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आर्यन अभी भी उसी मदहोशी के आलम में था। उसकी आँखें बंद थीं और उसे ऐसा लग रहा था जैसे वह किसी गहरे, शांत समंदर में तैर रहा हो। वह ‘भारीपन’ जिसका बोझ वह पिछले दो दिनों से ढो रहा था, अब पूरी तरह से खत्म हो चुका था। शरीर इतना हल्का महसूस हो रहा था जैसे वह रुई का कोई फाहा हो।

जैसे ही आर्यन ने धीरे-धीरे अपनी आँखें खोलीं, उसका सुकून अचानक डर और घबराहट में बदल गया। उसने देखा कि उसका अपना पेट, अंजलि के मखमली हाथ और यहाँ तक कि उसकी माँ के खूबसूरत चेहरे पर भी उसके ‘वेग’ के सफेद निशान बिखरे हुए थे।

“ओह… माँ! आई एम सो सॉरी… यह… यह सब कितना गंदा हो गया,” आर्यन हकलाते हुए बोला, उसका चेहरा शर्म के मारे फिर से लाल हो गया। वह उठकर बैठने की कोशिश करने लगा ताकि उसे साफ कर सके, पर शर्मिंदगी उसे घेरे हुए थी।

अंजलि ने उसकी घबराहट देखी और एक बहुत ही सहज और शांत मुस्कान दी। उसने अपने गाल पर लगे उस गर्म अंश को अपनी उंगली से छुआ और आर्यन की आँखों में देखा। उसमें कोई गुस्सा या घिन नहीं थी, बल्कि एक अजीब सा अपनापन और गर्व था।

“डर मत आर्यन, यह गंदा नहीं है। यह तेरे बड़े होने की निशानी है,” अंजलि ने बहुत ही कोमलता से कहा। उसने अपना हाथ आगे बढ़ाकर आर्यन का गाल थपथपाया। “चलो, अब ऐसे लेटे रहने से काम नहीं चलेगा। मेरे साथ बाथरूम में चलो, वहाँ हम यह सब साफ़ करते हैं।”

अंजलि खड़ी हुई, उसकी काली रेशमी नायटी थोड़ी अस्त-व्यस्त थी। उसने आर्यन का हाथ थामा और उसे सहारा देकर खड़ा किया। आर्यन अभी भी थोड़ा डगमगा रहा था, उसका शरीर उस पहले अनुभव के बाद थोड़ा ढीला पड़ गया था।

दोनों धीरे-धीरे बाथरूम की ओर बढ़े। आर्यन केवल अपनी अंडरवियर में था (जो अब घुटनों तक थी) और अंजलि अपनी झीनी नायटी में। बाथरूम की दुधिया रोशनी में जब वे आईने के सामने खड़े हुए, तो आर्यन ने आईने में देखा—अंजलि के चेहरे पर उसकी ‘मर्दानगी’ के निशान चमक रहे थे।

अंजलि ने नल खोला और गुनगुना पानी एक छोटे तौलिये पर लिया। उसने बहुत ही प्यार से पहले आर्यन के पेट को साफ करना शुरू किया। “देख आर्यन, जैसे तू बचपन में मुझ पर निर्भर था, वैसे ही आज भी तुझे मेरी ज़रूरत है,” उसने मुस्कुराते हुए कहा।

आर्यन आईने में अपनी माँ के उस झुके हुए बदन और उन भारी उभारों को देख रहा था जो नायटी के खुले बटनों से साफ़ झलक रहे थे। बाथरूम की उस छोटी सी जगह में उनकी नजदीकी और भी बढ़ गई थी।

बाथरूम की सफेद टाइल्स और दुधिया रोशनी में अब कोई पर्दा बाकी नहीं रहने वाला था। कमरे की वह गर्मी अब बाथरूम की भाप में बदलने वाली थी। अंजलि ने जब आईने में खुद को और आर्यन को देखा, तो उसे एहसास हुआ कि यह ‘सफाई’ अब एक सामान्य धुलाई से कहीं आगे बढ़ चुकी है।

“आर्यन… देख हम दोनों कितने सन गए हैं,” अंजलि ने शरारती अंदाज़ में मुस्कुराते हुए कहा। “अब ऐसे तो सोया नहीं जाएगा। चलो, आज हम साथ में ही नहा लेते हैं, वैसे भी इतवार शुरू हो चुका है।”

अंजलि ने बिना किसी झिझक के आर्यन की अंडरवियर को नीचे सरकाया और उसे पूरी तरह से नग्न कर दिया। आर्यन ने एक ठंडी सांस ली; उसे अपनी माँ के सामने इस तरह खड़ा होना एक अजीब सा रोमांच दे रहा था। अब उसकी वह ७ इंच की मर्दानगी पूरी तरह आज़ाद थी।

तभी अंजलि ने आर्यन की आँखों में आँखें डालकर कहा, “अब तेरी बारी है आर्यन… मेरी ये नायटी तू उतारेगा।”

आर्यन के हाथ थोड़े कांपे, पर अब उसमें एक नया आत्मविश्वास था। उसने धीरे से नायटी के बचे हुए बटन खोले और उस काली रेशमी नायटी को अंजलि के गोरे कंधों से नीचे सरका दिया। वह कपड़ा मखमल की तरह फिसलकर फर्श पर गिर गया।

अब अंजलि आर्यन के सामने लगभग पूरी तरह नग्न थी। उसने सिर्फ एक काली ब्लॉक पैंटी पहन रखी थी। उसके विशाल और भारी स्तन अब पूरी तरह आज़ाद थे, जो उसकी सांसों के साथ धीरे-धीरे ऊपर-नीचे हो रहे थे। कमर का वह घुमाव और पैंटी के ऊपर से झलकती उसकी जंघाओं की गोलाई ने आर्यन की धड़कनें बढ़ा दीं।

आर्यन ने पहली बार अपनी माँ को इतने करीब से और इतने कम कपड़ों में देखा। एक तरफ वह खुद पूरा नंगा था और दूसरी तरफ अंजलि सिर्फ उस छोटी सी पैंटी में। दोनों के जिस्म की गर्माहट बाथरूम की छोटी सी जगह में साफ महसूस हो रही थी।

“क्या देख रहा है? चल… शावर चालू कर,” अंजलि ने अपनी आवाज़ में थोड़ी मादकता और लाड़ भरते हुए कहा।

आर्यन ने जैसे ही शावर का नॉब घुमाया, गुनगुने पानी की बौछार उन दोनों के शरीरों पर पड़ने लगी। पानी की बूंदें अंजलि के उन भारी उभारों पर गिरकर नीचे की ओर फिसलने लगीं। अंजलि ने साबुन का झाग बनाया और अपने हाथ आर्यन के चौड़े कंधों पर रख दिए।

“आज मैं तुझे अपने हाथों से नहलाऊंगी… और तू मुझे साफ करेगा,” अंजलि ने फुसफुसाते हुए कहा।

गुनगुने पानी की बौछारें जब उन दोनों के शरीरों पर गिर रही थीं, तो बाथरूम का माहौल किसी जादुई दुनिया जैसा लग रहा था। सादे साबुन की खुशबू और पानी की गिरती आवाज़ के बीच, आर्यन और अंजलि एक-दूसरे को नहलाने में मशगूल थे। यह केवल सफाई नहीं थी, बल्कि एक-दूसरे के वजूद को महसूस करने का एक खेल बन चुका था।

अंजलि ने अपने हाथों में साबुन का ढेर सारा झाग बनाया और उसे आर्यन के मज़बूत सीने पर मलने लगी। उसकी उंगलियां बहुत ही प्यार से आर्यन की त्वचा पर फिसल रही थीं। आर्यन भी कहाँ पीछे रहने वाला था; उसने साबुन लिया और अंजलि की दूधिया पीठ और उन भारी कंधों पर झाग लगाना शुरू किया।

“यहाँ भी लगाओ आर्यन… और थोड़ा नीचे,” अंजलि ने शरारत से अपनी कमर मटकाते हुए कहा। दोनों एक-दूसरे पर पानी फेंक रहे थे और हँस रहे थे। बरसों की मर्यादा की दीवारें अब उस शावर के पानी के साथ बह चुकी थीं।

शावर के पानी की धार जब अंजलि के नग्न और भारी उभारों से टकराकर आर्यन के शरीर पर गिर रही थी, और अंजलि के हाथों का वह मखमली रगड़ आर्यन के पेट के निचले हिस्से तक पहुँच रहा था, तो प्रकृति ने अपना काम फिर से शुरू कर दिया।

अभी कुछ ही देर पहले शांत हुआ वह 7 इंच का अंग फिर से हरकत में आने लगा। पानी की शीतलता भी उस गर्मी को नहीं रोक पाई। अंजलि के देखते ही देखते, वह अंग फिर से अपनी पूरी लंबाई और मोटाई में तनकर खड़ा हो गया। झाग के बीच से वह अंग किसी चट्टान की तरह सिर उठाए खड़ा था।

अंजलि की नज़र जब नीचे गई, तो वह मुस्कुराए बिना नहीं रह सकी। उसने शावर के नीचे खड़े-खड़े ही अपना हाथ नीचे बढ़ाया और उस कड़क हो चुकी मर्दानगी को अपनी उंगलियों से धीरे से घेरा।

“अरे… ये तो फिर से जाग गया?” अंजलि ने आर्यन की आँखों में झाँकते हुए शरारत से पूछा। “लगता है इतवार की सुबह होने तक यह मुझे चैन लेने नहीं देगा।”

आर्यन ने शर्माने के बजाय अंजलि को कमर से पकड़कर अपनी ओर खींच लिया। “माँ, जब सामने इतनी खूबसूरती हो, तो यह भला कैसे सो सकता है? इसकी प्यास अभी बुझी नहीं है।”

पानी की गिरती धार के नीचे, झाग से लिपटे हुए वे दोनों एक-दूसरे में खोए हुए थे। अंजलि की सिर्फ पैंटी वाली भीगी हुई देह और आर्यन की नग्न मर्दानगी के बीच अब बस कुछ ही पलों की दूरी थी।

शावर से गिरते पानी की रिमझिम फुहारों के बीच बाथरूम की भाप ने एक मदहोश कर देने वाला माहौल बना दिया था। आर्यन का शरीर पानी की बूंदों से चमक रहा था और उसका वह विशाल 7 इंची अंग झाग के बीच से एक मज़बूत मीनार की तरह सिर उठाए खड़ा था।

आर्यन ने अपनी माँ की आँखों में देखा, जहाँ अब सिर्फ ममता नहीं, बल्कि एक स्त्री की गहरी प्रशंसा थी। उसने थोड़ा झिझकते हुए पूछा, “माँ… क्या यह सही है? मतलब, अभी तो सब शांत हुआ था और यह फिर से इस तरह… इतनी जल्दी खड़ा हो गया। क्या यह सामान्य है?”

अंजलि ने एक बहुत ही गहरी और मादक मुस्कान दी। उसने शावर की धार के नीचे ही आर्यन के करीब कदम बढ़ाया। पानी की बूंदें उसके नंगे और भारी सीने पर गिरकर उसके निप्पल्स को और भी कड़क बना रही थीं।

उसने अपना कोमल हाथ नीचे बढ़ाया और उस तपे हुए अंग को अपनी मुट्ठी में भर लिया। “यह सिर्फ सही नहीं है आर्यन… यह तेरी उस ज़बरदस्त ताकत की निशानी है जो तूने अब तक छुपा कर रखी थी,” अंजलि ने फुसफुसाते हुए कहा।

अंजलि ने एक अद्भुत काम किया। उसने अपना दूसरा हाथ (कलाई) आर्यन के उस अंग के पास रखा। “देख आर्यन… ज़रा देख इसे,” उसने अपनी पतली और गोरी कलाई को उसके अंग के बगल में सटा दिया। “तेरी मर्दानगी की मोटाई मेरी कलाई के बराबर पहुँच रही है। ३ इंच की यह गोलाई… यह किसी भी औरत को पागल करने के लिए काफी है।”

“७ इंच की लंबाई और यह मोटाई… इसे ‘परफेक्ट’ कहना भी छोटा शब्द होगा। यह एक वरदान है,” अंजलि ने अपनी कलाई हटाकर अब दोनों हाथों से उसे नीचे से ऊपर तक सहलाया। “जब यह इस तरह बार-बार खड़ा होता है, तो इसका मतलब है कि तू पूरी तरह से जवान और ऊर्जा से भरपूर है। इसे दबाना नहीं, बल्कि इसे महसूस करना सीख।”

आर्यन अपनी माँ के हाथों और उसकी कलाई के साथ उस तुलना को देखकर दंग रह गया। आईने में उसे दिख रहा था कि उसकी माँ की कलाई उसके अंग के सामने कितनी नाजुक लग रही थी। उसे अपनी उस विशालता पर एक अजीब सा पुरुषोचित गर्व महसूस होने लगा।

अंजलि ने अपने गीले बालों को पीछे झटका, जिससे पानी की कुछ बूंदें आर्यन के चेहरे पर गिरीं। उसने अपनी उंगलियों से उस अंग की टोपी को धीरे से रगड़ा। “जितना यह खड़ा होगा, उतना ही मेरी प्यास बढ़ेगी आर्यन। आज इतवार की सुबह तक मुझे इस ‘शक्ति’ का पूरा अहसास चाहिए।”

आर्यन की सांसें अब और भी तेज़ हो गई थीं। अंजलि के हाथों की पकड़ और उसकी नज़रों की वह भूख उसे फिर से उस मुकाम पर ले जा रही थी जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं थी।

शावर से गिरते गुनगुने पानी की आवाज़ बाथरूम के सन्नाटे को चीर रही थी। भाप और साबुन की खुशबू ने माहौल को इतना कामुक बना दिया था कि शब्दों में बयान करना मुश्किल था। अंजलि ने एक गहरी और मदभरी नज़रों से आर्यन के उस विशाल 7 इंची अंग को देखा, जो उसकी कलाई से भी ज़्यादा मोटा और मज़बूत लग रहा था।

अंजलि ने धीरे से शावर के नीचे ही अपने घुटने फर्श पर टिका दिए। वह अब पूरी तरह से नग्न (सिर्फ उस भीगी हुई काली पैंटी में) आर्यन के सामने घुटनों के बल बैठी थी। ऊपर से गिरता पानी उसके भारी और गोल स्तनों पर गिरकर सीधे आर्यन के पैरों और उसके तपे हुए अंग पर गिर रहा था।

अंजलि ने अपने दोनों हाथों का इस्तेमाल किया क्योंकि आर्यन का अंग इतना मोटा और लंबा था कि एक हाथ की पकड़ कम पड़ रही थी। उसने अपनी दोनों हथेलियों को एक-दूसरे के ऊपर रखा और उस ७ इंची अंग के आधार से पकड़कर उसे धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करना शुरू किया।

शावर के पानी और साबुन के झाग की वजह से फिसलन इतनी ज़्यादा थी कि अंजलि के हाथ किसी रेशम की तरह उस अंग पर सरक रहे थे। वह अपनी मुट्ठी को ऊपर तक ले जाती, जहाँ उस अंग की सुपारी पूरी तरह लाल और तनाव में थी, और फिर उसे अपनी हथेलियों से ज़ोर से दबाते हुए नीचे की ओर लाती।

घुटनों के बल बैठी अंजलि का चेहरा आर्यन की मर्दानगी के बिल्कुल करीब था। वह हर स्ट्रोक के साथ अपनी आँखें मूंद लेती और एक गहरी सिसकारी भरती। उसे अहसास हो रहा था कि वह अपनी कलाई जितनी मोटी चीज़ को आज अपनी मुट्ठी में कैद किए हुए है।

आर्यन के लिए यह अहसास किसी स्वर्ग से कम नहीं था। वह शावर की दीवार के सहारे खड़ा हो गया और अपना सिर पीछे की ओर झुका लिया। गिरता हुआ पानी उसके चेहरे पर पड़ रहा था, लेकिन उसका पूरा ध्यान अंजलि के उन मुलायम हाथों पर था जो उसके अंग की एक-एक नस को सहला रहे थे।

“माँ… उफ्फ… यह अहसास… पहले से भी ज़्यादा तेज़ है,” आर्यन ने लड़खड़ाती आवाज़ में कहा।

हालाँकि अंजलि उसे बहुत तेज़ी और सलीके से हिला रही थी, लेकिन आर्यन अब ‘झड़’ नहीं रहा था। पहली बार की तृप्ति के बाद, अब उसका शरीर इस सुख को लंबे समय तक खींचने के लिए तैयार था। वह उस कड़कपन और अंजलि के हाथों के घर्षण का हर सेकंड आनंद लेना चाहता था।

अंजलि ने महसूस किया कि आर्यन अब परिपक्व हो रहा है; वह अब जल्दबाज़ी में नहीं था। उसने अपनी गति थोड़ी और बढ़ा दी और अपने चेहरे को उस तपती हुई टोपी के करीब ले गई। पानी की बूंदें उसके होंठों से होती हुई आर्यन के अंग पर गिर रही थीं।

शावर के पानी की गिरती धार और अंजलि के हाथों की सधी हुई रफ्तार ने आर्यन को एक अलग ही दुनिया में पहुँचा दिया था। उसकी आँखें कसकर बंद थीं और उसका पूरा अस्तित्व उस 7 इंची अंग पर होने वाली हलचल पर टिका था। लेकिन तभी अंजलि ने वह किया जिसकी आर्यन को रत्ती भर भी उम्मीद नहीं थी।

अंजलि, जो अब तक अपनी दोनों हथेलियों से केवल उसके अंग को सहला रही थी, उसने अचानक अपनी एक हथेली नीचे की ओर सरकाई। जैसे ही आर्यन पूरी तरह से उस सुख में डूबा हुआ था, अंजलि ने अपनी कोमल और ठंडी उंगलियों से उसके अंडकोषों को बहुत ही नज़ाकत और हल्के दबाव के साथ सहला दिया।

वह स्पर्श इतना अचानक और इतना ‘सेंसिटिव’ था कि आर्यन के पूरे शरीर में बिजली का एक ज़ोरदार झटका लगा। उसके पेट के निचले हिस्से में एक अजीब सी ऐंठन हुई, जिसने उसके घुटनों को एक पल में कमज़ोर कर दिया।

आर्यन इस ‘अचानक हमले’ की तीव्रता को संभाल नहीं सका। उसकी ज़ुबान से एक लंबी और दबी हुई ‘आह…’ निकली और वह शावर की दीवार के सहारे फिसलते हुए सीधे फर्श पर अंजलि के ठीक सामने बैठ गया।

अब स्थिति और भी रोमांचक हो गई थी। शावर के नीचे दोनों आमने-सामने फर्श पर बैठे थे। पानी की बूंदें उनके आपस में टकराते हुए घुटनों पर गिर रही थीं।

आर्यन की सांसें इतनी तेज़ थीं कि उसका सीना धौंकनी की तरह चल रहा था। उसने अपनी आँखें खोलीं और अंजलि की ओर देखा। अंजलि के भीगे हुए बाल उसके चेहरे पर चिपके थे और उसकी आँखों में एक ऐसी चमक थी जैसे उसने कोई बहुत बड़ा ‘किला’ फतह कर लिया हो।

“क्या हुआ मेरे शेर? एक छोटे से स्पर्श ने तुझे घुटनों पर ला दिया?” अंजलि ने बहुत ही कामुक अंदाज़ में फुसफुसाते हुए कहा।

उसने आर्यन का चेहरा अपने दोनों हाथों में लिया। अंजलि की सिर्फ पैंटी वाली भीगी देह और उसके भारी उभार अब आर्यन के चेहरे के इतने करीब थे कि वह उनकी गर्माहट महसूस कर सकता था। आर्यन अभी भी उस झटके के असर में था; उसे समझ नहीं आ रहा था कि एक छोटा सा स्पर्श इतना गहरा कैसे हो सकता है।

उसने अंजलि की आँखों में झाँकते हुए कहा, “माँ… आपने ये क्या किया? मुझे लगा जैसे मेरी जान ही निकल जाएगी। वहां छूने से… इतना अजीब और इतना तेज़ सुख कैसे मिल सकता है?”

अंजलि ने मुस्कुराते हुए उसका सिर अपने भीगे हुए और भारी सीने पर रख लिया। “यही तो मर्दानगी का सबसे नाजुक हिस्सा है आर्यन। आज तू अपनी माँ के सामने पूरी तरह ‘खुला’ है, तो तुझे हर वो अहसास सिखाना मेरा फ़र्ज़ है जो तुझे एक पूरा मर्द बनाए।”

शावर से गिरते गुनगुने पानी की रिमझिम फुहारें अब एक नए और गहरे अहसास की गवाह बनने वाली थीं। बाथरूम की भाप और साबुन की भीनी-भीनी खुशबू के बीच, अंजलि और आर्यन अब फर्श पर आमने-सामने बैठे थे। आर्यन अभी भी उस अचूक प्रहार के असर में था, उसकी सांसें तेज़ थीं और उसका 7 इंची अंग झाग के बीच से अपनी पूरी मर्दानगी के साथ खड़ा था।

अंजलि ने एक मखमली मुस्कान दी और आगे बढ़कर आर्यन को अपनी भीगी बाहों में भर लिया।

अंजलि ने अपना पूरा शरीर आर्यन के सीने से सटा दिया। शावर का पानी उन दोनों के भीगे शरीरों के बीच से होकर गुज़र रहा था। अंजलि ने एक हाथ से आर्यन की गर्दन पकड़ी और दूसरे हाथ से उसका चेहरा ऊपर उठाया।

उसने अपनी आँखें मूँद लीं और अपने नरम, भीगे और गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होंठों को आर्यन के होंठों पर रख दिया।

आर्यन के लिए यह बिल्कुल नया और अकल्पनीय अहसास था। उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि किसी के होंठ इतने कोमल, इतने गर्म और इतने रसीले हो सकते हैं। जैसे ही अंजलि ने अपने होंठों से उसके होंठों को छुआ, आर्यन के शरीर में एक ऐसी सिहरन दौड़ी जैसे वह हवा में तैर रहा हो। उसे लगा जैसे उसकी आत्मा उस स्पर्श में पिघल रही है।

अंजलि ने सिर्फ होंठ नहीं रखे, बल्कि उसने धीरे से आर्यन के निचले होंठ को अपने मुँह में लिया और उसे बहुत ही नज़ाकत से चूसना शुरू किया। उसकी जीभ की नोक आर्यन के होंठों पर फिर रही थी। आर्यन मंत्रमुग्ध होकर इस ‘रेशमी सुख’ का आनंद ले रहा था।

अंजलि ने किस तोड़ते हुए आर्यन की आँखों में देखा, जहाँ अब सिर्फ प्यार और विस्मय था। उसने आर्यन की टाँगों को थोड़ा फैलाया और धीरे से उठकर उसकी गोदी में बैठ गई।

अब अंजलि का पूरा भीगा और भारी शरीर (सिर्फ काली पैंटी में) आर्यन के ऊपर था। उसके विशाल और विकसित स्तन आर्यन के चेहरे और सीने के बिल्कुल सामने थे। आर्यन का वह कड़क अंग अब सीधे अंजलि की पैंटी वाले हिस्से के नीचे दब गया था, जिससे उन दोनों के बीच की गर्मी और भी बढ़ गई।

अंजलि ने फिर से आर्यन का चेहरा थामा और उसे अपनी ओर खींचा। “आर्यन… देख तेरी माँ आज तुझे वो सब कुछ दे रही है जो तूने अब तक माँगा भी नहीं था,” अंजलि ने फुसफुसाते हुए कहा।

वह फिर से आर्यन को किस करने लगी। इस बार यह किस और भी गहरा और लंबा था। अंजलि की जीभ अब आर्यन के मुँह के अंदर प्रवेश कर चुकी थी और आर्यन की जीभ से उलझ रही थी। आर्यन के लिए यह फ्रेंच किस एक और नया और ज़बरदस्त अनुभव था। वह अंजलि की कमर को कसकर पकड़कर उस ‘अतुलनीय’ सुख में खो गया।

बाथरूम की छोटी सी जगह में शावर के पानी की आवाज़ और उन दोनों की गहरी सांसें एक अद्भुत संगीत पैदा कर रही थीं। अंजलि के भीगे हुए और भारी अंगों का दबाव आर्यन को एक नए प्रकार की मर्दानगी का अहसास करा रहा था।

शावर की बौछारें अब उन दोनों के शरीरों पर किसी संगीत की तरह गिर रही थीं, लेकिन बाथरूम के उस छोटे से हिस्से में जो जुनून पैदा हो रहा था, उसकी गर्मी पानी को भी मात दे रही थी। अंजलि आर्यन की गोदी में पूरी तरह से समाई हुई थी, उसका भीगा हुआ बदन और वे विशाल, नग्न उभार आर्यन के सीने से बुरी तरह चिपके हुए थे।

उनके बीच का वह किस इतना गहरा और तीव्र था कि दोनों के फेफड़ों को हवा मिलनी बंद हो गई थी। आर्यन के लिए यह एक ऐसा नशा था जिससे वह कभी बाहर नहीं आना चाहता था। उसे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे वह अंजलि की रूह को अपने होंठों के जरिए खींच रहा हो।

करीब 2 मिनट तक वे दोनों एक-दूसरे के मुँह के रस को पीते रहे। जब ऑक्सीजन की कमी महसूस हुई और गला सूखने लगा, तो वे बहुत ही अनिच्छा के साथ एक-दूसरे से अलग हुए। दोनों की सांसें इतनी तेज़ थीं कि उनके सीने आपस में बार-बार टकरा रहे थे। लेकिन वह जुदाई सिर्फ चंद सेकंड की थी। जैसे ही एक गहरी सांस अंदर गई, प्यास फिर से भड़क उठी और वे वापस एक-दूसरे के होंठों पर टूट पड़े।

इस बार यह ‘किस’ कल से कहीं ज़्यादा आक्रामक था। अंजलि की जीभ और आर्यन की जीभ अब एक-दूसरे से इस तरह कुश्ती लड़ रही थीं जैसे वे कोई पुराना हिसाब चुकता कर रही हों। अंजलि जिस तरह से अपनी जीभ को आर्यन के मुँह के हर कोने में घुमा रही थी, उससे साफ़ झलक रहा था कि वह इस ‘मर्दानी खुशबू’ और स्वाद के लिए बरसों से बेताब थी।

अंजलि के मुँह से निकलने वाली दबी हुई आवाज़ें बता रही थीं कि उसे आज वह सब मिल रहा है जो उसने अपनी बंद ज़िंदगी में कभी नहीं पाया था। वह अपनी जीभ से आर्यन की जीभ को सहलाती, उसे अपने दांतों के बीच धीरे से दबाती और फिर उसे खींचकर चूसने लगती।

आर्यन के लिए यह अनुभव किसी रोमांचक सफर जैसा था। उसे महसूस हो रहा था कि अंजलि की जीभ की सरसराहट उसके दिमाग की नसों को झनझना रही है। वह अपने दोनों हाथों से अंजलि के भीगे हुए और मखमली कूल्हों को कसकर पकड़ चुका था, जिससे अंजलि की पैंटी वाला हिस्सा उसके 7 इंची अंग पर और भी ज़ोर से दब रहा था।

“उफ़… आर्यन… तू… तू क्या कर रहा है मेरे साथ…” अंजलि ने किस के बीच ही अधखुली आँखों से फुसफुसाया। उसकी आँखें नशे में डूबी हुई थीं और वह अपनी जीभ को वापस आर्यन के मुँह में डालने के लिए छटपटा रही थी।

बाथरूम की भाप में डूबा यह ‘लिप-लॉक’ अब उस प्यास की कहानी लिख रहा था जो अब और भी खतरनाक मोड़ लेने वाली थी।

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