27th Update (निशा की शादी और सुहागरात) (Mega Update)
वसु: ये हुई ना बात.. इसीलिए हम तुम पे मरते है और फिर से तीनो के दुसरे को प्यार से किस करते है और आराम से सोने की कोशिश करते है.
इतने में वसु का फ़ोन रिंग होता है…..
अब आगे..
तीनो मस्त गहरी नींद में थे जब वसु का फ़ोन बजता है. लेकिन वो सब मस्त नींद में थे तो उनकी नींद नहीं खुलती. फिर थोड़ी देर बाद फिर से उसका फ़ोन बजता है तो इस बार वसु की नींद खुल जाती है और टाइम देखती है तो आधी रात हो गया था.. वो सोच में पड़ जाती है की इतनी रात किसने फ़ोन किया है उसको. नींद में ही उठते हुए अपनी आँखें मलते हुए फ़ोन को देखती है तो उसमें मनोज का नाम था. वो नाम देखते ही उसकी नींद उड़ जाती है और फिर फ़ोन receive करती है.
वसु: मनोज इतनी रात को फ़ोन क्यों किया? सब ठीक तो है ना वहां पे.
मनोज: नहीं दीदी इसीलिए मैंने तुमको फ़ोन किया है.
वसु थोड़ा घबराते हुए: क्या हुआ?
मनोज: दीदी हो सके तो जल्दी एक बार आ जाओ. माँ बाबा की तबियत बहुत ख़राब हो गयी है और डॉक्टर ने कहा है की वो अब कुछ दिन के ही मेहमान रह गए है. उनकी हालत दिन ब दिन बिगड़ती जा रही है.
वसु का ये बात सुनकर उसके चेहरे से पसीने आने लग जाते है और वो मनोज को कहती है की कल सुबह ही वो लोग जल्दी आ जाएंगे. चिंता मत करो.
मनोज: ठीक है सुबह जल्दी आ जाना और फ़ोन कट कर देता है.
वसु: अपने आप को संभालते हुए दिव्या और कविता को भी जगाती है.
दिव्या: नींद में, सोने दो ना दीदी..
वसु: फिर से दिव्या को जगाती है और थोड़ा जोर से कहती है: मनोज का फ़ोन आया है. हमें जल्दी घर जाना है. माँ बाबा की तबियत ठीक नहीं है. उसकी बात सुनते ही दिव्या भी झट से उठ जाती है. इतने में कविता भी उठ जाती है और वसु दोनों को मनोज के फ़ोन के बारे में बताती है. दोनों भी चिंतित हो जाते है और उन्हें भी थोड़ा डर लगता है.
कविता: कब जाना है हमें?
वसु: कल सुबह ही निकलना पड़ेगा. तुम जा कर मीना और निशा को भी बता दो. इतने में मैं दीपू को बुलाती हूँ अभी.
कविता: ठीक है और वो दोनों को बताने चली जाती है.
वसु दीपू को फ़ोन करती है.
दीपू भी अपने ऑफिस में मस्त गहरी नींद में था. लेकिन जब उसका फ़ोन बजता है तो वो उठ जाता है और वसु का नाम देख कर: थोड़ा मजाकिया अंदाज़ में: क्यों तुम लोगों का प्यार हो गया और मेरी याद आ रही है क्या?
वसु थोड़ा सीरियस होते हुए: तुझे हर वक़्त उसी की सोच रहती है क्या.
दीपू: इतनी रात में वसु का सीरियस बात सुनकर वो भी बैठ जाता है और पूछता है की इतनी रात उसने फ़ोन क्यों किया.
वसु फिर उसे मनोज के फ़ोन के बारे में बताती है और कहती है की वो अभी जल्दी घर आ जाए. कल सुबह उन्हें जल्दी जाना पड़ेगा. दीपू भी फिर हाँ कहकर वो भी अपने ऑफिस को बंद कर के जल्दी ही घर के लिए निकल जाता है.
थोड़ी देर बाद दीपू भी घर आ जाता है और उतने में ही मीना और निशा भी उठ जाते है. भले ही आधी रात थी लेकिन अभी किसी को नींद भी नहीं आ रही थी. वो रात किसी तरह गुज़ार लेते है और सुबह होते ही दीपू और सब लोग दीपू की कार में उनके नाना नानी के पास चले जाते है.
2-3 घंटे में वो लोग उनके गाँव पहुँच जाते है और जब वो उन दोनों को देखते है तो उनका दिल पिघल जाता है क्यूंकि वसु के माँ बाप की हालत बहुत बिगड़ गयी थी. वो लोग बहुत नाज़ुक नज़र आ रहे थे और उनके देख कर की लगता था की वो लोग अपने आखरी पल से गुज़र रहे है. वसु जो घर की सबसे बड़ी थी वो जाकर अपने माँ बाप के पास बैठ जाती है और रोते हुए कहती है की उन्हें कुछ नहीं होगा. लेकिन उसके माँ बाप को पता था की उनके जाने का वक़्त आ गया है.
बाप: रो मत बेटी. ये सब तो एक दिन होना ही है. हम दोनों चाहते है की तुम सब खुश रहो और दीपू को उनके पास बुला कर: ये तेरी माँ और पत्नी भी है और तू मेरा पोता भी है. इन सब की अच्छी देखभाल करना और उनको खुशियां देना.
दीपू भी थोड़ी नाम आँखों से: आप चिंता मत करो नाना. सब ठीक हो जाएगा. आपको तो अभी और जीना है. इतना जल्दी कैसे हमें छोड़ के जा सकते हो?
वसु की तरफ देखते हुए और फिर नाना की तरफ देख कर.. (वहां सब को पता था की दीपू झूट बोल रहा है ) अपने नए पोते को देखे बिना कैसे चले जाओगे? नाना और नानी ये बात सुनकर खुश हो जाते है ये सोच कर की वसु फिर से माँ बनने वाली है.
नाना नानी खुश हो जाते है और कहते है: तुम सब लोगों को यहाँ देख लिया है तो अब शान्ति से जा सकते है. बस हमारी 2 ही इच्छा रह गयी थी.
दीपू: क्या?
नानी: एक बेटी निशा की शादी देखना और दूसरा: अगर हम दादा दादी बन जाते तो हम चैन से चले जाए. ये बात सुनकर कर सब की आँखों में आंसू आ जाते है और दीपू कहता है की वो उनकी एक ख्वाइश भी जल्दी ही पूरी करेगा.
अब वो सब लोग उनके पास ही बैठे रहते है. दिन के करीब ११ बजे दिनेश दीपू को फ़ोन करता है.
दिनेश: मैं आ गया हूँ और तू गायब है. कहाँ चला गया है तू?
दीपू: सुन यार तुझसे एक ज़रूरी बात करनी है.
दिनेश: क्या है?
दीपू: सुन मैं नाना नानी के घर आया हूँ और उनके बारे में दिनेश को सब बता देता है और ये भी की वो लोग जाने से पहले निशा की शादी देखना चाहते है.
दिनेश: यार सुन मैं समझ सकता हूँ. एक बार मुझे माँ से भी बात करने दे.
दीपू: हाँ ज़रूर कर ले और आंटी भी मान जाए तो जल्दी हो सके तो आज ही आ जाना. ठीक है?
दिनेश: ठीक है.
दीपू दिनेश से बात कर के वसु को बुलाता है.
दीपू: माँ मैंने दिनेश से बात कर लिया है. आप भी एक बार उसकी माँ से बात कर लो और उन्हें यहाँ जल्दी बुला लो.
वसु: तू ठीक कह रहा है बेटा. मैं ऋतू को जल्दी ही फ़ोन करती हूँ.
वसु भी फिर थोड़ी देर बाद ऋतू को फ़ोन करती है और उनकी हालत के बारे में बताती है.
ऋतू: हम बहुत थके हुए है लेकिन हम आ जाएंगे. आप चिंता मत करो.
वसु: मैं बहुत आभारी हूँ की आपने हमारी बात मान ली है. एक बार उनकी शादी हो जाए तो फिर आप यहीं पर आराम कर लेना. मैं उसका इंतज़ाम कर दूँगी.
वसु फिर दीपू को बताती है की उसने भी ऋतू से बात कर ली है और वो लोग मान गए है और जल्दी ही वहां आ जाएंगे.
शाम तक ऋतू और दिनेश भी वसु के घर आ जाते है और वो लोग भी उनके माँ बाप को देख कर समझ जाते है की दीपू और वसु ने उन्हें जल्दी क्यों बुलाया है.
जब वो लोग आ जाते है तो वसु अपने माँ बाप से कहती है: देखो कौन आया है?
नाना और नानी बड़ी मुश्किल से देखते है लेकिन ठीक से पहचान नहीं पाते.
नाना: कौन है?
वसु: ऋतू बेहन और दिनेश आये है. आपने कहा था ना की आप निशा की शादी देखना चाहते है तो ये लोग मान गए है और कल ही उनकी शादी हो जायेगी. ये बात सुनकर दोनों के आँखों में आंसू आ जाते है और दिनेश और ऋतू को अपने पास बुला कर उनको आशीर्वाद देते है.
दिनेश और निशा की Simple शादी
अगले दिन घर में ही शादी का इंतज़ाम करते है क्यूंकि उनकी तबियत और खराब हो गयी थी. दीपू जाकर पुजारी को बुलाता है और फिर थोड़ी देर बाद घर में ही दोनों की शादी कर देता है. दिनेश भी निशा की मांग भर के शादी की रसम पूरी कर देता है और फिर वो दोनों जाकर उसका नाना नानी से आशीर्वाद लेते है.

नाना नानी देख कर बहुत खुश हो जाते है और फिर दीपू और वसु से कहते है की उनकी इच्छा पूरी कर दिया है. दोनों कुछ नहीं कहते और उनके पाँव छूते है. वो (नाना और नानी) दोनों को आशीर्वाद देते है और फिर वहीँ अपना दम तोड़ देते है. घर में बाकी सब बहुत उदास हो जाते है लेकिन किसी के बस की बात नहीं थी.
दीपू और दिनेश मिलकर वहां के बाकी काम निपटा लेते है (जैसे अंतिम क्रियाकर्म, etc ). इसमें ३- ४ दिन वहां लग जाते है. 4th दिन दिनेश कहता है की उन्हें वापस जाना चाहिए क्यूंकि अब काम बहुत बढ़ गया और वो लोग भी पिछले कुछ दिनों से यहीं है. दीपू भी उसकी बात मान जाता है.
ऋतू वसु से कहती है: आप चाहो तो कुछ दिन निशा को अपने साथ रख लो. जब आप लोग घर आ जाओगे तो बता देना. हम लोग आकर उसे अपने घर ले जाएंगे.
वसु: ये तो आपने बड्डपन है लेकिन एक बार मैं निशा से भी पूछ लेती हूँ. वसु फिर निशा से पूछती है तो वो भी वहां रुक जाती है.
वसु ऋतू से: निशा भी मान गई है. हम ३- ४ दिन में आ जाएंगे और हम ही निशा को आपके घर ले आएंगे.
ऋतू:ठीक है.
दिनेश भी दीपू से गले मिलता है और फिर दिनेश और ऋतू अपने घर के लिए निकल जाते है.
उनके जाने के बात यहाँ सब बाकी काम भी ख़तम करते है. अब ये घर थोड़ा खाली खाली लग रहा था.
दीपू मनोज से: मामा आप थोड़े दिन यहाँ रह लो. मैं जल्दी ही एक बड़ा घर लूँगा और फिर आप भी वहां आ जाना. हम सब साथ रहेंगे.
मनोज: देखता हूँ दीपू. फिलहाल तो मैं यहीं रहूंगा. मीना भी मेरे साथ रहेगी थोड़े दिन.
वसु: ठीक कह रहा ही तू मनोज. वसु मीना को अलग बुला कर..जब सब यहाँ ठीक हो जाए तो आ जाना. वो भी तेरा भी घर है और उसको प्यार से देखते हुए.. माँ बाबा का दूसरा इच्छा भी तो पूरा करना है ना. ये बात सुनकर मीना शर्मा जाती है और अपनी आँखें नीचे कर लेती है. वसु भी उसको गले से लगा लेती है और फिर १- २ दिन बाद मनोज और मीना को छोड़ सब वापस आ जाते है.
जब मनोज कविता को भी उनके साथ जाते हुए देखता है और पूछता है की माँ जी क्यों जा रही है तो मीना उसको बगल में बुला कर: तुम अभी चुप रहो. मैं तुमको बात में बाकी सब बात बताऊँगी.
फिर दीपू और बाकी सब अपने घर के निकल जाते है. मनोज और मीना वहीँ रह जाते है. घर पहुँचने के बाद सब फ्रेश हो जाते हस और दीपू अपने ऑफिस के लिए निकल जाता है.
दोपहर को वसु निशा से कहती है: तू तो शादी से खुश हस ना?
निशा: हां माँ… मैं खुश हो. मैंने ज़िन्दगी में सिर्फ दिनेश से प्यार किया है और दीपू से भी. मुझे मेरा मन चाहा पती मिल गया है.
वसु ये बात सुनकर बहुत खुश हो जाती है और प्यार से निशा का माथा चूम लेती है. तू तो हम सब की जान हो और हम भी तेरे से बहुत प्यार करते है.
निशा: आप सब भी मेरी जान हो.
वसु: ठीक है. तुम कब वहां जाना चाहोगी? जब तुम बोलोगी तो मैं ऋतू से कहकर तुमको वहां छोड़ आएंगे.
निशा: ठीक हस माँ.. २- ३ दिन के बाद मैं चली जाऊँगी. आप आंटी को बता देना.
वसु: अब वो तेरी आंटी नहीं सास है.. और हस देती है.
ऑफिस में दीपू दिनेश से मिलता है जो अपना काम कर रहा था. दिनेश दीपू को देख कर उसे गले लगाता है और पूछता है वहां का हाल. दीपू कहता है की वहां का सब काम हो गया है और सब वापिस लौट आये है. दिनेश भी खुश हो जाता है और फिर अपने काम में लग जाते है और फिर दोनों डिसकस करते है की बिज़नेस को और कैसे बढ़ाया जाए.
शाम को दीपू घर आता है तो सब नार्मल था और अपने काम में लगे रहते है. २ दिन बाद वसु दीपू से कहती है: दीपू आज निशा को वहां ले जाना है. अब उसे हम घर में ज़्यादा रखना अच्छी बात नहीं है. उसकी भी अब शादी हो गई है.
दीपू: हां सही कह रहे हो. आप आंटी को फ़ोन कर के बता दो ही हम निशा को लेकर आ रहे है.
वसु ऋतू को फ़ोन कर के बताती है की वो लोग शाम को निशा को लेकर उनके घर आ रहे है.
शाम को सब निशा को ऋतू के घर ले जाते है और फिर चाय पीते हुए सब बात करते रहते है.
निशा एक नज़र दिनेश पे डालती है तो वो भी उसे ही देख रहा था क्यूंकि निशा बहुत सुन्दर लग रही थी. उसको देख कर निशा भी हस देती है क्यूंकि दिनेश उससे कुछ कुछ बात करना छा रहा था.
ऋतू वसु से: अच्छा किया की आपने बेटी को ला दिया है. मेरा एक ही बेटा है और मैं चाहती थी की उसकी शादी थोड़ी धूम धाम से हो जाए.
वसु: हमारा भी कुछ ऐसा ही प्लान था लेकिन माँ बाबा की हालत और उनकी आखरी इच्छा को लेकर ये सब हुआ है.
ऋतू: मैं जानती हूँ. कोई नहीं.. अगले हफ्ते मैं एक पार्टी रखती हूँ और आप सब लोग ज़रूर आना.
वसु: जी हम ज़रूर आएंगे. फिर थोड़ी इधर उधर की बात होती है और वसु कहती है की वो लोग निकलेंगे.
ऋतू: ठीक है. आप निशा के बारे में चिंता ना करे. अब वो मेरी बेटी की तरह है. उसे यहाँ कोई परेशानी नहीं होगी. वसु ये बात सुनकर एकदम खुश हो जाती है और फिर ऋतू से गले लगती है जिसमें दोनों की चूची एक दुसरे से टकराती है और दब जाती है जिसे दोनों को एहसास होता है. दोनों एक दुसरे को देखते है लेकिन कुछ नहीं कहते और फिर वो लोग वहां से निकल जाते है.
उनके जाने के बाद दिनेश ऋतू और निशा रात को खाना खाने के बाद अपने कमरे में चले जाते है.
कमरे में आते ही दिनेश निशा को अपनी बाहों में लेकर उसके होंठ चूमता है जिसमें निशा भी उसका पूरा साथ देती है और दोनों एक मस्त गहरे चुम्बन में जुड़ जाते है.

दिनेश से रहा नहीं जाता और कहता है.. मैं इतने दिनों से इस पल का इंतज़ार कर रहा था की कब हमारी शादी हो और तू कब मेरी बाहों में होगी.उनके किस से निशा भी गरमा जाती है और उसकी चूत में हलचल होती है. वो निशा की चूची को दबाता है तो निशा कहती है: दिनेश मेरी एक बात मानोगे?
दिनेश: क्या?
निशा: मैं चाहती हूँ की १- २ दिन और रुक जाओ. मैं भी इस पल का बहुत दिनों से इंतज़ार कर रही हूँ.. लेकिन अभी मेरा मन नहीं है. अब भी नाना नानी की याद आती है. १- २ दिन का टाइम दो. मैं खुद ही तुम्हारे पास आऊँगी. दिनेश का मन नहीं करता लेकिन वो निशा क हालत को समझता है और हाँ कह कर फिर से उसकी चूची को दबाता है. दोनों फिर से एक बार और किस करते है और सोने चले जाते है.
क्यूंकि ये पहली बार था की निशा एक दुसरे घर में गई है तो वसु से रहा नहीं जाता और वो हर दिन निशा को फ़ोन कर के उसके बारे में पूछती है की वो कैसी है और वहां के क्या हाल है. निशा को भी पता था की उसकी माँ ऐसे क्यों पूछ रही है और वो भी कहती है की वो भी यहाँ अपने नए घर में खुश है. ऋतू ने जैसा बताया था वो निशा को भी अपनी बेटी सामान ही देखती थी और उसे कोई तकलीफ नहीं देती थी.
सुहागरात
३ दिन बाद जब दिनेश ऑफिस से घर आता है तो निशा उसका इंतज़ार कर रही थी और जिस पोज़ में वो कड़ी थी और उसका इंतज़ार कर रही थी उसे देख कर दिनेश का लंड खड़ा हो जाता है क्यूंकि वो बहुत सेक्सी पोज़ में खड़ी और झुकी हुई थी जिसमें से उसकी आधी चूची दिख रही थी जैसे उसके ब्लाउज से बाहर आने के लिए तड़प रहे हो और उसने अपनी साडी भी एकदम नाभि के नीचे बाँधा हुआ था और एक तरह से उसका कहना था की वो आज सुहागरात के लिए तैयार है.

दिनेश से रहा नहीं जाता और वो उसे वहीँ पकड़ कर अपने होंठ उसके होंठों से जोड़ देता है और निशा भी वैसे ही करती है. दोनों एक दुसरे की जुबां चूसते रहते है.

3 Min बाद निशा दिनेश को अलग करती है और कामुक नज़रों से उसे देखते हुए कहती है: थोड़ा रात के लिए सबर करो. माजी घर पे ही है. हम दोनों को देख लेंगी तो अच्छा नहीं होगा.
दिनेश: क्या करून.. तुझे देख कर मैं रुक नहीं सका.
निशा: मैं जानती हूँ.. और उसके पास आकर कान में कहती है.. मैंने जान बूझ कर ये कपडे ऐसे पहने है.. और हाँ आज मैं पूरी तैयार हूँ.. हमारी सुहागरात के लिए. ये बात सुनकर दिनेश भी बहुत खुश हो जाता है और फिर वो अपने कमरे में चले जाता है ये सोचते हुए की आज रात को मजा आने वाला है.
रात को खाना खा कर दिनेश अपनी माँ ऋतू से कहता है की वो अपने कमरे में जा रहा है. वो एक तरफ से वो ऋतू को बता रहा था की आज उसकी सुहागरात है. वो इसीलिए की जब से उसने ऋतू को होली के समय देखा था.. वो उसे और बेह्खाना चाहता था.. क्यूंकि उसके मन में अब ऋतू के लिए भी इच्छाएं जागने लगी थी.
जब वो कमरे में जा रहा था तो निशा उसे कहती है.. अभी मत आओ.. 10 Mins बाद आना और तब तक टीवी देखते रहो. दिनेश को समझ नहीं आता क्यूंकि वो उतावला था तो निशा कहती है… मेरी बात मानो. जब तुम १० मं बाद अंदर आओगे तो तुम ही कहोगे की मैंने बात सही कहा है. वो बेचारा मन मारता हुए बहार हाल में टीवी देखने लग जाता है.
10 Mins बाद जब दिनेश कमरे में जाता है तो तो निशा को देखते ही रह जाता है क्यूंकि वो एक लाल जोड़े में बिस्तर पे एक दुल्हन की तरह सजी होकर बिस्तर पे बैठी हुई थी और दिनेश का इंतज़ार कर रही थी.

दिनेश: तुमने सही कहा. अच्छा हुआ की मैंने तुम्हारी बात मानी है. वो धीरे धीरे बिस्तर पे आकर उसके बगल में बैठ ता है और उसका घूंघट उठा कर जब उसे देखता है तो देखते ही रह जाता है क्यूंकि वो एक लाल साडी और कैसे हुए ब्लाउज में जैसे वो जन्नत की पारी लग रही थी और उसे मांग भी भरी हुई थी.

दिनेश उसको देखता ही रह जाता हस तो निशा शर्मा के कहती है.. सिर्फ देखते ही रह जाओगे क्या? सुहागरात में दूल्हा दुल्हन को सिर्फ देखता ही रह जाएगा क्या और शर्मा के हस देती है.
दिनेश: क्या करून तुम तो जन्नत की पारी लग रही हो. तुम्हे पाकर मैं बहुत खुश हूँ और उसको अपनी बाहों में ले लेता है. फिर उसे देखते हुए अपने होंठ आगे करता है तो निशा भी समझ जाती है और दोनों के होंठ फिर से मिल जाते है और इस बार दोनों एक दुसरे के होंठों को चूसने और खाने लग जाते है और एक दुसरे का रस पीने लग जाते है.

किस करते वक़्त दिनेश निशा को बिस्तर पे सुला देता है लेकिन किस तोड़ता नहीं. दोनों फिर से अब बिस्तर पे सोये हुए एक दुसरे के होंठों को एक तरह से खाने लग जाते है.

थोड़ी देर बाद दिनेश निशा का ब्लाउज और ब्रा निकल कर उसकी मस्त उभरी हुई चूचियों पे टूट पड़ता है और उनको दबाते हुए चूचियों को चूमने और चाटने लगता है और साथ ही उसे दबाने भी लगता है.


निशा का इन सब में उसका हाल बेहाल हो जाता है और वो दिनेश के सर को अपनी चूचियों पे दबा देती है और कहती है पी जाओ इन्हे. बहुत तड़पा रहे थे. वो ऐसे ही बड़बड़ाती रहती है और उसके स्तन मर्दन से ही उसकी पैंटी पूरी गीली हो जाती है और अपना पहला रस बहा देती है.
10 Min बाद दिनेश नीचे आकर उसके साडी और पेटीकोट को निकालता है जिसमें निशा भी अपनी गांड उठा कर उसकी मदत करती है और दिनेश उसके गहरी नाभि को चूमता चाटता और कुदेरता है जिससे निशा का हाल और खराब हो जाता है.

वैसे ही चूमते चाटते हुए वो और नीचे आता है तो देखता ही की उसकी पैंटी तो पूरी गीली हुई है. वो उसकी चूत को पैंटी के ऊपर से ही चूमते हुए कहता है.. तुम तो पूरी गीली हो गई हो.
निशा: हाँ.. तुम जो इतनी देर से मुझे उत्तेजित कर रहे हो.. मेरी चूची चूस चूस कर और नाभि को भी चूम कर तो मेरा तो रस निकलेगा ही ना.. क्यों तुम्हारा लंड खड़ा नहीं हुआ है क्या?
दिनेश: कुछ देर में तुम ही देख लेना और ऐसा कहते हुए उसकी गीली हुई पैंटी निकल देता है और उसके रस से भर हुए फूली चूत को देखता ही रह जाता है… क्यूंकि वो एकदम गीली और रस से भरी और टपकती हुई लग रही थी और साथ में साफ़ सूत्री एकदम बिना बालों के जिसे देख कर दिनेश के मुँह में एक तरह से पानी आ जाता है.




दिनेश से भी अब रहा नहीं जाता और वो भी मस्त अपनी जीभ निकल कर उसकी चूत पे टूट पड़ता है और उसमें से उसका पूरा रस निकल निकल कर चाटने लग जाता हस और साथ ही अपनी एक ऊगली उसमें डालने की कोशिश करता हस तो वो ऊँगली उतनी आसानी से अंदर नहीं जाती. जिसे देख कर दिनेश निशा की और देखता हस और हस देता है. लेकिन निशा तो अपने ही मजे में मगन थी… निशा से रहा नहीं जाता और ज़ोर से सिसकी लेते हुए ऊऊऊईईईईईई माँ ओ ओ ऊईईईईईई ओह ओह ऊई जैसे आवाज़ निकलती रहती है और अपना हाथ दिनेश के सर के ऊपर रख कर उसकी चूत पे दबा देती है.



10 Min तक ऐसे ही उसकी चूत चाटने पे ना जाने कितनी बार निशा झड़ जाती है उसे पता भी नहीं चलता और हर बार दिनेश उसका रस पी जाता है.
जब वो अपने होंठ अलग करता है तो उसके होंठ निशा के रस से पूरा भीगा हुआ था और वो ऐसे ही निशा के ऊपर आकर उसके चूमता है जिसे बड़े चाव से निशा भी चूम लेती है. उसको चूमता देख कर दिनेश कहता है: कैसा है तुम्हारा रस? निशा भी शर्मा जाती है और अपने होंठ साफ़ करते हुए कहती है जैसे तुम्हे लगा.
दिनेश: मुझे तो बहुत मीठा लगा और जी भर के पीना का दिल कर रहा है.
निशा: तो पी लोना… किसने मना किया है?
दिनेश: वो तो होगा ही… तुम कह रही थी ना की मेरा लंड खड़ा है के नहीं… तो देख लो और फिर दिनेश भी नंगा हो जाता है और उसका लंड पूरी तरह से सलामी दे रहा था.

निशा दिनेश के लंड को देख कर कहती है.. ये तो पूरा तना हुआ है.
दिनेश: होगा ही ना.. जब तुम अपना पानी निकल सकती हो तो ये क्यों नहीं खड़ा हो सकता? अब तुम इसे दिखाओ की ये तुम्हे कितना पसंद है. यही तो वो खिलौना है जिसे तुम्हे रोज़ प्यार करना है और उसको देखते हुए उसकी चूची दबाते हुए कहता है… इसमें दूध भी यही खिलौना देने वाला है. निशा ये बात सुनकर शर्मा जाती है और फिर उसके लंड को अपनी जीभ से चाटते हुए पहले थोड़ा मुँह में लेती है.
दिनेश को भी मजा आ रहा था और दिनेश भी मस्ती में आकर अपने लंड को उसके मुँह में धकेलता है तो लंड आधे से ज़्यादा उसके मुँह में चले जाता है. अब निशा भी रंग में आ गई थी और वो भी पूरे शिद्दत से दिनेश के लंड को चूसने लग जाती है और फिर थोड़ी ही देर में उसका पूरा लंड निशा में मुँह में भर जाता है और निशा भी उसे अपने थूक से पूरा गीला कर देती है और साथ में उसके गेंदों को भी चूसती रहती है. अब तो वो पूरा अपने फॉर्म में आकर पूरा चमक भी रहा था. दिनेश तो जैसे उसके चूसने से जन्नत में पहुँच गया हो.





10 Min ले लंड चूसै के बाद दिनेश को लगता है की अब ऐसे ही कुछ देर और रहा तो वो अपना पानी निकल देगा जो वो चाहता नहीं था. वो फिर अपने लंड को निशा के मुँह से निकल कर उसे बिस्तर पे सुला देता है और अपने लंड को उसकी चूत पे रगड़ते हुए कहता है.. तुम तैयार हो?

निशा भी अपनी आँखों से इज़हार करती है और कहती है की ये मेरा पहली बार है तो थोड़ा आराम से डालना.
दिनेश: क्या डालूं और कहाँ डालूं.
निशा: तुम्हे पता नहीं है क्या?
दिनेश: शरारती मुस्कान के साथ मुझे नहीं पता.
निशा: चल झूठे.. सुन्ना है तो सुनो.. अपने लंड को थोड़ा आराम से मेरी चूत में डालना और मुझे औरत बनने का सुख देना. दिनेश भी खुश हो जाता है और फिर धीरे से अपने लंड को उसकी चूत में दाल देता है. उसकी चूत कुंवारी थी तो थोड़ा मुश्किल होता है लेकिन आखिर में थोड़ा जैम के धक्का मारता है तो उसका लंड चूत को चीरता हुआ अंदर घुस जाता है. जब लंड अंदर जाता है तो निशा के चेहरे के भाव बदल जाते है और उसे बड़ी सुकून मिलती है और वो दिनेश को ऐसे ही रहने को कहती है.


निशा: ऐसे ही थोड़ी देर रहो दिनेश. मुझे भी एहसास होने दो की मैं भी अब औरत बन गई हूँ. रोज़ अपने घर में आवाज़ें सुनकर मेरी भी इच्छा होती थी और तुमने मेरी वो इच्छा पूरी कर दी है. दिनेश भी ये बात सुनकर एकदम खुश हो जाता है कुछ पल वो ऐसे ही रहता है और निशा को देखते रह जाता है. थोड़ी देर बाद निशा आँखों से दिनेश को इशारा करती है तो दिनेश भी फिर धीरे धीरे निशा को चोदने लगता है और फिर धीरे धीरे उसकी गाडी भी स्पीड पकड़ती है और पूरे मस्ती के साथ वो निशा को चोदने लग जाता है.


पूरे कमरे में अब निशा की चीखें और सिसकारियां गूंजने लगती है और साथ में उसकी चूड़ियों और पायलों की आवाज़ भी. दिनेश भी अब उसे रोकने की कोशिश नहीं करता और नतीजा ये होता है की इसकी आवाज़ बगल के कमरे में सो रहे ऋतू को पड़ती है. ऋतू भी समझ जाती है की दुसरे कमरे में उसका लड़का और बहु मजे कर रहे है और वो भी गरम हो जाती है और उनको याद करते हुए वो अपनी साडी निकल कर अपनी चूत को मसलती रहती है और वो भी धीरे धीरे आन्हें भरने लगती है.

थोड़ी देर बाद दिनेश निशा को घोड़ी बना कर पीछे से चोदने लगता है जिसमें दोनों भी भी बहुत मजा आता है. निशा: ऐसे ही पेलो दिनेश. बहुत अच्छा लग रहा है.

दिनेश: मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा है और यहाँ से तुम्हारी गांड तो और भी मस्त लग रही है.
निशा: गांड के बारे में अब सोचना भी मत. मेरी कुंवारी चूत को खोल कर मैं तो वैसे ही दर्द ले रही हूँ लेकिन मुझे ये दर्द चाहिए था. अब तुम सिर्फ मेरी चूत पे ही ध्यान दो और फिर दिनेश भी लगातार उसको चोदने लगता है.
थोड़ी देर बाद निशा के घुटने में दर्द होता है तो दिनेश बिस्तर पे लेट कर उसे अपने ऊपर ले लेता है और उसकी चूची दबाते हुए उसको चोदने लगता है.


निशा भी अब बहुत गरम और मस्त हो गई थी और अब उसका दर्द भी अब सिसकारियों में बदल गया और वो भी मजे से ऊपर नीचे हुए दिनेश से चुदती रहती है. ये सब लगभग एक घंटे तक चलता रहा और अब दिनेश का भी पानी निकलने वाला था. वो भी अपनी चरम सीमा में पहुँचता है और कहता है की उसका भी होने वाला है निशा कहती है की वो उसके अंदर ही अपना पानी छोड़े. सुहागरात के दिन वो उसका पानी लेना चाहती है और कल सुबह वो एक गोली ले लेगी. दिनेश भी बहुत खुश हो जाता है और ३- ४ तेज़ धक्कों के बाद वो अपना पूरा पानी निशा की चूत में भर देता है और वो भी थक हार कर निशा के बगल में गिर जाता है.


ठीक उसी वक़्त दोनों निशा और दुसरे कमरे में ऋतू भी अपना अपना पानी छोड़ देते है. दोनों कमरे में तीनो लोग अपने आप को हल्का कर के आराम से सोने की कोशिश करते है.
दिनेश निशा से: अच्छा लगा? निशा दिनेश को चूम कर.. बहुत मजा दिया तुमने. ऐसे ही मुझे रोज़ प्यार करोगे ना?
दिनेश: जान ये भी कोई पूछने वाली बात है? और फिर दिनेश निशा को अपनी बाहों में लेकर दोनों सुकून की नींद मं चले जाते है.
Note:
- बहुत लोगों ने सुझाव दिया था की निशा की सील दीपू ही तोड़े. लेकिन कहानी के हिसाब से ये सही नहीं था वरना दिनेश और ऋतू का ज़्यादा Roleनहीं रहता कहानी में. बस इतना ही कहूंगा की सब लोग दीपू के नीचे आने वाले है. कौन, कब और कहाँ ये आगे जाकर पता चलेगा.
- इस अपडेट को लिखने में बहुत मेहनत करना पढ़ा. आप लोग Likes, Comments से मेरा प्रोत्साहन बढाए… ख़ास कर के Silent Readers. मैं फिर से यही रिक्वेस्ट करता हूँ.
