26th Update (सौतनों में प्यार)
कविता ये बात सुनकर शर्मा जाती है और दीपू को चूम लेती है .फिर दीपू कविता को अपनी बाहों में लेकर दोनों एक दुसरे से जुड़ते हुए सो जाते है.
अब आगे..
अगली सुबह:
अगली सुबह जब कविता उठती है और बाथरूम जाने की कोशिश करती है तो उससे चला नहीं जाता. उसे बहुत तकलीफ हो रही थी और वो बिस्तर से उठकर धड़ाम से नीचे गिर जाती है. उसके गिरने से दीपू की भी नींद खुल जाती है और वो कविता को नीचे ज़मीन में पड़े देख कर उसको उठाता है.
कविता: तुम बहुत गंदे हो. रात भी इतनी बार आगे और पीछे पेला है की मुझे बहुत दर्द हो रहा है और चला भी नहीं जा रहा है.
दीपू उसकी बात सुनकर है देता है और प्यार से उसे चूम कर कहता है.. क्यों मजा नहीं आया क्या?
कविता ये बात सुनकर शर्मा जाती है और प्यार से उसे मुक्का मारती है. दर्द भी देते हो और मजे भी. वसु सही कह रही थी की तुम एक लम्बे रेस के घोड़े हो.. जल्दी थकते नहीं हो लेकिन हम सब को ज़रूर थका देते हो. अब ऐसे ही रहोगे क्या? रूठी आवाज़ में कहती है.. अब मुझे बाथरूम में छोड़ कर आओ.
दीपू: बाथरूम में फिर से एक राउंड हो जाए क्या? और उसे आँख मार देता है.
कविता: ना बाबा ना.. मेरी हालत वैसे ही बुरी है. अब और झेलना मुश्किल है. तुम भी आराम करो और राउंड के बारे में सोचना भी मत. ऐसे ही दोनों मज़ाक करते हुए दीपू कविता को बाथरूम ले जाकर छोड़ देता है. कुछ समय बाद दोनों फ्रेश हो जाते है.
इतने में वसु और दिव्या भी उठ जाते है और किचन में चाय बना रहे होते है. कविता, जैसे वसु को पता था, लंगड़ाते हुए किचन में आती है. कविता को ऐसे आते देख कर दोनों वसु और दिव्या हस देते है.
वसु कविता को देख कर: क्या कहा था मैंने? तुम ऐसे ही लंगड़ाते हुए आओगी.. लेकिन तुम नहीं मानी. अब देख लिया ना.. कविता उसको रूठी नज़र से देखती है और पास आकर कहती है.. बहुत दर्द हो रहा है. ठीक से चला भी नहीं जा रहा है.
वसु: लगता है दीपू से खूब मजे किये हो.
कविता: मजा भी और दर्द भी. वो तो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था. वैसे कल रात उसने मुझे पूरा औरत बना ही दिया. मैंने मना किया था लेकिन वो कहाँ मानने वाला था.
वसु: पूरा औरत का क्या मतलब है? कविता उनके पास आकर दोनों को धीरे से बोलती है.. कल उसने मेरी जो बची कुंवारा छेद था वो भी खोल दिया और मुझे पूरा औरत बना ही दिया.
कविता की ये बात सुनकर दोनों वसु और दिव्या अपना मुँह खोले एकदम हैरान से कविता को देखते रहते है. कविता उनको ऐसा देख कर कहती है.. ऐसा क्या देख रही हो?
दिव्या: क्या कहा तुमने?
कविता: यही की अब मेरी तीनो छेद उसके नाम हो गए है. कविता वसु को अपनी बाहों में लेकर अपना हाथ उसकी गांड पे रख कर.. तुम दोनों के चेहरे को देख कर लगता है तुम दोनों अभी यहां से कुंवारी हो. वो तो गांड का बहुत दीवाना है. लगता है तुम दोनों का नंबर भी जल्दी ही आएगा.
वसु: तभी तो कहूँ तुम इतनी लंगड़ाते हुए क्यों चल रही हो. वसु भी उसको प्यार से चूमते हुए कहती है.. आज तुम दिन में कोई काम नहीं करोगी. जाओ और आराम करो.
मैं तुम्हे चाय के साथ एक गोली दे देती हूँ. खा कर सो जाना. थोड़ा अच्छे से आराम भी मिलेगा और रात को फिर तैयार हो जाओगी और उसे आँख मार देती है.
जब कविता कमरे में आराम करने जाती है तो इतने में वहीँ से दीपू भी बाहर निकलता है. उसको देख कर पूछता है तो वो कुछ नहीं कहती और कमरे में चले जाती है सोने को को दीपू किचन में जाता है चाय के लिए. दीपू को देख कर वसु कहती है: रात भर तो बहुत आवाज़ आ रही थी. लेकिन पता नहीं था की इतनी ज़ोर से आवाज़ क्यों आ रही है. अभी कविता से पता चला.
दीपू: क्या पता चला?
दिव्या: तुम इतने नादाँ भी नहीं हो की तुम्हे पता नहीं है. आखिर तुमने उसके पूरे दरवाज़े खोल ही दिए है.
दीपू: हस्ते हुए दोनों को देख कर.. जल्दी ही तुम दोनों भी वैसे ही लंगड़ाते हुए चलोगे और वसु को देख कर.. मैंने तो पहले ही तुम्हे बता दिया था.
दिव्या: (जो उसे मालूम नहीं था) क्या बताया है?
दीपू: तुम ही अपनी दीदी से पूछ लो.
दिव्या: दीदी बोलो ना.. दीपू की तरफ देखती है तो दीपू दिव्या के पास जाकर उसके कान में कहता है.. तुम्हारी दीदी के जन्मदिन पर उसके भी पूरे दरवाज़े खोल दूंगा और जल्दी ही तुम्हारा भी. समझी. दीपू की बात सुनकर दिव्या भी एकटक वसु को देखती रहती है लेकिन वसु कुछ नहीं कहती.
दोनों एक दुसरे को देख कर मुस्कुरा देते है क्यूंकि दोनों को उसका मतलब पता था.
वसु चाय बना कर कमरे में जाती है और फिर कविता को एक गोली भी दे देती है. कविता फिर सो जाती है और वसु अपने काम में लग जाती है.
दीपू भी चाय लेकर आँगन में जाता है तो वहां देखता है की मीना नहा कर अपने कपडे सूखा रही होती है. दीपू उसे देख कर एक मस्त सीटी मारता है क्यूंकि मीना थोड़े गीले कपड़ों में एकदम सेक्सी लग रही थी. (और मन में सोचता है की कितनी सेक्सी लग रही है मीना. अब उसे जल्दी ही चकना पड़ेगा. वो अब तक मीना के बारे में कभी ऐसा नहीं सोचा था लेकिन उसको इस रूप में देख कर उसका मन भी बहकने लगता है ) कपडे गीले होने की वजह से एक तरह से ट्रांसपेरेंट हो गयी थी और दीपू को उसका मस्त बदन दिख रहा था.

मीना दीपू को देख कर हस देती है लेकिन कुछ नहीं कहती. फिर वो अपना काम करने में लग जाती है. दीपू भी आंहें भरते हुए चाय पीते हुए वापस आ जाता है और टीवी चालू कर देता है. मीना फिर अपने कपडे बदल कर फिर से दीपू को चाय देने आती है. इस बार फिर से मीना को देख कर दीपू का मन डगमगाने लगता है. क्यूंकि मीना गज़ब की लग रही थी. साडी नाभि के नीचे बाँधा हुआ और गीला भी जिसमें से उसकी चूचियां जैसे बाहर आने को तड़प रही हो.


दीपू फिर अपना काम करके ऑफिस जाने को रेडी हो जाता है तो वसु उसके कमरे में बुलाती है.
वसु: बेटा सोच रही थी एक बात कहने को.
दीपू: बोलो.
वसु: जैसे मैंने कल तुझे बताया था… तूने तो बेचारी कविता को पूरा थका ही दिया है. कल तूने उसे बहुत प्यार दिया है. आज मैं और दिव्या भी उसे प्यार देंगे.
दीपू: ये तो बड़ी अच्छी बात है.
वसु: बात ये है की आज रात तू ऑफिस में रह.
दीपू: ऐसा क्यों? तीन तीन बीवियां है और मैं ऑफिस में रात गुज़ारूं. ये कैसे हो सकता है?
वसु: मैं जानती हूँ. अगर तू यहाँ हमारे साथ रहा तो तू हमको छोड़ेगा नहीं. मैं चाहती हूँ की तू भी थोड़ा आराम कर ले और कविता को भी आराम करने दे.
दीपू: कविता आराम करेगी लेकिन आप दोनों तो हो ना… एकदम तैयार.
वसु: तेरी बात तो सही है लेकिन आज के लिए मेरी बात मान ले. कल से तू एक दिन भी भूखा नहीं रहेगा. दीपू आखिर मान जाता है और वसु को बाहों में लेकर उसके होंठ चूसते हुए कहता है इसका बदला कल मैं तुम तीनों से लूँगा.

और आज तुम मुझे सूखा रख रही हो तो जल्दी ही इसे खोल दूंगा और ऐसा कहते हुए वो वसु की गांड दबा देता है.
वसु भी दीपू की आँखों में देखते हुए.. तूने मेरी बात मान ली है तो मैं और दिव्या भी तुझे मना नहीं करेंगे वहां के लिए. दीपू समझ जाता है लेकिन छेड़खानी करते हुए… कहाँ ले लिए? वसु शर्मा जाती है और उसको अपने गले से लगाते हुए धीरे से कान में कहती है.. तुझे जल्दी ही मैं और दिव्या हमारी गांड का उद्धघाटन करने देंगे. अब खुश? दीपू ये बात सुनकर एकदम खुश हो जाता है और फिर से दोनों के होंठ जुड़ जाते है.
इतने में दिव्या भी वहां आ जाती है और कहती है मैंने क्या गलती की है की मुझे ये प्यार नहीं मिल रहा है. दीपू भी दिव्या को गले लगा कर उसको भी चूमता है

और कमरे से जाते वक़्त वसु से कहता है.. मैं फिर कल आऊँगा. इस बात पर दिव्या वसु को देखती है तो वसु उसे आँख मार देती है और चुप रहने को कहती है.
दीपू के जाने के बाद वसु दिव्या को सब बताती है तो वो भी ख़ुशी से मान जाती है और फिर सब अपना काम करने में लग जाते है.
दोपहर को जब सब खाने को बैठते है तो कविता नज़र नहीं आती तो मीना पूछती है की माँ क्यों नहीं आयी?
वसु कहती है की माँ आराम कर रही है और उसे करने दो. खाना खाने के बाद मीना कमरे में जाती है तो कविता गहरी नींद में थी. मीना कुछ सोचती है फिर वो कविता को उठाती है. थोड़ी देर में कविता भी उठ जाती है और टाइम देखती है तो दोपहर हो गया था. कविता मन में… बाप रे..मैं इतनी देर सो गयी..
मीना: माँ तुम ठीक तो हो ना? इतनी देर तो आप पहले कभी सोई नहीं.
कविता: हाँ ठीक हूँ बेटा थोड़ी थकान की वजह से नींद लग गयी. अब मुझे थोड़ा ठीक लग रहा है.
मीना भी थोड़ा मज़ाक करते हुए.. ऐसा क्या हुआ की आप थक गयी थी?
कविता भी थोड़ा शर्माते हुए.. क्यों तुझे पता नहीं की मैं क्यों थकी हुई हूँ? थोड़ा शर्माते हुए.. तू भी तो अपनी सुहागरात के बाद थक गयी होगी.
इस बात पे मीना थोड़ा दुख हो जाती है और उसकी आँखों में १- २ बूँद आंसूं आ जाते है जिसे कविता समझ जाती है की उसने वो बात बोल कर गलती कर दी है. कविता मीना को अपनी बाहों में लेकर.. मेरा ऐसा कोई मतलब नहीं था.
मीना: ऐसी कोई बात नहीं है माँ… मैं तो बहुत खुश हूँ की तुम खुश हो. मुझे इससे ज़्यादा और क्या चाहिए. कविता भी मीना की आँखों में देख कर.. मुझे पता है की तू अब तक यहाँ क्यों है.. और धीरे से उसके कान में कहती है की तू यहाँ जिस लिए रुकी है वो ख़ुशी भी तुझे जल्दी ही मिलने वाली है और ऐसा कहते हुए कविता शर्म से अपनी आँखें नीचे कर लेती है. मीना भी हस्ते हुए… तो लगता है कल रात आपने बहुत मजे किये है.
कविता भी हस्ते हुए… वही मजा तुझे भी जल्दी ही मिलने वाला है… चिंता मत कर.. चल अब उठ जा… मैं भी तैयार होकर आती हूँ.
दीपू भी ऑफिस जाता है और अपना काम करता है और दिनेश से भी फ़ोन पे बात करता है. दिनेश कहता है की वो कल (दुसरे दिन) आ जाएगा और फिर वो दोनों ऑफिस और अपने काम के बारे में बात करते है.
दोपहर को कविता भी तैयार होकर खाना खाने आती है तो वसु उससे पूछती है की अब उसे कैसे लग रहा है.
कविता: अब ठीक हूँ. आराम भी मिल गया और दर्द भी कम हो गया है.
वसु: एकदम अच्छी बात है. याने तू आज रात के लिए फिर से तैयार है.
कविता: चुप हो जा.. कुछ भी बक्ति रहती है. एक रात में ही उसने मेरी हड्डी पसली एक कर दी है और आज फिर से तैयार रहने को बोल रही है. मुझे आज भी आराम की ज़रुरत है.
वसु: आज रात को तुझे पता चलेगा. चल खाना खा ले और आराम कर. फिर सब लोग खाना खा लेते है और आराम करते है.
शाम को सब फिर उठ कर चाय पीते है तो उन्हें दीपू दिखाई नहीं देता.
निशा: माँ भाई कहाँ है?अब तक आया नहीं है.
वसु: बेटा आज उसे बहुत काम है. उसने फ़ोन कर दिया की वो आज रात ऑफिस में ही रह कर काम करेगा.. और ऐसा कहते हुए वो कविता को देखती है और जब कोई उनपर नज़र नहीं डालता तो वो कविता को आँख मार देती है. कविता ये देख कर शर्मा जाती है भले ही उसे पूरा आगे रात को क्या होगा उसे पता नहीं था.
रात को :
रात को सब खाना खा कर ऐसे ही बातें करते है और जब सोने की तैयारी करते है तो मीना और निशा अपने कमरे में चले जाते है क्यूंकि आज दीपू नहीं था तो वो दोनों साथ सोने की सोचते है.
निशा: मामी चलो आज साथ सोते है. थोड़ी बात भी कर लेंगे. वैसे भी आपसे बहुत कम बात हुई है. आज थोड़ा समय भी मिला है और दीपू भी नहीं है. वो तीनो साथ सो जाएंगी… क्यूंकि अब उनको आदत डालनी पड़ेगी और हस देती है. फिर ऐसे ही बात करते है और सब अपने कमरे में चले जाते है.
कविता दोनों को बुलाती है तो वसु कहती है: कविता तुम चलो… हम अभी आते है तो कविता अपनी गांड मटकाते हुए कमरे में चली जाती है और उनका इंतज़ार करती है जहाँ वो वैसे साडी और ब्लाउज पहनती है जिसमें से उसकी चूचियां एकदम झलक रही थी.


थोड़ी देर बाद वसु और दिव्या भी कमरे में आते है तो तीनो एक दुसरे को देख कर हस देते है क्यूंकि तीनो ही एकदम सेक्सी लग रही थी. जहाँ कविता बैठे हुए उनका इंतज़ार कर रही थी वहीँ वसु और दिव्या भी एकदम सेक्सी ट्रांसपेरेंट साडी पहने हाथ में दूध का गिलास लेकर आती है.

अंदर आकर वसु दरवाज़ा बंद करते हुए कहती है: कल दीपू ने तुझे प्यार किया था. आज हम दोनों तुझे अपना प्यार दिखाएँगे की तू हमें कितनी पसंद है और तू भी इस घर की महारानी है. वसु की बात सुनकर कविता एकदम शर्मा जाती है और फिर कुछ देर बाद
वसु: तू तो बड़ी गदरायी हुई लग रही है. देख तेरे निप्पल भी एकदम तन गए है.
कविता: क्यों नहीं. तुम दोनों को इस पारदर्शी कपड़ों में देख कर मैं भी बहक रही हूँ और उत्तेजित हो रही हूँ.
दोनों फिर बगल में बैठ कर एक दुसरे को चूमते है. इस एक चुम्बन से ही कविता एकदम गरमा जाती है और फिर वसु को पकड़ कर अपने होंठ उससे मिला लेती है और दोनों एक गहरे चुम्बन में जुड़ जाते है.


दोनों को पता भी नहीं चलता दोनों कब एक दुसरे के कपडे निकाल लेते है और दोनों ब्रा पैंटी में हो जाते है और किस का मजा लेते है. वहीँ दिव्या भी उन दोनों को देख कर गरमा जाती है और वो भी अपने कपडे निकाल फेकती है जैसे किसीने उस पर आग लगा दी हो.
वसु कविता को सुला कर उसकी पैंटी निकल कर उसकी रसीली चूत पे टूट पड़ती है और अपनी जुबां अंदर दाल कर उसकी चूत चूसने लग जाती है. कविता आंहें भरते हुए वसु का सर अपनी चूत पे दबाते हुए बड़बड़ाती और सिसकारियां लेती है.. ऊऊऊईईईईईई माँ ओ ओ ऊईईईईईई ओह ओह ऊई


उन दोनों को देख कर दिव्या भी गरम हो जाती है औरअपनी चूत मसलते रहती है.

थोड़ी देर बाद दिव्या दोनों से: तुम दोनों ही लगे रहोगे क्या? लगता है मुझे भूल गए. मैं भी यहाँ हूँ.
कविता: तुमको कैसे भूल सकते है? सोचा पहले वसु को अपनी चूत का मलाई पीला दूँ. फिर तुमको पीला दूँगी… क्यूंकि वसु जब दिव्या की चूत चाटती है तो कविता रह नहीं पाती और अपना पानी छोड़ देती है जिसे वसु बड़े मस्त तरीके से पी जाती है.
दोनों फिर से एक बार चूमते है और इस बार दोनों वसु और कविता दिव्या के पास जाते है. उनके आते ही दिव्या कविता के होंठों को अपने होंठों से जोड़ लेती है और दोनों एक मस्त गहरे किस में डूब जाते है और वसु भी दोनों का सर पकड़ कर एक दुसरे की और बढ़ा देती है.

फिर उसे सुला देते है और फिर दोनों उसकी चूचियों पे टूट पड़ते है और दोनों दिव्या की तानी हुई चूची को मुँह में लेकर चूसते है और दुसरे हाथ उसकी चूत पे ले जाकर मसलते रहते है.

दिव्या दोनों का सर अपनी चूची पे दबा देती है और उनके ऐसे करने से वो भी झड़ जाती और अपना पानी छोड़ देती है.
निशा के कमरे में:
वहीँ दुसरे कमरे में निशा और मीना बात करते रहते है.
निशा: और मामी आप कैसी हो?
मीना: मैं तो ठीक हूँ. तुम सुनाओ.. तू भी अपनी शादी के बारे में सोच रही हो ना.. अब तो तेरा इस घर में भी बहुत मुश्किल होगा.. और ऐसा कहते हुए वो निशा की और देख कर हस देती है जिसका मतलब निशा को भी पता था.
निशा: हाँ आप सही कह रही हो मामी. रोज़ दीपू माँ और मौसी को देख कर मेरा भी बहुत जी करता है और सोचती रहती हूँ की दीपक कैसा रहेगा बिस्तर पे.. क्या मुझे वो ठीक से प्यार कर पायेगा या नहीं.. क्यूंकि रोज़ उनके कमरे से आवाज़ सुनकर मेरा भी बुरा हाल हो जाता है.
मीना: मैं समझ सकती हूँ. माँ कह रही थी की वो कल बहुत मजे किये उसने. वैसे एक बात पुछूं.
निशा: हाँ पूछो ना..
मीना: जब दीपू ने कहा था की वो उन दोनों से शादी करेगा तो तू क्या सोच रही थी?
निशा: पहले तो मुझे थोड़ा झटका लगा लेकिन जब उसका राज़ जाना तो मैं ये सोच कर रह गयी की दीपू के जीवन में ये सब लिखा है तो जो होना है वो होक रहेगा.
मीना: क्या राज़?
निशा फिर मीना को वो सब बताती है जिसके बारे में वसु ने उन्हें पहले बताया था.
मीना: ओह ओह… ये तो हम सब को पता भी नहीं था.
निशा: हाँ ये बात सिर्फ हम अपने पास ही रखा और किसी को नहीं बताया. शायद इसी के चलते उसने तीसरी शादी भी कर ली है. और मुझे ये भी पता है की जो भी उसकी ज़िन्दगी में आएंगे सब बहुत खुश रहेंगे उससे. तो मैं जानती हूँ की माँ जी (मीना की माँ) भी अब बहुत ख़ुशी से अपनी ज़िन्दगी जियेगी.
मीना: मैं भी यही चाहती हूँ और इसीलिए मैंने भी उनकी शादी के लिए हाँ कहा क्यूंकि दीपू है ही इतना सुन्दर और समझदार.
वसु के कमरे में
यहाँ कमरे में Scene बदल चूका था. अब वसु सोई हुई थी और दिव्या उसकी चूत चाट रही थी तो वहीँ कविता वसु की एक चूची को चूस रही थी

थोड़ी देर बाद जब दिव्या उसकी चूत चाट रही होती तो कविता उसके मुँह पे बैठ कर अपनी चूत वसु से चटवा रही थी.

ऐसे ही तीनो मस्त अलग अलग पोजीशन में आकर एक दुसरे को मजा देते है और सब एक दुसरे की चूत और गांड चाट कर ना जाने तीनो कितनी बार अपना पानी छोड़ देते है.




इतने में मीना को प्यास लगती है तो वो किचन में जाकर पानी पीकर जब उनके कमरे से आवाज़ सुनती है तो वो खिड़की से अंदर का नज़ार देख कर रह नहीं पाती और अपनी साडी के ऊपर से ही अपनी चूत मसलते हुए सोचती है की वो तीनो कितनी खुश है और उसे निशा की बात याद आती है की दीपू उन्हें कितना खुश रखेगा.

ये सिलसिला ऑलमोस्ट 1.5-2.00 घंटे चलता जहाँ तीनो खूब मजा करते और आखिर में तीनो एक साथ किस करते है और थक कर एक दुसरे की बाहों में लेट जाते है और वहीँ मीना भी उनसब को देख कर अपना पानी छोड़ कर अपने आप को ठीक कर के सोने चली जाती है.
वसु: कविता वैसे एक बात बताओं.. और एक राज़ भी.
कविता वसु को आश्चर्य से देख कर… क्या?
वसु: यही की मुझे पता था की तेरी शादी दीपू से होने वाली है.
कविता: कैसे?
वसु फिर कविता को पुरानी बातें बताती है. शायद तुझे पता नहीं.. लेकिन देख.. तेरी कमर पे भी एक तिल है. और जब कविता झुक कर अपनी कमर पे वो तिल देखती है तो उसे भी आश्चर्य होता है.
कविता: आज तक मैं इतनी बार नंगी नहायी हूँ लेकिन मेरा ध्यान कभी उस पर नहीं गया. तुझे जैसे पता चला?
वसु: याद है तुम्हे अपना पहला मिलन?
कविता: हाँ याद है.
वसु: उस दिन ही मैंने देखा था की तेरी कमर पे तिल है. मुझे उस वक़्त ही लगा था की तेरी भी दूसरी शादी होगी. एक और बात.
कविता: क्या?
वसु: यही की जिनकी कमर में ऐसा तिल होता है वो बहुत कामुक होती है.. जैसे तुम और मैं और फिर वसु भी उसे अपनी कमर का तिल देखती है. वो देखते ही कविता का मुँह खुला का खुला रह जाता है.
वसु हस्ते हुए.. मुँह बंद कर ले वरना मक्खी घुस जायेगी.
दिव्या: हाँ सही कहा दीदी. मैं जानती हूँ तुम भी बहुत कामुक हो और हर बार चुदने के लिए तैयार रहती हो और हस देती है. और अब वैसा ही काल कविता का भी होगा.. देखना… एक भी दिन वो दीपू के लंड के बिना नहीं रह पाएगी.
ये बात सुन दोनों वसु और कविता शर्मा जाते है लेकिन कविता कहती है दिव्या से: तू ठीक कह रही है. कल रात उसने जो मजा दिया है आगे और पीछे से लगता नहीं अब मैं उसके बिना रह पाऊँगी.
वसु: लेकिन एक और बात… थोड़ा सीरियस होते हुए… हम तुमसे जानना चाहते है ताकि आगे जाकर किसी को कोई तकलीफ ना हो.
कविता: क्या बात है?
वसु: यही की हम तो और नहीं चाहेंगे की वो और शादी करे… लेकिन अगर उसकी ज़िन्दगी में और लडकियां या औरतें आये तो तुम क्या कहोगी?
कविता: वही जो तुम्हारा फैसला होगा.
दिव्या: हमने तो दीपू से कह दिया है… की अगर उसकी ज़िन्दगी में और कोई आएगा और शादी करेगा तो शायद तकलीफ हो लेकिन हम संभल जाएंगे.. बस वो हमें कभी ना छोड़े और उसका हमारे लिए कभी प्यार कम ना हो. इस बात पे दीपू भी कहा है की हम तो उसकी जान है. अब तुम आ गयी हो तो तुम भी हम दोनों में शामिल हो. अब तुम्हे क्या कहना है?
कविता: मेरी भी यही इच्छा है की उसका प्यार कभी कम ना हो. बाकी जैसे वक़्त आएगा उस पर छोड़ दे.
वसु: ये हुई ना बात.. इसीलिए हम तुम पे मरते है और फिर से तीनो के दुसरे को प्यार से किस करते है और आराम से सोने की कोशिश करते है.
इतने में वसु का फ़ोन रिंग होता है….
