Reading Mode

29th Update (दीपू के मजे…. और दिव्या की शामत )

फिर सब लोग १०- १५ Min और बातें करते है और फिर वसु और बाकी सब भी ऋतू और दिनेश से इज़ाज़त लेते है और अपने घर की और निकल जाते है… दोनों परिवार अपने अपने ख्यालों के बारे में सोचते रहते है… वसु जो कुछ देर पहले ऋतू से बात की थी… और दिनेश जो २- ३ दिन पहले दीपू से अपने मन की बात किया था…

अब आगे..

रात में सब लोग अपनी अपनी सोच में लगे हुए थे.. दीपू ये की दिनेश कैसे अपनी माँ को मनाएगा.. वसु ये की वो ऋतू की बात मान जाए और दीपू से इसके बारे में बात करे… और कविता अपनी बेटी मीना के बारे में सोचते हुए.. सब सो जाते है क्यूंकि आज सब पार्टी के वजह से थके हुए थे और देर रात भी हो गयी थी.

सुबह दिव्या जल्दी उठ जाती है और फिर फ्रेश हो कर किचन में चाय बनाने चली जाती है. इतने में दीपू भी उठ जाता हैं और वो भी फ्रेश हो कर किचन में जाता है तो दिव्या को देख कर उसका लंड में हरकत होती है क्यूंकि दिव्या पीछे से बहुत सेक्सी लग रही थी. फिर वो पीछे से आकर दिव्या को पकड़ लेता है और उसकी चूची और पेट को दबाते हुए कहता है.. तू तो सुबह ही आग लगा रही हो और उसके गले को चूमते हुए अपना हाथ उसकी नाभि को मसलते रहता है.

दिव्या भी बहकने लगती है और कहती है… सुबह सुबह क्या कर रहे हो? और कोई काम नहीं है क्या? तुम्हे ऑफिस नहीं जाना है क्या?

दीपू: अगर तुम सब ऐसे ही रहोगे तो फिर आज ऑफिस छुट्टी और उसकी गांड को दबाते हुए… आज पूरा दिन बिस्तर पे ही रहते है. वैसे भी कल रात को सब लोग थक गए थे तो उसका कोटा भी अभी पूरा कर देता हूँ.

दिव्या: नहीं ना.. अभी तुम कुछ नहीं करोगे और दीदी कविता भी आ जाएंगे ना यहाँ पर.. दीपू: तो क्या हुआ? वो भी तो तेरी सौतन ही हस ना.. अगर वो लोग भी यही आ गए तो आ जाने दो और उसकी चूची को दबाते रहता है. इतने में वसु भी वहां आ जाती हस और कहती है…

वसु: सुबह सुबह ही शुरू हो गए तुम दोनों?

दीपू पलट कर वसु को देखते हुए.. आ जाओ.. तुम्हारे साथ भी शुरू हो जाता हूँ फिर.. और ऐसा कहते हुए दीपू हस देता है. दीपू की बात सुनकर वसु शर्मा जाती है और कुछ नहीं कहती तो दीपू दिव्या को छोड़ कर वसु को पकड़ लेते है और कहता है.. तुम भी सुबह सुबह बहुत सेक्सी लग रही हो और उसको बाहों में भर कर उसको भी चूम लेता है जिसमें वसु भी उसका साथ देती है.

2 Min के मस्त चुम्बन के बाद वसु उसको अलग करती है और कहती है.. जाओ आँगन में बैठो.. मैं चाय लाती हूँ. बहुत हो गया तुम्हारा प्यार करना और उसे चिढ़ाते हुए धकेल देती है. फिर सब लोग आँगन में बैठे हुए चाय पीते है और फिर दीपू तैयार हो कर अपने ऑफिस चला जाता है. ऑफिस जाने से पहले दीपू कविता को कमरे में बुला कर उसके कान में कुछ कहता है. कविता जब ये बात उससे सुनती है तो उसके चेहरे पे हसी आ जाती है और दीपू से कहती है: तू तुम आज मानोगे नहीं.

दीपू: बिलकुल नहीं.. आज तो होना ही है. अगर तुम चाहो तो उससे बात कर के उसे बता दो और हो सके तो उसके मना भी कर लो नहीं तो तुम तो फिर जानती ही हो.. की मैं क्या करने वाला हूँ. ठीक है मैं जा रहा हूँ तो जाने से पहले मेरा मुँह मीठा कर दो तो कविता दीपू के पास आकर उसको एक मस्त गहरा चुम्बन देती है और दीपू भी मस्त उसकी जुबां को चूसते हुए उसकी गांड दबा कर 2 Min बाद अपने ऑफिस के लिए निकल जाता है.

फिर सब लोग घर में अपना काम करते है और ऐसे ही बातें करते है. कविता मीना को फ़ोन कर के पूछती है की वो कब आ रही है तो मीना कहती है की वो जल्दी ही आ जायेगी. वहीँ लता भी वसु से कहती है की वो भी उनसे मिलने जल्दी ही आ जायेगी.

दोपहर को खाना खाने के बाद वसु कविता को अपने कमरे में बुलाती है. कविता को समझ नहीं आता की वसु ने उसके क्यों बुलाया है. कविता जब कमरे में जाती है तो वो वसु को कुछ सोच में देख कर पूछती है की उसे क्यों बुलाया है और की सोच में डूबी हुई है. वसु कविता को अपने पास बुलाती है लेकिन फिर भी थोड़ा संकोच करती है. कविता उसको देख कर कहती है.. क्या है तेरी परेशानी? ऐसे क्यों सोच पे पड़ी हो?

वसु: पता नहीं कैसे कहूँ और थोड़ी शर्म भी आ रही है.

कविता: शर्माना क्यों? हम तो एक दुसरे के सामने नंगे भी हो चुके है और एक दुसरे को अच्छे से चका भी है तो अब क्या शर्म? जो भी है मुझे बता. हो सके तो मैं शायद तेरी उलझन दूर कर दूँ.

वसु फिर अपने गले को साफ़ करते हुए कहती है: सुन मैं सोच रही हूँ की अब मेरी भी उम्र हो रही है. हम दोनों 40 के ऊपर है और अगर ज़्यादा देर हो गया तो… इतना बोल कर वसु रुक जाती है.

कविता: तू क्या कहना चाहती है… और देर किस लिए?

वसु: अरे पगली मैं सोच रही थी की अब मैं भी फिर से माँ बन जाऊं… अब मैं अपने मन से भी इस बात को मान लिया है की हम सब के लिए ये अच्छी बात होगी. अब दीपू भी अपने बिज़नेस में अच्छा काम कर रहा है. वो तो मेरे से बहुत दिनों से ये बात कर रहा था. मैं ही उसे मना कर रही थी.. लेकिन अब लगता है समय आ गया है.

कविता: वाह ये तो बहुत अच्छी बात है वसु और ऐसा कहते हुए उसको गले लगा लेती है और फिर उसकी आँखों में देखती है जो शर्म से नीचे की हुई थी. अरे पगली इसमें शर्माने की क्या बात है और ऐसा कहते हुए वो अपने होंठ आगे करती है तो वसु भी अपने होंठ आगे करती है और दोनों एक बहुत गहरे और प्यारे चुम्बन में जुड़ जाते है और १ मं बाद दोनों अपनी जुबां एक दुसरे से लड़ाते है.

3 Min के गहरे चुम्बन के बाद दोनों फिर से अलग होते है और कविता बड़े प्यार से उसका माथा चूम लेती है.

वसु: वैसे एक बात मैं भी तुमसे कहना चाहती हूँ.

कविता: बोल

वसु: यही की तेरी उम्र भी हो रही है और तू भी अब माँ बनने की सोच. मेरी तरह तेरी भी गोद में एक नन्हा मुन्ना बच्चा होगा तो कितना अच्छा लगेगा.

कविता: बात तो तेरी सही है लेकिन मैं सोच रही थी की मेरे से पहले अगर मीना माँ बन जाए तो और अच्छा होगा.

वसु: तो इसमें क्या है? तुम दोनों एक साथ माँ बन जाओ. तू फिर नानी भी बन जायेगी और मैं भी दादी… और ऐसा कहते हुए फिर से इस बार वसु कविता के होंठ चूम लेती है.

कविता: अच्छा सुन तेरे से एक बात करनी थी.

वसु: क्या है?

कविता फिर उसके कान में कुछ बात बताती है तो वो भी अपना मुँह खोले कविता को देखती रहती है. क्या सच में? उसने ऐसा कहा है?

कविता: हाँ… तो फिर आज रात के लिए तैयारी करती हूँ और उसको आँख मारते हुए कहती है… दीपू के तो.. इतना ही कहती है की उतने में दिव्या वहां आ जाती है और कहती है… क्या बात हो रही है तुम दोनों के बीच.

कविता फिर दिव्या को बात बताती हस तो दिव्या भी बड़ी खुश हो जाती हस और दोनों को गले से लगा लेती है. दिव्या: रूठे मन और नकली गुस्से से.. तुम दोनों को देख कर मुझे भी जलन होने लगेगी जब तुम दोनों की गोद में बच्चा होगा. वसु: अरे इसमें जलन कैसा? वो बच्चे तो हम सब के होंगे और सुन.. अगर हम तीनो एक साथ पेट से हो जाए तो फिर दीपू की देखभाल कौन करेगा?

दिव्या: हस्ते हुए… यानी मैं बकरी बन जाऊं और तुम दोनों अपना उठा हुआ पेट लेकर मेरी बजते हुए देखो? तुम लोग तो जानते हो.. वो तो बिस्तर पे हम तीनो को रगड़ रगड़ कर चोदता है. हम में से कोई भी उसे एक बार से ज़्यादा झेल नहीं सकता और तुम दोनों नहीं रहोगे तो फिर मेरी तो Band बजनी ही हस ना. इस बात पे तीनो हस देते है और वसु दिव्या को कुछ बोलने वाली होती है तो कविता उसे मना कर देती है आँखों से इशारा कर के.

उधर ऑफिस में दीपू और दिनेश अपना काम करते रहते है और आज वो दोनों काफी बिजी थे क्यूंकि त्यौहार नज़दीक आ रहे थे तो इसकी चलते आज उनकी दूकान में बहुत भीड़ थी. जहाँ दिनेश व्यस्त था वहीँ दीपू भी… लेकिन कुछ समय बाद वो दुसरे दूकान चला जाता है जहाँ उन्होंने अपना बिज़नेस बढ़ाते हुए १- २ और दूकान खोल लिए थे. वहां पर भी अच्छी खासी भीड़ थी तो दीपू भी वहां पर बहुत बिजी हो जाता है. इन सब के चलते दोनों में ज़्यादा बात नहीं हो पाती और फिर शाम को दीपू वापस दिनेश के पास आ जाता है और फिर दोनों उस दिन का एकाउंट्स देख कर वापस अपने घर चले जाते है. दोनों के घर में एक तरह का ही Scene था. जहाँ निशा दिनेश की राह देख रही थी वहीँ दीपू जब घर जाता है तो वो कविता ( जो उसकी राह देख रही थी) को देख कर ही रह जाता है और सुबह के माफ़िक़ उसका लंड में हलचल होती है और वो अपने रूप में आने को होता है.

क्यूंकि कविता अपने बदन का पूरा मस्त नुमाइश कर रही थी.

उसको देख कर दीपू उसके पास आ कर कहता है: लगता है तू मेरी जान निकाल लेगी. कविता हस्ते हुए और उसके टांगों के बीच हो रहे उभार को देख कर कहती है… तेरी जान नहीं और उसके लंड को पकड़ कर… ये लेने वाले है और उसके लंड को थोड़ा दबा देती है. दीपू की भी आह कर के सिसकारी लेता है और उसकी चूची दबा देता है.

वैसे तो आज मैं बहुत थका हुआ हूँ लेकिन तुमको देख कर लगता है तुम सब मेरी थकावट दूर कर दोगे.

कविता: जी बिलकुल… आज तो तेरी शामत होने वाली है.

दीपू: देखते है मेरी शामत या फिर तुम सब की. फिर दीपू कमरे में जाकर फ्रेश हो कर आता है तो वसु और दिव्या उसके पास हस्ते हुए चल के आते है तो उनको देख कर उसका लंड फिर से तन जाता है क्यूंकि वो दोनों भी कविता की तरह एकदम सज कर एकदम सेक्सी लग रही थी. उन दोनों का ब्लाउज इतना छोटा था जैसे दोनों की मस्त भरी चूचियां जैसे बाहर आने को तड़प रही हो और साडी भी एकदम नाभि के नीचे बाँधा हुआ जिन्हे वो और भी सेक्सी बना रहा था दोनों को.

दीपू तीनो को देख कर कहता है: लगता है आज खाने में तुम सब को ही खाना पड़ेगा.

वसु: देखते है तुम हम को खायेगा या फिर हम तुम को और उसे आँख मार देती है.

बाकी शाम ऐसे ही गुज़रती है जहाँ तीनो उसे उकसाने में कोई कसार नहीं छोड़ते और दीपू का लंड तो पूरा तन के ही रहता है. बीच बीच में दीपू भी उन तीनो में से जो हाथ आता है उसे अपनी बाहों में लेकर चूमते हुए उन्हें भी उत्तेजित करता रहता है.

रात को खाना खाने के बाद कविता कहती है दीपू से की वो कमरे में जाए और इंतज़ार करे. दीपू से भी अब रहा नहीं जा रहा था तो वो कहते है जल्दी आ जाओ. अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है.

कविता: इतना क्यों उतावले हो रहे हो.

दीपू: कविता को ऊपर से नीचे तक देख कर कहता है अगर तुम ज़्यादा बोलोगी तो अभी तुम्हारे कपडे निकल कर तुम्हारी गांड मार लूँगा.

कविता: मैं भी उतावली हूँ लेकिन थोड़ा धीरज रखो.. आज तुमको कुछ स्पेशल है और उसे आँख मार देती है. दीपू को समझ नहीं आता तो वो कमरे में जाकर उनका इंतज़ार करता है.

थोड़ी देर बाद वसु और दिव्या कमरे में एकदम सज धज के आते है जैसे आज फिर से उनकी सुहागरात हो और साथ में दीपू के लिए बदाम और किशमिश से भरा हुआ दूध लाते है. दीपू को देख कर वसु कहती है: तुम्हे आज इसकी ज़रुरत पड़ेगी और फिर दोनों वसु और दिव्या अंदर आकर बिस्तर पे बैठ जाती है और एक दुसरे को चूमते रहते है.

जब दीपू उन दोनों के पास आने की कोशिश करता है तो वसु कहती है: तुम अभी वहीँ बैठो और हमें देखो. दीपू बगल में बैठ के अपना लंड मुठियाते हुए देखता है तो वसु और दिव्या एक दुसरे को प्यार करते हुए चूमते रहते है.

थोड़ी देर तक जब दीपू अपना लंड मसलते रहता है तो उससे रहा नहीं जाता और उनके पास आता है तो वसु कहती है: आज तुम्हारे लिए दो स्पेशल और ख़ुशी का पल होने वाला है.

दीपू: क्या?

वसु: दीपू को अपने पास बुला कर.. तुम हमेशा चाहते थे ना की मैं माँ बन जाऊं और तुम बाप… तो मैंने भी मन से मान लिया है की अब वो वक़्त आ गया है की तुम भी अब बाप बन जाओ.. और ऐसा कहते हुए वसु शर्मा के अपनी आँखें नीचे कर लेती है.

दीपू ये बात सुनकर एकदम खुश हो जाता है और कहता है: सच में?

वसु: शर्माते हुए.. सच.. और अब से तुम अपना माल मेरे अंदर ही छोड़ना ताकि मैं भी जल्दी से पेट से हो जाऊं. दीपू एकदम खुश हो जाता है और वसु को पकड़ कर उसके होंठ एकदम चूम लेता है.

दीपू: और दूसरा कौनसा पल? इतने में कविता भी अपनी साडी निकालते हुए ब्लाउज में से उसकी आधी चूचियां को दिखाते हुए उनके पास आती है और कहती है…

तुमको तो पता ही है. आज सुबह ही तुमने मुझे बताया था. दिव्या को समझ नहीं आता तो वो पूछती है की क्या बताया है? कविता दिव्या की नज़र बगल में एक टेबल पे रखे तेल की शीशी को दिखाती है और कहती है… आज तू पूरी औरत बन जायेगी. दिव्या को समझ नहीं आता तो वो पूछती है क्या? कविता दीपू और दिव्या को देखते हुए.. आज तुम अपनी तीसरी छेद भी दीपू को दोगी. याने आज तुम्हारी गांड भी खुल जायेगी.

दिव्या: ना बाबा ना… मैं ऐसा कुछ नहीं करने वाली. तो दीपू दिव्या को पकड़ कर उसकी आँखों में देखते हुए.. देखो ना आज कितनी ख़ुशी का पल है.. तुम्हारी दीदी फिर से माँ बनने को तैयार है और तुम भी पूरी औरत बन जाओ. जल्दी ही तुम्हे भी ऐसे ही ख़ुशी दूंगा जैसे वसु कह रही है. क्या तुम्हे मुझसे प्यार नहीं है क्या?

दिव्या: ऐसा क्यों कहते हो? मैं तो तुमसे बहुत प्यार करती हूँ.

दीपू: फिर डार्लिंग मान जाओ ना.. इतने में कविता और वसु भी दिव्या को मनाते है और आखिर में वो भी मान जाती है. दीपू भी खुश हो जाता है और वो भी दिव्या को चूम लेता है.

फिर देखते ही देखते सब नंगे हो जाते है और पहले तीनो दीपू के लंड पे पड़ते है और पूरी शिद्दत से उसके लंड को मुठियाते हुए चूसते और चाटते है. एक उसके लंड को चूसती है तो एक उसके गेंदों को चूसती रहती है.

दीपू तो जैसे जन्नत पे पहुँच गया था उन तीनो के आक्रमण से उसके लंड के ऊपर. थोड़ी देर बाद कविता उठकर आती है और वो दीपू के मुँह पे बैठ जाती है और दीपू भी बड़े मजे से कविता की चूत चाटने लग जाता है.

अब चारो लोग बिजी थे. वसु और दिव्या उसका लंड चूसती तो दीपू कविता की चूत चूसते रहता है. अब इस घर में इनका अलावा कोई नहीं था तो पूरे कमरे में मादक आवाज़ों की गूँज उठी है लेकिन आज उनको कोई रोकने वाला नहीं था की कोई सुन ले. आज सब बहुत जोश था क्यूंकि ये आज पहला दिन था जब वो लोग ही घर में थे. उसका नतीजा ये होता है की जल्दी ही वसु और दिव्या के प्रहार से दीपू अपना पानी छोड़ देता है जिसे वो दोनों बड़े चाव से पी जाते है तो वहीँ कविता भी दीपू के मुँह में झड़ जाती है और अपना पानी छोड़ देती है.

अब चारो थोड़े थके थे तो दीपू बगल में कुर्सी पे बैठ जाता है तो वहीँ तीनो एक दुसरे पे टूट पड़ते है क्यूंकि उन्हें पता था की उनकी कामुकता को देख कर दीपू का लंड फिर से तन जाएगा और थोड़ी ही देर भी उनकी सोच सच हो जाती है.

जब तीनो एक दुसरे की चूत और गांड चूसते और चाटते रहते है तो उनका असर दीपू के लंड पे पड़ता है जो फिर से अपने फॉर्म में आ जाता है और पूरी तरह खड़ा जो जाता है.

दीपू फिर दिव्या को सुला देता है तो दिव्या को समझ आता है की अब वो बचने वाली नहीं है. दीपू फिर उसकी चूत और गांड चाटने लग जाता है तो दिव्या तो जैसे जन्नत पे पहुँच गयी थी और ज़ोर ज़ोर से सिसकारी लेती रहती है.

आआह्ह्ह्ह…. आआह्ह्….आह. आह. आह. आह. आह. उसको देख कर वसु और कविता भी उसके बगल में लेट कर उसकी चूची को मुँह में लेकर चूसते रहते है. इस तरह तीनो हमलो से दिव्या से रहा नहीं जाता और वो अपने दोनों हाथ दोनों के सर के ऊपर रख कर आँहें भरते हुए दीपू के मुँह में झड़ जाती है. वो इतना झड़ती है की दीपू का मुँह पूरा गीला हो जाता है. दीपू अपनी जीभ से अपने होंठ साफ़ कोफ्ते हुए दिव्या को देख कर.. लगता है तू भी बहुत उत्तेजित है जितना मैं हूँ.

दिव्या: क्यों नहीं.. तुम तीनो तो अपना कमाल मेरे बदन पे कर रहे हो.

दीपू: तो तैयार हो जाओ पूरी औरत बनने के लिए.

दिव्या उसे देख कर: थोड़ा धीरे करना. पहली बार है ना… तो कविता कहती है.. तू चिंता मत कर… पहले थोड़ा दर्द होगा. मुझे भी हुआ था… लेकिन जब एक बार दर्द कम होगा तो तुझे भी मजा आएगा.

दीपू फिर अपने लंड पे बगल में रखे तेल से अपना लंड पूरा भीगा देता है और वैसे ही दिव्या की गांड को भी तेल से भीगा देता है. जब वो पहली बार उसके गांड में लंड डालने की कोशिश करता है तो गांड का छेद बहुत टाइट होने की वजह से जाता नहीं है तो दीपू फिर से अपने लंड को उसकी गांड की छेद पे रख कर एक ज़ोर का धक्का मारता है.

इस धक्के से उसका लंड फक की आवाज़ के साथ उसका सुपाड़ा घुस जाता है. दिव्या स्पर्श से बरबस ही सिसक उठी “स्स्स्स्स….म्म्म्ह्ह्ह्ह”. दिव्या की तो जैसे जान ही निकल गयी थी. उसकी आँखें बड़ी हो जाती है और आँख से आंसू भी आने लगते है. दोनों वसु और कविता दिव्या के सर पे हाथ रख कर उसको सहयाता देते है और साथ ही उसकी एक चूची को मुँह में लेकर उसका ध्यान भटकाने की कोशिश करते है.

दीपू: हो गया जान… देखो अंदर चले गया ना..

दिव्या: हाँ तुम तो कहोगे ही…यहाँ तो मेरी जान निकली जा रही है.

दीपू वैसे ही थोड़ी देर रहता है और दिव्या को सँभालने का वक़्त देता है. थोड़ी देर बाद दीपू फिर से दिव्या की आँखों में देखता है तो वो आँखों से हाँ में इशारा करती है. दीपू कविता की तरफ देखता है तो वो समझ जाती है और वो उठ कर दिव्या के मुँह पे बैठ जाती है और उसकी चूत चूसने को कहती है क्यूंकि कविता को पता था की जब दीपू अपना पूरा 8.5 Inch लंड पूरा उसकी गांड की जड़ तक जाएगा तो दिव्या को बहुत परेशानी होगी. जब कविता दिव्या के मुँह पे बैठ जाती है तो वो दीपू को इशारा करती है और फिर दीपू फिर एक ज़ोर के सांस लेते हुए पूरी ताकत के साथ मस्त झटका मारता है और नतीजा ये होता है की उसका पूरा लंड दिव्या की गांड की जड़ में समा जाता है और जैसे कविता और दीपू को पता था… दिव्या उखड़ी हुई सांस के साथ सिस्कार उठी “आअहहहाआआहहसस्सशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशशश… म्म्म्ममममममममममममम” उसकी थकन भारी सिस्कारियां और आहें दीपू को मतवाला करती जा रही थी। दिव्या की तो जैसे जान ही निकल गयी थी. वो कुछ बोल नहीं पा रही थी ना चिल्ला पा रही थी क्यूंकि उसकी मुँह कविता ने अपनी चूत से बंद किया हुआ था. ये नज़ारा वसु भी देख लेती है और मन में सोचती है… ये तो अब पूरी औरत बन ही गयी है. उसका लंड तो पूरा उसकी गांड में चला गया है. वो जब दिव्या की तरफ देखती है तो उसकी आँखों में आंसू थे तो वसु आगे हो कर उसको समझाते हुए उसके आंसू पी जाती है जैसे उसे साफ़ कर रही हो और दिव्या को दिलासा देती है.

दीपू को भी समझ आता है की दिव्या को उसे बहुत दर्द हो रहा है तो उसका ध्यान बटाने के लिए वो वसु को इशारा करता है तो वसु झुक कर उसकी चूत अपने मुँह में लेकर उसके दाने को चुभाती है तो कभी वो दीपू का लंड अपने मुँह में लेकर उसे गीला करते रहती है जिससे दिव्या का ध्यान एकदम से उसकी चूत पे जाता है और एक समय के लिए वो अपनी गांड में हुए दर्द को भूल जाती है.

थोड़ी देर बाद जब दिव्या थोड़ा संभल जाती हस तो वो कविता को अपने ऊपर से हटा कर दीपू से कहती है: तुमने तो मेरी पूरी जान ही निकल दी है.

दीपू: ऐसे कैसे हो सकता है? तुम सब तो मेरी जान हो. फिर उसके ऊपर झुक कर प्यार से उसके होंठ चूमते हुए… जो दर्द होना तो वो हो गया है… अब तो तुम्हे मजा आएगा और ऐसा कहते हुए दीपू धीरे धीरे अपना लंड उसकी गांड में आगे पीछे करता हस जिसमें दिव्या को थोड़ी तकलीफ हो रही थी लेकिन अब थोड़ा मजा भी आ रहा था और फिर 2 Min बाद दीपू भी ज़ोर पकड़ता हस और मस्त रफ़्तार से उसकी गांड मारने लग जाता है.

अब उसे दर्द भी थोड़ा कम हो रहा था तो वो भी मजे से सिसकारी लेते हुए रहती है. “आह. आह. आह. आह. आह. आह. आह. आह.आ. आ. आ. आ..”..5 Min बाद अब उसकी गांड थोड़ी दुख्ने लगती हस तो वो दीपू को बोलती हस तो दीपू भी फिर अपना लंड उसकी गांड से निकल लेता हस तो फक की आवाज़ से उसका लंड बाहर निकल जाता हस और देखता हस की उसका पता भी नहीं चलता की दिव्या झड़ चुकी थी. कविता दिव्या को बगल में सुला कर उसके होंठ चूमती हुई कहती है.. कैसा लगा तेरी गांड का उद्धघाटन. दिव्या: तुम्हे तो हसी आ रही हस लेकिन मुझे बहुत दर्द हुआ. कविता: वो तो पहली बार होना ही था. क्यों जब तू पहली बार अपनी चूत खुलवाई थी तो दर्द नहीं हुआ था क्या? कविता की बात सुनकर दिव्या हस देती है और वापस कविता के होंठ चूम लेती है जैसे बताना चा रही हो की उसे भी थोड़ा मजा आया.

वापस यहाँ बिस्तर में दीपू पीठ के बल हो जाता है और वसु को उसके ऊपर बैठने के कहता है क्यूंकि दीपू का लंड अभी भी तन कर पूरे जोश में था तो वसु अपनी दोनों टांगें फैला कर उसके लंड पे बैठ जाती हैं मजे से उसके लंड पे कूदने लगती है.

वसु झुक कर दीपू को चूमते हुए अपनी गांड हिला कर उसका लंड पूरे अपनी चूत में लेती हुए मजे में झूलती रहती है. 5-10 Min बाद दीपू वसु को सुला देता है और फिर अपना लंड पूरी उसकी चूत में जड़ तक समां देता है और कस कस के चोदने लगता है.

दीपू: मजा आ रहा है ना?

वसु: पूछो मत… बहुत मजा आ रहा है. देखो ना तुम्हारा लंड मेरी चूत की जड़ तक चला गया है और जैसे वो मेरे पेट पे छुब रहा है.

दीपू भी हस्ते हुए.. अब तो तुम्हारे पेट पे चुबेगा लेकिन 9 महीने बाद एक छूता प्यारा नन्ना मुन्ना भी आएगा तो वसु शर्मा जाती है और जोश में आकर फिर से दीपू के होंठ पे टूट पड़ती हैं और पूरी शिद्दत से उसको चूमते रहती है. दीपू काफी देर से पहले दिव्या पे और अब वसु पे लगा हुआ था तो वो भी अब झड़ने के करीब था. वो वसु को कहता है तो वसु कहती है की वो अपना माल पूरा उसके अंदर ही छोड़े और फिर दीपू पूरी रफ़्तार के साथ 4-5 झटके मार कर अपना पूरा वीर्य उसकी चूत में ही छोड़ देता है. आज तो जैसे उसपर कोई जादू सा चल गया था क्यूंकि वो करीब १ Min से ज़्यादा अपना गाढ़ा माल वसु के अंदर दाल देता है.

आखिर में दीपू भी बहुत थक गया था और वो बगल में लुढ़क को अपनी साँसों को संभालते हुए आँखें बंद कर लेता है.

कविता: क्यों हमने कहा था ना की आज तुम्हारी खैर नहीं.

दीपू: 5 Min का समय दो. इन दोनों को तो थका दिया है.. फिर तुम्हारी ख़बर लेता हूँ और दिव्या की तरह तुम्हारी गांड भी आज बचेगी नहीं.

कविता: ना बाबा मैं तो मज़ाक कर रही थी. अब हम सब थक गए है तो अच्छे से सो जाओ.

दीपू: ठीक है अभी सो जाते है लेकिन कल तुम्हारी खैर नहीं.

वसु: हाँ आज ये बहुत चहक रही है. कल तुम इसे छोड़ना मत और ऐसा कहते हुए वो कविता को आँख मार देती है.

दिव्या भी अब मजे लेने लगती है और कहती है… कल तक क्यों? अभी हो जाए और कविता की और देख कर.. हम अपने हाथ और मुँह का जादू दिखा कर फिर से इसके लंड को खड़ा कर देते है और फिर तुम्हारी बारी या शामत आ जायेगी. बोलो तैयार हो?

कविता: आज नहीं… मेरी भी इच्छा है… मैं भी तुम जैसे ही कामुक हूँ…और चुदना चाहती हूँ.. लेकिन अगर हम ही अपने पति का ख़याल नहीं रखेंगे तो और कौन रखेगा? वो आज बहुत थक गया है तो उसे आराम करने दो. बाकी सब भी उसकी बात मान जाते है और आज पहली बार सब आराम से दीपू की बाहों में सर रख कर मस्त सो जाते है…

वैसे, सुबह दीपू कविता के कान में कहा था की आज रात वो दिव्या की गांड मारने वाला है तो उसे तैयार कर के रखना.

Please complete the required fields.