रात की उस तूफानी और रूहानी मुलाकात के बाद जब सुबह की पहली किरण अंजलि के कमरे में दाखिल हुई, तो फिजाओं में एक अलग ही ताजगी थी। आज अंजलि के चेहरे पर वह थकान नहीं थी जो अक्सर घर के कामों से होती है, बल्कि एक ऐसी चमक थी जो केवल पूर्ण रूप से तृप्त औरत के चेहरे पर नजर आती है।
अंजलि आज वक्त से पहले उठ गई थी। उसने नहा-धोकर अपनी अलमारी से एक गहरे नीले रंग की चिकनकारी कुर्ती निकाली। कुर्ती उसके शरीर के उभारों पर बिल्कुल फिट बैठ रही थी, और उसके गीले बाल उसकी पीठ पर बिखरे हुए थे। रसोई से ताजे पराठों और अदरक वाली चाय की महक पूरे घर में फैल रही थी।
आर्यन जब डाइनिंग टेबल पर पहुँचा, तो उसकी नजरें अपनी माँ पर टिक गईं। कल रात की वह ‘बेपर्दा’ अंजलि और आज सुबह की यह ‘सलीकेदार’ अंजलि—दोनों ही रूपों ने आर्यन के दिल की धड़कनें बढ़ा दीं।
अंजलि ने चाय का कप टेबल पर रखा और आर्यन की आँखों में देखा। उन आँखों में रात का सारा सच तैर रहा था। आर्यन ने शरारत से मुस्कुराते हुए कहा, “आज तो आप बहुत हसीन लग रही हैं… ये कुर्ती आप पर बहुत जंच रही है।”
अंजलि का चेहरा हल्का गुलाबी हो गया। उसने पराठा आर्यन की थाली में रखते हुए झुककर उसके कान के पास फुसफुसाया, “तारीफ कुर्ती की कर रहे हो… या उस रात की जो इस कुर्ती के नीचे दफन है?”
आर्यन ने टेबल के नीचे से धीरे से अंजलि के पैर को अपने पैर से छुआ। अंजलि सिहर गई, लेकिन उसने अपना पैर हटाया नहीं। आर्यन ने चाय का घूँट लेते हुए कहा, “रात तो लाजवाब थी ही, पर सुबह का ये सुकून और भी प्यारा है। मुझे नहीं पता था कि नाश्ता इतना लजीज होगा।”
अंजलि ने आर्यन के सामने बैठते हुए अपनी उंगलियों से अपने बालों को कान के पीछे किया। “सब कुछ लजीज ही होगा आर्यन… जब तक तू अपनी इस ‘माँ’ का ख्याल ऐसे ही रखता रहेगा। आज पापा का फोन आएगा, क्या कहोगे उन्हें?”
आर्यन ने अंजलि का हाथ पकड़कर चूमा और बड़े ही आत्मविश्वास से बोला, “कह दूँगा कि घर की और आपकी फिक्र न करें… यहाँ सब कुछ मेरे ‘कंट्रोल’ में है।”
दोनों एक-दूसरे को देख मुस्कुरा दिए। नाश्ते की मेज पर अब केवल खाना नहीं, बल्कि एक ऐसा रिश्ता परोसा जा चुका था जिसकी मिठास ताउम्र रहने वाली थी।
दिन भर की उस मीठी बेचैनी के बाद शाम ढली और रात का सन्नाटा एक बार फिर गहराने लगा। डिनर खत्म हो चुका था। घर के बाकी शोर थम चुके थे, और अब दोनों अपने उसी सुरक्षित ठिकाने—बेडरूम में आमने-सामने थे।
आज का माहौल कल रात से थोड़ा अलग था। आज हवस से ज़्यादा एक अपनापन और सुकून भरा खुलापन था। अंजलि बेड पर टेक लगाकर बैठी थी, उसने ऊपर सिर्फ एक काले रंग की लेस वाली ब्रा पहनी थी और नीचे एक ढीला रेशमी पायजामा। उसके खुले बदन की चमक और उभरे हुए स्तनों की गोलाई मध्यम रोशनी में और भी मादक लग रही थी। आर्यन भी सिर्फ एक हाफ नेकर में था, उसका गठा हुआ शरीर अंजलि की नज़रों को अपनी ओर खींच रहा था।
आर्यन धीरे से अंजलि के पास बेड पर बैठा और उसका हाथ अपने हाथ में लिया। कमरे में हल्की सी ठंडक थी, लेकिन उन दोनों के बीच की गर्माहट अभी भी बरकरार थी।
आर्यन ने अंजलि की आँखों में गहराई से देखते हुए पूछा, “माँ… आज दिन भर मेरे दिमाग में एक बात घूम रही थी। क्या… क्या हर औरत वैसा ही महसूस करती है जैसा आप मेरे साथ करती हो? क्या हर औरत के अंदर वही प्यास और वही राज़ दबे होते हैं जो कल रात बाहर आए?”
अंजलि ने एक ठंडी सांस ली और आर्यन के हाथ को अपने सीने (ब्रा के ऊपर) से सटा लिया, जहाँ उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था। “सच कहूँ आर्यन… तो हाँ। हर औरत के अंदर एक समंदर होता है, जिसे अक्सर दुनिया के सामने शांत रहना पड़ता है। शादी, बच्चे और घर की ज़िम्मेदारियों के नीचे हम अपनी वो ‘औरत’ मार देते हैं जिसे सिर्फ एक मर्द का सच्चा और गहरा प्यार चाहिए होता है।”
अंजलि ने आगे कहा, “ज़्यादातर औरतें पूरी ज़िंदगी गुज़ार देती हैं लेकिन उन्हें वो ‘चरम सुख’ कभी नसीब नहीं होता जो तूने मुझे कल रात दिया। वे बस एक मशीन की तरह बिस्तर पर सोती हैं। लेकिन जब किसी औरत को तुम्हारे जैसा… उफ़्फ़… तुम्हारे जैसा अहसास मिलता है, तो वह सब कुछ भूलकर बस उस लम्हे को जीना चाहती है।”
बातें करते-करते अंजलि ने आर्यन का हाथ धीरे से अपनी ब्रा की पट्टी के पास सरकाया। “अहसास तो हर कोई करना चाहता है आर्यन… पर किसी के पास तेरे जैसा ७ इंच का ‘जवाब’ नहीं होता।”
अंजलि की इस बेबाकी ने आर्यन के शरीर में फिर से आग लगा दी। उसने अंजलि को कमर से पकड़कर अपनी ओर खींचा। अंजलि की नग्न त्वचा जब आर्यन के सीने से टकराई, तो दोनों की सांसें एक बार फिर उखड़ने लगीं।
आर्यन की आँखें अंजलि की बात सुनकर फटी की फटी रह गईं। उसे लगा था कि जो कल रात हुआ, वो सिर्फ उसकी माँ की अपनी दबी हुई इच्छाएं थीं, लेकिन अंजलि ने जिस बेबाकी से पूरी दुनिया की औरतों का राज़ खोला, उसने आर्यन को हैरान कर दिया।
आर्यन ने अंजलि के हाथ को थोड़ा और ज़ोर से दबाया और चकित होकर पूछा, “क्या! मतलब… आप सच कह रही हो माँ? मुझे लगा था कि शादियां तो खुशहाल होती हैं। क्या बाकी औरतें भी अंदर ही अंदर ऐसे ही तड़पती हैं? और… और ये ‘साइज़’ वाली बात… क्या ये सच में इतना मायने रखती है?”
अंजलि ने एक फीकी मुस्कान दी और आर्यन के गाल को सहलाते हुए बोली, “तू अभी बच्चा है आर्यन… जिस्मानी दुनिया के कायदे अलग होते हैं। शादियाँ अक्सर समझौतों पर टिकी होती हैं। औरतें कभी बोलती नहीं, पर उन्हें भी वो गहराई और वो रफ़्तार चाहिए होती है जो उन्हें बिस्तर पर एक ‘जानवर’ की तरह महसूस कराए। ज़्यादातर मर्द सिर्फ अपना काम खत्म करके सो जाते हैं, उन्हें अंदाज़ा भी नहीं होता कि उनकी पत्नी अधूरी रह गई है।”
अंजलि ने आर्यन के नेकर के ऊपर उभरे हुए तनाव को अपनी उंगलियों से सहलाया और फुसफुसायी, “और जहाँ तक बात तेरे इस ‘फौलाद’ की है… तो हाँ, साइज़ और सख्ती मायने रखती है। कल रात जब तूने मुझे पहली बार भरा था, तो मुझे अहसास हुआ कि आज तक जो मैं पापा के साथ महसूस कर रही थी, वो तो सिर्फ एक ज़रूरत थी। लेकिन तेरे साथ जो हुआ, वो एक पागलपन था।”
आर्यन को अब समझ आ रहा था कि कल रात क्यों अंजलि उस ५ इंच के खिलौने को देख कर भी ठंडी थी, और क्यों उसके ७ इंच के असली अंग ने उसे चीखने पर मजबूर कर दिया। “मतलब… मैं दुनिया के उन कुछ नसीब वाले मर्दों में से हूँ जो एक औरत को पूरी तरह संतुष्ट कर सकते हैं?” आर्यन ने गर्व और हवस के मिले-जुले लहजे में पूछा।
अंजलि ने अपनी ब्रा की स्ट्रैप को कंधे से नीचे गिराया और अपनी नशीली आँखों से उसे देखते हुए बोली, “तू सिर्फ नसीब वाला नहीं है आर्यन… तू मेरा वो ‘मसीहा’ है जिसने मुझे दोबारा ज़िंदा किया है। और अब जब तू ये सब जान गया है… तो क्या आज रात भी अपनी इस अधूरी माँ को ऐसे ही बातों में उलझाए रखेगा?”
अंजलि ने आर्यन का हाथ अपने हाथ में लिया और उसकी हथेलियों को सहलाते हुए बिस्तर पर थोड़ा और करीब खिसक आई। कमरे की मध्यम रोशनी में उसकी आँखों में एक अजीब सी गहराई और हल्का सा गीलापन था। आज वह सिर्फ एक प्यासी औरत नहीं, बल्कि उन करोड़ों भारतीय औरतों की आवाज़ बन रही थी जो अपनी इच्छाओं को साड़ी के पल्लू में बांधकर उम्र गुज़ार देती हैं।
अंजलि ने एक लंबी और ठंडी सांस ली और बहुत ही भावुक लहजे में कहना शुरू किया:
“देख आर्यन, एक भारतीय औरत के लिए उसका शरीर उसका अपना नहीं होता। बचपन में वो पिता की ‘इज़्ज़त’ होती है, शादी के बाद पति की ‘अमानत’, और माँ बनने के बाद बच्चों का ‘आदर्श’। इस इज़्ज़त और आदर्श के बोझ के नीचे उसकी अपनी पसंद, उसकी अपनी उत्तेजना और उसकी कामुकता कहीं दम तोड़ देती है।”
अंजलि की आवाज़ थोड़ी भारी हो गई। “हज़ारों औरतें ऐसी हैं जो रात को बिस्तर पर लेटती तो हैं, पर सिर्फ इसलिए ताकि पति की ज़रूरत पूरी हो सके। उन्हें ‘भोग’ लिया जाता है, पर उन्हें ‘महसूस’ नहीं किया जाता। वे कभी खुलकर नहीं कह पातीं कि उन्हें भी ज़ोर से भींचना पसंद है, उन्हें भी वो गहरा अहसास चाहिए, या उन्हें भी वो गंदी बातें सुननी हैं जो उनके खून में आग लगा दें। क्योंकि अगर वो बोलें, तो उन्हें ‘चरित्रहीन’ समझ लिया जाता है।”
“हम भारतीय औरतें अभिनय करने में माहिर हो जाती हैं आर्यन। हम Orgasm का नाटक करती हैं ताकि पति का अहंकार न टूटे। हम अपनी प्यास को पूजा-पाठ, व्रत और घर के कामों में डुबो देती हैं। कल रात जब तूने मुझे छुआ, तो तूने सिर्फ मेरे जिस्म को नहीं, बल्कि उस बरसों की कैद औरत को आज़ाद किया था जो चीखना चाहती थी, जो बिखरना चाहती थी।”
अंजलि ने आर्यन की आँखों में झाँका। “हमें सिर्फ एक अंग नहीं चाहिए होता आर्यन, हमें वो समर्पण चाहिए होता है जो तूने दिखाया। हमें वो मर्द चाहिए होता है जो हमारी आँखों में देखकर हमें ये अहसास कराए कि हम सिर्फ एक ‘माँ’ या ‘बहू’ नहीं, बल्कि एक ‘मादक औरत’ भी हैं।”
अंजलि की आँखों से एक आँसू टपक कर आर्यन के हाथ पर गिरा। वह आज पूरी तरह से बेपर्दा थी—जिस्म से भी और रूह से भी। उसने आर्यन का चेहरा थाम लिया और कांपते होंठों से कहा, “तूने कल रात जो किया, वो मेरे लिए सिर्फ सेक्स नहीं था… वो मेरी बरसों की घुटन का इलाज था।”
अंजलि की आँखों में अब एक ऐसी सच्चाई थी जो समाज के कड़वे सच को आईना दिखा रही थी। आर्यन सन्न होकर अपनी माँ की बातें सुन रहा था। अंजलि ने अपनी ब्रा की पट्टी को हल्का सा सहलाया और अपनी बात को एक और गहरे मोड़ पर ले गई।
“आर्यन…” अंजलि की आवाज़ अब और भी धीमी और रहस्यमयी हो गई थी। “लोग कहते हैं कि औरत बेवफा होती है, पर कोई ये नहीं पूछता कि उसे उस दहलीज तक पहुँचाया किसने? जब एक औरत को घर की चारदीवारी में वो सुकून, वो तड़प और वो ‘मर्दानगी’ नहीं मिलती जिसकी उसकी रूह प्यासी होती है, तो उसके पास दो ही रास्ते बचते हैं—या तो वो अंदर ही अंदर घुटकर मर जाए, या फिर उस प्यास को बुझाने के लिए बाहर कदम बढ़ाए।”
अंजलि ने आर्यन की आँखों में झाँकते हुए कहा, “आज जो तू देखता है कि शादीशुदा औरतें दूसरे मर्दों से रिश्ते बनाती हैं, वो सिर्फ हवस नहीं होती। वो तलाश होती है उस एक लम्हे की, जहाँ कोई उन्हें सिर्फ एक ‘घरेलू मशीन’ न समझे। वे किसी ऐसे को ढूँढती हैं जो उनके कान में गंदी बातें फुसफुसाए, जो उनकी जांघों को इतनी ज़ोर से भींचे कि उन्हें अपने ज़िंदा होने का अहसास हो। वे उस ५ इंच की खानापूर्ति से ऊबकर उस असली ७ इंच के प्रहार की तलाश में बाहर निकलती हैं।”
“कल रात तक मैं भी उसी घुटन में थी। मैं भी शायद कभी भटक जाती, अगर तूने मुझे उस तरह न संभाला होता। जो सुख, जो अपनापन और जो आग मुझे तेरे स्पर्श में मिली, वो मुझे ये समझाने के लिए काफी थी कि औरत को भटकने की ज़रूरत तब पड़ती है जब उसका अपना मर्द उसे वो ‘आज़ादी’ नहीं दे पाता जो तूने मुझे कल रात बिस्तर पर दी।”
अंजलि ने आर्यन के हाथ को अपने पेट के निचले हिस्से की ओर सरकाया, जहाँ उसका रेशमी पायजामा उसकी त्वचा को छू रहा था। “जब एक गैर मर्द किसी औरत को वो सुख देता है जो उसे पति से नहीं मिला, तो वो औरत उसके लिए अपनी जान तक देने को तैयार हो जाती है। क्योंकि वो मर्द उसके जिस्म को नहीं, उसकी ‘ख्वाहिशों’ को फतेह करता है।”
अंजलि ने बात खत्म की और आर्यन के करीब सरक आई। उसकी सांसों की गर्मी अब आर्यन के चेहरे पर महसूस हो रही थी। उसने फुसफुसाते हुए पूछा, “बता आर्यन, क्या तू मुझे अब भी वैसी ही आज़ादी देगा? क्या तू मेरी उन सारी दबी हुई ख्वाहिशों को पूरा करेगा जिसके लिए औरतें अक्सर दुनिया से लड़ जाती हैं?”
आर्यन के अंदर अब जज्बातों और हवस का एक ऐसा तूफान उठा, जिसने उसे सब कुछ भुला दिया। उसने अंजलि की कमर को अपने मज़बूत हाथों में भींच लिया।
आर्यन अपनी माँ की इन गहरी और कड़वी बातों को सुनकर एक पल के लिए सुन्न रह गया। उसे आज अहसास हुआ कि जिस दुनिया को वह देख रहा था, उसकी परतों के नीचे कितनी उलझनें दबी हैं। उसने अंजलि के हाथ को चूमते हुए बहुत ही संजीदगी से जवाब दिया।
“माँ… आपकी बातें सुनकर मुझे समझ आ रहा है कि मैंने कल सिर्फ आपको सुख नहीं दिया, बल्कि आपकी रूह की बेड़ियाँ तोड़ी हैं। मैं वादा करता हूँ, अब आपको कभी वो घुटन महसूस नहीं होने दूँगा। मेरा ये ७ इंच का फौलाद और मेरा ये प्यार सिर्फ आपके लिए है।”
लेकिन फिर आर्यन के चेहरे पर एक जिज्ञासा उभरी। उसने अपनी माँ की आँखों में झाँकते हुए एक ऐसा सवाल किया जिसने माहौल को और भी गंभीर बना दिया। “लेकिन माँ… क्या इसका उल्टा भी होता है? क्या ऐसा भी होता है कि एक औरत सब कुछ मिलने के बाद भी भटक जाए? या क्या मर्द भी अपनी पत्नियों से वैसी ही घुटन महसूस करते हैं जैसी आपने बताई?”
अंजलि ने आर्यन की गर्दन के पीछे हाथ रखा और उसे सहलाते हुए बोली, “हाँ मेरे लाल… दुनिया गोल है। जैसे एक औरत प्यासी रह सकती है, वैसे ही कई बार मर्द भी अपनी पत्नियों से वो ‘उत्साह’ और वो ‘जुनून’ नहीं पाते जो उन्हें चाहिए होता है। कई औरतें बिस्तर पर पत्थर की तरह लेटी रहती हैं, जिससे मर्द ऊबकर बाहर की चमक-धमक की ओर खिंचा चला जाता है।”
“उल्टा भी सच है आर्यन। कभी-कभी एक औरत को घर में सब कुछ मिलता है—पैसा, प्यार और बिस्तर का सुख भी—लेकिन फिर भी उसके अंदर की ‘भटकन’ शांत नहीं होती। कुछ औरतों को ‘खतरे’ में मज़ा आता है, कुछ को नए-नए जिस्मों के स्वाद में। इंसान की फितरत बहुत पेचीदा है।”
अंजलि ने अपनी आवाज़ को थोड़ा और कामुक बनाया और आर्यन के सीने पर अपनी उंगलियां फिराते हुए कहा, “पर हमारे केस में उल्टा कुछ नहीं है। यहाँ सिर्फ एक ‘कमी’ थी जिसे तूने पूरा कर दिया। अब न मुझे बाहर जाने की ज़रूरत है, और न तुझे… क्योंकि जो आग हम दोनों के बीच है, वो कहीं और मिल ही नहीं सकती।”
अंजलि ने आर्यन का हाथ अपने गाल से लगाकर एक ठंडी सांस ली। कमरे की मद्धम पीली रोशनी अंजलि के कंधों और उसकी काली ब्रा से झांकते उभारों पर थिरक रही थी। आज वह आर्यन को औरत के मन के उस अंधेरे कोने में ले जा रही थी, जहाँ जाने की हिम्मत कम ही लोग करते हैं।
“आर्यन…” अंजलि की आवाज़ अब और भी गहरी हो गई थी, “तूने पूछा कि सब कुछ मिलने के बाद भी औरत बाहर क्यों जाती है? यह सुनकर तुझे अजीब लगेगा, लेकिन औरत का मन एक भूलभुलैया है। कई बार उसे पति से प्यार भी मिलता है और बिस्तर पर सुख भी, फिर भी वह भटक जाती है क्योंकि…”
“एक ही इंसान के साथ सालों साल रहते-रहते जिस्म एक-दूसरे के लिए ‘साधारण’ हो जाते हैं। वही स्पर्श, वही तरीका… सब कुछ पहले से पता होता है। तब औरत के अंदर की वो ‘मादा’ किसी अनजाने हाथ के स्पर्श के लिए तड़पने लगती है। वह उस रोमांच को जीना चाहती है जहाँ पकड़े जाने का डर हो, जहाँ कुछ नया और कुछ ‘वर्जित’ हो। बिल्कुल वैसे ही… जैसे हमारा ये रिश्ता।”
“शादी के बाद औरत सिर्फ किसी की पत्नी या माँ बनकर रह जाती है। बाहर का मर्द जब उसे देखता है, उसे ‘घूरता’ है, या उसकी तारीफ करता है, तो उसे अहसास होता है कि वह अभी भी जवान और आकर्षक है। वह बाहर सिर्फ ‘जिस्म’ के लिए नहीं, बल्कि उस ‘नशे’ के लिए जाती है जो उसे फिर से सोलह साल की लड़की जैसा महसूस कराए।”
“कभी-कभी औरत को लगता है कि उसने अपनी पूरी जवानी एक ही इंसान को दे दी और बदले में उसे वो ‘दीवानगी’ नहीं मिली। तब वह अपनी उस अधूरी Fantasy को किसी और के साथ पूरा करना चाहती है।”
आर्यन बड़े ध्यान से अपनी माँ की एक-एक बात सुन रहा था। उसने अंजलि की कमर में हाथ डालकर उसे और करीब खींच लिया और बहुत ही मैच्योर अंदाज़ में बोला:
“माँ, मतलब आप यह कह रही हैं कि औरत को सिर्फ ‘पेट’ और ‘बिस्तर’ भरना काफी नहीं है, उसे हर पल एक नया अहसास चाहिए? उसे वो तड़प चाहिए जो उसे ये महसूस कराए कि वो खास है। अब मुझे समझ आया कि कल जब आप उस खिलौने के साथ थीं, तो आप सिर्फ मज़े के लिए नहीं, बल्कि उस ‘बदलाव’ के लिए तरस रही थीं जो मैंने आपको दिया।”
आर्यन ने अंजलि की आँखों में आँखें डालकर कहा, “लेकिन माँ, अब जब मैं आपके साथ हूँ, तो क्या आपको कभी उस ‘नयापन’ की कमी खलेगी? मैं वादा करता हूँ कि मैं आपको हर रात एक नई औरत की तरह महसूस कराऊंगा।”
अंजलि ने आर्यन की इस बात पर अपनी गर्दन पीछे झुका दी और हल्की सी हंसी बिखेरी। उसकी ब्रा की लैस के ऊपर से उसके स्तन तेज़ी से धड़क रहे थे। “यही तो बात है आर्यन… तूने मुझे वो ‘रिस्क’ और वो ‘नयापन’ घर के अंदर ही दे दिया है। एक माँ और बेटे का ये मिलन दुनिया का सबसे बड़ा ‘थ्रिल’ है। अब मुझे कहीं और जाने की ज़रूरत ही क्या है?”
अंजलि के शब्द अब केवल बातें नहीं रह गए थे, वे आर्यन के लिए एक ऐसी दुनिया के दरवाजे खोल रहे थे जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी। कमरे की खामोशी में अंजलि की आवाज़ किसी ठंडी सिहरन की तरह तैर रही थी।
अंजलि ने आर्यन के बालों में उंगलियां फेरते हुए बड़े ही शांत लेकिन गंभीर लहजे में कहा, “आर्यन, तू अभी जिस दुनिया को देख रहा है, वो सिर्फ एक मुखौटा है। समाज के बंद कमरों के पीछे क्या-क्या होता है, यह जानकर शायद तू कांप जाएगा। आजकल लोग केवल छिपकर रिश्ता बनाने तक ही सीमित नहीं हैं… अब तो ‘कपल स्वैपिंग’ (Couple Swap) जैसा चलन भी शहरों में पैर पसार रहा है।”
अंजलि ने बताया, “इसमें शादीशुदा जोड़े अपनी मर्ज़ी से एक-दूसरे के पार्टनर बदलते हैं। वे इसे एक ‘गेम’ या ‘थ्रिल’ की तरह देखते हैं। उनकी मानसिकता यह होती है कि जब एक ही इंसान के साथ बोरियत होने लगे, तो क्यों न अपनी पत्नी या पति की मौजूदगी में ही किसी और के जिस्म का स्वाद चखा जाए। इसमें जलन से ज़्यादा एक अजीब तरह की ‘मदहोशी’ और ‘नयापन’ की भूख होती है।”
आर्यन की आँखें फटी की फटी रह गईं। “क्या! मतलब… पति खुद अपनी पत्नी को किसी और के साथ देखता है? यह कैसे मुमकिन है माँ? क्या उन्हें बुरा नहीं लगता?”
अंजलि ने मुस्कुराते हुए कहा, “यही तो इंसान की दिमागी गंदगी और Fantasy है, आर्यन। कुछ मर्दों को अपनी पत्नी को किसी और के साथ देख कर और भी ज़्यादा उत्तेजना होती है। वे इसे ‘आधुनिक’ होने का नाम देते हैं, पर असल में यह उस चरम भूख का हिस्सा है जिसे साधारण तरीके से नहीं मिटाया जा सकता।”
आर्यन अब पूरी तरह से उत्तेजित भी था और हैरान भी। उसने अंजलि के हाथ को सहलाते हुए पूछा, “माँ, तो क्या समाज में जो हम देखते हैं—वो सब झूठ है? और लोग उत्तेजना के लिए और क्या-क्या करते हैं? मैंने इंटरनेट पर बहुत कुछ अजीब देखा है, पर आपकी बातों से लग रहा है कि हकीकत उससे भी कहीं आगे है।”
अंजलि ने आर्यन के कान के पास झुककर फुसफुसाया, “समाज बाहर से बहुत शरीफ बनता है। वही लोग जो दिन में नैतिकता की बातें करते हैं, रात को ‘एस्कॉर्ट सर्विस’, ‘ग्रुप सेक्स’ और ‘स्ट्रिप क्लब’ जैसी जगहों पर अपनी हवस मिटाते हैं। आज के दौर में उत्तेजना सिर्फ बेड तक नहीं रही, अब यह ‘पावर’ और ‘एक्सपेरिमेंट’ बन गई है।”
“अब तो लोग अनजानों के साथ वीडियो कॉल पर वो सब करते हैं जो तूने कल रात पापा के साथ देखा। लोग अपनी सबसे निजी चीज़ों को कैमरे के सामने लाना चाहते हैं क्योंकि उन्हें ‘दिखाने’ में मज़ा आने लगा है।”
इन बातों ने आर्यन के दिमाग की नसों को हिलाकर रख दिया था। उसे अहसास हुआ कि उसकी माँ कितनी गहरी समझ रखती है। उसने अंजलि की कमर को ज़ोर से भींचा और उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके निप्पल्स को अपनी उंगलियों से मसलना शुरू कर दिया।
“माँ… आपकी बातें सुनकर तो मुझे लग रहा है कि मैं अभी बहुत पीछे हूँ। समाज इतना आगे निकल गया है… पर मुझे उन सब से क्या लेना-देना? मेरे लिए तो मेरा सबसे बड़ा ‘थ्रिल’ और मेरी सबसे बड़ी ‘फंतासी’ आप ही हो।”
अंजलि की सांसें अब तेज़ होने लगी थीं। उसने अपनी गर्दन पीछे की ओर झुका दी और अपनी ब्रा की हुक की ओर इशारा करते हुए कहा, “तो फिर देर किस बात की? जब तू जान गया है कि दुनिया कितनी बेबाक है… तो तू अपनी इस ‘बेबाक माँ’ के साथ आज क्या नया एक्सपेरिमेंट करेगा?”
आर्यन की मासूमियत और उसकी हैरानी देखकर अंजलि के चेहरे पर एक दिलकश और शरारती मुस्कान फैल गई। उसे अपने बेटे का यह भोलापन, जो उसकी मर्दानगी के साथ घुला-मिला था, बहुत प्यारा लगा।
आर्यन ने थोड़ा झिझकते हुए अपना सिर खुजलाया और धीमी आवाज़ में बोला, “माँ, आप जो बता रही हैं वो सब तो मेरे सिर के ऊपर से जा रहा है। स्वैपिंग, थ्रिल, एक्सपेरिमेंट… मुझे तो लगता है इन सब के बारे में मुझे पहले थोड़ा पढ़ना पड़ेगा या कहीं से सीखना पड़ेगा। मैं तो बस आपको प्यार करना जानता हूँ।”
आर्यन की बात सुनकर अंजलि खिलखिलाकर हंस पड़ी। उसकी हंसी में एक अजीब सा नशा था जिससे उसकी काली ब्रा के अंदर कैद उसके स्तन तेज़ी से ऊपर-नीचे होने लगे। “मेरे भोले बच्चे…” अंजलि ने हंसते हुए आर्यन के गाल को थपथपाया, “किताबें और इंटरनेट सिर्फ जानकारी देते हैं, असली ‘हुनर’ तो जज्बातों और मौके से आता है। और वैसे भी, जब तेरी ये ‘अनुभवी माँ’ तेरे साथ है, तो तुझे कहीं और जाने की क्या ज़रूरत?”
अंजलि ने आज तय कर लिया था कि वह आर्यन की झिझक को हमेशा के लिए खत्म कर देगी। उसने अपनी नशीली आँखें आर्यन की आँखों में गड़ाईं और बिस्तर पर घुटनों के बल खड़ी हो गई। “कल रात तूने अपनी ताकत दिखाई थी… आज मैं तुझे दिखाती हूँ कि एक औरत जब कमान संभालती है, तो वो अपने मर्द को किस हद तक पागल कर सकती है।”
अंजलि ने अपने हाथ पीछे किए और एक ही झटके में अपनी ब्रा का हुक खोल दिया। बिना किसी शर्म के उसने उस काली लेस वाली ब्रा को उतारकर फर्श पर फेंक दिया। उसके गोरे और भारी स्तन आज़ाद होकर आर्यन की आँखों के ठीक सामने थिरकने लगे। मध्यम रोशनी में उनके गुलाबी निप्पल पत्थर की तरह सख्त और उभरे हुए थे।
इससे पहले कि आर्यन कुछ समझ पाता, अंजलि ने उसे धीरे से पीछे की ओर धकेला जिससे आर्यन बेड पर सीधा लेट गया। अंजलि बिल्ली की तरह रेंगती हुई उसके ऊपर आई और उसके नेकर के ऊपर से ही उसकी मज़बूत मर्दानगी को अपने कोमल हाथों से कसकर पकड़ लिया।
“आज तू सिर्फ देखेगा और महसूस करेगा आर्यन… आज की शुरुआत मैं अपनी शर्तों पर करूँगी,” अंजलि ने उसके होंठों के बेहद करीब जाकर फुसफुसाया। उसकी गर्म सांसें और उसके खुले स्तनों का स्पर्श आर्यन के सीने पर बिजली की तरह दौड़ने लगा।
आर्यन जो अब तक सिर्फ Giver था, आज पहली बार Receiver बन रहा था। अंजलि ने आज अपनी ममता को एक तरफ रख दिया था और वह पूरी तरह से एक कामुक प्रेमिका के रूप में अपने बेटे के शरीर की पूजा कर रही थी।
आर्यन बिस्तर पर सीधा लेटा हुआ था, उसकी सांसें तेज़ थीं और सीना उत्तेजना के मारे ऊपर-नीचे हो रहा था। अंजलि उसके ऊपर किसी नागिन की तरह मंडरा रही थी।
अंजलि ने अपने दोनों हाथों की उंगलियों को आर्यन के गठे हुए सीने पर फिराना शुरू किया। उसके कोमल और ठंडे हाथ जब आर्यन के गर्म जिस्म से टकराए, तो आर्यन के पूरे शरीर में एक करंट दौड़ गया। अंजलि ने अपनी उंगलियों से आर्यन के दोनों छोटे और सख्त निप्पल्स को धीरे-धीरे सहलाना और गोल-गोल घुमाना शुरू किया। आर्यन ने अपनी आँखें बंद कर लीं और उसके मुँह से एक दबी हुई आह निकली, “ओह्ह… माँ… यह क्या कर रही हो?”
अंजलि रुकी नहीं। वह और नीचे झुकी, जिससे उसके भारी और नग्न स्तन आर्यन के पेट पर रगड़ खाने लगे। उसने अपनी गर्म ज़ुबान से आर्यन के दाएं निप्पल को धीरे से छुआ और उसे चारों तरफ से चाटना शुरू किया। आर्यन का पूरा शरीर बिस्तर पर धनुष की तरह तन गया। उसे कभी अंदाज़ा नहीं था कि एक मर्द के सीने पर भी इतना Sensation हो सकता है।
अचानक अंजलि ने अपनी शरारत बढ़ाई। उसने आर्यन के निप्पल को अपने होठों के बीच भरा और अपने सफेद मोतियों जैसे दांतों से उसे हल्का सा काट लिया। वह दर्द नहीं था, बल्कि एक ऐसा बिजली का झटका था जिसने सीधे आर्यन की मर्दानगी पर असर किया। आर्यन के हाथ खुद-ब-खुद बिस्तर की चादर को मुठ्ठियों में भींचने लगे।
अंजलि ने अपना चेहरा ऊपर उठाया, उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। “क्या हुआ मेरे शेर? कल तो तू बहुत बहादुर बन रहा था… आज सिर्फ एक छोटे से काट से कांप गया?” उसने फिर से दूसरे निप्पल पर वही प्रक्रिया दोहराई, उसे चूसते हुए एक सिसकारी भरी आवाज़ निकाली जो कमरे के सन्नाटे को और भी कामुक बना रही थी।
आर्यन को लग रहा था जैसे उसके शरीर का सारा खून नीचे की ओर दौड़ रहा है। अंजलि का यह नया रूप—जहाँ वह उसे तड़पा रही थी—आर्यन को एक ऐसे नशे में ले जा रहा था जहाँ वह सब कुछ भूल चुका था। उसे अहसास हुआ कि औरतों के पास सिर्फ देने के लिए नहीं, बल्कि मर्दानगी को काबू करने के लिए भी हज़ार तरीके होते हैं।
माहौल अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुका था। अंजलि ने आज ठान लिया था कि वह आर्यन को केवल सुख नहीं देगी, बल्कि उसे अपनी उंगलियों के इशारों पर नचाएगी। वह आर्यन के ऊपर से थोड़ी बगल में खिसकी, लेकिन उसका जिस्म अभी भी आर्यन से सटा हुआ था।
अंजलि अब करवट लेकर लेटी थी, उसका एक हाथ आर्यन के सीने पर था और दूसरा हाथ उसके नेकर के उस उभार पर, जो किसी ज्वालामुखी की तरह फटने को तैयार था।
अंजलि ने अपना चेहरा आर्यन के सीने के करीब लाया। उसने अपने बाएं हाथ की दो उंगलियों से आर्यन के एक निप्पल को बुरी तरह मसला और साथ ही अपनी गर्म जुबान से दूसरे निप्पल को घेर लिया। वह उसे अपनी जुबान की नोक से ऐसे छेड़ रही थी जैसे कोई प्यासा बूंद-बूंद को तरसता है। कभी वह उसे पूरा अपने मुँह में भरकर चूसती, तो कभी अपने दांतों की हल्की रगड़ से आर्यन के दिमाग की नसें हिला देती। आर्यन के मुँह से बेतहाशा सिसकारियां निकलने लगीं, “आह्ह्ह… माँ… बस करो… मैं… मैं पागल हो जाऊँगा!”
जहाँ ऊपर अंजलि के मुँह का जादू चल रहा था, वहीं उसका दाहिना हाथ नीचे की तरफ अपना काम शुरू कर चुका था। उसने आर्यन के ७ इंच के फौलाद को नेकर के ऊपर से ही अपनी मुट्ठी में भर लिया। कपड़ा बीच में होने की वजह से जो friction पैदा हो रहा था, वह सीधे आर्यन की रीढ़ की हड्डी में बिजली के झटके दे रहा था। अंजलि ने अपने हाथ की पकड़ को कभी ढीला किया तो कभी एकदम कस लिया।
अंजलि ने अपनी हथेली को गोल-गोल घुमाते हुए उस गर्म लोहे को सहलाना शुरू किया। उसे महसूस हो रहा था कि आर्यन का अंग नेकर के कपड़े को फाड़कर बाहर आने को बेताब है। उसने अपनी उंगलियों के पोरों से उस अंग की टोपी वाले हिस्से को कपड़े के ऊपर से ही कुरेदना शुरू किया, जिससे आर्यन का शरीर बिस्तर पर मछली की तरह तड़पने लगा।
ऊपर से निप्पल की चूसन और नीचे से उस अंग की कसी हुई पकड़—आर्यन के लिए यह दोहरी मार असहनीय होती जा रही थी। “देखो आर्यन… अभी तो मैंने कपड़े भी नहीं हटाए और तेरा ये सिपाही अभी से हार मानने लगा है?” अंजलि ने कामुकता से भरी आवाज़ में आर्यन के कान में फुसफुसाया और फिर उसके कान की लौ (earlobe) को अपने होंठों में दबा लिया।
आर्यन के हाथ अब बिस्तर की चादर को फाड़ने की हद तक भींच चुके थे। उसका शरीर पसीने से तरबतर था और उसकी सांसें किसी भागते हुए घोड़े की तरह चल रही थीं। उसे लग रहा था कि अगर अंजलि ने एक मिनट और ऐसे ही किया, तो वह बिना प्रवेश किए ही अपना सारा लावा नेकर में ही निकाल देगा।
आर्यन को लगा था कि अब अंजलि उसके उस ७ इंच के उफनते हुए अंग को अपनी मुट्ठी में कैद कर लेगी, लेकिन अंजलि ने आज ‘कामुकता की नई किताब’ खोल रखी थी। उसने आर्यन की आंखों में देखते हुए अपना कोमल और गर्म हाथ धीरे से नेकर के इलास्टिक के अंदर डाला, लेकिन वह सीधे ऊपर नहीं गई।
आर्यन ने अपनी सांसें रोक लीं, वह इंतज़ार कर रहा था कि कब उसकी माँ का हाथ उसके फौलाद को छुएगा, पर अंजलि ने अपना हाथ और नीचे सरका दिया। उसने सीधे उस गर्म खंभे को छोड़कर उसके नीचे मौजूद दोनों Testicles को अपनी उंगलियों के घेरे में ले लिया।
जैसे ही अंजलि की रेशमी उंगलियों ने उन दोनों भारी और संवेदनशील गोलों को छुआ, आर्यन के शरीर में बिजली का ऐसा तगड़ा झटका लगा कि उसके पैर की उंगलियां तक मुड़ गईं। उसे कभी अंदाज़ा नहीं था कि असली करंट यहाँ छिपा होता है। आर्यन का मुँह खुला का खुला रह गया, पर आवाज़ नहीं निकली।
अंजलि ने बड़े ही सलीके से अपनी उंगलियों को उन दोनों गोलों के चारों ओर घुमाना शुरू किया। वह उन्हें अपनी हथेली पर रखकर बहुत धीरे से ऊपर-नीचे कर रही थी, जैसे कोई जौहरी कीमती मोतियों को परख रहा हो। “क्या हुआ आर्यन? तू तो ऊपर की तड़प में था… पर असली खज़ाना तो यहाँ है,” अंजलि ने अपनी आँखों से हवस की चिंगारी छोड़ते हुए कहा।
जब अंजलि ने अपने नाखूनों को उन दोनों गोलों की त्वचा पर बहुत ही हल्के से रगड़ा, तो आर्यन की सहनशक्ति का बांध टूट गया। उसका ७ इंच का अंग बिना छुए ही हवा में पागलों की तरह उछलने लगा। उसे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे उसके शरीर की सारी नसों का सिरा अंजलि की उन्हीं उंगलियों में है। वह बिस्तर पर अपनी कमर को ऊपर की ओर झटका देने लगा ताकि अंजलि का स्पर्श और गहरा हो सके।
आर्यन अब किसी नशेड़ी की तरह हो चुका था। उसका दिमाग काम करना बंद कर चुका था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह चिल्लाए, रोए या अंजलि को खींचकर अपने अंदर समा ले। “माँ… प्लीज… आह्ह्ह… वहाँ नहीं… मैं… मैं फट जाऊँगा! उफ़्फ़… ये क्या जादू है!” आर्यन की आवाज़ अब पूरी तरह भर्रा गई थी।
अंजलि ने देखा कि आर्यन की आंखों की पुतलियां ऊपर चढ़ गई हैं और उसका शरीर पसीने से भीग चुका है। उसने अपनी पकड़ थोड़ी और कसी और उन दोनों गोलों को नीचे की ओर हल्का सा खींचा, जिससे आर्यन के गले से एक ऐसी घरघराहट निकली जो सिर्फ चरम उत्तेजना में निकलती है।
आर्यन की हालत अब उस मुकाम पर थी जहाँ इंसान की सभ्यता और तमीज की सारी दीवारें ढह जाती हैं। अंजलि ने उसके अंडकोषों को जिस तरह अपनी उंगलियों के जाल में फंसाया था, उसने आर्यन के दिमाग का संतुलन बिगाड़ दिया था। अंजलि ने उसकी आँखों में आँखें डालीं, उसकी आँखों में एक अजीब सी ‘भूख’ थी।
अंजलि ने अपने हाथ की पकड़ को थोड़ा और सख्त किया और अपना चेहरा आर्यन के चेहरे के इतने करीब लाई कि उनकी नाक आपस में टकरा रही थी। “आर्यन…” उसने बहुत ही धीमी और जहरीली आवाज़ में फुसफुसाया, “सिर्फ जिस्म का मजा काफी नहीं है। मुझे बता कि इस वक्त मैं तुझे क्या लग रही हूँ? मुझे वो नाम दे जो समाज मुझे देना चाहता है। मुझे गालियां दे आर्यन… मुझे अपमानित कर, तभी मुझे असली सुख मिलेगा।”
आर्यन हक्का-बक्का रह गया। “माँ… ये आप क्या कह रही हैं? मैं… मैं आपको कैसे…” लेकिन जैसे ही उसने इनकार करना चाहा, अंजलि ने उसके अंडकोषों को एक हल्का सा झटका दिया। आर्यन के मुँह से चीख निकल गई। “बोल! बोल मुझे… कि मैं एक रांड हूँ जो अपने ही जवान बेटे के नीचे लेटने के लिए तड़प रही है! बोल कि मैं कितनी नीच और बदचलन औरत हूँ!”
अंजलि की उत्तेजना देखकर और उस शारीरिक तड़प के दबाव में आर्यन का बांध टूट गया। उसकी आवाज़ में एक जंगलीपन आ गया। “हाँ… तुम… तुम एक नंबर की छिनाल हो! अपने पति के पीछे अपने ही बेटे का ७ इंच का डंडा लेने के लिए पागल हो रही हो! तुम एक कुलटा हो माँ… जो आज रात अपने बेटे से अपनी कोख फिर से भरवाना चाहती है!”
जैसे-जैसे आर्यन के मुँह से गंदी गालियां निकलने लगीं, अंजलि का शरीर बिजली की तरह कांपने लगा। उसे उन शब्दों में वो मज़ा आ रहा था जो शायद ७ इंच का अंग भी न दे पाए। “आह्ह्ह… और बोल… और गंदा बोल! मुझे अपनी ‘रखैल’ समझ! बता कि तू इस कुतिया के साथ आज क्या-क्या करेगा!”
आर्यन अब पूरी तरह से बेकाबू था। वह गालियां बकता जा रहा था और अंजलि उन गालियों को किसी मीठे संगीत की तरह पी रही थी। “तुम मेरी रंडी हो! आज रात मैं तुम्हारा हुलिया बिगाड़ दूँगा! तुम्हारा ये गोरा बदन कल तक मेरे दांतों के निशानों से भर जाएगा, तुम एक चरित्रहीन औरत हो जिसने अपने ही घर को कोठा बना दिया है!”
अंजलि ने अपनी आँखें उलट लीं। उसके शरीर से पसीना बह रहा था और वह आर्यन की गालियों पर अपनी कमर को बिस्तर पर पटक रही थी। “हाँ आर्यन… मैं तेरी वही रंडी हूँ! अब और इंतज़ार मत कर… इस रंडी को फाड़ दे! अपनी इस कमीनी माँ को अपनी मर्दानगी से तबाह कर दे!”
कमरे की हवा अब उन गंदी गालियों और भारी सांसों से इतनी गाढ़ी हो चुकी थी कि घुटन होने लगी थी, लेकिन वह घुटन ही उन दोनों को पागल कर रही थी। आर्यन के मुँह से निकलती हर गाली अंजलि के जिस्म में बिजली बनकर दौड़ रही थी। उसका रोम-रोम उस अपमानजनक सुख के लिए तड़प उठा था जिसे समाज पाप कहता है।
अंजलि अब और सब्र नहीं कर सकती थी। आर्यन की गालियों ने उसके अंदर की उस ‘कुतिया’ को जगा दिया था जो अपने ही बेटे के ७ इंच के फौलाद के नीचे कुचले जाने के लिए बेताब थी।
अंजलि ने एक जंगली झटके के साथ आर्यन की नेकर के इलास्टिक को नीचे खींचा। नेकर के उतरते ही वह ७ इंच का मूसल, जो अब तक कैद में तड़प रहा था, एक स्प्रिंग की तरह बाहर उछला। वह पूरी तरह से पत्थर की तरह सख्त, काला और नसों से भरा हुआ था। उसकी टोपी से काम-रस की बूंदें टपक रही थीं। अंजलि ने अपनी प्यासी आँखों से उस विशालकाय अंग को देखा और एक पल के लिए कांप उठी। यह ५ इंच के उस खिलौने से कहीं ज़्यादा भयानक और असली था।
बिना एक पल गंवाए, अंजलि ने अपना मुँह खोला और उस ७ इंच के गर्म लोहे को सीधे अपनी हलक तक उतार लिया। आर्यन के मुँह से निकलती गालियां अचानक एक लंबी सिसकारी में बदल गईं, “आह्ह्ह्ह्ह… माँ… ये… ये क्या… उफ़्फ़!” अंजलि ने अपनी ज़ुबान को उस अंग के चारों ओर लपेट लिया और उसे पागलों की तरह चूसने लगी। वह उसे इतनी गहराई तक ले जा रही थी कि उसे उल्टी जैसी फीलिंग हो रही थी, लेकिन उस दर्द में भी उसे मज़ा आ रहा था। उसके गोरे चेहरे पर आर्यन के काले अंग का घर्षण एक मादक दृश्य बना रहा था।
आर्यन सन्न रह गया था। उसके दिमाग में गालियां आनी बंद हो गई थीं, वह बस उस सुख के समंदर में डूबने लगा था। लेकिन अंजलि को यह मंज़ूर नहीं था। उसे सिर्फ शारीरिक सुख नहीं चाहिए था, उसे अपने अपमान का वह ‘मानसिक नशा’ भी चाहिए था। उसने झटके से अपना मुँह बाहर निकाला। लार से तरबतर उसका चेहरा और उसके होंठों पर लगा आर्यन का रस उसे और भी कामुक बना रहा था। उसने अपनी नशीली आँखें आर्यन की आँखों में गड़ाईं और भारी आवाज़ में बोली, “रुक क्यों गया? बोल! अपनी इस रंडी माँ को गालियां देना चालू रख! मुझे सुननी है कि मैं कितनी नीच हूँ!”
अपनी बात पर ज़ोर देने के लिए और आर्यन को बेकाबू करने के लिए, अंजलि ने अपना दूसरा हाथ नीचे सरकाया। उसके नुकीले और लाल रंग के नाखून अब आर्यन के उन संवेदनशील Testicles की कोमल त्वचा पर उतर आए। उसने अपने नाखूनों को उन दोनों गोलों पर ज़ोर से गड़ा दिया। आर्यन के पूरे शरीर में दर्द और बिजली की एक लहर दौड़ी। वह बिस्तर पर तड़प उठा। “आह्ह्ह! माँ… दर्द हो रहा है! प्लीज… मत करो!”
अंजलि ने नाखून और गहरे गड़ा दिए। “बोल! वरना ये गोले नोच लूँगी! बोल कि तेरी ये माँ कितनी बदचलन है जो अपने बेटे का मुँह में ले रही है!” आर्यन अब पूरी तरह से जानवर बन चुका था। दर्द और हवस के मिले-जुले अहसास ने उसे पागल कर दिया। उसने अंजलि के बाल पकड़े और उसे फिर से अपने अंग की ओर धक्का दिया। “हाँ! तुम एक नंबर की छिछोरी हो! लो… लो मेरा पूरा लो और अपने कंठ तक उतार लो! तुम एक बेशर्म रांड हो जो आज अपने बेटे की गुलामी कर रही है!”
अंजलि ने एक विजयी मुस्कान दी और फिर से उस ७ इंच के शैतान को अपने मुँह में भर लिया। अब आर्यन गालियां बकता जा रहा था और अंजलि उसके अंडकोषों को नाखूनों से कुरेदते हुए उसके अंग को चूस रही थी। कमरे में सिर्फ आर्यन की गंदी गालियां, अंजलि के चूसने की ‘चप-चप’ की आवाज़ और बिस्तर की चरमराहट गूंज रही थी। मर्यादा का कत्ल हो चुका था, अब सिर्फ बेबाक वहशीपन का राज था।
आर्यन के सब्र का बांध अब पूरी तरह टूट चुका था। अंजलि के नाखूनों की चुभन और उसके मुँह की गीली गर्मी ने आर्यन के दिमाग को सुन्न कर दिया था। वह अब एक बेटा नहीं, बल्कि एक शिकारी बन चुका था जिसके सामने उसकी अपनी माँ एक प्यासी और लाचार ‘रंडी’ की तरह उसकी मर्दानगी को पूज रही थी।
आर्यन के शरीर की नसें पत्थर की तरह सख्त होकर उभर आई थीं। अंजलि का मुँह उसके ७ इंच के फौलाद को पूरी गहराई तक निगल रहा था, और उसकी आँखों में वह जंगली चमक थी जो आर्यन को और भी गंदा बोलने पर मजबूर कर रही थी।
आर्यन ने अंजलि के रेशमी बालों को अपनी मुट्ठी में कसकर जकड़ लिया और उसके सिर को अपने अंग पर तेज़ी से आगे-पीछे करना शुरू किया। “हाँ! ले… पूरा ले अपनी हलक तक! देख… देख तेरी ये ७ इंच की मौत अब आने वाली है! तू यही चाहती थी न, कि तेरा जवान बेटा तेरी इस बेशर्म ज़ुबान को अपने गरम रस से जला दे? आज तू इस नीच माँ का सारा गुरूर मिट्टी में मिला दूँगा!”
आर्यन का शरीर अब कमान की तरह तन गया था। उसे महसूस हुआ कि उसके अंडकोषों से गरम लावा अब ऊपर की ओर दौड़ रहा है। अंजलि ने यह भांप लिया और उसने अपने नाखूनों को आर्यन के उन गोलों पर और ज़ोर से गड़ा दिया, जिससे आर्यन का दर्द और हवस एक साथ चरम पर पहुँच गए। “आह्ह्ह्ह… माँ! अब… अब नहीं रुकेगा! ले… अपनी कोख तक ले इसे! तू एक नंबर की छिनाल है… ले मेरा गरम माल!”
अचानक आर्यन के मुँह से एक शेर जैसी दहाड़ निकली और उसका ७ इंच का अंग अंजलि के मुँह के अंदर ही फटने लगा। पिच-पिच-पिच! गरम और गाढ़ा लावा अंजलि के गले की गहराई में सीधे जाकर टकराने लगा। अंजलि ने अपनी आँखें उलट लीं और उस गरम धार को गटकने की कोशिश करने लगी। लेकिन मात्रा इतनी ज़्यादा थी कि उसके गले से वह रस बाहर छलकने लगा।
आर्यन रुका नहीं, उसने अपना अंग अंजलि के मुँह से बाहर खींचा और उस पर लगातार हो रहे डिस्चार्ज की धार को अंजलि के पूरे चेहरे पर बिखेरना शुरू किया। अंजलि का गोरा चेहरा, उसकी आँखें, उसके होंठ और उसकी काली ब्रा—सब कुछ आर्यन के सफेद और गाढ़े लावे से तरबतर हो गए। वह किसी हारी हुई दासी की तरह घुटनों के बल बैठी रही, जबकि उसका बेटा उसे अपनी ‘मर्दानगी के निशान’ से नहला रहा था।
जब आखिरी बूंद भी टपक गई, तो आर्यन हाँफते हुए बिस्तर पर ढह गया। अंजलि का चेहरा अब उस सफेद रस से चमक रहा था। उसने अपनी उंगली से अपने गाल पर गिरे रस को पोंछा और उसे अपनी ज़ुबान से चाटते हुए आर्यन की ओर देखा। “तेरा ये स्वाद… आर्यन… इसने मुझे मेरी औकात दिखा दी। आज से मैं सिर्फ तेरी गुलाम हूँ।”
कमरे में भारी सन्नाटा छा गया, जिसमें सिर्फ उन दोनों की हाँफने की आवाज़ें और उस सफेद रस की खुशबू फैली हुई थी। ७ इंच के फौलाद ने आज न केवल जिस्म को, बल्कि एक माँ की रूह को भी अपना बंधक बना लिया था।