chapter 21
आरोही के घर – दोपहर 12 बजे
कमरे मे आरोही बैठी हुई थी आरोही के सामने उसका भाई अमर भी बैठा हुवा था आरोही थोरि अंदर से डरी हुई थी अमर आरोही को हि देख रहा था आरोही नजरे नीचे किये हुवे थी
अमर आरोही को देख – मेरी बेहन मेने तुझे टीनू के साथ गारी मे जाते हुवे उसी दिन देख लिया था उसके बाद मेने तुमपे नजर रखी तो तुम फिर टीनू से मिली उसके बंगलो पे भी गई चल क्या रहा है
आरोही को बहोत बरा झटका लगता है आरोही को उमीद नही थी उसके भाई को सब पता चल गया होगा आरोही अब डर से कापने लगती है
अमर आरोही के सर पे हाथ फेरते हुवे प्यार से – तुम मेरी प्यारी छोटी बेहन हो मे वादा करता हु तुमपे गुस्सा नही करुगा बस मुझे सब सच सच बताना परेगा हर एक बात
आरोही डरते हुवे अपने भाई को देख – क्या आप सच केह रहे है आप मुझपे गुस्सा नही करेगे ना
अमर आरोही के चेहरे को पकर आखो मे देख – तुम मेरी एक ही प्यार छोटी बेहन हो और मे तुमसे बहोत प्यार करता हु अब बताओ
आरोही अभी भी बहोत डर रही थी कियुंकी आरोही को अच्छे से पता था उसने जो किया या जिस रास्ते पे वो चल रही है उसे जान उसका भाई गुस्सा जरूर करेगा लेकिन आरोही अमर से बहोत प्यार करती है और अमर की वजह से हि आरोही अदिति से गुस्सा थी कियुंकी आरोही अमर का दुखी नही देख सकती थी
आरोही अपनी मुठी कस हिम्मत कर सुरु से लेकर सब एक एक सच टीनू से मिलना टीनू के साथ जो किया उदय के साथ रात मे जो किया सब सच बता देती है एक भी बात नही छुपाती
सारी सचाई बताने के बाद आरोही नजरे नीचे किये डर से कापते हुवे रोने लगती है
अमर अभी भी अपने आप को सांत रखता है
अमर आरोही को देख – और तुमने ये सब कियु क्या
आरोही रोते हुवे – मुझे अमीर वाली लाइफ जीनी थी लेकिन एक बरी वजह है अदिति
अमर सांत आवाज मे – अदिति कियु
आरोही – कियुंकी उसने आपसे शादी करने से मना कर दिया अगर अदिति आप से शादी कर लेती तो सायद मे ये सब नही करती
अमर – और इस लिये तुम टीनू उसके पापा उदय के साथ मिल गई ताकि बदले के साथ तुम अमीर भी बन सको
आरोही रोते हुवे – हा भइया मुझे माफ कर देना लेकिन मुझे कोई पचतावा नही है ये सब करने का कियुंकी मे आपको दुखी नही देख सकती
अमर – मेरी गोद मे आके बैठो
आरोही अमर की गोद मे आके बैठ जाती है अमर आरोही को बाहों मे भर के – तो तुम मुझसे इतना प्यार करती हो
आरोही रोते हुवे – हा बहोत प्यार करती हु
अमर आरोही के आसुु साफ करते हुवे – पेहले रोना बंद करो मे तुम्हारे साथ भी छोटी बेहना
आरोही हैरान होते हुवे अमर को देख – क्या मेने जो किया उसके लिये आप मुझसे गुस्सा नही है
अमर आरोही को देख – नही मेने कहा ना तुम जो करोगी मे उसमे तुम्हारा पुरा साथ दुगा कियुंकी मुझे अपनी बेहना की खुशी चाहिये तुम अमीर बनना चाहती हो बनो बदला लेना चाहती हो लो मे भी साथ हु
आरोही अमर को देख हैरानी से – मुझे लगा आप गुस्सा करेगे
अमर मुस्कुराते हुवे – बेहना अगर मुझे तुझे रोकना होता तो पेहले दिन ही रोक देता दूसरी अदिति से मे प्यार करता था लेकिन उसने मेरे प्यार को मेरी फीलिंग को नही समझा तो उसे उसकी कीमत तो चुकानी हि परेगी
आरोही बहोत हैरान थी आरोही को यकीन नही हो रहा था उसके भाई के दिल मे भी अदिति से बदला लेने की चाह है
अमर – और वो कमीना अदिति का भाई साला कुता अगर वो नही आता तो अदिति मेरी हो जाता लेकिन पता नही कैसे हरामखोर किड्नैपर् के बच कर भाग आया तो उसकाे मरना होगा फिर अदिति मेरी हो जायेगी ( अमर आरोही को देख) और तुम मेरा साथ दोगी बोलो दोगी ना मेरा साथ
आरोही बहोत खुश हो जाती है और अमर को देख – हा
अमर आरोही को देख मुस्कुराते हुवे – ये बताओ उदय अंकल को मे क्या बोलू अंकल या जीजा
आरोही अपने भाई की बात सुन बहोत शर्मा जाती है
आरोही – आप जो बोलो लेकिन भाई मा पापा का क्या
अमर मुस्कुराते हुवे – उन्हें भी मना लेगे
अमर आरोही को पकर बिस्तर पे लेता कर आरोही के ऊपर आके आरोही की आखो मे देखने लगता है आरोही पूरी हैरान हो जाती है
आरोही डरते हुवे – भाई आप ये किया कर रहे है
अमर आरोही को देख – मुझे तुम चाहिये मेरी बेहना

आरोही कापते हुवे – भाई मे आपकी बेहन हु
अमर – जानता हु लेकिन तुम नही चाहती तुम मुझे प्यार नही करती तो बोल तो मेने सोचा हम दोनो मिल कर अमीर बनेंगे और बदला लेगे अपनी लाइफ साथ मे जियेंगे मजे से लेकिन तुम नही चाहती तो कोई बात नही
अमर उठ कर जाने लगता है आरोही अमर को जाते देख एक मुस्कुराते हुवे – मेरे भाई रूठ कर मत जाओ
अमर आरोही की बात सुन मुस्कुराते हुवे आरोही के पास आके बैठ जाता है
अमर आरोही को देख मुस्कुराते हुवे – चलो भी छोटी बेहना अब बता भी तो तुम अमीर भी मेरे लिये बनना चाहती हो और तुम्हे मेरे बारे मे सब पता है
आरोही अमर को देख मुस्कुराते हुवे – हा मुझे पता है आप माहा कमीना है अदिति को लेकर आपके दिल मे प्यार नही दो चीजे थी अदिति आपसे शादी कर लेती है तो ठीक है अच्छा है लेकिन पेहला था अदिति के साथ मजे करना शादी करे या ना करे चलेगा
अदिति को आप भी पाना चाहते थे टीनू भी जब आप का पता चला टीनू अदिति के पीछे परा है और जब टीनू को पता चला आप अदिति के पीछे है तो आप दोनो एक जगह मिले आप दोनो मे बाते हुई
टीनू – देखो अमर मुझे अदिति चाहिये रास्ते से हट जाओ और अदिति से दूर रहो
अमर हस्ते हुवे – टीनू अदिति मुझे भी चाहिये सच कहु तो अदिति को पाना मेरे लिये भी बहोत मुश्किल है लेकिन तेरी बात करू तो तेरे लिये नामुमकिन है कियुंकी अदिति जानती है तुम कैसे लरके हो
टीनू – अबे साले म जैसा भी हु तुझे क्या मे अपना देख लूंगा अब तु बीच मे से हट जा नही तो कसम से तेरी जान ले लूंगा
अमर टीनू को देख मुस्कुराते हुवे – मे अदिति से शादी करना चाहता हु लेकिन उसके लिये मेरे दिल मे प्यार नही है पेहले तो मे उसके मजे लूंगा फिर शादी कर रोज मजे लूंगा और बाहर कोई मिली उसके साथ भी लरकी अच्छी है एक ना एक दिन मुझे शादी करनी है तो इस लिये अदिति खूबसूरत अच्छी दिल कि है इस लिये उसे चुना
टीनू झटका खाते हुवे – साले तु तो मेरे जैसा माहा कमीना निकला रे
अमर टीनू को देख मुस्कुराते हुवे – जब तुम्हे पता चल गया है तो कियु ना हम हाथ मिला ले तुम अगर मेरा साथ दोगे तो में अदिति का जरूर अपने नीचे लेके आऊगा
टीनू अमर कि बात सुन जोर जोर से हस्ते हुवे – साला पेहली बार किसी ने मुझे इतना बरा झटका दिया है मे तो कमीना हु छुपाता नही लेकिन साला तु अपने भोले चेहरे के पीछे अपना कमीना पन छुपा कर रखता है सही है
अमर – कमीने हसना बंद कर बोल साथ देगा
टीनू अमर से हाथ मिलाते हुवे – दूँगा लेकिन अदिति का सील मे तोरुगा
अमर टीनू को देख मुस्कुराते हुवे – चलेगा लेकिन उसकी कीमत तुझे चुकानी होगी
टीनू मुस्कुराते हुवे – बहोत पैसा है मेरे पास
अमर मुस्कुराते हुवे – तब तो ये डील हुई
टीनू बियर निकाल अमर को देते हुवे – तो बता क्या प्लान हो अदिति को कैसे नीचे लायेगा
अमर बियर पीते हुवे – अदिति को नीचे लाना बहोत बहोत मुश्किल होगा लेकिन नामुमकिन नही है
टीनू बियर पीट हुवे – हा ये मुझे भी पता है अदिति दूसरे लरकी की तरह नही है
अमर – ये भी है लेकिन सब से बरी परोबलम है उसके दोनो भाई
टीनू हैरानी से अमर को देख – दोनो भाई केहना क्या चाहता है
अमर – अदिति अपने दोनो भाई के खोने के बाद हमेसा गम मे ही डूबी रहती है और अपना ध्यान किसी चीज मे किया अपने उपर भी दे नही पाती ये बरी परोबलम है लेकिन मेरे पास प्लान है मुझे पता है कैसे अदिति को अपने प्यार मे गिराना है
टीनू – अबे साले अब प्लान भी बता दे
अमर मुस्कुराते हुवे – उसके लिये तुम्हे विलन मुझे हीरो बनना परेगा वैसे हम दोनो तो विलन है ही
टीनू गुस्से से – फिर पहेली पूरी बात बता
अमर – गुस्सा मत कर बताता हु अदिति को प्यार मे गिराने के लिये मुझे उसकी नजर मे हीरो बनाना परेगा करना ये है तुम अदिति को बहोत परेसान करो मे उसी समय मे आके उसे बचाऊगा और कुछ दिन ऐसे ही चलेगा तुम हमेसा अदिति को परेसान करना में आके उसे बचाऊँगा फिर एक दिन तुम गुस्से से अदिति के साथ जबरदस्ती करने की कोसिस करना फिर मे आऊगा अदिति को बचाने लेकिन इस बार तुम गुस्से से मुझे बहोत मारना लेकिन याद रहे साला मेरी हड्डी मत तोर देना फिर देखना अदिति मेरे प्यार मे गिर जायेगी फिल्मी है लेकिन अदिति जैसी लरकी पे पूरी काम करेगी
टीनू अमर को देख – साला तु तो मुझसे भी माहा कमीना निकला दन जैसा तूने बोला मे करेगा लेकिन ये बता मान लिया अदिति तुझसे पट गई लेकिन मे उसकी सील कैसे तोरुगा
अमर टीनू को देख – अदिति एक सर्मिलि लरकी है मुझे यकीन है पेहली बार हमारे बीच चुदाई होगी तो वो उजाले मे नही अंधेरे मे करने के लिये बोलेगी फिर आगे समझ जा
टीनू अपना सर पकर – मान गया साले तुझे आज से मेरा पक्का दोस्त
आरोही मुस्कुराते हुवे – टीनू आपने जैसा प्लान किया था उस दिन वो काम भी कर गया था अदिति आपके लिये आसु बहा रही थी लेकिन आपकी टीनू कि बुरी किस्मत उसी वक़्त अदिति का भाई आ गया और उसके टीनू कि बजा दी और अदिति को ले गया फिर अदिति सब खतम
अमर गुस्से से – हा उस दिन कमीना नही आता तो हमारा प्लान उसी दिन काम कर जाता और अदिति मेरे प्यार मे गिर जाती ( अमर आरोही को देख ) तुझे कैसे पता इतना सब
आरोही मुस्कुराते हुवे – मे कोई बेवकूफ नही हुई आपकी हरकत मेरी नजर मे रहती थी कई बार मेने टीनू से आपको मिलते बात करते सुना था तभी से मे भी अदिति को फोर्स करने लगी लेकिन जब आपका प्लान फेल हो गया तो
अमर मुस्कुराते हुवे – तो तुमने टीनू के साथ मिलकर प्लान बनाया फिर जब अदिति से मिल कर टीनू से मिलने बंगलो मे गई तो टीनू कि जगह उदय अंकल मिले फिर तुन्हे पता चला उदय अंकल तुन्हे चाहते है और तुम्हे ये एक अच्छा मोक्का दिखा मेरा सपना पुरा करने का फिर तुमने टीनू को छोर उदय अंकल को फसा लिया
आरोही हस्ते हुवे – टीनू का कुछ नही है ना टीनू के पास उतनी पावर जब बरी मछली फस रही थी तो मे भला कैसे उसे जाने देती
अमर आरोही के सर पे हाथ फेरते हुवे – मुझे आज पता चला मेरी छोटी बेहना मुझसे इतना प्यार करती है की मेरे लिये इतना सब कर गई लोव यू बेहना लेकिन अब से मे भी तेरे साथ हु
आरोही अमर के गले लग – जब आप मेरे साथ है तो अब मुझे कोई डर नही है
अमर आरोही को बिस्तर पे लेता के आरोही के ऊपर आके अपना लंड आरोही के कपड़े के ऊपर से ही चूत पे घिसने लगता है आरोही कि सिसकिया निकल जाती है
अमर आरोही को खा जाने वाली नजर से देख – किया तुम्हे पता है अदिति
तभी आरोही अमर को मा का बुलावा सुनाई देता है अमर आरोही के चुचे दबाते हुवे – मेरी छोटी बेहना बाद मे तुम्हारी गर्मी निकालूँगा चलो मा बुला रही है
आरोही अमर को देख मुस्कुराते हुवे – अच्छा देखती हु आप अपनी छोटी बेहन की चूत की गर्मी निकाल पाते है या नही
दोनो एक दूसरे को देख मुस्कुराते हुवे कमरे से बाहर आ जाते है
अभय के घर दोपहर 1 बजे
अभय अपनी मा के ऊपर लेता हुआ था अभय का सर आसा के बरे मुलायब चुचे पे रख आराम से आखे बंद किये लेता हुवा था आसा अभय को बाहों मे लिये अपने बेटे के नीचे लेती हुई थी दोनो मे बाते चल रही थी

अभय – मा शादी की कार्ड कल ही मिल जायेगी लेकिन 3 दिन काजल बुआ ने कहा है मे उनको घर छोर आउ दूसरी मेरे कुछ साथी है उनको भी कार्ड देने मुझे उनके घर जाना होगा तो में सोच रहा था काजल बुआ के वहा से ही अपने दोस्त के घर जाके सब से मिल कर कार्ड डेकर आउ
आसा अभय को देख – इसका मतलब है तुम कुछ दिन घर नही आ पाओगे
अभय – हा आपने सही कहा कियुंकी शादी की डेट नजदीक है और बहोत से काम बाकी है जैसे कपड़े गेहने शादी का जोरा बारातियों के लिये गारी खाना डीजे सासु मा के यहा भी सब मुझे ही देखना होगा बहोत काम है इसी लिये पेहले जाके ये सब निपटा लेता हु
आसा अभय के बाल सेहलाते हुवे – हा बात तो लाला तुमने सही कही ठीक है तुम जा सकते हो
अभय आसा को देख – अच्छा बरा जल्दी मान गई सेक्सी मा मुझे लगा आप कहेगी मत जा
आसा मुस्कुराते हुवे – केहना चाहती थी लेकिन मुझे पता है कुछ कामो के लिये तुम्हे बाहर जाना हि होगा
अभय मुस्कुराते हुवे – सही कहा वैसे मेरा दिल भी आप सब से दूर जाने का नही करता लेकिन काम तो करना परेगा

आसा मुस्कुराते हुवे – वो तो ठीक है लेकिन मे तुम्हारी कोई गद्दा नही हु जो मेरे उपर आराम से आके लेत जाता है
अभय आसा कि आखो मे देख – सेक्सी मा गद्दे से जायदा मजा तो मुझे आपके उपर सोने मे आता है मुलायम गर्म गर्म
आसा शर्मा के – लाला तु भी ना कुछ भी बोलता है अब तो शादी हो रही है अपनी बीवी को गद्दा बनाना और सोना
अभय मुस्कुराते हुवे आसा के कान मे धीरे से – आप कि जगह कोई नही ले सकता आपकी बात अगल है जितना मजा आपके साथ आता है उतना मुझे किसी और के साथ नही आयेगा
आसा के का चेहरा सर्म से लाल होने लगता है अभय की बात सुन

अभय आसा की आखो मे देखता है आसा अभय की आखो मे अभय फिर आसा के लाल होठो को देखने लगता है आसा अभय के नजरो का पीछा कर समझ जाती है और अपने होठो को थोरा खोल देती है

अभय मुस्कुराते हुवे अपना होठ आसा के होठ से सता कर आसा के होठ को थोरा मुह मे लेके चूस कर हट जाता है और आसा को देख मुस्कुराते हुवे – आपको कैसे पता चला मुझे किस्सी चाहिये
आसा मुस्कुराते हुवे – कियुंकी मे तेरी मा हु लाला
तभी अदिति भाई भाई हुवे अंदर आती है और अभय को अपनी मा के ऊपर प्यार से सोते देखती है
अदिति मुह फुलाते हुवे – मा ये गलत है आप भाई को हमेसा अपने पास चिपका कर रखती है मुझे भी भाई का प्यार चाहिये
अभय आसा को देखता है आसा अभय को देखती है फिर दोनो मुस्कुरा देते है अभय अपनी मा के ऊपर से नीचे साइड पे लेत जाता है और अदिति को देखते हुवे
अभय – आजा मेरी प्यारी गुरिया
अदिति भी बिना देरी किये अभय के ऊपर लेत अपना सर अभय के सीने पे रख देती है अभय भी अदिति का बाहों मे भर लेता है
अदिति मुस्कुराते हुवे – अब सुकून मिला मुझे
आसा अभय अदिति की तरफ लेत कर दोनो को देखने लगती है
आसा अदिति को देख मुस्कुराते हुवे – अच्छा लेकिन जब तेरी शादी होगी तब किया हा तब भाई के बिना कैसे रहेगी
आसा की बात सुन अभय अदिति की आखो मे देखता है अदिति अभय की आखो मे फिर अभय अदिति आसा को देख
अभय – जब की तब सोचेंगे कियु गुरिया
अदिति आसा का देख मुस्कुराते हुवे – हा फिल्हाल तो मे अपने भाई के साथ हि रहूगी
आसा सर पकर – तुम दोनो का जो मन करे करो
अभय आसा को देख – मा मेरे पास आओ ना
आसा मुस्कुराते हुवे अभय से पूरा सत् जाती है और अभय की सीने पे सर रख लेत जाती है तीनो एक दूसरे को मुस्कुराते हुवे देखते है फिर आखे बंद कर लेते है
साम 3 बजे
आसा अभय अदिति एक नींद लेने के बाद सभी उठ चुके थे अभय फ्रेस् होने के बाद अपने बाइक पे बैठ दिशा से बाते करते हुवे मधु के घर जाने लगता है
अभय – मेरी जान किया कर रही हो
दिशा – क्या करुगी घर के बाहर आपसे बात कर रही हु
अभय – मेरी रानी कुछ सोचो ना मेरे बारे मे रहा नही जा रहा
दिशा सर्म से लाल होते हुवे – मे किया करू
अभय – मिलने का प्लान करते है ना
दिशा हैरानी से – क्या लेकिन कैसे कहा
अभय मुस्कुराते हुवे – बोलो तो रात को घर आ जाऊ
दिशा गुस्से से – कोई जरूरत नही है पता है ना उस रात हमने वो सब क्या तो घर मे मा गुरिया को भी पता चल गया था
अभय – ये तो तुम्हारी गलती थी ना जरूरी था आह उह्ह्ह् मा जोर जोर से करना
अभय कि बात सुन दिशा सर्म से पानी पानी हो जाती है
दिशा – अच्छा सब मेरा हि दोस् है आपका इतना बरा मोटा है और उपर से तेज तेज धक्के मार रहे थे तो मे किया करती
अभय हस्ते हुवे – शादी हो जाने दो फिर रोज तेज तेज धक्का रोज मारुंगा
दिशा सर्म से – छि गंदे हर वक़्त आपके दिमाग मे वही सब चलता है
अभय – किया करू खूबसूरत हॉट बीवी जो मिली है
दिशा शर्मा के- आप भी ना
अभय – अच्छा सुनो 3 दिन मे काजल बुआ को छोर अपने दोस्त के यहा जाने वाला हु कार्ड देने मिल भी लूंगा सब से
दिशा – ये तो अच्छी बात है
अभय – हा उसके बाद सारी तैयारी करने के बाद शोपिंग पे सब चलेंगे
दिशा – अच्छा ठीक है समझ गई लेकिन ज्यादा खर्चा मत कीजियेगा
अभय – मेरी जान तुम उसकी चिंता मत करो अच्छा मधु का घर आ गया है एक किस्सी देदो ना
दिशा शर्मा के – उम्मा
अभय – आई लोव यू मेरी रानी
दिशा – आई लोव यू
फोन कट
दिशा मुस्कुराते हुवे पीछे मूर घर मे जाने को होती है तो देखती है पूजा फिर घूर के देख रही थी
दिशा पूजा को देख गुस्से से – रुक आज तुझे मे सबक सिखा कर रहूगी बिग्रैल लरकी हमारी बाते सुनने मे सर्म नही आती है
दिशा पूजा कि तरफ भागती है पूजा दिशा का गुस्से से आता देख
पूजा भागते हुवे अंदर जाते हुवे – क्या करू दीदी आप और जीजा जि कि रोमांटिक बाते सुनने मे मजा आता है
मधु के घर
अभय बाइक साइड पे लगा के अंदर जाता है अभय मधु के कमरे मे जाता है तो मधु बिस्तर पे लेत मोबाइल मे गेम खेलने मे लगी हुई थी
अभय मधु को देख -तो खेल खेला जा रहा है हा
अभय कि आवाज सुन मधु जल्दी से फोन रख अभय को देख बहोत खुश हो जाती है मधु भाई केहते हुवे जाके अभय के गले लग जाती है
अभय मधु को बाहों मे लिये – मेरी गुरिया
तभी कमरे मे सिला आते हुवे अभय मधु को देख मुस्कुराते हुवे – आ गया बेटा
अभय सिला को देखता है और सिला के पास जाके सिला को बाहों मे लेके सिला को देख मुस्कुराते हुवे – हा मेरी हॉट छोटी मा
सिला अभय के गाल को सेहलाते हुवे – शैतान
सिला मधु अभय तीनो बिस्तर पे बैठ जाते है
अभय – छोटी मा मे 3 दिन काजल बुआ को छोराने जाने वाला हु और वही से दोस्त के घर भी जाउंगा तो मे 3 दिन तक घर नही रहुंगा
मधु हैरानी से – क्या लेकिन फिर मे आपको तीन दिन तक नही देख पाउंगी ( मधु उदास हो जाती है)
सिला मधु को देख – बेटा मर्द को बहोत काम होते है तो उन्हें जाना परता है अभय बेटा के सर पे सब कि जिमेदारी दारी है
अभय मधु के चेहरे को पकर आखो मे देख – मे वादा करता हु जब मे आऊगा तो हम दोनो घूमने चलेंगे
घूमने वाली बात सुन मधु खुश होते हुवे – पक्का ना
अभय हस्ते हुवे -पक्का
सिला मुस्कुराते हुवे – तुम्हे तो बस भूमने का मोक्का चाहिये
मधु मुस्कुराते हुवे – भाई के साथ घूमने का मुक्का कोन छोर सकता है मेरी प्यारी मा
सिला हस्ते हुवे – लगी रे बाबा मुझे क्या चलो तुम दोनो बाते करो मे गाय को चारा देने चली
अभय – जी मा
सिला चली जाती है अभय मधु को पकर बिस्तर पे लेता कर मधु के ऊपर आ जाता है मधु अभय को देखने लगती है

अभय – गुरिया अब तेरी शादी के बारे मे भी मुझे सोचना होगा
मधु हैरान होते हुवे – क्या मुझे अभी शादी नही करनी पेहले अदिति दीदी की होगी फिर सोचुगी
अभय मुस्कुराते हुवे -अच्छा चलो ठीक है यही सही वैसे मेरा वजन जयादा तो नही लग रहा
मधु शर्मा के – नही
अभय मुस्कुराते हुवे मधु के गाल पे किस करते हुवे उठ कर बैठ जाता है
अभय मधु को देख – अच्छा गुरिया मे अब चलता हु
मधु – इतनी जल्दी
अभय मुस्कुराते हुवे – गुरिया अभी शादी तक मुझे बहोत काम करने है कई लोगो से मिलना है
मधु – समझ गई भाई ठीक है
अभय मुस्कुराते हुवे – अच्छी गुरिया
अभय आँगन मे जाता है सिला को देख अभय सिला को बाहों मे लेते हुवे – छोटी मा अब मे जा रहा हु
सिला मुस्कुराते हुवे – अच्छा तो जा ना
अभय मुस्कुराते हुवे – किस्सी बगैर कैसे जाऊ
सिला मुस्कुराते हुवे -अच्छा ये बात है
सिला अभय के होठो पे किस करते हुवे – अब खुश

अभय मुस्कुराते हुवे सिला के कान मे धीरे से – अभी चलेगा लेकिन बाद मे मुझे आपकी ढोरी चातुंगा
सिला शर्मा के – ठीक है चात लेना मेरे लाल
अभय सिला को छोर – ठीक है छोटी मा मे जाता हु
अभय बाइक पे आके बैठ निकल परता
उदय के बंगला
एक कमरे मे आरोही टांगे फैलाये लेती हुई थी उदय आरोही के उपर पुरा लेता हुवा अपना लंड आरोही की चूत मे डाले जोर जोर से धक्का मारे जा रहा था आरोही उदय को बाहों मे पकरी आह मा बहोत दर्द हो रहा है आप जोर से धक्का मार रहे है धीरे करिये
उदय धक्का मारते हुवे – मेरी जान दर्द मे हि मजा है और तेरी चूत की गर्मी तेज धक्के से हि जायेगी ( आरोही दर्द मे – आह आपका केहना भी सही है दर्द मे मजा तो बहोत आ रहा है

उदय – मेरी जान कुछ भी कहो तुम और तुमारी चूत बहोत कमाल कि है ( उदय लंड पीछे लेके जोर से धक्का मार देता है आरोही दर्द से ) मर गई मा बहोत दर्द हुवा मुझे ( आरोही के आखो मे आसु आ जाते है ) आह और तेज मेरा पानी निकलने वाला है आरोही बिस्तर पकर कापते हुवे आह मा निकल गया उदय आह मेरा भी भी
उदय आरोही को अपने बाहों मे लेके – मेरी जान सोचा नही था इस उमर मे मुझे तुम से प्यार हो जायेगा मुझे खुद यकीन नही हो रहा जबकि मेने कई लरकी औरतो की चुदाई कि है लेकिन अब मुझे बाकी कि जिंदगी तुम्हारे साथ जीनी है
आरोही उदय को देख – यकीन तो मुझे भी नही हो रहा मुझे आपसे प्यार हो गया अब तो मुझे भी आपके साथ जीना है लेकिन चैन से तब जीयुगी जब अभय अदिति उसके चाहने वालो का खतम कर दुगी
उदय – ये हुई ना मुझे लगा तुम मार काट नही करोगी
आरोही उदय को देख मुस्कुराते हुवे – जब मेरी जान किसी को मारने मे जरा नही सोचता तो मे कियु सोची मुझे भी आप के लेवल पर होना परेगा ना
उदय खुश होते हुवे – ये बात तुमने मेरा दिल खुश कर दिया अब बनी हमारी जोरि विलन वाली
आरोही – अच्छा सुनिये भाई भी अब हमारे साथ है और भाई ने आपको जीजा मान लिया है
उदय खुश होते हुवे आरोह को देख – सच
आरोही मुस्कुराते हुवे – ना
उदय – ये हुई ना बात लेकिन तुम्हारे पापा मा का किया
आरोही – समझिये आज रात उन्हें भी मना लुगी
उसय – नही माने तो मुझे केहना
आरोही उदय को गुस्से से देख – आपके सास ससुर है समझ गये अपना कमीना पन हमारे दुश्मन को दिखाना समझ गये आप
उदय डरते हुवे – समझ गया बाबा
आरोही मुस्कुराते हुवे – आप चिंता मत कीजिये मान जायेंगे दोनो
उदय मुस्कुराते हुवे – फिर तो ससुराल जाके तुम्हारी चूत मारुंगा लेकिन हा जल्दी मा पापा को मना लो और इस बंगलो मे आके रहो सेफ रहेगा समझ गई
आरोही – जैसा आप कहे लेकिन अदिति अभय का क्या सोचा
उदय – ठीक है सुनो टीम रेडी है हम जब चाहे अपना काम कर सकते है
आरोही – ना ना ना अपना काम अभय के शादी के दिन ही होगा अभय की वजह से ही सब हुवा है तो अभय जब बारात लेकर अपनी दुल्हन लेने जायेगा उसके बाद हम अभय के मा बेहन बाकी जो उनके अपने है सब को उठा लेगे ( आरोही जोर जोर से हस्ते हुवे ) बेचरा जब सुबह दुल्हन लेके आयेगा तो उसे घर मे कोई नही मिलेगा ( आरोही उदय को देख) लेकिन सब को हम रखेगे कहा
उदय मुस्कुराते हुवे – मेरी जान मेरे कई ऐसे गुप्त ठिकाने है जहा कोई पहुँच नही सकता ना किसी को पता है
आरोही उदय को किस करते हुवे – मेरा बाबू तब को परोबलम् खतम
उदय मुस्कुराते हुवे – अभय जायेगा दुल्हन लेने उसके पीछे घर पे जो होगे लरकी औरते ही होगे तो कई चूत मिलेगी
आरोही – मे नही चाहती आपका लंड मेरे अलावा किसी और की चूत मे जाये लेकिन उस कमीने के अपने जो है उसकी चूत मे अपना लंड डालने से नही रोकूगी
उदय आरोही को देख – जैसा तुम कहो मेरी जान
आरोही मुस्कुराते हुवे – मुझे फिर आपका लंड मेरी चूत मे चाहिये
उदय – तो सुरु हो जाओ
आरोही उदय के लंड पे बैठ कूदने लगती है मजे से लंड लेके आह उह्ह्ह् मा मजा आ रहा है आह
रात – 8 बजे – अभय के घर
आँगन मे चटाइ बिछी हुई थी आसा बैठी हुई थी और अभय आसा की गोद मे सर रख लेता हुवा था मा बेटे मे बाते चल रही थी
वही अदिति कान मे बुलुटूथ लगाये खाना बनाते हुवे मधु से बात करने मे लगी हुई थी मधु भी सेम खाना बनाते बात कर रही थी
तभी काजल मिनिता अंदर आते है मिनिता आसा अभय को देख
मिनिता मुस्कुराते हुवे – मा बेटे मे क्या बाते चल चली है
काजल मुस्कुराते हुवे – हमे भी बताओ भाई
आसा अभय सामने देखते है
आसा मिनिता काजल को देख मुस्कुराते हुवे – आओ आओ तुम दोनो का ही इंतज़ार था बैठो
मिनिता काजल दोनो बैठ जाते है
काजल अभय को देख – बता क्या बात चल रही थी
अभय मुस्कुराते हुवे – क्या बात होगी बुआ शादी की तैयारी को लेकर बाते चल रही थी
मिनिता – हा सही भी है सारी जिमेदारी तूने जो ली है
काजल – ये बता 3 दिन चल रहा है ना मुझे घर छोरने
अभय मुस्कुराते हुवे काजल को देख – चलुंगा लेकिन 10 किस्सी होठो मे लूंगा
काजल हैरानी से – ओये बुआ से रिस्वत मांग रहा है
आसा हस्ते हुवे – लाला को मोक्का मिलता है तो छोरता
मिनिता हस्ते हुवे – दीदी ये आपकी देन है इसी लिये किस के पीछे परा रेहता है
आसा मुस्कुराते हुवे – मेने अपने लाला को बहोत प्यार से पाला है मेरी
काजल – हा और वो प्यार आपके दोनो के बीच दिखता भी है भाभी
अभय काजल को देख – तो बताइये मंजूर है या नही
काजल सोचते हुवे – बहोत जायदा है कम करो
अभय हस्ते हुवे – यहा भी मोल भाव लगाना सुरु कर दिया लेकिन एक भी कम नही होगा
मिनिता हस्ते हुवे – ननद रानी पता है ना किस के पीछे कितना पागल रेहता है कम नही करेगा मान जाइये
काजल मुह फुलाते हुवे – ठीक है
अभय मुस्कुराते हुवे – तो दन हुवा डील
काजल अदिति को देख – किया बना रही हो अदिति
अदिति पीछे देख – बुआ रोती बना रही हु उसके बाद चना की सब्ज़ी बनाऊगी
मिनिता – बहोत खूब लगी रहो
काजल अभय को देख – चल रहा है तो एक दिन मेरे घर रेहना परेगा समझ गये
आसा हस्ते हुवे -लाला को पेहले से पता था आप उसको रोकेगी इसके लिये पेहले ही लाला ने मुझे बता दिया था
काजल मुस्कुराते हुवे – क्या बात है मान गई
मिनिता – ये बताओ घर का क्या यही से बारात लेकर जाओगे
अभय – मेने घर ले लिया है यहा से 20 मिनट की दूरी पे है घर मे समान सजावट का काम बाकी कुछ बदलाव करवाये है उसका काम चल रहा है जल्दी ही काम पुरा हो जायेगा लेकिन मे चाहता हु उस नये घर मे सीधा कदम मेरी बीवी का परे ना की इस घर मे बाकी गाव वालो को भोज खिलाना बारात जाना ये सब है तो इसी लिये सब कुछ इसी घर से होगा लेकिन दिशा घर की बहु सीधा नये घर मे जायेंगे मेने मा को बता दिया है बारात के सुबह होते हि सब नये घर चले जाये गारी आयेगी सब को लेने
मिनिता – वाह सब सोच कर रखा है मान गई
काजल – मे भी लेकिन मुह दिखाई गाव की लरकी बहु औरते कैसे करेगी
अभय – अरे बुआ जिनको आना होगा आके वहा देख लेगे वैसे भी सब ने देखा तो है ही
काजल – ये भी सही है
और 30 मिनट बाते होती है फिर मिनिता काजल चले
खाना रेडी था आसा अदिति अभय बैठ कर खाते है और अपने कमरे मे चले जाते है
अभय अपनी मा के कमरे मे जाता है और आसा फिर आसा के ऊपर लेत जाता है
आसा हस्ते हुवे – फिर आके लेत गये
अभय मुस्कुराते हुवे – आप मेरे उपर आ जाओ फिर
आसा मुस्कुराते हुवे – मेरा वजन संभाल पाओगे
अभय आसा कि आखो मे देख – आपके लाला मे इतना दम है की आपको अच्छे से संभाल लेगा
आसा मुस्कुराते हुवे – तो ठीक है संभाल लो
अभय लीचे लेत जाता है आसा अभय के ऊपर लेत जाती है आसा का पुरा सरीर अभय के शरीर से पुरा चिपक गया था आसा के चुचे हर अंग अभय अपने शरीर पे फिल कर पा रहा था और अपनी मा के शरीर कि गर्मी भी

आसा अभय को देख – मान गई संभाल लिया तूने
अभय आसा को देख – आपका बेटा हु मेरे सरीर मे आपका खून डोर रहा है तो मे कमजोर कैसे हो सकता हु

अभय इमोसनल होते हुवे के होठो पे किस करते हुवे -मेरा लाला
अभय अपनी मा के कमर पकर कस लेता है आसा आह करती है दोनो के जिस्म पुरा सटे हुवे थे बीच मे हवा जाने की भी जगह नही थी
लेकिन दोनो मा बेटे मे प्यार था सिर्फ प्यार अभय कुछ देर बाते करने की बाद
अभय – गुड नाइट सेक्सी मा
आसा – गुड नाइट मेरे हैंडसम लाला
अभय फिर अदिति के पास आता है अभय अदिति से भी थोरा बात कर अदिति के गाल पे किस करते हुवे – गुड नाइट मेरी गुरिया
अदिति – गुड नाइट प्यारे भाई
अभय फिर अपने कमरे मे आके बिस्तर पे लेत दिशा से बाते करने लगता है
आज के लिये इतना ही ![]()
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