बाथरूम की फर्श पर शावर का पानी अब अंजलि के जिस्म से होकर बह रहा था। वह पूरी तरह निढाल थी, उसके पैर जवाब दे चुके थे और वह धीरे से गीली टाइल्स पर बैठ गई। आर्यन के चेहरे पर एक विजेता वाली मुस्कान थी; उसे इस बात का गहरा सुकून था कि उसने अपनी माँ को उस अनोखे तरीके से शांत किया जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी।
लेकिन आर्यन को क्या पता था कि यह ‘शांति’ सिर्फ एक तूफ़ान से पहले की खामोशी थी।
अंजलि फर्श पर बैठी हुई थी, उसके बाल चेहरे पर बिखरे थे और उसकी सांसें अब भी तेज थीं। आर्यन उसे बड़े प्यार से निहार रहा था, तभी अचानक अंजलि की आँखों में वही ‘गुरु’ वाली चमक वापस लौटी। उसने ऊपर की ओर देखा और एक शरारती मुस्कान दी।
इससे पहले कि आर्यन कुछ समझ पाता, अंजलि ने बिजली की फुर्ती से अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाए और आर्यन की सफेद अंडरवियर के इलास्टिक को मजबूती से जकड़ लिया। आर्यन सकपका गया, “माँ… आप…?” लेकिन अंजलि ने कोई जवाब नहीं दिया। उसने एक ही झटके में अंडरवियर को नीचे की ओर खींच दिया।
जैसे ही कपड़ा नीचे गिरा, आर्यन का 7 इंची अंग पूरी तरह आजाद होकर अंजलि के चेहरे के ठीक सामने आ गया। शावर की बूंदें उस पर गिरकर चमक रही थीं। अंडरवियर अब आर्यन के घुटनों तक थी और वह पूरी तरह नग्न अवस्था में अपनी माँ के सामने खड़ा था।
अंजलि ने अपनी नज़रें उस विशाल अंग पर जमा दीं। उसने अपने गीले हाथों से उसे जड़ से पकड़ा। उसकी हथेली की कोमलता और ठंडे पानी के बीच उस अंग की तपन ने आर्यन के पूरे शरीर में करंट दौड़ा दिया। अंजलि ने ऊपर देखते हुए कहा, “तूने क्या सोचा था आर्यन? कि तू अपनी माँ को तड़पाकर अकेला छोड़ देगा? अब देख कि तेरी ये ‘शांति’ कितनी देर तक टिकती है।”
अंजलि ने अपने होंठ उस गर्म अंग के बिल्कुल करीब ले जाकर अपनी गर्म सांसें उस पर छोड़ीं। आर्यन की टांगें कांपने लगीं। वह जो अब तक ‘डोमिनेंट’ बन रहा था, अंजलि के इस अचानक हमले से पूरी तरह बेबस हो गया।
बाथरूम के उस भाप से भरे माहौल में अब बाजी पूरी तरह पलट चुकी थी। अंजलि फर्श पर घुटनों के बल बैठी थी, और उसकी आँखों में वह शरारत और अधिकार था जो केवल एक अनुभवी ‘गुरु’ में हो सकता है।
आर्यन दीवार के सहारे खड़ा था, उसकी सांसें रुक-रुक कर चल रही थीं। अंजलि ने अपनी गर्दन थोड़ी ऊपर उठाई और सीधे आर्यन की आँखों में अपनी नज़रें गड़ा दीं। उन आँखों में चुनौती भी थी और बेपनाह प्यार भी।
अंजलि ने अपने दोनों हाथों का इस्तेमाल किया। उसने आर्यन के उस ७ इंची अंग को अपनी दोनों हथेलियों के बीच किसी कीमती चीज़ की तरह थामा। शावर का पानी उसके हाथों और आर्यन के अंग के बीच एक चिकनाई का काम कर रहा था।
अंजलि ने धीरे-धीरे लेकिन बहुत ही सधे हुए अंदाज़ में अपने दोनों हाथों को ऊपर-नीचे चलाना शुरू किया। वह उसे जड़ से लेकर ऊपर तक सहला रही थी। उसकी उंगलियों का दबाव कभी बढ़ जाता तो कभी एकदम रेशम जैसा कोमल हो जाता। अंजलि की आँखों का संपर्क आर्यन को अंदर तक हिला रहा था।
आर्यन के लिए यह सब सहना नामुमकिन होता जा रहा था। जब अंजलि के हाथों की मखमली पकड़ और पानी की ठंडी बूंदें एक साथ उसके अंग पर महसूस हुईं, तो उसके पैरों ने जवाब देना शुरू कर दिया। उसकी गर्दन पीछे की ओर मुड़ गई और उसके मुँह से बेतहाशा आहें निकलने लगीं। “माँ… अह्… प्लीज़… ये… ये सहन नहीं हो रहा… रुक जाइए… वरना मैं…”
अंजलि ने एक मोहक मुस्कान के साथ अपने हाथों की रफ़्तार और थोड़ी बढ़ा दी। “क्या हुआ मेरे शेर? अभी तो तू बड़ी-बड़ी बातें कर रहा था। देख तो सही, तेरी माँ के हाथों में कितनी ताकत है।”
आर्यन का शरीर झटके लेने लगा। उसे लग रहा था कि उसकी रीढ़ की हड्डी से लेकर दिमाग तक एक तेज़ बिजली दौड़ रही है। अंजलि का यह ‘हस्त-कौशल’ इतना सटीक था कि आर्यन को अपनी आँखों के सामने तारे नज़र आने लगे। वह चाहकर भी अंजलि के हाथों से खुद को छुड़ा नहीं पा रहा था, और न ही वह चाहता था कि यह सुख रुके।
अंजलि एक अनुभवी औरत थी, वह जानती थी कि आर्यन इस समय उत्तेजना के उस शिखर पर है जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं थी। वह नहीं चाहती थी कि यह खेल इतनी जल्दी खत्म हो जाए। जैसे ही उसने महसूस किया कि आर्यन का शरीर अकड़ने लगा है और वह बस ‘झड़ने’ ही वाला है, उसने बड़ी चतुराई से अपने हाथों की रफ्तार कम कर दी और फिर पूरी तरह रुक गई।
आर्यन ने एक गहरी और कांपती हुई सांस ली। उसका अंग अभी भी अंजलि के हाथों की गिरफ्त में था, लेकिन हलचल रुक जाने से उसे थोड़ा संभलने का मौका मिला।
अंजलि ने वहीं फर्श पर बैठे-बैठे अपना सिर थोड़ा ऊपर उठाया और आर्यन की लाल होती आँखों में झांका। “सांस ले आर्यन… लंबी सांस ले,” उसने बहुत ही शांत और मधुर आवाज़ में कहा। “इतनी जल्दी हार मान लेगा तो अपनी माँ को लंबी रेस का मज़ा कैसे दिलाएगा?”
अंजलि ने उसे संभलने का वक्त देने के लिए बातों का सिलसिला शुरू किया। उसने बड़े प्यार से आर्यन के घुटने पर अपना हाथ रखा और बोली, “पता है आर्यन, एक असली मर्द वही होता है जो अपनी उत्तेजना पर काबू करना सीख जाए। कल रात जो तूने सीखा, वो तो बस ट्रेलर था। आज जब मैं तुझे इस तरह बेबस देख रही हूँ, तो मुझे लग रहा है कि मेरा बच्चा वाकई अब जवान हो गया है।”
आर्यन की सांसें धीरे-धीरे सामान्य होने लगीं। अपनी माँ की बातों और उनकी नशीली आँखों ने उसे फिर से मानसिक रूप से तैयार कर दिया। “माँ… आप… आप बहुत शातिर हो,” आर्यन ने मुस्कुराते हुए कहा। “आपने मुझे उस मोड़ पर ला दिया जहाँ से मैं गिरने ही वाला था।”
अंजलि ने शरारत से अपनी पलकें झपकाईं। “शातिर नहीं बेटा, इसे ‘कंट्रोल’ कहते हैं। देख, अब तू फिर से तैयार है। अब बता, क्या अभी भी तुझे वो ‘प्रोफेसर’ याद आ रही है या अपनी माँ का ये रूप देखकर सब भूल गया?”
अंजलि की इन बातों ने आर्यन के भीतर के तनाव को कम किया और उसे वह ‘टाइम’ दे दिया जिसकी उसे ज़रूरत थी। अब वह फिर से पूरी ताकत और जोश के साथ इस खेल को आगे बढ़ाने के लिए तैयार था। शावर का पानी अब उन दोनों के बीच एक ठंडी फुहार की तरह काम कर रहा था, जिसने माहौल को और भी रोमांटिक बना दिया।
शावर के गिरते पानी की आवाज़ के बीच, आर्यन ने सोचा भी नहीं था कि अगला पल उसके जीवन की संवेदनाओं को पूरी तरह बदल देगा। अभी वह अपनी माँ की बातों से संभल ही रहा था कि अंजलि ने अपना अंतिम दांव खेल दिया।
आर्यन के नज़रिए से, वह पल किसी दैवीय बिजली के झटके जैसा था। उसने नीचे देखा, अंजलि ने अपनी आँखें बंद कीं और धीरे से अपना मुँह खोला।
जैसे ही अंजलि ने आर्यन के ७ इंची अंग के अगले हिस्से को अपने होंठों के घेरे में लिया, आर्यन के मुँह से एक बेतहाशा चीख निकलने वाली थी जो उसने अपने होंठों को भींचकर रोक ली। उसे महसूस हुआ कि बाहर शावर का पानी ठंडा था, लेकिन अंजलि के मुँह के भीतर का तापमान किसी दहकते हुए लावे जैसा गर्म था। वह मखमली जुबान जब उसके संवेदनशील हिस्से पर गोल-गोल घूमी, तो आर्यन को लगा जैसे उसका दिमाग सुन्न हो गया है।
यह आर्यन के लिए बिल्कुल नया अनुभव था। उसने पहले कभी नहीं सोचा था कि किसी के मुँह का खिंचाव इतना शक्तिशाली हो सकता है। जब अंजलि ने गहराई तक उसे अपने गले में उतारने की कोशिश की, तो आर्यन के पैरों की उंगलियां फर्श पर मुड़ गईं। उसे ऐसा लगा जैसे उसके शरीर की सारी ऊर्जा एक ही बिंदु पर सिमट कर रह गई है। उसे महसूस हो रहा था कि अंजलि की कोमल जुबान उसके अंग की एक-एक नस को पहचान रही है और उसे सहला रही है।
आर्यन ने दीवार को अपने नाखूनों से खुरचना शुरू कर दिया। उसे ऐसा अहसास हो रहा था जैसे वह हवा में तैर रहा है। अंजलि के हाथों की पकड़ अभी भी उसके आधार पर बनी हुई थी, और ऊपर उसका मुँह वो जादुई काम कर रहा था जिसे आर्यन ने सिर्फ कल्पनाओं में सोचा था। वह ‘चप-चप’ की आवाज़ और अंजलि के गले से निकलती हल्की सी गूँज आर्यन के पौरुष को ललकार रही थी।
आर्यन ने अपनी माँ के भीगे बालों में अपनी उंगलियां फँसा दीं। वह उसे रोकना चाहता था क्योंकि सुख असहनीय था, लेकिन साथ ही वह चाहता था कि यह पल कभी खत्म न हो। उसे अहसास हुआ कि अंजलि सिर्फ उसे ‘ओरल’ नहीं दे रही थी, बल्कि वह अपनी पूरी ममता और कामुकता उसे सौंप रही थी।
“माँ… ओह्… माँ… यह… यह क्या कर रही हैं आप… मैं… मैं पागल हो जाऊँगा…” आर्यन ने लड़खड़ाती आवाज़ में कहा। उसकी आँखें पलट रही थीं और उसे शावर का पानी अब महसूस होना बंद हो गया था; उसे सिर्फ अपनी माँ के मुँह की वो जादुई गर्मी और गीलापन महसूस हो रहा था।
माँ के नजरिये से –
बाथरूम में शावर की गिरती बूंदों और उठती भाप के बीच अंजलि के लिए यह पल केवल एक शारीरिक क्रिया नहीं, बल्कि अपनी ‘गुरु’ वाली सत्ता और ममतामयी अधिकार का संगम था। जब उसने आर्यन के उस ७ इंची अंग को पूरी तरह नग्न और अपने सामने तना हुआ देखा, तो उसके भीतर एक अजीब सी तृप्ति और गर्व की लहर दौड़ गई।
अंजलि फर्श पर घुटनों के बल बैठी थी, उसका भीगा हुआ बदन और बिना ब्रा के भारी स्तन हर सांस के साथ हिल रहे थे। जब उसने आर्यन के अंग को अपने मुँह के करीब लिया, तो उसके मन में क्या चल रहा था, इसे विस्तार से समझिए:
अंजलि ने जब पास से उस अंग को देखा, तो उसे अपनी परवरिश और आर्यन की मर्दानगी पर गर्व हुआ। वह ७ इंच का तना हुआ अंग उसे एक चुनौती की तरह लगा। उसने अपनी उंगलियों से उसकी नस-नस को महसूस किया और उसे लगा कि यह उसका अपना ही अंश है जो अब एक पूर्ण पुरुष बन चुका है।
जैसे ही अंजलि ने अपने होंठ खोले और उस गर्म अंग के अगले हिस्से को अपनी जीभ से छुआ, उसे आर्यन के शरीर की सोंधी खुशबू और शावर के पानी का मिला-जुला स्वाद महसूस हुआ। उसके लिए यह किसी पवित्र अनुष्ठान जैसा था। उसने बड़े ही सलीके से अपने होंठों को सिकोड़ा और उस मखमली हिस्से को अपने मुँह के भीतर समेट लिया।
अंजलि एक अनुभवी औरत थी। उसने सिर्फ अपने मुँह का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि उसने अपने गले की मांसपेशियों को भी ढीला छोड़ा ताकि वह उस ७ इंची गहराई को आत्मसात कर सके। जब वह धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी, तो उसे अपने मुँह के भीतर आर्यन के अंग की धड़कन महसूस हो रही थी। वह जानती थी कि उसके मुँह की गर्मी आर्यन को किस कदर पागल कर रही होगी।
अंजलि को सबसे ज़्यादा मज़ा इस बात में आ रहा था कि वह अपने बेटे, जो अब एक जवान मर्द है, को अपनी उंगलियों और जुबान पर नचा रही थी। जब उसने सुना कि आर्यन की सांसें उखड़ रही हैं और वह दीवार को खुरच रहा है, तो अंजलि के भीतर की औरत को एक अजीब सा सुकून मिला। उसने और भी गहराई से ‘सक्शन’ पैदा किया, मानो वह आर्यन की सारी शक्ति को अपने भीतर खींच लेना चाहती हो।
उसने बीच-बीच में अपनी आँखें खोलकर ऊपर की ओर देखा। आर्यन की तड़प, उसकी बंद आँखें और उसकी कांपती हुई जाँघें अंजलि को बता रही थीं कि उसका ‘प्रैक्टिकल’ सफल रहा है। अंजलि के लिए यह स्वाद किसी अमृत से कम नहीं था, क्योंकि इसमें उसके बेटे का विश्वास और उसका अपना समर्पण घुला हुआ था।
बाथरूम की उस धुंधली और पानी से भरी दुनिया में आर्यन इस वक्त जिस मानसिक और शारीरिक स्थिति में था, उसे शब्दों में बांधना लगभग नामुमकिन था। अंजलि के मुंह की वह दैवीय गर्मी और उसकी जुबान का वह जादुई स्पर्श आर्यन को वास्तविकता से बहुत दूर ले गया था।
आर्यन इस समय ‘परमानंद’ की उस पराकाष्ठा पर था, जहाँ शरीर की सारी संवेदनाएं केवल एक बिंदु पर आकर ठहर जाती हैं। उसके लिए यह अनुभव किसी साधारण सुख से कहीं ऊपर था:
उस पल में आर्यन को महसूस हो रहा था कि वह इस ब्रह्मांड का सबसे शक्तिशाली पुरुष है। जब उसने अपनी माँ जैसी सुंदर और अनुभवी महिला को अपने कदमों में बैठा देखा, जो पूरी तन्मयता से उसकी सेवा कर रही थी, तो उसका पुरुषार्थ हिमालय की ऊंचाइयों को छूने लगा। उसे लग रहा था कि दुनिया की कोई भी प्रोफेसर, कोई भी मॉडल या कोई भी अप्सरा उसे वह गौरव प्रदान नहीं कर सकती थी जो उसे इस वक्त मिल रहा था।
आर्यन के लिए समय का अस्तित्व खत्म हो चुका था। शावर से गिरते पानी की आवाज़ उसके कानों में किसी मधुर संगीत की तरह गूँज रही थी। उसे लग रहा था जैसे वह किसी दूसरे लोक में पहुँच गया है, जहाँ न कोई समाज है, न कोई नियम, और न ही कोई शर्म। वहाँ केवल वह था और उसका वह विराट आनंद।
आर्यन की आँखें बंद थीं, लेकिन उसे अपने भीतर हज़ारों रंगों का विस्फोट महसूस हो रहा था। उसके दिमाग की नसें खिंच गई थीं और उसकी हर सांस के साथ एक नई ऊर्जा का संचार हो रहा था। अंजलि के मुंह की वो ‘सक्शन’ शक्ति उसे ऐसा अहसास करा रही थी मानो उसकी रूह उसके शरीर से निकलकर उस ७ इंची अंग के जरिए अंजलि में समा जाना चाहती हो।
उसे इस बात का गहरा गर्व महसूस हो रहा था कि उसने अपनी उस ‘गुरु’ को, जिसे वह कल तक केवल श्रद्धा से देखता था, आज पूरी तरह अपना बना लिया है। उसे अपनी मर्दानगी पर इतना गहरा विश्वास पहले कभी नहीं हुआ। वह उस ‘अवस्था’ में था जहाँ एक पुरुष को लगता है कि वह ईश्वर के समान है, क्योंकि वह सृजन और चरम सुख की अंतिम सीमा को छू रहा है।
आर्यन के हाथ अंजलि के बालों में जकड़े हुए थे, उसका शरीर धनुष की तरह मुड़ चुका था और उसकी हर कोशिका उस सुख के सागर में गोते लगा रही थी। वह अब पूरी तरह से नियंत्रण खो चुका था—वह अब सिर्फ एक ‘अहसास’ बन गया था।
परमानंद की वह अवस्था अब अपने चरम बिंदु को पार कर चुकी थी। आर्यन के बस में अब कुछ भी नहीं रहा; उसके शरीर की रग-रग बिजली के झटकों की तरह फड़कने लगी। उसने अंजलि के बालों को कसकर मुट्ठी में भींच लिया और एक लंबी, रूहानी चीख उसके गले से निकली।
आर्यन के भीतर जमा वह सारा तनाव, वह सारी उत्तेजना एक ही पल में ज्वालामुखी की तरह फूट पड़ी।
शावर के पानी के बीच, आर्यन के उस ७ इंची अंग से ‘अमृत’ की वह गाढ़ी और गर्म धारें पूरी तीव्रता के साथ निकलीं। अंजलि, जो अब तक गहराई से अपना काम कर रही थी, ने जैसे ही उस गर्म बहाव को अपने गले के पास महसूस किया, उसने अपनी अनुभवी फुर्ती दिखाई।
वह जानती थी कि अगर वह पूरी तरह पीछे नहीं हटी, तो वह इस सैलाब में डूब जाएगी। उसने झटके से अपना मुँह पीछे किया, लेकिन आर्यन के जोश का वेग इतना अधिक था कि वह पूरी तरह बच नहीं पाई। उस सफ़ेद और गाढ़े रस की कुछ बूंदें उसकी ठुड्डी, उसके गालों और उसके होंठों के किनारों पर बिखर गईं।
जैसे ही अंजलि ने अपनी जीभ अपने होंठों पर फेरी, आर्यन के उस मर्दाना रस का वह नमकीन और कसैला स्वाद उसकी इंद्रियों से टकराया। उसने उस स्वाद को अपनी जुबान पर महसूस किया—यह उसके अपने बेटे के पौरुष का स्वाद था, जिसमें प्यार, समर्पण और मर्दानगी की गूँज थी। उसने थूकने के बजाय, उसे सहजता से महसूस किया, मानो वह इस ‘जंग’ के इनाम को चख रही हो।
आर्यन अब पूरी तरह निढाल हो चुका था। उसका शरीर ढीला पड़ गया और वह कांपते हुए घुटनों के बल फर्श पर बैठ गया, ठीक अंजलि के सामने।
दोनों अब शावर के नीचे आमने-सामने बैठे थे। आर्यन की आँखों में एक अजीब सी शर्म और संतुष्टि थी, जबकि अंजलि के चेहरे पर जीत की चमक थी। उसके चेहरे पर बिखरा हुआ वह सफ़ेद रस पानी की बूंदों के साथ मिलकर धीरे-धीरे उसकी गर्दन से होता हुआ उसके भारी स्तनों के बीच की घाटी में समा रहा था।
“देख लिया आर्यन? तूने तो अपनी माँ को पूरी तरह ‘भिगो’ दिया,” अंजलि ने मुस्कुराते हुए अपनी उंगली से अपने गाल पर लगा वह रस पोंछा और आर्यन की आँखों में देखते हुए उसे चख लिया।
आर्यन अभी उस धमाके के बाद होश संभालने की कोशिश ही कर रहा था कि अंजलि ने कुछ ऐसा किया जिसने उसे फिर से सुन्न कर दिया।
आर्यन का अंग अब भी तनाव में था, हालांकि ‘विस्फोट’ के बाद वह थोड़ा नरम पड़ने लगा था। अंजलि ने अपनी आँखों से उसे देखा, उसके चेहरे पर अब भी आर्यन के पौरुष की कुछ बूंदें चमक रही थीं। उसने एक गहरी सांस ली और फिर से आगे झुकी।
अंजलि ने बिना किसी हिचकिचाहट के आर्यन के उस अंग को फिर से अपने मुँह के गर्म घेरे में ले लिया। आर्यन की आँखें फटी की फटी रह गईं। “माँ… ये… ये क्या कर रही हैं आप? सब तो खत्म हो गया…” उसने लड़खड़ाते हुए कहा। लेकिन अंजलि ने जवाब देने के बजाय अपनी जुबान का इस्तेमाल शुरू किया।
वह जानती थी कि नली के भीतर अभी भी कुछ ‘अमृत’ बाकी है। उसने अपने होंठों से एक मज़बूत पकड़ बनाई और उसे बिल्कुल जड़ से ऊपर की ओर चूसना शुरू किया। उसकी जुबान उस नली के मुहाने पर गोल-गोल घूम रही थी, जिससे आर्यन के शरीर के भीतर एक मीठी सी टीस उठी। अंजलि ने तब तक नहीं छोड़ा जब तक उसने आर्यन के अंग को पूरी तरह साफ़ और सूखा नहीं कर दिया।
अंजलि ने वह सारा रस, जो नली के भीतर बचा था, अपनी जुबान पर लिया और उसे महसूस करते हुए अंदर उतार लिया। उसके लिए यह केवल गंदगी साफ़ करना नहीं था, बल्कि यह उस मिलन की पूर्णता थी। उसने अपना मुँह हटाया और एक विजयी मुस्कान के साथ आर्यन की ओर देखा।
आर्यन पूरी तरह से निशब्द था। उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसकी माँ इस हद तक उसे अपनाएगी। उसे लगा कि वह दुनिया का सबसे खुशनसीब मर्द है, जिसे एक ऐसी औरत मिली है जो उसे न केवल सुख देना जानती है, बल्कि उसके वजूद की एक-एक बूंद की कद्र करती है।
शावर का पानी अब उनके शरीरों से उस सफेदी को धोकर फर्श पर बहा चुका था। अंजलि उठी और आर्यन का हाथ पकड़कर उसे खड़ा किया।
“अब मेरा बेटा पूरी तरह साफ़ है,” अंजलि ने उसके गाल पर अपनी गीली हथेली फेरते हुए कहा। “चल, अब बाहर चलते हैं। अभी तो मैंने तुझे सिर्फ अपनी ‘सेवा’ दिखाई है… असली खेल तो तब शुरू होगा जब तू मुझे अपनी बाहों में भरेगा।”