जब आर्यन की आँखें खुलीं, तो कमरे की खिड़कियों से छनकर आती तेज़ धूप बता रही थी कि दिन काफी चढ़ चुका है। उसने घड़ी की ओर देखा—सुबह के 11 बज रहे थे। बगल का बिस्तर खाली था, लेकिन चादरों पर अभी भी अंजलि के बदन की वो भीनी-भीनी खुशबू और रात के उस तूफ़ान की सिलवटें मौजूद थीं।
आर्यन अंगड़ाई लेते हुए उठा और सिर्फ अपनी सफेद अंडरवियर में ही रसोई की तरफ बढ़ा। वहाँ का नज़ारा देखते ही उसकी नींद पूरी तरह काफूर हो गई।
अंजलि रसोई में चाय बना रही थी। उसने रात वाली ही हल्की नाइटी पहनी हुई थी, लेकिन सुबह की जल्दबाज़ी या शायद एक नई बेबाकी के कारण उसने ब्रा नहीं पहनी थी।
नाइटी के पतले कपड़े के नीचे से अंजलि के वे विशाल और भारी उभार अपनी पूरी आज़ादी के साथ लहरा रहे थे। जब वह चाय के लिए अदरक कूट रही थी या कप निकाल रही थी, तो उसके स्तनों की हलचल नाइटी के ऊपर से साफ दिखाई दे रही थी। बिना ब्रा के वे उभार थोड़े नीचे की ओर झुके हुए और भी ज़्यादा प्राकृतिक और आकर्षक लग रहे थे।
अंजलि के बिखरे हुए बाल और सुबह की वो ‘मेकअप रहित’ खूबसूरती आर्यन को दीवाना बना रही थी। नाइटी के कपड़े पर उभरे हुए उसके निप्पल के निशान आर्यन को याद दिला रहे थे कि रात को इन्हीं शिखरों पर उसने अपनी जुबान का जादू चलाया था।
आर्यन चुपचाप रसोई के दरवाजे पर खड़ा होकर अपनी माँ के उस मदहोश कर देने वाले रूप को निहारने लगा। धूप की रोशनी जब अंजलि के बदन पर पड़ रही थी, तो उसका गोरा रंग और भी ज़्यादा दमक रहा था।
अंजलि को जैसे ही आर्यन की मौजूदगी का अहसास हुआ, वह पीछे मुड़ी और एक प्यारी सी मुस्कान के साथ बोली, “सो कर उठ गया मेरा बच्चा? देख 11 बज गए हैं, आज तो सूरज ने भी हमारा इंतज़ार किया।”
जब वह बोली, तो उसके सीने में होने वाले कंपन ने उन उभारों को फिर से हिला दिया, जिससे आर्यन की नज़रें एक पल के लिए वहीं जम गईं। अंजलि ने आर्यन की नज़रों का पीछा किया और समझ गई कि उसका बेटा क्या देख रहा है, पर आज उसने न तो दुपट्टा ओढ़ा और न ही खुद को ढका।
रसोई की ताजी बनी अदरक वाली चाय की खुशबू पूरे घर में महक रही थी। अंजलि दो कप चाय लेकर डाइनिंग टेबल पर आई और आर्यन के सामने बैठ गई। बिना ब्रा के उसकी नाइटी के भीतर हिलते वे मखमली उभार और चेहरे पर रात की तृप्ति की वह चमक, सुबह की धूप में अंजलि को किसी परी जैसा दिखा रही थी।
आर्यन चाय का कप हाथ में लेकर एक घूँट भरता है और फिर अपनी माँ की आँखों में झांकता है। उसकी आँखों में अब वह पुराना संकोच नहीं, बल्कि एक गहरा सम्मान और ‘मर्दानी चाहत’ थी।
“माँ…” आर्यन ने बहुत ही धीमे और गंभीर स्वर में कहा। “कल रात के लिए… और उन सब चीज़ों के लिए जो आपने मुझे सिखाईं, मैं आपको बस Thank You बोलना चाहता हूँ। मुझे नहीं पता था कि एक औरत को महसूस करना और उसे सुख देना इतनी बड़ी इबादत हो सकती है।”
आर्यन ने आगे कहा, “आपने मुझे जो ज्ञान दिया, चाहे वो उंगलियों का जादू हो या वो ‘ओरल’ का अहसास… उसने मुझे अंदर से बदल दिया है। मुझे खुद पर पहले कभी इतना गर्व महसूस नहीं हुआ जितना आज हो रहा है। आपने मुझे सिर्फ अपना बेटा नहीं रहने दिया, मुझे एक ‘मर्द’ बना दिया।”
अंजलि ने चाय का कप मेज पर रखा और आर्यन का हाथ अपने हाथों में लेकर सहलाने लगी। “शुक्रिया की ज़रूरत नहीं है मेरे बच्चे,” वह मुस्कुराते हुए बोली। “एक गुरु को सबसे बड़ी गुरुदक्षिणा तब मिलती है जब उसका शिष्य पूरी निपुणता से उसे संतुष्ट कर दे। और कल रात… तूने मुझे सिर्फ संतुष्ट नहीं किया, तूने मुझे फिर से ज़िंदा कर दिया।”
अंजलि ने झुककर मेज पर अपना हाथ आगे बढ़ाया, जिससे उसके बिना ब्रा वाले स्तन मेज के किनारे से हल्के से दब गए और उनका उभार नाइटी के गले से झांकने लगा। “कल रात जो तूने सीखा, वो तो बस शुरुआत थी आर्यन। अभी तो तुझे इस शरीर के और भी कई राज़ जानने हैं।”
आर्यन चाय पीते हुए अपनी माँ के उस उभरते हुए बदन को देख रहा था। 11 बजे की यह चाय सिर्फ प्यास नहीं बुझा रही थी, बल्कि उस नई आग को और हवा दे रही थी जो अब उनके बीच कभी नहीं बुझने वाली थी।
चाय की उन नशीली चुस्कियों और बीती रात की यादों के खुमार के बाद, दोनों अब वापस अपनी दिनचर्या में आने की कोशिश कर रहे थे, हालांकि हवा में अब भी वो ‘अपनापन’ और कामुकता घुली हुई थी।
आर्यन ने चाय खत्म की और तैयार होकर मार्केट जाने के लिए निकलने लगा। उसने अंजलि के गाल पर एक छोटा सा प्यार भरा ‘किस’ किया, जो अब उनके बीच एक सहज क्रिया बन चुकी थी।
“माँ, मैं बस एक घंटे में घर का सारा सामान लेकर वापस आता हूँ,” आर्यन ने कहा। अंजलि ने मुस्कुराते हुए उसे विदा किया।
आर्यन जब मार्केट पहुँचा, तो उसके चलने के अंदाज़ में एक अलग ही आत्मविश्वास था। कल रात के उस ‘मर्दानी अनुभव’ ने उसे अंदर से बदल दिया था। भीड़भाड़ के बीच भी उसके दिमाग में अपनी माँ का वो बिना ब्रा वाला रूप और रसोई में चाय पीते वक्त उनका वो झुकाव बार-बार घूम रहा था। वह जल्दी-जल्दी सामान खरीद रहा था ताकि वापस घर पहुँच सके।
इधर घर पर, अंजलि ने घर के बचे हुए काम निपटाने शुरू किए। उसने अभी भी ब्रा नहीं पहनी थी, और घर में अकेली होने के कारण उसने अपनी नाइटी के ऊपर के एक-दो बटन भी खोल दिए थे ताकि उसे काम करते वक्त हवा लगती रहे।
झाड़ू-पोछा करते और बिस्तर ठीक करते वक्त अंजलि की नज़र उन सिलवटों पर गई जहाँ रात को आर्यन के साथ उसने वो ‘स्वर्ग’ महसूस किया था। वह मुस्कुरा दी और अपने आप ही उसके हाथ अपनी जाँघों के उस हिस्से पर चले गए जहाँ आर्यन की जुबान का जादू चला था। उसके शरीर में एक मीठी सी सिहरन दौड़ गई।
अंजलि ने रसोई समेटी और फिर दोपहर के खाने की तैयारी करने लगी। वह बार-बार दरवाजे की तरफ देखती, जैसे उसे उस ‘7 इंची गबरू’ के वापस आने का बेसब्री से इंतज़ार हो। घर का सन्नाटा उसे अब काट नहीं रहा था, बल्कि उसे उस आने वाले तूफ़ान की याद दिला रहा था जो आर्यन के वापस आते ही फिर से शुरू हो सकता था।
आर्यन जब मार्केट से लौटा, तो उसके हाथों में सामान के थैले थे, लेकिन उसके दिमाग में सिर्फ एक ही ख्याल घूम रहा था। जैसे ही उसने घर में कदम रखा, उसे रसोई से मसालों की खुशबू और साथ ही अंजलि के बदन की वो चिर-परिचित महक महसूस हुई।
अंजलि अभी भी उसी हाल में थी—नाइटी के बटन खुले हुए और बिना ब्रा के उसके भारी उभार हर हरकत के साथ आज़ादी से हिल रहे थे।
आर्यन ने सामान मेज पर रखा। अंजलि उसकी तरफ मुड़ी और मुस्कुराते हुए बोली, “आ गया मेरा बच्चा? ला, सामान मुझे दे दे।”
लेकिन आर्यन वहीं खड़ा रहा। उसके चेहरे पर एक अजीब सी हिचकिचाहट थी, हाथ थोड़े कांप रहे थे और वह अपनी माँ की आँखों में सीधे देखने से कतरा रहा था। उसने एक गहरी सांस ली और रुक-रुक कर बोला:
“माँ… वो… बाहर बहुत गर्मी और धूल है। मैं… मैं सोच रहा था कि क्या… क्या हम दोनों एक साथ नहा सकते हैं? मतलब… क्या आप मेरे साथ शावर के नीचे चलेंगी?”
अंजलि यह सुनकर एक पल के लिए ठिठक गई। उसने देखा कि आर्यन कैसे एक छोटे बच्चे की तरह शर्मा रहा है, लेकिन उसकी आँखों में वही ‘मर्दानी प्यास’ थी जो कल रात उसने देखी थी। अंजलि के होंठों पर एक गहरी और मादक मुस्कान फैल गई।
अंजलि ने सामान वहीं छोड़ दिया और धीरे-धीरे चलकर आर्यन के बिल्कुल करीब आ गई। उसने आर्यन की शर्ट के कॉलर को ठीक किया और अपनी नशीली आवाज़ में फुसफुसाया, “इतनी हिचकिचाहट क्यों आर्यन? अब तो इस शरीर पर तेरा पूरा हक है। कल रात तूने मुझे अंदर से साफ किया था, आज बाहर से भी कर दे।”
अंजलि ने आर्यन का हाथ पकड़ा और उसे बाथरूम की ओर ले जाने लगी। आर्यन को महसूस हुआ कि उसकी माँ की हथेलियाँ कितनी गर्म हैं। चलते वक्त अंजलि की नाइटी के खुले हुए गले से उसके नग्न और विशाल स्तनों की झलक साफ़ दिख रही थी, जिसने आर्यन के भीतर फिर से वही आग लगा दी।
बाथरूम का दरवाज़ा खुला और शावर की हल्की आवाज़ गूँजने लगी। आर्यन को यकीन नहीं हो रहा था कि वह अपनी सुंदर और मदहोश कर देने वाली माँ के साथ दिन के उजाले में नहाने जा रहा है।
बाथरूम का दरवाजा बंद होते ही बाहर की दुनिया पीछे छूट गई। शावर से गिरती पानी की नन्हीं बूंदों की आवाज़ उस छोटे से कमरे में गूँज रही थी। अब कोई पर्दा नहीं था, सिर्फ दो जिस्म थे और उनके बीच उमड़ता हुआ बेपनाह प्यार और उत्तेजना।
अंजलि और आर्यन शावर के ठीक नीचे आमने-सामने खड़े थे। अंजलि की नाइटी पानी की फुहारों से पहले ही भीगकर उसके बदन से चिपक गई थी, जिससे उसके जिस्म के उतार-चढ़ाव और भी साफ़ दिखने लगे थे।
अंजलि ने बिना किसी झिझक के अपना हाथ आर्यन की टी-शर्ट के निचले हिस्से पर रखा। “उतार इसे आर्यन… आज हमें एक-दूसरे को पूरी तरह महसूस करना है,” उसने आदेशात्मक लेकिन प्यार भरी आवाज़ में कहा। आर्यन ने अपनी टी-शर्ट और जींस उतार दी, और अब वह सिर्फ अपनी सफेद अंडरवियर में खड़ा था। उसका ७ इंच का अंग उस पतले कपड़े के भीतर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा था, जिसे देखकर अंजलि की आँखों में चमक आ गई।
अब आर्यन की बारी थी। उसने कांपते हाथों से अंजलि की नाइटी के कंधों को पकड़ा। जैसे-जैसे वह नाइटी को नीचे सरका रहा था, अंजलि का गोरा और दमकता हुआ बदन धूप और पानी की रोशनी में चमकने लगा। नाइटी फर्श पर गिर गई। अंजलि अब आर्यन के सामने सिर्फ अपनी काली लेस वाली पैंटी में खड़ी थी।
चूँकि अंजलि ने ब्रा नहीं पहनी थी, इसलिए उसके विशाल और भारी स्तन अब पूरी तरह आज़ाद थे। पानी की बूंदें उन गुलाबी शिखरों पर गिरकर नीचे की ओर फिसल रही थीं। आर्यन की नज़रें उन उभारों पर जम गई थीं, जो हर सांस के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे। अंजलि का पेट, उसकी पतली कमर और काली पैंटी के ऊपर का वो मांसल हिस्सा किसी पेंटिंग जैसा लग रहा था।
शावर का पानी अब उनके शरीरों को पूरी तरह भिगो चुका था। आर्यन ने अपनी माँ की कमर में हाथ डाला और उसे अपनी ओर खींच लिया। अंजलि के नग्न और ठंडे स्तन जब आर्यन के गर्म और चौड़े सीने से टकराए, तो दोनों के मुँह से एक साथ ‘आह’ निकल गई।
“माँ… आप दिन की रोशनी में और भी ज़्यादा खूबसूरत लगती हैं,” आर्यन ने मदहोश होकर कहा।
अंजलि ने अपने गीले बाल पीछे झटके और आर्यन की गर्दन के चारों ओर अपनी बाहें डाल दीं। “और तू पहले से कहीं ज़्यादा मर्द लग रहा है आर्यन। देख, तेरी इस छुअन से मेरी क्या हालत हो रही है…” उसने आर्यन का हाथ अपनी पैंटी के गीले इलास्टिक पर रख दिया।
बाथरूम की हवा अब साबुन की भीनी-भीनी खुशबू और शावर की भाप से भर चुकी थी। पानी की गिरती हुई धार के नीचे आर्यन और अंजलि एक-दूसरे के बेहद करीब थे। अंजलि ने पास रखे शॉवर जेल की बोतल उठाई और उसकी कुछ बूंदें अपनी हथेलियों पर लेकर उन्हें आपस में रगड़ा, जिससे ढेर सारा सफेद और मखमली झाग बन गया।
अंजलि ने मुस्कुराते हुए अपनी झाग वाली हथेलियाँ आर्यन के चौड़े सीने पर रख दीं। वह धीरे-धीरे अपनी उंगलियों को उसके सीने की मांसपेशियों पर घुमाने लगी।
“देख आर्यन, साबुन सिर्फ सफाई के लिए नहीं होता… यह बदन को और भी ज़्यादा संवेदनशील बना देता है,” उसने फुसफुसाते हुए कहा। झाग के बहाने वह आर्यन के पूरे धड़ को सहला रही थी। जब उसका हाथ आर्यन की अंडरवियर के इलास्टिक के पास से गुज़रा, तो आर्यन के बदन में एक सिहरन दौड़ गई।
अब आर्यन ने साबुन लिया। उसके हाथ कांप रहे थे, लेकिन इरादे मज़बूत थे। उसने अपनी झाग भरी हथेलियाँ अंजलि के नग्न और भारी स्तनों पर रखीं। जैसे ही उसने उन विशाल उभारों को सहलाना शुरू किया, साबुन की फिसलन की वजह से उसका हाथ उन पर मखमली अंदाज़ में फिसलने लगा।
आर्यन ने बड़े ही प्यार से उन गोलों के चारों ओर झाग का घेरा बनाया। अंजलि ने अपनी आँखें मूंद लीं और अपना सिर पीछे की ओर झुका लिया। “आह… आर्यन… बिल्कुल ऐसे ही… बहुत सुकून मिल रहा है,” उसने मदहोश होकर कहा। शावर का पानी उस झाग को धीरे-धीरे नीचे की ओर बहा रहा था, जो अंजलि की पतली कमर से होता हुआ उसकी काली पैंटी के किनारों में समा रहा था।
आर्यन अब और भी बेबाक हो गया। उसने अंजलि को पीछे घूमने का इशारा किया और उसकी चिकनी पीठ पर साबुन मलने लगा। अंजलि की रीढ़ की हड्डी पर जब आर्यन की झाग भरी उंगलियाँ फिसलीं, तो वह उत्तेजना से कांप उठी।
अंजलि फिर से आर्यन की ओर मुड़ी। अब वे दोनों पूरी तरह साबुन की सफेद झाग में लिपटे हुए थे। पानी और साबुन ने उनके शरीरों को इतना फिसलन भरा बना दिया था कि जब वे एक-दूसरे से सटे, तो उनका मांस एक-दूसरे पर मखमल की तरह फिसल रहा था। अंजलि के भारी स्तन आर्यन के सीने पर इधर-उधर फिसल रहे थे, जिससे एक अजीब सा कामुक घर्षण पैदा हो रहा था।
अंजलि ने आर्यन की आँखों में देखा और उसके गले लग गई। “आज की यह दोपहर… कल रात से भी ज़्यादा हसीन लग रही है आर्यन। तूने तो अपनी माँ को पानी-पानी कर दिया।”
बाथरूम की दीवारों पर गिरती पानी की बौछारें और साबुन की मखमली झाग ने माहौल को किसी रोमांटिक फिल्म के सेट जैसा बना दिया था। कल रात की वो भारी उत्तेजना अब एक प्यारी सी मस्ती और शरारत में बदल चुकी थी। दोनों एक-दूसरे के साथ बच्चों की तरह खेल रहे थे, लेकिन उस खेल में भी एक गहरा कामुक खिंचाव था।
आर्यन ने ढेर सारी झाग अपने हाथ में ली और शरारत से अंजलि की नाक पर लगा दी। अंजलि ने अपनी आँखें सिकोड़ीं और खिलखिलाकर हंस पड़ी।
“अच्छा! तो अब गुरु पर ही वार?” अंजलि ने हंसते हुए चुटकी ली और शावर के नीचे से हटकर अपने हाथ में साबुन का झाग भरा और आर्यन के चेहरे पर मल दिया। आर्यन हंसते हुए पीछे हटा, लेकिन फर्श की फिसलन की वजह से उसका पैर डगमगाया और उसने सहारा लेने के लिए अंजलि की कमर को कसकर पकड़ लिया।
दोनों एक-दूसरे से पूरी तरह चिपक गए। आर्यन ने अंजलि के कान के पास जाकर फुसफुसाया, “माँ, आप इस सफेद झाग में बिल्कुल किसी ‘मिल्क शेक’ जैसी लग रही हो… मन कर रहा है अभी पी जाऊं।”
अंजलि ने शरारत से अपनी भौहें चढ़ाईं और आर्यन के गाल को हल्के से काटते हुए बोली, “मिल्क शेक? बेटा, ये शेक थोड़ा महंगा पड़ेगा। और वैसे भी, रात को तो तूने काफी ‘रसपान’ किया है, अभी भी प्यास नहीं बुझी क्या?”
आर्यन अंजलि की इस बेबाकी पर झेंप गया, लेकिन उसने भी हार नहीं मानी। उसने अपनी झाग भरी उंगलियों से अंजलि की Navel के चारों ओर गोल-गोल चक्कर बनाना शुरू किया।
“माँ, यहाँ बहुत साबुन लगा है, इसे साफ़ करना पड़ेगा,” आर्यन ने शरारत से कहा। अंजलि को गुदगुदी होने लगी और वह मचलने लगी। “आह! आर्यन… रुक… वहां गुदगुदी होती है… हाहा… बदतमीज़ कहीं के! अपनी माँ को तंग करना सीख गया है?”
हँसी-मज़ाक के बीच आर्यन ने अंजलि के भीगे बालों को कान के पीछे करते हुए पूछा, “सच बताना माँ, क्या पापा ने कभी आपके साथ ऐसे मस्ती की है?” अंजलि का चेहरा थोड़ा धीमा पड़ा, फिर उसने मुस्कुराकर आर्यन की आँखों में देखा, “नहीं आर्यन… तेरे पापा तो बस अपनी प्यास बुझाना जानते थे। ये जो ‘सुकून’ और ‘मस्ती’ तू मुझे दे रहा है, ये मेरे लिए बिल्कुल नया और अनमोल है।”
बाथरूम की मस्ती अब अपने शबाब पर थी। शावर का पानी उन दोनों के झाग से भरे शरीरों पर गिरकर फर्श पर सफेद समंदर बना रहा था। आर्यन अब काफी खुल चुका था, उसने अंजलि की कमर में हाथ डालकर उसे अपने थोड़ा और करीब खींच लिया और शरारत भरी नज़रों से उसे ऊपर से नीचे तक देखने लगा।
आर्यन ने मुस्कुराते हुए अंजलि के गीले गालों को थपथपाया और बोला, “पता है माँ, कॉलेज में सब लड़के अपनी-अपनी हॉट प्रोफेसर्स के सपने देखते हैं। हमारी एक यंग प्रोफेसर हैं, मिस शर्मा… पूरे कॉलेज के लड़के उनके पीछे पागल रहते हैं।”
अंजलि ने बनावटी गुस्से से अपनी भौहें सिकोड़ीं और आर्यन के सीने पर अपनी उंगलियां घुमाते हुए पूछा, “अच्छा? तो क्या मेरा बेटा भी उन मिस शर्मा के सपने देखता है? कैसी हैं वो… मुझसे भी ज़्यादा सुंदर?”
आर्यन ज़ोर से हँस पड़ा और अंजलि को और कसकर भींच लिया, जिससे अंजलि के बिना ब्रा वाले नरम और भारी स्तन आर्यन के सीने पर पूरी तरह पिचक गए।
“अरे कहाँ माँ! वो तो उनके सामने पानी कम चाय हैं,” आर्यन ने मज़ाक उड़ाते हुए कहा। “वो साड़ी पहनकर आती हैं तो लड़के समझते हैं कि वो बहुत कयामत हैं, लेकिन आज जब मैं आपको इस भीगी हुई हालत में देख रहा हूँ… तो मुझे लग रहा है कि मेरे कॉलेज की सबसे हॉट लड़की भी आपकी खूबसूरती के १०% भी नहीं है। आपकी ये जो ‘फिगर’ है न, ये किसी भी प्रोफेसर की छुट्टी कर दे।”
अंजलि ने शरारत से आर्यन के कान को हल्का सा मरोड़ा और चहकते हुए बोली, “बड़ा पारखी हो गया है तू तो! अपनी प्रोफेसर से अपनी माँ की तुलना कर रहा है? वैसे… क्या तेरी वो मिस शर्मा इतनी ‘मजबूत’ और ‘रसीली’ हैं जितनी मैं हूँ?” यह कहते हुए अंजलि ने जानबूझकर अपनी कमर को आर्यन के उस ७ इंची उभार से रगड़ा जो अंडरवियर में फन फैलाए खड़ा था।
आर्यन की सांसें अटक गईं। “माँ… उनके पास तो आपके जैसा आधा हुस्न भी नहीं है। वो तो सिर्फ मेकअप की दुकान हैं, और आप… आप तो इस सादे भीगे बदन और साबुन की झाग में ही किसी अप्सरा जैसी लग रही हो। अगर वो आपको देख लें, तो कल से कॉलेज आना छोड़ देंगी।”
अंजलि आर्यन की इन बातों से अंदर ही अंदर फूलकर कुप्पा हो रही थी। उसे अपनी खूबसूरती पर इतना गर्व पहले कभी नहीं हुआ था। उसने आर्यन की गर्दन पर अपनी बाहें डाल दीं और फुसफुसाते हुए बोली:
“तो फिर आज अपनी इस ‘हॉट प्रोफेसर’ को ही अपना पूरा सबक सुना दे आर्यन। देखूँ तो सही, कल रात की क्लास का तुझ पर कितना असर हुआ है।”
आर्यन की रगों में अब जवान खून का उबाल और अपनी ‘गुरु’ से मिली प्रशंसा का नशा दौड़ रहा था। बातों-बातों में अपनी माँ की तुलना कॉलेज की प्रोफेसर से करने के बाद, उसके भीतर का पुरुष अब पूरी तरह जाग चुका था। अब वह वह शर्मीला बेटा नहीं था, बल्कि एक मर्द बन चुका था।
शावर का पानी उनकी पीठ पर गिर रहा था, तभी आर्यन ने अचानक अपनी पकड़ मज़बूत की। उसने अपना एक हाथ अंजलि की पतली कमर पर रखा और दूसरे हाथ की उंगलियों को अंजलि के गीले, रेशमी बालों में पीछे की ओर फँसा दिया।
आर्यन ने बहुत ही अधिकार के साथ अंजलि के सिर को हल्का सा पीछे की ओर खींचा, जिससे अंजलि की गर्दन पूरी तरह तन गई और उसके होंठ खुद-ब-खुद थोड़े खुल गए। अंजलि इस अचानक आए बदलाव से थोड़ी हैरान हुई, लेकिन आर्यन की आँखों में छाए उस ‘हावी होने वाले’ जुनून को देखकर वह अंदर तक पिघल गई।
आर्यन ने बिना एक पल गँवाए अपने होंठ अंजलि के होंठों पर दे मारे। यह कोई साधारण चुंबन नहीं था; यह एक गहरा, गीला और जुनूनी फ्रेंच किस था। आर्यन की जुबान अंजलि के मुँह के भीतर किसी विजेता की तरह प्रवेश कर गई। वह अंजलि की जुबान को अपने अधिकार में ले रहा था, उसे चूस रहा था और उसे अपनी ताकत का अहसास करा रहा था।
अंजलि के मुँह से एक दबी हुई सिसकारी निकली। उसे आर्यन का यह ‘डोमिनेंट’ रूप पागलों की तरह पसंद आ रहा था। उसने अपने हाथ आर्यन के कंधों पर कस दिए। आर्यन के बालों को पीछे खींचने की वजह से अंजलि के बिना ब्रा वाले भारी स्तन सीधे आर्यन के सीने से बुरी तरह पिचक गए थे, जिससे उनके बीच की गर्मी और भी बढ़ गई थी।
पानी की बौछारें उनके जुड़ते हुए होंठों पर गिर रही थीं, लेकिन उन्हें होश नहीं था। आर्यन अब अंजलि के निचले होंठ को अपने दाँतों से हल्का सा काट रहा था, जो अंजलि को दर्द के साथ एक मीठा सुकून दे रहा था। वह समझ गई थी कि उसका ‘शिष्य’ अब उसे अपनी उंगलियों पर नचाने के लिए तैयार है।
आर्यन ने किस तोड़ते हुए अंजलि के कान के पास जाकर भारी आवाज़ में कहा, “आज कोई प्रोफेसर याद नहीं आएगी माँ… आज सिर्फ आप हो और मेरा ये पागलपन।”
बाथरूम की दीवारों पर गिरती पानी की आवाज़ अब आर्यन के बढ़ते जुनून के आगे फीकी पड़ रही थी। आर्यन ने जिस तरह अंजलि के बालों को पीछे खींचकर उसे अपनी मर्दानगी का अहसास कराया था, उसने अंजलि के भीतर की औरत को पूरी तरह बेबस कर दिया था।
आर्यन ने एक बार फिर अंजलि के होंठों पर अपना कब्ज़ा जमाया। इस बार का Kiss और भी आक्रामक और गहरा था। अंजलि के मुँह से निकलने वाली सिसकारियों को आर्यन ने अपने मुँह में ही सोख लिया।
अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए, आर्यन ने अपने एक हाथ से अंजलि की दोनों कलाइयों को ऊपर की ओर ले जाकर एक साथ दबोच लिया। अंजलि अब पूरी तरह निहत्थी थी; उसके हाथ ऊपर बंधे हुए थे और उसका सीना आर्यन के सामने पूरी तरह उभर कर आ गया था। बिना ब्रा के उसके भारी स्तन शावर के पानी में भीगकर नीचे-ऊपर हो रहे थे।
अब आर्यन ने अपना दूसरा हाथ धीरे-धीरे नीचे सरकाया। उसने अंजलि की गीली और चिपकी हुई कमर को सहलाते हुए अपना हाथ उसकी काली लेस वाली पैंटी के इलास्टिक के भीतर डाल दिया। जैसे ही उसकी उंगलियाँ उस मखमली और रेशमी नमी से टकराईं, अंजलि का पूरा शरीर एक बिजली के झटके की तरह कांप उठा।
आर्यन की उंगलियाँ अब अंजलि के उस सबसे निजी और रसीले हिस्से को टटोल रही थीं जहाँ कल रात उसने अपनी जुबान से जादू चलाया था। पैंटी के भीतर का वह इलाका पूरी तरह गर्म और गीला था। आर्यन ने अपनी उंगलियों को उस गुलाबी दरार के बीच गहराई से सरकाया, जिससे अंजलि के पैरों के अंगूठे मुड़ गए और उसने आर्यन के मुँह के भीतर ही एक लंबी कराह भरी।
अंजलि ने अपने ऊपर बंधे हाथों से छूटने की कोशिश नहीं की, बल्कि उसने खुद को आर्यन के उस Dominance के हवाले कर दिया। वह अपनी कमर को आगे-पीछे कर रही थी ताकि आर्यन की उंगलियाँ और भी गहराई तक जा सकें।
आर्यन ने किस तोड़ते हुए अंजलि की आँखों में देखा—उसकी आँखों में अब एक ‘शिकारी’ की चमक थी। उसने फुसफुसाते हुए कहा, “माँ… ये पैंटी अब आपके और मेरे बीच बहुत बड़ी बाधा बन रही है। क्या मैं इसे हमेशा के लिए हटा दूँ?”
अंजलि ने हाँफते हुए अपनी गर्दन पीछे झुका दी और बस इतना ही कह पाई, “जो करना है कर आर्यन… आज मैं सिर्फ तेरी हूँ… मुझे पूरी तरह अपना बना ले।”
आर्यन के भीतर का ‘डोमिनेंट’ मर्द अब एक चतुर खिलाड़ी बन चुका था। उसने अंजलि की आँखों में वो बेतहाशा तड़प देख ली थी, जो उसे पूरी तरह टूटने पर मजबूर कर रही थी। अंजलि को लगा था कि अब उसकी पैंटी उतर जाएगी और उसे वो अंतिम सुख मिलेगा, लेकिन आर्यन ने ऐन मौके पर अपनी चाल बदल दी।
आर्यन ने एक शरारती और गहरी मुस्कान के साथ अपना हाथ पैंटी के भीतर से बाहर निकाल लिया। अंजलि ने अपनी आँखें खोलीं, उसकी नज़रों में एक सवालिया निशान और अधूरी प्यास थी। इससे पहले कि वह कुछ समझ पाती, आर्यन ने अपना हाथ उसकी गीली काली पैंटी के ऊपर रख दिया।
आर्यन अब अपनी हथेली से पैंटी के उस रेशमी कपड़े को अंजलि के काम-केंद्र पर धीरे-धीरे रगड़ने लगा। गीला कपड़ा और अंदर की गर्माहट मिलकर एक ऐसा घर्षण पैदा कर रहे थे जो अंजलि को पागल कर रहा था। वह चाहती थी कि आर्यन का सीधा स्पर्श मिले, लेकिन आर्यन उसे सिर्फ उस कपड़े के जरिए महसूस करा रहा था।
अंजलि की कलाइयां अभी भी आर्यन के एक हाथ की मज़बूत पकड़ में थीं। उसने मचलते हुए अपनी कमर को आर्यन के हाथ पर दबाया। “आर्यन… उफ़्फ़… ये क्या कर रहा है? अंदर… अंदर हाथ डाल न… मुझे वो चाहिए…” वह लगभग गिड़गिड़ाने लगी।
आर्यन ने उसके कान के पास झुककर अपनी गर्म साँसें छोड़ीं और भारी आवाज़ में कहा, “इतनी जल्दी क्या है माँ? अभी तो दोपहर शुरू हुई है। मैं चाहता हूँ कि आप इस तड़प को महसूस करें। जब प्यास चरम पर होगी, तब पानी पिलाने का मज़ा ही कुछ और होगा।”
आर्यन ने अपनी उंगलियों की रफ़्तार थोड़ी और बढ़ा दी, लेकिन रहा वह पैंटी के ऊपर ही। पतले और भीगे हुए लेस वाले कपड़े की रगड़ अंजलि के उस नाज़ुक हिस्से को बुरी तरह उत्तेजित कर रही थी, लेकिन उसे वो गहराई नहीं मिल रही थी जिसकी उसे तलाश थी। अंजलि के बिना ब्रा वाले स्तन तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रहे थे, मानो वे भी इस ‘अन्याय’ का विरोध कर रहे हों।
शावर का पानी उनकी पीठ पर गिरकर नीचे बह रहा था, और अंजलि के मुँह से अब सिसकारियों के बजाय लंबी आहें निकल रही थीं। वह अपनी जाँघों को आपस में भींच रही थी, मानो उस अधूरे अहसास को ही पकड़ने की कोशिश कर रही हो।
बाथरूम का तापमान अब उबलने लगा था। आर्यन का डोमिनेंट रूप अंजलि के लिए किसी मीठे टॉर्चर की तरह था। अंजलि की कलाइयां अब भी आर्यन की फौलादी पकड़ में उसके सिर के ऊपर बंधे हुए थे, जिससे उसका पूरा बदन आगे की ओर तन गया था।
अंजलि की बेबसी ही उसकी सबसे बड़ी उत्तेजना बन गई थी। शावर का गिरता पानी उसके नग्न स्तनों पर गिरकर आर्यन के चेहरे को भिगो रहा था।
आर्यन ने अपनी गर्दन झुकाई और एक भूखे शिकारी की तरह अंजलि के एक विशाल और भारी स्तन को अपने मुँह में भर लिया। जैसे ही उसने उस गर्म और मखमली मांस को अपनी ज़ुबान और होंठों के घेरे में लिया, अंजलि के गले से एक तीखी सिसकारी निकली। आर्यन उसे सिर्फ चूस नहीं रहा था, बल्कि अपने दाँतों से उन गुलाबी शिखरों पर हल्का दबाव भी बना रहा था।
आर्यन का मुँह अंजलि के स्तनों के साथ खेल रहा था, और उसका दूसरा हाथ अभी भी उस काली गीली पैंटी के ऊपर जमा हुआ था। वह अपनी हथेली के दबाव से उस रेशमी कपड़े को अंजलि के सबसे संवेदनशील हिस्से पर ज़ोर-ज़ोर से रगड़ रहा था। पैंटी का गीला कपड़ा अंजलि की ‘काम-कली’ को छू तो रहा था, लेकिन उसे वो तृप्ति नहीं दे पा रहा था जिसकी उसे तड़प थी।
अंजलि का शरीर धनुष की तरह तन गया था। उसकी आँखों से पानी और पसीने की मिली-जुली बूंदें बह रही थीं। “आह… आर्यन… मर जाऊंगी मैं… उफ़्फ़! एक तरफ तू मुझे पी रहा है और दूसरी तरफ… आह… ये अधूरापन!” अंजलि अपनी कमर को बेतहाशा हिला रही थी, वह चाहती थी कि आर्यन का हाथ पैंटी फाड़कर अंदर चला जाए, पर आर्यन ने अपनी पकड़ और दबाव पैंटी के ऊपर ही बनाए रखा।
आर्यन अब दूसरे स्तन की ओर बढ़ा, उसे भी अपने मुँह के अंधेरे घेरे में लिया और अपनी ज़ुबान को गोल-गोल घुमाने लगा। अंजलि की सांसें अब किसी टूटी हुई लय की तरह चल रही थीं। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह आर्यन के मुँह के सुख पर ध्यान दे या नीचे हो रही उस ‘रेशमी रगड़’ की तड़प पर।
बाथरूम की दीवारें उनकी भारी साँसों और चप-चप की आवाजों से गूँज रही थीं। आर्यन ने अंजलि को पूरी तरह अपने नियंत्रण में कर लिया था—वह उसका बेटा भी था, उसका गुरु भी, और आज उसका सबसे क्रूर प्रेमी भी।
बाथरूम की दीवारों के बीच उमड़ती उस सघन कामुकता ने अंजलि के संयम के सारे बांध तोड़ दिए थे। आर्यन का एक हाथ उसकी कलाइयों को मज़बूती से जकड़े हुए था, उसका मुँह उसके भारी स्तनों का रसपान कर रहा था, और उसकी हथेली गीली काली पैंटी के ऊपर से जो दबाव बना रही थी, उसने अंजलि के भीतर एक ऐसा बवंडर पैदा कर दिया जिसे झेल पाना उसके बस में नहीं था।
अंजलि का पूरा शरीर धनुष की तरह तन गया था। वह जो ‘अधूरापन’ महसूस कर रही थी, वही उसकी उत्तेजना का सबसे बड़ा कारण बन गया। पैंटी के गीले कपड़े की रगड़ ने उसके संवेदनशील हिस्से में इतनी गर्मी पैदा कर दी थी कि उसे महसूस हो रहा था कि अब उसके भीतर से लावा फूटने वाला है।
अंजलि का सिर पीछे की ओर लुढ़क गया और उसकी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा। “आह… आर्यन… रुक मत… उफ़्फ़! मैं… मैं नहीं रोक पा रही… आह! मेरा शरीर… फट जाएगा… आर्यन!” उसकी आवाज़ अब सिसकारियों से बदलकर चीखों में तब्दील हो रही थी।
आर्यन ने जब महसूस किया कि उसकी माँ का शरीर बुरी तरह कांप रहा है, तो उसने अपने मुँह से स्तन को और ज़ोर से चूसा और नीचे पैंटी के ऊपर से अपनी हथेली की रगड़ को और भी तेज़ कर दिया। वह रेशमी कपड़ा अब अंजलि की त्वचा के साथ मिलकर एक ऐसा घर्षण पैदा कर रहा था जो उसे सीधे स्वर्ग के द्वार पर ले आया।
अचानक, अंजलि के गले से एक लंबी और रूहानी कराह निकली, “आह्ह्ह्ह… आर्यन!” उसका पूरा बदन एक तेज़ झटके के साथ ऐंठ गया। बिना किसी सीधे शारीरिक स्पर्श के, सिर्फ उस ‘तड़प’ और ‘रेशमी रगड़’ के जादू से अंजलि का बांध टूट गया। उसकी जाँघों के बीच से काम-रस का वह गर्म सैलाब फूटा जो पैंटी को पूरी तरह भिगोता हुआ फर्श पर बह रहे शावर के पानी में मिल गया।
अंजलि की पकड़ आर्यन के कंधों पर ढीली पड़ गई और उसका शरीर निढाल होकर आर्यन के सीने पर आ गिरा। उसकी सांसें इतनी तेज़ थीं मानो वह अभी-अभी कोई लंबी दौड़ दौड़कर आई हो। उसके पैरों की मज़बूती खत्म हो गई थी और वह पूरी तरह आर्यन की बाहों के सहारे खड़ी थी।
आर्यन ने अपनी पकड़ थोड़ी ढीली की और अपनी माँ के माथे को चूमा। अंजलि ने अपनी आधी खुली आँखों से उसे देखा, जिनमें एक अजीब सी शांति और समर्पण था। वह समझ गई थी कि आज उसके बेटे ने उसे उस तरीके से जीत लिया है जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी।