहरे पर अपना लावा फेंका जैसे वह कोई बाज़ारू औरत हों।”

उसे डर लगने लगा कि अब वह अपनी माँ से नज़रें कैसे मिलाएगा। उसे लगा कि अंजलि बाथरूम के अंदर शायद रो रही होगी। उसे अपनी मर्दानगी पर अब गर्व नहीं, बल्कि Disgust महसूस होने लगी। उसे वह ७ इंच का अंग अब एक अभिशाप लगने लगा जिसने उसे मर्यादा की सारी हदें लांघने पर मजबूर कर दिया।

आर्यन ने अपनी आँखें बंद कीं, तो उसे अंजलि का वह चेहरा याद आया जब वह बचपन में उसे चूमती थी। और फिर उसे अभी वाला चेहरा याद आया—सफेद रस से सना हुआ और गालियों से अपमानित। यह विरोधाभास आर्यन को अंदर ही अंदर काटने लगा। उसे महसूस हुआ कि जिस्मानी सुख की कीमत उसने अपनी ‘आत्मा’ बेचकर चुकाई है।

आर्यन ने चादर से अपना चेहरा ढक लिया। उसकी आँखों के कोने गीले होने लगे। वह खुद से नफरत करने लगा था। उसे लगा कि कल रात जो हुआ वो शायद एक गलती थी जिसे सुधारा जा सकता था, लेकिन आज जो उसने शब्दों और व्यवहार से किया, उसने अंजलि को माँ के पद से गिराकर एक ‘गुलाम’ बना दिया था।

“मैंने क्या कर दिया? मैंने अपनी माँ का अस्तित्व ही मिटा दिया। मैं कितना नीच बेटा हूँ,” यह सोचकर आर्यन बिस्तर पर सिकुड़ गया।

बाथरूम का दरवाजा खुला और अंजलि बाहर निकली। उसका चेहरा धुल चुका था और ताजे पानी की बूंदें उसके गोरे गालों पर चमक रही थीं। लेकिन जैसे ही उसकी नजर बिस्तर पर पड़ी, उसका दिल धक से रह गया। आर्यन चादर में मुंह छुपाए सिसक रहा था।

अंजलि की ममता एक पल में जाग उठी। वह तेजी से बेड के पास आई और आर्यन के कंधे पर हाथ रखा। “आर्यन? क्या हुआ मेरे बच्चे? तू रो क्यों रहा है?” उसने घबराकर पूछा।

आर्यन ने जैसे ही अपनी माँ का साफ और मासूम चेहरा देखा, उसका Guilt और बढ़ गया। उसने रोते हुए अंजलि का हाथ पकड़ लिया। “माँ… मुझे माफ कर दो। मैं… मैं जानवर बन गया था। मैंने आपको क्या-क्या नहीं बोला। मैंने आपकी इज्जत मिट्टी में मिला दी। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या बक रहा हूँ। मैं बहुत बुरा बेटा हूँ माँ…”

अंजलि ने एक गहरी सांस ली और आर्यन के सिर को सहलाते हुए उसे अपने सीने से सटा लिया। उसकी धड़कनों की गर्माहट आर्यन के कानों तक पहुँच रही थी।

“पगले… तू इसके लिए रो रहा है? देख मेरी आँखों में।” अंजलि ने आर्यन का चेहरा ऊपर उठाया। उसकी आँखों में कोई नाराजगी नहीं, बल्कि एक अजीब सी संतुष्टि थी। “आर्यन, तूने मेरी इज्जत मिट्टी में नहीं मिलाई, बल्कि तूने मुझे वो अहसास दिया जिसके लिए एक औरत का रोम-रोम तरसता है।”

अंजलि ने उसे समझाते हुए कहा, “आर्यन, तू अभी मर्द की नजर से देख रहा है, पर एक औरत की मानसिकता समझ। एक औरत को सबसे ज्यादा मजा तब आता है जब उसका मर्द उस पर पूरी तरह हक जमाए। जब तूने मुझे वो गंदी गालियां दीं, तो मुझे लगा कि मैं दुनिया की सबसे खूबसूरत और Desired औरत हूँ। मुझे वो अपमान नहीं, बल्कि तेरा मेरे प्रति पागलपन लगा।”

“समाज हमें देवी बनाता है, पर बिस्तर पर हमें कोई देवी बनकर नहीं रहना। हमें वहां एक ऐसी ‘मादा’ बनना होता है जिसे उसका मर्द अपनी उंगलियों पर नचाए। तूने मुझे जो गालियां दीं, उन्होंने मेरे अंदर की उस औरत को जगा दिया जो बरसों से दफन थी। मुझे उन गालियों में तेरी मर्दानगी की धमक सुनाई दे रही थी।”

अंजलि ने आर्यन के आंसू पोंछे और मुस्कुराकर कहा, “एक औरत तब सबसे ज्यादा सुखी होती है जब उसका प्रेमी उसे अपनी ‘प्रॉपर्टी’ समझे। तूने मुझे वो ‘गंदगी’ नहीं दी, तूने मुझे वो अधिकार दिया है। इसलिए रोना बंद कर, क्योंकि तूने आज अपनी माँ को नहीं, बल्कि अपनी ‘औरत’ को तृप्त किया है।”

आर्यन अपनी माँ की ये बातें सुनकर दंग रह गया। उसे लगा था कि उसने पाप किया है, पर अंजलि के लिए वह उसके प्यार और हवस का सबसे शुद्ध रूप था। अंजलि ने उसके माथे को चूमा और धीरे से उसके कान में फुसफुसाया, “तेरी वो गालियां… और तेरे उस लावे का मेरे चेहरे पर गिरना… वो मेरे जीवन का सबसे कामुक लम्हा था। अब मुस्कुरा, वरना मैं समझूँगी कि तुझे मेरे साथ मजा नहीं आया।”

आर्यन की आँखों में अब आँसू तो नहीं थे, लेकिन एक गहरी हैरानी थी। उसने कभी सोचा भी नहीं था कि शब्दों का घाव किसी के लिए सुख का मरहम भी बन सकता है। अंजलि ने उसे अपने और करीब खींच लिया, उसका सिर अपनी गोद में रख लिया और उसकी उंगलियों से खेलते हुए अपने अतीत के उन बंद कमरों के राज़ खोलने लगी जो उसने बरसों से सीने में दफन कर रखे थे।

अंजलि की आवाज़ अब बहुत धीमी और मखमली हो गई थी, जैसे वह कोई बहुत ही गुप्त रहस्य साझा कर रही हो।

“देख आर्यन, तेरे पापा एक अच्छे इंसान हैं, पर बिस्तर पर वो हमेशा बहुत ‘सभ्य’ रहे। उनके लिए शारीरिक संबंध सिर्फ एक ज़रूरत थी, जिसे अंधेरे में, चुपचाप और बड़ी शालीनता से पूरा किया जाता था। उन्होंने मुझे हमेशा एक ‘देवी’ की तरह देखा, लेकिन कभी उस ‘औरत’ को नहीं पहचाना जो उनके नीचे दबी होती थी।”

अंजलि ने एक लंबी आह भरी। “मैं चाहती थी कि वो कभी-कभी जंगली बन जाएं। मैं चाहती थी कि वो मेरे बाल पकड़कर मुझे अपनी ओर खींचें, मुझे गंदी गालियां दें, मेरे शरीर पर अपने दांतों के निशान छोड़ दें। मैं चाहती थी कि वो मुझे ये अहसास कराएं कि मैं उनकी ‘जागीर’ हूँ। लेकिन वो हमेशा डरते रहे कि कहीं मुझे बुरा न लग जाए, कहीं मैं उन्हें गलत न समझ लूँ।”

“कई बार मेरा मन करता था कि मैं बिस्तर पर चीखूँ, गंदे शब्दों का इस्तेमाल करूँ, उन्हें उकसाऊँ… पर भारतीय संस्कार और ‘माँ’ होने का डर मुझे रोक देता था। मैं सालों तक प्यासी रही—जिस्म से नहीं, बल्कि उस ‘दीवानगी’ के लिए। जो गालियां आज तूने मुझे दीं, मैं वो गालियां तेरे पापा के मुँह से सुनने के लिए बरसों तरसी हूँ।”

अंजलि ने आर्यन की आँखों में झाँका। “आज जब तूने मेरे मुँह में अपना लावा छोड़ा और मुझे वो सब बोला जो समाज के लिए ‘पाप’ है, तो मुझे लगा कि आज मेरी वो बरसों पुरानी मुराद पूरी हो गई। तूने मुझे वो ‘गंदा सुख’ दिया है आर्यन, जो सबसे शुद्ध होता है। तेरे पापा मुझे कभी ‘रंडी’ नहीं कह पाए, और यही उनकी सबसे बड़ी कमी रह गई।”

आर्यन अब पूरी तरह समझ चुका था कि क्यों अंजलि उस ५ इंच के बेजान खिलौने के साथ भी वो सुख नहीं पा सकी जो उसे आर्यन की कड़वी बातों और ७ इंच के प्रहार में मिला। उसे अहसास हुआ कि एक औरत को सिर्फ ‘सुरक्षा’ नहीं, बल्कि बिस्तर पर ‘समर्पण’ और ‘वहशीपन’ भी चाहिए होता है।

अंजलि ने झुककर आर्यन के होंठों को हल्के से चूमा। “अब कभी Guilt मत करना। आज तूने मुझे वो सब दिया है जो दुनिया का कोई भी मर्द अपनी पत्नी को देने से डरता है। तू मेरा बेटा भी है, और अब मेरा वो ‘मालिक’ भी, जिसने मुझे मेरी असली पहचान दी है।”

अंजलि ने आर्यन के माथे से बिखरे बालों को बड़े प्यार से हटाया। माहौल की भारी गंभीरता को कम करने के लिए उसने एक शरारती मुस्कान चेहरे पर ओढ़ ली और अपनी यादों के गलियारे में पीछे मुड़कर देखने लगी।

अंजलि ने आर्यन के कान के पास झुककर अपनी रेशमी आवाज़ में एक पुराना किस्सा सुनाना शुरू किया।

“करीब दस साल पहले की बात है, तेरे पापा और मैं एक हिल स्टेशन पर छुट्टियां मनाने गए थे। बाहर बहुत तेज़ बारिश हो रही थी और होटल के कमरे में हम दोनों अकेले थे। मैंने उस दिन एक बहुत ही पारदर्शी और छोटी सी नाइटी पहनी थी, जो मैंने खास तौर पर उस रात के लिए खरीदी थी।”

“मेरा मन था कि आज वो मुझे बिस्तर पर पटक दें, मेरे हाथ बेड के सिरहाने से बांध दें और मुझे अपनी मर्दानगी का अहसास एक कैदी की तरह कराएं। मैंने उनसे धीरे से कहा भी था कि ‘आज मुझे ज़रा भी रहम मत दिखाना, आज मुझे अपना गुलाम बना लो’।”

“लेकिन जानते हो उन्होंने क्या किया? उन्होंने बहुत ही भोलेपन से मुझे गले लगाया, माथे पर चूमा और बोले— ‘अंजलि, तुम इतनी कोमल हो, मैं तुम्हें तकलीफ कैसे दे सकता हूँ? तुम मेरी अर्धांगिनी हो, कोई दासी नहीं।’ उन्होंने बड़े सलीके से लाइट बंद की और हमेशा की तरह वही पुराना, सीधा-सादा तरीका अपनाया।”

अंजलि थोड़ा सा हंसी, पर उस हंसी में एक हल्का सा दर्द था। “मैं उस रात अंदर ही अंदर रो रही थी आर्यन। मैं चाहती थी कि वो मेरे जिस्म को झिंझोड़ दें, मुझे अपनी बाहों में इतना कसें कि मेरी सांसें रुकने लगें। वो फंतासी अधूरी ही रह गई क्योंकि वो कभी उस ‘सभ्य पति’ के दायरे से बाहर ही नहीं निकल पाए।”

अंजलि ने आर्यन की नग्न छाती पर अपनी उंगलियों से छोटे-छोटे घेरे बनाते हुए कहा, “कल रात और आज… जब तूने मुझे अपने वश में किया, जब तूने मेरा हुलिया बिगाड़ा और मुझे वो सब बोला जिसकी मैंने उस रात कल्पना की थी… तो मुझे लगा जैसे मेरा वो पुराना अधूरा सपना आज सच हो गया।”

आर्यन ने अंजलि की कमर को और ज़ोर से भींच लिया। उसे अब अपनी माँ की उस खामोश तड़प का अंदाज़ा हो रहा था जो उसने बरसों से छिपाई थी। “माँ… जो पापा नहीं कर पाए, वो मैं करूँगा। आपकी हर अधूरी फंतासी अब मेरी ज़िम्मेदारी है।”

अंजलि ने अपना सिर उसके सीने पर रख दिया। “अब मुझे किसी और चीज़ की ज़रूरत नहीं है आर्यन। तूने मुझे वो सब दे दिया है जो मुझे एक पूरी औरत बनाता है।”

अंजलि की आवाज़ अब और भी धीमी हो गई, जैसे वह अपने मन के सबसे गहरे और सबसे डरावने राज़ की राख को कुरेद रही हो। उसने अपनी नज़रें आर्यन के सीने पर टिका दीं, क्योंकि इस बात को कहते हुए उसकी पलकों में एक स्वाभाविक हिचक और शर्म की लाली तैर रही थी।

अंजलि ने आर्यन की उंगलियों को अपने हाथ में लेकर सहलाया और रुक-रुक कर बोलना शुरू किया। “आर्यन… एक और बात है, एक ऐसी फंतासी जिसे मैंने कभी अपनी ज़ुबान पर लाने की हिम्मत नहीं की। यहाँ तक कि खुद से भी डर लगता था यह सोचते हुए।”

“कभी-कभी, जब तेरे पापा सो जाते थे और मैं जागती रहती थी, तो मेरे दिमाग में एक तस्वीर उभरती थी। मैं सोचती थी कि कैसा लगेगा अगर इस बिस्तर पर हम दो नहीं, बल्कि तीन लोग हों? एक Threesome की वो अनकही चाहत जिसने मेरे रातों की नींद उड़ा दी थी।”

अंजलि ने अपनी आँखें मूंद लीं। “मैंने कभी यह तय नहीं किया कि वह तीसरा इंसान कौन होगा… क्या वह कोई दूसरी औरत होगी, जिसके साथ मैं तुझे साझा करूँ और हम दोनों मिलकर तेरी मर्दानगी की पूजा करें? या फिर कोई दूसरा मर्द, जो मुझे दो तरफ से अपनी पकड़ में रखे और मैं उन दोनों के बीच एक खिलौने की तरह पिसती रहूँ?”

“सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं आर्यन। एक तरफ से तेरा ७ इंच का प्रहार और दूसरी तरफ से कोई और अहसास… या फिर तेरी नग्नता के सामने एक और बदन। यह ख्याल मुझे जितना डराता था, उससे कहीं ज़्यादा उत्तेजित कर देता था। पर तेरे पापा के सामने यह कहना… मतलब अपनी मौत को दावत देना जैसा था।”

आर्यन यह सुनकर पूरी तरह सन्न रह गया। उसकी माँ की सोच इतनी आधुनिक और इतनी बेबाक हो सकती है, यह उसके लिए एक और बड़ा झटका था। उसने महसूस किया कि अंजलि के अंदर जो आग है, वह किसी एक इंसान के बस की बात नहीं है।

अंजलि ने अपना सिर उठाकर आर्यन की आँखों में झाँका। “मुझे नहीं पता कि यह कभी मुमकिन होगा या नहीं, और न ही मैं चाहती हूँ कि तू इसके लिए मजबूर हो। पर आज जब तूने मुझे मेरी ‘औकात’ दिखाई, तो मुझे लगा कि मैं अपनी हर गंदी से गंदी फंतासी तेरे सामने रख सकती हूँ। तू मेरा बेटा भी है और अब मेरा सबसे करीबी राज़दार भी।”

आर्यन ने अंजलि के चेहरे को अपने हाथों में लिया। वह समझ चुका था कि उसकी माँ सिर्फ एक घरेलू औरत नहीं, बल्कि इच्छाओं का एक ज्वलंत ज्वालामुखी है। “माँ… आपकी हर फंतासी मेरे लिए एक हुक्म है। वक्त आने पर हम हर उस पर्दे को उठाएंगे जिसे दुनिया ‘गुनाह’ कहती है।”

अंजलि ने एक सुकून भरी सांस ली और आर्यन के गले लग गई। आज रात उसने खुद को पूरी तरह खाली कर दिया था।

आर्यन ने अंजलि की कमर में हाथ डालकर उसे थोड़ा और अपनी ओर खींचा। उसकी आँखों में अब एक शरारती चमक थी, जैसे उसे किसी पुराने राज़ का सुराग मिल गया हो। उसने अंजलि की आँखों में झाँकते हुए पूछा, “माँ… सब बातें अपनी जगह, पर एक बात बताओ। उस दिन असल में क्या हुआ था? जिस दिन मुझे लगा था कि आपको तेज़ बुखार है और आप बिस्तर पर तड़प रही थीं… पर जब मैंने आपको छुआ, तो आपका शरीर आग की तरह गरम तो था, लेकिन वो बुखार जैसा नहीं लग रहा था। आप क्या कर रही थीं उस वक्त?”

अंजलि यह सुनते ही एक पल के लिए ठिठक गई। उसके गालों पर गुलाबी लाली दौड़ गई और उसने अपनी नज़रें झुका लीं। वह समझ गई कि आर्यन किस दिन की बात कर रहा है।

अंजलि ने एक गहरी और शर्म भरी सांस ली। उसने आर्यन के सीने पर अपनी उंगलियां फिराते हुए दबी आवाज़ में सच उगलना शुरू किया।

“आर्यन… वो बुखार नहीं था, वो मेरे अंदर की बरसों की दबी हुई हवस का उबाल था। मैं नहाकर निकली थी और आईने के सामने खुद को देख रही थी। अचानक मुझे महसूस हुआ कि मेरा ये गोरा बदन बेकार जा रहा है। कोई नहीं है जो इसे छुए, जो इसे अपनी बाहों में भींचे।”

“मैं बिस्तर पर लेट गई और आँखें बंद करके सोचने लगी कि काश… काश कोई जवान मर्द आए और मुझे अपनी मर्दानगी से कुचल दे। मैं उस वक्त अपने ही हाथों से खुद को सहला रही थी। मेरी उंगलियां मेरे स्तनों और जांघों के बीच उस जगह खेल रही थीं जहाँ आज तेरा ७ इंच का फौलाद राज कर रहा है।”

“जब तू कमरे में आया और तूने मेरे माथे पर हाथ रखा, तो मुझे एक बिजली का झटका लगा। तेरा वो कोमल और जवान हाथ… मुझे वो किसी ‘बेटे’ का हाथ नहीं, बल्कि एक ‘मर्द’ का स्पर्श लगा। मेरा शरीर उस वक्त सच में तप रहा था, पर वो बीमारी नहीं, बल्कि तेरे लिए वो ‘भूख’ थी जो उस दिन पहली बार मेरे चेहरे पर साफ़ दिख रही थी।”

अंजलि ने शरमाते हुए आगे कहा, “जब तू चला गया, तो मेरी हालत और खराब हो गई। मैं चादर को अपने दांतों से काट रही थी और तेरा नाम लेकर खुद को शांत करने की कोशिश कर रही थी। तुझे लगा मैं बीमार हूँ, पर असल में मैं तेरे उस जवान जिस्म के लिए तड़प रही थी जिसे मैं आज अपनी बाहों में लिए हुए हूँ।”

आर्यन यह सुनकर दंग रह गया। उसे अब समझ आया कि जिसे वह ममता की बेबसी समझ रहा था, वह असल में एक औरत की कामुक पुकार थी। उसने अंजलि के चेहरे को ऊपर उठाया। “मतलब… उस दिन से ही आपके दिल में ये सब चल रहा था?”

अंजलि ने मुस्कुराकर उसके होंठों को छुआ। “शायद उससे भी पहले से… बस उस दिन वो आग बेकाबू हो गई थी। और देख… आज उसी आग ने हम दोनों को एक कर दिया।”

आर्यन की आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जैसे वह उस पुराने मंज़र को फिर से जीना चाहता हो। उसने अंजलि की कमर को थोड़ा और करीब खींचते हुए शरारत से कहा, “माँ… जो आप उस दिन अकेले में कर रही थीं, क्या वो आप अभी मेरे सामने कर सकती हैं? मैं देखना चाहता हूँ कि मेरी बेबाक माँ अपनी प्यास कैसे बुझाती है।”

अंजलि ने जैसे ही यह सुना, उसके चेहरे पर एक हया भरी मुस्कान दौड़ गई। उसने अपनी गर्दन घुमाकर दीवार पर टंगी घड़ी की ओर देखा। सुइयां रात के १२ पर मिल रही थीं।

अंजलि ने एक ठंडी सांस ली और आर्यन के गाल को थपथपाते हुए बड़े प्यार से बोली:

“मेरे पागल शहजादे… देख, रात के १२ बज चुके हैं। तुझे कल सुबह जल्दी उठकर कॉलेज जाना है, तेरी पढ़ाई का नुकसान मैं कभी बर्दाश्त नहीं करूँगी। और मुझे भी सुबह उठकर घर के ढेरों काम निपटाने हैं और अपने काम पर जाना है।”

अंजलि ने अपनी रेशमी आवाज़ में आगे कहा, “और देख… आज रात तूने मुझे जितना निचोड़ा है, और जिस तरह से मैंने तेरे ७ इंच के फौलाद की पूजा की है, उसके बाद मेरे शरीर में अब एक उंगली हिलाने की भी ताकत नहीं बची। आज रात का ये नशा ही काफी है हमें कल तक ज़िंदा रखने के लिए।”

अंजलि ने आर्यन की आँखों में झाँका, “तू जो मांग रहा है, वो मैं तुझे ज़रूर दिखाऊँगी… और शायद उससे कहीं ज़्यादा। पर आज नहीं। आज हमें अपनी नींद पूरी करनी है ताकि कल हम फिर से दुनिया के सामने एक आदर्श ‘माँ और बेटा’ बनकर खड़े हो सकें, जबकि हमारे अंदर ये राज़ दफन रहे।”

अंजलि ने आर्यन का हाथ पकड़कर उसे अपनी छाती के बीच रख लिया। “अब चुपचाप आँखें बंद कर और सो जा। कल सुबह तुझे एक नई ताज़गी के साथ उठना है।”

आर्यन ने थोड़ी सी मासूमियत के साथ अपना मुंह फुलाया, पर वह जानता था कि माँ सही कह रही है। उसने अंजलि के माथे को चूमा और उसे अपनी बाहों के घेरे में ले लिया। अंजलि ने अपनी टांग आर्यन की टांगों के ऊपर डाल दी, और वे दोनों एक-दूसरे की सांसों की गर्माहट महसूस करने लगे।

बाहर सन्नाटा था, पर कमरे के अंदर दो रूहें अपनी जीत और तृप्ति का जश्न मना रही थीं। ७ इंच के उस शैतान को भी अब शांति मिल गई थी, और अंजलि के चेहरे पर वह सुकून था जो बरसों बाद उसे नसीब हुआ था।

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